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शनिवार, 20 जुलाई 2013

बैडलैम

   इंगलैंड का शाही युद्ध संग्रहालय एक ऐसी इमारत में बनाया गया जो कभी बैथलैहम रॉयल अस्पताल हुआ करती थी और जहाँ मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता था। इस अस्पताल का एक लघु नाम ’बैडलैम’ भी होता था, और धीरे धीरे यह शब्द बैडलैम एक संज्ञा बन गया किसी अव्यवस्था और पागलपन की स्थिति के लिए। यह एक विचित्र विडंबना है कि शाही संग्रहालय उस इमारत में स्थित है जो कभी ’बैडलैम’ होती थी। संग्रहालय में विचरण करते हुए आप युद्ध के समयों की वीरता और बलिदान की अद्भुत गाथाएं तो पाएंगे ही, लेकिन साथ ही आपको दिल दहला देने वाले और शरीर में ठंडी सिहरन उत्पन्न करने वाले मनुष्य के प्रति मनुष्य के अमानुषिक कृत्यों, वीभत्सता और पागलपन की कहानीयां भी मिलेंगी; ऐसे हृदयविदारक कुकृत्य जो जातिवाद और नस्लवाद को आधार बना कर करे गए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक राजा सुलेमान ने मानव जाति के बुराई करने के प्रति रुझान के विषय में लिखा: "जो बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्ट जन की उलट फेर की बातों में मगन रहते हैं" (नीतिवचन 2:14)। चाहे सुलेमान का यह कथन हमारे चारों ओर विद्यमान और व्याप्त बुराई का वर्णन हो सकता है, लेकिन मसीह यीशु के अनुयायियों के पास जीवन को संचालित करने का भिन्न और उत्साहवर्धक दृष्टिकोण उपलब्ध रहता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा: "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)। इस विजय का आधार है हमारे तथा जगत के उद्धारकर्ता मसीह यीशु के स्वभाव के अनुसार जीया गया जीवन, जिसमें बदला ना लेना (पद 17), भरसक शांति तथा मेल-मिलाप बनाए रखना (पद 18) तथा अपने बैरियों के प्रति भी नेक व्यवहार रखना (पद 20) आदि बातें प्राथमिकता पाती हैं और ये संसार पर एक भला प्रभाव डालती हैं।

   यदि हम में से प्रत्येक परमेश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित करने वाला जीवन जीने लगे तो संसार में ’बैडलैम’ बहुत ही कम रह जाएगा। - बिल क्राउडर


पाप और उत्पीड़न के अंधकार से ग्रस्त संसार को प्रेम और सहानुभूति रखने वाले मसीही विश्वासीयों की ज्योति की बहुत आवश्यकता है।

जो सीधाई के मार्ग को छोड़ देते हैं, ताकि अन्धेरे मार्ग में चलें; जो बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्ट जन की उलट फेर की बातों में मगन रहते हैं; - नीतिवचन 2:13-14

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-20
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो।
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो।
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28 
  • प्रेरितों 22


शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

भय

   यदि आप सुप्रसिद्ध अंग्रेज़ी नाट्यकार शेक्सपियर के लिखे नाटकों को पसन्द करते हैं तो आपने एक बात उनके नाटकों में देखी होगी - उनके नायकों के चरित्र में कोई ना कोई गंभीर दोष अवश्य होता है। यह बात कहानी को रोचक तो बनाती ही है, साथ ही उन चरित्रों से सीखने के लिए भी कई अवसर प्रदान करती है। कुछ यही बात परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक अब्राहम के विषय में भी सत्य है; उसके चरित्र में दोष था उसका भय।

   बाइबल में लिखी उसके जीवनी में हम पाते हैं कि दो बार वह अपने इस भय के आगे झुक गया कि शासक उसे मारकर उसकी पत्नि सारा को अपनी कर लेंगे (उत्पत्ति 12:11-20; 20:2-13)। अपनी जान को खतरा जान कर उसने फिरौन और राजा अभिमेलेक दोनों को यह कह कर धोखा दिया कि उसकी पत्नि सारा उसकी बहन है; यह एक तरह से उन अधिपतियों को छूट देना था कि वे चाहें तो सारा को अपने हरम में ले लें! अपनी जान बचाने के लिए अब्राहम ने ना केवल सारा की जान और जीवन जोखिम में डाली, वरन परमेश्वर की योजना कि सारा और अब्राहम से वह एक बड़ी जाति उत्पन्न करेगा, को भी जोखिम में डाल दिया। लेकिन परमेश्वर की योजनाएं मनुष्य की कमज़ोरियों से नहीं टलतीं; परमेश्वर ने सारा और अब्राहम दोनों ही को सुरक्षित रखा और अन्ततः उन दोनों से ही इस्त्राएली जाति का उद्गम हुआ।

   लेकिन इससे पहले कि हम अब्राहम पर ऊँगुली उठाएं और उसे कायर या दोषी कहें, भला होगा कि आज के अपने मसीही विश्वास के संदर्भ में हम अपने आप से कुछ प्रश्न कर लें: क्या अपनी नौकरी खो बैठने के डर से या अपने उच्च अधिकारियों को प्रसन्न करने के लिए हम अपनी सत्यनिष्ठा, सच्चाई और खराई के साथ कोई समझौता तो नहीं करने लगते हैं? लोगों में ’पुरानी विचारधारा’ का कहलाने और मज़ाक उड़ाए जाने के भय से क्या हम कभी अपने विश्वास और अपनी मान्यतओं को आवश्यकतानुसार एक किनारे तो नहीं कर देते? अपमानित होने या गलत समझे जाने के भय से क्या हम प्रभु यीशु में संसार के सभी लोगों के लिए पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को लोगों के सामने रखने से लज्जाते हैं और दूसरों का अनन्त भविष्य खतरे में डालते हैं?

   ये और ऐसे ही बहुत से भय हैं जिनका सामना हमें प्रतिदिन करना होता है, और जिन पर विजयी होना हमें बहुत कठिन या असंभव लगता है, तथा जिनसे समझौता करना बहुत सरल और स्वाभाविक। केवल एक ही बात है जो हमारे हर भय पर हमें विजयी करेगी - परमेश्वर की हमारे साथ सदा बनी रहने वाली उपस्थिति, सुरक्षा, सामर्थ और प्रतिज्ञाओं पर दृढ़ एवं अडिग विश्वास।

   यदि आपके भय परमेश्वर द्वारा आपके लिए निर्धारित करी गई अद्भुत योजनाओं के आड़े आ रहे हैं, तो सदा समरण रखिए कि वह आपसे कभी कुछ भी ऐसा करने को नहीं कहेगा जिसे पूरा करने की सामर्थ उसने आपको प्रदान नहीं करी है। अपनी निर्धारित हर बात को पूरा करवाने के लिए वह सदा आपके साथ है, और आपसे पूरा करवाएगा भी; चाहे इसके लिए उसे कोई चमत्कारिक हस्तक्षेप ही क्यों ना करना पड़े। - जो स्टोवैल


अपने विश्वास को अपने भय पर हावी हो जाने दें और परमेश्वर आपकी चिन्ताओं को आराधना में बदल देगा।

इब्राहीम ने कहा, मैं ने यह सोचा था, कि इस स्थान में परमेश्वर का कुछ भी भय न होगा; सो ये लोग मेरी पत्नी के कारण मेरा घात करेंगे। - उत्पत्ति 20:11

बाइबल पाठ: 20:2-13
Genesis 20:1 फिर इब्राहीम वहां से कूच कर दक्खिन देश में आकर कादेश और शूर के बीच में ठहरा, और गरार में रहने लगा।
Genesis 20:2 और इब्राहीम अपनी पत्नी सारा के विषय में कहने लगा, कि वह मेरी बहिन है: सो गरार के राजा अबीमेलेक ने दूत भेज कर सारा को बुलवा लिया।
Genesis 20:3 रात को परमेश्वर ने स्वप्न में अबीमेलेक के पास आकर कहा, सुन, जिस स्त्री को तू ने रख लिया है, उसके कारण तू मर जाएगा, क्योंकि वह सुहागिन है।
Genesis 20:4 परन्तु अबीमेलेक तो उसके पास न गया था: सो उसने कहा, हे प्रभु, क्या तू निर्दोष जाति का भी घात करेगा?
Genesis 20:5 क्या उसी ने स्वयं मुझ से नहीं कहा, कि वह मेरी बहिन है? और उस स्त्री ने भी आप कहा, कि वह मेरा भाई है: मैं ने तो अपने मन की खराई और अपने व्यवहार की सच्चाई से यह काम किया।
Genesis 20:6 परमेश्वर ने उस से स्वप्न में कहा, हां, मैं भी जानता हूं कि अपने मन की खराई से तू ने यह काम किया है और मैं ने तुझे रोक भी रखा कि तू मेरे विरुद्ध पाप न करे: इसी कारण मैं ने तुझ को उसे छूने नहीं दिया।
Genesis 20:7 सो अब उस पुरूष की पत्नी को उसे फेर दे; क्योंकि वह नबी है, और तेरे लिये प्रार्थना करेगा, और तू जीता रहेगा: पर यदि तू उसको न फेर दे तो जान रख, कि तू, और तेरे जितने लोग हैं, सब निश्चय मर जाएंगे।
Genesis 20:8 बिहान को अबीमेलेक ने तड़के उठ कर अपने सब कर्मचारियों को बुलवा कर ये सब बातें सुनाई: और वे लोग बहुत डर गए।
Genesis 20:9 तब अबीमेलेक ने इब्राहीम को बुलवा कर कहा, तू ने हम से यह क्या किया है? और मैं ने तेरा क्या बिगाड़ा था, कि तू ने मेरे और मेरे राज्य के ऊपर ऐसा बड़ा पाप डाल दिया है? तू ने मुझ से वह काम किया है जो उचित न था।
Genesis 20:10 फिर अबीमेलेक ने इब्राहीम से पूछा, तू ने क्या समझ कर ऐसा काम किया?
Genesis 20:11 इब्राहीम ने कहा, मैं ने यह सोचा था, कि इस स्थान में परमेश्वर का कुछ भी भय न होगा; सो ये लोग मेरी पत्नी के कारण मेरा घात करेंगे।
Genesis 20:12 और फिर भी सचमुच वह मेरी बहिन है, वह मेरे पिता की बेटी तो है पर मेरी माता की बेटी नहीं; फिर वह मेरी पत्नी हो गई।
Genesis 20:13 और ऐसा हुआ कि जब परमेश्वर ने मुझे अपने पिता का घर छोड़ कर निकलने की आज्ञा दी, तब मैं ने उस से कहा, इतनी कृपा तुझे मुझ पर करनी होगी: कि हम दोनों जहां जहां जाएं वहां वहां तू मेरे विषय में कहना, कि यह मेरा भाई है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25 
  • प्रेरितों 21:18-40


गुरुवार, 18 जुलाई 2013

विजयी

   भजनकार "अहंकारियों के अपमान" से बहुत आहत और परेशान हो गया था (भजन 123:4); संभवतः आप भी हो गए हों। आपके पड़ौस के, दफतर के, या कक्षा के लोग शायद आपके मसीही विश्वास का उपहास करते हों और मसीह यीशु का अनुकरण करने के आपके निर्णय को ठट्ठों में उड़ाते हों। लाठी और पत्थर तो केवल हमारे शरीरों को ही घाव देते और हमारी हड्डियाँ ही तोड़ते हैं, लेकिन शब्दों के घाव और भी गहरे तथा पीड़ादायक होते हैं, और उन उपहास करने वालों के शब्द-बाणों ने आपको गहरे और पीड़ादायक घाव दे रखे हों।

   ऐसे अहंकारियों के उपहास का प्रत्युत्तर देने के दो तरीके हो सकते हैं; या तो हम उन के समान हो जाएं और ईंट का जवाब पत्थर से देने लगें, अन्यथा उनके इस उपहास को अपने लिए आदर की बात और सही मार्ग पर होने का प्रमाण समझें! परमेश्वर का वचन भी हमें यही, दूसरा विकल्प ही सिखाता है: "फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है" (1 पतरस 4:14)। हमारे लिए थोड़े समय के लिए यह निन्दा सहना, अनन्तकाल तक क्लेष सहने से कहीं उत्तम है।

   मसीह यीशु ने अपने चेलों को सिखाया "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो" (मत्ती 5:44); इसलिए पहला विकल्प - उपहास का वैसा ही प्रत्युत्तर देना, और "ईंट का जवाब पत्थर से देना" हम मसीही विश्वासीयों के लिए नहीं है। इसके विपरीत परमेश्वर का वचन हमें निर्देश देता है कि "अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो" (रोमियों 12:14)। ऐसा करने से ही हम बुराई पर विजयी होने पाएंगे अन्यथा अपना पलटा आप लेने से तो हम बुराई को और बढ़ावा ही देंगे, उसे मिटाने नहीं पाएंगे - क्या मानव जति के इतिहास में आज तक कभी किसी युद्ध या बदले में किए गए वार ने किसी समस्या का अन्त किया है? जो भी समाधान निकले हैं वे आपसी समझौते और परस्पर एक दूसरे को आदर देने से ही संभव हुए हैं, पलटा लेने से नहीं।

   परमेश्वर हमारी हर परिस्थिति को जानता है और वह हर बात में हमारे लिए भलाई भी उत्पन्न करता है। लोगों के उपहास और निन्दा के द्वारा भी: "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे" (याकूब 1:2-4)। जब हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता को भी इन बातों का सामना करना पड़ा तो हम जो उसके अनुयायी हैं, इन सब से कैसे बच कर रह सकते हैं? लेकिन जैसे मसीह यीशु के लिए, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों के लिए भी ये दुख आदर और आशीष का कारण ही बनेंगे: "सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो" (1 पतरस 4:1-2)।

   बिना युद्ध भूमि में जाए विजय प्राप्त नहीं होती; लेकिन अपने प्रत्येक संतान से परमेश्वर का यह वायदा भी है कि हमें केवल युद्ध भूमि में जाकर खड़ा ही होना है, युद्ध परमेश्वर का है और विजयी सामर्थ भी वही देगा। इसलिए, "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)। - डेविड रोपर


जब औरों के व्यवहार से आप अपने आप को आहत और अपमानित अनुभव करें तो मसीह यीशु की ओर देखिए।

हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है। - भजन 123:4 

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-21
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो।
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो।
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22 
  • प्रेरितों 21:1-17


बुधवार, 17 जुलाई 2013

फिट

   जब मैं अपने पहनने के लिए कपड़े खरीदने जाती हूँ तो कुछ बातें हैं जो वहाँ उपस्थित लोगों को सुनने को मिलती हैं - बहुत लंबा है; बहुत छोटा है; बहुत बड़ा है; बहुत तंग है; बहुत ढीला है आदि! सही रीति से ’फिट’ आने वाले वस्त्र ढूँढ पाना लगभग असंभव लगता है।

   बहुत से लोगों के लिए यही समस्या एक ऐसा चर्च ढूँढने में भी होती है जो उनके लिए बिलकुल ’फिट’ हो! उन्हें प्रत्येक चर्च में कुछ ना कुछ ऐसा दिखता ही है जो उनके अनुसार सही नहीं है। कहीं उन्हें लगता है कि उनके गुण और उपयोगिता का सही आँकलन और आदर नहीं होता, तो कहीं उनके मस्खरेपन का गलत अर्थ लगाया जाता है, तो किसी चर्च में उन्हें औरों के आचरण, विश्वास, कार्यक्रमों या उपस्थित लोगों से परेशानी रहती है। बस उन्हें यही लगता रहता है कि वे उस चर्च में ’फिट’ नहीं हो पा रहे हैं; उन्हें उस मण्डली के लोगों में उनका सही स्थान नहीं मिल पा रहा है।

   लेकिन हम मसीही विश्वासी यह भी जानते हैं कि यह परमेश्वर कि आज्ञा है कि हम आपस में मेल-मिलाप के साथ और एक-दूसरे की सहायतार्थ चर्च में रहें। प्रेरित पौलुस ने इफिसियों की मण्डली को लिखा कि "जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो" (इफिसियों 2:21-22)। अर्थात सभी मसीही विश्वासी मिलकर परमेश्वर का निवास स्थान बनते जा रहे हैं, जैसे मूसा के समय में मिलापवाला तम्बू (निर्गमन 26) और राजा सुलेमान के दिनों में वह भव्य मन्दिर (1 राजा 6:1-14) था। जैसे उस तम्बू और फिर उस मन्दिर में सभी भिन्न वस्तुएं मिलकर एक ऐसी इकाई बन गई थीं जो एक साथ मिलकर परमेश्वर के आदर, आरधना और निवास का स्थान हो गईं, वैसे ही आज हम मसीही विश्वासीयों को भी भिन्न होते हुए भी मिलजुल कर और एक मन होकर एक ऐसा समाज होना है जहाँ संसार परमेश्वर के आदर, आराधना और निवास को देख सके।

   हमें कभी भी कोई भी चर्च हमारे अपने आँकलन के अनुसार सिद्ध नहीं मिलेगा, लेकिन मसीही स्वभाव को लेकर यह हमारा प्रयास रहना चाहिए कि बजाए दूसरों को अपने प्रति ’फिट’ करने के, हम ही पहल करके उनके साथ ’फिट’ होने का प्रयास करें और हम सभी एक मन और एक उद्देश्य के लोग हों जो परमेश्वर की महिमा के लिए एक दूसरे के साथ ’फिट’ होकर रहें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु का प्रेम भिन्नता में भी एकता और प्रेम उत्पन्न कर सकता है।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - 1 कुरिन्थियों 3:16 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19 
  • प्रेरितों 20:17-38


मंगलवार, 16 जुलाई 2013

खाली रखें

   "कितनी खराब बनावट है इसकी" मैं खिसियाकर बोली; मैं कूड़ेदान को खाली कर रही थी और सदा ही खाली करते समय कुछ कूड़ा बाहर कालीन पर गिर जाता था जो मेरी मेहनत और खिसियाहट को और बढ़ा देता था। एक दिन जब मैं फिर से कूड़ेदान को खाली करने लगी तो खाली करने के विषय में कुछ शंका उठी, क्योंकि कूड़ेदान अभी आधा ही भरा था। फिर मैंने सोचा चलो कर ही देती हूँ, और कूड़ेदान के मूँह पर पहले के समान ही प्लास्टिक की थैली लगाकर जैसे ही उसे उल्टा किया, तो आशा के विपरीत इस बार कूड़े का एक अंश भी बाहर कालीन पर नहीं गिरा। मुझे थोड़ा विस्मय हुआ, फिर थोड़ा विचार करने पर बात समझ में आ गई।

   जिस बात को लेकर मैं खिसियाती रहती थी, वह कूड़ेदान की बनावट का दोष नहीं था वरन मेरी ही गलती थी। मैं ही कूड़ेदान को खाली करने से पहले उसे ऊपर तक भर जाने देती थी, जिससे जैसे ही कूड़ेदान ज़रा सा टेढ़ा होता तो कूड़ा प्लास्टिक की थैली में जाने से पहले ही बाहर गिरने लग जाता। अब क्योंकि कूड़ा ऊपर तक नहीं भरा था इसलिए खाली करने को पलटने के समय वह बाहर नहीं गिर पाया, लगी हुई थैली में ही गिरा और कालीन गन्दा होने से बच गया तथा मैं खिसियाने से।

   यही हमारे जीवन में गलतियों और पापों के साथ भी होता है। यदि हम अपने मनों को गलतीयों और पापों से भर जाने देंगे, तो वे हमारे और हमारे आस-पास के लोगों के जीवन में कुछ ना कुछ दुष्प्रभाव अवश्य ही दिखाएंगे, क्योंकि "... बुरा मनुष्य अपने मन के बुरे भण्‍डार से बुरी बातें निकालता है; क्योंकि जो मन में भरा है वही उसके मुंह पर आता है" (लूका 6:45)। लेकिन कितना भला हो यदि हम जैसे ही हमारे अन्दर कुछ अनुचित या बुरा आए उसे परमेश्वर के सामने मान लें और उसे सौंप दें - अपने मन को ’खाली’ कर लें; क्योंकि परमेश्वर का वायदा है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। ऐसा करने से हमारे मन की गन्दगी कहीं और प्रभाव डालने से पहले ही साफ हो जाएगी और हमारे जीवन भी स्वच्छ बने रहेंगे।

   कूड़ेदान तो गन्दगी जमा रखने के लिए ही बनाए गए हैं, लेकिन एक सीमा से अधिक गन्दगी उनमें एकत्रित होगी तो इधर उधर फैलेगी भी और दुष्प्रभाव भी लाएगी। लेकिन हमारे शरीर और मन तो गन्दगी के लिए नहीं बने हैं। इसलिए भला रहेगा यदि हम अपने जीवनों को हर प्रकार की मलिनता से खाली रखें क्योंकि "क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो" (1 कुरिन्थियों 6:19-20)।


भलाई इसी में है कि हम अपने पापों को मान लें - वैसे भी परमेश्वर से तो उन्हें छिपा नहीं सकते!

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - 1 कुरिन्थियों 3:16

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:17-32
Ephesians 4:17 इसलिये मैं यह कहता हूं, और प्रभु में जताए देता हूं कि जैसे अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो।
Ephesians 4:18 क्योंकि उनकी बुद्धि अन्‍धेरी हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उन में है और उनके मन की कठोरता के कारण वे परमेश्वर के जीवन से अलग किए हुए हैं।
Ephesians 4:19 और वे सुन्न हो कर, लुचपन में लग गए हैं, कि सब प्रकार के गन्‍दे काम लालसा से किया करें।
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई।
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए।
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो।
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ।
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करने वाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17 
  • प्रेरितों 20:1-16


सोमवार, 15 जुलाई 2013

सीमा

   गोल्फ के खेल मैदान में विशेष चिन्ह लगे होते हैं जो खेल मैदान की सीमा को दिखाते हैं। यदि गोल्फ की गेंद उन चिन्हों के बाहर जाती है तो खिलाड़ी को एक दण्ड चुकाकर ही उसे वापस सीमा के अन्दर लेने और फिर खेल में बने रहने का अवसर लेना होता है।

   जीवन यात्रा में भी परमेश्वर ने हम सभी के लिए कुछ सीमाएं निर्धारित करी हैं, जिन का उल्लंघन करने पर एक कीमत चुकानी ही पड़ती है। यर्मियाह भविष्यद्वक्ता ने इस्त्राएल के लोगों को उनके द्वारा बार बार परमेश्वर की सीमाओं के उल्लंघन के बारे में चिताया। अपनी चेतावनी में उस ने उन से कहा समुद्र भी अपनी सीमा जानता है (यर्मियाह 5:22) लेकिन परमेश्वर के नाम से जाने वाले इस्त्राएली लोग हठीले और बलवाई हो गए (पद 23), उन में उस परमेश्वर का भय ही नहीं रहा जो उन्हें उपज के लिए समयानुसार बरसात का पानी देता है (पद 24)। वे छल से भर गए और कंगालों को भी उनका हक नहीं देते (पद 26-28)।

   परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में मनुष्यों के लिए कुछ नैतिक सीमाएं निर्धारित कर के दी हैं। इन सीमाओं का उद्देश्य हमें बांधे रखने और कुंठित करना नहीं है, वरन नुकसान से बचाए रखना और परमेश्वर की आशीषों से परिपूर्ण रखना है। भजनकार ने अपने अनुभव के आधार पर परमेश्वर के वचन में लिखा है: "हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपने सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है" (भजन 119:75)। परमेश्वर ने अपने वचन और नियम मूसा के द्वारा इस्त्राएल के लोगों को देने के बाद मूसा के द्वारा ही उन से कहा: "मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें" (व्यवस्थाविवरण 30:19)।

   हमारी भलाई इसी में है कि हम परमेश्वर द्वारा निर्धारित सीमाओं को जाने, उन्हें भली भांति पहचाने और उनके अन्दर ही जीवन व्यतीत करें। अन्यथा सीमा का उल्लंघन करने के बाद एक कीमत चुकाकर, कुछ कष्ट उठाकर ही जीवन दोबारा सही मार्ग पर लाया जा सकेगा। - सी० पी० हीया


परमेश्वर की आज्ञाकारिता में उठाया गया एक छोटा कदम उससे आशीष पाने का एक बड़ा माध्यम होता है।

मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा; क्योंकि उन्हीं के द्वारा तू ने मुझे जिलाया है। - भजन 119:93

बाइबल पाठ: यर्मियाह 5:20-31
Jeremiah 5:20 याकूब के घराने में यह प्रचार करो, और यहूदा में यह सुनाओ:
Jeremiah 5:21 हे मूर्ख और निर्बुद्धि लोगो, तुम जो आंखें रहते हुए नहीं देखते, जो कान रहते हुए नहीं सुनते, यह सुनो।
Jeremiah 5:22 यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम लोग मेरा भय नहीं मानते? क्या तुम मेरे सम्मुख नहीं थरथराते? मैं ने बालू को समुद्र का सिवाना ठहराकर युग युग का ऐसा बान्ध ठहराया कि वह उसे लांघ न सके; और चाहे उसकी लहरें भी उठें, तौभी वे प्रबल न हो सकें, या जब वे गरजें तौभी उसको न लांघ सकें।
Jeremiah 5:23 पर इस प्रजा का हठीला और बलवा करने वाला मन है; इन्होंने बलवा किया और दूर हो गए हैं।
Jeremiah 5:24 वे मन में इतना भी नहीं सोचते कि हमारा परमेश्वर यहोवा तो बरसात के आरम्भ और अन्त दोनों समयों का जल समय पर बरसाता है, और कटनी के नियत सप्ताहों को हमारे लिये रखता है, इसलिये हम उसका भय मानें।
Jeremiah 5:25 परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ही के कारण वे रुक गए, और तुम्हारे पापों ही के कारण तुम्हारी भलाई नहीं होती।
Jeremiah 5:26 मेरी प्रजा में दुष्ट लोग पाए जाते हैं; जैसे चिड़ीमार ताक में रहते हैं, वैसे ही वे भी घात लगाए रहते हैं। वे फन्दा लगाकर मनुष्यों को अपने वश में कर लेते हैं।
Jeremiah 5:27 जैसा पिंजड़ा चिडिय़ों से भरा हो, वैसे ही उनके घर छल से भरे रहते हैं; इसी प्रकार वे बढ़ गए और धनी हो गए हैं।
Jeremiah 5:28 वे मोटे और चिकने हो गए हैं। बुरे कामों में वे सीमा को लांघ गए हैं; वे न्याय, विशेष कर के अनाथों का न्याय नहीं चुकाते; इस से उनका काम सफल नहीं होता: वे कंगालों का हक़ भी नहीं दिलाते।
Jeremiah 5:29 इसलिये, यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं इन बातों का दण्ड न दूं? क्या मैं ऐसी जाति से पलटा न लूं?
Jeremiah 5:30 देश में ऐसा काम होता है जिस से चकित और रोमांचित होना चाहिये।
Jeremiah 5:31 भचिष्यद्वक्ता झूठमूठ भविष्यद्वाणी करते हैं; और याजक उनके सहारे से प्रभुता करते हैं; मेरी प्रजा को यह भाता भी है, परन्तु अन्त के समय तुम क्या करोगे?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 13-15 
  • प्रेरितों 19:21-41


रविवार, 14 जुलाई 2013

पूर्वधारणा

   घटना अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना प्रांत के ग्रीन्सबोरो शहर में 1 फरवरी 1960 की है, जहाँ चार काले विद्यार्थी जाकर एक ऐसे स्थान पर भोजन करने बैठ गए जो केवल गोरे लोगों के लिए निर्धारित करी हुई थी। उन चार छात्रों में से एक, फ्रांसिस मक्कैन ने देखा कि पास ही के स्थान पर बैठी एक वृद्ध श्वेत महिला उन्हें बड़े ध्यान से देख रही है। मक्कैन को निश्चित था कि उस महिला के विचार उनके और रंगभेद नीति के विरुद्ध उनके इस विरोधप्रदर्शन के प्रति अच्छे नहीं होंगे। थोड़ी ही देर में वह महिला उठी और उन की ओर बढ़ी, पास आकर उसने अपना हाथ उठाया और फिर उनकी पीठ थपथपाते हुए बोली, "लड़कों, मुझे तुम पर बहुत नाज़ है।"

   कई वर्षों के बाद एक राष्ट्रीय रेडियो प्रसारण पर इस घटना का उल्लेख करते हुए मक्कैन ने कहा कि इस घटना से मैंने सीखा कि किसी के बारे में ऐसे ही कोई पूर्वधारणा नहीं बनानी चाहिए; वरन उस व्यक्ति को अवसर देकर, उससे वार्तालाप और संपर्क करके तब ही उसके विषय में कोई आंकलन करना चाहिए।

   जैसा हम आज चर्च कि दशा को देखते हैं, प्रथम शताब्दी के चर्च में भी जाति, भाषा, संसकृति आदि के आधार पर लोगों में भेदभाव पाए जाते थे। इस प्रवृति को सही करने के लिए प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को अपनी दूसरी पत्री में लिखा, कि वे बाहरी स्वरूप और व्यवहार पर नहीं लेकिन मन की बात के अनुसार लोगों को आंकें (2 कुरिन्थियों 5:12)। पौलुस ने उन्हें समझाया, क्योंकि प्रभु यीशु मसीह ने सब के पापों के बदले में और सबके उद्धार के लिए मृत्यु सही और फिर मृत्कों में से जी उठा, इसलिए "सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे..." (2 कुरिन्थियों 5:16)।

   हम सब मसीही विश्वासियों की यही सोच होनी चाहिए कि हम किसी के प्रति कभी कोई पूर्वधारणा नहीं रखें वरन प्रत्येक जन को सही समझ-बूझ के साथ और पूरा-पूरा अवसर देकर ही आंकें क्योंकि हम सब परमेश्वर ही के बनाए हुए हैं और उसने हमें अपने ही स्वरूप में रचा है; और फिर जिन्होंने प्रभु यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर लिया है वे तो मसीह यीशु में एक नई सृष्टि हो ही गए हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो मायने रखती है वह व्यक्ति के अन्दर की बात है ना कि उसके बाहरी स्वरूप की।

सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। - 2 कुरिन्थियों 5:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:12-21
2 Corinthians 5:12 हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्हारे साम्हने नहीं करते वरन हम अपने विषय में तुम्हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन दिखवटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं।
2 Corinthians 5:13 यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं।
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए।
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा।
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे।
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12 
  • प्रेरितों 19:1-20