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शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

समर्पित

   परंपरागत सांसारिक ज्ञान प्रश्न करता है कि थोड़े से कैसे कुछ किया जा सकता है? यह आम धारणा है कि कुछ करने के लिए संसाधनों का बहुतायत में होना आवश्यक है, जैसे वित्तीय संसाधन, योग्यतापूर्ण मानव संसाधन, अच्छे और कारगर विचार आदि का अच्छी मात्रा में उपलब्ध होना। लेकिन परमेश्वर इन मानवीय विचारों की सीमाओं से बंधा हुआ नहीं है और उसे हमारे संसाधन नहीं केवल हमारा समर्पण चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल से कुछ उदाहरणों को लीजिए:

   न्यायियों की पुस्तक में उल्लेख है एक अनजान से व्यक्ति का जिसने अकेले ही इस्त्राएलियों को आताताई पलिश्तियों से छुड़ाया, इसके लिए उसने मात्र एक पशु हांकने वाले पैने का प्रयोग किया और 600 पलिश्तियों को मार डाला (न्यायियों 3:31)। जब परमेश्वर की सामर्थ साथ हो तो बड़ी उपलब्धि के लिए एक छोटी सी छड़ी भी अनेक हथियारों से बढ़कर होती है तथा संख्या का कोई महत्व नहीं होता।

   इसी प्रकार निर्गमन कि पुस्तक में मूसा के विषय में हम पाते हैं कि जब परमेश्वर ने उसे इस्त्राएलियों को मिस्त्र के दासत्व से छुड़ाने के लिए भेजना चाहा तो मूसा ने बहुत आनाकानी करी। तब परमेश्वर ने मूसा से पूछा, यह तेरे हाथ में क्या है? मूसा ने, जो इस वार्तालाप के समय तक भेड़ों का चरवाहा बन चुका था, उत्तर दिया लाठी है। और फिर परमेश्वर ने मूसा के हाथ की लाठी को आश्चर्यकर्म करने की लाठी बना दिया जिसके चमत्कारों से फिर मूसा भी मान गया, इस्त्राएलियों ने भी उसे अपना छुड़ाने वाला स्वीकार कर लिया। मूसा ने उसी लाठी के द्वारा मिस्त्र पर बड़े बड़े आश्चर्यकर्म किए, इस्त्राएलियों को दासत्व से छुड़ाया, लाल समुद्र को दो भाग किया, और कनान देश की यात्रा में इस्त्राएलियों के लिए अनेक कार्य संपन्न किए।

   शामगार के हाथों का पैना, और मूसा के हाथ की लाठी, जब परमेश्वर के लिए समर्पित हो गईं तो परमेश्वर के उद्देश्य पूरे करने के लिए सामर्थी हथियार बन गईं। यह दिखाता है कि परमेश्वर के लिए कुछ तुच्छ या गौण नहीं है; जो उसे समर्पित है वह अद्भुत करने के लिए सामर्थी है। परमेश्वर विलक्षण प्रतिभा वाले लोगों को नहीं खोज रहा है, उसे आवश्यकता है उन साधारण लोगों की जो उसपर विश्वास कर के उसकी आज्ञाकारिता में चलने और उसकी इच्छा की पूर्ति के लिए कार्य करने को तैयार हों; उनका मार्गदर्शन, उनके कार्य के लिए संसाधन और आवश्यक क्षमता उन्हें वह प्रदान करेगा।

   क्या आप परमेश्वर के हाथ में समर्पित और सामर्थी जीवन बिताना चाहेंगे? - एल्बर्ट ली


यदि उसमें परमेश्वर है तो थोड़ा भी बहुत होता है।

उसके बाद अनात का पुत्र शमगर हुआ, उसने छ: सौ पलिश्ती पुरूषों को बैल के पैने से मार डाला; इस कारण वह भी इस्राएल का छुड़ाने वाला हुआ। - न्यायियों 3:31

बाइबल पाठ: निर्गमन 4:1-9,17
Exodus 4:1 तब मूसा ने उतर दिया, कि वे मेरी प्रतीति न करेंगे और न मेरी सुनेंगे, वरन कहेंगे, कि यहोवा ने तुझ को दर्शन नहीं दिया।
Exodus 4:2 यहोवा ने उस से कहा, तेरे हाथ में वह क्या है? वह बोला, लाठी।
Exodus 4:3 उसने कहा, उसे भूमि पर डाल दे; जब उसने उसे भूमि पर डाला तब वह सर्प बन गई, और मूसा उसके साम्हने से भागा।
Exodus 4:4 तब यहोवा ने मूसा से कहा, हाथ बढ़ाकर उसकी पूंछ पकड़ ले कि वे लोग प्रतीति करें कि तुम्हारे पितरों के परमेश्वर अर्थात इब्राहीम के परमेश्वर, इसहाक के परमेश्वर, और याकूब के परमेश्वर, यहोवा ने तुझ को दर्शन दिया है।
Exodus 4:5 तब उसने हाथ बढ़ाकर उसको पकड़ा तब वह उसके हाथ में फिर लाठी बन गई।
Exodus 4:6 फिर यहोवा ने उस से यह भी कहा, कि अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप। सो उसने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; फिर जब उसे निकाला तब क्या देखा, कि उसका हाथ कोढ़ के कारण हिम के समान श्वेत हो गया है।
Exodus 4:7 तब उसने कहा, अपना हाथ छाती पर फिर रखकर ढांप। और उसने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; और जब उसने उसको छाती पर से निकाला तब क्या देखता है, कि वह फिर सारी देह के समान हो गया।
Exodus 4:8 तब यहोवा ने कहा, यदि वे तेरी बात की प्रतीति न करें, और पहिले चिन्ह को न मानें, तो दूसरे चिन्ह की प्रतीति करेंगे।
Exodus 4:9 और यदि वे इन दोनों चिन्हों की प्रतीति न करें और तेरी बात को न मानें, तब तू नील नदी से कुछ जल ले कर सूखी भूमि पर डालना; और जो जल तू नदी से निकालेगा वह सूखी भूमि पर लोहू बन जायेगा।
Exodus 4:17 और तू इस लाठी को हाथ में लिये जा, और इसी से इन चिन्हों को दिखाना।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 3-4 
  • गलतियों 6


गुरुवार, 26 सितंबर 2013

दृढ़ नींव

   वह अभी दो वर्ष की भी नहीं हुई थी कि मेरी पोती केटी ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो हर दादा के लिए गर्व की बात होगी; केटी ने कारों को उनके बनाए जाने के वर्ष और कंपनी के नाम से पहचानना आरंभ कर दिया। इस बात का आरंभ हुआ तब हुआ जब केटी के पिता ने उसके साथ अपने खिलौने वाली छोटी कारों के पुराने संग्रह के साथ खेलना आरंभ कर दिया। पिता के साथ खेलते खेलते केटी कारों को पहचानने लग गई; और जब भी उसके पिता किसी कार के लिए कहते: "केटी 1957 की चेवी कार लाओ" तो वह सैकड़ों छोटी खिलौना कारों में से वही कार निकाल लाती। एक दिन जब उसके पिता उसे एक पुस्तक में से कहानी पढ़कर सुना रहे थे तो वह उनकी गोद से उतरी और जा कर उन खिलौना कारों में से वैसी ही रोल्स रॉयस कार उठा लाई जैसी उस कहानी के साथ पुस्तक में चित्रित थी।

   विचार करने कि बात है, यदि दो वर्ष से भी कम उम्र की बच्ची इस प्रकार स्मरण करके वस्तुओं की पहचान बना सकती है तो क्या यह नहीं दिखाता कि बच्चों को बचपन से ही सही बातों की शिक्षा देना और उन बातों को उनके मनों में बैठा देना कितना महत्वपूर्ण है? ऐसा करने के लिए हम FIRM सिद्धांत का उपयोग कर सकते हैं; अंग्रेज़ी शब्द FIRM का अर्थ होता है दृढ़; इसलिए इस शब्द को उसके अर्थ के साथ या उसे acronym अर्थात परिवर्णी शब्द, अर्थात F - Familiarity - घनिष्टता, I - Interest - रुचि, R - Recognition - पहचान या मान्यता और M - Modeling - नमूना बनना, दोनों ही रूपों में लिया जा सकता है।

   यही सिद्धांत परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा ने परमेश्वर के वचन के संबंध में इस्त्राएलियों के सामने रखा था (व्यवस्थाविवरण 6)। मूसा ने उन इस्त्राएलियों को सचेत किया कि अब जब वो वाचा के कनान देश में प्रवेश करने पर हैं तो अपनी सुरक्षा और उन्नति के लिए उनका परमेश्वर के वचन में दृढ़ता से बने रहना अनिवार्य है। इसीलिए उन्हें अपने बच्चों को भी परमेश्वर के वचन में दृढ़ और स्थापित करना है जिससे वे भी उस वचन को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लें, उसकी आशीषों से परिपूर्ण रहें और फिर आगे अपनी सन्तान को भी सिखाते रहें। उन्हें अपने बच्चों को परमेश्वर के वचन से घनिष्टता के साथ परिचित रखना होगा, अवसर तथा परिस्थिति के अनुसार वचन की बातों को उन्हें बताते हुए वचन में उनकी रुचि को बनाए रखना होगा, वचन की बातों और कहानियों को बार बार दोहराते हुए उनकी पहचान बच्चों के मन में बैठानी होगी, और उस वचन को उनके सामने जी कर दिखाना होगा, उनके लिए एक सजीव नमूना बनना होगा।

   यही सिद्धांत आज भी हम मसीही विश्वासियों के लिए अपने परिवारों की सुरक्षा, उन्नति और संसार की बुराईयों से बचे रहने के लिए अनिवार्य हैं। यदि आरंभ से ही हमारे बच्चे परमेश्वर के वचन, प्रेम, मसीह यीशु में संसार के सब लोगों के लिए उपलब्ध पापों से क्षमा और उद्धार आदि के बारे में सीखते, जानते और देखते रहेंगे तो आगे चलकर वे भी परमेश्वर को भावते हुए जीवन जीने और सब का भला करने वाले बन सकेंगे। उनको यह दृढ़ नींव अभी से देना हमारा कर्तव्य है। - डेव ब्रैनन


अपने बच्चों के जीवन परमेश्वर के वचन की दृढ़ नींव पर ही खड़े करें।

और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। - व्यवस्थाविवरण 6:6-7

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 6:1-9
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो;
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे।
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ।
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है;
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 1-2 
  • गलतियों 5


बुधवार, 25 सितंबर 2013

राख के ढेर

   किसी ने मुझे से पूछा, कि जब 1 यूहन्ना 3:1-3 के अनुसार स्वर्ग पहुँचने पर तो मैं मसीह यीशु समानता में हो ही जाऊँगी तो फिर आज मुझे उसकी समानता में ढलने का प्रयास करते रहने की आवश्यकता क्यों है? हम मसीही विश्वासियों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है, विशेषकर तब जब मसीह यीशु के समान होने से कहीं अधिक सरल है जैसे हैं वैसे ही बने रहना।

   अनेक कारण हैं कि हम मसीही विश्वासियों को मसीह यीशु की समानता में अभी इस पृथ्वी पर के अपने जीवन में ही क्यों ढलना है; और उन उत्तरों में से एक, जो सूचि के शीर्ष के उत्तरों में है, वह है कि जब स्वर्ग में हम उसके सामने खड़े होंगे और उसे देखेंगे तो उसे अपने जीवनों का हिसाब भी देंगे। हमें प्रभु यीशु को यह बताना होगा कि जो जीवन हमने पृथ्वी पर जीया वह उसकी इच्छा और उसके निर्देशों के अनुसार था कि नहीं। इसी बात को प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी पत्री में बताया और कहा कि हमें दिखाना होगा कि हमने जीवन किन चीज़ों से बनाया है - सोना, चांदी, बहुमूल्य पत्थर आदि से या फिर काठ, घास, भूसे आदि से (1 कुरिन्थियों 3:12-13)। पौलुस द्वारा लिखी गई ये सभी वस्तुएं सूचक हैं कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातों की जो सब की सब ’आग’ से अर्थात बहुत बारीकी से परखी जाएंगी।

   जो कुछ भी हम प्रभु यीशु के राज्य के विस्तार के लिए करते हैं, जैसे सुसमाचार प्रचार, मण्डली के उत्थान के कार्य, उसके समान ही संसार में सदाचारिता और न्याय को बढ़ावा देना, मसीही जीवन की गवाही और आत्मिक फलों से लदे हुए जीवन जीना आदि वह सब सोना, चांदी, बहुमूल्य पत्थर आदि के समान ’आग’ में नष्ट ना होने वाली वस्तुएं हैं। इसके विपरीत, यदि हम मसीही विश्वासियों के जीवन अपने स्वार्थपूर्ति के, अपनी पार्थिव लालसाओं को बढ़ाने वाले और संसार के समान ही सांसारिक बातों और बुराईयों में संलग्न रहने वाले जीवन हैं तो वे जीवन ’आग’ से जल जाने वाली वस्तुओं अर्थात काठ, घास, भूसे आदि से बने जीवन हैं जो जब मसीह यीशु की महिमा और न्याय की ’आग’ से परखे जाएंगे तो सब जल कर राख हो जाएगा और ऐसे जीवन जीने वाले राख के ढेर पर छूछे हाथ खड़े मिलेंगे।

   मैं आपके बारे में तो नहीं जानता, परन्तु अपने बारे में यह अवश्य कह सकता हूँ कि मेरे लिए तो मसीह यीशु की समानता में ढलते जाने का जीवन जीने का प्रयास करना बहुत आवश्यक है, क्योंकि उस न्याय के समय राख के ढेर पर छूछे हाथ खड़े होने का विचार मुझे बिलकुल भी पसन्द नहीं है।

   ज़रा विचार कीजिए, आपका जीवन किन बातों से बन रहा है और आप मसीह यीशु के सामने कैसे ढेर पर खड़े होंगे? - जो स्टोवैल


अपने जीवन उन वस्तुओं से बनाएं जो परमेश्वर के न्याय के सामने खड़ी रह सकें।

तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। - 1 कुरिन्थियों 3:13

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 3:5-15
1 Corinthians 3:5 अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।
1 Corinthians 3:6 मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
1 Corinthians 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
1 Corinthians 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।
1 Corinthians 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्त्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।
1 Corinthians 3:11 क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता।
1 Corinthians 3:12 और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है।
1 Corinthians 3:13 तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है।
1 Corinthians 3:14 जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा।
1 Corinthians 3:15 और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते जलते।

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 6-8 
  • गलतियों 4

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

बद से बदतर

   फिर वही हुआ! मेरे मन में हुड़क उठी कि मुझे अपने कार्यस्थल की सफाई करनी है, और इससे पहले कि मैं अपने आप को रोक पाती, मैंने उस कार्यस्थल को पहले से भी अधिक अस्त-व्यस्त कर डाला। एक ढेर अनेक ढेरों में बदल गया, जब मैं पुस्तकों, पत्रिकाओं, अखबरों, कागज़ों आदि की छंटाई करने और उन्हें पृथक करने लगी। जैसे जैसे वह अव्यवस्था बढ़ती गई मेरी बेचैनी भी बढ़ती गई, और मैं सोचने लगी कि मैंने क्यों यह आरंभ किया, किंतु अब पीछे लौट पाना या रुक पाना असंभव था, इसलिए मैं लगी रही और कार्य पूरा होने पर मेरा कार्यस्थल पहले से बेहतर और सुनियोजित स्थिति में था, जहाँ कार्य करना मेरे लिए अब अधिक सुविधाजनक था। यदि आरंभ की बदतर स्थिति को लेकर मैं पस्त हो कर रुक जाती तो फिर उसी में ही परेशान रह होकर जाती, लेकिन करते रहने से ही स्थिति संभली भी और बेहतर भी हुई।

   जब परमेश्वर ने मूसा को नियुक्त किया कि वह यहूदियों को मिस्त्र के दास्तव से निकाल कर लाए, तो उन यहूदियों की स्थिति भी पहले तो बद से बदतर ही हुई। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह छुटकारा मिलना आवश्यक था। वे लोग अपने छुड़ाए जाने के लिए परमेश्वर की दोहाई देने, उसे पुकारने में लगे हुए थे (निर्गमन 2:23)। बड़े संकोच और हिचकिचाहट के साथ मूसा ने उन यहूदियों के लिए फिरौन के पास जाकर फरियाद करना स्वीकार किया था। किंतु फिरौन के साथ मूसा की भेंट और वार्तालाप कुछ अच्छा नहीं रहा; लोगों को छोड़ देने की बजाए, फिरौन ने उन पर अपनी असंगत मांगें और बढ़ा दीं। लोग निराश हो गए और मूसा को भी लगने लगा कि उसे यह कार्य स्वीकार ही नहीं करना चाहिए था (निर्गमन 5:21-23)। लेकिन परमेश्वर ने मूसा को हताश होकर कार्य छोड़ देने और अलग हो जाने नहीं दिया, उसे फिर से आश्वस्त किया, फिर से उभारा और मूसा फिर पूरे समर्पण और परमेश्वर की कार्यविधि और योजनाओं में विश्वास के साथ यहूदियों को दासत्व से निकालने के प्रयासों में लग गया। अन्ततः बहुत से लोगों द्वारा बहुत सी परेशानियाँ झेलने के बाद ही फिरौन ने इस्त्राएली लोगों को दास्तव की बंधुवाई से जाने देने की आज्ञा दी, और मूसा वह कर पाया जिसकी स्वयं उसे भी कोई आशा नहीं थी।

   जब कभी हम कुछ भला करने निकलें, और चाहे हम उसके बारे में बिलकुल निश्चित हों कि वह कार्य परमेश्वर कि इच्छा ही में है, तो भी हमें निराश और आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए यदि स्थिति सुधरने से पहले बिगड़ने लग जाए। स्थिति का यह रुख इस बात को प्रमाणित नहीं करता कि हम जो कर रहे हैं वह कोई गलती है; वह तो बस इतना ही दिखाता है कि हम हर कार्य परमेश्वर ही की सहायता से कर सकते हैं, अपनी क्षमता या योग्यता से नहीं। किसी बड़े कार्य को करवाने या किसी बड़ी उपलब्धी देने से पहले परमेश्वर हमें अकसर ऐसी स्थिति में आ लेने देता है जहाँ हम अपनी असमर्थता तथा अक्षमता और परमेश्वर की सामर्थ और उस पर अपनी निर्भरता के महत्व को पहचान सकें और फिर उस पर निर्भर होकर सही रीति से कार्य कर को संपन्न सकें।

   ना अपनी क्षमता, ना अपनी योग्यता और ना परिस्थितियों पर भरोसा रखें, वरन केवल परमेश्वर पर जो सब कुछ संभव कर सकता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परीक्षा की हर घड़ी में सबसे अधिक आवश्यक बात है परमेश्वर के विषय आपका दर्शन और धारणा। - जी० सी० मॉर्गन

इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा - निर्गमन 6:6

बाइबल पाठ: निर्गमन 5:1-23
Exodus 5:1 इसके पश्चात मूसा और हारून ने जा कर फिरौन से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे, कि वे जंगल में मेरे लिये पर्व्व करें।
Exodus 5:2 फिरौन ने कहा, यहोवा कौन है, कि मैं उसका वचन मानकर इस्राएलियों को जाने दूं? मैं यहोवा को नहीं जानता, और मैं इस्राएलियों को नहीं जाने दूंगा।
Exodus 5:3 उन्होंने कहा, इब्रियों के परमेश्वर ने हम से भेंट की है; सो हमें जंगल में तीन दिन के मार्ग पर जाने दे, कि अपने परमेश्वर यहोवा के लिये बलिदान करें, ऐसा न हो कि वह हम में मरी फैलाए वा तलवार चलवाए।
Exodus 5:4 मिस्र के राजा ने उन से कहा, हे मूसा, हे हारून, तुम क्यों लोगों से काम छुड़वाने चाहते हो? तुम जा कर अपने अपने बोझ को उठाओ।
Exodus 5:5 और फिरोन ने कहा, सुनो, इस देश में वे लोग बहुत हो गए हैं, फिर तुम उन को परिश्रम से विश्राम दिलाना चाहते हो!
Exodus 5:6 और फिरौन ने उसी दिन उन परिश्रम करवाने वालों को जो उन लोगों के ऊपर थे, और उनके सरदारों को यह आज्ञा दी,
Exodus 5:7 कि तुम जो अब तक ईटें बनाने के लिये लोगों को पुआल दिया करते थे सो आगे को न देना; वे आप ही जा कर अपने लिये पुआल इकट्ठा करें।
Exodus 5:8 तौभी जितनी ईंटें अब तक उन्हें बनानी पड़ती थीं उतनी ही आगे को भी उन से बनवाना, ईंटों की गिनती कुछ भी न घटाना; क्योंकि वे आलसी हैं; इस कारण यह कहकर चिल्लाते हैं, कि हम जा कर अपने परमेश्वर के लिये बलिदान करें।
Exodus 5:9 उन मनुष्यों से और भी कठिन सेवा करवाई जाए कि वे उस में परिश्रम करते रहें और झूठी बातों पर ध्यान न लगाएं।
Exodus 5:10 तब लोगों के परिश्रम कराने वालों ने और सरदारों ने बाहर जा कर उन से कहा, फिरौन इस प्रकार कहता है, कि मैं तुम्हें पुआल नहीं दूंगा।
Exodus 5:11 तुम ही जा कर जहां कहीं पुआल मिले वहां से उसको बटोर कर ले आओ; परन्तु तुम्हारा काम कुछ भी नहीं घटाया जाएगा।
Exodus 5:12 सो वे लोग सारे मिस्र देश में तित्तर-बित्तर हुए कि पुआल की सन्ती खूंटी बटोरें।
Exodus 5:13 और परिश्रम करने वाले यह कह कहकर उन से जल्दी करते रहे, कि जिस प्रकार तुम पुआल पाकर किया करते थे उसी प्रकार अपना प्रतिदिन का काम अब भी पूरा करो।
Exodus 5:14 और इस्राएलियों में से जिन सरदारों को फिरौन के परिश्रम कराने वालों ने उनका अधिकारी ठहराया था, उन्होंने मार खाई, और उन से पूछा गया, कि क्या कारण है कि तुम ने अपनी ठहराई हुई ईंटों की गिनती के अनुसार पहिले की नाईं कल और आज पूरी नहीं कराई?
Exodus 5:15 तब इस्राएलियों के सरदारों ने जाकर फिरौन की दोहाई यह कहकर दी, कि तू अपने दासों से ऐसा बर्ताव क्यों करता है?
Exodus 5:16 तेरे दासों को पुआल तो दिया ही नहीं जाता और वे हम से कहते रहते हैं, ईंटे बनाओ, ईंटें बनाओ, और तेरे दासों ने भी मार खाई हैं; परन्तु दोष तेरे ही लोगों का है।
Exodus 5:17 फिरौन ने कहा, तुम आलसी हो, आलसी; इसी कारण कहते हो कि हमे यहोवा के लिये बलिदान करने को जाने दे।
Exodus 5:18 और जब आकर अपना काम करो; और पुआल तुम को नहीं दिया जाएगा, परन्तु ईटों की गिनती पूरी करनी पड़ेगी।
Exodus 5:19 जब इस्राएलियों के सरदारों ने यह बात सुनी कि उनकी ईंटों की गिनती न घटेगी, और प्रतिदिन उतना ही काम पूरा करना पड़ेगा, तब वे जान गए कि उनके दुर्भाग्य के दिन आ गए हैं।
Exodus 5:20 जब वे फिरौन के सम्मुख से बाहर निकल आए तब मूसा और हारून, जो उन से भेंट करने के लिये खड़े थे, उन्हें मिले।
Exodus 5:21 और उन्होंने मूसा और हारून से कहा, यहोवा तुम पर दृष्टि कर के न्याय करे, क्योंकि तुम ने हम को फिरौन और उसके कर्मचारियों की दृष्टि में घृणित ठहरवाकर हमें घात करने के लिये उनके हाथ में तलवार दे दी है।
Exodus 5:22 तब मूसा ने यहोवा के पास लौट कर कहा, हे प्रभु, तू ने इस प्रजा के साथ ऐसी बुराई क्यों की? और तू ने मुझे यहां क्यों भेजा?
Exodus 5:23 जब से मैं तेरे नाम से फिरौन के पास बातें करने के लिये गया तब से उसने इस प्रजा के साथ बुरा ही व्यवहार किया है, और तू ने अपनी प्रजा का कुछ भी छुटकारा नहीं किया।

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 4-5 
  • गलतियों 3

सोमवार, 23 सितंबर 2013

न्याय

 हाल ही में मुझे ’ज्यूरी ड्यूटी’ अर्थात न्यायालय में न्यायाधीश के साथ बैठने वाली निर्णायक समिति में सम्मिलित होने के लिए बुलाया गया। इस कार्य को करने का अर्थ था अत्याधिक असुविधाएं और समय का व्यय, लेकिन यह एक गंभीर ज़िम्मेदारी भी थी, क्योंकि समिति के सद्स्यों को मुकद्दमा सुनकर व्यक्ति के दोषी अथवा निर्दोष होने का निर्णय देना होता है, और उस निर्णय के अनुसार ही न्यायाधीश आगे की कार्यवाही करता है। हमारा पहला दिन हमारी ज़िम्मेदारी और कार्यविधि आदि के बारे में हमें बताने तथा न्यायाधीश द्वारा इन बातों की महत्वपूर्णता और बारीकियों को समझाने में लग गया। हमें लोगों का न्याय करने के लिए बैठना था; वे मामले विवाद के अर्थात दीवानी या फिर अपराधों से सम्बंधित अर्थात फौजदारी के हो सकते थे। मैं अपने आप को इस बड़ी ज़िम्मेदारी के लिए सर्वथा अयोग्य पा रहा था - किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में न्याय करना, यह जानते हुए कि इस न्याय के परिणाम दीर्घकालीन और जीवन को प्रभावित करने वाले होंगे, कोई साधारण बात नहीं है। क्योंकि हम मनुष्य ही हैं, सिद्ध नहीं हैं इसलिए अपने निर्णयों में गलती कर सकते हैं।

   हमारे संसार की न्याय प्रणालियाँ, उन्हें संचालित करने वाले मनुष्यों में निहित दोष और कमियों के कारण, असिद्ध और दुर्बल हो सकती हैं, लेकिन हम सदा ही परमेश्वर पर विश्वास रख सकते हैं कि वह निष्पक्षता और बुद्धिमानी से न्याय करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा: "जाति जाति में कहो, यहोवा राजा हुआ है! और जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं; वह देश देश के लोगों का न्याय सीधाई से करेगा" (भजन 96:10)। परमेश्वर का न्याय सदा ही सिद्ध और दोषरहित होता है क्योंकि उसका चरित्र भी सिद्ध और दोषरहित है।

   यदि आज संसार की न्याय विधि या जीवन हमें पक्षपाती भी लगे, हम अपने परमेश्वर पिता पर भरोसा रख सकते हैं कि एक दिन अपनी अदालत में वह हम सब के लिए हर बात को न्यायसंगत कर देगा, और सब को सब बातों के लिए अन्ततः सिद्ध न्याय मिलेगा (2 कुरिन्थियों 5:10)। - बिल क्राउडर


एक दिन परमेश्वर हर गलत को सही कर देगा।

क्योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों पाए। - 2 कुरिन्थियों 5:10

बाइबल पाठ: भजन 96:1-13
Psalms 96:1 यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा के लिये गाओ!
Psalms 96:2 यहोवा के लिये गाओ, उसके नाम को धन्य कहो; दिन दिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो।
Psalms 96:3 अन्य जातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्यकर्मों का वर्णन करो।
Psalms 96:4 क्योंकि यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है; वह तो सब देवताओं से अधिक भय योग्य है।
Psalms 96:5 क्योंकि देश देश के सब देवता तो मूरतें ही हैं; परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है।
Psalms 96:6 उसके चारों और वैभव और ऐश्वर्य है; उसके पवित्र स्थान में सामर्थ्य और शोभा है।
Psalms 96:7 हे देश देश के कुलों, यहोवा का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ्य को मानो!
Psalms 96:8 यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ!
Psalms 96:9 पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो; हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो!
Psalms 96:10 जाति जाति में कहो, यहोवा राजा हुआ है! और जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं; वह देश देश के लोगों का न्याय सीधाई से करेगा।
Psalms 96:11 आकाश आनन्द करे, और पृथ्वी मगन हो; समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें;
Psalms 96:12 मैदान और जो कुछ उस में है, वह प्रफुल्लित हो; उसी समय वन के सारे वृक्ष जयजयकार करेंगे।
Psalms 96:13 यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह आने वाला है। वह पृथ्वी का न्याय करने को आने वाला है, वह धर्म से जगत का, और सच्चाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा।

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 1-3 
  • गलतियों 2

रविवार, 22 सितंबर 2013

जाँच

   कोलंबिया के शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्राध्यापक, डा० जैक मैज़िरो का कहना है कि व्यसकों को शिक्षा पाने में अग्रसर होने के लिए अनिवार्य है कि वे अपनी अन्तर्दृष्टि और अपने मन में बैठे हुए विचारों को चुनौती देते रहें और आलोचनात्मक रीति से उन्हें जाँचते रहें। उनका कहना है कि व्यसक तब ही सबसे अच्छी तरह सीख सकते हैं जब उनका सामना उनकी धारणाओं को चुनौती देने वाली दुविधाओं से होता रहे। न्यूयॉर्क टाइम्स की बारबरा स्ट्रौक के अनुसार, ऐसी दुविधाएं मन में बैठी हुई धारणाओं पर आलोचनात्मक चिन्तन करने में सहायता करती हैं। यह कथन उस आम धारणा का बिलकुल विपरीत है जो हमारे अन्दर साधारणतया देखी जाती है, अर्थात वह धारणा जो कहती है - "मैंने तो अपना मन बना रखा है - अब तथ्यों द्वारा मुझे भ्रमित मत करो!"

   प्रभु यीशु मसीह ने भी अपने समय के धर्म-अगुवों की धारणाओं को ऐसी ही चुनौती दी। जब उन्होंने सब्त के दिन एक मनुष्य को चंगा किया, तो यह धर्मगुरुओं के लिए उनकी दृढ़ धारणाओं को चुनौती देना था, क्योंकि वे धर्मगुरू मानते और सिखाते थे कि सब्त वाले दिन किसी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया जा सकता - किसी को चंगाई देना भी नहीं। प्रभु यीशु की इस चुनौती में जब वे किसी तर्क द्वारा प्रभु यीशु को गलत प्रमाणित नहीं कर पाए तो उन्होंने प्रभु यीशु को शान्त कर देने का प्रयास किया (यूहन्ना 5:16-18)। प्रभु यीशु ने उनसे कहा: "तुम पवित्र शास्त्र में ढूंढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उस में अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है। फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (यूहन्ना 5:39-40)।

   बाइबल शिक्षक और प्रचारक ओस्वाल्ड चैम्बर्स ने कहा, "परमेश्वर के पास तथ्यों को प्रगट करने की ऐसी विधियाँ हैं जो मनुष्यों की धारणाओं और सिद्धांतों को झकझोर कर पलट देती हैं, यदि उनके ये सिद्धांत और धारणाएं परमेश्वर के उनकी आत्मा तक पहुँचने में बाधक हैं"।

   अस्थिर कर देने वाले अनुभव, जो हमें विवश करते हैं कि हम परमेश्वर के विषय बनाई गई अपनी धारणाओं पर पुनःविचार करें, हमें परमेश्वर के बारे में और गहरी रीति से जानने और उस पर और भी अधिक विश्वास करने में सहायक हो सकते हैं - यदि हम इन सब पर सच्चे मन से विचार करने और परमेश्वर के समीप आने को तैयार हों तो। - डेविड मैक्कैसलैंड


जिस जीवन में जाँचना ना हो वह जीने के योग्य नहीं। - सुकरात

फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते। - यूहन्ना 5:40

बाइबल पाठ: यूहन्ना 5:31-47
John 5:31 यदि मैं आप ही अपनी गवाही दूं; तो मेरी गवाही सच्ची नहीं।
John 5:32 एक और है जो मेरी गवाही देता है, और मैं जानता हूँ कि मेरी जो गवाही देता है वह सच्ची है।
John 5:33 तुम ने यूहन्ना से पुछवाया और उसने सच्चाई की गवाही दी है।
John 5:34 परन्तु मैं अपने विषय में मनुष्य की गवाही नहीं चाहता; तौभी मैं ये बातें इसलिये कहता हूं, कि तुम्हें उद्धार मिले।
John 5:35 वह तो जलता और चमकता हुआ दीपक था; और तुम्हें कुछ देर तक उस की ज्योति में, मगन होना अच्छा लगा।
John 5:36 परन्तु मेरे पास जो गवाही है वह यूहन्ना की गवाही से बड़ी है: क्योंकि जो काम पिता ने मुझे पूरा करने को सौंपा है अर्थात यही काम जो मैं करता हूं, वे मेरे गवाह हैं, कि पिता ने मुझे भेजा है।
John 5:37 और पिता जिसने मुझे भेजा है, उसी ने मेरी गवाही दी है: तुम ने न कभी उसका शब्द सुना, और न उसका रूप देखा है।
John 5:38 और उसके वचन को मन में स्थिर नहीं रखते क्योंकि जिसे उसने भेजा उस की प्रतीति नहीं करते।
John 5:39 तुम पवित्र शास्त्र में ढूंढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उस में अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है।
John 5:40 फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते।
John 5:41 मैं मनुष्यों से आदर नहीं चाहता।
John 5:42 परन्तु मैं तुम्हें जानता हूं, कि तुम में परमेश्वर का प्रेम नहीं।
John 5:43 मैं अपने पिता के नाम से आया हूं, और तुम मुझे ग्रहण नहीं करते; यदि कोई और अपने ही नाम से आए, तो उसे ग्रहण कर लोगे।
John 5:44 तुम जो एक दूसरे से आदर चाहते हो और वह आदर जो अद्वैत परमेश्वर की ओर से है, नहीं चाहते, किस प्रकार विश्वास कर सकते हो?
John 5:45 यह न समझो, कि मैं पिता के साम्हने तुम पर दोष लगाऊंगा: तुम पर दोष लगाने वाला तो है, अर्थात मूसा जिस पर तुम ने भरोसा रखा है।
John 5:46 क्योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उसने मेरे विषय में लिखा है।
John 5:47 परन्तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्योंकर प्रतीति करोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 10-12 
  • गलतियों 1


शनिवार, 21 सितंबर 2013

आँसू

   क्या कभी आपका दिल टूटा है? क्यों टूटा? क्रूरता से? असफलता से? हानि से? धोखे या अविश्वासयोग्यता से? हो सकता है कि आप ने उस दुख में रोने के लिए अपने आप को किसी अंधेरे में समेट लिया हो।

   रोना कभी कभी अच्छा होता है; परिस्थिति अनुसार आँसू बहा लेना भला करता है। एक स्कौटिश प्रचारक जौर्ज मैकडौनल्ड ने कहा था, "आँसू ही रोने की आवश्यकता का एकमात्र इलाज हैं।"

   प्रभु यीशु भी अपने मित्र लाज़रस की कब्र पर आकर रोया था (यूहन्ना 11:35) क्योंकि उसका भी दिल टूटा था (पद 33) और वह आज भी हमारे दुखों में हमारे साथ सम्मिलित होता है; हमारे आँसू हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की करुणा और कोमल देखभाल को आकर्षित करते हैं, क्योंकि वह हमें तकलीफ में नहीं देखना चाहता। जब हम किसी दुख मुसीबत में होते हैं वह हमारी परेशान और निंद्राविहीन रातों को जानता है। जब हम शोकित होते हैं तो उसका भी दिल भर आता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा: "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों" (2 कुरिन्थियों 1:3-4)। वह अपने लोगों को एक दूसरे को शान्ति देने के लिए उपयोग करता है।

   लेकिन आज की सान्तवना और शान्ति सब दुखों का अन्तिम उत्तर नहीं है क्योंकि शान्ति तथा आँसुओं की आवश्यकता तो इस जीवन भर होती रहेगी। परन्तु वह दिन आ रहा है जब हमारा प्रभु यीशु हमारी "....आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)। हम उसको इतने प्रीय हैं कि वह स्वयं हमारी आँखों से आँसू पोंछ डालेगा; वह हम से व्यक्तिगत रीति से और समझ से परे गहराई से प्रेम करता है।

   स्मरण रखें प्रभु यीशु ने अपने ’पहाड़ी उपदेश’ में आश्वासन दिया था "धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे" (मत्ती 5:4)। क्या आप आज भी अपने दुखों और आँसुओं को अकेले ही झेलना चाहते हैं? स्मरण रखिए, प्रभु यीशु आपके हर दुख और हर आँसु में आपके साथ सम्मिलित होना चाहता है, अपनी शान्ति और सान्तवना आपको देना चाहता है। क्या आप प्रभु यीशु को अपने दुख और आँसू बाँटने का अवसर प्रदान करेंगे? - डेविड रोपर


परमेश्वर ना केवल हमारे दुखों के विषय चिंता करता है, वह उन्हें बाँटता भी है।

धन्य हो तुम, जो अब भूखे हो; क्योंकि तृप्‍त किए जाओगे; धन्य हो तुम, जो अब रोते हो, क्योंकि हंसोगे। - लूका 6:21

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 7-9 
  • 2 कुरिन्थियों 13