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रविवार, 4 मई 2014

महिमा के योग्य


   सितंबर 29, 1909 को एक जवान व्यक्त ने एक अजीब डब्बे से दिखने वाले यन्त्र में उड़ान भरी। वह उस यन्त्र में लगे लीवरों के प्रयोग के द्वारा ऊंचाई पाता गया और न्यू-यॉर्क बन्दरगाह के ऊपर से उड़ान भरने लगा। लोग बड़े अचरज से उसे देख रहे थे, बन्दरगाह में उसके लिए नावों से सीटीयाँ और भौंपू बजने लगे। बन्दरगाह में लगे ’स्टैच्यु ऑफ लिबर्ट” पर खड़े लोग उसके लिए उत्साह से आनन्दित होने लगे। उड़ान भरने वाला वह व्यक्ति था विल्बर राईट।

   इस से 6 वर्ष पहले विल्बर के भाई और्विल ने संसार की सबसे प्रथम उड़ान भरी थी। उन्होंने उड़ान भरने के लिए अपनी प्रेर्णा के बारे में कहा: "उड़ान भरने का विचार हमें हमारे पूर्वजों से मिला है ... जो बड़ी ईर्ष्या से पक्षियों को आकाश की ऊँचाईयों में, हर बाधा से ऊपर, तेज़ी और सरलता से आकाश के राजमार्गों पर उड़ते हुए देखते थे।" उन राईट बन्धुओं ने, अपने हवाई जहाज़ को बनाने से पहले बहुत समय उन पक्षियों तथा उनकी उड़ान का अध्ययन करने में बिताया था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की प्रथम पुस्तक उत्पत्ति के प्रथम अध्याय में हम पढ़ते हैं कि, "आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की" (उत्पत्ति 1:1), और परमेश्वर ने कहा, "...पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें" (उत्पत्ति 1:20)। हम राईट बन्धुओं की महान उपलब्धि की दाद देते हैं; लेकिन वह सृष्टिकर्ता परमेश्वर, जिसने सर्वप्रथम ऐसे अनेक जीव बनाए जो स्वतः ही उड़ने की क्षमता रखते हैं, वह सर्वोच्च महिमा के योग्य है - अपनी अद्भुत सृष्टि और अपनी प्रत्येक विलक्षण कृति के लिए। - डेनिस फिशर


सृष्टि की रचना एक महान रचनाकार की ओर इशारा करती है।

इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:19-20

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-23
Genesis 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। 
Genesis 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। 
Genesis 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। 
Genesis 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। 
Genesis 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया। 
Genesis 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। 
Genesis 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया। 
Genesis 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:12 तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:13 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया। 
Genesis 1:14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों। 
Genesis 1:15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया। 
Genesis 1:17 परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें, 
Genesis 1:18 तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:19 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया। 
Genesis 1:20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें। 
Genesis 1:21 इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:22 और परमेश्वर ने यह कह के उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। 
Genesis 1:23 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 1-4


शनिवार, 3 मई 2014

चिंता


   कुछ वर्ष पहले की बात है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के हमारे सामूहिक अध्ययन के समय हमारे दल के अगुवे ने हम सब के सामने चुनौती रखी कि हम बाइबल से एक पूरा अध्याय कण्ठस्त करें और फिर सब लोगों के सामने खड़े होकर उसे दोहराएं। तुरंत ही अपने अन्दर ही अन्दर मैं इसका विरोध करने लगी और इसे लेकर दुखी होने लगी - एक पूरा अध्याय; कण्ठस्त; सबके सामने दोहराना - मुझे से कभी नहीं होगा क्योंकि कुछ भी कण्ठस्त कर लेना कभी भी मेरी क्षमताओं में सम्मिलित नहीं रहा था। मैं सोच सोच कर ही घबरा रही थी कि मेरी बारी आएगी, मैं हिचकिचाते हुए बोलना आरंभ करूंगी और फिर कहीं अटक कर रुक जाऊंगी, सभी लोग मेरी ओर देख रहे होंगे और मैं खामोश खड़ी कसमसा रही होऊंगी, अगले शब्द स्मरण करने और अपनी शर्मिन्दगी छुपाने के असफल प्रयास कर रही होऊंगी।

   इसके कुछ दिन के पश्चात, बड़े अनमने भाव से कोई अध्याय कण्ठस्त करने के लिए मैं अपनी बाइबल के पन्ने पलटने लगी; लेकिन स्मरण करने के लिए मुझे कुछ भी सही सूझ नहीं पड़ रहा था। फिर मैं फिलिप्पियों 4 अध्याय पर आकर रुक गई। उस अध्याय का एक पद मेरे सामने था, और मैंने उसे मन और मुँह की शान्ति के साथ ध्यान से पढ़ा, "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं" (फिलिप्पियों 4:6)। बस मुझे मिल गया था कि मुझे कौन सा अध्याय स्मरण करना है, और यह भी कि मैं कैसे अपनी ज़िम्मेदारी से संबंधित हर चिंता से बच कर निश्चिंत आगे बढ़ सकती हूँ, इस कार्य को भली भांति कर सकती हूँ।

   परमेश्वर की कद्पि यह इच्छा नहीं है कि हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहें, क्योंकि चिंता हमारे प्रार्थना के जीवन को पंगु कर देती है। प्रेरित पौलुस ने हमें लिखा है कि चिंता करने और घबराने की बजाए हमें परमेश्वर से सहायता मांगनी चाहिए। जब हम पौलुस की कही इस बात को अपनी चिंताओं पर जयवन्त होने का अपना जीवन मार्ग बना लेंगे, तब परमेश्वर की शांति हमारे मन-मस्तिष्क को स्थिर और हमें शांति में बनाए रखेगी (पद 7)।

   किसी ने कटाक्ष करते हुए कहा है, "जब हम आसानी से चिंता कर सकते हैं, तो फिर प्रार्थना में ज़ोर क्यों लगाएं?" कहने का तात्पर्य स्पष्ट है, चिंता करने से कुछ नहीं मिलता, लेकिन प्रार्थना हमें उसके संपर्क में ले आती है जो सृष्टि को चलाता है और हमारी प्रत्येक चिंता का हल दे सकता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि हमारे हाथ प्रार्थना में परमेश्वर के आगे जुड़े हुए हैं तो उन्हें चिंता में मरोड़ना असंभव है।

अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन 55:22

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:1-9
Philippians 4:1 इसलिये हे मेरे प्रिय भाइयों, जिन में मेरा जी लगा रहता है जो मेरे आनन्द और मुकुट हो, हे प्रिय भाइयो, प्रभु में इसी प्रकार स्थिर रहो।
Philippians 4:2 मैं यूओदिया को भी समझाता हूं, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें। 
Philippians 4:3 और हे सच्चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर, क्योंकि उन्होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकिर्मयों समेत परिश्रम किया, जिन के नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं। 
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 33-36


शुक्रवार, 2 मई 2014

आदी


   मेरे बचपन में मैं प्रत्येक ग्रीष्म काल में अपने दादा-दादी के घर जाकर एक या दो सप्ताह के लिए रहा करती थी। उनका घर एक ऐसे मार्ग के किनारे बना था जिसके अन्त पर कुछ रेल पटरियाँ थीं। मेरे वहाँ पहुँचने की आरंभिक कुछ रातों को मैं कई बार हड़बड़ा कर उठ जाती जब कोई माल गाड़ी खड़खड़ाती हुई वहाँ से निकलती या फिर किसी अन्य ट्रेन की सीटी बजती। लेकिन मेरे वहाँ रहने के कुछ ही दिनों में मैं उन आवाज़ों की आदी हो जाती और फिर बिना उठे आराम की नींद सोती रहती थी। मेरा उन आवा़ज़ों के प्रति आदी होना मुझे उनको नज़रन्दाज़ करने वाला बना देता था।

   जीवन में ऐसी ही अनेक बातें होती हैं हम जिनके आदी होकर उन्हें फिर नज़रन्दाज़ करना आरंभ कर देते हैं। लेकिन कुछ ऐसी भी बातें होती हैं हम जिनके आदी तो रहना चाहते हैं - अर्थात चाहते हैं कि वे हमारे साथ होती रहें, परन्तु उन्हें नज़रन्दाज़ करना नहीं चाहते। जैसे, मुझे अच्छा लगता है जब मैं अपने कार्य में व्यस्त होती हूँ और मेरे पति मेरे लिए कॉफी बनाकर ले आते हैं, मेरे सामने रख देते हैं; मुझे अच्छा लगता है जब किसी मित्र का अनायास ही फोन आ जाता है और हम आपस में एक दूसरे के समाचार और अन्य रोचक बातों की चर्चा करने पाते हैं। ये और ऐसी अन्य कुछ बातें हैं मैं जिनकी आदी तो रहना चाहती हूँ परन्तु उन्हें अपने जीवन में कभी नज़रन्दाज़ करना नहीं चाहती।

   मसीही विश्वास के जीवन में भी कुछ ऐसा ही होता है - परमेश्वर का पवित्र आत्मा, जो प्रत्येक मसीही विश्वासी में निवास करता है, समय समय पर हमें चिताता रहता है, सिखाता रहता है। कभी कभी हम पवित्र आत्मा की ’आवाज़’ को सुनते रहने के इतने आदी हो जाते हैं कि उसे नज़रन्दाज़ करने लगते हैं। हो सकता है कि पवित्र आत्मा हमें इशारे कर रहा हो कि हमें किसी से हमारे द्वारा कही या करी गई किसी बात के लिए क्षमा मांग लेनी चाहिए; या वह हमे प्रेरित कर रहा हो कि हम किसी संकटग्रस्त जन के लिए प्रार्थना करें; या फिर वह हमें कायल कर सकता है कि हम अपने किसी प्रीय जन के साथ प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को बाँटें। ये पवित्र आत्मा के कार्यों के कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो हमारे जीवन में सदा ही होते तो रहने चाहिए किंतु हमें सचेत रहना चाहिए कि हम उन्हें कभी नज़रन्दाज़ नहीं करने पाएं।

   परमेश्वर का पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी के अन्दर इसलिए निवास करता है कि वह उन्हें सिखाए, कायल करे, सांत्वना दे और सत्य के मार्ग पर चलने में उनकी अगुवाई करे (यूहन्ना 14:16-17, 26; 16:7-8, 13)। यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो ध्यान कीजिए कि कहीं आप पवित्र आत्मा की ’आवाज़’ के आदी होकर उसे नज़रन्दाज़ तो नहीं करने लगे हैं? यदि आप मसीही विश्वासी नहीं हैं तो यह पवित्र आत्मा की ओर से आपके लिए सन्देश हो सकता है कि आप प्रभु यीशु में विश्वास और पापों की क्षमा को स्वीकार कर के अपने अनन्त काल को सुरक्षित कर लें। - सिंडी हैस कैसपर


सही चुनाव करें; पवित्र आत्मा की आवाज़ को चुनें।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। - यूहन्ना 14:26

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:7-15
John 16:7 तौभी मैं तुम से सच कहता हूं, कि मेरा जाना तुम्हारे लिये अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा, परन्तु यदि मैं जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। 
John 16:8 और वह आकर संसार को पाप और धामिर्कता और न्याय के विषय में निरूत्तर करेगा। 
John 16:9 पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्वास नहीं करते। 
John 16:10 और धामिर्कता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं, 
John 16:11 और तुम मुझे फिर न देखोगे: न्याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है। 
John 16:12 मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। 
John 16:13 परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। 
John 16:14 वह मेरी महिमा करेगा, क्योंकि वह मेरी बातों में से ले कर तुम्हें बताएगा। 
John 16:15 जो कुछ पिता का है, वह सब मेरा है; इसलिये मैं ने कहा, कि वह मेरी बातों में से ले कर तुम्हें बताएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 30-32


गुरुवार, 1 मई 2014

कुंजियाँ


   "वह बनिए जो परमेश्वर की आपके लिए इच्छा है और आप संसार में हलचल मचा देंगे" - सीयना की सन्त कैथरीन द्वारा कहे इन शब्दों के साथ लण्डन के बिशप ने राजकुमार विलियम और केट मिडलटन को उनके विवाह का सन्देश देना आरंभ किया। टेलिविज़न पर इस विवाह को देखने वाले दर्शक बिश्प द्वारा उन दोनों के चुनाव को लेकर बहुत प्रभावित हुए, कि उन दोनों ने "उस उदार परमेश्वर के समक्ष अपना विवाह संपन्न कराने का निर्णय लिया जिसने जगत से ऐसा प्रेम किया कि अपने आप को प्रभु यीशु के रूप में जगत के लिए दे दिया।" इसके बाद बिशप ने इस नव दंपति को परस्पर एक ऐसा प्रेम ढूंढ़ते रहने की सलाह दी जिसका केंद्र बिंदु स्वार्थ से परे है।

   इस सन्देश के बाद वधु के भाई ने परमेश्वर के वचन बाइबल में से रोमियों 12:1-2 पढ़ा: "इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो"।

   यह राजसी विवाह हम - विवाहित अथवा अविवाहित, सब को दो महान सत्य स्मरण दिलाता है: 
   1. प्रभु यीशु के बलिदान में परमेश्वर का जगत के प्रति महान प्रेम का प्रगटिकरण।
   2. परमेश्वर की इच्छा कि हम जीवन का सबसे महान आनन्द और अनन्त काल के लिए लाभदायक जीवन परिवर्तन प्रभु यीशु मसीह में होकर परमेश्वर के साथ अपने सही संबंध बनाने के द्वारा प्राप्त करें।

   यही दो सत्य वह कुंजियाँ हैं जो हमें परमेश्वर कि इच्छा के अनुसार व्यक्ति बनाने का मार्ग खोलती हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर को संपूर्ण रीति से संपर्ण करने के द्वारा ही हम परमेश्वर कि इच्छा के अनुसार व्यक्ति बनने पाते हैं।

हे यहोवा के प्रेमियों, बुराई से घृणा करो; वह अपने भक्तों के प्राणों की रक्षा करता, और उन्हें दुष्टों के हाथ से बचाता है। - भजन 97:10

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-18
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। 
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। 
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। 
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो। 
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो। 
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। 
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। 
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 26-29


बुधवार, 30 अप्रैल 2014

एकमात्र मार्ग


   बौद्धिक क्षमता के सबसे अधिक खराब मेल के बारे में विचार कीजिए। उदाहरण के लिए सुप्रसिद्ध भौतिक शास्त्री एल्बर्ट आईंस्टाईन को पहली कक्षा के छात्र के साथ सापेक्षता के सिद्धांत (Theory of Relativity) पर वाद-विवाद के लिए कहा जाए; या जौर्ज वाशिंगटन कार्वर के साथ छोटी कक्षा के एक छात्र को बायो-कैमिकल इंजीनियरिंग के बारे में चर्चा करने के लिए बैठा दिया जाए - यह सब कितना मूर्खतापूर्ण तथा बेनतीजा होगा। दोनों ही उदाहरणों में एक तो अपने क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञ है तो दूसरा उस विषय के बारे में यदि कुछ जानता भी है तो उसकी जानकारी ना के बराबर ही है।

   इसी सिलसिले में एक और उदाहरण के बारे में सोचिए - मनुष्य और परमेश्वर के बीच मनुष्य जाति के लिए परमेश्वर की योजना पर बहस। क्या इससे बढ़कर अनुप्युक्त मेल कोई हो सकता है? लेकिन फिर भी हम प्रतिदिन अनेकों लोगों को परमेश्वर और उसकी योजनाओं पर तीखी आलोचना तथा टीका-टिपण्णी करते सुनते हैं, वे इस प्रयास में रहते हैं कि परमेश्वर की अनुपम योजना को व्यर्थ तथा अपनी विचारधारा को परमेश्वर की योजना से बेहतर और उपयुक्त दिखा सकें।

   मुझे एक कैदी द्वारा जेल से लिखा गया एक पत्र मिला, जिसमें उसने लिखा: "मैं अपने जीवन में एक ऐसे स्थान पर पहुँच गया जहाँ मुझे अन्ततः यह स्वीकार करना पड़ा कि परमेश्वर सत्य है और वही प्रत्येक वस्तु का सृष्टिकर्ता है। मैं अपना मार्ग चलते चलते, अपनी रीति से हर कार्य करते करते थक गया। फिर जब मैंने अपने आप को नम्र और दीन करके परमेश्वर के वचन को मानना आरंभ कर दिया, तो मुझे सच्चा मार्ग भी मिल गया।"

   कितना मूर्खता पूर्ण है पाप से मुक्ति तथा उद्धार के लिए परमेश्वर की योजना को तिरिस्कार कर के अपने ही तौर-तरीकों पर केवल इसलिए ही चलते रहना क्योंकि हम समझते हैं कि हम परमेश्वर से बेहतर जानते हैं। केवल प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने, उससे अपने पापों की क्षमा माँगने और उसको किए गए जीवन के संपूर्ण समर्पण द्वारा ही हमारा मेल-मिलाप परमेश्वर से हो सकता है (यूहन्ना 14:6; रोमियों 3:23; 6:23)। क्या आप अभी भी अपने ही मार्ग पर चलते हुए अपनी ही रीति से अपना अनन्त संवारने का प्रयास कर रहे हैं, इस विचार से कि आप सर्वोत्तम जानते हैं? यदि हाँ तो बाइबल से नीतिवचन 16:25 पढ़िए और उस पर विचार कीजिए।

   आज और अभी अपना मार्ग छोड़कर परमेश्वर का मार्ग अपना लीजिए, सुरक्षा और सहायता उसी में है। - डेव ब्रैनन


यीशु परमेश्वर के पास जाने के लिए अनेक मार्गों में से एक नहीं है, और ना ही यीशु अनेक मार्गों में से सर्वोत्त्म मार्ग है; केवल वही परमेश्वर तक जाने वाला एकमात्र मार्ग है। - टोज़र

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: नीतिवचन 16:20-25
Proverbs 16:20 जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है। 
Proverbs 16:21 जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है। 
Proverbs 16:22 जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। 
Proverbs 16:23 बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। 
Proverbs 16:24 मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। 
Proverbs 16:25 ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-25


मंगलवार, 29 अप्रैल 2014

सही मार्ग


   कभी कभी जीवन का मार्ग बहुत लंबा और कठिन प्रतीत होता है; मुझे लगता है कि इस मार्ग पर अब और चल पाने की क्षमता और इच्छा मुझ में नहीं है। तब मुझे स्मरण आता है कि इससे पहले कि मुझे इस मार्ग पर चलने के लिए बुलाया जाता, परमेश्वर उसके बारे में सब कुछ जानता था। उसे पता था कि उस मार्ग पर चलते हुए मुझे कब कौन सी कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा, मुझे किस कष्ट से होकर निकलना पड़ेगा, मुझे ऐसा क्या क्या सहना पड़ेगा जिसके बारे में किसी और से बातचीत भी नहीं कर सकता। उसे सब पता था और वह उस मार्ग पर मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ता वरन हर कदम पर मेरे साथ साथ ही चलता है।

   हो सकता है कि आप आज किसी दुखः या उदासी से अभिभूत हैं। हो सकता है कि किसी कठिन सेवकाई के स्थान के बोझ ने आप को दबा रखा है; या फिर विवाहित जीवन की कठिनाईयाँ आप को परेशान कर रही हैं; या फिर किसी संघर्षरत सन्तान का दुखः आपको झेलना पड़ रहा है; या वृद्ध माता-पिता की देख-रेख आपको चिन्तित कर रही है; या जीवन की कोई और समस्या अथवा दुखः आपको घेरे हुए है। आप सोच सकते हैं, "अवश्य ही परमेश्वर ने मेरे लिए ऐसा कठिन और दुखदाई मार्ग तो नहीं ठहराया होगा; ज़रूर कोई अन्य सरल मार्ग मेरे लिए होगा।"

   लेकिन हम में से कौन जानता है कि जिस अन्य मार्ग की हम कल्पना कर रहे हैं वह वास्तव में हमारे लिए सरल होगा भी या नहीं; या फिर उस पर चलते हुए क्या हम परमेश्वर की बेहतर और भली सन्तान बनने पाएंगे कि नहीं? हमारा स्वर्गीय पिता हमारे लिए सर्वोत्तम को जानता है, सब मार्गों में से जो सबसे अच्छा है वह उसी को हमारे लिए निर्धारित करता है और हमें उस पर सुरक्षित ले कर साथ साथ चलता है (भजन 142:3)।

   परमेश्वर की गति और मेरी गति एक समान नहीं है; मेरे और परमेश्वर के विचारों में ज़मीन-आसमान का अन्तर है (यशायाह 55:9)। आज हम नम्रता पूर्वक उसके बताए मार्ग पर चल सकते हैं, संपूर्ण विश्वास के साथ कि अपनी असीम बुद्धिमता और प्रेम में होकर जो उसने मेरे लिए निर्धारित किया है वही सर्वोत्तम है। परमेश्वर हमारी ज्ञान और समझ की सीमाओं से कहीं अधिक बुद्धिमान है, हमारे भविष्य को वह पहले ही से जानता है, और उसका हमारे प्रति प्रेम अवर्णनीय है। जो हमारे बारे में सब कुछ हम से कहीं अधिक बेहतर रीति से जानता है, वह हमें सदा सही मार्ग पर ही लेकर चलेगा और हमारे साथ साथ उसी मार्ग पर चलेगा। पूरे विश्वास के साथ अपने आप को उसके हाथों में छोड़ दीजिए। - डेविड रोपर


परमेश्वर आपको कभी किसी गलत मार्ग पर नहीं चलाएगा।

क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है। - यशायाह 55:9

बाइबल पाठ: भजन 142:1-7
Psalms 142:1 मैं यहोवा की दोहाई देता, मैं यहोवा से गिड़गिड़ाता हूं, 
Psalms 142:2 मैं अपने शोक की बातें उस से खोल कर कहता, मैं अपना संकट उस के आगे प्रगट करता हूं। 
Psalms 142:3 जब मेरी आत्मा मेरे भीतर से व्याकुल हो रही थी, तब तू मेरी दशा को जानता था! जिस रास्ते से मैं जाने वाला था, उसी में उन्होंने मेरे लिये फन्दा लगाया। 
Psalms 142:4 मैं ने दाहिनी ओर देखा, परन्तु कोई मुझे नहीं देखता है। मेरे लिये शरण कहीं नहीं रही, न मुझ को कोई पूछता है।
Psalms 142:5 हे यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी है; मैं ने कहा, तू मेरा शरणस्थान है, मेरे जीते जी तू मेरा भाग है। 
Psalms 142:6 मेरी चिल्लाहट को ध्यान देकर सुन, क्योंकि मेरी बड़ी दुर्दशा हो गई है! जो मेरे पीछे पड़े हैं, उन से मुझे बचा ले; क्योंकि वे मुझ से अधिक सामर्थी हैं। 
Psalms 142:7 मुझ को बन्दीगृह से निकाल कि मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूं! धर्मी लोग मेरे चारों ओर आएंगे; क्योंकि तू मेरा उपकार करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 20-22


सोमवार, 28 अप्रैल 2014

नफरत


   जौर्ज वॉशिंगटन कार्वर (1864-1943) को अपने जीवन में बहुत भारी जातीय तथा रंगभेद का सामना करना पड़ा, लेकिन हर विरोध के बावजूद उन्होंने अमेरिका के सुप्रसिद्ध शिक्षाविशारदों में अपना स्थान बना लिया। अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए बदला लेने की कटु भावना का विरोध करते हुए उन्होंने बड़ी बुद्धिमानी से लिखा, "भीतरी नफरत, अन्ततः नफरत करने वाले को ही नाश कर देती है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल की ऐस्तेर नामक पुस्तक में हम देखते हैं कि नफरत कितनी आत्म-घाती हो सकती है। मोर्दकै नामक एक यहूदी फारस के राजा के एक उच्च स्तरीय और अभिमानी दरबारी हामान के आगे झुक कर प्रणाम नहीं करता था, जिससे हामान के अहम को बहुत ठेस पहुँची। हामान ने क्रोधावेश में होकर सभी यहूदियों के नाश का षड़यंत्र बनाया और राजा के कान यहूदियों के विरुद्ध भरने लगा, जिससे राजा को यह विश्वास हो जाए कि यहूदी लोग उसके साम्राज्य की स्थिरता के लिए खतरा हैं। जब राजा हामान की बातों में पूरी रीति से आ गया तब हामान ने राजा से यह राजाज्ञा निकलवाई कि एक निर्धारित दिन पूरे राज्य में सभी लोगों को यहूदियों को जान से मारने की स्वतंत्रता होगी। राजाज्ञा तो निकल गई और सारे देश में इसका ऐलान भी हो गया, लेकिन उसके पूरा होने से पहले रानी ऐस्तेर ने राजा के सामने हामान के सारे दुष्ट षड़यंत्र का पर्दाफश कर दिया, और राजा ने क्रोधित होकर हामान को ही उस फांसी के फंदे पर लटकवा दिया जो उसने मोर्दकै के लिए तैयार करवाया था।

   कार्वर का कथन और हामान का कृत्य हमें स्मरण दिलाता है कि नफरत आत्म-घाती होती है। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में कहा है कि बुराई के बदले में भलाई करें और बुराई को भलाई से जीत लें। अपना पलटा आप ना लें, वरन सब के साथ शांति से रहते हुए जो सही और भला है वही करते रहें। प्रभु यीशु मसीह ने भी अपने जीवन से यही कर के दिखाया और हमारे लिए अनुसरण करने का उदाहरण छोड़ा। हम मसीही विश्वासियों को इस उदाहरण को अपने जीवन में लागू कर के दिखाना है। - डेनिस फिशर


नफरत आत्म-घाती होने और प्रेम मसीह के निर्देशों की पूर्ति है।

सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्‍पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्‍टा करो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:15

बाइबल पाठ: ऐस्तेर 7:1-10; रोमियों 12:17-21
Esther 7:1 सो राजा और हामान एस्तेर रानी की जेवनार में आगए। 
Esther 7:2 और राजा ने दूसरे दिन दाखमधु पीते-पीते एस्तेर से फिर पूछा, हे एस्तेर रानी! तेरा क्या निवेदन है? वह पूरा किया जाएगा। और तू क्या मांगती है? मांग, और आधा राज्य तक तुझे दिया जाएगा। 
Esther 7:3 एस्तेर रानी ने उत्तर दिया, हे राजा! यदि तू मुझ पर प्रसन्न है, और राजा को यह स्वीकार हो, तो मेरे निवेदन से मुझे, और मेरे मांगने से मेरे लोगों को प्राणदान मिले। 
Esther 7:4 क्योंकि मैं और मेरी जाति के लोग बेच डाले गए हैं, और हम सब विध्वंसघात और नाश किए जाने वाले हैं। यदि हम केवल दास-दासी हो जाने के लिये बेच डाले जाते, तो मैं चुप रहती; चाहे उस दशा में भी वह विरोधी राजा की हानि भर न सकता। 
Esther 7:5 तब राजा क्षयर्ष ने एस्तेर रानी से पूछा, वह कौन है? और कहां है जिसने ऐसा करने की मनसा की है? 
Esther 7:6 एस्तेर ने उत्तर दिया है कि वह विरोधी और शत्रु यही दुष्ट हामान है। तब हामान राजा-रानी के साम्हने भयभीत हो गया। 
Esther 7:7 राजा तो जलजलाहट में आ, मधु पीने से उठ कर, राजभवन की बारी में निकल गया; और हामान यह देखकर कि राजा ने मेरी हानि ठानी होगी, एस्तेर रानी से प्राणदान मांगने को खड़ा हुआ। 
Esther 7:8 जब राजा राजभवन की बारी से दाखमधु पीने के स्थान में लौट आया तब क्या देखा, कि हामान उसी चौकी पर जिस पर एस्तेर बैठी है पड़ा है; और राजा ने कहा, क्या यह घर ही में मेरे साम्हने ही रानी से बरबस करना चाहता है? राजा के मुंह से यह वचन निकला ही था, कि सेवकों ने हामान का मुंह ढांप दिया। 
Esther 7:9 तब राजा के साम्हने उपस्थित रहने वाले खोजों में से हर्वोना नाम एक ने राजा से कहा, हामान को यहां पचास हाथ ऊंचा फांसी का एक खम्भा खड़ा है, जो उसने मोर्दकै के लिये बनवाया है, जिसने राजा के हित की बात कही थी। राजा ने कहा, उसको उसी पर लटका दो। 
Esther 7:10 तब हामान उसी खम्भे पर जो उसने मोर्दकै के लिये तैयार कराया था, लटका दिया गया। इस पर राजा की जलजलाहट ठंडी हो गई। 

Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। 
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 17-19