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मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

आशा


   आदम और हव्वा के पास सब कुछ था, साथ ही उनके पास यह सोचने का कोई कारण नहीं था कि उनका जीवन जैसे परमेश्वर द्वारा उपलब्ध करवाई गई हर उत्तम बात के साथ आरंभ हुआ था वैसे ही आगे बढ़ता नहीं रह पाएगा, किसी समय उनके उस आनन्द और आराम में कोई बाधा आ जाएगी; इस लिए उन्हें किसी बात की आशा रखने की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन उन्होंने अपनी इस उत्तम स्थिति और आशीष को उस एक बात के लिए जोखिम में डाल दिया जो शैतान ने उनसे कही, कि परमेश्वर ने सब कुछ तो दिया लेकिन भले और बुरे के ज्ञान से वंचित रखा है (उत्पत्ति 2:17, 3:5)। जब शैतान ने उनके समक्ष इस बात को पा लेने का प्रस्ताव रखा तो हव्वा ने उसकी बातों में आकर उस प्रस्ताव को मान लिया, और आदम ने भी हव्वा का अनुसरण किया (उत्पत्ति 3:6)। उन्हें वह तो मिल गया जिसकी उन्होंने लालसा करी - ज्ञान, लेकिन उन्होंने वह गवाँ दिया जो उनके पास था - निर्दोष, निष्पाप जीवन और परमेश्वर के साथ संगति। इस निर्दोष और निष्पाप जीवन की हानि के साथ ही आशा की आवश्यकता ने जन्म लिया - आशा कि उनके पाप का दोष कभी हट सकेगा, वे कभी शर्मिंदगी से निकल सकेंगे और पुनः निर्दोष और निष्पाप होकर परमेश्वर के साथ संगति कर सकेंगे।

   इसी आशा की पूर्ति के लिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु के रूप में अपने आप को संसार के सामने प्रस्तुत किया। प्रभु यीशु ही मानव जाति के परमेश्वर से पुनः मेल हो जाने की एकमात्र आशा है; वही सभी जातियों का मनभावना है (हग्गै 2:7); उसी के द्वारा हम अन्धकार से ज्योति में आते हैं और पापों से छुटकारा पाते हैं (कुलुस्सियों 1:13-14); "वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं" (कुलुस्सियों 1:15-17)। प्रभु यीशु मसीह ही सारे संसार के लिए पापों के दोष से मुक्त हो कर अनन्त काल की महिमा की आशा है (कुलुस्सियों 1:27)।

   प्रभु यीशु के रूप में हमें दिए गए इस उत्तम आशा के वरदान के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें और उसकी इस भेंट को सहर्ष स्वीकार करें। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


आशा प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए निश्चितता है क्योंकि वह मसीह यीशु पर आधारित है।

जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है। - कुलुस्सियों 1:27

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:3-17
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो। 
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो। 
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। 
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है। 
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। 
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है। 
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। 
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। 
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गलतियों 4-6


सोमवार, 1 दिसंबर 2014

परवाह


   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने एक प्रश्न उठाया, "जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?" (भजन 8:3-4)। बाइबल का पुराना नियम खण्ड इस प्रश्न के भिन्न रूपों से जूझता रहा है। मिस्त्र के दासत्व में कराह रहे इसत्राएली राष्ट्र को मूसा द्वारा दीए गए इस आश्वासन पर विश्वास करना असंभव लगा कि परमेश्वर को उनकी परवाह है और वह उन्हें शीघ्र ही दासत्व से निकालकर एक नए स्थान पर बसा देगा। स्भोपदेशक नामक बाइबल की पुस्तक का लेखक इसी प्रश्न को व्यंग के साथ प्रस्तुत करता है जब वह इस पुस्तक में बारंबर कहता है, "सब व्यर्थ है", अर्थात, क्या इस संसार में कुछ भी ऐसा है जो अर्थपूर्ण है?

   मैं भी इसी सन्देह के साथ जूझ रहा था जब मुझे निमंत्रण मिला कि मैं एक ऐसी सभा को संबोधित करूँ जिसके आयोजन की विषय-वस्तु थी बाइबल का यह पद: "देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है" (यशायाह 49:16)।

   बाइबल के जिस भाग से यह पद लिया गया था वह परमेश्वर का अपने लोगों को संबोधन था जब वे अपने इतिहास में एक निम्न बिंदु से होकर निकल रहे थे क्योंकि परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ता यशायाह द्वारा उन्हें बताया था कि वे बन्दी बना कर बाबुल ले जाए जाएंगे। अपने विषय यह भविष्यवाणी सुनकर इस्त्राएल के लोग कहने लगे, "...यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है" (यशायाह 49:14)। उनका यह विलाप सुनकर परमेश्वर ने उन्हें अनेक प्रतिज्ञाएं भी दीं जो यशायाह के 42 से 53 अध्याय में मिलती हैं और जिन्हें सेवकों के गीत भी कहा जाता है। इन प्रतिज्ञाओं में परमेश्वर इस्त्राएल के सामने शत्रुओं से छुटकारे और भविष्य की आशा को रखता है। इसी खण्ड में परमेश्वर आते समय में प्रभु यीशु के मानव अवतार के रूप में आने और संसार के पापों के निवारण तथा उद्धार का मार्ग तैयार कर के देने की भविष्यवाणी भी करता है।

   क्या वास्तव में परमेश्वर हम मनुष्यों की परवाह करता है? परमेश्वर के वचन बाइबल का ज़ोरदार ढंग से उत्तर है "हाँ" और इसका प्रमाण है प्रभु यीशु मसीह - यदि परमेश्वर को हमारी परवाह नहीं होती और वह हमसे प्रेम नहीं करता तो फिर उसे अपने पुत्र को हमारे पापों के बदले दण्ड उठाने और हमारे उद्धार पाने के लिए मारे जाने के लिए स्वर्ग के वैभव को छोड़कर संसार में दुख उठाने आने की आवश्यकता भी नहीं थी। क्योंकि परमेश्वर आपसे और मुझसे प्रेम रखता है, हमारी परवाह करता है इसीलिए आज भी हमारे लिए प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त करने का मार्ग उसने खुला रखा हुआ है। - फिलिप यैन्सी


प्रभु यीशु का आगमन इस बात का सर्वोच्च तथा अकाट्य प्रमाण है कि परमेश्वर हमारी परवाह करता है। - विलियम बार्कले

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: यशायाह 49:8-18
Isaiah 49:8 यहोवा यों कहता है, अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, उद्धार करने के दिन मैं ने तेरी सहायता की है; मैं तेरी रक्षा कर के तुझे लोगों के लिये एक वाचा ठहराऊंगा, ताकि देश को स्थिर करे और उजड़े हुए स्थानों को उनके अधिकारियों के हाथ में दे दे; और बंधुओं से कहे, बन्दीगृह से निकल आओ; 
Isaiah 49:9 और जो अन्धियारे में हैं उन से कहे, अपने आप को दिखलाओ! वे मार्गों के किनारे किनारे पेट भरने पाएंगे, सब मुण्डे टीलों पर भी उन को चराई मिलेगी। 
Isaiah 49:10 वे भूखे और प्यासे होंगे, न लूह और न घाम उन्हें लगेगा, क्योंकि, वह जो उन पर दया करता है, वही उनका अगुवा होगा, और जल के सोतों के पास उन्हें ले चलेगा। 
Isaiah 49:11 और, मैं अपने सब पहाड़ों को मार्ग बना दूंगा, और मेरे राजमार्ग ऊंचे किए जाएंगे। 
Isaiah 49:12 देखो, ये दूर से आएंगे, और, ये उत्तर और पच्छिम से और सीनियों के देश से आएंगे। 
Isaiah 49:13 हे आकाश, जयजयकार कर, हे पृथ्वी, मगन हो; हे पहाड़ों, गला खोल कर जयजयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और अपने दीन लोगों पर दया की है।
Isaiah 49:14 परन्तु सिय्योन ने कहा, यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है। 
Isaiah 49:15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता। 
Isaiah 49:16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है। 
Isaiah 49:17 तेरे लड़के फुर्ती से आ रहे हैं और खण्डहर बनाने वाले और उजाड़ने वाले तेरे बीच से निकले जा रहे हैं। 
Isaiah 49:18 अपनी आंखें उठा कर चारों ओर देख, वे सब के सब इकट्ठे हो कर तेरे पास आ रहे हैं। यहोवा की यह वाणी है कि मेरे जीवन की शपथ, तू निश्चय उन सभों को गहने के समान पहिन लेगी, तू दुल्हिन की नाईं अपने शरीर में उन सब को बान्ध लेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • गलतियों 1-3


रविवार, 30 नवंबर 2014

प्रार्थना तथा इच्छा


   प्रार्थना के लिए दिया गया वह हस्तलिखित निवेदन लगभग असंभव होने के कारण हृदयविदारक था। निवेदन देने वाली महिला ने लिखा, "मैं मलटिपल स्क्लिरोसिस रोग से पीड़ित हूँ, मेरी माँस पेशियाँ कमज़ोर पड़ गई हैं, मुझे से निगला नहीं जाता तथा मेरी दृष्टि घट रही है और दर्द बढ़ रहा है।" उस महिला का शरीर जवाब दे रहा था, और मुझे उसके प्रार्थना के निवेदन में निराशा का आभास हुआ। लेकिन आगे पढ़कर आशा जागी - उसके पास वह सामर्थ थी जो शारीरिक नुकसान और क्षीणता पर जयवंत होती है; उस महिला ने लिखा, "मैं जानती हूँ कि मेरे धन्य उद्धारकर्ता के नियंत्रण में ही सब कुछ है। मेरे लिए उसकी इच्छा ही सर्वोपरी है।"

   इस महिला को मेरी प्रार्थनाओं की आवश्यकता अवश्य थी, लेकिन उस के पास भी कुछ ऐसा था जिसकी मुझे आवश्यकता थी - परमेश्वर में अडिग विश्वास। वह प्रत्यक्ष रूप से उस सच्चाई की तसवीर थी जो परमेश्वर ने प्रेरित पौलुस को सिखाई थी जब पौलुस ने अपने ऊपर आई उस विपदा से छुटकारा चाहा जिसे उसने "शरीर में एक काँटा" कहा (2 कुरिन्थियों 12:7)। उस दुख से आराम पाने का पौलुस का प्रयास केवल असंभव ही प्रमाणित नहीं हुआ, वरन इस विषय की उसकी प्रार्थना को परमेश्वर ने पूरी तरह से खारिज कर दिया गया। उस "काँटे" के साथ पौलुस का लगातार चलने वाला यह संघर्ष जो स्पष्ट रीति से परमेश्वर की ओर से था एक महत्वपूर्ण पाठ सिखाने के लिए था - पौलुस की इस दुर्बलता में ही परमेश्वर की सामर्थ सिद्ध होने का प्रमाण सब के सामने आ सका जिससे आते समय के सभी लोगों के लिए हिम्मत बनाए रखने के लिए एक उदाहरण हो सके।

   जब हम प्रार्थनाओं में अपने हृदय परमेश्वर के सामने उँडेलेते हैं, तो साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि हम अपनी प्रार्थना के उत्तर पाने से अधिक परमेश्वर की इच्छा जानने और मानने के लालायित रहें। वहीं से अनुग्रह और सामर्थ प्राप्त होती है। - डेव ब्रैनन


हमारी प्रार्थनाएं स्वर्ग में हमारी इच्छापूर्ति के लिए नहीं वरन धरती पर परमेश्वर की इच्छापूर्ति के लिए होनी चाहिएं।

फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। - मत्ती 26:39 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:7-10
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 10-13


शनिवार, 29 नवंबर 2014

आदर तथा आशीष


   मेरे पिता, हैल, के 90वें जन्म दिवस पर हम सभी भाईयों ने मिलकर एक बड़ा जश्न आयोजित किया। हमने अपने परिवार जनों एवं मित्रों को बुलाया, बहुत सा स्वादिष्ट भोजन बनाकर रखा और संगीत तथा संगति का खुला आयोजन किया। घर में परिवार तथा मित्रगणों ने कोई भी वाद्य यंत्र, जैसे बैन्जो, मैण्डोलिन, गिटार, ढोल इत्यादि, जो भी वे बजा सकते थे लिया और हम सारी दोपहर खाते और गाते-बजाते रहे। पिताजी के लिए एक बड़ा से केक बनवाया जिस पर लिखवाया गया, "परमेश्वर की स्तुति हो! धन्य है वह पुरुष जो यहोवा का भय मानता है - भजन 112:1। हैल तुम्हें 90वाँ जन्म दिम मुबारक हो!"

   बाद में जब मैं भजन 112 का अध्ययन कर रहा था तब मैंने पाया कि वह भजन मेरे पिताजी के चरित्र का, जो 50 वर्षों से भी अधिक तक परमेश्वर के साथ चलते रहे और अब उसके साथ हैं, कितना सटीक वर्णन था। ऐसा नहीं है कि पिताजी को कभी कोई दुख या तकलीफ नहीं हुई - उन्हें भी उन सभी बातों से होकर गुज़रना पड़ा जिन से होकर हम सभी निकलते हैं, लेकिन उन कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर और उसके प्रेम में उनके अडिग  विश्वास का प्रतिफल उनके जीवन में आने वालि अनेक आशीषें थीं। भजन 112 भी हमें यही बात बताता है, कि जो मनुष्य परमेश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा, भय और प्रेम को बनाए रखता है और उसके वचन में आनन्दित होता है वह आशीषों से परिपूर्ण रहेगा। उस मनुष्य की परमेश्वर के प्रति लगातार बनी और बढ़ती रहने वाली ईमानदारी तथा विश्वास के कारण, ना केवल वह स्वयं आशीषित रहेगा, वरन यह आशीष उसकी सन्तान पर भी जाएगी (पद 2)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का यह भजन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवनों में परमेश्वर के प्रति एक भीतरी श्रद्धा का जीवन व्यतीत करें और उसकी आज्ञाकारिता में चलते रहें, अपने जीवन के सभी निर्णय उसकी आज्ञाओं और निर्देशों के अनुसार लेते रहें - अर्थात परमेश्वर को आदर देते रहने वाला जीवन व्यतीत करें। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हम देखेंगे कि हमारे आयु के दिन - वे चाहे जितने भी कम या अधिक क्यों ना हों, परमेश्वर की ओर से हमारे लिए आदर तथा आशीष के दिन होंगे, और यह सब ना केवल हमारे अपने लिए होगा वरन हमारी सन्तान तक भी जाएगा। - डेनिस फिशर


यदि आप परमेश्वर को अपने जीवन से आदर देंगे, तो वह आपके जीवन को आदरणीय बना देगा।

बुद्धि का मूल यहोवा का भय है; जितने उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, उनकी बुद्धि अच्छी होती है। उसकी स्तुति सदा बनी रहेगी। - भजन 111:10

बाइबल पाठ: भजन 112
Psalms 112:1 याह की स्तुति करो। क्या ही धन्य है वह पुरूष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है! 
Psalms 112:2 उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा; सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी। 
Psalms 112:3 उसके घर में धन सम्पत्ति रहती है; और उसका धर्म सदा बना रहेगा। 
Psalms 112:4 सीधे लोगों के लिये अन्धकार के बीच में ज्योति उदय होती है; वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है। 
Psalms 112:5 जो पुरूष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकद्दमें को जीतेगा। 
Psalms 112:6 वह तो सदा तक अटल रहेगा; धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा। 
Psalms 112:7 वह बुरे समाचार से नहीं डरता; उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है। 
Psalms 112:8 उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिये वह न डरेगा, वरन अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के सन्तुष्ट होगा। 
Psalms 112:9 उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा और उसका सींग महिमा के साथ ऊंचा किया जाएगा। 
Psalms 112:10 दुष्ट उसे देख कर कुढेगा; वह दांत पीस-पीसकर गल जाएगा; दुष्टों की लालसा पूरी न होगी।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 7-9


शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

ध्येय


   आज के इलैक्ट्रौनिक उपकरणों और अन्य ध्यान बंटाने वाली वस्तुओं के आने से पहले, मेरे लड़कपन के ग्रीष्मावकाश के लंबे दिन प्रति सप्ताह आने वाले चलते-फिरते पुस्तकालय के आगमन से आनन्दमय हो जाते थे। वह पुस्तकालय एक बस थी जिसमें अन्दर बैठने के स्थान की बजाए शेल्फ बनी हुईं थी और उन शेल्फों पर पुस्तकें भरी हुई थीं जो कि स्थानीय पुस्तकाअलय से लाई जाती थीं जिससे वे लोग जो पुस्त्कालय तक नहीं जा पाते, पुस्तकें पढ़ सकें। उस चलते-फिरते पुस्त्कालय के कारण मैंने बहुत से दिन ऐसी पुस्तकों को पढ़ते हुए बिताए जो मुझे अन्यथा नहीं मिल पातीं। मैं आज भी उस पुस्त्कालय का धन्यवादी हूँ जिसने मेरे अन्दर पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेरित पौलुस को भी पुस्तकों से प्रेम था, और वह अपने जीवन के अन्त तक उन्हें पढ़ता रहा था। कैदखाने से लिखी अपनी अन्तिम पत्री में, जिसके लिखे जाने के कुछ समय पश्चात उसका अन्त मृत्युदण्ड द्वारा करवा दिया गया था, पौलुस ने तिमुथियुस को लिखा, "जो बागा मैं त्रोआस में करपुस के यहां छोड़ आया हूं, जब तू आए, तो उसे और पुस्‍तकें विशेष कर के चर्मपत्रों को लेते आना" (2 तिमुथियुस 4:13)। जिन पुस्तकों और चमर्पत्रों का उल्लेख पौलुस यहाँ कर रहा है वे परमेश्वर के वचन के पुराने नियम के खण्ड तथा/या उसकी लिखी हुई रचानाएं थीं।

   पौलुस का पुस्तकों के प्रति यह प्रेम क्या महज़ ज्ञानवर्धन के शौक या मनोरंजन पाने के लिए था? पुस्तकों के अलावा पौलुस का एक प्रेम और भी था, जो पुस्तकों के प्रति उसके प्रेम का आधार था - अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु को और अधिक गहराई एवं निकटता से जानते रहने का प्रेम। पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों के नाम अपनी पत्री में उन्हें इस संबंध में लिखा कि उसके जीवन का ध्येय था, "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:10)।

   मेरी प्रार्थना है कि जैसा पौलुस का ध्येय प्रभु यीशु को लगातार और भी अधिक निकटता तथा गहराई से जानते रहने का था, वैसे ही हमारे जीवनों का भी यही ध्येय हो और हम प्रभु यीशु की निकटता में बढ़ते चले जाएं। - बिल क्राउडर


सभी ज्ञान से उत्तम ज्ञान है प्रभु यीशु मसीह की पहचान में बढ़ते जाना।

परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:2-3

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 4-6


गुरुवार, 27 नवंबर 2014

अधिक, और अधिक


   आज के संसार में अकसर एक बात सुनने में आती है - "कम, और कम!" सरकार और कारोबार चलाने वाले इसी प्रयास में रहते हैं कि कम से कम खर्च करके काम चला सकें; लोगों से कहा जाता है कि वे कम से कम ऊर्जा का प्रयोग करें, संसाधनों के सीमित स्त्रोतों के कम से कम उपयोग के साथ कार्य करें, इत्यादि। यह सब अच्छी सलाह है, और हम सब को इसकी ओर ध्यान देना चाहिए, इसे मानना चाहिए। लेकिन मसीही विश्वास के संसार में प्रेम, अनुग्रह और सामर्थ की कोई घटी नहीं है, इसी लिए परमेश्वर हमें निर्देश देता है कि उसके इन संसाधानों को हम अधिक, और अधिक संसार में उपयोग करें, उन्हें लोगों के सामने रखें, लोगों को इन साधनों को स्वीकार करके अपने जीवनों में बहुतायत से उपयोग करने को कहें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने थिस्सुलुनिकिया के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पहली पत्री में उनसे कहा: "और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए" (1 थिस्सुलुनीकियों 3:12) तथा उन्हें उकसाया के ऐसी जीवन-शैली जीने में जो परमेश्वर को भाती है वे और भी बढ़ते जाएं (1 थिस्सुलुनीकियों 4:1); पौलुस ने परस्पर प्रेम को दिखाने के लिए उनकी प्रशंसा भी करी, तथा इस प्रेम भरे व्यवहार में भी और अधिक बढ़ते जाने को कहा (1 थिस्सुलुनीकियों 4:10)।

   इस प्रकार का सदा बढ़ते रहने वाला प्रेम मनुष्य के अपने सीमित तथा खर्च हो जाने वाले संसाधानों से नहीं वरन केवल परमेश्वर के असीम संसाधानों से आ सकने के कारण ही संभव है। कवियत्री ऐनी जौनसन फ्लिंट ने अपनी एक कविता में हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम के बारे में लिखा:
उसके प्रेम की कोई सीमा नहीं है, उसके अनुग्रह का कोई नाप नहीं है,
कोई मनुष्य उसके सामर्थ को हद नहीं दे सकता;
क्योंकि प्रभु यीशु में होकर अपने असीम संसाधनों में से,
वह देता रहता है, देता रहता है और भी अधिक देता रहता है।
   
क्योंकि परमेश्वर ने हमसे ऐसा असीम प्रेम किया है इसलिए हमें परमेश्वर से और लोगों से कितना प्रेम दिखाना है - अधिक, और अधिक! - डेविड मैक्कैसलैंड

प्रेम करने की हमारी सीमित क्षमता में होकर भी परमेश्वर अपने असीम प्रेम और सामर्थ को हम में होकर दिखाता है।

और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए। - फिलिप्पियों 1:9

बाइबल पाठ: 1 थिस्सुलुनीकियों 3:12-4:10
1 Thessalonians 3:12 और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए। 
1 Thessalonians 3:13 ताकि वह तुम्हारे मनों को ऐसा स्थिर करे, कि जब हमारा प्रभु यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ आए, तो वे हमारे परमेश्वर और पिता के साम्हने पवित्रता में निर्दोष ठहरें।
1 Thessalonians 4:1 निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ। 
1 Thessalonians 4:2 क्योंकि तुम जानते हो, कि हम ने प्रभु यीशु की ओर से तुम्हें कौन कौन सी आज्ञा पहुंचाई।
1 Thessalonians 4:3 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम पवित्र बनो: अर्थात व्यभिचार से बचे रहो। 
1 Thessalonians 4:4 और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपने पात्र को प्राप्त करना जाने। 
1 Thessalonians 4:5 और यह काम अभिलाषा से नहीं, और न उन जातियों की नाईं, जो परमेश्वर को नहीं जानतीं। 
1 Thessalonians 4:6 कि इस बात में कोई अपने भाई को न ठगे, और न उस पर दांव चलाए, क्योंकि प्रभु इन सब बातों का पलटा लेने वाला है; जैसा कि हम ने पहिले तुम से कहा, और चिताया भी था। 
1 Thessalonians 4:7 क्योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्ध होने के लिये नहीं, परन्तु पवित्र होने के लिये बुलाया है। 
1 Thessalonians 4:8 इस कारण जो तुच्‍छ जानता है, वह मनुष्य को नहीं, परन्तु परमेश्वर को तुच्‍छ जानता है, जो अपना पवित्र आत्मा तुम्हें देता है।
1 Thessalonians 4:9 किन्‍तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह अवश्य नहीं, कि मैं तुम्हारे पास कुछ लिखूं; क्योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्वर से सीखा है। 
1 Thessalonians 4:10 और सारे मकिदुनिया के सब भाइयों के साथ ऐसा करते भी हो, पर हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि और भी बढ़ते जाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 1-3


बुधवार, 26 नवंबर 2014

प्रेम


   वर्षों पहले मैंने एक रेखाचित्र देखा था जिसमें एक वृद्ध पुरुष को रूखी, खिसियाई हुई मुद्रा में अपने घर से बाहर निकलने के दरवाज़े के पास खड़ा दिखाया गया था; दरवाज़ा बन्द था और उस वृद्ध ने उसे चार तालों, दो सरियों और एक सांकल से बन्द किया था, लेकिन दरवाज़े के नीचे से किसी ने एक सफेद लिफाफा जिस पर एक बड़ा सा दिल बना था खिसका दिया था - उस वृद्ध के अपने आप को संसार से अलग कर के बन्द कर लेने के बाद भी उससे प्रेम करने वाले किसी व्यक्ति ने उस तक अपने प्रेम सन्देश को पहुँचाने का रास्ता निकाल लिया था।

   केवल प्रेम में ही दूसरे के मन को बदल देने की शक्ति है। प्रसिद्ध रूसी लेखक दोस्तोवस्की की प्रसिद्ध पुस्तक The Brothers Karamazov दो भाईयों की कहानी है जिनमें से एक जिसका नाम आईवन है कठोर चिड़चिड़े स्वभाव का है और परमेश्वर के प्रेम का विरोधी है, और दूसरा जिसका नाम अलियोशा है, परमेश्वर में गहरा विशवास रखता है और अपने भाई के परमेश्वर विरोधी व्यवहार से हैरान रहता है। एक समय अलियोशा अपने भाई की ओर झुककर प्रेम के साथ उसे चूम लेता है; उसका अपने भाई के प्रति प्रेम व्यक्त करने का यह साधारण सा कार्य आईवन के दिल को छू लेता है, उसके अन्दर गहरा प्रभाव उत्पन्न करता है।

   हो सकता है कि आपके पास कोई ऐसा मित्र है जो परमेश्वर के प्रेम का प्रतिरोध कर रहा है; उस पर परमेश्वर के प्रेम को प्रकट कीजिए जैसे परमेश्वर ने आप पर और सारे संसार पर अपने प्रेम को प्रकट किया है। यह हमारे प्रति परमेश्वर का प्रेम ही है जिस के अन्तर्गत उसने हमारे पापों में होने के बावजूद हमें पापों से छुड़ाने और अपने साथ स्वर्ग में स्थान देने के लिए अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को संसार में बलिदान होने के लिए भेजा, जिससे वह सारे संसार के सभी लोगों के पापों के दोष को अपने ऊपर लेकर सभी के पापों के दोष तथा दण्ड को अपने ऊपर ले और उनके निवारण का मार्ग तैयार कर दे।

   लोगों को परमेश्वर के उस प्रेम से अवगत कराएं जिसका वर्णन परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 कुरिन्थियों 13 में दिया गया है; प्रेम जो धीरजवन्त, कृपालु, दीन और निस्वार्थ है। सच्चा प्रेम परमेश्वर से मिलने वाला अनुग्रह का उपहार है, इस उपहार को संसार के साथ बाँटते रहिए। - डेविड रोपर


परमेश्वर अपने प्रेम को हमारे हृदयों में इसलिए उँडेलता है ताकि हम उसे दूसरों तक पहुँचा सकें।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी। 
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी। 
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। 
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 कुरिन्थियों 13-16