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रविवार, 20 मार्च 2016

दृढ़निश्चय


   टेलिविज़न पर युद्ध से ध्वस्त एक देश से विस्थापित हुए शरणार्थियों की बदहाल दशा पर रिपोर्ट प्रसारित हो रही थी। उन शरणार्थियों में एक दस वर्षीय लड़की की दृढ़निश्चयता को देखकर मैं चकित हुआ; यद्यपि उनके वापस अपने देश लौट पाने कि संभावनाएं ना के बराबर थीं परन्तु फिर भी उसने बड़े दृढ़ विश्वास के साथ कहा, "जब हम वापस जाएंगे तब मैं फिर से अपने पड़ौसियों से मिलने जाऊँगी, अपनी सहेलियों के साथ खेलूँगी; मेरे पिताजी कहते हैं कि हमारा घर अब नहीं रहा है, लेकिन मैं कहती हूँ कि हम लौटकर उसे फिर से बना लेंगे।"

   जीवन में कुछ बातों के प्रति दृढ़निश्चय रहने का स्थान अवश्य ही है, विशेषकर तब जब वे बातें परमेश्वर में हमारे विश्वास तथा हमारे द्वारा औरों के प्रति प्रेम दर्शाने से संबंधित हो। परमेश्वर के वचन बाइबल में रूत की पुस्तक का आरंभ होता है तीन महिलाओं के विवरण से जो एक त्रासदी में होकर एक दूसरे से जुड़ी हैं। अपने पति और दोनों बेटों की मृत्यु के पश्चात मोआब में रह रही नाओमी ने वापस अपने शहर बेतलेहम लौट जाने का निर्णय लिया, और अपनी दोनों विधवा बहुओं से आग्रह किया कि वे अपने देश मोआब में ही रह जाएं और पुनः अपने घर बसाएं। एक बहु, ओर्पा ने तो नाओमी की बात मान ली, लेकिन दूसरी बहु रूत ने नाओमी के साथ ही वापस जाने की ठान ली। रूत ने नाओमी से कहा: "...जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा; जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊं, तो यहोवा मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे" (रूत 1:16-17)। जब नाओमी ने देखा कि रूत अपने इरादे में पक्की है तो वे दोनों बेतलेहम लौट आए और वहाँ अपनी ज़िन्दगी दोबारा स्थापित करने लगे। परमेश्वर ने रूत की दृढ़निश्चयता और नाओमी तथा परमेश्वर के प्रति वफादारी का अच्छा प्रतिफल दिया और रूत का विवाह एक संपन्न व्यक्ति के साथ हो गया, और फिर उसकी संतान के वंश से इस्त्राएल के सुप्रसिद्ध राजा दाऊद और बाद में जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ।

   घमण्ड से तो ढिठाई आती है, परन्तु प्रेम के कारण दृढ़निश्चयता आती है। बाइबल में प्रभु यीशु के लिए आया है कि, "जब उसके ऊपर उठाए जाने के दिन पूरे होने पर थे, जो उसने यरूशलेम को जाने का विचार दृढ़ किया" (लूका 9:51)। प्रभु यीशु के हम पापियों के लिए अपने जीवन का बलिदान कराने के इस प्रेमपूर्ण दृढ़निश्चय के कारण ही आज हम अनन्त जीवन पाने वाले बन सके हैं। दूसरों के पापों के लिए स्वयं मृत्यु स्वीकार कर लेने का उसका यह दृढ़निश्चय हमें उसके लिए जीवन जीने की प्रेरणा और निश्चय कर लेने की सामर्थ देता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रेम समर्पण से प्रगट होता है।

क्योंकि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है, इस कारण मैं ने संकोच नहीं किया; वरन अपना माथा चकमक की नाईं कड़ा किया क्योंकि मुझे निश्चय था कि मुझे लज्जित होना न पड़ेगा। - यशायाह 50:7

बाइबल पाठ: रूत 1:8-18
Ruth 1:8 तब नाओमी ने अपनी दोनों बहुओं से कहा, तुम अपने अपने मैके लौट जाओ। और जैसे तुम ने उन से जो मर गए हैं और मुझ से भी प्रीति की है, वैसे ही यहोवा तुम्हारे ऊपर कृपा करे। 
Ruth 1:9 यहोवा ऐसा करे कि तुम फिर पति कर के उनके घरों में विश्राम पाओ। तब उसने उन को चूमा, और वे चिल्ला चिल्लाकर रोने लगीं, 
Ruth 1:10 और उस से कहा, निश्चय हम तेरे संग तेरे लोगों के पास चलेंगी। 
Ruth 1:11 नाओमी ने कहा, हे मेरी बेटियों, लौट जाओ, तुम क्यों मेरे संग चलोगी? क्या मेरी कोख में और पुत्र हैं जो तुम्हारे पति हों? 
Ruth 1:12 हे मेरी बेटियों, लौटकर चली जाओ, क्योंकि मैं पति करने को बूढ़ी हूं। और चाहे मैं कहती भी, कि मुझे आशा है, और आज की रात मेरे पति होता भी, और मेरे पुत्र भी होते, 
Ruth 1:13 तौभी क्या तुम उनके सयाने होने तक आशा लगाए ठहरी रहतीं? और उनके निमित्त पति करने से रुकी रहतीं? हे मेरी बेटियों, ऐसा न हो, क्योंकि मेरा दु:ख तुम्हारे दु:ख से बहुत बढ़कर है; देखो, यहोवा का हाथ मेरे विरुद्ध उठा है। 
Ruth 1:14 तब वे फिर से उठीं; और ओर्पा ने तो अपनी सास को चूमा, परन्तु रूत उस से अलग न हुई। 
Ruth 1:15 तब उसने कहा, देख, तेरी जिठानी तो अपने लोगों और अपने देवता के पास लौट गई है; इसलिये तू अपनी जिठानी के पीछे लौट जा। 
Ruth 1:16 रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग वा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा; 
Ruth 1:17 जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊं, तो यहोवा मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे। 
Ruth 1:18 जब उसने यह देखा कि वह मेरे संग चलने को स्थिर है, तब उसने उस से और बात न कही। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 4-6
  • लूका 1:1-20


शनिवार, 19 मार्च 2016

स्वर्ग में आनन्द


   जोएन की परवरिश एक मसीही घर में हुई थी। लेकिन कॉलेज जाने के बाद उसे अपने मसीही विश्वास पर शंका होने लगी और वह परमेश्वर से दूर हो गई। स्नातक होने के बाद, मन के आनन्द की खोज में वह अनेक देशों के भ्रमण पर निकली, लेकिन उसे कहीं सन्तुष्टि नहीं मिली। कुछ कठिनाईयों से निकलने के समय में उसे आभास हुआ कि अभी भी परमेश्वर उसके साथ बना हुआ है, और उसे परमेश्वर की आवश्यकता है।

   जर्मनी से जोएन ने अमेरिका में रह रहे अपने माता-पिता को फोन करके बताया, "मैंने अपना जीवन प्रभु यीशु मसीह को समर्पित कर दिया है, और वह मुझे परिवर्तित करता जा रहा है। जो दुःख और चिंताएं मेरे कारण आप लोगों को हुई हैं मैं उनके लिए क्षमा चाहती हूं।" यह सुनकर जोएन के माता-पिता हर्षोत्साहित हो गए, उनकी आँखों से आनन्द के आँसू बहने लगे और उन्होंने जोएन के भाईयों और भाभियों तो तुरन्त घर बुला लिया जिससे उन सब को वे व्यक्तिगत रीति से बता सकें कि उनकी बहन ने प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण कर लिया, वह परमेश्वर के पास लौट आई है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 15 अध्याय में खोए हुए को पा लेने से संबंधित प्रभु यीशु द्वारा दिए गए तीन दृष्टांत हैं। पहले दृष्टांत एक खोई हुई भेड़ पर है जिसे ढूंढ़ने के लिए उसका चरवाहा निकल जाता है। दूसरे दृष्टांत में एक स्त्री का एक सिक्का खो गया था और उसना यत्न करके उस सिक्के को ढूँढ़ लिया, और फिर अपने पड़ौसियों को अपने साथ उस खोए हुए सिक्के के मिल जाने का आनन्द मनाने के लिए निमंत्रित किया और तीसरा दृष्टांत एक भटके हुए पुत्र का है जो अपने पिता से संपत्ति का अपना हिस्सा लेकर दुराचार में सब कुछ उड़ा देता है और फिर कठिन समयों में पड़ने पर लौट कर पश्चाताप के साथ अपने पिता के पास आता है और पिता उसे परिवार में बहाल कर देता है, आनन्द मनाता है। इन तीनों दृष्टांतो के द्वारा प्रभु यीशु ने यह समझाया कि कैसे वह पाप में खोए हुए लोगों को वापस परमेश्वर के पास लौटा लाने के लिए आया है; और जब कोई परमेश्वर से पाप क्षमा और उद्धार की भेंट को स्वीकार कर के परमेश्वर के पास लौट आता है, तब "...इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है" (लूका 15:10)।

   यह कितनी अद्भुत और अनुग्रहपूर्ण बात है कि प्रभु यीशु स्वर्ग से हमें पापों से बचाने के लिए पृथ्वी पर उतर आया, और जब हम उसकी पुकार सुनकर उससे पापों की क्षमा माँगते हैं, अपना जीवन उसे समर्पित कर देते हैं, तब स्वर्ग में आनन्द मनाया जाता है। - ऐनी सेटास


जब मनुष्य पश्चाताप करते हैं तब स्वर्गदूत आनन्द मनाते हैं।

प्रभु यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं दुष्ट के मरने से कुछ भी प्रसन्न होता हूँ? क्या मैं इस से प्रसन्न नहीं होता कि वह अपने मार्ग से फिरकर जीवित रहे? - यहेजकेल 18:23

बाइबल पाठ: लूका 15:1-10
Luke 15:1 सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उस की सुनें। 
Luke 15:2 और फरीसी और शास्त्री कुड़कुड़ा कर कहने लगे, कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है।
Luke 15:3 तब उसने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा। 
Luke 15:4 तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? 
Luke 15:5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है। 
Luke 15:6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे कर के कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है। 
Luke 15:7 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।
Luke 15:8 या कौन ऐसी स्त्री होगी, जिस के पास दस सिक्के हों, और उन में से एक खो जाए; तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहार कर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे? 
Luke 15:9 और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी कर के कहती है, कि मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्‍का मिल गया है। 
Luke 15:10 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 1-3
  • मरकुस 16


शुक्रवार, 18 मार्च 2016

सुगन्ध


   कुछ सुगन्ध अविस्मर्णीय होती हैं। अभी हाल की बात है, मेरे पति की शेविंग क्रीम समाप्त होने को थी। मैंने कहा, "मैं कुछ खरीद लाऊँगी"; उन्होंने अपनी शेविंग क्रीम दिखाते हुए पूछा, "तुम यह वाली ही लाना; मुझे इसकी सुगन्ध बहुत पसन्द है - मेरे पिता भी सदा यही प्रयोग करते थे।" मैं यह सुनकर मुस्कुराई और मुझे अपने साथ घटी वह घटना स्मरण हो आई जब अचानक ही कहीं से मुझे उस शैम्पू की सुगन्ध आई थी जो मेरे बचपन में मेरी माँ मेरे बाल धोने के लिए प्रयोग करती थीं और उस सुगन्ध से मैं अपने बचपन की यादों में चली गई थी। मेरे और मेरे पति के अन्दर, सुगन्ध के कारण, एक भावनात्मक प्रतिक्रिया हुई थी और हम उन लोगों की सुखद यादों में चले गए थे जो हमारे प्रीय थे।

   ऑलिवर वेन्डल होम्स ने कहा था, "यादें, कलपनाएं, बीती भावनाएं और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं किसी भी अन्य माध्यम की अपेक्षा सुगन्ध के द्वारा अधिक सरलता से जागृत हो जाती हैं।"

   इसलिए, कैसा रहे यदि हमारे जीवन ऐसे हों जो सुगन्ध के समान लोगों को हमारे प्रभु परमेश्वर की ओर आकर्षित करें? परमेश्वर के वचन बाइबल में 2 कुरिन्थियों 2:15 में प्रेरित पौलुस लिखता है: "क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।" अर्थात हमारे जीवन की सुगन्ध ना केवल परमेश्वर को भाने वाली हो, वरन उससे अन्य लोग भी परमेश्वर की ओर आकर्षित होने पाएं, ना कि हमारे कारण लोग परमेश्वर से दूर हों। हम मसीही विश्वासी जो प्रभु यीशु के बलिदान के महत्व को जानते और समझते हैं, हमारे पास यह सुअवसर है कि हम संसार में मसीह यीशु की सुगन्ध बनकर जीवन व्यतीत करें, मसीह यीशु के गुण और चरित्र को औरों को स्मरण कराते रहने के माध्यम बनें।

   मसीह यीशु की समानता में होने की मीठी सुगन्ध, जगत के उद्धारकर्ता की ओर लोगों को आकर्षित करने का अत्यन्त प्रभावी माध्यम बन सकता है। - सिंडी हैस कैसपर


जब हम परमेश्वर के साथ-साथ चलते हैं तो अपने पीछे एक ऐसी मोहक सुगन्ध छोड़ जाते हैं जो दूसरों को मसीह यीशु का अनुसरण करने के लिए प्रेरित करती है।

और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। - इफिसियों 5:2

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:12-17
2 Corinthians 2:12 और जब मैं मसीह का सुसमाचार, सुनाने को त्रोआस में आया, और प्रभु ने मेरे लिये एक द्वार खोल दिया। 
2 Corinthians 2:13 तो मेरे मन में चैन न मिला, इसलिये कि मैं ने अपने भाई तितुस को नहीं पाया; सो उन से विदा हो कर मैं मकिदुनिया को चला गया। 
2 Corinthians 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। 
2 Corinthians 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं। 
2 Corinthians 2:16 कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है? 
2 Corinthians 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं। 

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47


गुरुवार, 17 मार्च 2016

परिप्रेक्ष्य


   सन 1927 की फिल्म Wings प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर दो अमेरीकी वायुयान चालकों पर बनाई गई थी और उसे सर्वोत्त्म फिल्म होने का प्रथम एकैडमी पुरुस्कार मिला था। जब यह फिल्म बनाई जा रही थी तो कई दिन तक इसका बनाया जाना रुका रहा। यह होता देख, खिसियाए हुए प्रोड्यूसरों ने फिल्म के निर्देशक से विलंब का कारण पूछा। निर्देशक ने उन्हें समझाया, "हमारे पास केवल खुला नीला आकाश ही है। वायुयानों का हवाई युद्ध इस नीले आकाश की पृष्ठभूमि में दिखाई नहीं देगा। हमें बादल चाहिएं क्योंकि बादलों से परिप्रेक्ष्य मिलता है"; वह निर्देशक बिलकुल सही था। बादलों के परिप्रेक्ष्य में ही दर्शक हवाई युद्ध होता देख सकते थे और फिल्म की कहानी को समझ सकते थे।

   हम अपने जीवनों मे सदा ही खुला आकाश चाहते हैं ना कि आंधी-बरसात की आशंका लाने वाले बादल। लेकिन बादलों से भरे आकाश के परिप्रेक्ष्य में ही हम परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को देखने पाते हैं; हम देखने पाते हैं कि कैसे हमारे कठिन समयों और परीक्षाओं के कालों में भी परमेश्वर हमारे साथ-साथ बना रहा, हमें संभाले रहा, उसने हमें सुरक्षित रखा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम बाइबल के एक पात्र अय्युब के जीवन से देखते हैं कि अत्यंत दुखः के द्वारा अपने परखे जाने के आरंभ में अय्युब अपनी दशा पर विलाप करता है और अपने जन्म के दिन को कोसता है और चाहता है कि बादल उस दिन पर सदा छाए रहें (अय्युब 3:3-5)। परन्तु अन्ततः जब परमेश्वर अय्युब से बातें करता है (अय्युब 42:1-6) तो अय्युब का दृष्टिकोण बिलकुल बदल जाता है और वह अपनी इस उद्दण्डता के लिए पश्चाताप करता है। जब अय्युब का साक्षात्कार जीवते परमेश्वर से हुआ और अय्युब ने परमेश्वर के दृष्टिकोण को जाना तो परमेश्वर के उद्देश्यों के प्रति उसका परिप्रेक्ष्य परिवर्तित हो गया।

   क्या आपके जीवन में आज समस्याओं के बादल छाए हुए हैं? चिन्ता ना करें, उन बादलों के द्वारा परमेश्वर आपको अपनी विश्वासयोग्यता के परिप्रेक्ष्य को समझाएगा, अपने महान कार्य को आपके जीवन में दिखाएगा। उसके समय और विधि की प्रतीक्षा करें; उसमें अपने विश्वास को बनाए रखें। - डेनिस फिशर


अकसर दुःखों के बादल परमेश्वर के मुख की चमक को प्रकट करते हैं। - जैस्पर

चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में हो कर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है। - भजन 23:4

बाइबल पाठ: अय्युब 3:3-5; 42:1-6
Job 3:3 वह दिन जल जाए जिस में मैं उत्पन्न हुआ, और वह रात भी जिस में कहा गया, कि बेटे का गर्भ रहा। 
Job 3:4 वह दिन अन्धियारा हो जाए! ऊपर से ईश्वर उसकी सुधि न ले, और न उस में प्रकाश होए। 
Job 3:5 अन्धियारा और मृत्यु की छाया उस पर रहे। बादल उस पर छाए रहें; और दिन को अन्धेरा कर देने वाली चीज़ें उसे डराएं। 

Job 42:1 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया; 
Job 42:2 मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। 
Job 42:3 तू कौन है जो ज्ञान रहित हो कर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिन को मैं जानता भी नहीं था। 
Job 42:4 मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे। 
Job 42:5 मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; 
Job 42:6 इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ। 

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 30-31
  • मरकुस 15:1-25


बुधवार, 16 मार्च 2016

भोजन


   मुझे भोजन बहुत पसन्द है! मुझे अच्छे से सजा कर परोसे हुए भोजन को देखना पसन्द है; मुझे अच्छे भोजन की सुगन्ध और स्वाद पसन्द है। यदि मेरा बस चलता तो मैं आवश्यकता से अधिक मात्रा में और बारंबार भोजन खाता रहता - लेकिन इससे ना केवल मेरी कमर का आकार बिगाड़ जाता वरन अन्य अनेक स्वास्थ्य संबम्धी समस्याएं भी उत्पन्न हो जातीं! इसलिए मेरी पत्नि मार्टी इस बात का सदा ध्यान रखती है कि मैं कितनी बार और कितनी मात्रा में भोजन करता हूँ, और जब आवश्यक होता है तो वह सप्रेम मुझे स्मरण भी करा देती है कि मैं सही भोजन सही मात्रा में ही खाऊँ।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भविष्यद्वक्ता यिर्मयाह द्वारा एक रोचक विचार लिखा गया है - जब उसे परमेश्वर का वचन मिला (परमेश्वर के न्याय से संबंधित भी) तो उसने उस वचन को खा लिया (यिर्मयाह 15:16)। इसे पढ़कर मेरे मन में विचार आता है कि क्या मैं परमेश्वर के वचन बाइबल को उतनी ही रुचि और आनन्द से वैसे ही बारंबार अपने अन्दर लेता हूँ जितनी रुचि और आनन्द से मैं शारीरिक भोजन को बारंबार अपने अन्दर लेता हूँ?

   यह तो स्पष्ट है कि यिर्मयाह ने परमेश्वर के वचन को भोजन वस्तु के समान वास्तव में "खा" नहीं लिया था; वरन उसके ऐसा लिखने का तात्पर्य था कि उसने परमेश्वर के वचन को अपने अन्दर समा लिया था और अन्दर ही उसका स्वाद ले रहा था; और यही वह स्थान है जहाँ परमेश्वर का वचन होना चाहिए - हमारे अन्तःकरण में, हमारे मन-मस्तिष्क-विचारों में। परमेश्वर का वचन हमारे अन्तःकरण और आत्मा के लिए भोजन है; जब हम इस वचन को "खाते" हैं, अर्थात अपने अन्दर समा लेते हैं तो परमेश्वर के पवित्र आत्मा की सहायता से यह हमें प्रभु यीशु की समानता में ढालता है। यह वचन परमेश्वर, धन-दौलत, शत्रुओं, जीवन यापन और कारोबार, परिवार आदि से संबंधित हमारे सोच-विचारों को परिवर्तित करता है, उन्हें परमेश्वर की इच्छा और आज्ञाओं के अनुरूप बनाता है। दूसरे शब्दों में, यह वचन ना केवल हमारे लिए बहुत अच्छा और भला है, वरन हम जितनी अधिक मात्रा में और जितनी अधिक बार इसे "खाएंगे", अपने अन्दर समाएंगे, यह हमारे लिए उतना अधिक लाभकारी होगा। हमें इसे अपने अन्दर लेने पर नियंत्रण लगाने या इससे हमारे लिए कोई दुषप्रभाव होने की चिन्ता करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस वचन से केवल भला ही होता है।

   इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल को जी भर के "खाएं"; और आप अपने आप को यिर्मयाह के समान कहते हुए पाएंगे, "जब तेरे वचन मेरे पास पहुंचे, तब मैं ने उन्हें मानो खा लिया, और तेरे वचन मेरे मन के हर्ष और आनन्द का कारण हुए; क्योंकि, हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, मैं तेरा कहलाता हूँ" (यिर्मयाह 15:16)! - जो स्टोवैल


परमेश्वर के वचन को आप जितना अधिक खाएंगे, आप उतने ही अधिक स्वस्थ होते चले जाएंगे।

मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। - भजन 119:11

बाइबल पाठ: भजन 19:7-14
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले! 

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 28-29
  • मरकुस 14:54-72


मंगलवार, 15 मार्च 2016

पदवी तथा उपाधि


   प्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवा बी.बी.सी. ने एक बार लोगों से महत्वपूर्ण प्रतीत होने वाले, किंतु अजीब और बहुत कम पहचाने जाने वाले कार्य पदवियों तथा उपाधियों के उदाहरण भेजने को कहा। पदवी तथा उपाधि के नाम भेजने वालों में एक महिला थी जिसने अपने कार्य की पदवी के लिए लिखा: "Underwater Ceramic Technician" (जलमगन चीनीमिट्टी तकनीशियन); वास्तव में वह महिला एक होटल में बर्तन धोने का काम करती थी! कभी कभी उपाधि या पदवी लगाकर कार्य को अधिक महत्वपूर्ण दिखाने के प्रयास किए जाते हैं।

   जब प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में इफसुस की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में परमेश्वर द्वारा उन्हें दिए गए कुछ मसीही सेवकाई के वरदानों के बारे में लिखा (इफिसियों 4:11) तो उसका यह उद्देश्य कदापि नहीं था कि उसके द्वारा प्रयुक्त वे शीर्षक मसीही मण्दलियों में उत्कृष्ठ तथा आदरपूर्ण उपाधियाँ या पदवियाँ बना दी जाएं। पौलुस तो केवल यह समझा रहा था कि मसीही मण्डली के सर्वांगीण उत्थान के लिए भिन्न सेवकाईयों की आवश्यकता है, जिसके लिए परमेश्वर ने भिन्न सेवकों को नियुक्त किया है। किसी भी सेवक की सेवकाई किसी अन्य से बड़ी या छोटी, अथवा अधिक महत्वपूर्ण या कम महत्वपूर्ण नहीं है; वरन सबकी सेवकाई का एक ही उद्देश्य है कि मिल-जुल कर सेवा द्वारा मसीह की देह अर्थात मसीह की मण्डली उन्नति पाए।

   जो बात अधिक महत्वपूर्ण थी वह थी इन वरदानों का उद्देश्य और प्रयोग, ना कि उन्हें पदवी के समान उपयोग करके मण्डली में ऊँच-नीच की भावना लाना। पौलुस ने यह समझाने के लिए लिखा, "जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए" (इफिसियों 4:12)। मसीही विश्वासियों की मण्डली में हमारी पदवी अथवा उपाधि का कोई महत्व नहीं है। महत्व है तो इस बात का कि हम प्रभु के लोगों के विश्वास को स्थिर और दृढ़ करने में परमेश्वर द्वारा निर्धारित अपनी भूमिका भली-भांति निभाते हैं या नहीं। जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल के मापदण्डों के अनुसार अपनी कार्य के प्रभावी एवं उपयोगी होने को मापने लगते हैं तो फिर इसका कोई महत्व नहीं रह जाता कि हमारी पदवी या उपाधि क्या है, या वह है भी अथवा नहीं, या फिर कब और कैसे उसे किसी अन्य में परिवर्तित कर दिया गया है, या किसी अन्य को हमारे स्थान पर रख दिया गया है।

   परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम और समर्पण के कारण हमारा कर्तव्य तथा कार्य है कि हम अपने साथी मसीही विश्वासियों को उभारने, संवारने और परमेश्वर की निकटता में बढ़ाने मे अपना योगदान देते रहें; और स्वर्ग में परमेश्वर हमें अपने आँकलन के अनुसार प्रतिष्ठित करेगा: "...धन्य हे अच्‍छे और विश्वासयोग्य दास, तू थोड़े में विश्वासयोग्य रहा; मैं तुझे बहुत वस्‍तुओं का अधिकारी बनाऊंगा अपने स्‍वामी के आनन्द में सम्भागी हो" (मत्ती 25:21)। - सी. पी. हिया


परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए वरदान हमारे द्वारा दूसरों की सेवकाई के लिए हैं।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:11-16
Ephesians 4:11 और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। 
Ephesians 4:12 जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। 
Ephesians 4:13 जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएं। 
Ephesians 4:14 ताकि हम आगे को बालक न रहें, जो मनुष्यों की ठग-विद्या और चतुराई से उन के भ्रम की युक्तियों की, और उपदेश की, हर एक बयार से उछाले, और इधर-उधर घुमाए जाते हों। 
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं। 
Ephesians 4:16 जिस से सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 26-27
  • मरकुस 14:27-53


सोमवार, 14 मार्च 2016

भटकने वाले


   उत्कृष्ट तथा सुप्रसिद्ध मसीही भजन "Come, Thou Fount of Every Blessing" (हे प्रभु! आशीष के सोते) सन 1757 में 22 वर्षीय रॉबर्ट रॉबिन्सन द्वारा लिखा गया था। इस भजन की एक पंक्ति है जो हमेशा ही मेरा ध्यान खींचती है और मुझे आत्म-निरीक्षण करने के लिए बाध्य करती है; यह पंक्ति का भाव है, "तुझसे भटक जाने, अपने परमेश्वर से दूर हो जाने की मेरी प्रवृति बनी रहती है, मैं यह जानता हूँ।" मुझे लगता है कि यह बात मेरे लिए भी उतनी ही सत्य है जितनी कि रॉबर्ट रॉबिन्सन के लिए थी। कितनी ही बार मैं देखता हूँ कि बजाए इसके कि मैं अपने उद्धाकर्ता पर मन लगाए रखूँ जिसने मेरे उद्धार के लिए अपने प्राण बलिदान किए, जो मुझ से असीम प्रेम करता है, मेरा मन संसार की बातों में इधर-उधर भागता भटकता फिरता है; और मैं तथा रॉबर्ट रॉबिन्सन इस बात में अकेले नहीं हैं।

   लेकिन साथ ही यह भी सत्य है कि भटकने के उन समयों में हमारे हृदय की मूल भावना परमेश्वर को छोड़ कर उस से दूर चले जाने की नहीं होती। हम तो बस प्रेरित पौलुस की सी दशा में होते हैं, जब पौलुस ने कहा: "क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं" (रोमियों 7:19)। ऐसे भटक जाने स्थिति में हमारी तीव्र इच्छा, हमें संभाल कर रख सकने वाले अपने प्रभु परमेश्वर की ओर वापस मुड़ जाने की होनी चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार अपने ऐसे ही संघर्ष को लेकर लिखता है, "मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे" (भजन 119:10)।

   कभी-कभी चाहे हमारे मन परमेश्वर के निकट आने के लालयित हों, जीवन की परिस्थितियाँ या संसार के आकर्षण हमें परमेश्वर से तथा उसके वचन से दूर ले जाते हैं। लेकिन हमें कितना अधिक धन्यवादी होना चाहिए उस धीरजवन्त, दयालु, प्रेमी पिता परमेश्वर के लिए जिसका अनुग्रह हम पर बना रहता है और हमारे उससे भटक जाने की दशा में भी उसका प्रेम हमारे प्रति कम नहीं होता, वरन वह साधन करता है कि हम उसके पास लौट आएं, उसकी संगति में बने रहें। - बिल क्राउडर


हमारी भटकने की प्रवृति से कहीं अधिक सामर्थी है परमेश्वर की हमें खोजने और अपने पास ले आने की प्रवृति।

मैं खोई हुई भेड़ की नाईं भटका हूं; तू अपने दास को ढूंढ़ ले, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं को भूल नहीं गया। - भजन 119:176

बाइबल पाठ: भजन 119:9-16
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 23-25
  • मरकुस 14:1-26