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मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016

सच्चा मित्र


   शेन नामक उपन्यास में, अमेरिका के सीमान्त इलाके के एक किसान, जो स्टैरेट और उसके घर आए एक रहस्यमय अनजान व्यक्ति शेन के बीच में मित्रता हो जाती है। इस मित्रता का आरंभ होता है जब वे दोनों मिलकर एक विशाल पेड़ के ठूँठ और जड़ को जो स्टैरेट के फार्म की धरती से निकालते हैं। फिर जब जो स्टैरेट शेन को एक झगड़े में से बचाता है, और जब शेन जो स्टैरेट को उसके फार्म की रक्षा करना तथा बेहतर बनाने के तरीके सिखाता है तो यह मित्रता और गहरी हो जाती है। दोनों व्यक्ति परस्पर आदर और वफादारी की भावना रखने लगते हैं। उनका यह व्यवहार परमेश्वर के वचन बाइबल में कही गई बात, "एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो" (सभोपदेशक 4:9-10) की पुष्टि है।

   बाइबल के दो अन्य पात्रों, दाऊद और राजा शाऊल के पुत्र योनातान ने भी इसी बात को व्यावाहरिक जीवन से दिखाया। वे दोनों मित्र थे, और परिस्थितियों ने उनकी मित्रता को जाँचा; दाऊद को शक था कि राजा शाऊल उसे मरवाना चाहता है, लेकिन योनातान इस बात को नहीं मानता था। तब उन्होंने निर्णय किया कि दाऊद जाकर छुप जाएगा और योनातान अपने पिता राजा शाऊल से इस बारे में बात करेगा और सच्चाई को जानने का प्रयास करेगा। जब योनातान ने जाना कि दाऊद का शक सही था और वास्तव में उसका पिता दाऊद को मारना चाहता था, तो उसने यह बात जाकर दाऊद को बता दी, उसे सुरक्षित निकल जाने के लिए भी कहा और उसके गले लगकर रोया भी तथा योनातान ने दाऊद को जाते-जाते आशीष भी दी।

   यदि आपने उसके पापों की क्षमा, समर्पण तथा उद्धार के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है तो प्रभु यीशु मसीह में आपके पास एक सच्चा मित्र है जो सदा आपके साथ वफादार बना रहेगा; यदि आप ठोकर खाएं तो आपको संभालेगा, सदा आपका सहायक रहेगा, आपके लिए सदा उपलब्ध रहेगा। उसने अपने प्रेम और मित्रता की वफादारी का प्रमाण आपके लिए कलवरी के क्रूस पर अपने प्राण बलिदान करने के द्वारा दिया है। प्रभु यीशु की मित्रता स्वीकार करना कभी भी किसी भी रीति से हानि का सौदा नहीं है, वरन सभी के लिए अनन्तकालीन लाभ और आनन्द का मार्ग है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु से बढ़कर सच्चा और वफादार मित्र कोई और नहीं है।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। - यूहन्ना 15:13-14

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 20:32-42
1 Samuel 20:32 योनातन ने अपने पिता शाऊल को उत्तर देकर उस से कहा, वह क्यों मारा जाए? उसने क्या किया है? 
1 Samuel 20:33 तब शाऊल ने उसको मारने के लिये उस पर भाला चलाया; इससे योनातन ने जान लिया, कि मेरे पिता ने दाऊद को मार डालना ठान लिया है। 
1 Samuel 20:34 तब योनातन क्रोध से जलता हुआ मेज पर से उठ गया, और महीने के दूसरे दिन को भोजन न किया, क्योंकि वह बहुत खेदित था, इसलिये कि उसके पिता ने दाऊद का अनादर किया था।
1 Samuel 20:35 बिहान को योनातन एक छोटा लड़का संग लिये हुए मैदान में दाऊद के साथ ठहराए हुए स्थान को गया। 
1 Samuel 20:36 तब उसने अपने छोकरे से कहा, दौड़कर जो जो तीर मैं चलाऊं उन्हें ढूंढ़ ले आ। छोकरा दौड़ता ही था, कि उसने एक तीर उसके परे चलाया। 
1 Samuel 20:37 जब छोकरा योनातन के चलाए तीर के स्थान पर पहुंचा, तब योनातन ने उसके पीछे से पुकार के कहा, तीर तो तेरी परली ओर है। 
1 Samuel 20:38 फिर योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकारकर कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत। और योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकार के कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत! और योनातन का छोकरा तीरों को बटोर के अपने स्वामी के पास ल आया। 
1 Samuel 20:39 इसका भेद छोकरा तो कुछ न जानता था; केवल योनातन और दाऊद इस बात को जानते थे। 
1 Samuel 20:40 और योनातन ने अपने हथियार अपने छोकरे को देकर कहा, जा, इन्हें नगर को पहुंचा। 
1 Samuel 20:41 ज्योंही छोकरा चला गया, त्योंही दाऊद दक्खिन दिशा की अलंग से निकला, और भूमि पर औंधे मुंह गिर के तीन बार दण्डवत की; तब उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ रोए, परन्तु दाऊद को रोना अधिक था। 
1 Samuel 20:42 तब योनातन ने दाऊद से कहा, कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे। तब वह उठ कर चला गया; और योनातन नगर में गया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 53-55
  • 2 थिस्सलुनीकियों 1


सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

सदा विद्यमान


   जब हमारी बेटी कैथरीन बहुत छोटी थी, अभी वह चल या रेंग भी नहीं पाती थी, तब उसने लोगों से अपने आप को छिपाने, या अपने आप को अकेला कर लेने, या अपनी मर्ज़ी करने का मार्ग बना लिया था - वह बस अपनी आँखें बन्द कर लेती थी। कैथरीन को लगता था कि यदि वह किसी को देख नहीं पा रही है तो कोई और भी उसे देख नहीं पा रहा है, और वह अपने आप में एकान्त में है। जब हम उसे कार में लेकर कहीं जाते और कोई नया अनजान व्यक्ति उससे हैलो करता, तब वह यही करती; यदि खाने के समय उसे मेज़ पर से दिए जा रहे भोजन का इन्कार करना होता तब भी वह यही करती और जब हम रात में उससे कहते कि अब उसके सोने का समय हो गया है तो हमें नज़रन्दाज़ करने के लिए भी वह यही करती।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, योना ने भी अपने आप को परमेश्वर से छुपाने का कुछ ऐसा ही तरीका निकाला था, लेकिन जैसे हमारी बेटी कैथरीन का तरीका सफल नहीं होने पाया, योना का तरीका भी सफल नहीं हुआ। परमेश्वर ने योना से कहा कि वह निनवे जाकर वहाँ के लोगों के मध्य परमेश्वर के नाम से पश्चाताप करने का प्रचार करे क्योंकि उनके पाप के कारण निनवे के लोगों का विनाश आने को था। लेकिन योना निनवे के लोगों से बैर रखता था और वह निनवे जाने की बजाए उसकी विपरीत दिशा में चला गया, अपने आप को परमेश्वर से छिपा लेने का प्रयास करने लगा। लेकिन योना ने शीघ्र ही जान लिया कि वह परमेश्वर से छिप कर कहीं नहीं जा सकता है; ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ परमेश्वर उसे देख नहीं सकता है। बाइबल ऐसी कहानियों से भरी पड़ी है जिनमें परमेश्वर ने उन लोगों को ढूँढ़ लिया जो उससे छुपना चाहते थे (निर्गमन 2:11-36; 1 राजा 19:1-7; प्रेरितों 9:1-19)।

   हो सकता है कि आपने भी परमेश्वर से छिपने का, यह समझने का प्रयास किया हो कि परमेश्वर आपको देख नहीं सकता है। लेकिन यह जान लीजिए, यदि एक बलवाई भविष्यद्वक्ता योना द्वारा एक विशाल मछली के पेट से करी गई प्रार्थना को परमेश्वर सुन सकता है, तो फिर आप चाहे जहाँ भी हों, उस स्थान से परमेश्वर आप को भी भली-भांति देख और सुन सकता है; जो भी आपने किया या कहा है, परमेश्वर को वह सब पता है।

   लेकिन यह कोई भयभीत होने की नहीं, वरन बड़ी शान्ति और सुख की बात है - वह हर समय हर स्थान पर सदा विद्यमान सर्वज्ञानी परमेश्वर है जो हमारी प्रत्येक बात, प्रत्येक भावना, प्रत्येक बुराई को जानने के बावजुद हम से प्रेम करता है, प्रभु यीशु मसीह में होकर वह हमें अपने साथ ले लेना चाहता है, हमारी देखभाल करना चाहता है और हमारे लिए भलाई ही करना चाहता है। - रैंडी किल्गोर


जब तक परमेश्वर की नज़र हम पर बनी हुई है, हमें अपने आस-पास की
 परिस्थितियों और परेशानियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। - भजन 139:7-10

बाइबल पाठ: योना 1:1-2:1
Jonah 1:1 यहोवा का यह वचन अमितै के पुत्र योना के पास पहुंचा, 
Jonah 1:2 उठ कर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है। 
Jonah 1:3 परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और यापो नगर को जा कर तर्शीश जाने वाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ हो कर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।
Jonah 1:4 तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था। 
Jonah 1:5 तब मल्लाह लोग डर कर अपने अपने देवता की दोहाई देने लगे; और जहाज में जो व्यापार की सामग्री थी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हल्का हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर सो गया था, और गहरी नींद में पड़ा हुआ था। 
Jonah 1:6 तब मांझी उसके निकट आकर कहने लगा, तू भारी नींद में पड़ा हुआ क्या करता है? उठ, अपने देवता की दोहाई दे! सम्भव है कि परमेश्वर हमारी चिन्ता करे, और हमारा नाश न हो।
Jonah 1:7 तब उन्होंने आपस में कहा, आओ, हम चिट्ठी डाल कर जान लें कि यह विपत्ति हम पर किस के कारण पड़ी है। तब उन्होंने चिट्ठी डाली, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली। 
Jonah 1:8 तब उन्होंने उस से कहा, हमें बता कि किस के कारण यह विपत्ति हम पर पड़ी है? तेरा उद्यम क्या है? और तू कहां से आया है? तू किस देश और किस जाति का है? 
Jonah 1:9 उसने उन से कहा, मैं इब्री हूं; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिसने जल स्थल दोनों को बनाया है, उसी का भय मानता हूं। 
Jonah 1:10 तब वे निपट डर गए, और उस से कहने लगे, तू ने यह क्या किया है? वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उसने आप ही उन को बता दिया था।
Jonah 1:11 तब उन्होंने उस से पूछा, हम तेरे साथ क्या करें जिस से समुद्र शान्त हो जाए? उस समय समुद्र की लहरें बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:12 उसने उन से कहा, मुझे उठा कर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र शान्त पड़ जाएगा; क्योंकि मैं जानता हूं, कि यह भारी आंधी तुम्हारे ऊपर मेरे ही कारण आई है। 
Jonah 1:13 तौभी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएं, परन्तु पहुंच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरुद्ध बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:14 तब उन्होंने यहोवा को पुकार कर कहा, हे यहोवा हम बिनती करते हैं, कि इस पुरूष के प्राण की सन्ती हमारा नाश न हो, और न हमें निर्दोष की हत्या का दोषी ठहरा; क्योंकि हे यहोवा, जो कुछ तेरी इच्छा थी वही तू ने किया है। 
Jonah 1:15 तब उन्होंने योना को उठा कर समुद्र में फेंक दिया; और समुद्र की भयानक लहरें थम गईं। 
Jonah 1:16 तब उन मनुष्यों ने यहोवा का बहुत ही भय माना, और उसको भेंट चढ़ाई और मन्नतें मानीं।
Jonah 1:17 यहोवा ने एक बड़ा सा मच्छ ठहराया था कि योना को निगल ले; और योना उस मच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा।
Jonah 2:1 तब योना ने उसके पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर के कहा 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 50-52
  • 1 थिस्सलुनीकियों 5


रविवार, 16 अक्टूबर 2016

रहस्यमय मार्ग


   मैं और मेरी पत्नि हमारी बेटी से मिलने जाने के लिए 400 मील की सड़क यात्रा पर निकले। चलते समय मैंने बेटी के घर को हमारा गन्तव्य बनाकर जी.पी.एस. को सेट कर दिया जिससे वह हमें रास्ता दिखाता रहे। यात्रा के दौरान, एक स्थान पर आकर जी.पी.एस. ने ना जाने क्यों हमें मुख्य-अन्तर्राज्यमार्ग से हटाकर एक सह-मार्ग पर डाल दिया, जिससे हमें एक शहर के बाहर से चक्कर लगाकर फिर उसी मुख्य-अन्तर्राज्यमार्ग पर लौटकर आना पड़ा। मैं जी.पी.एस. द्वारा हमें दिलाए गए इस चक्कर को लेकर असामंजस में था, कि क्यों हमें एक सही और अच्छे-खासे अन्तर्राज्यमार्ग से पहले हटाया गया और फिर वापस उसी पर लाया गया। मुझे इस बात का उत्तर कभी नहीं मिल पाया, लेकिन हम उसी जी.पी.एस. की सहायता से अपनी बेटी के घर भी पहुँच गए और फिर वापसी की यात्रा में भी उसी जी.पी.एस. के सहारे सही-सलामत अपने घर तक भी आ गए।

   इससे मुझे जीवन के मार्गों में अनेपक्षित आने वाले चक्करों के बारे में सोचने को भी मिला। हमें लगता है कि हम अपनी जीवन यात्रा में एक सुगम और सही मार्ग पर चले जा रहे हैं, और अचानक ही किसी परिस्थिति या घटना के द्वारा परमेश्वर हमें एक अन्य अनजान मार्ग पर मोड़ देता है। यह कोई बीमारी, कार्यस्थल अथवा घर में उत्पन्न होने वाली कोई विषम परिस्थिति, या कोई अनेपक्षित त्रासदी हो सकती है। हमें समझ नहीं आता कि परमेश्वर ने हमारे जीवनों में ये उथल-पुथल क्यों आने दी, या उस उथल-पुथल का उद्देश्य क्या है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख नायक अब्राहम से परमेश्वर ने कहा, "यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा" (उत्पत्ति 12:1)। उस समय अवश्य ही अब्राहाम ने सोचा तो होगा कि परमेश्वर उसके अच्छे-खासे घर-परिवार को उखाड़ कर एक रेगिस्तान और बियाबान में क्यों ले जा रहा है; परन्तु उसने परमेश्वर पर तथा परमेश्वर के उद्देश्यों तथा मार्गों पर विश्वास रखा और परमेश्वर के कहे अनुसार निकल पड़ा।

   एक जी.पी.एस. गलतियाँ कर सकता है, परन्तु परमेश्वर नहीं। परमेश्वर के लिए भजनकार ने कहा है, "हमारे पुरखा तुझी पर भरोसा रखते थे; वे भरोसा रखते थे, और तू उन्हें छुड़ाता था" (भजन 22:4)। परमेश्वर हमारे जीवन के हर मार्ग पर, हर पल हमारे साथ रहता है, हमारा मार्गदर्शन करता है और हमारी भलाई के लिए ही प्रत्येक कार्य को करता है, होने देता है; उसके मार्ग रहस्यमय हो सकते हैं परन्तु हमारे लिए सदा सही और लाभदायक भी होते हैं। - डेव ब्रैनन


यदि हम मार्ग को जानने वाले के साथ बने रहें तो फिर हमें मार्ग को जानने की आवश्यकता नहीं है।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:1-10; 13:1
Genesis 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। 
Genesis 12:2 और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा। 
Genesis 12:3 और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे। 
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था। 
Genesis 12:5 सो अब्राम अपनी पत्नी सारै, और अपने भतीजे लूत को, और जो धन उन्होंने इकट्ठा किया था, और जो प्राणी उन्होंने हारान में प्राप्त किए थे, सब को ले कर कनान देश में जाने को निकल चला; और वे कनान देश में आ भी गए। 
Genesis 12:6 उस देश के बीच से जाते हुए अब्राम शकेम में, जहां मोरे का बांज वृक्ष है, पंहुचा; उस समय उस देश में कनानी लोग रहते थे। 
Genesis 12:7 तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा: और उसने वहां यहोवा के लिये जिसने उसे दर्शन दिया था, एक वेदी बनाई। 
Genesis 12:8 फिर वहां से कूच कर के, वह उस पहाड़ पर आया, जो बेतेल के पूर्व की ओर है; और अपना तम्बू उस स्थान में खड़ा किया जिसकी पच्छिम की ओर तो बेतेल, और पूर्व की ओर ऐ है; और वहां भी उसने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई: और यहोवा से प्रार्थना की 
Genesis 12:9 और अब्राम कूच कर के दक्खिन देश की ओर चला गया।
Genesis 12:10 और उस देश में अकाल पड़ा: और अब्राम मिस्र देश को चला गया कि वहां परदेशी हो कर रहे -- क्योंकि देश में भयंकर अकाल पड़ा था। 
Genesis 13:1 तब अब्राम अपनी पत्नी, और अपनी सारी सम्पत्ति ले कर, लूत को भी संग लिये हुए, मिस्र को छोड़ कर कनान के दक्खिन देश में आया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 47-49
  • 1 थिस्सलुनीकियों 4


शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

उलट दृष्टिकोण


   अपने भ्रमण के समय में, मैंने भारत में कोढ़ के रोगियों के साथ प्रभु परमेश्वर की उपासना करी है। कोढ़ की चिकित्सा से संबंधित अधिकांशतः प्रगति उन मसीही विश्वासी मिशनरी चिकित्सकों के प्रयासों के कारण हुई है जो इस रोग के रोगियों के मध्य रहने, उनका इलाज, और अपने लिए इस भयावह रोग से ग्रसित होने का जोखिम उठाने के लिए तैयार थे। इसी कारण अधिकांश कुष्ठ रोग आश्रमों में सक्रीय और जीवन्त मसीही मण्डलियाँ देखी जा सकती हैं। म्याँमार में मैं एड्स रोग से अनाथ हुए बच्चों के आश्रम में गया, जहाँ मसीही विश्वासी स्वयंसेवक उन बच्चों को वह पारिवारिक स्नेह और दुलार देने में प्रयत्नरत हैं जो उन बच्चों से इस रोग ने चुरा लिया है। जिन सबसे अधिक उत्साह से भरी चर्च अराधना सभाओं में मैं सम्मिलित हुआ हूँ वह थीं दक्षिण अमेरिका के देश चिली और पेरू में, वहाँ के राजकीय जेलों के अन्दर, कैदियों के साथ करी गई परमेश्वर की आराधना सभाएं। मैंने देखा है कि संसार के तिरिस्कृत, उपेक्षित, कुचले हुए, नीच समझे जाने वाले लोगों में परमेश्वर का राज्य जड़ पकड़ता, बढ़ता और मज़बूत होता है।

   यदि हम मसीही विश्वासी अपने लिए परमेश्वर की बुलाहट को गंभीरता से लेते हैं, तो हमें संसार को संसार से उलट दृष्टिकोण से देखना होगा, जैसा हमारे प्रभु परमेश्वर ने किया है। बजाए इसके कि हम उन लोगों को खोजें जो संसाधन-संपन्न हैं, जो हमारे लिए कुछ उपकार और भलाई कर सकते हैं, हमें उन लोगों को खोजना होगा जिनके पास संसाधन या संपन्नता नहीं है; उन लोगों के पास जाना होगा जो बलवान नहीं वरन कमज़ोर हैं; जो स्वस्थ नहीं वरन रोगी हैं - शारीरिक और आत्मिक दोनों ही रोगों के द्वारा। क्या परमेश्वर ऐसे ही लोगों को चुनकर अपने निकट नहीं बुलाता है? क्या प्रभु यीशु ने दो टूक नहीं कहा है: "उसने यह सुनकर उन से कहा, वैद्य भले चंगों को नहीं परन्तु बीमारों को अवश्य है। सो तुम जा कर इस का अर्थ सीख लो, कि मैं बलिदान नहीं परन्तु दया चाहता हूं; क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं" (मत्ती 9:12-13)।

   परमेश्वर के दृष्टिकोण को समझने और अपनाने के लिए, प्रभु यीशु के समान, संसार को संसार के समान नहीं वरन संसार से उलट दृष्टिकोण से देखें। - फिलिप यैन्सी


क्या आप प्रभु यीशु की नज़रों से ज़रूरतमन्द संसार को देखने पाते हैं?

हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - 1 कुरिन्थियों 1:26-27

बाइबल पाठ: मत्ती 8:1-4; 9:9-13
Matthew 8:1 जब वह उस पहाड़ से उतरा, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। 
Matthew 8:2 और देखो, एक कोढ़ी ने पास आकर उसे प्रणाम किया और कहा; कि हे प्रभु यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है। 
Matthew 8:3 यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ, और कहा, मैं चाहता हूं, तू शुद्ध हो जा और वह तुरन्त कोढ़ से शुद्ध हो गया। 
Matthew 8:4 यीशु ने उस से कहा; देख, किसी से न कहना परन्तु जा कर अपने आप को याजक को दिखला और जो चढ़ावा मूसा ने ठहराया है उसे चढ़ा, ताकि उन के लिये गवाही हो। 
Matthew 9:9 वहां से आगे बढ़कर यीशु ने मत्ती नाम एक मनुष्य को महसूल की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। वह उठ कर उसके पीछे हो लिया।
Matthew 9:10 और जब वह घर में भोजन करने के लिये बैठा तो बहुतेरे महसूल लेने वाले और पापी आकर यीशु और उसके चेलों के साथ खाने बैठे। 
Matthew 9:11 यह देखकर फरीसियों ने उसके चेलों से कहा; तुम्हारा गुरू महसूल लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाता है? 
Matthew 9:12 उसने यह सुनकर उन से कहा, वैद्य भले चंगों को नहीं परन्तु बीमारों को अवश्य है। 
Matthew 9:13 सो तुम जा कर इस का अर्थ सीख लो, कि मैं बलिदान नहीं परन्तु दया चाहता हूं; क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 45-46
  • 1 थिस्सलुनीकियों 3


शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

लालसा


   मेरी सहेली कैथी अपनी बेटी और 4 माह के नाती ऑलिवर के साथ एक सप्ताह की छुट्टी बिताने गई थी; छुट्टी स्माप्त होने पर उसे उनसे विदा लेकर उसे वापस आना पड़ा, तब तक के लिए जब तक फिर मिलने जाने का अवसर बने। उस ने अपना यह अनुभव लिख कर मुझ से साझा किया; उसने लिखा, "ऐसे मधुर पुनःमिलन की यादों से मुझे स्वर्ग में होने की लालसा होती है। वहाँ हमें यादें अपने मन-मस्तिष्क में संजोनी नहीं पड़ेंगी। वहाँ हमें यह प्रार्थना नहीं करनी पड़ेगी कि समय धीमी गति से बीते और दिन लंबे हों। वहाँ हमारे ’हैलो’ कभी ’गुडबाय’ (अलविदा) नहीं बनेंगे। स्वर्ग हमारे लिए सदाकाल के ’हैलो’ का स्थान होगा, और मुझे इसकी प्रतीक्षा करना भारी हो रहा है।" कैथी पहली बार नानी बनी है, और अधिकाधिक अपने नाती के साथ होने की उसकी लालसा समझ में आती है। वह हर उस पल के लिए धन्यवादी है जो वह अपने नाती के साथ बिताने पाती है; और उस धन्य आशा के लिए भी जब वह स्वर्ग में प्रीय जनों के साथ होगी और उस आनन्दमय अद्भुत समय का फिर कभी अन्त नहीं होगा।

   हमें अपने भले दिन बहुत छोटे और बुरे दिन बहुत लंबे प्रतीत होते हैं, लेकिन दोनों ही प्रकार के दिन हम मसीही विश्वासियों के दिलों में आने वाले स्वर्ग के सर्वोत्तम दिनों की लालसा जागृत करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कहा कि वह और उसके साथ कुरिन्थुस की मसीही मण्डली के मसीही विश्वासी भी संसार और शरीर को छोड़कर अपने स्वर्गीय घर में पहुँच जाने की लालसा रखते हैं: "इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें" (2 कुरिन्थियों 5:२)। यद्यपि इस जीवन में प्रभु परमेश्वर हर समय हमारे साथ ही है, अभी हम उसे प्रत्यक्ष देख नहीं पाते हैं; अभी हम विश्वास के सहारे जीते हैं ना कि रूप को देखकर (पद 7)।

   परमेश्वर ने हम मनुष्यों को अपने साथ संगति में रहने के लिए बनाया है (पद 5); इसीलिए उसने प्रभु यीशु मसीह में मिलने वाली पापों की क्षमा और सेंत-मेंत उद्धार के द्वारा हमारे लिए इस संगति में आने का मार्ग भी तैयार करके दे दिया है; ताकि स्वर्ग में उसके तथा अन्य मसीही विश्वासियों के साथ हम सदाकाल के ’हैलो’ की स्थिति में रहें, किसी से भी कभी विदा होने की कोई संभावना ही ना हो। यही हमारे लिए परमेश्वर की और हम मसीही विश्वासियों की परमेश्वर तथा प्रीय जनों के लिए लालसा है। - ऐनी सेटास


अभी हम प्रभु यीशु को बाइबल में होकर देखते हैं; तब प्रत्यक्ष देखेंगे।

पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है। - इब्रानियों 11:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:15-5:8
2 Corinthians 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। 
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं। 
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2


गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

बोल


   आपने यह कथन सुना होगा, "समयानुसार कहना या करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।" परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, सही समयानुसार बोलना या चुप रहना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। अपने अनुभवों के आधार पर उन अवसरों के बारे में सोचें जब परमेश्वर ने अनायास ही आपको किसी को तरो-ताज़ा करने के लिए उपयुक्त बोल दिए; या ऐसे अवसरों को जब आप कुछ बोलना चाहते थे किंतु आपका अनेपक्षित रीति से शान्त ही बने रहना आपके लिए अधिक बुद्धिमतापूर्ण ठहरा।

   बाइबल बताती है कि अन्य बातों के समान बोलने या चुप रहने का भी सही समय होता है: "फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है" (सभोप्देशक 3:7)। राजा सुलेमान ने भली-भांति बोले गए भले बोलों की उपमा चांदी में जड़े गए सुनहरे सेबों से दी है (नीतिवचन 25:11-12); अर्थात सुन्दर, बहुमूल्य और बेशकीमती कलाकृति के समान। बोलने के सही समय की पहचान रखना, बोलने तथा सुनने वालों, दोनों ही के लिए लाभकारी होता है; चाहे वे बोल प्रेम, प्रोत्साहन, प्रशंसा के हों या ताड़ना अथवा डाँट के। इसी प्रकार शान्त रहने का भी समय और उपयोगिता होती है; जब मन किसी का अपमान करने, उसे नीचा दिखाने या इधर-उधर उसकी बुराई करने को उकसा रहा हो, तो बुद्धिमान राजा सुलेमान के कहे अनुसार, अपनी ज़ुबान पर लगाम देना और शान्त रहने के उचित समय को पहचानना बुद्धिमतापूर्ण होता है: "जो अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता है, वह निर्बुद्धि है, परन्तु समझदार पुरूष चुपचाप रहता है। जो लुतराई करता फिरता वह भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है" (नीतिवचन 11:12-13)। जब बड़बोला हो कर या क्रोधित हो कर पाप कर जाने की लालसा मन में उठती है, वह चाहे किसी मनुष्य के विरोध में हो या परमेश्वर के, तो बोलने में धैर्यवन्त होना ही गलती कर बैठने का प्रतिरोधक होता है: "जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है" (नीतिवचन 10:19); "हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब 1:19)।

   कई बार यह जान पाना कि क्या कहें और कब कहें कठिन होता है। ऐसे में हम मसीही विश्वासियों की अगुवाई हमारे अन्दर बसने वाला परमेश्वर का आत्मा करता है और सही निर्णय करने में वही हमारा सहायक होता है। वही हमें सही समय पर सही रीति से सही बोल का प्रयोग करने की सद्बुद्धि देता है, जिससे हम औरों की भलाई और अपने परमेश्वर पिता की महिमा का कारण ठहरें। - मार्विन विलियम्स


सही समय पर कहे गए सही शब्द उत्तम कलाकृति के समान होते हैं।

जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों। - सभोपदेशक 5:1-2

बाइबल पाठ: नीतिवचन 25:11-15
Proverbs 25:11 जैसे चान्दी की टोकरियों में सोनहले सेब हों वैसे ही ठीक समय पर कहा हुआ वचन होता है। 
Proverbs 25:12 जैसे सोने का नथ और कुन्दन का जेवर अच्छा लगता है, वैसे ही मानने वाले के कान में बुद्धिमान की डांट भी अच्छी लगती है। 
Proverbs 25:13 जैसे कटनी के समय बर्फ की ठण्ड से, वैसे ही विश्वासयोग्य दूत से भी, भेजने वालों का जी ठण्डा होता है। 
Proverbs 25:14 जैसे बादल और पवन बिना दृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ-मूठ दान देने वाले का बड़ाई मारना होता है।
Proverbs 25:15 धीरज धरने से न्यायी मनाया जाता है, और कोमल वचन हड्डी को भी तोड़ डालता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1


बुधवार, 12 अक्टूबर 2016

शरणस्थान


   मलेशिया के क्लांग शहर के एक चर्च में प्रवेश करते समय, वहाँ बाहर लगे एक स्वागत-चिन्ह ने मेरा ध्यान खींचा; उस पर लिखा था: "बोझ से दबे लोगों के लिए शरणस्थान।"

   प्रभु यीशु मसीह के मन को प्रतिबिंबित करने वाली बातों में से शायद ही कोई और बात इससे बेहतर होगी, यदि प्रभु यीशु मसीह की विश्वासी मण्डली थके हुओं के लिए विश्राम स्थल और उनके बोझों को हलका करने वाली हो। यह प्रभु यीशु की सेवकाई में बहुत महत्वपूर्ण है; प्रभु यीशु ने स्वयं ही कहा है, "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   प्रभु यीशु ने यह वायदा किया है कि वह हमारे भारी बोझों को लेकर उनके स्थान पर अपना हलका बोझ हमें प्रदान कर देगा: "मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है" (मत्ती 11:29-30)।

   उसके इस वायदे के पीछे उसकी महान सामर्थ है; हमारे बोझ चाहे जैसे भी हों, कितने भी भारी क्यों ना हों, मसीह यीशु में हम परमेश्वर के पुत्र के मज़बूत कंधों का सहारा और सहायता पाते हैं, जो उन बोझों को स्वयं उठा लेता है और उनके स्थान पर अपने कार्य के हलके बोझ को हमें सौंप देता है।

   मसीह यीशु, जिसने हम से अनन्त काल के प्रेम से प्रेम किया है, हमारे संघर्षों को जानता है, और हम भरोसा रख सकते हैं कि वह हमें ऐसा विश्राम प्रदान करेगा जैसा हम अपने प्रयासों से कभी प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उसकी सामर्थ हमारी कमज़ोरियों के लिए काफी है, इसी कारण वह सारे संसार के सभी "बोझ से दबे लोगों के लिए शरणस्थान" है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर बेचैन लोगों को बुलाता है 
जिससे वे उसमें स्थाई और अनन्तकालीन चैन सेंत-मेंत पाएं।

यहोवा जो तेरा छुड़ाने वाला और इस्राएल का पवित्र है, वह यों कहता है, मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुझे तेरे लाभ के लिये शिक्षा देता हूं, और जिस मार्ग से तुझे जाना है उसी मार्ग पर तुझे ले चलता हूं। भला होता कि तू ने मेरी आज्ञाओं को ध्यान से सुना होता! तब तेरी शान्ति नदी के समान और तेरा धर्म समुद्र की लहरों के नाईं होता; - यशायाह 48:17-18

बाइबल पाठ: मत्ती 11:25-30
Matthew 11:25 उसी समय यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है। 
Matthew 11:26 हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा। 
Matthew 11:27 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे। 
Matthew 11:28 हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। 
Matthew 11:29 मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। 
Matthew 11:30 क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40
  • कुलुस्सियों 4