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सोमवार, 19 जून 2017

आदर


   प्रसिद्ध लेखक चेम पोटोक ने अपने उपन्यास The Chosen का आरंभ न्यू यॉर्क शहर में दो यहूदी बेसबॉल टीमों के बीच एक स्पर्धा से किया। उस उपन्यास के मुख्य चरित्र, रयूवेन वॉलटर ने ध्यान किया कि प्रतिस्पर्धी दल की पोशाक में अनुपम बात है - प्रत्येक खिलाड़ी की कमीज़ से लटकते हुए चार फीते। उन फीतों को देखकर रयूवेन को स्मरण हो आता है कि परमेश्वर ने यहूदियों को कड़ाई से अपने वचन की आज्ञाकारिता के लिए निर्देश दिए थे, और उस वचन को उन्हें स्मरण दिलाते रहने के लिए उन फीतों को अपने वस्त्रों पर लगाने को कहा था।

   इन फीतों का इतिहास, परमेश्वर की मूसा द्वारा दी गई व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। मूसा को इस्त्राएलियों के लिए अपनी व्यवस्था देते समय परमेश्वर ने कहा था कि वे नीले धागे से बने फीते बनाएं और उन्हें अपने बाहरी वस्त्र के चारों कोनों पर टाँक लें (गिनती 15:38)। परमेश्वर ने आगे कहा, "और वह तुम्हारे लिये ऐसी झालर ठहरे, जिस से जब जब तुम उसे देखो तब तब यहोवा की सारी आज्ञाएं तुम हो स्मरण आ जाएं; और तुम उनका पालन करो, और तुम अपने अपने मन और अपनी अपनी दृष्टि के वश में हो कर व्यभिचार न करते फिरो जैसे करते आए हो" (गिनती 15:39)। परमेश्वर की आज्ञाकारिता, उसके प्रति उसके लोगों के आदर और श्रद्धा का सूचक है।

   परमेश्वर द्वारा इस्त्राएलियों को स्मरण दिलाते रहने के लिए प्रयुक्त विधि का आज हम मसीही विश्वासियों के लिए भी एक समानन्तर है - हमारा प्रभु यीशु मसीह। प्रभु यीशु मसीह ने हमारे लिए संपूर्ण व्यवस्था का पालन किया और परमेश्वर पिता की पूर्ण आज्ञाकारिता भी की (यूहन्ना 8:29)। इसीलिए परमेश्वर का वचन बाइबल हमें कहती है कि, "वरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाशाओं को पूरा करने का उपाय न करो" (रोमियों 13:14)। परमेश्वर के पुत्र और संपूर्ण जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु पर दृष्टि लगाए रखने से, हमें परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी बने रहने का भी स्मरण रहता है, जो उसके प्रति हमारे आदर को दिखाता है। - जैनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि मसीह आपके जीवन का केंद्र है, तो आप सदा उस ही पर ध्यान लगाए रखेंगे।

और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें। और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना। - व्यवस्थाविवरण 6:6-9

बाइबल पाठ: गिनती 15:37-41
Numbers 15:37 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, 
Numbers 15:38 इस्त्राएलियों से कह, कि अपनी पीढ़ी पीढ़ी में अपने वस्त्रों के कोर पर झालर लगाया करना, और एक एक कोर की झालर पर एक नीला फीता लगाया करना; 
Numbers 15:39 और वह तुम्हारे लिये ऐसी झालर ठहरे, जिस से जब जब तुम उसे देखो तब तब यहोवा की सारी आज्ञाएं तुम हो स्मरण आ जाएं; और तुम उनका पालन करो, और तुम अपने अपने मन और अपनी अपनी दृष्टि के वश में हो कर व्यभिचार न करते फिरो जैसे करते आए हो। 
Numbers 15:40 परन्तु तुम यहोवा की सब आज्ञाओं को स्मरण कर के उनका पालन करो, और अपने परमेश्वर के लिये पवित्र बनो। 
Numbers 15:41 मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हूं, जो तुम्हे मिस्र देश से निकाल ले आया कि तुम्हारा परमेश्वर ठहरूं; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13
  • प्रेरितों 4:23-37


रविवार, 18 जून 2017

विफलता


   द्वितीय विश्व-युद्ध के समय में ब्रिटेन के प्रधान-मंत्री विंस्टन चर्चिल को पता था कि युद्ध के दिनों की परेशानियों में अपने देश के लोगों को कैसे उभारा जाए। जून 18, 1940 को दिए गए अपने एक भाषण में उन्होंने कहा, "हिटलर जानता है कि उसे या तो हमें तोड़ना पड़ेगा...या फिर वह युद्ध हार जाएगा...इसलिए आईए हम अपने आप को दृढ़ करें...और ऐसे व्यवहार करें, कि यदि ब्रिटिश साम्राज्य एक हज़ार वर्ष तक भी बना रहे तो भी लोग कहें कि ’वह उनकी सर्वोत्तम घड़ी थी!’ "

   हम सभी चाहते हैं कि हम अपने सर्वोत्तम पल के लिए स्मरण किए जाएं; परन्तु कभी ऐसा भी होता है कि हम अपनी विफलताओं को अपने बारे में बताने देते हैं। संभवतः प्रेरित पतरस के लिए सर्वोत्तम पल वह था जब उसने प्रभु यीशु मसीह के विषय कहा था, "शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है" (मत्ती 16:16)। परन्तु यही पतरस, कुछ ही समय पश्चात अपने सभी दावों के बावजूद, प्रभु यीशु मसीह को अकेला छोड़कर अपनी जान बचा कर भाग गया और फिर तीन बार प्रभु को जानने से भी इनकार किया। बाद में पतरस फूट-फूट कर रोया और उसने अपनी इस कायरता के लिए पश्चताप किया (मत्ती 26:75; यूहन्ना 18)।

   पतरस के समान ही हम सभी कभी न कभी आवश्यकता के समय पूरे नहीं पाए जाते हैं, विफल हो जाते हैं -  अपने संबंधों में, पाप से अपनी लड़ाई में, परमेश्वर के प्रति अपनी विश्वासयोग्यता में। विंस्टन चर्चिल ने एक बात और कही थी, "विफलता घातक नहीं होती।" परमेश्वर का धन्यवाद हो कि यह बात हमारे आत्मिक जीवन में भी लागू होती है, आत्मिक जीवन के लिए भी सत्य है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम आगे पढ़ते हैं कि पश्चतापी पतरस को प्रभु यीशु ने न केवल उसकी विफलताओं के लिए क्षमा किया, वरन उसे नई ज़िम्मेदारियाँ भी दीं (यूहन्ना 21), और आगे चलकर पतरस को प्रभावी प्रचारक तथा हज़ारों को प्रभु के पास लाने वाला भी बनाया (प्रेरितों 2)।

   विफल होना अन्त नहीं है। यदि हम सच्चे पश्चताप के साथ परमेश्वर की ओर मुड़ते हैं, परमेश्वर हमें फिर से अपने लिए उपयोगी और अपनी महिमा का पात्र बना सकता है। - सिंडी हैस कैस्पर


जब परमेश्वर क्षमा करता है, 
तब वह पाप को हटा देता है और आत्मा को चंगा कर देता है।

यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:8-9

बाइबल पाठ: यूहन्ना 18:15-27
John 18:15 शमौन पतरस और एक और चेला भी यीशु के पीछे हो लिये: यह चेला महायाजक का जाना पहचाना था और यीशु के साथ महायाजक के आंगन में गया। 
John 18:16 परन्तु पतरस बाहर द्वार पर खड़ा रहा, तब वह दूसरा चेला जो महायाजक का जाना पहचाना था, बाहर निकला, और द्वारपालिन से कहकर, पतरस को भीतर ले आया। 
John 18:17 उस दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, क्या तू भी इस मनुष्य के चेलों में से है? उसने कहा, मैं नहीं हूं। 
John 18:18 दास और प्यादे जाड़े के कारण को एले धधकाकर खड़े ताप रहे थे और पतरस भी उन के साथ खड़ा ताप रहा था।
John 18:19 तक महायाजक ने यीशु से उसके चेलों के विषय में और उसके उपदेश के विषय में पूछा। 
John 18:20 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि मैं ने जगत से खोल कर बातें की; मैं ने सभाओं और आराधनालय में जहां सब यहूदी इकट्ठे हुआ करते हैं सदा उपदेश किया और गुप्‍त में कुछ भी नहीं कहा। 
John 18:21 तू मुझ से क्यों पूछता है? सुनने वालों से पूछ: कि मैं ने उन से क्या कहा? देख वे जानते हैं; कि मैं ने क्या क्या कहा 
John 18:22 तब उसने यह कहा, तो प्यादों में से एक ने जो पास खड़ा था, यीशु को थप्पड़ मारकर कहा, क्या तू महायाजक को इस प्रकार उत्तर देता है। 
John 18:23 यीशु ने उसे उत्तर दिया, यदि मैं ने बुरा कहा, तो उस बुराई पर गवाही दे; परन्तु यदि भला कहा, तो मुझे क्यों मारता है? 
John 18:24 हन्ना ने उसे बन्‍धे हुए काइफा महायाजक के पास भेज दिया।
John 18:25 शमौन पतरस खड़ा हुआ ताप रहा था। तब उन्होंने उस से कहा; क्या तू भी उसके चेलों में से है? उसने इन्कार कर के कहा, मैं नहीं हूं। 
John 18:26 महायाजक के दासों में से एक जो उसके कुटुम्ब में से था, जिसका कान पतरस ने काट डाला था, बोला, क्या मैं ने तुझे उसके साथ बारी में न देखा था? 
John 18:27 पतरस फिर इन्कार कर गया और तुरन्त मुर्ग ने बांग दी। 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 10-11
  • प्रेरितों 4:1-22


शनिवार, 17 जून 2017

जीभ


   मानव शरीर का सबसे शक्तिशाली अंग कौन सा है? कुछ का कहना है कि वह जीभ है। यह देखने में छोटी अवश्य है, परन्तु यह बहुत अधिक हानि पहुँचाने की क्षमता रखती है। जीभ माँसपेशियों से बना एक छोटा सा अंग है, जिसकी सहायता से हम खाते हैं, निगलते हैं, स्वाद लेते हैं, और पाचन क्रिया का आरंभ करते हैं। इसी की सहायता से हम बोलते भी हैं, और इसी से वह भी कह देते हैं जो नहीं कहना चाहिए। जीभ से ही चापलूसी, श्राप देना, झूठ बोलना, डींग मारना, और दूसरों को हानि पहुँचाना होता है; और यह तो जीभ के कार्यों की एक छोटी सी सूची है।

   यह बहुत ही खतरनाक अंग प्रतीत होता है; है न? लेकिन भली बात यह है कि ऐसा होना ज़रूरी भी नहीं है। जब हम अपना नियंत्रण परमेश्वर के पवित्र आत्मा के हाथों में समर्पित कर देते हैं तो वह हमारी जीभ को भी भले के लिए प्रयुकत कर सकता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि ऐसे समर्पित व्यक्ति अपने जीभ से परमेश्वर की धार्मिकता (भजन 35:28) तथा न्याय (भजन 37:30) के बारे में बता सकते हैं। परमेश्वर को समर्पित लोग, अपनी जीभ से सच बोलने वाले बन सकते हैं (भजन 15:2), प्रेम प्रदर्शित कर सकते हैं (1 यूहन्ना 3:18), और अपने पापों का अंगीकार (1 यूहन्ना 1:9) कर सकते हैं।

   बाइबल में नीतिवचन का लेखक जीभ द्वारा होने वाली बातों में से एक अति उत्तम बात के विषय लिखता है: "ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार का बोलना तलवार की नाईं चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं" (नीतिवचन 12:18)। ज़रा विचार करें, यदि हम अपनी जीभ का प्रयोग बुद्धिमानी से करें, दूसरों की हानि के लिए नहीं वरन उनकी चंगाई के लिए करें तो जिस परमेश्वर ने हमें और हमारी जीभ को बनाया है, हम उसकी कितनी महिमा और बड़ाई करने पाएंगे। - डेव ब्रैनन


इस कारण एक दूसरे को शान्‍ति दो, और एक दूसरे की उन्नति के कारण बनो, 
निदान, तुम ऐसा करते भी हो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:11

धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। - भजन 37:30

बाइबल पाठ: याकूब 3:5-12
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है। 
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। 
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं। 
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है। 
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं। 
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं। 
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए। 
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता। 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 7-9
  • प्रेरितों 3


शुक्रवार, 16 जून 2017

लंगर


   एस्टेला पायफ्रॉम ने शिक्षिका की नौकरी से सेवा-निवृत्ति प्राप्त करने के बाद एक बस खरीदी, उसमें कंप्यूटर और मेज़ें लगवाईं, और अब वह "ब्रिलियंट बस" नामक अपनी उस बस को फ्लौरिडा की पाम बीच काउन्टी की सड़कों पर चलाती है। इस बस के द्वारा वह ऐसे बच्चों को जिनके पास संसाधान नहीं हैं, अपनी पढ़ाई का गृह-कार्य करने तथा तकनीकी को सीखने का अवसर देती है। एस्टेला उन बच्चों को एक आशा और स्थिरता प्रदान कर रही है, जो एक बेहतर भविष्य के अपने सपनों को संसाधनों के अभाव में त्याग देने का विचार कर रहे हों।

   प्रथम ईसवीं में, सताव और निराशा का पहाड़ मसीही विश्वासियों पर टूट पड़ा था। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी गई पत्री के लेखक ने उन मसीही विश्वासियों को अपने भविष्य की आशा (2:1) पर अपने भरोसे को छोड़ न देने के लिए लिखा और आश्वस्त किया। उनकी यह आशा, अर्थात उध्दार तथा स्वर्ग में स्थान के लिए प्रभु परमेश्वर पर विश्वास, मसीह यीशु और उनके द्वारा क्रूस पर दिए गए अपने बलिदान पर आधारित थी। जब मृतकों से अपने पुनरुत्थान के बाद प्रभु ने स्वर्ग में प्रवेश किया, तब उन्होंने भविष्य के लिए उनकी इस आशा को सुनिश्चित कर दिया (6:19-20)।

   जैसे समुद्र में डाला गया लंगर, जहाज़ को इधर-उधर हो जाने से रोके रखता है, वैसे ही प्रभु यीशु की मृत्यु, पुनरुत्थान, और स्वर्गारोहण में लाया गया विश्वास भी एक मसीही विश्वासी के जीवन को स्थिरता तथा आशा प्रदान करता है। प्रभु यीशु मसीह पर आधारित भविष्य के लिए इस आशा को न तो हिलाया जा सकता है और न ही यह कभी हिलेगी।

   प्रभु यीशु हमारी आत्मा को एक ऐसा स्थिर लंगर प्रदान करता है जो हमें प्रभु परमेश्वर पर लाए गए विश्वास और अनन्तकाल की आशा से कभी भटकने नहीं देता है। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु ही हमारी आशा का लंगर है।

इस कारण चाहिए, कि हम उन बातों पर जो हम ने सुनी हैं और भी मन लगाएं, ऐसा न हो कि बहक कर उन से दूर चले जाएं। - इब्रानियों 2:1

बाइबल पाठ: इब्रानियों 6:13-20
Hebrews 6:13 और परमेश्वर ने इब्राहीम को प्रतिज्ञा देते समय जब कि शपथ खाने के लिये किसी को अपने से बड़ा न पाया, तो अपनी ही शपथ खाकर कहा। 
Hebrews 6:14 कि मैं सचमुच तुझे बहुत आशीष दूंगा, और तेरी सन्तान को बढ़ाता जाऊंगा। 
Hebrews 6:15 और इस रीति से उसने धीरज धर कर प्रतिज्ञा की हुई बात प्राप्त की। 
Hebrews 6:16 मनुष्य तो अपने से किसी बड़े की शपथ खाया करते हैं और उन के हर एक विवाद का फैसला शपथ से पक्का होता है। 
Hebrews 6:17 इसलिये जब परमेश्वर ने प्रतिज्ञा के वारिसों पर और भी साफ रीति से प्रगट करना चाहा, कि उसकी मनसा बदल नहीं सकती तो शपथ को बीच में लाया। 
Hebrews 6:18 ताकि दो बे-बदल बातों के द्वारा जिन के विषय में परमेश्वर का झूठा ठहरना अन्‍होना है, हमारा दृढ़ता से ढाढ़स बन्ध जाए, जो शरण लेने को इसलिये दौड़े है, कि उस आशा को जो साम्हने रखी हुई है प्राप्त करें। 
Hebrews 6:19 वह आशा हमारे प्राण के लिये ऐसा लंगर है जो स्थिर और दृढ़ है, और परदे के भीतर तक पहुंचता है।
Hebrews 6:20 जहां यीशु मलिकिसिदक की रीति पर सदा काल का महायाजक बन कर, हमारे लिये अगुआ की रीति पर प्रवेश हुआ है। 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47


गुरुवार, 15 जून 2017

ऊपर देखो


   हमारे घर के निकट के एक उद्यान में एक पगडंडी है जिस पर चलना मुझे बहुत अच्छा लगता है। उस पगडंडी के एक भाग से गार्डन ऑफ द गौड्स में स्थित लाल पत्थर की चट्टानों का विहंगम दृश्य दिखता है, जिनके पीछे 14,115 फुट ऊँची पाईक्स पीक नामक पर्वत चोटी दिखाई देती है और यह सारा दृश्य बड़ा ही मनोरम होता है। कभी-कभी, किसी समस्या में उलझा हुआ मैं उस भाग से अपना सिर झुकाए, नीचे सपाट पगडंडी को देखता हुआ चला जाता हूँ। ऐसे में, यदि मेरे आस-पास कोई और ना हो तो मैं ठिठक कर रुक भी जाता हूँ और ऊँची आवाज़ में अपने आप से कहता हूँ, "डेविड, ऊपर देखो!"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता नामक पुस्तक में कुछ भजन हैं (भजन 120-134) जिन्हें "यात्रा के गीत" कहा जाता है। ये वो भजन हैं जिन्हें इसत्राएल के लोग, जब वे तीनों वार्षिक तीर्थ-त्यौहारों को मनाने के लिए आते थे, तो यरुशलेम की ओर चढ़ते जाते हुए गाते थे। इनमें से भजन 121 का आरंभ एक प्रशन से होता है: "मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?" (पद 1), और अगले पद में उसका उत्तर भी दिया गया है, "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है" (पद 2)। हमारा सृष्टिकर्ता परमेश्वर ऐसा नहीं है जो हमसे अलग-थलग रहता हो, वरन वह हमारा ऐसा साथी है जो सदा हमारे साथ बना रहता है, हमारी परिस्थितियों के प्रति सदिव सजग रहता है (पद 3-7), हमारी जीवन यात्रा में, "अब से लेकर सदा तक" हमारा मार्गदर्शन एवं सुरक्षा प्रदान करता रहता है (पद 8)।

   जीवन के पथ पर हमारा अपने प्रभु परमेश्वर पर, जो हमारी सहायता का स्त्रोत है, अपनी दृष्टि लगाए रखना कितना आवश्यक है। जब भी हम अपनी परिस्थितियों या किसी परेशानी से अभिभूत और निराश अनुभव करते हैं, हमें भी रुक कर अपने आप से ऊँची आवाज़ में कहना चाहिए, "ऊपर देखो!" - डेविड मैक्कैसलैंड


अपनी सहायता के स्त्रोत, प्रभु परमेश्वर पर, अपनी दृष्टि सदा लगाए रखें।

परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। - भजन 46:1

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21


बुधवार, 14 जून 2017

संबंध


   शैरिल को पुस्तकें पढ़ना बहुत पसन्द है। जब अन्य टेलिविज़न देख रहे होते हैं या वीडियो गेम खेल रहे होते हैं, वह पूरी तनमयता के साथ किसी पुस्तक को पढ़ने में लगी होती है। उसकी इस प्रवृत्ति का प्रमुख श्रेय उसके बचपन से जुड़ा है। जब वह बच्ची थी, उसका परिवार बहुधा अपनी रिश्तेदारी के एक वृध्द दंपति के घर जाया करता था, और वह दंपति एक पुस्तकों की दुकान को चलाते थे। वहाँ शैरिल वृध्द अंकल एड की गोदी में बैठकर उन से सुनती रहती थी और वे उसे पुस्तकों के अद्भुत संसार की बातों तथा आनन्द को पढ़कर सुनाते रहते थे।

   सदियों पहले, जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में आया है, एक जवान व्यक्ति तिमुथियुस के कदम भी परमेश्वर के वचन को सीखने की राह पर डाल दिए गए। प्रेरित पौलुस द्वारा लिखित और उपलब्ध अंतिम पत्री में, पौलुस ने तिमुथियुस को स्मरण दिलाया कि उसके बचपन में ही उसकी नानी और माँ ने उसका परिचय परमेश्वर के वचन से करवाया था (2 तिमुथियुस 1:5), इसलिए, उसे अब मसीही विश्वास के मार्ग में दृढ़ होकर बने रहना और बढ़ते रहना है (2 तिमुथियुस 3:14-15)।

   एक मसीही विश्वासी के लिए, आत्मिक जीवन, परमेश्वर की निकटता तथा परमेश्वर के बारे में सीखते रहना सदा ही आनन्द तथा उन्नति का कारण होता है। इसके लिए स्वयं बाइबल को पढ़ना और अध्ययन करना बहुत आवश्यक है, परन्तु साथ ही हमें ऐसे मित्रों की भी आवश्यकता होती है जो हमें परमेश्वर के वचन के अध्ययन में प्रोत्साहित करें और हमें सिखाएं। इस कार्य में हम सब मसीही विश्वासियों की सहायता के लिए परमेश्वर ने अपने पवित्र आत्मा को हमें पहले से प्रदान कर दिया है।

   आज हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि हमारे मसीही विश्वास में बढ़ने और उन्नति करने में किसने हमारी सहायता की है। साथ ही यह भी विचार करना चाहिए कि इस कार्य में हम अब किसकी सहायता कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन का यह सीखना और सिखाना न केवल आपस में, वरन परमेश्वर के साथ भी हमारे संबंध को प्रगाढ़ करने का एक उत्तम तरीका है। - डेनिस फिशर


बाइबल पढ़ने से न केवल ज्ञान वर्धन, वरन मन का पापों से परिवर्तन भी होता है।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। - यूहन्ना 14:26

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 3:8-17
2 Timothy 3:8 और जैसे यन्नेस और यम्ब्रेस ने मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी सत्य का विरोध करते हैं: ये तो ऐसे मनुष्य हैं, जिन की बुध्दि भ्रष्‍ट हो गई है और वे विश्वास के विषय में निकम्मे हैं। 
2 Timothy 3:9 पर वे इस से आगे नहीं बढ़ सकते, क्योंकि जैसे उन की अज्ञानता सब मनुष्यों पर प्रगट हो गई थी, वैसे ही इन की भी हो जाएगी। 
2 Timothy 3:10 पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया। 
2 Timothy 3:11 और ऐसे दुखों में भी जो अन्‍ताकिया और इकुनियुम और लुस्‍त्रा में मुझ पर पड़े थे और और दुखों में भी, जो मैं ने उठाए हैं; परन्तु प्रभु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया। 
2 Timothy 3:12 पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। 
2 Timothy 3:13 और दुष्‍ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे। 
2 Timothy 3:14 पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था 
2 Timothy 3:15 और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। 
2 Timothy 3:16 हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। 
2 Timothy 3:17 ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 9-10
  • प्रेरितों 1


मंगलवार, 13 जून 2017

कार्य


   सोशल मीडिया बहुत सी बातों के लिए उपयोगी है, परन्तु संतुष्टि उन बातों में से एक नहीं है; कम से कम मेरे लिए तो नहीं। चाहे मेरे उद्देश्य भले हों, परन्तु फिर भी मैं मुझे निरंतर स्मरण कराने वाली उन बातों से निराश हो जाती हूँ कि मेरे निर्धारित उद्देश्यों को कोई और मुझसे पहले पूरा कर ले रहा है, या मुझसे बेहतर परिणामों के साथ पूरा कर ले रहा है। क्योंकि इस प्रकार की निराशा में पड़ना मेरी प्रवृत्ति है, इसलिए मैं अपने आप को बारंबार यह स्मरण दिलाती रहती हूँ कि जो कार्य परमेश्वर मुझसे करवाना चाहता है उसके लिए जो कुछ भी आवश्यक है वह सब उसने मुझे उपलब्ध करवा रखा है।

   इसका तात्पर्य है कि उस कार्य के लिए मुझे अधिक धन की आवश्यकता नहीं है, और न ही उसके सफल हो जाने के लिए किसी के आश्वासन की। न ही मुझे उस कार्य के लिए किसी नई नौकरी की और न ही वर्तमान से बेहतर कार्य स्थिति की आवश्यकता है। मुझे अन्य लोगों का अनुमोदन अथवा अनुमति भी नहीं चाहिए, न ही अधिक समय या बेहतर स्वास्थ्य चाहिए। संभव है कि उसके द्वारा सौंपे गए कार्य को करते हुए परमेश्वर इन में से कुछ बातें मुझे प्रदान कर दे, परन्तु अभी जो कुछ मुझे चाहिए वह सब उसने मेरे लिए उपलब्ध कर दिया है, क्योंकि जब वह कोई कार्य सौंपता है, तो उसके लिए आवश्यक संसाधन भी जुटा देता है। यह अब मेरा दायित्व है कि जो कार्य उसने मुझे सौंपा है उसे उन संसाधनों के उचित उपयोग द्वारा उसकी महिमा तथा दूसरों को आशीषित करने के लिए पूरा करूँ।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु और उनके शिष्य पतरस के मध्य इसी विषय से संबंधित एक वार्तालाप हुआ। मृतकों में से अपने पुनरुत्थान के बाद के दिनों में, एक प्रातः, गलील की झील के किनारे प्रभु यीशु ने चेलों को भोजन कराया और पतरस को आने वाले समय में उससे अपेक्षित सेवकाई के बारे में बताया तथा यह भी कि उसके जीवन के अन्त समय में क्या होगा। तब, वहाँ एकत्रित शिष्यों में से एक अन्य शिष्य की ओर संकेत करके पतरस ने प्रभु से पूछा, "उसका क्या होगा?" प्रभु यीशु ने उत्तर दिया, "तुझे इससे क्या?"

   यही प्रश्न मुझे अपने आप से पूछना होता है जब मैं अपनी तुलना किसी अन्य से करने लगती हूँ। प्रभु का तात्पर्य उस समय पतरस से, और अब मुझ से स्पष्ट है, "यह सोचना तेरा कार्य नहीं है; तू वह कर जो तुझे सौंपा गया है, और उसे वह करने दे जो उसे सौंपा गया है।" मेरा दायित्व, मेरा कार्य है कि मैं प्रभु यीशु का अनुसरण करूँ और उसके प्रति आज्ञाकारी तथा वफादार बनी रहूँ। - जूली ऐकैरमैन लिंक


दूसरों की ओर देखने से रोष आता है, 
प्रभु की ओर देखने से संतुष्टि और आशीष आती है।

यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो। - यूहन्ना 6:29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 21:12-22
John 21:12 यीशु ने उन से कहा, कि आओ, भोजन करो और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उस से पूछे, कि तू कौन है? क्योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यह प्रभु ही है। 
John 21:13 यीशु आया, और रोटी ले कर उन्हें दी, और वैसे ही मछली भी। 
John 21:14 यह तीसरी बार है, कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए।
John 21:15 भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उसने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा। 
John 21:16 उसने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है? उसने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर। 
John 21:17 उसने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा। 
John 21:18 मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍धकर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा। 
John 21:19 उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
John 21:20 पतरस ने फिरकर उस चेले को पीछे आते देखा, जिस से यीशु प्रेम रखता था, और जिसने भोजन के समय उस की छाती की और झुककर पूछा हे प्रभु, तेरा पकड़वाने वाला कौन है? 
John 21:21 उसे देखकर पतरस ने यीशु से कहा, हे प्रभु, इस का क्या हाल होगा? 
John 21:22 यीशु ने उस से कहा, यदि मैं चाहूं कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या? तू मेरे पीछे हो ले।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 6-8
  • यूहन्ना 21