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शनिवार, 11 नवंबर 2017

संगति


   हमारा एक मित्र किसी कार्य से हमारे शहर में आ रहा था। वह बहुत व्यस्त व्यक्ति था, और हमारे शहर में उसका कार्यक्रम भी बहुत व्यस्त था; परन्तु सारे दिन के कार्य के बाद वह हमारे साथ रात्रि का भोजन करने के लिए आधे घंटे के लिए आया। हमें उसके साथ बिताए गए इस समय से आनन्द मिला, परन्तु मुझे स्मरण है कि भोजन के दौरान मैं सोच रही थी कि हमें उसके समय के कुछ बचे हुए छोटे टुकड़े ही मिले। फिर मुझे ध्यान आया कि कितनी ही बार परमेश्वर को भी मेरे समय के बचे हुए कुछ छोटे टुकड़े ही मिलते हैं - कभी-कभी तो सोने से पहले के कुछ थकान भरे मिनिट ही।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, दानिय्येल, बहुत व्यस्त व्यक्ति था; वह बाबुल के राज्य का उच्च प्रशासनिक अधिकारी था, और मुझे पूरा विश्वास है कि उसका दिन भी अनेकों कार्यों से भरा रहता होगा। परन्तु उसने परमेश्वर के साथ समय बिताने की आदत बना रखी थी - वह प्रतिदिन तीन बार प्रार्थना करने, परमेश्वर की आराधना करने और उसका धन्यवाद करने में समय बिताता था। उसकी इस दिनचर्या ने उसे परमेश्वर में दृढ़ विश्वास विकसित करने में सहायता की; ऐसा विश्वास जो किसी भी सताव में हिला नहीं (दानिय्येल 6)।

   परमेश्वर हमारे साथ एक संबंध चाहता है। प्रति प्रातः हम उसे अपने दिन में आमंत्रित कर सकते हैं, और उसकी स्तुति आराधना के साथ उससे निवेदन कर सकते हैं कि वह दिन भर, हमारी सहायता और मार्गदर्शन के लिए, हमारे साथ बना रहे। अन्य समयों पर हम एकान्त में मनन के साथ कुछ समय उसके साथ बिता सकते हैं, उससे अपने मन की बातें कह सकते हैं, हमारे प्रति बनी रहने वाली उसकी विश्वासयोग्यता पर मनन कर सकते हैं। हम परमेश्वर के साथ संगति और उसके वचन के अध्ययन तथा मनन में जितना अधिक समय बिताएंगे, हम उसकि संगति तथा समानता में उतना अधिक बढ़ेंगे।

   जब परमेश्वर के साथ बिताया गया समय हमारी प्राथमिकता होगा, हम उसकी संगति से और अधिक आनन्दित होते जाएंगे। - कीला ओकोआ


परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे - यशायाह 40:31

परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा। सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दोहाई दूंगा और कराहता रहूंगा। और वह मेरा शब्द सुन लेगा। भजन 55:16-17

बाइबल पाठ: दनिय्येल 6:10-23
Daniel 6:10 जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियां यरूशलेम के सामने खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के साम्हने घुटने टेक कर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा। 
Daniel 6:11 तब उन पुरूषों ने उतावली से आकर दानिय्येल को अपने परमेश्वर के सामने बिनती करते और गिड़गिड़ाते हुए पाया। 
Daniel 6:12 सो वे राजा के पास जा कर, उसकी राजआज्ञा के विषय में उस से कहने लगे, हे राजा, क्या तू ने ऐसे आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया कि तीस दिन तक जो कोई तुझे छोड़ किसी मनुष्य वा देवता से बिनती करेगा, वह सिंहों की मान्द में डाल दिया जाएगा? राजा ने उत्तर दिया, हां, मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार यह बात स्थिर है। 
Daniel 6:13 तब उन्होंने राजा से कहा, यहूदी बंधुओं में से जो दानिय्येल है, उसने, हे राजा, न तो तेरी ओर कुछ ध्यान दिया, और न तेरे हस्ताक्षर किए हुए आज्ञापत्र की ओर; वह दिन में तीन बार बिनती किया करता है।
Daniel 6:14 यह वचन सुनकर, राजा बहुत उदास हुआ, और दानिय्येल को बचाने के उपाय सोचने लगा; और सूर्य के अस्त होने तक उसके बचाने का यत्न करता रहा। 
Daniel 6:15 तब वे पुरूष राजा के पास उतावली से आकर कहने लगे, हे राजा, यह जान रख, कि मादियों और फारसियों में यह व्यवस्था है कि जो जो मनाही वा आज्ञा राजा ठहराए, वह नहीं बदल सकती।
Daniel 6:16 तब राजा ने आज्ञा दी, और दानिय्येल लाकर सिंहों की मान्द में डाल दिया गया। उस समय राजा ने दानिय्येल से कहा, तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, वही तुझे बचाए! 
Daniel 6:17 तब एक पत्थर लाकर उस गड़हे के मुंह पर रखा गया, और राजा ने उस पर अपनी अंगूठी से, और अपने प्रधानों की अंगूठियों से मुहर लगा दी कि दानिय्येल के विषय में कुछ बदलने ने पाए। 
Daniel 6:18 तब राजा अपने महल में चला गया, और उस रात को बिना भोजन पड़ा रहा; और उसके पास सुख विलास की कोई वस्तु नहीं पहुंचाई गई, और उसे नींद भी नहीं आई।
Daniel 6:19 भोर को पौ फटते ही राजा उठा, और सिंहों के गड़हे की ओर फुर्ती से चला गया। 
Daniel 6:20 जब राजा गड़हे के निकट आया, तब शोक भरी वाणी से चिल्लाने लगा और दानिय्येल से कहा, हे दानिय्येल, हे जीवते परमेश्वर के दास, क्या तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, तुझे सिंहों से बचा सका है? 
Daniel 6:21 तब दानिय्येल ने राजा से कहा, हे राजा, तू युगयुग जीवित रहे! 
Daniel 6:22 मेरे परमेश्वर ने अपना दूत भेज कर सिंहों के मुंह को ऐसा बन्द कर रखा कि उन्होंने मेरी कुछ भी हानि नहीं की; इसका कारण यह है, कि मैं उसके साम्हने निर्दोष पाया गया; और हे राजा, तेरे सम्मुख भी मैं ने कोई भूल नहीं की। 
Daniel 6:23 तब राजा ने बहुत आनन्दित हो कर, दानिय्येल को गड़हे में से निकालने की आज्ञा दी। सो दानिय्येल गड़हे में से निकाला गया, और उस पर हानि का कोई चिन्ह न पाया गया, क्योंकि वह अपने परमेश्वर पर विश्वास रखता था।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50
  • इब्रानियों 8


शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

गवाही


   वैंग शाओ-यिंग चीन के यूनान प्रांत के एक ग्रामीण इलाके में रहती है। अस्वस्थ होने के कारण, उसके पति को खेतों में काम करने को नहीं मिला, जिससे परिवार के लिए कठिनाईयाँ होने लगीं। वैंग की सास ने इस सब के लिए वैंग द्वारा प्रभु परमेश्वर में लाए गए विश्वास को ज़िम्मेदार ठहराया; वह वैंग को सताने लगी और उसे बाध्य करने लगी कि वह अपने पुरखाओं के धर्म में लौट आए। परन्तु क्योंकि वैंग के पति ने वैंग के जीवन में आए परिवर्तन को देखा था, इसलिए उसने अपनी माँ से कहा, "माँ, केवल वैंग का प्रभु परमेश्वर में विश्वास करना काफी नहीं है; हम सब को भी उसमें वैसे ही विश्वास करना चाहिए।" अपनी पत्नि में आए प्रगट परिवर्तन को देख कर, अब वैंग का पति भी प्रभु यीशु के सुसमाचार के बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है।

   हमारे प्रचार को सुनने से पहले लोग हमारे व्यवहार को देखते हैं। सबसे प्रभावी गवाही वह होती है जिसमें हमारे जीवनों में प्रभु यीशु मसीह द्वारा लाए गए परिवर्तन से संबंधित अच्छा व्यवहार और उपयुक्त शब्द साथ प्रदर्शित होते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में पतरस ने विरोधी संसार के सम्मुख प्रभु यीशु को प्रस्तुत करने के इसी तरीके के बारे में लिखा। पतरस ने अपने पाठकों को प्रोत्साहित किया कि वे "भलाई करने में उत्तेजित रहें" (1 पतरस 3:13), मसीह में आज्ञाकारिता का जीवन व्यतीत करें, अच्छे विवेक के साथ रहें, और अपनी आशा के संबंध में औरों को बताने के लिए सदा तैयार रहें। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हमें अपने विश्वास के लिए लोगों से मिलने वाले दुर्व्यवहार और बदनामी के डर के कारण प्रभु यीशु के लिए अपनी गवाही देने से कोई संकोच नहीं रहेगा।

   हमारी परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी क्यों न हों, हमारे प्रभु ने हमें जहाँ और जिस हाल में रखा है, हमें वहीं पर प्रभु यीशु के गवाह बनकर उसके लिए अपने जीवनों से गवाही देनी है। हमारी हर परिस्थिति और आवाश्यकता के अनुसार, हमसे असहमत लोगों तक हमारी गवाही को पहुँचाने के लिए वह पर्याप्त अनुग्रह प्रदान करेगा। - पो फैंग चिया


हम जितना अधिक प्रभु यीशु के समान जीवन व्यतीत करेंगे,
 उतना ही अधिक लोग प्रभु के प्रति आकर्षित होंगे।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:13-17
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है? 
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। 
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों। 
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49
  • इब्रानियों 7


गुरुवार, 9 नवंबर 2017

कृपा द्वीप


   अमेरिका में स्थित ह्यूरॉन झील में मिशिगन की ओर स्थित सागीनौ खाड़ी में Charity Island (कृपा द्वीप) सबसे बड़ा द्वीप है। अनेकों वर्षों से उस द्वीप पर एक प्रकाशस्तंभ कार्य कर रहा है और यह द्वीप उस क्षेत्र में जल यात्रा कर रहे लोगों के लिए दिशा निर्देश तथा सुरक्षित बन्दरगाह प्रदान करता है। उस द्वीप को यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि वहाँ के नाविकों का मानना था कि परमेश्वर ने अपनी कृपा में होकर वह द्वीप उनकी भलाई और सहायता लिए वहाँ बनाया है।

   हमें भी जीवन में कभी कठिन परिस्थितियों से होकर निकलना पड़ता है; और उन नाविकों के समान हमें भी किसी सुरक्षित स्थान और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता पुस्तक में हम पाते हैं कि भजनकार ने यह समझ लिया कि परमेश्वर ही है जो अशान्ति में भी शान्ति ला सकता है, और सुरक्षित स्थानों तक पहुँचने के लिए सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है। भजनकार ने लिखा, "वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है" (भजन 107:29-30)।

   यह सत्य है कि कोई अपने जीवन में आंधियाँ, अशान्ति के समय, देखना नहीं चाहता है; परन्तु न चाहते हुए भी उन परिस्थितियों का सामना हमें करना ही पड़ता है। परन्तु यही आंधियाँ परमेश्वर द्वारा प्रदान की जाने वली सहायता और सुरक्षा के प्रति हमारी सराहना को कई गुणा बढ़ा सकते हैं। उसके निःस्वार्थ प्रेम में हम अपेक्षित सुरक्षित बन्दरगाह पाते हैं; उसके वचन से हम मार्गदर्शन पाते हैं, और उसका पवित्र आत्मा हमारे अंधियारों को ज्योतिर्मय करता है। प्रभु परमेश्वर ही हमारा सदैव सहजता से उपलब्ध "कृपा द्वीप" है। - डेनिस फिशर


हमारा जीवित प्रभु परमेश्वर सदैव हमारा सुरक्षित आश्रय-स्थल रहेगा।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मत वाले के समान लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6

बुधवार, 8 नवंबर 2017

प्रार्थना


   मेरे बचपन के दिनों में, सबसे भयावह बीमारियों में से एक थी पोलियो; क्योंकि यह अकसर बच्चों को होता था इसलिए इसे "Infantile Paralysis" (बच्चों का लकवा) भी कहते थे। मध्य-1950 के दश्क में इससे सुरक्षा के लिए बने टीके के आने से पहले, अकेले अमेरिका में ही प्रति वर्ष इस बीमारी से 20,000 लोग ग्रसित होते थे और 1,000 मर जाते थे।

   प्राचीन काल में, लकवे को लाइलाज, आशाहीन स्थिति माना जाता था। परन्तु कुछ लोगों ने विश्वास किया कि प्रभु यीशु उनके लकवे से मारे हुए मित्र की सहायता कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि वे चार  जन अपने मित्र को चँगाई के लिए प्रभु यीशु के पास लाए, परन्तु भीड़ के कारण उस घर के दरवाज़े से वे अन्दर नहीं जा सके, जहाँ प्रभु यीशु लोगों को सिखा रहे थे। इसलिए, "उन्होंने उस छत को जिस के नीचे वह था, खोल दिया और जब उसे उधेड़ चुके, तो उस खाट को जिस पर झोले का मारा हुआ पड़ा था, लटका दिया" (मरकुस 2:4)।

   जब प्रभु यीशु ने उनके विश्वास को देखा, तो उसने उस लकवे के मारे हुए से कहा, "हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए" (मरकुस 2:5), और फिर आगे कहा, "उठ, अपनी खाट उठा कर अपने घर चला जा" (मरकुस 2:11)। कितना अद्भुत है कि उन मित्रों के विश्वास के प्रत्युत्तर में, जो अपने मित्र को प्रभु यीशु के पास लेकर आए थे, प्रभु ने न केवल उस रोगी को उसके असाध्य रोग से चँगाई दी, वरन उसके पाप भी क्षमा कर दिए!

   यदि हमारा कोई ऐसा मित्र या रिश्तेदार है जो किसी गंभीर शारिरिक अवस्था या आत्मिक स्थितिमें पड़ा है, तो यह हम मसीही विश्वासियों का विशेषाधिकार है कि हम एकजुट होकर उसे प्रार्थना में प्रभु यीशु के पास लाएं; क्योंकि केवल प्रभु यीशु ही है जो हमारी प्रत्येक आवश्यकता और परिस्थिति का समाधान कर सकता है, उसमें होकर भी हमारे लिए भला कर सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


औरों के लिए प्रार्थना करना न केवल विशेषाधिकार है, वरन उत्तरदायित्व भी है।

इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। - याकूब 5:16

बाइबल पाठ: मरकुस 2:1-12
Mark 2:1 कई दिन के बाद वह फिर कफरनहूम में आया और सुना गया, कि वह घर में है।
Mark 2:2 फिर इतने लोग इकट्ठे हुए, कि द्वार के पास भी जगह नहीं मिली; और वह उन्हें वचन सुना रहा था। 
Mark 2:3 और लोग एक झोले के मारे हुए को चार मनुष्यों से उठवाकर उसके पास ले आए। 
Mark 2:4 परन्तु जब वे भीड़ के कारण उसके निकट न पंहुच सके, तो उन्होंने उस छत को जिस के नीचे वह था, खोल दिया और जब उसे उधेड़ चुके, तो उस खाट को जिस पर झोले का मारा हुआ पड़ा था, लटका दिया। 
Mark 2:5 यीशु ने, उन का विश्वास देखकर, उस झोले के मारे हुए से कहा; हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए। 
Mark 2:6 तब कई एक शास्त्री जो वहां बैठे थे, अपने अपने मन में विचार करने लगे। 
Mark 2:7 कि यह मनुष्य क्यों ऐसा कहता है? यह तो परमेश्वर की निन्‍दा करता है, परमेश्वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है? 
Mark 2:8 यीशु ने तुरन्त अपनी आत्मा में जान लिया, कि वे अपने अपने मन में ऐसा विचार कर रहे हैं, और उन से कहा, तुम अपने अपने मन में यह विचार क्यों कर रहे हो? 
Mark 2:9 सहज क्या है? क्या झोले के मारे से यह कहना कि तेरे पाप क्षमा हुए, या यह कहना, कि उठ अपनी खाट उठा कर चल फिर? 
Mark 2:10 परन्तु जिस से तुम जान लो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है (उसने उस झोले के मारे हुए से कहा)। 
Mark 2:11 मैं तुझ से कहता हूं; उठ, अपनी खाट उठा कर अपने घर चला जा। 
Mark 2:12 और वह उठा, और तुरन्त खाट उठा कर और सब के साम्हने से निकलकर चला गया, इस पर सब चकित हुए, और परमेश्वर की बड़ाई कर के कहने लगे, कि हम ने ऐसा कभी नहीं देखा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45
  • इब्रानियों 5


मंगलवार, 7 नवंबर 2017

नाम


   एक चर्च समुदाय ने अपनी सभा को संबोधित करने के लिए एक उपदेशक को आमंत्रित किया। सभा के अगुवे ने उपदेशक से कहा, "परमेश्वर के बारे में बातें कीजिए; परन्तु यीशु का उल्लेख मत कीजिए।" उस उपदेशक ने पूछा, "ऐसा क्यों?" तो अगुवे ने उत्तर दिया, "हमारे कुछ प्रमुख सदस्य यीशु के विषय कुछ परेशानी अनुभव करते हैं। आप बस परमेश्वर कहिए, और सब ठीक रहेगा।" लेकिन ऐसे निर्देषों को स्वीकार करना उस उपदेशक के लिए समस्या थी; उसने कहा, "यीशु के बिना मेरे पास कोई सन्देश नहीं है।"

   मसीही विश्वासियों की मण्डली के प्रारंभिक दिनों में प्रभु यीशु के अनुयायियों के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। स्थानीय धार्मिक अगुवों ने एकत्रित होकर योजना बनाई और प्रभु यीशु के शिष्यों को धमका कर कहा कि वे यीशु के नाम से प्रचार न करें (प्रेरितों 4:17)। परन्तु वे शिष्य इस बात से सहमत नहीं हुए; उन्होंने प्रत्युत्तर में कहा, "यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें" (प्रेरितों 4:20)। यह दावा करना कि हम परमेश्वर में तो विश्वास करते हैं, परन्तु उसके पुत्र प्रभु यीशु पर नहीं, परस्पर विरोधाभासी है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने तथा परमेश्वर पिता के बीच के संबंध के बारे में स्पष्ट कहा, "मैं और पिता एक हैं" (यूहन्ना 10:30)। इसीलिए प्रभु आगे कह सके, "तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो" (यूहन्ना 14:1)। पौलुस जानता था कि प्रभु यीशु परमेश्वर का स्वरूप और उसके तुल्य है (फिलिप्पियों 2:6)।

   हमें प्रभु यीशु के नाम से लजाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि "किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें" (प्रेरितों 4:12)। लॉरेंस दरमानी


यीशु का नाम हमारे विश्वास और आशा का आधार है।

जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। - फिलिप्पियों 2:6

बाइबल पाठ: प्रेरितों 4:5-20
Acts 4:5 दूसरे दिन ऐसा हुआ कि उन के सरदार और पुरिनये और शास्त्री। 
Acts 4:6 और महायाजक हन्ना और कैफा और यूहन्ना और सिकन्‍दर और जितने महायाजक के घराने के थे, सब यरूशलेम में इकट्ठे हुए। 
Acts 4:7 और उन्हें बीच में खड़ा कर के पूछने लगे, कि तुम ने यह काम किस सामर्थ से और किस नाम से किया है? 
Acts 4:8 तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो कर उन से कहा। 
Acts 4:9 हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ। 
Acts 4:10 तो तुम सब और सारे इस्त्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे साम्हने भला चंगा खड़ा है। 
Acts 4:11 यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्‍छ जाना और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया। 
Acts 4:12 और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें।
Acts 4:13 जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं। 
Acts 4:14 और उस मनुष्य को जो अच्छा हुआ था, उन के साथ खड़े देखकर, वे विरोध में कुछ न कह सके। 
Acts 4:15 परन्तु उन्हें सभा के बाहर जाने की आज्ञा देकर, वे आपस में विचार करने लगे, 
Acts 4:16 कि हम इन मनुष्यों के साथ क्या करें? क्योंकि यरूशलेम के सब रहने वालों पर प्रगट है, कि इन के द्वारा एक प्रसिद्ध चिन्ह दिखाया गया है; और हम उसका इन्कार नहीं कर सकते। 
Acts 4:17 परन्तु इसलिये कि यह बात लोगों में और अधिक फैल न जाए, हम उन्हें धमकाएं, कि वे इस नाम से फिर किसी मनुष्य से बातें न करें। 
Acts 4:18 तब उन्हें बुलाया और चितौनी देकर यह कहा, कि यीशु के नाम से कुछ भी न बोलना और न सिखलाना। 
Acts 4:19 परन्तु पतरस और यूहन्ना ने उन को उत्तर दिया, कि तुम ही न्याय करो, कि क्या यह परमेश्वर के निकट भला है, कि हम परमेश्वर की बात से बढ़कर तुम्हारी बात मानें। 
Acts 4:20 क्योंकि यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42
  • इब्रानियों 4


सोमवार, 6 नवंबर 2017

अनुसरण


   जब भूतपूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी डेविड वुड्स स्पैनिश बास्केटबॉल कप के फ़ाईनल के मैच खेल रहा था तब मैं उसके साथ था। एक बार खेल से पहले उसने परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन 144:1 पढ़ा: "धन्य है यहोवा, जो मेरी चट्टान है, वह मेरे हाथों को लड़ने, और युद्ध करने के लिये तैयार करता है"; फिर मेरी ओर मुड़कर मुझसे कहा, "आपने देखा? ऐसा लगता है मानो परमेश्वर ने यह पद मेरे ही लिए लिखा है! वह मेरे हाथों को बास्केटबॉल पकड़ने और ऊँगलियों को उसे सही दिशा में फेंकने के लिए प्रशिक्षित और तैयार करता है।" डेविड का विश्वास था कि परमेश्वर ने उसे बास्केटबॉल खेलने के लिए बुलाया है, और उसने यह सीखा कि परमेश्वर हमें, जैसे भी हम हैं वैसा ही लेकर, उस सेवकाई के लिए तैयार करता है जिसे वह हम से लेना चाहता है।

   हम बड़ी सरलता से अपने आप को परमेश्वर के कार्यों के लिए अयोग्य कहकर, यह समझकर कि हमारे पास परमेश्वर को उसके कार्यों के लिए देने के लिए कुछ नहीं है, उसकी सेवकाई से पीछे हट सकते हैं। जब परमेश्वर ने मूसा को दर्शन दिए और उसे कार्य सौंपा कि वह इस्त्राएलियों को बताए कि परमेश्वर उसके द्वारा इस्त्राएलियों को मिस्त्र के दासत्व से छुड़ाएगा (निर्गमन 3:16-17), तो मूसा ने अपने आप को इस कार्य के लिए अनुप्युक्त समझा। मूसा ने प्रभु से कहा, "हे मेरे प्रभु, मैं बोलने में निपुण नहीं, न तो पहिले था, और न जब से तू अपने दास से बातें करने लगा; मैं तो मुंह और जीभ का भद्दा हूं" (निर्गमन 4:10)। मूसा को बोलने में कुछ दिक्कत होती थी, और वह वापस मिस्त्र के राजा फिरौन के पास जाने को लेकर भयभीत भी था, परन्तु परमेश्वर ने उसकी अयोग्यता और भय का अपनी योग्यता और अपनी सामर्थ्य से निवारण कर दिया। परमेश्वर ने तब मूसा से कहा, "अब जा, मैं तेरे मुख के संग हो कर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊंगा" (निर्गमन 4:12)।

   परमेश्वर बस हम से इतना चाहता है कि हम उस पर भरोसा रखें और उसकी योजनाओं को पूरा करने के लिए उसका अनुसरण करते रहें। शेष सब कुछ वह संभाल लेगा। जब हम उसपर भरोसा रखकर, उसका अनुसरण करते हैं, तो उसके सामर्थी हाथों में न केवल हम स्वयं आशीषित होते हैं, वरन औरों के लिए भी आशीष का कारण बन जाते हैं। - जेम्स फर्नैन्डिज़ गारिदो


जब परमेश्वर किसी कार्य के लिए बुलाता है 
तो उसके लिए आवश्यक सामर्थ्य और संसाधन भी दे देता है।

यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा। और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे। उत्पत्ति 12:1-3

बाइबल पाठ: निर्गमन 4:10-17
Exodus 4:10 मूसा ने यहोवा से कहा, हे मेरे प्रभु, मैं बोलने में निपुण नहीं, न तो पहिले था, और न जब से तू अपने दास से बातें करने लगा; मैं तो मुंह और जीभ का भद्दा हूं। 
Exodus 4:11 यहोवा ने उस से कहा, मनुष्य का मुंह किस ने बनाया है? और मनुष्य को गूंगा, वा बहिरा, वा देखने वाला, वा अन्धा, मुझ यहोवा को छोड़ कौन बनाता है? 
Exodus 4:12 अब जा, मैं तेरे मुख के संग हो कर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊंगा। 
Exodus 4:13 उसने कहा, हे मेरे प्रभु, जिस को तू चाहे उसी के हाथ से भेज। 
Exodus 4:14 तब यहोवा का कोप मूसा पर भड़का और उसने कहा, क्या तेरा भाई लेवीय हारून नहीं है? मुझे तो निश्चय है कि वह बोलने में निपुण है, और वह तेरी भेंट के लिये निकला भी आता है, और तुझे देखकर मन में आनन्दित होगा। 
Exodus 4:15 इसलिये तू उसे ये बातें सिखाना; और मैं उसके मुख के संग और तेरे मुख के संग हो कर जो कुछ तुम्हें करना होगा वह तुम को सिखलाता जाऊंगा। 
Exodus 4:16 और वह तेरी ओर से लोगों से बातें किया करेगा; वह तेरे लिये मुंह और तू उसके लिये परमेश्वर ठहरेगा। 
Exodus 4:17 और तू इस लाठी को हाथ में लिये जा, और इसी से इन चिन्हों को दिखाना।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3


रविवार, 5 नवंबर 2017

क्रोध


   शायद उस दिन मेरे पड़ौसियों को समझ नहीं आ रहा होगा कि शरद ऋतु की उस प्रातः मुझे देखकर वे मेरे बारे में क्या सोचें। मैं हाथ में बेलचा पकड़े हुए घर के अन्दर आने के रास्ते के किनारे, नाले के कोने के नीचे जमी हुई बर्फ को तोड़ने का प्रयास कर रही थी, और बेलचे के हर प्रहार के साथ क्रोधावेश के साथ प्रार्थनाएं करती जा रही थी, जो एक ही बात को लेकर थीं: "बस बहुत हो गया; मुझमें अब और करने की शक्ति नहीं है।" मुझे घर की देखभाल करनी होती है और मेरे पास करने के लिए कार्यों की लंबी सूचि रहती है, और अब यह जमी हुई बर्फ भी मेरे कार्यों की सूचि को बढ़ा रही थी, मेरे सीमित समय में दख़ल दे रही थी। मेरा वह क्रोधावेश झूठ के एक पुल्लिन्दे पर आधारित था - "मेरे साथ इससे बेहतर व्यवहार होना चाहिए; आखिरकर, केवल परमेश्वर पर निर्भर रहना अपर्याप्त है; किसी को मेरी परवाह नहीं है।"

   जब हम अपने क्रोध के साथ चिपके रहने का निर्णय लेते हैं, तब हम कड़ुवाहट के फन्दे में फंस जाते हैं, और फिर आगे नहीं बढ़ पाते हैं। क्रोध का एकमात्र उपाय है सत्य; सत्य को स्मरण करना और उसके आगे समर्पित रहना। सत्य यह है कि परमेश्वर हमें वह नहीं देता है जो वास्तव में हमें मिलना चाहिए; वरन वह हमपर अनुग्रह करता है, हमें अपनी दया का पात्र बनाता है, "क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है" (भजन 86:5)। सत्य यह है कि उसकी सामर्थ्य हमारी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्यापत है; हमें चाहे जैसा भी प्रतीत हो, परमेश्वर हमारे लिए पर्याप्त से भी बढ़कर है।

   परन्तु इससे पहले कि हम इस आश्वासन को थामने पाएं, हमें थोड़ा पीछे हटकर, अपने प्रयासों के बेलचे को नीचे रखकर, हमारी ओर दया और अनुग्रह में बढ़े हुए प्रभु यीशु के हाथ को थामना होगा। हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे क्रोधावेश को सुनने और सहने, और अपने समय तथा योजनानुसार हमें आगे ले चलने के लिए महान और विश्वासयोग्य है। - शैली बीच


अनुग्रह: परमेश्वर से वह पाना हम जिसके कदापि योग्य नहीं है; 
दया: वह नहीं पाना हम जिसके सर्वथा योग्य हैं।

मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है, परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है। - नीतिवचन 29:11

बाइबल पाठ: भजन 86:1-13
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और न किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2