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सोमवार, 28 सितंबर 2020

इच्छा


         हमारे विवाह के आरंभिक समय में, मेरे अन्दर अपनी पत्नी की इच्छा जानकर उसके अनुसार करने के लिए संघर्ष रहता था। मैं सोचा करता था कि उसे क्या पसंद आएगा, कि हम संध्या को घर रहकर एक दूसरे के साथ समय बिताएं और भोजन करें, या बाहर किसी आकर्षक रेस्टोरेंट में जाकर बैठें और वहाँ भोजन करें? उसे क्या अच्छा लगेगा, कि मैं अपने मित्रों के साथ कुछ समय बिता कर आऊँ, या उसकी इच्छा होगी के मैं सप्ताहांत उसके साथ बिताने के लिए कार्य मुक्त रखूँ? फिर एक बार मैंने अटकलें लगाने और दुविधा में पड़ने के स्थान पर सीधे उसी से पूछ लेने का निर्णय लिया; मैंने उससे पूछा, “तुम्हारी इच्छा क्या है; तुम्हें क्या पसंद आएगा?” उसने उत्तर दिया, “मेरे लिए दोनों ही ठीक हैं; बस मुझे इसकी प्रसन्नता है कि तुम ने मेरे बारे में सोचा।”

         मेरे साथ ऐसे भी समय आए हैं जब मैंने कुछ बातों के लिए परमेश्वर की इच्छा जानने की बहुत लालसा रखी – यह कि मैं बिलकुल स्पष्ट जान लूँ कि परमेश्वर मुझ से क्या चाहता है – जैसे कि मैं कौन सी नौकरी करूं। मार्गदर्शन के लिए प्रार्थनाएं करना और परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने से मुझे कोई सुस्पष्ट उत्तर नहीं मिले। परन्तु एक उत्तर बिलकुल स्पष्ट था: मुझे परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना है, उसी को अपने सुख का मूल जानना है, और अपने मार्ग की चिंता को उसी पर छोड़ देना है (भजन 37:3-5)।

         तब मुझे यह बोध हुआ कि परमेश्वर अकसर हमें चुनने की स्वतंत्रता देता है – यदि हम अपने मार्गों से पहले उसके मार्गों को चुनते हैं। इसका स्पष्ट अर्थ है कि हम ऐसा कुछ नहीं करें जो गलत है, या उसे पसंद नहीं आएगा। यह कुछ भी अनैतिक, अधर्मी, या उसके साथ हमारे संबंधों की उन्नति के लिए सहायक न होने वाला हो सकता है। यदि ऐसे सभी विकल्पों को हटा दिया जाए, तो फिर जो विकल्प शेष रह जाते हैं, जो परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं, हमें स्वतंत्रता है कि हम उनमें से कोई एक चुन लें।

         हमारा परमेश्वर पिता हमें – जो उसे अपने सुख का मूल जानते हैं, अपने मन की इच्छाएं पूरी करने देना चाहता है – वे जो उसे आदर और महिमा देती हैं। - लेस्ली कोह

 

क्या आपके निर्णय परमेश्वर को पसंद आते हैं?


हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों के मगन रह; अपनी मनमानी कर और अपनी आंखों की दृष्टि के अनुसार चल। परन्तु यह जान रख कि इन सब बातों के विषय में परमेश्वर तेरा न्याय करेगा। - सभोपदेशक 11:9

बाइबल पाठ: भजन 37:3-7, 23-24

भजन संहिता 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।

भजन संहिता 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।

भजन संहिता 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।

भजन संहिता 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति के समान, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले के समान प्रगट करेगा।

भजन संहिता 37:7 यहोवा के सामने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!

भजन संहिता 37:23 मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है;

भजन संहिता 37:24 चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 5-6
  • इफिसियों 1


रविवार, 27 सितंबर 2020

भलाई


         कभी-कभी भलाई करना या सही परामर्श देना उलटे ही परिणाम ले आता है। ऐसे में हम सोच सकते हैं, ‘क्या मेरे भलाई के कार्य और लाभ के लिए कही गई बात का कोई महत्व भी है?’ मुझे भी हाल ही में एक ऐसे ही अनुभव से होकर निकलना पड़ा। मैंने अपनी एक सहेली को प्रोत्साहित करने के लिए प्रार्थना के साथ बहुत विचार करके उसकी परिस्थितियों के अनुसार उसे सही परामर्श देने वाली एक ई-मेल भेजी, और उसने बड़े क्रोध में उसका प्रत्युत्तर दिया। तुरंत ही मेरी प्रतिक्रिया ठेस लगने और क्रोधित होने की थी; मुझे समझ नहीं आया कि, ‘वह मुझे इतना गलत कैसे समझ सकती है?

         अपने क्रोध में होकर उसे उत्तर लिख भेजने के स्थान पर, मुझे स्मरण हो आया कि हम अपने परामर्श या भलाई के परिणाम तुरंत ही नहीं देखेंगे, विशेषकर तब जब हम लोगों को बताएँ कि प्रभु यीशु उनसे प्रेम करते हैं, और उनकी सहायता करना चाहते हैं। जब हम औरों के साथ भलाई करते हैं, और अपेक्षा रखते हैं कि वे प्रभु यीशु की ओर आकर्षित होंगे, तो संभव है कि वे हमारा तिरस्कार करें। सही कार्य के लिए उकसाने के हमारे विनम्र प्रयासों की उपेक्षा की जा सकती है।

         ऐसी निराशा की स्थिति में परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा गलातिया के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री के छठे अध्याय में हमको उचित मार्गदर्शन मिलता है। यहाँ पर पौलुस हमें हमारे उद्देश्यों, अर्थात, जो हम कहते और करते हैं, उन बातों पर विचार करने के लिए कहता है (पद 1-4)। ऐसा कर लेने के पश्चात वह कहता है कि हम भलाई करने में दृढ़ता से लगे रहें, हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ” (पद 9-10)।

         परमेश्वर चाहता है कि हम उसके लिए जीवन व्यतीत करते रहें, और इसमें औरों के लिए प्रार्थना करना, तथा औरों को उसके बारे में बताना भी सम्मिलित है। जब हम भलाई करते रहेंगे, तो उसके परिणाम भी देखने पाएँगे। - एलिसन कीडा

 

अपने जीवनों के कार्य को परिणामों को परमेश्वर के हाथों में छोड़ दें।


अपनी रोटी जल के ऊपर डाल दे, क्योंकि बहुत दिन के बाद तू उसे फिर पाएगा। - सभोपदेशक 11:1

बाइबल पाठ: गलातियों 6:1-10

गलतियों 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।

गलतियों 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।

गलतियों 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।

गलतियों 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्ड करने का अवसर होगा।

गलतियों 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।

गलतियों 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्तुओं में सिखाने वाले को भागी करे।

गलतियों 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।

गलतियों 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।

गलतियों 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।

गलतियों 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 3-4
  • गलातियों 6

शनिवार, 26 सितंबर 2020

प्रेम


         ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण क्वींसलैंड के समुद्र तट के निकट अनेकों बार देखी जाने वाली श्वेत हम्पबैक व्हेल मछली, इस जाति की सबसे पहली पहचानी गई श्वेत व्हेल है। उसकी लंबाई का अनुमान लगभग चालीस फीट का है, और यह इतनी दुर्लभ है कि ऑस्ट्रेलिया ने उसे सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष अधिनियम ज़ारी किया है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम एक अनुपम “विशाल मछली” का उल्लेख पाते हैं, जिसे परमेश्वर ने एक भगोड़े भविष्यद्वक्ता को निगल लेने के लिए बनाया था (योना 1:17)। अधिकांश लोग इस कहानी को जानते होंगे। परमेश्वर ने योना से कहा कि वह नीनवे के लोगों के पास उन पर परमेश्वर के आने वाले न्याय के सन्देश को लेकर जाए। परन्तु योना नीनवे वासियों के साथ कुछ व्यवहार रखना नहीं चाहता था, क्योंकि वे एक क्रूर स्वभाव के लोग थे, जो हर किसी के साथ, यहूदियों के साथ भी, क्रूरता का व्यवहार करते थे। इसलिए वह परमेश्वर के कहे के अनुसार जाने के स्थान पर, दूसरी ही दिशा में एक समुद्री जहाज़ पर चढ़कर भाग निकला। उसकी यात्रा में बहुत परेशानियां आईं, और नाविकों को अपनी जान तथा जहाज़ को बचाने के लिए उसे समुद्र में फेंकना पड़ा, जहाँ उसे उस विशाल मछली ने निगल लिया। मछली के पेट के अन्दर से उसने पश्चाताप किया, परमेश्वर की बात मानने के लिए तैयार हुआ, और मछली ने उसे तट पर जाकर उगल दिया। उसने नीनवे जाकर परमेश्वर के सन्देश का प्रचार किया, और नीनवे के सभी लोगों ने भी पश्चाताप किया (3:5-10) जिससे फिर परमेश्वर ने उन्हें दण्ड देना टाल दिया।

         कहानी बहुत बढ़िया लगती है; किन्तु यह कहानी का अन्त नहीं है। जब नीनवे के लोगों ने पश्चाताप किया और परमेश्वर ने उन्हें क्षमा किया, तो प्रसन्न होने के स्थान पर योना को परमेश्वर पर और उन लोगों पर खीझ आई। योना ने परमेश्वर से कहा, और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करुणा निधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता” (4:2)। निश्चित मौत से बचाए जाने के बाद भी योना का पाप से भरा क्रोध बढ़ता गया और उसकी प्रार्थना भी आत्मघाती हो गई (पद 3)।

         योना की यह कहानी मछली के बारे में नहीं है। यह हमारे मानवीय स्वभाव और हमारे पीछे-पीछे आकर हमें पापों से पश्चाताप के लिए प्रेरित करते रहने वाले परमेश्वर की है। प्रेरित पतरस ने लिखा, प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले” (2 पतरस 3:9)। परमेश्वर अपने प्रेम को क्रूर नीनवे निवासियों, खीझने और अनाज्ञाकारिता करने वाले भविष्यद्वक्ता, तथा मुझे और आपको देना चाहता है; क्या आप अपने पापों से पश्चाताप करके, प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करके, उसके प्रेम को स्वीकार करेंगे? – टिम गुस्ताफसन

 

हमारे प्रेम की सीमाएं है; परमेश्वर का प्रेम असीम है।


क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: योना 3:10-4:4

योना 3:10 जब परमेश्वर ने उनके कामों को देखा, कि वे कुमार्ग से फिर रहे हैं, तब परमेश्वर ने अपनी इच्छा बदल दी, और उनकी जो हानि करने की ठानी थी, उसको न किया।

योना 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का।

योना 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करुणा निधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।

योना 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है।

योना 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 1-2
  • गलातियों 5

शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

भलाई


         उनके देहांत से ठीक पहले, चित्रकार और मिशनरी लिलिअस ट्रौटर ने अपनी खिड़की के बाहर देखा, और स्वर्गीय रथ का दर्शन पाया। उनकी जीवनी लिखने वाले के अनुसार, एक मित्र ने पूछा, “क्या तुम बहुत सी सुन्दर वस्तुएं देख रही हो?” तो उसने उत्तर दिया, “हाँ, बहुत सी सुन्दर वस्तुएं।”

         ट्रौटर के अंतिम शब्द, उसके जीवन में परमेश्वर के कार्य को प्रतिबिंबित करते हैं। न केवल उनकी मृत्यु में, वरन उनके जीवन भर, परमेश्वर ने उन्हें और उन में होकर अपनी बहुत सी सुन्दरता को प्रकट किया। वे एक कुशल चित्रकार थीं, परन्तु उन्होंने एल्जीरिया में मिशनरी होकर परमेश्वर की सेवा करने को चुना। कहा जाता है कि प्रसिद्ध चित्रकार, जॉन रस्किन, जिन्होंने उन्हें प्रशिक्षण दिया था, ने उनके चित्रकारी में आजीविका कमाने के स्थान पर मिशनरी होने के इस निर्णय के लिए कहा, “कितना कुछ व्यर्थ हो गया।”

         इसी प्रकार परमेश्वर के वचन बाइबल में, नए नियम में, जब एक स्त्री शमौन कोढ़ी के घर संगमरमर के पात्र में बहुमूल्य इत्र लेकर आई, और उसे प्रभु यीशु के सिर पर उंडेला, तो वहाँ उपस्थित लोगों को लगा कि यह व्यर्थ किया गया। उस बहुमूल्य इत्र की कीमत उस समय के एक सामान्य मजदूर की साल भर की मजदूरी के बराबर थी, इसलिए उपस्थित लोगों में से कुछ ने सोचा कि ऐसे करने के स्थान पर यदि उसे निर्धनों की सहायता करने के लिए प्रयोग किया जाता तो अधिक अच्छा होता। किन्तु प्रभु यीशु ने उसके इस कार्य की सराहना की, और उसकी व्यक्त की गई गहरी भक्ति के विषय कहा, उसे छोड़ दो; उसे क्यों सताते हो? उसने तो मेरे साथ भलाई की है” (मरकुस 14:6)।

         हम प्रतिदिन प्रभु यीशु मसीह की ज्योति को अपने में होकर चमकने देने, और उसकी भलाइयों को संसार को दिखाने का चुनाव कर सकते हैं। हो सकता है कि यह कुछ लोगों को व्यर्थ लगे, परन्तु फिर भी हम उसकी सेवा के लिए इच्छुक मन रखें। प्रभु यीशु हमारे लिए भी कहने पाएं कि हमने उसके लिए भलाई की है। - कीला ओकोआ

 

हमारे जीवन परमेश्वर की भलाइयों को दिखाने वाले हों।


और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। -  2 कुरिन्थियों 9:8

बाइबल पाठ: मरकुस 14:1-9

मरकुस 14:1 दो दिन के बाद फसह और अखमीरी रोटी का पर्व होनेवाला था: और महायाजक और शास्त्री इस बात की खोज में थे कि उसे क्योंकर छल से पकड़ कर मार डालें।

मरकुस 14:2 परन्तु कहते थे, कि पर्व के दिन नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोगों में बलवा मचे।

मरकुस 14:3 जब वह बैतनिय्याह में शमौन कोढ़ी के घर भोजन करने बैठा हुआ था तब एक स्त्री संगमरमर के पात्र में जटामांसी का बहुमूल्य शुद्ध इत्र ले कर आई; और पात्र तोड़ कर इत्र को उसके सिर पर उण्डेला।

मरकुस 14:4 परन्तु कोई कोई अपने मन में रिसियाकर कहने लगे, इस इत्र को क्यों सत्यानाश किया गया?

मरकुस 14:5 क्योंकि यह इत्र तो तीन सौ दीनार से अधिक मूल्य में बेचकर कंगालों को बांटा जा सकता था, ओर वे उसको झिड़कने लगे।

मरकुस 14:6 यीशु ने कहा; उसे छोड़ दो; उसे क्यों सताते हो? उसने तो मेरे साथ भलाई की है।

मरकुस 14:7 कंगाल तुम्हारे साथ सदा रहते हैं: और तुम जब चाहो तब उन से भलाई कर सकते हो; पर मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूंगा।

मरकुस 14:8 जो कुछ वह कर सकी, उसने किया; उसने मेरे गाड़े जाने की तैयारी में पहिले से मेरी देह पर इत्र मला है।

मरकुस 14:9 मैं तुम से सच कहता हूं, कि सारे जगत में जहां कहीं सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहां उसके इस काम की चर्चा भी उसके स्मरण में की जाएगी।

 

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 6-8
  • गलातियों 4

गुरुवार, 24 सितंबर 2020

मार्गदर्शन


         हम सपरिवार एक मनोरंजन पार्क में गए थे, और वहाँ के आकर्षण देखते हुए, एक से दूसरे स्थल को जा रहे थे। मैंने अपने बेटे के कंधे पर हाथ रखकर उससे कहा, “हम इस ओर जा रहे हैं” और भीड़ में उसे सही दिशा में चलने के लिए निर्देश दिए, उसे दिखाया कि वह अपनी माँ और बहनों के पीछे-पीछे चले, जो हमारे आगे चल रही थीं। मुझे उस शेष दिन में यही कई बार करना पड़ा। मेरे बेटे का ध्यान बहुत जल्दी इधर-उधर हो जा रहा था, और वह हम से अलग ओर चलने लग जाता था। मैं मन में सोचने लगा, यह हमारे साथ, या हमारे पीछे क्यों नहीं चलने पा रहा है?

         और फिर मुझे ध्यान आया, और धक्का सा लगा – कितनी ही बार मैं भी तो यही करता रहता हूँ! कितनी ही बार परमेश्वर के पीछे उसकी आज्ञाकारिता में चलने के स्थान पर, मैं संसार के आकर्षणों से आकर्षित होकर उनकी चल निकलता हूँ; कितनी ही बार परमेश्वर की इच्छा के स्थान पर अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिए मैं अपनी ही दिशा ले लेता हूँ।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा लिखवाया, और जब कभी तुम दाहिनी या बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो” (यशायाह 30:21)। इसी अध्याय में, इससे पूर्व परमेश्वर ने अपने लोगों को उनकी ढिठाई के लिए डांट लगाई थी। परमेश्वर ने उनसे कहा कि यदि वे अपने मार्गों के स्थान पर उसकी सामर्थ्य पर भरोसा रखेंगे (पद 15), तो उसका अनुग्रह और दया उन पर बनी रहेगी (पद 18)।

         हमारे प्रति परमेश्वर के अनुग्रह की एक अभिव्यक्ति, उसका अपनी आत्मा के द्वारा हमारा मार्गदर्शन करते रहने की उसकी प्रतिज्ञा है। यह तब होता है जब हम प्रार्थना में उससे अपनी इच्छाओं के बारे में बात करते हैं, और उससे पूछते हैं कि हमारे लिए उसकी क्या योजना है। मैं परमेश्वर का धन्यवादी हूँ कि जब मैं उस पर भरोसा बनाए रखता हूँ, और उसके वचन पर ध्यान देता हूँ, तो परमेश्वर धैर्य के साथ मेरा, दिन-प्रति-दिन और हर कदम पर मार्गदर्शन करता रहता है। - एडम होल्ज़

 

परमेश्वर धैर्य के साथ हमारा मार्गदर्शन करता है, 

यदि हम उस पर भरोसा रखें, और उसके वचन पर ध्यान दें।


इतना हो कि तू हियाव बान्ध कर और बहुत दृढ़ हो कर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना; और उस से न तो दाहिने मुड़ना और न बाएं, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा। - यहोशू 1:7

बाइबल पाठ: यशायाह 30:15-21

यशायाह 30:15 प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया,

यशायाह 30:16 तुम ने कहा, नहीं, हम तो घोड़ों पर चढ़ कर भागेंगे, इसलिये तुम भागोगे; और यह भी कहा कि हम तेज सवारी पर चलेंगे, सो तुम्हारा पीछा करने वाले उस से भी तेज होंगे।

यशायाह 30:17 एक ही की धमकी से एक हजार भागेंगे, और पांच की धमकी से तुम ऐसा भागोगे कि अन्त में तुम पहाड़ की चोटी के डण्डे या टीले के ऊपर की ध्वजा के समान रह जाओगे जो चिन्ह के लिये गाड़े जाते हैं।

यशायाह 30:18 तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं।

यशायाह 30:19 हे सिय्योन के लोगों तुम यरूशलेम में बसे रहो; तुम फिर कभी न रोओगे, वह तुम्हारी दोहाई सुनते ही तुम पर निश्चय अनुग्रह करेगा: वह सुनते ही तुम्हारी मानेगा।

यशायाह 30:20 और चाहे प्रभु तुम्हें विपत्ति की रोटी और दु:ख का जल भी दे, तौभी तुम्हारे उपदेशक फिर न छिपें, और तुम अपनी आंखों से अपने उपदेशकों को देखते रहोगे।

यशायाह 30:21 और जब कभी तुम दाहिनी या बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 4-5
  • गलातियों 3

बुधवार, 23 सितंबर 2020

सुनना

 

         मेरे पड़ौस के एक घर में से आग्रह से भरी हुई आवाज़ आई, “तुम्हें मेरी बात को सुनना चाहिए; मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ!” एक बड़ा भाई, अपने छोटे भाई को, जो उससे दूर होता जा रहा था, समझा रहा था। वह ऐसा इसलिए कर रहा था क्योंकि वह परिस्थिति का आंकलन छोटे भाई से अधिक भली रीति से कर पा रहा था, और समझ रहा था कि क्या करना अधिक अच्छा रहेगा।

         हम में से कितनों ने अपने भाई या बहन के बुद्धिमानी से दिए गए परामर्श का तिरस्कार किया है? यदि आपको किसी के द्वारा दिए गए बुद्धिमत्तापूर्ण परामर्श की अवहेलना करने के कटु परिणामों को भुगतना पड़ा है, तो आप इस बात में अकेले नहीं हैं।

         प्रभु यीशु मसीह के विश्वासी होने के नाते जो महान प्रावधान हमें उपलब्ध करे गए हैं उनमें से एक है हमारा मसीही विश्वासियों के परिवार का एक सदस्य होना – प्रभु यीशु मसीह में लाए गए समान विश्वास के कारण एक दूसरे के साथ आत्मिक रीति से संबंधित होना। हमारे इस आत्मिक परिवार में परिपक्व और अनुभवी पुरुष और स्त्रियाँ भी हैं, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं, और उसके परिवार के अन्य सदस्यों से भी। मेरे पड़ौस के उस छोटे भाई के समान, कभी-कभी हमें भी चेतावनी या सुधार के कुछ शब्दों की आवश्यकता होती है जिससे कि हम वापस सही मार्ग पा आ सकें। ऐसा तब और भी आवश्यक होता है जब या तो हमने किसी को आहत किया हो, या किसी ने हमें आहत किया हो। वह जो सही है उसे करना कठिन हो सकता है। किन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने हमें सिखाया है कि जब हमारे आत्मिक परिवार में एक दूसरे से ठोकर लगे तो किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए (मत्ती 18:15-20)।

         हमें अपने परमेश्वर पिता का आभारी होना चाहिए कि वह हमारे जीवनों में ऐसे लोगों को रखता है जो हमारी सहायता करने, हमें उभारने, और अपने प्रभु परमेश्वर की महिमा के लिए सही जीवन जीने, उसे आदर देने में हमारी सहायता करने को तैयार रहते हैं। और जब हम उनकी सुनते हैं, तो हमारे मसीही परिवार में भला होता है (पद 15)।  - आर्थर जैक्सन

 

जब हम परिपक्व मसीही विश्वासियों की सुनते हैं, तो बुद्धिमत्ता उन्नत होती है।


तो वह यह जान ले, कि जो कोई किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह एक प्राण को मृत्यु से बचाएगा, और अनेक पापों पर परदा डालेगा। - याकूब 5:20

बाइबल पाठ: मत्ती 18:15-20

मत्ती 18:15 यदि तेरा भाई तेरा अपराध करे, तो जा और अकेले में बातचीत कर के उसे समझा; यदि वह तेरी सुने तो तू ने अपने भाई को पा लिया।

मत्ती 18:16 और यदि वह न सुने, तो और एक दो जन को अपने साथ ले जा, कि हर एक बात दो या तीन गवाहों के मुंह से ठहराई जाए।

मत्ती 18:17 यदि वह उन की भी न माने, तो कलीसिया से कह दे, परन्तु यदि वह कलीसिया की भी न माने, तो तू उसे अन्य जाति और महसूल लेने वाले के ऐसा जान।

मत्ती 18:18 मैं तुम से सच कहता हूं, जो कुछ तुम पृथ्वी पर बान्‍धोगे, वह स्वर्ग में बन्‍धेगा और जो कुछ तुम पृथ्वी पर खोलोगे, वह स्वर्ग में खुलेगा।

मत्ती 18:19 फिर मैं तुम से कहता हूं, यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिये जिसे वे मांगें, एक मन के हों, तो वह मेरे पिता की ओर से स्वर्ग में है उन के लिये हो जाएगी।

मत्ती 18:20 क्योंकि जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं वहां मैं उन के बीच में होता हूं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 1-3
  • गलातियों 2

मंगलवार, 22 सितंबर 2020

प्रोत्साहन


         सन 2010 में बनी फिल्म The King’s Speech इंग्लैंड के राजा जॉर्ज षष्टम के जीवन पर है, जो, जब उनके भाई ने सिंहासन छोड़ दिया, तो अनायास ही राजा बन गए। देश उस समय दूसरे विश्वयुद्ध की कगार पर था, और रेडियो की समाज में प्रभावशाली भूमिका और पहुँच थी, इसलिए सरकारी अधिकारी एक ऐसा नेतृत्व चाहते थे जो बोलने और व्यवहार में अच्छा हो। किन्तु राजा जॉर्ज षष्टम के साथ एक समस्या थी – वह हकलाता था।

         मुझे उस फिल्म में जॉर्ज की पत्नी एलिज़ाबेथ के चित्रण ने बहुत प्रभावित किया। उसके हकलाने की समस्या पर विजयी होने के समस्त कठिन संघर्ष में, वह निरंतर उन्हें प्रोत्साहन देती रही। उसकी पत्नी के उसके प्रति दृढ़ समर्पण और सहायता तथा प्रोत्साहन से जॉर्ज अपनी इस चुनौती पर विजयी हो सका, तथा इंग्लैंड पर भी उस कठिन दौर में अच्छा शासन किया।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रोत्साहन देने वालों की कहानियाँ भी हैं, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में औरों को बहुत सहायता प्रदान की। इस्राएल के युद्ध में मूसा को हारून और हूर की सहायता मिली (निर्गमन 17:8-16)। प्रभु यीशु की माता मरियम को अपनी गर्भावस्था में उसकी रिश्तेदार एलिज़ाबेथ ने प्रोत्साहन दिया (लूका 1:42-45)।

         पौलुस के मसीही विश्वासी बनने के पश्चात उसको , बरनबास, जिसके नाम का शब्दार्थ होता है “शान्ति का पुत्र”, से प्रोत्साहन और सहायता मिली। जब शिष्य पौलुस के विषय घबरा रहे थे, तब बरनबास ने अपनी ख्याति का जोखिम उठाकर, पौलुस के पक्ष में बात की (प्रेरितों 9:27)। बरनबास द्वारा पौलुस के अनुमोदन से ही मसीही विश्वासियों के समाज ने पौलुस को स्वीकार किया। बाद में बरनबास पौलुस का प्रचार यात्राओं में साथी बना (प्रेरितों 14)। खतरों के बावजूद उन्होंने साथ मिलकर सुसमाचार प्रचार का कार्य किया।

         आज भी मसीही विश्वासियों की बुलाहट है कि वे औरों को शान्ति दें तथा दूसरों की उन्नति का कारण बनें (1 थिस्सलुनीकियों 5:11)। हमें भी आज कठिन परिस्थितियों और समस्याओं का सामना करने वाले लोगों को प्रोत्साहन और सहायता देने वाले मसीही बनना चाहिए। - लीसा सामरा

 

मित्र का प्रोत्साहन बहुत अंतर ला सकता है।


इस कारण एक दूसरे को शान्ति दो, और एक दूसरे की उन्नति के कारण बनो, निदान, तुम ऐसा करते भी हो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:11

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:26-31

प्रेरितों 9:26 यरूशलेम में पहुंचकर उसने चेलों के साथ मिल जाने का उपाय किया: परन्तु सब उस से डरते थे, क्योंकि उन को विश्वास न होता था, कि वह भी चेला है।

प्रेरितों 9:27 परन्तु बरनबास उसे अपने साथ प्रेरितों के पास ले जा कर उन से कहा, कि इस ने किस रीति से मार्ग में प्रभु को देखा, और इस ने इस से बातें कीं; फिर दमिश्क में इस ने कैसे हियाव से यीशु के नाम का प्रचार किया।

प्रेरितों 9:28 वह उन के साथ यरूशलेम में आता जाता रहा।

प्रेरितों 9:29 और निधड़क हो कर प्रभु के नाम से प्रचार करता था: और यूनानी भाषा बोलने वाले यहूदियों के साथ बातचीत और वाद-विवाद करता था; परन्तु वे उसके मार डालने का यत्न करने लगे।

प्रेरितों 9:30 यह जानकर भाई उसे कैसरिया में ले आए, और तरसुस को भेज दिया।

प्रेरितों 9:31 सो सारे यहूदिया, और गलील, और सामरिया में कलीसिया को चैन मिला, और उसकी उन्नति होती गई; और वह प्रभु के भय और पवित्र आत्मा की शान्ति में चलती और बढ़ती जाती थी।

 

 एक साल में बाइबल: 

  • सभोपदेशक 10-12
  • गलातियों 1