ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

कल्पना


          सुप्रसिद्ध अंग्रजी लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे से कहा गया कि वे केवल छः शब्दों में एक सम्मोहक कहानी लिखें। प्रत्युत्तर में उन्होंने लिखा: “For Sale: Baby Shoes. Never worn. (बिक्री के लिए: बच्चे के जूते; कभी पहने नहीं गए।)” हेमिंग्वे की यह कहानी सशक्त है क्योंकि यह पाठक को अपनी कल्पना के अनुसार विवरण भरने के लिए प्रेरित करती है। क्या किसी स्वस्थ बच्चे को उन जूतियों की वास्तव में कभी कोई आवश्यकता नहीं पड़ी? या, कहीं कोई दुखद त्रासदी घटित हुई – कुछ ऐसा जिसमें परमेश्वर के गहरे प्रेम और सांत्वना की आवश्यकता रही हो?

          अच्छी कहानियाँ हमारी कल्पना को कचोटती हैं, हमारे दिलों को छूकर हमें विचार करने पर बाध्य करती हैं। इसीलिए इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि संसार की सबसे सर्वोत्तम सत्य-कथा, भी हमारी रचनात्मकता को उत्तेजित करती है। परमेश्वर द्वारा दी गई इस सत्य-कथा की केन्द्रीय कथा-वस्तु परमेश्वर द्वारा हर वस्तु की सृष्टि किया जाना है। हम मनुष्य पाप में गिर गए; हमें पापों के दुष्परिणामों से बचाने के लिए प्रभु परमेश्वर मसीह यीशु मनुष्य रूप में पृथ्वी पर आए, निष्पाप जीवन जिया, समस्त मानवजाति के पापों को अपने ऊपर लेकर उनका दण्ड कलवरी के क्रूस पर अपने जीवन को बलिदान करने के द्वारा चुकाया; वे मारे गए, गाड़े गए, और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठे; और अब हम उनके वापस लौटने तथा सभी बातों को बहाल करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

          यह जानते हुए कि पहले क्या हो चुका है, और आगे क्या होने वाला है, हमें वर्तमान में कैसा जीवन बिताना चाहिए? यदि प्रभु यीशु अपनी संपूर्ण सृष्टि को शैतान के चंगुल से छुड़ाने वाले हैं, तो हम भी “रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्ध लें” (रोमियों 13:12)। इसमें, परमेश्वर की सामर्थ्य के द्वारा, पाप से मुँह मोड़ लेना और परमेश्वर तथा औरों से उसके समान प्रेम रखना सम्मिलित है (पद 8-10)।

          हम प्रभु यीशु के साथ मिलाकर बुराई से किस प्रकार से लड़ सकते हैं, यह हमें दिए गए वरदानों तथा हमारे द्वारा अपने चारों ओर देखी जा सकने वाली आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। हम परमेश्वर के मार्गदर्शन के अंतर्गत आहत तथा दुखी लोगों को सहायता प्रदान कर सकते हैं; परमेश्वर के न्याय, प्रेम और शान्ति को औरों तक पहुँचा सकते हैं; उद्धार के सुसमाचार को लोगों तक पहुंचाने में सहायक हो सकते हैं। हम अपने चारों ओर लोगों की आवश्यकताओं पर विचार करें और उन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपनी कल्पना को प्रयोग करें। - माइक व्हिटमर

 

परमेश्वर की कहानी में अपनी भूमिका को उसके मार्गदर्शन में पूरा करें।


जिसने मुझे भेजा है; हमें उसके काम दिन ही दिन में करना अवश्य है: वह रात आने वाली है जिस में कोई काम नहीं कर सकता। - यूहन्ना 9:4

बाइबल पाठ: रोमियों 13:8-14

रोमियों 13:8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है।

रोमियों 13:9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।

रोमियों 13:10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

रोमियों 13:11 और समय को पहचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुंची है, क्योंकि जिस समय हम ने विश्वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है।

रोमियों 13:12 रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्ध लें।

रोमियों 13:13 जैसा दिन को सोहता है, वैसा ही हम सीधी चाल चलें; न कि लीला क्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और डाह में।

रोमियों 13:14 वरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:21-41 

सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

डर

 

          एक इतवार के दिन मैंने देखा कि एक दो वर्षीय बच्ची, चर्च की सीढ़ियाँ अपने आप ही उतरने का प्रयास कर रही थी। वह देखने में बहुत आकर्षक, और स्वभाव से साहसी तथा आत्मनिर्भर प्रतीत हो रही थी। स्वयं ही वह एक मंजिल की सीढ़ियाँ उतर पाना उसका उद्देश्य था, और उसने इसे पूरा भी किया। इस छोटी बच्ची के साहस को देखकर मैं मुस्कराया और उस की निडरता पर विचार करने लगा। उस बच्ची को इसलिए डर नहीं लग रहा था क्योंकि वह जानती थी कि उसकी ओर अपने हाथ बढ़ाए हुए, उसकी माँ उसके साथ-साथ चल रही थी, और माँ की दृष्टि उसपर लगातार बनी हुई थी। यह प्रभु परमेश्वर की हमारे प्रति देखभाल और सदा हमारी सहायता करने के लिए तत्पर रहने का एक उपयुक्त उदाहरण है, जब हमें जीवन की विभिन्न परिस्थितियों और कठिनाइयों से होकर निकलना पड़ता है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में से आज के पाठ में परमेश्वर द्वारा हाथ बढ़ाकर सहायता करने के दो हवाले हैं। अपने प्राचीन लोगों को भयभीत या हतोत्साहित न होने के लिए सचेत करने के पश्चात, यहोवा ने उन्हें आश्वासन दिया, “मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा” (यशायाह 41:10)। यह सामान्य बात है कि माता-पिता या अभिभावकों की आश्वस्त करने वाली उपस्थिति के द्वारा अनेकों चिंतित और भयभीत बच्चे शांत और स्थिर किए जाते हैं। इसी प्रकार से यहाँ पर भी पिता के समान परमेश्वर की शान्ति और ढाढ़स देने वाली उपस्थिति और सामर्थ्य हमारे सामने आती है। ‘हाथ’ के दूसरे हवाले में, एक बार फिर यहोवा ने अपने लोगों की सुरक्षा के लिए पहल की; “क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहूंगा, मत डर, मैं तेरी सहायता करूंगा” (यशायाह 41:13)।

          जबकि जीवन की परिस्थितियाँ समय के साथ बदलती रहती हैं, परमेश्वर कभी भी नहीं बदलता है। हमें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे साथ सदा बनी रहने वाली अपनी उपस्थिति और लगातार हम पर दृष्टि लगाए रहने के आश्वासन के द्वारा हमें ढाढ़स देता है; उसकी सहायता और सुरक्षा सदा हमारे साथ बनी रहती हैं; हम से परमेश्वर का वायदा है, “मत डर, मैं तेरी सहायता करूँगा” (पद , 13)। – आर्थर जैक्सन

 

जब परमेश्वर मेरा हाथ थामे हुए है; तो मैं सुरक्षित हूँ।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: यशायाह 41:8-13

यशायाह 41:8 हे मेरे दास इस्राएल, हे मेरे चुने हुए याकूब, हे मेरे प्रेमी इब्राहीम के वंश;

यशायाह 41:9 तू जिसे मैं ने पृथ्वी के दूर दूर देशों से लिया और पृथ्वी की छोर से बुला कर यह कहा, तू मेरा दास है, मैं ने तुझे चुना है और तजा नहीं;

यशायाह 41:10 मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा।

यशायाह 41:11 देख, जो तुझ से क्रोधित हैं, वे सब लज्जित होंगे; जो तुझ से झगड़ते हैं उनके मुंह काले होंगे और वे नाश हो कर मिट जाएंगे।

यशायाह 41:12 जो तुझ से लड़ते हैं उन्हें ढूंढने पर भी तू न पाएगा; जो तुझ से युद्ध करते हैं वे नाश हो कर मिट जाएंगे।

यशायाह 41:13 क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहूंगा, मत डर, मैं तेरी सहायता करूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 4-6
  • मरकुस 4:1-20

रविवार, 21 फ़रवरी 2021

बलिदान

 

          मेरी एक आंटी की बहुत अच्छी नौकरी थी, जिसके लिए उन्हें अकसर एक से दूसरे शहर यात्रा करनी पड़ती थी। लेकिन अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी और उससे जुड़े उनके उन्नत भविष्य को छोड़ देने का निर्णय लिया। उनके दोनों भाइयों का उनकी युवावस्था में ही दुखद परिस्थितियों में देहांत हो गया था, और अब माता-पिता की देखभाल के लिए वह अकेली ही रह गई थी। उसके लिए, अपने माता-पिता की सेवा करना, उसके मसीही विश्वास को जी कर दिखाना था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित द्वारा रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री में, उसने उन से आग्रह किया कि वे परमेश्वर के लिए एक “जीवित और पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान” बनें (रोमियों 12:1)। वह चाहता था कि वे मसीह के समान बलिदान देने वाले प्रेम को एक-दूसरे के प्रति दिखाएं। उसने उन से यह भी कहा कि वे अपने आप को जैसा समझना चाहिए उससे बढ़कर न समझें (पद 3)। पौलुस ने उन्हें समझाया कि यदि उनमें मतभेद और विभाजन होने लगें, तो वे अपने अहम् को छोड़कर एक-दूसरे से व्यवहार करें क्योंकि “हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं” (पद 5)। पौलुस की बहुत लालसा थी कि वे बलिदान देने वाला प्रेम दिखाएँ।

          हमारे पास प्रतिदिन यह अवसर होता है कि हम औरों की सेवा करें। उदाहरण के लिए, हम किसी और को कतार में, अपने से आगे जाने दें, या, जैसे मेरी उस आंटी ने किया, किसी की सेवा करने के लिए आगे बढ़ें। हम अपने अनुभवों के आधार पर किसी को परामर्श और मार्गदर्शन भी दे सकते हैं।

          जब हम बलिदान वाला प्रेम दिखाते हैं, तब हम परमेश्वर की आज्ञाकारिता और आदर करते हैं। - एमी बाउचर पाई

 

जब हम प्रभु परमेश्वर के नाम में औरों की सेवा करते हैं, तो परमेश्वर प्रसन्न होता है।


ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहचान में बढ़ते जाओ। - कुलुस्सियों 1:10

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8

रोमियों 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।

रोमियों 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।

रोमियों 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।

रोमियों 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।

रोमियों 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।

रोमियों 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यवाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यवाणी करे।

रोमियों 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।

रोमियों 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3

बलिदान

 

          मेरी एक आंटी की बहुत अच्छी नौकरी थी, जिसके लिए उन्हें अकसर एक से दूसरे शहर यात्रा करनी पड़ती थी। लेकिन अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी और उससे जुड़े उनके उन्नत भविष्य को छोड़ देने का निर्णय लिया। उनके दोनों भाइयों का उनकी युवावस्था में ही दुखद परिस्थितियों में देहांत हो गया था, और अब माता-पिता की देखभाल के लिए वह अकेली ही रह गई थी। उसके लिए, अपने माता-पिता की सेवा करना, उसके मसीही विश्वास को जी कर दिखाना था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित द्वारा रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री में, उसने उन से आग्रह किया कि वे परमेश्वर के लिए एक “जीवित और पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान” बनें (रोमियों 12:1)। वह चाहता था कि वे मसीह के समान बलिदान देने वाले प्रेम को एक-दूसरे के प्रति दिखाएं। उसने उन से यह भी कहा कि वे अपने आप को जैसा समझना चाहिए उससे बढ़कर न समझें (पद 3)। पौलुस ने उन्हें समझाया कि यदि उनमें मतभेद और विभाजन होने लगें, तो वे अपने अहम् को छोड़कर एक-दूसरे से व्यवहार करें क्योंकि “हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं” (पद 5)। पौलुस की बहुत लालसा थी कि वे बलिदान देने वाला प्रेम दिखाएँ।

          हमारे पास प्रतिदिन यह अवसर होता है कि हम औरों की सेवा करें। उदाहरण के लिए, हम किसी और को कतार में, अपने से आगे जाने दें, या, जैसे मेरी उस आंटी ने किया, किसी की सेवा करने के लिए आगे बढ़ें। हम अपने अनुभवों के आधार पर किसी को परामर्श और मार्गदर्शन भी दे सकते हैं।

          जब हम बलिदान वाला प्रेम दिखाते हैं, तब हम परमेश्वर की आज्ञाकारिता और आदर करते हैं। - एमी बाउचर पाई

 

जब हम प्रभु परमेश्वर के नाम में औरों की सेवा करते हैं, तो परमेश्वर प्रसन्न होता है।


ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहचान में बढ़ते जाओ। - कुलुस्सियों 1:10

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8

रोमियों 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।

रोमियों 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।

रोमियों 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।

रोमियों 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।

रोमियों 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।

रोमियों 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यवाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यवाणी करे।

रोमियों 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।

रोमियों 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3

शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

शब्द

 

          सभी चार वर्ष के बच्चों के समान रूबी को भी भागना, गाना, नाचना और खेलना अच्छा लगता था। लेकिन जब वह घुटनों में दर्द बताने लगी, तो उसके माता-पिता उसे जाँच करवाने के लिए ले गए। जाँच के परिणाम चौंका देने वाले थे – चौथे स्तर तक पहुँचा हुआ कैंसर; रूबी जोखिम में थी। उसे शीघ्र ही इलाज के लिए अस्पताल में भरती करवाया गया। इलाज के लिए उसके अस्पताल में रहने की अवधि लम्बी होती ही गई, और क्रिसमस के समय तक पहुँच गई, जो कि घर से दूर रहने के लिए एक कठिन समय होता है। रूबी के इलाज में लगी एक नर्स को एक विचार आया, और उसने रूबी के कमरे के सामने डाक रखने वाला एक डिब्बा लगा दिया, जिसमें परिवार जन रूबी के लिए पत्र लिख कर डाल सकते थे; पत्र जिनमें रूबी के लिए प्रार्थनाएँ और प्रोत्साहन के शब्द लिखे होते थे। फिर यह बात फेसबुक पर भी निवेदन में चली गई, और तब मित्रों तथा अन्य लोगों, यहाँ तक कि अजनबियों से भी रूबी के लिए इतनी डाक आने लगी कि सब, यहाँ तक कि स्वयं रूबी भी चकित रह गई। हर पत्र के साथ रूबी थोड़ी और प्रोत्साहित होती, और उसे कुल मिलाकर 100,000 से भी अधिक पत्र मिले; और अन्ततः वह घर जाने पाई।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को प्रेरित पौलुस ने भी एक पत्र लिखा – कागज़ पर लिखे गए कुछ शब्द – शब्द जो तब उन्हें, और आज हमें, मसीही जीवन में फलवन्त होने, मसीही ज्ञान, समझ, सामर्थ्य, सहनशीलता, और धैर्य में बढ़ते जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं (पद 10-11)। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उन मसीही विश्वासियों के लिए पौलुस द्वारा लिखे गए ये शब्द कितनी अच्छी औषधि थे। इतना भर भी जानना कि कोई उनके लिए निरंतर प्रार्थना करता है, उन्हें मसीह यीशु में लाए गए विश्वास में स्थिर बने रहने के लिए प्रोत्साहित करता रहा।

          प्रोत्साहन के शब्द आवश्यकता में पड़े लोगों के लिए बहुत सहायक हो सकते हैं। - जॉन ब्लेज़

 

प्रोत्साहित करें, प्रार्थना करें, मसीही विश्वासियों को उभारें और विश्वास में बढ़ने में सहायक बनें।


इसी लिये हम सदा तुम्हारे निमित्त प्रार्थना भी करते हैं, कि हमारा परमेश्वर तुम्हें इस बुलाहट के योग्य समझे, और भलाई की हर एक इच्छा, और विश्वास के हर एक काम को सामर्थ्य सहित पूरा करे। - 2 थिस्स्लुनीकियों 1:11

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:9-12

कुलुस्सियों 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहचान में परिपूर्ण हो जाओ।

कुलुस्सियों 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहचान में बढ़ते जाओ।

कुलुस्सियों 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ्य से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।

कुलुस्सियों 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में संभागी हों।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 26-27
  • मरकुस 2

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

सीखो और बढ़ो

 

          मेरे एक मित्र ने मुझे, अपने जीवन और अनुभवों के आधार पर, एक बहुत उपयोगी और बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह दी। अपने व्यावसायिक जीवन के आरंभिक वर्षों में, जब मेरा मित्र, आलोचना तथा प्रशंसा, दोनों ही से व्यवहार करना सीखने में संघर्ष कर रहा था, तो उसे लगा कि परमेश्वर उससे कह रहा ही कि वह दोनों ही को पीछे छोड़ते हुए आगे ही बढ़ता जाए। जो बात उसने सीखी, उसका सार यही था कि वह आलोचना और प्रशंसा से जो भी सीख सकता है, उसे सीख कर, दोनों ही को पीछे छोड़ दे, और परमेश्वर के अनुग्रह में दीन होकर आगे बढ़ता जाए।

          आलोचना और प्रशंसा, दोनों ही हमारे अन्दर प्रबल भावनाएँ जगाते हैं, और यदि इन दोनों ही प्रकार की भावनाओं को नियंत्रण में नहीं रखा गया, तो ये या तो हमें अत्यधिक आत्म-ग्लानि में अथवा अत्यधिक घमण्ड में ले जाएँगी। परमेश्वर के वचन बाइबल में, नीतिवचन की पुस्तक में हम औरों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह देने के लाभ के बारे में पढ़ते हैं: “अच्छे समाचार से हड्डियां पुष्ट होती हैं ... जो शिक्षा को सुनी-अनसुनी करता, वह अपने प्राण को तुच्छ जानता है, परन्तु जो डांट को सुनता, वह बुद्धि प्राप्त करता है” (15:30, 32)।

          यदि हमें किसी से फटकार सुननी पड़ रही है, तो हम यह ठान लें कि हम उस से अपने अन्दर उचित सुधार लाएँगे। नीतिवचन में लिखा है, “जो जीवनदायी डांट कान लगा कर सुनता है, वह बुद्धिमानों के संग ठिकाना पाता है” (पद 31)। और यदि हमें प्रशंसा के शब्दों से आशीषित किया जा रहा है, तो हम उन से तरोताजा होकर कृतज्ञ भी हो जाएँ। जब हम परमेश्वर के साथ नम्रता पूर्वक चलते हैं, तो वह हमें आलोचना और प्रशंसा, दोनों ही से सीखने वाला बना सकता है। और फिर परमेश्वर के मार्गदर्शन में हम उन्हें वहीं छोड़कर और आगे बढ़ते जा सकते हैं (पद 33)। - रूथ ओ-रियली-स्मिथ

 

आलोचना अथवा प्रशंसा पर रुक कर न बैठें, वरन उन्हें सीढ़ी बनाकर और आगे बढ़ जाएँ।


इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। - 1 पतरस 5:6

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:30-33

नीतिवचन 15:30 आंखों की चमक से मन को आनन्द होता है, और अच्छे समाचार से हड्डियां पुष्ट होती हैं।

नीतिवचन 15:31 जो जीवनदायी डांट कान लगा कर सुनता है, वह बुद्धिमानों के संग ठिकाना पाता है।

नीतिवचन 15:32 जो शिक्षा को सुनी-अनसुनी करता, वह अपने प्राण को तुच्छ जानता है, परन्तु जो डांट को सुनता, वह बुद्धि प्राप्त करता है।

नीतिवचन 15:33 यहोवा के भय मानने से शिक्षा प्राप्त होती है, और महिमा से पहिले नम्रता होती है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 25
  • मरकुस 1:23-45

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

बदलना

 

          जब मेरे मित्र डेविड की पत्नी को एलज़हाइमर रोग हुआ, जिससे रोगी की स्मरण शक्ति क्षीण होते-होते, जाती रहती है और शरीर भी दुर्बल होता चला जाता है, तो इससे जो बदलाव उस मित्र को अपने जीवन में करने पड़े, उनके कारण वह बहुत कटु हो गया। अपनी पत्नी की देखभाल करने के लिए उसे अपने काम से, समय से पहले ही, सेवा-निवृत्ति लेनी पड़ी। उसने मुझे बताया, “मैं परमेश्वर से बहुत क्रुद्ध हुआ; किन्तु मैंने इसके बारे में जितनी अधिक प्रार्थनाएँ कीं, परमेश्वर ने मुझे उतना अधिक दिखाया कि मेरे मन के वास्तविक दशा क्या है और कैसे मैं अपने विवाहित जीवन के अधिकांश समय में स्वार्थी रहा हूँ।” उसकी आँखें भर आईं जब उसने कहा, “उसे अस्वस्थ हुए अब दस वर्ष हो गए हैं, परन्तु परमेश्वर ने मेरी सहायता की है कि मैं एक भिन्न दृष्टिकोण से जीवन को देखूँ। अब मैं उसके लिए जो कुछ भी करता हूँ वह उसके तथा हमारे प्रभु यीशु के प्रति प्रेम के कारण करता हूँ। उसकी देखभाल करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य हो गया है।”

          कभी-कभी परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर हमें वह देने के स्थान पर, जो हम माँग रहे हैं, हमें बदलने के लिए चुनौती देने के द्वारा करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब नीनवे को क्षमा कर देने के कारण योना नबी परमेश्वर से क्रुद्ध हुआ, तो परमेश्वर ने उसे तेज़ धूप से बचाने के लिए एक पौधे को उगाया (योना 4:6); और फिर उसे सुखा भी दिया। जब योना इसके लिए कुड़कुड़ाया, तो परमेश्वर ने उससे पूछा, “क्या तेरा इस पौधे के लिए कुड़कुड़ाना सही है?” (पद 7-9)। योना ने, जो केवल अपने ही ऊपर ध्यान केन्द्रित किए हुआ था, खिसियाहट में होकर कहा, कि उसका दृष्टिकोण सही है। लेकिन परमेश्वर ने उसे दृष्टिकोण बदलने तथा औरों के बारे में भी ध्यान करने के लिए कहा।

          परमेश्वर, हमें सिखाने और बढ़ाने के लिए, हमारी प्रार्थनाओं को कभी-कभी अनपेक्षित तरीकों से काम में लाता है। जब वह ऐसा करे, तो यह ऐसा बदलाव है जिसे हमें खुले हृदय के साथ स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि वह अपने प्रेम में होकर हमें और बेहतर बनाना चाहता है, हमें बदलना चाहता है। - जेम्स बैंक्स

 

जब हम परमेश्वर के साथ समय बिताते हैं, वह हमें बढ़ाता और बदलता है।


वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, “परमेश्‍वर अभिमानियों का विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।” - याकूब 4:6

बाइबल पाठ: योना 4

योना 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का।

योना 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करुणा-निधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।

योना 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है।

योना 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?

योना 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा?

योना 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ।

योना 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया।

योना 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।

योना 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।

योना 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाई है।

योना 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 23-24
  • मरकुस 1:1-22