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सोमवार, 26 सितंबर 2011

माँगने और सोचने से बढ़कर

   सन १९५६ में अपनी मृत्यु के समय जिम इलियट दक्षिण अमेरिका की आऔका कबायली जाति के लोगों तक प्रभु यीशु का सुसमाचार पहुँचाने का प्रयास कर रहा था। इससे लगभग तीन वर्ष पूर्व, एक कबायली मनुष्य की मृत्यु देखते हुए उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी थी कि "प्रभु मुझे तब तक जीवित रखिए जब तक मैं इन लोगों में आपके नाम का प्रचार न कर लूँ।" जिम इलियट को यह कतई अन्देशा नहीं था कि परमेश्वर उसकी प्रार्थना का उत्तर तीस वर्ष की आयु तक पहुँचने के पहले ही उन कबायलीयों द्वारा भाला भोंक कर मारे जाने द्वारा देंगे; और ना ही उसे यह पता था कि उसकी मृत्यु के तीन वर्ष के अन्दर ही उसका नाम संसार भर में प्रसिद्ध हो जाएगा और उसकी डायरी में उसके द्वारा लिखे विवरणों को पढ़कर बहुत से लोग प्रभु की सेवकाई की चुनौती को स्वीकार करेंगे और अपने आप को उन कबायलियों के बीच प्रभु की सेवा करने के लिए समर्पित करेंगे। इलियट की मृत्यु व्यर्थ नहीं थी, उस एक मत्यु ने उस इलाके में प्रभु की सेवाकाई के लिए अनेकों को ला खड़ा किया, और जो काम हुआ वह उसकी सोच और समझ से कहीं अधिक बढ़कर था।

   परमेश्वर हमसे बहुत प्रेम करता है और हमारी प्रार्थनाओं को ध्यान से सुनता है, लेकिन आवश्यक नहीं कि उसका हर उत्तर हमारी उम्मीद के अनुसार ही हो। क्योंकि वह ऐसा परमेश्वर है जो "कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है" (इफिसियों३:२०); इसलिए हम आश्वस्त रह सकते हैं कि यदि उसने हमारी समझ के अनुसार हमें उत्तर नहीं दिया है तो वह इसलिए कि वह हमें उससे भी बेहतर कुछ देना चाहता है।

   जब हम अपना माँगा हुआ सब कुछ नहीं प्राप्त करते तो यह निराश होने की बात नहीं है। परमेश्वर हम से प्रेम करता है और हमारी इच्छा पूरी भी करना चाहता है; लेकिन वह आरंभ से ही अन्त को जानता है, इसलिए हमारी माँगी हुई कुछ बातों को रोक लेता है क्योंकि वह हमारे भविष्य के अनुसार हमें और भी उत्तम कुछ देना चाहता है।

   जब हम स्वर्ग पहुँचेंगे तब ही जानेंगे कि उसने कैसी अद्भुत रीति से हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया, और जो उसने हमें दिया, वह वास्तव में हमारी विनती और समझ से कहीं बढ़कर और उत्तम था। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

परमेश्वर सदैव ही हमें हमारी प्रार्थना के अनुसार, या उससे भी बेहतर ही देता है।

अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है; - इफिसियों३:२०

बाइबल पाठ: इफिसियों३:१३-२१
    Eph 3:13  इसलिये मैं बिनती करता हूं कि जो क्‍लेश तुम्हारे लिये मुझे हो रहे हैं, उनके कारण हियाव न छोड़ो, क्‍योंकि उन में तुम्हारी महिमा है।
    Eph 3:14  मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं,
    Eph 3:15  जिस से स्‍वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।
    Eph 3:16  कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ।
    Eph 3:17  और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर।
    Eph 3:18  सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है।
    Eph 3:19  और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
    Eph 3:20  अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है,
    Eph 3:21  कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह १-२ 
  • गलतियों ५

रविवार, 25 सितंबर 2011

दरवाज़े बन्द कर लीजिए

   अमेरिका में आए एक विदेशी पर्यटक को टेलिफोन करने की आवश्यक्ता पड़ी और वह टेलिफोन बूथ में गया; वह बूथ उसके अपने देश के टेलिफोन बूथ से भिन्न था। शाम होने के कारण बूथ के अन्दर रौशनी कम थी और वह टेलिफोन डायरेक्टरी में से नंबर पढ़ पाने में कठिनाई अनुभव कर रहा था। उसने रौशनी के लिए इधर-उधर देखा, उसे बूथ की छत पर बल्ब तो दिखाई दिया, लेकिन उसे जलाने के लिए कोई बटन नज़र नहीं आया; अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे बल्ब जलाए और डायरेक्टरी से नंबर पढ़े। उसके असमंजस को देख, राह चलते एक व्यक्ति ने उसे सलाह दी, "यदि आप को रौशनी चाहिए तो दरवाज़ा बन्द करना होगा।" उसने सलाह मानकर जैसे ही बूथ का दरवाज़ा बन्द किया, बल्ब स्वतः ही जल गया और बूथ रौशन हो गया।

   परमेश्वर के साथ संगति और प्रार्थना के लिए भी यही चाहिए - परमेश्वर सम्मुख आने पर मन के दरवाज़े संसार की बातों और व्यस्तता पर बन्द कर दीजिए, और स्वतः ही उसकी उपस्थिति का प्रकाश हमारे अन्धेरे मन को रौशन करके हमें हमारी परेशानियों और कठिनाईयों में मार्ग दिखाएगा। हम परमेश्वर से संगति करने पाएंगे और अपने जीवन के लिए उसके मार्गदर्शन और संसाधनों का लाभ उठाने पाएंगे।

   हमारा प्रभु यीशु भी अकसर अपने स्वर्गीय पिता के साथ समय बिताने के लिए एकांत स्थानों में जाया करता था; वह ऐसा कभी प्रचार और चंगाई के व्यस्त दिन की समाप्ति पर करता था, जैसा हम लूका ५ में वर्णन पाते हैं, तो कभी तड़के सुबह मुँह अन्धेरे ही उठकर (मरकुस १:१५), अथवा किसी बड़े निर्ण्य को लेने से पहले (लूका ६:१२)।

   हम मसीही विश्वासी जो प्रभु यीशु के चेले हैं, आश्वस्त रह सकते हैं कि "यदि हम उस की इच्‍छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो वह हमारी सुनता है" (१ युहन्ना ५:१४): इसलिए उसकी इच्छा जानना हमारे लिए अति आवश्यक है। यह तब ही संभव है जब हम शांत और स्थिर मन के साथ उसके साथ संगति में समय बिताएं, और इसके लिए हमें संसार की बातों और अपनी व्यस्तता पर अपने मन के दरवाज़े बन्द करने होंगे, तब ही उसका प्रकाश हमारे मन और मार्ग को रौशन करेगा। - रिचर्ड डी हॉन


प्रबल और सफल प्रार्थना का भेद है एकांत में प्रार्थना करना।

परन्‍तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। - मत्ती ६:६

बाइबल पाठ: लूका ५:१२-१६
    Luk 5:12  जब वह किसी नगर में था, तो देखो, वहां कोढ़ से भरा हुआ एक मनुष्य था, और वह यीशु को देख कर मुंह के बल गिरा, और बिनती की, कि हे प्रभु यदि तू चाहे हो मुझे शुद्ध कर सकता है।
    Luk 5:13  उस ने हाथ बढ़ा कर उसे छूआ और कहा मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा: और उसका कोढ़ तुरन्‍त जाता रहा।
    Luk 5:14  तब उस ने उसे चिताया, कि किसी से न कह, परन्‍तु जाके अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने चढ़ावा ठहराया है उसे चढ़ा; कि उन पर गवाही हो।
    Luk 5:15  परन्‍तु उस की चर्चा और भी फैलती गई, और भीड़ की भीड़ उस की सुनने के लिये और अपनी बिमारियों से चंगे होने के लिये इकट्ठी हुई।
    Luk 5:16  परन्‍तु वह जंगलों में अलग जा कर प्रार्थना किया करता था।
 
एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत ६-८ 
  • गलतियों ४

शनिवार, 24 सितंबर 2011

"मैंने परमेश्वर से वार्तालाप किया"

   King's College के भूतपूर्व अधिपति, डा० रॉबर्ट कुक ने एक सभा को संबोधित करते हुए श्रोताओं को बताया कि पिछले दिन उन्होंने तत्कालीन उप-राष्ट्र्पति जॉर्ज बुश से बात करी और फिर उसके दो घंटे बाद थोड़े समय के लिए राष्ट्रपति रौनल्ड रीएगन से भी बातचीत करी। फिर एक बड़ी सी मुस्कान के साथ वे बोले, यह तो कुछ भी नहीं, आज मैंने परमेश्वर के साथ वार्तलाप किया - वे प्रार्थना में बिताए गए अपने समय की बात कह रहे थे।

   प्रार्थना एक नई सामर्थ और तत्परता ले लेती है, जब हम इस बात के लिए जागरूक होते हैं कि हम प्रार्थना में जिस के सम्मुख विद्यमान हैं उसकी महिमा और महानता कितनी विशाल है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम कुछ लोगों की प्रतिक्रिया के विषय में पढ़ते हैं जब उन्होंने परमेश्वर के दर्शन उसकी महिमा में किए: अय्युब अपने दुर्भाग्य के लिए बहुत कुड़कुड़ा रहा था और अपनी धार्मिकता पर उसे घमण्ड था, लेकिन जब उसने परमेश्वर के दर्शन पाए तो कह उठा, "मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ" (अय्युब ४२:५-६); परमेश्वर के नबी यशायाह ने जब परमेश्वर के दर्शन पाए तो पुकार उठा, "हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है!" (यशायाह ६:५); परमेश्वर के एक और नबी यहेजकेल ने जब परमेश्वर की महिमा देखी तो कह उठा, "उसे देख कर, मैं मुंह के बल गिरा" (यहेजकेल १:२८); प्रभु यीशु के चेले युहन्ना ने जब प्रभु को उसकी महिमा में देखा तो, "जब मैं ने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा" (प्रकशितवाक्य १:१७)।

   इन सभी के लिए परमेश्वर के उसकी महिमा और महानता में दर्शन देखना, उनके अन्दर अपनी दीन-हीन स्थिति के भारी एहसास को लेकर आया; ऐसा एहसास जो उनके सहने से बाहर था। इसी सामर्थी और महान परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में होकर अपने विश्वसियों के साथ पिता और पुत्र का रिश्ता स्थपित किया है, और आज अपने पुत्र-पुत्रियों की प्रार्थनाएं को लालायित रहता है। वह चाहता है कि हम प्रार्थना में उसके सम्मुख आएं, उससे बात-चीत करें; उससे अपने दिल की कहें, उसके दिल की सुनें। वह चाहता है कि हम उसे "हे पिता" कह कर संबोधित करें। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

हम मसीही विश्वासियों का सबसे बड़ा विशेषाधिकार है परमेश्वर के साथ वार्तालाप कर पाना।

उस ने उन से कहा; जब तुम प्रार्थना करो, तो कहो: हे पिता, तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए। - लूका ११:२
 
बाइबल पाठ: लूका ११:१-१३
    Luk 11:1  फिर वह किसी जगह प्रार्थना कर रहा था: और जब वह प्रार्थना कर चुका, तो उसके चेलों में से एक ने उस से कहा; हे प्रभु, जैसे यूहन्ना ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखलाया वैसे ही हमें भी तू सिखा दे।
    Luk 11:2  उस ने उन से कहा; जब तुम प्रार्थना करो, तो कहो: हे पिता, तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए।
    Luk 11:3  हमारी दिन भर की रोटी हर दिन हमें दिया कर।
    Luk 11:4  और हमारे पापों को क्षमा कर, क्‍योंकि हम भी अपने हर एक अपराधी को क्षमा करते हैं, और हमें परीक्षा में न ला।
    Luk 11:5  और उस ने उन से कहा, तुम में से कौन है कि उसका एक मित्र हो, और वह आधी रात को उसके पास आकर उस से कहे, कि हे मित्र, मुझे तीन रोटियां दे।
    Luk 11:6  क्‍योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।
    Luk 11:7  और वह भीतर से उत्तर दे, कि मुझे दुख न दे; अब तो द्वार बन्‍द है, और मेरे बालक मेरे पास बिछौने पर हैं, इसलिये मैं उठ कर तुझे दे नहीं सकता;
    Luk 11:8  मैं तुम से कहता हूं, यदि उसका मित्र होने पर भी उसे उठकर न दे, तौभी उस के लज्ज़ा छोड़ कर मांगने के कारण उसे जितनी आवश्यकता हो उतनी उठ कर देगा।
    Luk 11:9  और मैं तुम से कहता हूं कि मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ों तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा।
    Luk 11:10  क्‍योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है; और जो ढूंढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा।
    Luk 11:11  तुम में से ऐसा कौन पिता होगा, कि जब उसका पुत्र रोटी मांगे, तो उसे पत्थर दे: या मछली मांगे, तो मछली के बदले उसे सांप दे?
    Luk 11:12  या अण्‍डा मांगे तो उसे बिच्‍छू दे?
    Luk 11:13  सो जब तुम बुरे होकर अपने लड़के-बालों को अच्‍छी वस्‍तुऐं देना जानते हो, तो स्‍वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्‍यों न देगा?
 
एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत ४-५ 
  • गलतियों ३

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

बचाव द्वारा शान्ति

   अपनी पुस्तक The Heavenly Octave में लेखक बोरहेम ने लिखा, "आदर्श मेल-मिलाप कराने वाला वह है जो शान्ति को भंग ही नहीं होने देता है। युद्ध जीतने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसे आरंभ ही ना होने दो।" एक यहूदी धर्म-गुरू ने बोरहेम को यहूदी विवाह में करी जाने वाली एक रस्म के बारे में बताया; उसने कहा, "हम नव-दंपति के सामने एक काँच का ग्लास ऊंचा उठाकर छोड़ देते हैं और वह गिरकर टुकड़े टुकड़े होकर बिखर जाता है। उन टूटे टुकड़ों की ओर इशारा कर के हम उनसे कहते हैं कि इस पवित्र रिशते की, जिसमें तुम बन्धे हो, पूरी सावधानी और मेहनत से रक्षा करना, क्योंकि एक बार यह टूटा तो फिर उसे कभी पहले जैसा नहीं बनाया जा सकता।"

   उस स्वर्गीय राज्य के निवासी होने के नाते, जिसका शासन "शान्ति के राज्कुमार" के हाथों में है, हम मसीही विश्वासियों को भी यथासंभव शान्ति का जीवन जीना चाहिए - विशेषकर अपने परिवार के लोगों के साथ। लेकिन यह हमेशा आसान नहीं होता। विश्वास और शान्ति का यह कमज़ोर धागा बड़ी आसानी से टूट सकता है, और फिर घर में कलह और अशान्ति का राज्य बना रहता है। ऐसा होने से बचने के लिए हमें आपसी विश्वास का आदर बनाए रखना चाहिए, एक दूसरे के साथ प्रेम पूर्ण संबंध विकसित करते रहना चाहिए और एक दूसरे के भले की चाह में लगे रहना चाहिए।

   हमें मेल-मिलाप करने वाले बनना चाहिए। हमारे प्रभु यीशु ने भी यही शिक्षा दी, उन्होंने अपने चेलों से कहा है "धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे" (मत्ती ५:९)।

   परिवार, पड़ौस, समाज, कार्यस्थल या मण्डली, कहीं भी हो, इससे पहले कि कलह बढ़कर संबंधों में विछेद और स्थाई बरबादी ले आए, हम मसीही विश्वासियों को हर स्थान और परिस्थिति में शान्ति स्थापित करने के मार्गों के खोजी और समस्याओं का समाधान ढूंढने वाला बनना चाहिए। इसके लिए सर्वप्रथम अपने आप को जाँचने की आवश्यक्ता है कि कहीं हम ही तो कलह के कारण नहीं; अथवा कहीं हमारे व्यवहार के कारण ही तो आपसी मतभेद नहीं बढ़ रहे?

   मेल-मिलाप कराने वाला व्यक्ति कलह के आरंभ हो पाने ही को रोक देने के द्वारा शान्ति बनाए रखने वाला व्यक्ति होता है। - डेव एग्नर


कलह को कभी निमंत्रण न दें; वह हर निमंत्रण तुरंत स्वीकार कर लेता है।
 
धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। - मत्ती ५:९
 
बाइबल पाठ: भजन ३७:१-११
    Psa 37:1  कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर!
    Psa 37:2  क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाई मुर्झा जाएंगे।
    Psa 37:3  यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।
    Psa 37:4  यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को मूरा करेगा।
    Psa 37:5  अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़, और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।
    Psa 37:6  और वह तेरा धर्म ज्योति की नाई, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाई प्रगट करेगा।
    Psa 37:7  यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!
    Psa 37:8  क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी।
    Psa 37:9  क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
    Psa 37:10  थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा।
    Psa 37:11  परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत १-३ 
  • गलतियों २

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

प्रसन्नता और पवित्रता

   चर्च में बैठकर एक लंबे प्रचार को सुनने के बाद जब एक बालक झुंझलाया हुआ बाहर निकला, उसका चेहरा तमतमाया हुआ था; कारण था कि लंबे उपदेश को सुनते सुनते वह ऊब कर इधर-उधर ताक-झांक कर रहा था, और उसे नियंत्रण में रखने के लिए उसके पिता ने उसके कान उमेठा था। उसे देख कर चर्च के एक पदाधिकारी ने उससे पूछा, "क्या हुआ? तुम दुखी प्रतीत होते हो?" बालक ने उत्तर दिया, "जी हाँ, मैं दुखी हुँ। मुझे लगता है कि प्रसन्नता और पवित्रता, दोनो को एक साथ पा लेना कठिन है।"

   शायद उस बालक ने हम में से अधिकांश लोगों की भावना को व्यक्त किया था; लेकिन यह धारणा सही नहीं है। दक्षिण अफ्रीका में १९वीं सदी में कार्य करने वाले प्रचारक एन्ड्रयु मुरे ने इस सन्दर्भ में कहा, "सच्चे आनन्द के लिए पवित्रता अनिवार्य है; और सच्ची पवित्रता के लिए प्रसन्नता अनिवार्य है। यदि आप आनन्द चाहते हैं, आनन्द की भरपूरी चाहते हैं, एक ऐसा स्थाई आनन्द चाहते हैं जो कभी नष्ट नहीं हो सकता, तो जैसा परमेश्वर पवित्र है, आप भी पवित्र बनिए। पवित्र होना, आशीशित होना है; यदि आप पवित्र मसीही विश्वासी बनना चाहते हैं तो सर्वदा आनन्दित रहने वाले मसीही विश्वासी बन जाईए। परमेश्वर ने मसीह यीशु को आनन्द के तेल से अभिषिक्त किया, और वह भी अपने सब अनुयायियों को उसी से अभिषेक करता है। प्रभु यीशु के आनन्द को हमारे जीवनों में उसकी पवित्रता के साथ संचार करते रहना चाहिए। यदि उसके आनन्द का यह तेल हमारे जीवनों में नहीं है, तो पवित्रता के प्रयास की हमारी गाड़ी को चलने में बहुत कठिनाई होगी।

   जब हम पवित्रता और प्रसन्नता के इस संबंध को भली भांति सीख जाएंगे, हम आत्मिक परिपक्वता में और आगे बढ़ जाएंगे। - डेव एग्नर



जो पवित्र है, वह आनन्दित भी है।

धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। - मत्ती ५:८
 
बाइबल पाठ: १ पतरस १:१३-२२
    1Pe 1:13  इस कारण अपनी अपनी बुद्धि की कमर बान्‍ध कर, और सचेत रह कर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलने वाला है।
    1Pe 1:14  और आज्ञाकारी बालकों की नाईं अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो।
    1Pe 1:15  पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो।
    1Pe 1:16  क्‍योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्‍योंकि मैं पवित्र हूं।
    1Pe 1:17  और जब कि तुम, हे पिता, कह कर उस से प्रार्थना करते हो, जो बिना पक्षपात हर एक के काम के अनुसार न्याय करता है, तो अपने परदेशी होने का समय भय से बिताओ।
    1Pe 1:18  क्‍योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बाप-दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्‍दी सोने अर्थात नाशमान वस्‍तुओं के द्वारा नहीं हुआ।
    1Pe 1:19  पर निर्दोष और निष्‍कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ।
    1Pe 1:20  उसका ज्ञान तो जगत की उत्‍पत्ति के पहिले ही से जाना गया था, पर अब इस अन्‍तिम युग में तुम्हारे लिये प्रगट हुआ।
    1Pe 1:21  जो उसके द्वारा उस परमेश्वर पर विश्वास करते हो, जिस ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी; कि तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर पर हो।
    1Pe 1:22  सो जब कि तुम ने भाई-चारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक १०-१२ 
  • गलतियों १

बुधवार, 21 सितंबर 2011

आदर्श एवं यथार्थ

   पत्रकार सिडनी हैरिस ने व्यर्थ आदर्शवाद के नकारात्मक परिणामों के बारे में एक अन्य लेखक के उदाहरण द्वारा समझाया। जब हैरिस ने पहले-पहल उस लेखक की रचनाओं को पढ़ा तो उन्हें वह बहुत आकर्षक लगा, हैरिस ने कहा कि "उस लेखक के विचार ऐसे थे मानो जैसे बदबूदार कमरे में खुशबू का झोंका आया हो। मानवता, पारिवारिक संबंधों, सामाजिक संबंधों, बच्चों, जानवरों और फुल-पौधों - सभी पर उनके विचार बहुत उत्तम और आदर्शपूर्ण थे।" लेकिन दुख की बात यह थी कि यह आदर्शवादिता उस लेखक के व्यक्तिगत जीवन के व्यवहार में ज़रा भी नहीं थी। अपने घर में वह व्यक्ति अपनी पत्नि के प्रति क्रूर और अपने बच्चों के लिए आतंक था। उसका आदर्शवाद का प्रचार केवल दूसरों के लिए था, इसलिए व्यर्थ था।

   अपने पहाड़ी उपदेश में प्रभु यीशु ने सिखाया कि कैसे आदर्शों को यथार्थ के साथ व्यावाहरिक जीवन में लागू करना चाहिए। उन्होंने समझाया कि कैसे हम व्यावाहरिक जीवन के प्रति सही रवैया रखें जिससे जीवन जैसा है और जैसा होना चाहिए, इन दोनो बातों में कोई विरोधाभास नहीं हो। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हम अपने आदर्शों को लेकर इतने अव्यावाहरिक तथा कट्टर भी न हो जाएं कि अपने आस-पास के लोगों से अनुचित और असंभव उम्मीदें रखने लगें।

   प्रभु यीशु ने अपने जीवन के उदाहरण द्वारा सिखाया कि आदर्श और यथार्थ में संतुलन बना कर रखें - जो सिद्ध अथवा योग्य नहीं भी हों उनके साथ भी सदा धैर्य, प्रेम तथा सहिषुणता का व्यवहार करें। उन्होंने सिखाया कि हमें सत्य के साथ तो बने रहना है, किंतु दया और करुणा का साथ भी नहीं छोड़ना है।

   यदि हम प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण करेंगे तो हम सर्वोच्च आदर्शों को भी थामे रहेंगे तथा संसार के यथार्थ से भी मुँह नहीं छुपाएंगे; अपितु प्रभु यीशु के समान हमारे हृदय सदा प्रेम से भरे और हम प्रेम से व्यवहार करने वाले होंगे। - मार्ट डी हॉन


एक धर्मी हृदय में करुणा के लिए बहुत स्थान रहता है।
 
धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्‍योंकि उन पर दया की जाएगी। - मत्ती ५:७
 
बाइबल पाठ: मत्ती ५:१-१२
    Mat 5:1  वह इस भीड़ को देख कर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए।
    Mat 5:2  और वह अपना मुंह खोल कर उन्‍हें यह उपदेश देने लगा,
    Mat 5:3  धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
    Mat 5:4  धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएंगे।
    Mat 5:5  धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्‍योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
    Mat 5:6  धन्य हैं वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किए जाएंगे।
    Mat 5:7  धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्‍योंकि उन पर दया की जाएगी।
    Mat 5:8  धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।
    Mat 5:9  धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
    Mat 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
    Mat 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें।
    Mat 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है; इसलिये कि उन्‍होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
 
एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक ७-९ 
  • २ कुरिन्थियों १३

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

पवित्रता द्वारा आनन्द

   कुछ लोग मानते हैं कि सभी नियमों को ताक पर रखने, हर एक नियंत्रण से निकल जाने और अपनी मन मरज़ी ही कर पाने में सच्चा आनन्द है। उनकी धारणा है कि जब नियम और कानून ही नहीं होंगे तो सही-गलत में फर्क करने और निर्णय लेने का झंझट भी नहीं रहेगा। ऐसे ही धारणा रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, "मेरे लिए यह ज़्यादा ज़रूरी है कि मैं अपने जीवन का आनन्द लूँ न कि यह कि मैं सही-गलत के झंझट में पड़ा रहूँ। यह बात मैंने अपने सात वर्षीय पुत्र के साथ अपने संबंध द्वारा भली भांति समझ ली है। मैंने देखा है कि बार बार उसे कहना कि वह गलत है, सदा ही हमारे बीच अलगाव और दुखः उत्पन्न करता है।" संभवतः इस व्यक्ति ने कभी अपने पुत्र को यह समझने का प्रयास नहीं किया होगा कि वह गलत क्यों है और गलती के क्या परिणाम और नुकसान हो सकते हैं, बस केवल रौब मारकर या डांट-डपट कर ही अपनी बात व्यक्त करी होगी।

   यदि संसार में सभी इसी धारणा के अन्तर्गत अपने जीवन व्यतीत करने लगें तो आप स्वयं समझ सकते हैं कि संसार का क्या हाल हो जाएगा। वास्तविकता तो यह है कि हम जितना अधिक नियमों का पालन करते हैं, उतने ही अधिक स्वतंत्र और आनन्दित रहते हैं। यदि आपके पास वैद लाईसेंस है, आपकी गाड़ी के कागज़ात पूरे और सही हैं, आप यातयात के नियमों के पालन के साथ गाड़ी चला रहें है तो यदि मार्ग में कोई पुलिस वाला आपको रोके तो आप बिना हिचकिचाए, उससे नज़रें मिलाकर बात कर लेते हैं, किंतु यदि इन में से किसी एक में भी कोई कमी होगी तो आप ऐसा नहीं कर सकेंगे, आशंकित रहेंगे। इसी प्रकार जब तक वायुयान उड़ान के नियमों का पालन करता रहता है, वह अपनी उड़ान सरलता से भरता रहता है; जहाँ नियमों की अवहेलना हुई, विमान का और दूसरों का भारी नुकसान हो जाता है।

   यही बात नैतिक जीवन और नियमों पर भी लागू होती है। यदि हम अपने जीवन में पवित्रता और नैतिकता को लक्षय बनाए रखेंगे तो स्वतः ही जीवन में आनन्द भी मिलता रहेगा; किंतु यदि आनन्द प्राप्ति के लिए नैतिक मूल्यों और नियमों की अवहेलना करेंगे तो ना ही अनन्द रहेगा और ना ही जीवन। पाप, जो परमेश्वर के नियमों का उल्लंघन है, हमारे हर दुखः की जड़ और और हर परेशानी का कारण है। सांसारिक तथा शारीरिक आनन्द कुछ समय के लिए तो हमें बहला सकते हैं, लेकिन हमारी आत्मा को ना तो सन्तुष्ट कर सकते हैं और ना ही स्थाई होते हैं; और अधिकांशतः उनकी प्राप्ति के लिए नैतिक मूल्यों के साथ समझौता करना पड़ता है, जो अशांति को और बढ़ाता रहता है। पाप हमें परमेश्वर की संगति से दूर करता है और हमारे जीवन और आत्मा को उस सच्चे और चिरस्थाई आनन्द से वंचित करता है जो परमेश्वर की संगति से मिलता है। पवित्रता परमेश्वर की संगति से आती है, परमेश्वर से मिलती है। परमेश्वर का वचन हमें आश्वासन देता है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)।

   पाप को छुपाना या किसी प्रकार उसे ढांपने का प्रयास करना पाप का निवारण नहीं है। पाप केवल अंगीकार और क्षमा द्वारा हट सकता है। क्योंकि हर पाप अन्ततः परमेश्वर के विरुद्ध ही होता है, उसे क्षमा करने और उसके दुष्प्रभाव को हटा कर सच्चे आनन्द को प्रदान करना भी परमेश्वर के ही हाथ में है। परमेश्वर ने यह संभव करने के लिए ही प्रभु यीशु को सबके पापों के लिए बलिदान होने भेजा, कि उसमें होकर पापों की क्षमा मांगने वाले को पवित्रता और सच्चा आनन्द मिल सके। - डेनिस डी हॉन


केवल पाप ही है जो मसीही विश्वासी के आनन्द को नष्ट कर सकता है।

धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं क्योंकि वे तृप्त किए जाएंगे। - मत्ती ५:६
 
बाइबल पाठ: भजन ३२:१-११
    Psa 32:1  क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ांपा गया हो।
    Psa 32:2  क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
    Psa 32:3  जब मैं चुप रहा तक दिन भर कहरते कहरते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
    Psa 32:4  क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
    Psa 32:5  जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा, तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
    Psa 32:6  इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
    Psa 32:7  तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
    Psa 32:8  मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
    Psa 32:9  तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
    Psa 32:10  दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
    Psa 32:11  हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!
 
एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक ४-६ 
  • २ कुरिन्थियों १२