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शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

सच्ची समृद्धि


   कुछ वर्ष पहले सिटीकोर्प नामक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की बैंक संस्था ने धन और जीवन से संबंधित विज्ञापनों की एक श्रंखला चलाई। उनके विज्ञापनों में जो लिखा था उसके उदाहरण हैं: "धन एक से दूसरा हाथ बदलता रहता है - ध्यान रखिए, यह कहीं आपको ही ना बदल दे"; "यदि लोग कहने लगें कि आप पैसे से बने हैं, तो आपको अपने व्यक्तित्व पर ध्यान देने और उसे सुधारने की आवश्यकता है।" ऐसे विज्ञापन धन और समृद्धि के बारे में समाज को सोचने पर बाध्य करते हैं और एक नया दृष्टिकोण देते हैं।

   धन और सांसारिक समृद्धि को लेकर परमेश्वर का भी एक दृष्टिकोण है। उसके दृष्टिकोण से, सांसारिक संपदा में आप भरपूरी से हो सकते हैं किंतु आत्मिक रीति से बिलकुल कंगाल। या, आप सांसारिक रीति से कंगाल किंतु परमेश्वर के मापदण्डों पर अति संपन्न हो सकते हैं।

   चरित्र और व्यक्तित्व को बिगाड़ सकने की धन की इस सामर्थ से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई धनी युवक की घटना स्मरण हो आती है: एक धनी और ’धार्मिक’ प्रवृति का किंतु जीवन से असंतुष्ट नवयुवक प्रभु यीशु के पास आया कि जान सके उसे अनन्त जीवन पाने के लिए लिए क्या करना चाहिए। उसकी बात सुनने और उससे बातचीत के बाद प्रभु यीशु ने उस से कहा कि उसे अपना सारा धन निर्धनों में दान करके प्रभु के पीछे हो लेना चाहिए। लेकिन यह उस धनी व्यक्ति को स्वीकार्य नहीं था और वह निराश होकर मुँह लटकाए हुए चला गया। इसपर, "यीशु ने चारों ओर देख कर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!" (मरकुस १०:२३)

   ऐसा नहीं है कि परमेश्वर और प्रभु यीशु धन-दौलत के विरोधी हैं; किंतु वे धन को मनुष्य के जीवन में परमेश्वर से अधिक महत्वपूर्ण स्थान देने के विरुद्ध हैं। हम मेहनत करके धन कमा सकते हैं, किंतु यदि यह धन कमाने की लालसा हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य बन जाती है और परमेश्वर का स्थान हमारे जीवनों में महत्वहीन हो जाता है तो बात चिंताजनक है क्योंकि तब हम सांसारिक समृद्धि किंतु आत्मिक कंगाली में आ जाते हैं। बेहतर हो कि आत्मिक समृद्धि किंतु सांसारिक कंगाली में रहें जिससे हमारा अनन्त काल कंगाली का ना हो।

   सच्ची समृद्धि पानी है तो प्रभु यीशु को जीवन में प्रथम स्थान दीजिए, तब सांसारिक और आत्मिक दोनो संपन्नता आपके साथ रहेंगीं। - जो स्टोवैल


सावधान, धन या धन की लालसा कहीं आपको परमेश्वर के मार्ग से भटका न दे।

यीशु ने चारों ओर देख कर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! - मरकुस १०:२३

बाइबल पाठ: मरकुस १०:१७-३०
Mar 10:17  और जब वह निकल कर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरू, अनन्‍त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्‍या करूं?
Mar 10:18  यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्‍यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर। 
Mar 10:19  तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Mar 10:20  उस ने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं। 
Mar 10:21  यीशु ने उस पर दृष्‍टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्‍वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Mar 10:22  इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्‍योंकि वह बहुत धनी था। 
Mar 10:23  यीशु ने चारों ओर देख कर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mar 10:24  चेले उस की बातों से अचम्भित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालको, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mar 10:25  परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है!
Mar 10:26  वे बहुत ही चकित होकर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Mar 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्‍तु परमेश्वर से हो सकता है; क्‍योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है। 
Mar 10:28  पतरस उस से कहने लगा, कि देख, हम तो सब कुछ छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं। 
Mar 10:29  यीशु ने कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिस ने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो। 
Mar 10:30 और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर, उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्‍त जीवन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ९७-९९
  •  रोमियों १६

गुरुवार, 16 अगस्त 2012

प्रेम से पहचान


   "आपको उन्हें अप्रसन्न करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। स्वभाव ही से वे बहुत क्षमाशील, विचारशील और समझ-बूझ वाले होते हैं। वे कभी हताश नहीं होते और भिन्न लोगों के भिन्न दृष्टिकोण होने की संभावनाओं को समझते हैं। वे क्रोध करने में धीमे, क्षमा करने में तत्पर और उतावली में निर्णय करने से बचने वाले होते हैं और सदा ही प्रेम के साथ व्यवहार करते हैं।"

   काश यह बातें सभी मनुष्यों, विशेषतः मसीही विश्वासियों के संबंध में कही गई होतीं और उनके लिए सदा सत्य होतीं! ये बातें सत्य तो हैं, किंतु कुत्ते की एक प्रजाति गोल्डन रिट्रीवर के लिए! 

   बहुत से मसीही विश्वासियों और कुछ गोल्डन रिट्रीवरों के साथ संपर्क में आने के बाद मैं यह कह सकती हूँ कि कई विश्वासी बहुत छोटी छोटी बातों पर बड़ी आसानी से अप्रसन्न हो जाते हैं - "चर्च का समूहगान संचालक एक विशेष लड़की को ही सदा एकल गाने का अवसर देता है, मुझे कभी नहीं"; "आज जब चर्च के बाद पास्टर सबसे हाथ मिला रहा था तो हाथ मिलाते समय उसने मेरी ओर देखा भी नहीं"; "मैं यहां बहुत कुछ करता हूँ, लोगों को मेरे योगदान को पहचानना चाहिए और मेरी सराहना करनी चाहिए" आदि कई बातें हैं जो आम तौर से चर्च में भी जलन, मनमुटाव और मतभेदों का कारण बन जाती हैं।

   क्रोध, घमंड, विरोध, बैर - हां मसीही विश्वासियों में भी ऐसी समस्याएं होती हैं और उनका निवारण भी आवश्यक है; किंतु क्या दूसरे ही को अपने आप को ठीक करना होता है हमें स्वयं नहीं? ज़रा विचार कीजिए कि यदि दूसरों से बदलने की आशा रखने की बजाए हम स्वयं अपने आप में बदलाव लाएं - यदि हम स्वयं लोगों के साथ वही व्यवहार करें जिसकी आशा हम उन से अपने प्रति रखते हैं (मत्ती ७:१२), यदि हम दूसरों को दोषी ठहराने और उनके दोषों का बखान करने की बजाए उन्हें क्षमा करने वाले बन जाएं (लूका ६:३७), और यदि हम थोड़ी नम्रता दिखाने वाले (फिलिप्पियों २:३) हो जाएं तो कैसा रहेगा? तब हमारा समाज और संबंध कैसे हो जाएंगे? तब हमारे अपने जीवन और हम्से होकर दूसरों के जीवन में कैसा प्रभाव होगा?

   कैसा हो यदि संसार के सामने हमारी पहचान उस प्रेम से हो जो हम एक दूसरे से रखते हैं और हमारे प्रेम से जाने कि हम प्रभु यीशु के अनुयायी हैं (यूहन्ना १३:३५)? क्या आज यह हमारे बारे में कहा जा सकता है? क्या हमारी पहचान हमारे प्रेम से है? - सिंडी हैस कैस्पर


सबसे अच्छी गवाही प्रेम की गवाही है।

यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो। - युहन्ना १३:३५

बाइबल पाठ: युहन्ना १३:३३-३५; १ युहन्ना २:१-११
Joh 13:33  हे बालको, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं। 
Joh 13:34  मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। 
Joh 13:35  यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।
1Jn 2:1  हे मेरे बालको, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धामिर्क यीशु मसीह। 
1Jn 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी। 
1Jn 2:3  यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो उस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। 
1Jn 2:4  जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है, और उस में सत्य नहीं। 
1Jn 2:5  पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। 
1Jn 2:6  सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। 
1Jn 2:7  हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। 
1Jn 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं, और यह तो उस में और तुम में सच्‍ची ठहरती है, कयोंकि अन्‍धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है। 
1Jn 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं, और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्‍धकार ही में है। 
1Jn 2:10  जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1Jn 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्‍धकार में है, और अन्‍धकार में चलता है, और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्‍योंकि अन्‍धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन ९४-९६ 
  • रोमियों १५:१४-३


बुधवार, 15 अगस्त 2012

सबसे सामर्थी


   ब्राज़ील और आर्जेंटीना की सीमा पर स्थित इगाज़ू जलप्रपात एक बहुत ही अद्भुत और मनोहर जलप्रपात समूह है। यह प्रपात समूह इगाज़ू नदी पर २.७ कि०मी० की दूरी में स्थित २७५ जलप्रपातों से मिलकर बना है। इस प्रपात समूह के ब्राज़ील वाले किनारे की एक दीवार पर परमेश्वर के वचन बाइबल से लिए गए भजन ९३:४ के शब्द खोद कर लिखे गए हैं : "महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है" और उनके नीचे लिखा है "परमेश्वर हमारी सब समस्याओं से अधिक सामर्थी है।"

   भजन ९३ का लेखक, जिसने राजाओं के समय में यह भजन लिखा था, जानता था कि परमेश्वर ही सब राजाओं के ऊपर राजाधिराज है। उसने लिखा, "यहोवा राजा है; उस ने माहात्म्य का पहिरावा पहिना है; यहोवा पहिरावा पहिने हुए, और सामर्थ्य का फेंटा बान्धे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का। हे यहोवा, तेरी राजगद्दी अनादिकाल से स्थिर है, तू सर्वदा से है" (पद १-२)। चाहे बाढ़ का जल या पानी की लहरें कितनी भी ऊँची क्यों ना हों परमेश्वर उन सबसे ऊपर है।

   जलप्रपात का गर्जन वास्तव में प्रभावशाली होता है; किंतु जल में अनियंत्रित बहते हुए गिरने को किसी प्रपात की ओर जाना प्रभावशाली नहीं अति भयावह होता है। हो सकता है कि यही आज आपकी स्थिति भी हो। हो सकता है कि आर्थिक परिस्थितियां, शारिरिक असमर्थता, रोग और दुर्बलता, तथा पारिवार या संबंधों से जुड़ी समस्याएं आज आपको परेशान कर रही हों और आपको लग रहा हो कि आप अनियंत्रित बहते जा रहे हैं और किसी भी समय किसी विनाश में गिर सकते हैं। ऐसे में प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास सहायता के लिए एक आसरा है - उसका उद्धारकर्ता प्रभु यीशु, जो "...कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है" (इफीसियों३:२०), क्योंकि वह हर समस्या से ऊपर है, सबसे सामर्थी है। - सी. पी. हीया


परमेश्वर की असीम सामर्थ को कभी अपनी सीमित संभावनाओं के आधार पर ना आंकें।

यहोवा राजा है; उस ने माहात्म्य का पहिरावा पहिना है; यहोवा पहिरावा पहिने हुए, और सामर्थ्य का फेंटा बान्धे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का। - भजन ९३:१

बाइबल पाठ: भजन ९३
Psa 93:1  यहोवा राजा है; उस ने माहात्म्य का पहिरावा पहिना है; यहोवा पहिरावा पहिने हुए, और सामर्थ्य का फेंटा बान्धे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का। 
Psa 93:2  हे यहोवा, तेरी राजगद्दी अनादिकाल से स्थिर है, तू सर्वदा से है।
Psa 93:3  हे यहोवा, महानदों का कोलाहल हो रहा है, महानदों का बड़ा शब्द हो रहा है, महानद गरजते हैं। 
Psa 93:4  महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है।
Psa 93:5  तेरी चितौनियां अति विश्वासयोग्य हैं; हे यहोवा तेरे भवन को युग युग पवित्रता ही शोभा देती है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ९१-९३ 
  • रोमियों १५:१-१३

मंगलवार, 14 अगस्त 2012

रहस्यमय परमेश्वर


   मैं और मेरी पत्नि एक दूसरे की कई बातों को बिलकुल समझ नहीं पाते हैं, लेकिन इससे हमारे संबंधों में कोई समस्या नहीं होती। जैसे कि, वह यह समझ नहीं पाती कि मैं कैसे घंटों बैठकर बेसबॉल की दो टीमों का मैच देखता रह सकता हूँ, जबकि मैं जानता हूँ कि उन दोनों में से कोई भी टीम प्रतियोगिता में आगे बढ़ने लायक नहीं है और ना ही बढ़ेगी; और मैं उसके बाज़ार जाने और खरीद्दारी करने के शौक को कदापि नहीं समझ पाता हूँ। लेकिन इन बातों के कारण हमारे आपसी प्रेम और ताल-मेल में कोई कमी नहीं होती।

   किसी से बेहद प्रेम करने के लिए आवश्यक नहीं है कि हम उसे पूरी तरह से समझें। यह बात को समझ लेना हमारे लिए एक लाभकारी बात होगी, क्योंकि हम परमेश्वर की सभी बातों को कभी पूर्णतः समझ नहीं सकते, यद्यपि हम उससे प्रेम करते हैं और वह हम से।

   अपनी सीमित बुद्धि और स्वार्थी दृष्टिकोण से हमें यह समझना कठिन होता है कि परमेश्वर ने जो किया वह क्यों किया या क्यों होने दिया। अपनी इन सीमाओं का बोध होते हुए भी कई लोग परमेश्वर की ओर से मुँह फेर लेते हैं क्योंकि वे किसी दुख या त्रासदी से आहत होते हैं और उस के लिए परमेश्वर को दोषी ठहराते हैं। वे समझते हैं कि किसी भी परिस्थिति के लिए उनकी सीमित बुद्धि और समझ परमेश्वर की असीमित बुद्धि, भविष्य ज्ञान और समझ से बेहतर है और जैसा वे लोग चाहते या सोचते हैं परमेश्वर को भी वैसा ही करना चाहिए।

   ज़रा विचार कीजिए, यदि हम परमेश्वर को पूर्णतः समझ पाते, यदि वह हमारे लिए एक महिमित मनुष्य से अधिक और कुछ ना होता, जिसका ज्ञान और समझ एक चतुर मनुष्य के ज्ञान और समझ से अधिक नहीं है तो उसका गौरव, पराक्रम और उसका भय मानना कहां रहता? परमेश्वर को इतना महान मानने के पीछे एक कारण यह भी है कि हम उसे और उसके ज्ञान को समझ नहीं पाते हैं और उसे अपने ज्ञान और बुद्धि की सीमाओं में नहीं बांध पाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस के विश्वासियों से पूछा, "क्‍योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए?" (१ कुरिन्थियों २:१६)। उत्तर स्पष्ट है कि परमेश्वर के मन को किसी ने नहीं जाना है। किंतु यह परमेश्वर की हमारे प्रति भलाई और प्रेम में कोई अंतर नहीं लाता है और ना ही यह हमारे उस में किए गए विश्वास में कोई कमी लाने का कारण होना चाहिए क्योंकि वह जो करता है हमारे भले ही के लिए करता है : "और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती है; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं" (रोमियों ८:२८)। 

   चाहे परमेश्वर की विधियां और कार्य हमारे लिए रहस्यमय ही रहें, लेकिन प्रभु यीशु में होकर प्रगट हुआ हमारे प्रति उसका प्रेम और हमारे प्रति उस की विश्वासयोग्यता अटल और अनन्त काल की हैं। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर को पूरी तरह से समझ पाना हमारे लिए असंभव हो परन्तु उस की आराधना करना हमारे लिए अनिवार्य है।

प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से हैं; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं, मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है। - यशायाह ४६:९

बाइबल पाठ: यशायाह ४६:८-११
Isa 46:8  हे अपराधियों, इस बात को स्मरण करो और ध्यान दो, इस पर फिर मन लगाओ। 
Isa 46:9  प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से हैं; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं, मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है। 
Isa 46:10  मै तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूं जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूं, मेरी युक्ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूंगा। 
Isa 46:11  मैं पूर्व से एक उकाब पक्षी को अर्थात दूर देश से अपनी युक्ति के पूरा करने वाले पुरूष को बुलाता हूं। मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्धा है और उसे सफल भी करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८९-९० 
  • रोमियों १४

सोमवार, 13 अगस्त 2012

नियम और कर्तव्य


   बहुत पहले मेरी पत्नी ने ठान लिया था कि गति सीमा के अन्दर गाड़ी चलाने में उसे स्वतंत्र होने का अद्भुत एहसास होता है। उसका कहना है कि निर्धारित गति सीमा के अन्दर गाड़ी चलाने से उसे ना तो गति सूचक रडार द्वारा पकड़े जाने और गाड़ी तेज़ चलाने का जुर्माना भरने का डर रहता है और ना ही किसी पुलिस की गाड़ी को आता देख अपनी गाड़ी धीमी करने की चिंता रहती है। यदि हम किसी लम्बी यात्रा पर भी हों और खुली सड़क पर दूरी चाहे धीरे धीरे ही कम हो रही हो, वह निर्धारित गति पर ही गाड़ी चलाती है और यात्रा तथा नज़ारों का आनन्द लेती रहती है। साथ ही वह मुझे स्मरण दिलाती है कि ऐसा करना नियम का पालन करना है जो हमारी ज़िम्मेदारी है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों १३:१-१० में हमें अधिकारियों, देश की सरकार और परमेश्वर के नियमों से संबंधित ज़िम्मेदारियों बताया गया है। वहां लिखा है कि जब हम अपने अधिकारियों और सरकार की आज्ञाओं का पालन करते हैं तो हमें किसी दण्ड का डर नहीं रहता, और सही कार्य करने के द्वारा हमारा विवेक भी शुद्ध रहता है (पद ३, ५)।

   प्रेरित पौलुस ने यह खण्ड लिखते समय रोम के विश्वासियों से आग्रह किया कि जो कुछ अधिकारियों और सरकार को देना बनता है वे उसे नियमित रीति से दिया करें - चाहे वे कर हों या महसूल, भय मानना हो या आदर करना (पद ७)। पौलुस ने मानवीय नियमों के संदर्भ से भी आगे बढ़कर लिखा : "आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है" (रोमियों १३:८)।

   मनुष्य द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना प्रत्येक मसीही विश्वासी का कर्तव्य है और दूसरों के साथ प्रेम से व्यवहार करना परमेश्वर के नियम का निर्वाह है; परमेश्वर का नियम ही "स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था" (याकूब १:२५) है। - डेविड मैक्कैसलैंड


नियम पालन द्वारा हम मनुष्यों की विधि पूरी करते हैं और प्रेम द्वारा परमेश्वर की आज्ञा।

आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदान न हो? क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्या पूरी की है। - रोमियों १३:८

बाइबल पाठ: रोमियों १३:१-१०
Rom 13:1  हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के अधीन रहे; क्‍योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Rom 13:2  इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करनेवाले दण्‍ड पाएंगे। 
Rom 13:3  क्‍योंकि हाकिम अच्‍छे काम के नहीं, परन्‍तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्‍छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Rom 13:4  क्‍योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्‍तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्‍योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्‍ड दे। 
Rom 13:5  इसलिये अधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्‍तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Rom 13:6  इसलिये कर भी दो, क्‍योंकि वे परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Rom 13:7  इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
Rom 13:8  आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 
Rom 13:9  क्‍योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना, चोरी न करना, लालच न करना, और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Rom 13:10  प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८७-८८ 
  • रोमियों १३

रविवार, 12 अगस्त 2012

संबंध


   जब मुझे पता चला कि एक बोर्ड मीटिंग में भाग लेने के लिए डेविड उसी दफतर में आया हुआ है जहां मैं काम करती हूँ तो मुझे बहुत खुशी हुई। मेरे और डेविड की एक सामान्य सहेली थी - शैरन, जिसकी म्रुत्यु कुछ वर्ष पहले हुई थी। मुझे और डेविड को कुछ मिनिट का समय मिला कि हम मिल कर शैरन के बारे में बात कर सकें और जीवन था परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम को स्मरण कर सकें। कितना आनन्दमय होता है किसी ऐसे के साथ संपर्क करना जो आपके समान ही किसी ऐसे व्यक्ति को प्रीय जानता हो जिसे आप भी प्रीय जानते हैं। उस सामान्य प्रीय जन के कारण उस दूसरे व्यक्ति से आपका एक विशेष संबंध हो जाता है और आप उसके साथ अपने प्रीय जन के बारे में बातें करके आनन्दित हो सकते हैं।

   जो लोग मसीह यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में जानते हैं, वे आपस में एक गहरे संबंध से जुड़े हैं, क्योंकि हम अपने प्रभु और उसमें होकर एक दूसरे के साथ सदा के लिए जुड़ गए हैं। जैसे प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में कहा: "...हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं" (रोमियों १२:५), और प्रेरित युहन्ना ने भी लिखा "जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्‍पन्न हुआ है और जो कोई उत्‍पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता है, जो उस से उत्‍पन्न हुआ है" (१ युहन्ना ५:१)।

   जब हम संगी विश्वासियों के साथ मिलते हैं तो हमारे पास अवसर होता है कि हम अपने प्रीय - प्रभु यीशु के बारे में बातें करें, और उसमें होकर, उसकी मृत्यु और पुनरुत्थान द्वारा जो प्रेम, क्षमा और अनुग्रह हमने अनुभव किया है उसके बारे में एक दूसरे को बताएं। ऐसे समयों पर हम एक दूसरे को प्रोत्साहित भी कर सकते हैं कि उसमें अपने विश्वास में दृढ़ बनें रहें और विश्वासयोग्यता के साथ उसके साथ चलते रहें।

   आज और इस पूरे सप्ताह, हम अपने संगी विश्वासियों को स्मरण दिलाते रहें कि प्रभु ने हमारे लिए क्या क्या किया है और वास्तव में वह कितना अद्भुत है। - ऐनी सेटास


आप जितना अधिक प्रभु यीशु से प्रेम करेंगे, उतना अधिक उसके बारे में बातें करेंगे।

...हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - रोमियों १२:५

बाइबल पाठ: १ युहन्ना ४:७-५:१
1Jn 4:7  हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है, और परमेश्वर को जानता है। 
1Jn 4:8  जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1Jn 4:9  जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1Jn 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया, पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया, और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1Jn 4:11  हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1Jn 4:12  परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है, और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1Jn 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्‍योंकि उस ने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1Jn 4:14  और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है। 
1Jn 4:15  जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1Jn 4:16  और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है, और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1Jn 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्‍योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1Jn 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्‍योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1Jn 4:19  हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उस ने हम से प्रेम किया। 
1Jn 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं, और अपने भाई से बैर रखे, तो वह झूठा है: क्‍योंकि जो अपने भाई से, जिस उस ने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उस ने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। 
1Jn 4:21  और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।
1Jn 5:1  जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्‍पन्न हुआ है और जो कोई उत्‍पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता है, जो उस से उत्‍पन्न हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८४-८६ 
  • रोमियों १२

शनिवार, 11 अगस्त 2012

अनुकरण


   एक दिन जब हम भोजन खाने को मेज़ पर बैठे थे तो मेरे बड़े बेटे ने शिकायत करी कि उसकी छोटी बहन हमेशा ही उसकी नकल करती है - वह जैसे हंसता है, जैसे भोजन खाता है या कुछ और करता है वह भी वैसा ही करती है, और इससे उसे चिढ़ होती है। मैं ने और मेरी पत्नी ने उसे समझाने का प्रयास किया कि यह क्रोध करने की बात नहीं है, क्योंकि इससे उसके पास अवसर है के वह अपने जीवन के अच्छे उदाहरण द्वारा अपनी बहन को भी अच्छी बातें सिखा सके।

   मेरे बेटे के विचारों के विरुद्ध, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने यह चाहा और दूसरों से कहा भी कि वे उसके उदाहरण का अनुकरण करें: "तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं" (१ कुरिन्थियों ११:१)। इस पत्री के दसवें अध्याय में पौलुस मसीही विश्वासियों को उनकी स्वतंत्रता और प्रेम की ज़िम्मेदारियों के बारे में बता रहा था; जब वे किसी अविश्वासी के घर भोजन पर आमंत्रित हों तो जो सामने परोसा जाए उसे खाने के लिए वे स्वतंत्र थे (पद २७)। किंतु यदि उनके सामने रखे भोजन को किसी मूर्ति को अर्पित कर के परोसा गया हो, और किसी अन्य कमज़ोर विश्वासी को इससे ठेस पहुँचती हो तो उस कमज़ोर विश्वासी की स्वतंत्रता का ध्यान रखते हुए, और उसके प्रति अपने प्रेम के कारण, उन्हें वह अर्पित भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए (पद २८)।

   पौलुस ने उन लोगों को प्रोत्साहित किया कि इस बात में वे उसके द्वारा दिखाए गए उदाहरण का अनुसरण करें; क्योंकि पौलुस अपनी नहीं वरन अपने संगी विश्वासियों की भलाई का इच्छुक रहता था, अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के प्रेम, मेल, त्याग और भलाई आदि के महान गुणों का अनुकरण करने के द्वारा।

   पौलुस के समान ही हम सभी मसीही विश्वासियों को अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के उदाहरण का इतनी निकटता से अनुकरण करना है कि हम भी दुसरों से कह सकें, "तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं।" - मार्विन विलियम्स


मसीह यीशु का अनुकरण करके ऐसा जीवन जीएं जो दूसरों के लिए अनुकरणीय हो।

तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं। - १ कुरिन्थियों ११:१

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १०:२३-११:१
1Co 10:23  सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब लाभ की नहीं: सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब वस्‍तुओं से उन्नित नहीं। 
1Co 10:24   कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, वरन औरों की। 
1Co 10:25  जो कुछ कस्‍साइयों के यहां बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 
1Co 10:26  क्‍योकि पृथ्वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है। 
1Co 10:27   और यदि अविश्वासियों में से कोई तुम्हें नेवता दे, और तुम जाना चाहो, तो जो कुछ तुम्हारे साम्हने रखा जाए वही खाओ: और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 
1Co 10:28  परन्‍तु यदि कोई तुम से कहे, यह तो मूरत को बलि की हुई वस्‍तु है, तो उसी बताने वाले के कारण, और विवेक के कारण न खाओ। 
1Co 10:29  मेरा मतलब, तेरा विवेक नहीं, परन्‍तु उस दूसरे का। भला, मेरी स्‍वतंत्रता दूसरे के विचार से क्‍यों परखी जाए? 
1Co 10:30  यदि मैं धन्यवाद करके साझी होता हूं, तो जिस पर मैं धन्यवाद करता हूं, उसके कारण मेरी बदनामीं क्‍यों होती है? 
1Co 10:31   सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महीमा के लिये करो। 
1Co 10:32   तुम न यहूदियों, न यूनानियों, और न परमेश्वर की कलीसिया के लिये ठोकर का कारण बनो। 
1Co 10:33  जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्न रखता हूं, और अपना नहीं, परन्‍तु बहुतों का लाभ ढूंढ़ता हूं, कि वे उद्धार पाएं।
1Co 11:1     तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८१-८३ 
  • रोमियों ११:१९-३६