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शनिवार, 15 दिसंबर 2012

आधीन


   एक ख्याति प्राप्त महिला ने टी.वी. पर हो रहे साक्षात्कार में स्वीकार किया कि प्रति वर्ष अपने बालों की देख-रेख और उन्हें सजाने संवारने में वे हज़ारों डॉलर तथा सईकड़ों घंटे लगा देती हैं। उसने यह भी स्वीकार किया कि यह उसके लिए व्यसन के समान हो गया है और वह अपने बालों के आधीन हो गई है। आधीन हो जाने का तात्पर्य है कि किसी अन्य के अधिकार या नियंत्रण में हो जाना। अपने आप को सुंदर दिखाने के प्रयास में इस महिला ने अपने जीवन का नियंत्रण अपने बालों को सौंप दिया था।

   इस महिला की कहानी से हमें भी अपने जीवनों को टटोलने की आवश्यक्ता है - हमारी कौन सी इच्छाएं हमें अपनी आधीनता में लिए हुए हैं और हमें नियंत्रित कर रही हैं? क्या हम किसी चीज़ के प्रति ऐसे आसक्त हो जाते हैं कि उसे प्राप्त करने के लिए कुछ भी कर गुज़रने के लिए तैयार रहते हैं? क्या हम ख्याति, प्रशंसा, धन-संपदा, आनन्द, भोजन, अहम आदि के हाथों अपने जीवन को दे चुके हैं?

   प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों को लिखा "क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है" (रोमियों ६:१६)। जब हमारी शारीरिक लालसाएं और सांसारिक इच्छाएं हम पर हावी होने लगें तो समय है परमेश्वर के आधीन हो जाने का और उस के हाथों में अपना नियंत्रण छोड़ देने का "और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो" (रोमियों ६:१३)।

   यदि शरीर और संसार आप पर हावी हैं, आप को अपनी आधीनता में लिए हुए हैं तो परमेश्वर के सामने दीन होकर अपने आप को उसे सौंप दें और उससे प्रार्थना करें कि वह आपको आपके हृदय की वास्तविक दशा दिखाए, उसके लिए पश्चाताप का मन और निवारण दे।


सच्ची स्वतंत्रता अपना मार्ग चुनने और अपनाने में नहीं वरन परमेश्वर की आधीनता में है।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब ४:१०

बाइबल पाठ: रोमियों ६:११-२३
Rom 6:11  ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। 
Rom 6:12   इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो। 
Rom 6:13  और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।
Rom 6:15  तो क्‍या हुआ क्‍या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं कदापि नहीं। 
Rom 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है? 
Rom 6:17  परन्‍तु परमेशवर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे। 
Rom 6:18  और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। 
Rom 6:19  मैं तुम्हारी शारीरिक र्दुबलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। 
Rom 6:20  जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्‍वतंत्र थे। 
Rom 6:21  सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्‍या फल पाते थे? 
Rom 6:22  क्‍योंकि उन का अन्‍त तो मृत्यु है परन्‍तु अब पाप से स्‍वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्‍त होती है, और उसका अन्‍त अनन्‍त जीवन है। 
Rom 6:23  क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्‍तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य ६

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

रवैया


   एक परिवार झील के किनारे पिकनिक मनाने गया। सब लोग पिकनिक का आनन्द ले रहे थे, खेल रहे थे। किसी को ध्यान नहीं रहा और ५ वर्षीय जौनी पानी के अन्दर चलते चलते गहरे में चला गया और डूबने लगा। इतने में किसी ने जौनी के दिखाई ना देने को पहचाना और सब इधर-उधर भाग कर उसे पुकारने और ढूँढने लगे। वहां उपस्थित एक अन्य अजनबी व्यक्ति ने पानी की ओर ध्यान किया और कूछ दूरी पर गोते खाते और हाथ-पैर मारते जौनी को देखा। उसने तुरंत पानी में छलांग लगाई और जौनी को बचाकर तट पर ले आया; उस व्यक्ति ने जौनी को उसके परिवार को सौंपा ही था कि तभी खिसियाई आवाज़ में जौनी की माँ ने अजनबी से कहा, "अरे आप जौनी की टोपी कहाँ छोड़ आए?"

   यही बात कितनी ही दफा हमारे साथ हमारे जीवनों में होती है। हम जीवन कि छोटी छोटी बातों से निराश होकर परमेश्वर के विरुद्ध कुड़कुड़ाते हैं, खिसियाते हैं, अपनी असफलताओं के लिए उसे दोषी ठहराते हैं, बजाए इसके कि परमेश्वर द्वारा हमें दी गई अद्भुत आशीषों, उसकी लगातार बनी रहने वाली देख-रेख, उसके प्रेम और दया के लिए, उसके द्वारा दिए गए उद्धार के मार्ग के लिए उसके धन्यवादी हों। जब हम जीवन की छोटी छोटी बातों को लेकर परेशान होते हैं और परमेश्वर को दोष देते हैं तो उस माँ के समान ही हम भी परमेश्वर से पूछ रहे होते हैं "अरे आप जौनी की टोपी कहाँ छोड़ आए?"

   प्रेरित पौलुस ने लिखा "हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है" (१ थिस्सलुनीकियों ५:१८)। चाहे हमें अपने जीवन में घटित होने वाली हर बात के लिए धन्यवाद करना कठिन लगे, किंतु हम हर परिस्थिति में एक धन्यवादी मन रख सकते हैं। हमारी इच्छानुसार यदि कोई कार्य नहीं भी हो, या कोई अप्रत्याशित घटना हमें दुखी कर दे तो भी हम इस बात में विश्वास रख कर कि परमेश्वर हर बात में हमारे लिए भलाई ही उत्पन्न करेगा (रोमियों ८:२८) और अब तक के उसके प्रेम, उसकी भलाइयों के लिए हम उसके धन्यवादी रह सकते हैं। एक धन्यवादी मन ही परमेश्वर के योग्य बलिदान है और अशीषित जीवन जीने के लिए सही रवैया भी। - डेविड रोपर


अपनी समस्याओं में उलझे रहने की बजाए परमेश्वर का धन्यवादी होने में समय बिताएं।

मैं तो निरन्तर आशा लगाए रहूंगा, और तेरी स्तुति अधिक अधिक करता जाऊंगा। - भजन ७१:१४

बाइबल पाठ: भजन ४२
Psa 42:1  जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psa 42:2  जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psa 42:3  मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psa 42:4  मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psa 42:5  हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psa 42:6  हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं। 
Psa 42:7  तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं। 
Psa 42:8  तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा; और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवनदाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
Psa 42:9  मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं? 
Psa 42:10  मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psa 42:11  हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • योएल १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य ५

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

प्रभाव का स्त्रोत


   प्रति वर्ष कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में असाधारण कार्य और छोड़े गए प्रभाव के लिए लोगों को नोबल पुरस्कार दिया जाता है। अर्थ शास्त्र, भौतिक विज्ञान, साहित्य, चिकित्सा, शांति के क्षेत्रों में अभूतपूर्व योगदान के लिए इन क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रतिभाशाली व्यक्तियों को इस परस्कार द्वारा मान्यता दी जाती है। यह पुरस्कार इस बात का सूचक है कि उस व्यक्ति ने अपने कार्य क्षेत्र में वर्षों के प्रशिक्षण, प्रयास, शिक्षा और त्याग द्वारा श्रेष्ठता की एक मिसाल कायम करी है - ये बातें उसके जीवन का वह निवेश रही हैं, जिनके कारण वह अपनी एक अनुपम छाप समाज पर छोड़ सका; ये उसके प्रभाव का स्त्रोत हैं।

   आत्मिक रीति से भी लोग समाज पर विलक्षण प्रभाव छोड़ते हैं; उन्हें देखकर हम भी विचार कर सकते हैं कि उनकी आत्मिक सेवा और प्रभाव का स्त्रोत क्या है? कैसे हम भी आत्मिक रूप से उनके समान प्रभावी हो सक्ते हैं? प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए यह व्यक्तिगत रीति से गंभीरता के साथ विचार करने की बात है कि यदि हमें अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु के लिए प्रभावी होना है, तो हमारा निवेश किन बातों में होना चाहिए?

   प्रभु यीशु के आरंभिक अनुयायी प्रभु यीशु के साथ समय बिताने के द्वारा प्रभावी हुए। जब प्रभु ने अपने बारह चेले चुने, तो उन चेलों के लिए प्रभु का उद्देश्य था कि वे उसके साथ रहें और उसके लिए उपलब्ध रहें "फिर वह पहाड़ पर चढ़ गया, और जिन्‍हें वह चाहता था उन्‍हें अपने पास बुलाया; और वे उसके पास चले आए। तब उस ने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्‍हें भेजे, कि प्रचार करें"(मरकुस ३:१३-१४)। आगे चलकर उन चेलों की सेवकाई से इस्त्राएल के धार्मिक अगुवे इस बात को पहचान गए: "जब उन्‍होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं" (प्रेरितों ४:१३)।

   प्रभु यीशु की सेवकाई में प्रशिक्षण और ज्ञान का महत्व अवश्य है, किंतु प्रभु यीशु के साथ बिताए गए समय का कोई विकल्प नहीं है। हमारा कोई ज्ञान, कोई प्रशिक्षण प्रभु यीशु से, उसके साथ बिताए गए समय द्वारा, मिलने वाली सामर्थ और योग्यता का स्थान नहीं ले सकता; और यही सामर्थ तथा योग्यता हमें प्रभु यीशु के लिए प्रभावी कर सकती है। प्रेरितों के कार्य से लिए गए ऊपर उद्वत पद में स्पष्ट है कि उस घटना के समय प्रभु यीशु के चेले पतरस और युहन्ना अनपढ़ और साधारण मनुष्य ही थे, ठीक वैसे ही जैसे वे प्रभु से मिली अपनी बुलाहट के समय थे। किंतु प्रभु यीशु के साथ रहने से अब उनमें एक ऐसी विलक्षण सामर्थ तथा योग्यता आ गई थी जिसके सामने इस्त्राएली समाज के वे प्रशिक्षित और ज्ञानवान धार्मिक अगुवे टिक नहीं सके।

   यदि मसीह यीशु के लिए इस संसार में प्रभावी होना है तो परमेश्वर के जीवते वचन मसीह यीशु (यूहन्ना १:१-२) के साथ समय बिताना आरंभ कीजिए। जितना समय आप उसके साथ बिताएंगे, आप उतने ही प्रभावी होने पाएंगे, क्योंकि परमेश्वर का जीवता वचन मसीह यीशु ही हमारे प्रभावी होने का स्त्रोत है। परमेश्वर के वचन के अध्ययन और मनन में अधिक से अधिक समय बिताएं, प्रभाव संसार को अपने आप ही दिखने लगेंगे। - बिल क्राउडर


जीवन में प्रभावी होने के लिए जीवन के स्त्रोत मसीह यीशु के साथ समय व्यतीत करें।

जब उन्‍होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं। - प्रेरितों ४:१३

बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:१-८
Joh 15:1 सच्‍ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है। 
Joh 15:2  जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले। 
Joh 15:3  तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। 
Joh 15:4  तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। 
Joh 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्‍योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। 
Joh 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाई फेंक दिया जाता, और सूख जाता है, और लोग उन्‍हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। 
Joh 15:7  यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। 
Joh 15:8  मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे १२-१४ 
  • प्रकाशितवाक्य ४

बुधवार, 12 दिसंबर 2012

निर्भर


   हमारे वायुयान के उतरने के बाद मैं और जे उसमें से निकले और कीन्या के मसाई मारा में प्रवेश किया। हमारा स्वागत मसाई कबीले के एक व्यक्ति सैमी ने किया। उसने हमारा सामान लेकर गाड़ी में रखा और हमें हमारे खेमे की ओर ले चला जहां हम अगले दो दिन बिताने वाले थे। मार्ग में हम एक स्थान पर रुक गए कि मसाई मारा से सेरेन्गेटी को प्रवास कर रहे ज़ेबरा और विल्डरबीस्ट के झुंडों को देख सकें। सैमी ने हमें बताया कि इन दोनो प्रकार के जानवरों के ये विशाल झुंड सदा एक साथ ही एक स्थान से दूसरे की ओर प्रवास करते हैं। इसका कारण है दोनो की भिन्न क्षमताएं और कमज़ोरियां।

   ज़ेबरा की दृष्टि तो बहुत अच्छी होती है किंतु सूंघने की शक्ति बहुत कम; इसके विपरीत विल्डरबीस्ट की सूंघने की शक्ति बहुत अच्छी होती है किंतु आंखें कमज़ोर। एक साथ चलने से वे एक दुसरे कि शक्तियों का लाभ उठाते हैं और शिकारी जानवरों से अपना बचाव बेहतर कर लेते हैं, उनकी कमज़ोरियां उनकी परस्पर शक्तियों से ढंप जाती हैं। यह हमारे लिए परमेश्वर द्वारा सृष्टि में दिए गए अनेक पाठों में से एक महत्वपुर्ण पाठ था।

   जैसे परमेश्वर ने भिन्न जानवरों को भिन्न शक्ति और कमज़ोरियों के साथ बनाया है, वैसे ही वह मनुष्यों को भी एक दुसरे से भिन्न बनाता है जिससे वे मिल-जुलकर एक साथ एक दुसरे की भलाई के लिए कार्य कर सकें। परमेश्वर हमें ना केवल अपने ऊपर निर्भर देखना चाहता है, वरन यह भी कि हम एक दुसरे पर भी निर्भर रहें। प्रेरित पुलुस ने कुरिन्थियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में इस विषय पर लिखा है। उसने उन्हें समझाया कि परमेश्वर ने अपनी देह अर्थात अपनी मण्डली में लोगों को भिन्न भिन्न वरदानों और क्षमताओं के साथ रखा है कि सब एक साथ मिल कर देह की उन्नति के लिए कार्य करें; किसी एक के कार्य के द्वारा ही मण्डली उन्नति नहीं पा सकती (१ कुरिन्थियों १२:१२-३१)।

   प्रभु की देह - उसकी मण्डली या चर्च तब ही स्वस्थ रहेगा और उन्नति करेगा जब उसके सदस्य एक साथ मिलकर अपनी अपनी क्षमताओं और सामर्थ को परस्पर एक दूसरे की भलाई और उन्नति के लिए प्रयोग करेंगे। अकेले या केवल अपने लिए कार्य करने से ना तो व्यक्ति उन्नति करेगा और ना ही प्रभु की मण्डली। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मिल-जुलकर किया गया कार्य मात्रा और गुणवन्ता में किसी के अकेले द्वारा किए गए कार्य से सदा अधिक होता है।

ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। - १ कुरिन्थियों १२:२५

बाइबल पाठ: - १ कुरिन्थियों १२:१४-२७
1Co 12:14  इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्‍तु बहुत से हैं। 
1Co 12:15  यदि पांव कहे: कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:16  और यदि कान कहे कि मैं आंख का नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:17   यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1Co 12:18  परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है। 
1Co 12:19   यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1Co 12:20  परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है। 
1Co 12:21   आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1Co 12:22  परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1Co 12:23  और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1Co 12:24  फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1Co 12:25  ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1Co 12:26  इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं। 
1Co 12:27  इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे ९-११ 
  • प्रकाशितवाक्य ३

मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

प्रभावी प्रत्युत्तर


   बाइबल कॉलेज में दाखिला लेने के पश्चात मैं प्रभु यीशु के बारे में लोगों को निर्भीकता से बताने लगा। परिणामस्वरूप मेरे कुछ पुराने साथियों के साथ मेरी अनबन भी हो गई। स्कूल के अपने पुराने मित्रों के साथ हुए कार्यक्रम में यह बात स्पष्ट हो गई। एक युवती ने मेरा परिहास किया क्योंकि मैंने उससे प्रश्न किया कि क्या उसने इस बात पर विचार किया है कि मृत्योप्रांत वह अपना अनन्त जीवन कहां बिताएगी? मेरे एक अन्य मित्र एड ने, जो मेरे मसीही विश्वास के बारे में जानता था, मसीह यीशु के क्रूस का ठठ्ठा किया। इन बातों से मैंने अपने आप को बहुत तिरस्कृत और अपमानित अनुभव किया।

   किंतु उसी संध्या को मैं एक अवर्णनीय प्रेम से भर गया। मुझे प्रभु यीशु की आज्ञा स्मरण हो आई: "परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिथे प्रार्थना करो" (मत्ती ५:४४)। मेरी आंखें भर आईं और मैंने परमेश्वर से एड को, जिसने उसके क्रूस का ठठ्ठा किया था, क्षमा करने और उसे उद्धार देने के लिए प्रार्थना करी।

   लगभग एक वर्ष के बाद मुझे एड का एक पत्र मिला जिसमें उसने मुझसे मिलने की इच्छा व्यक्त करी थी। जब हम मिलने पाए तो उसने बताया कि कैसे अपने पापों के लिए उसने रो रो कर क्षमा मांगी तथा प्रभु यीशु को अपना जीवन समर्पित किया, उसे अपने जीवन का स्वामी बनाया। बाद में मुझे यह जान कर अचंभा हुआ कि एड एक मिशनरी बनकर ब्राज़ील चला गया कि प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार उस देश में सुनाए।

   उस अनुभव से जो पाठ मैंने सीखा वह था कि आत्मिक विरोध का सबसे प्रभावी प्रत्युत्तर है प्रार्थना। जो हम और हमारी समझ नहीं कर सकती वह प्रभु और प्रभु की सामर्थ कर सकती है। हमारो प्रार्थनाएं प्रभु के कार्य को प्रभावी बनाती हैं। अपने आस-पास ध्यान कीजिए, आपके विरोधीयों को आपकी प्रार्थनओं की बहुत आवश्यक्ता है; आपके द्वारा उन की भलाई के लिए परमेश्वर से करी गई प्रार्थनाएं ही उनके विरोध का प्रभावी प्रत्युत्तर हैं! - डेनिस फिश


लोग हमारे सन्देश का मज़ाक उड़ा सकते हैं परन्तु वे हमारी प्रार्थनाओं के सामने असहाय हैं।

परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। - मत्ती ५:४४

बाइबल पाठ: मत्ती ५:३-१६
Mat 5:3  धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Mat 5:4  धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएंगे। 
Mat 5:5  धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्‍योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Mat 5:6   धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं क्योंकि वे तृप्त किए जाएंगे।
Mat 5:7  धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्‍योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Mat 5:8  धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Mat 5:9  धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Mat 5:10  धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Mat 5:11  धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Mat 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्‍होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Mat 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्‍तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्‍तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Mat 5:14  तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Mat 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्‍तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Mat 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्‍वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे ५-८ 
  • प्रकाशितवाक्य २

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

चुनाव


   परमेश्वर के वचन बाइबल से लिए गए कुछ वाक्यांशों पर विचार कीजिए: "...सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं" (नीतिवचन २०:३); "...दुष्टों का नाम मिट जाता है" (नीतिवचन १०:७); "...वह पशु सरीखा है" (नीतिवचन १२:१)। क्या परमेश्वर प्रेम और दया का परमेश्वर नहीं है? क्या परमेश्वर के वचन में किसी को मूढ़, दुष्ट या पशु सरीखा कहना उचित है?

   जी हां, वास्तव में परमेश्वर प्रेम है, दया और करुणा से भरा हुआ है। उसने इस संसार की सृष्टि करी और उसमें आनन्द और संतुष्टि के बहुत अवसर और साधन भी दिए हैं। परन्तु साथ ही परमेश्वर हमें यह भी स्मरण दिलाता है कि अपने प्रेम में वह हमारी मूर्खताओं और बुद्धिहीन कार्यों को नज़रांदाज़ नहीं करता है। नीतिवचन से लिए गए ऊपर लिखे पद हमें स्मरण दिलाते हैं कि परमेश्वर प्रेम तो है, किंतु साथ ही हमसे बहुत आशाएं भी रखता है और जो व्यक्ति उसके मार्गों को तजकर, जानबूझकर पाप से खेलेते हैं वे अपने ऊपर परेशानीयां लाते हैं, उनके लिए जीवन कठोर भी हो जाता है।

   नीतिवचन से लिए गए उपरोक्त पदों में प्रयुक्त हर नकारात्मक शब्द का एक सकारात्मक प्रतिपक्ष भी उसी पद में दिया गया है - वह सकारात्मक विधि जो परमेश्वर हमारे जीवनों से चाहता है। अब उपरोक्त दिए गए वाक्यांशों के स्थान पर उनके पूर्ण वाक्यों को देखिए और वास्तविक पक्ष-प्रतिपक्ष पर विचार कीजिए: "मुकद्दमें से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं" (नीतिवचन २०:३); "धर्मी को स्मरण करके लोग आशीर्वाद देते हैं, परन्तु दुष्टों का नाम मिट जाता है" (नीतिवचन १०:७); "जो शिक्षा पाने में प्रीति रखता है वह ज्ञान से प्रीति रखता है, परन्तु जो डांट से बैर रखता, वह पशु सरीखा है" (नीतिवचन १२:१)।

   जीवन में सदा ही एक चुनाव हमारे समक्ष बना रहता है और हमारा यही चुनाव निर्धारित करता है कि जीवन हमारे लिए कठोर होगा अथवा कोमल। परमेश्वर के वचन के अनुसार जीवन व्यतीत कीजिए और उसकी सम्मति की मुस्कान के साथ सफलता का जीवन बिताईये, या मूर्ख बनकर उसकी अनाज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत कीजिए और विनाश के दुख को उठाईये - चुनाव तो आप ही के हाथ में है। परमेश्वर के संसार में जीने के यही कोमल एवं कठोर सत्य हैं। अब आपका चुनाव क्या है? - डेव ब्रैनन


मूर्ख ही पाप के साथ खेलते हैं।

खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है। परन्तु अपराधी एक साथ सत्यानाश किए जाएंगे; दुष्टों का अन्तफल सर्वनाश है। - भजन ३७:३७-३८

बाइबल पाठ: भजन ३७:३०-४०
Psa 37:30  धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। 
Psa 37:31  उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते।
Psa 37:32  दुष्ट धर्मी की ताक में रहता है। और उसके मार डालने का यत्न करता है। 
Psa 37:33  यहोवा उसको उसके हाथ में न छोड़ेगा, और जब उसका विचार किया जाए तब वह उसे दोषी न ठहराएगा।
Psa 37:34  यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा।
Psa 37:35  मैं ने दुष्ट को बड़ा पराक्रमी और ऐसा फैलता हुए देखा, जैसा कोई हरा पेड़ अपने निज भूमि में फैलता है। 
Psa 37:36  परन्तु जब कोई उधर से गया तो देखा कि वह वहां है ही नहीं? और मैं ने भी उसे ढूंढ़ा, परन्तु कहीं न पाया।
Psa 37:37  खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है। 
Psa 37:38  परन्तु अपराधी एक साथ सत्यानाश किए जाएंगे; दुष्टों का अन्तफल सर्वनाश है।
Psa 37:39  धर्मियों की मुक्ति यहोवा की ओर से होती है; संकट के समय वह उनका दृढ़ गढ़ है। 
Psa 37:40  और यहोवा उनकी सहायता करके उनको बचाता है; वह उनको दुष्टों से छुड़ाकर उनका उद्धार करता है, इसलिये कि उन्होंने उस में अपनी शरण ली है।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे १-४ 
  • प्रकाशितवाक्य १

रविवार, 9 दिसंबर 2012

सफलता का नुस्खा


   मेरे खाना बनाने के प्रति मेरे परिवार की प्रतिक्रिया अधिकांशतः सिकोड़ी हुई नाक और बिचकाए हुए होंठ ही होते हैं, विशेषतः तब जब मैं कोई नए भोजन या विधि को आज़मा रही हूँ। अभी हाल ही में मैंने मैकरोनी और पनीर से खाना बनाने की एक नई विधि अपनाई, जो अप्रत्याशित रूप से सफल रही। मैंने तुरंत उस बनाने की विधि और प्रयुक्त सामग्री को एक कागज़ पर लिख कर संजो कर रख लिया, अन्यथा अगली बार जब मैं वह बनाने का प्रयास करती तो इन संजोए गए निर्देशों की सहायता के बिना उसके बनाने में कुछ न कुछ गड़बड़ ही होती और सब व्यर्थ हो जाता।

   यहोशू को परमेश्वर की ओर से ज़िम्मेवारी मिली थी कि वह इस्त्राएल को वाचा के देश में ले जाकर बसाए। परमेश्वर के निर्देशों और सहायता के बिना यहोशू के लिए यह कार्य संभव नहीं था। परमेश्वर ने यहोशू को यह ज़िम्मेवारी ठीक से निभाने के लिए कुछ आवश्यक निर्देश भी दिए। पहला निर्देश था कि वह हिम्मत बांधकर दृढ़ता से कार्य करे (यहोशू १:६); दूसरा था कि वह परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक पर लगातार मनन करता रहे और तीसरा निर्देश था कि व्यवस्था की उस पुस्तक की आज्ञाओं के पालन से कभी पीछे ना हटे। जब तक वह इन निर्देशों का पालन करता रहेगा, परमेश्वर उसे सफलता में बनाए रखेगा (यहोशू १:८)।

   परमेश्वर द्वारा यहोशू को दी गई सफलता का यह नुस्खा हमारे लिए भी वैसे ही कार्यकारी हो सकता है जैसे यहोशू के लिए। किंतु इस सफलता का अर्थ धन-संपत्ति, लोकप्रीयता या अच्छा स्वास्थ्य पाना नहीं है। मूल इब्रानी भाषा में जिसमें यह बात लिखी गई थी, ’तू सफल होगा’ का तात्पर्य है ’तु बुद्धिमता से कार्य कर सकेगा या निर्णय ले सकेगा’। जैसे परमेश्वर ने यहोशु को बुद्धिमता से चलने और निर्णय लेने और उसकी योग्यता पाने की बात कही, वैसे ही आज वह हम मसीही विश्वासियों से भी यही आशा रखता है: "इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो" (इफीसियों ५:१५)।

   जब हम प्रभु परमेश्वर में अपनी हिम्मत बनाए रखते हैं, उसके वचन पर मनन करते रहते हैं और उसकी आज्ञाकारिता में चलते हैं तो सफलता का एक ऐसा नुस्खा हमारे पास होता है जो हमारे अपने किसी भी नुस्खे से अधिक प्रभावी और विश्वासयोग्य है। सफलता के इस नुस्खे को थामे रहें और जीवन में लागू रखें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर के वचन की आज्ञाकारिता ही जीवन में सफलता की कुंजी है।

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। - यहोशू १:८

बाइबल पाठ: यहोशू १:१-९
Jos 1:1  यहोवा के दास मूसा की मृत्यु के बाद यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा, 
Jos 1:2  मेरा दास मूसा मर गया है; सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार होकर उस देश को जा जिसे मैं उनको अर्थात इस्राएलियों को देता हूं। 
Jos 1:3 उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हे दे देता हूं। 
Jos 1:4  जंगल और उस लबानोन से लेकर परात महानद तक, और सूर्यास्त की ओर महासमुद्र तक हित्तियों का सारा देश तुम्हारा भाग ठहरेगा। 
Jos 1:5  तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा, और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। 
Jos 1:6  इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा। 
Jos 1:7  इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ हो कर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना; और उस से न तो दहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा। 
Jos 1:8  व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। 
Jos 1:9  क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल ११-१२ 
  • यहूदा