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मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

मसीह केन्द्रित


   क्या आपने परमेश्वर के वचन बाइबल को समझने के लिए ’मसीह केन्द्रित’ सिद्धांत के बारे में सुना है? सरल शब्दों में, यह सिद्धांत सिखाता है कि जब हम परमेश्वर, स्वर्गदूत, शैतान, मान्वीय आशाएं, इस सारी सृष्टि की सारी बातों को मसीह यीशु से संबंधित करके देखते हैं तो उन्हें बेहतर समझ सकते हैं क्योंकि मसीह यीशु ही सब बातों का केन्द्र बिन्दु है।

   अभी हाल ही में मैंने पाया कि बाइबल के पुराने नियम कि एक पुस्तक - ज़कर्याह नबी की पुस्तक सबसे अधिक मसीह केन्द्रित है। इस पुस्तक में हमें मसीह की मानवता (६:१२), उसकी नम्रता (९:९), उसका पकड़ा जाना (११:१२), उसकी दिव्यता (१२:८), उसका क्रूस पर चढ़ाया जाना (१२:१०), उसकी वापसी (१४:४), और उसका भावी शासन (१४:८-२१) - सब मिलता है।

   इस पुस्तक का एक खण्ड "...तब वे मुझे ताकेंगे अर्यात्‌ जिसे उन्होंने बेधा है..." विशेष अर्थ रखता है। इस भाग में बेधने का तात्पर्य एतिहासिक रूप में घटित इस्त्राएल द्वारा मसीह यीशु का इनकार, जिसके कारण उसे क्रूस पर चढ़ाया गया, से है। परन्तु यही पद भविष्य की एक ऐसी इस्त्राएली पीढ़ी के बारे में बताती है जो प्रभु यीशु को अपने मसीहा के रूप में स्वीकार कर लेंगे। प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के समय, इस्त्राएल के बचे हुए लोगों में से कुछ क्रूस पर चढ़ाए गए प्रभु यीशु को पहचानेंगे और विश्वास में उसकी ओर मुड़ेंगे।

   ज़कर्याह नबी द्वारा लिखित यह पुस्तक हमें मसीह केन्द्रित अन्य सत्यों को - बाइबल के अन्य भागों में और हमारे जीवनों में भी, खोजने को प्रोत्साहित करती है। मसीह केंद्रित जीवन व्यतीत करें, प्रभु यीशु को अपने जीवन का केन्द्र बिन्दु बनाएं, जीवन और जीवन की बातें सरल हो जाएंगी। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु वह कुंजी है जो परमेश्वर के वचन बाइबल की समझ को खोल देता है।

और मैं दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों पर अपना अनुग्रह करने वाली और प्रार्थना सिखाने वाली आत्मा उण्डेलूंगा, तब वे मुझे ताकेंगे अर्थात जिसे उन्होंने बेधा है, और उसके लिये ऐसे रोएंगे जैसे एकलौते पुत्र के लिये रोते-पीटते हैं, और ऐसा भारी शोक करेंगे, जैसा पहिलौठे के लिये करते हैं। - ज़कर्याह १२:१०

बाइबल पाठ: ज़कर्याह ६:१२-१५
Zec 6:12  और उस से यह कह, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, उस पुरूष को देख जिस का नाम शाख है, वह अपने ही स्थान से उगकर यहोवा के मन्दिर को बनाएगा। 
Zec 6:13  वही यहोवा के मन्दिर को बनाएगा, और महिमा पाएगा, और अपने सिंहासन पर विराजमान होकर प्रभुता करेगा। और उसके सिंहासन के पास एक याजक भी रहेगा, और दोनों के बीच मेल की सम्मति होगी। 
Zec 6:14  और वे मुकुट हेलेम, तोबिय्याह, यदायाह, और सपन्याह के पुत्र हेन को मिलें, और वे यहोवा के मन्दिर में स्मरण के लिये बने रहें।
Zec 6:15  फिर दूर दूर के लोग आ आकर यहोवा के मन्दिर बनाने में सहायता करेंगे, और तुम जानोगे कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है। और यदि तुम मन लगाकर अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं का पालन करो तो यह बात पूरी होगी।

एक साल में बाइबल: 
  • ओबद्याह 
  • प्रकाशितवाक्य ९

सोमवार, 17 दिसंबर 2012

परमेश्वर का प्रेम


   मैं एक सम्मेलन में भाग ले रहा था। सम्मेलन के एक मनन और प्रार्थना के समय में उस सत्र के हमारे अगुवे ने कहा कि हम सब मिलकर ऊँची आवाज़ में १ कुरिन्थियों १३:४-८ से पढ़ेंगे और इस खण्ड में जहाँ ’प्रेम’ आया है, उसके स्थान पर ’यीशु’ बोलेंगे। यह करना और बोलना हमें बहुत ही स्वाभाविक लगा, और हम सब ने बड़ी सहजता से वह खण्ड यीशु के नाम को डालकर पढ़ा: "यीशु धीरजवन्त है और कृपालु है; यीशु डाह नहीं करता; यीशु अपनी बड़ाई नहीं करता और फूलता नहीं। यीशु अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता...यीशु कभी टलता नहीं।"

   इसके बाद उस अगुवे ने कहा, "अब एक बार फिर से यही खण्ड ऊँची आवाज़ में पढ़ेंगे, किंतु इस बार प्रेम के स्थान पर सब यीशु का नहीं वरन अपना अपना नाम बोलेंगे।" हम सब को यह सुनकर घबराहट और संकोच हुआ। हमारा मन परमेश्वर के वचन के समक्ष हमारी वास्तविकता को बता रहा था, हम अपनी असली हालत जानते थे; बड़ी ठहरी और हिचकिचाती हुई दबी सी आवाज़ में मैंने पढ़ना आरंभ किया: "डेविड धीरजवन्त है और कृपालु है; डेविड डाह नहीं करता; डेविड अपनी बड़ाई नहीं करता और फूलता नहीं। डेविड अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता...डेविड कभी टलता नहीं।"

   इस अभ्यास ने मुझे अपने आप से पूछने पर मजबूर किया, "परमेश्वर के प्रेम को अपने में होकर प्रकट होने में मैं किस किस प्रकार से बाधा बन रहा हूँ?" क्या मैं अपने विश्वास की अभिव्यक्ति को किसी अन्य रीति से करने को अधिक महत्वपूर्ण मानता हूँ? प्रेरित पौलुस ने समझाया है कि परमेश्वर के दृष्टिकोण से वाकपटुता, आत्मिक बातों की गहरी समझ, आत्म-बलिदान की बातें इत्यादि सब व्यर्थ हैं यदि वे प्रेम के साथ नहीं हो (१ कुरिन्थियों १३:१-३)।

   परमेश्वर अपने प्रेम से भरे हृदय को हम मसीही विश्वासियों में होकर संसार पर प्रगट करने की लालसा रखता है। हम उसकी यह लालसा के पूरे होने में कितने सहायक हैं और कितनी बाधा - यह हम सब के लिए व्यक्तिगत रीति से जांचने की बात है? - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह के समान जीवन जीने का अर्थ है परमेश्वर के समान प्रेम करना।

प्रेम कभी टलता नहीं... - १ कुरिन्थियों १३:८

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १३
1Co 13:1  यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1Co 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्‍तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1Co 13:3  और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1Co 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाल नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1Co 13:5  वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1Co 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्‍तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1Co 13:7  वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1Co 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। 
1Co 13:9 क्‍योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी। 
1Co 13:10 परन्‍तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। 
1Co 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्‍तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं। 
1Co 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्‍तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है, परन्‍तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। 
1Co 13:13  पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस ७-९ 
  • प्रकाशितवाक्य ८

रविवार, 16 दिसंबर 2012

महान आश्चर्यकर्म


   एक प्रसिद्ध ब्रिटिश सुसमाचार प्रचारक लियोनार्ड रैव्नहिल (१९०७-१९९४) ने एक बार कहा था: "परमेश्वर द्वारा किया जाने वाला एक महान अश्चर्यकर्म है कि वह एक पापी मनुष्य को पापी संसार में से लेकर उसे पवित्र बना दे और उसे फिर से पापी संसार में रख दे और फिर उस संसार में रहते हुए भी उस मनुष्य की पवित्रता को बनाए रखे।" परमेश्वर ने यही यशायाह भविष्यद्वक्ता के साथ किया जब परमेश्वर ने उसे अपने लोगों तक अपना सन्देश पहुँचाने के लिए नियुक्त किया।

   यहूदा के सफल राजाओं में से एक, राजा उज़्ज़ियाह की मृत्यु के बाद यशायाह को परमेश्वर का एक दर्शन मिला जिसमें यशायाह ने परमेश्वर को सृष्टि के अधिपति के रूप में अपनी महिमा में एक भव्य सिंहासन पर बैठे देखा। उस दर्शन में यशायाह ने देखा कि साराप (स्वर्गदूत) परमेश्वर की आराधना कर रहे हैं, उसे पवित्र, पराक्रमी और महिमावान कह रहे हैं।

   परमेश्वर की वास्तविकता को देख कर यशायाह को अपनी वास्तविकता का बोध हुआ, कि परमेश्वर के सम्मुख वह कैसा पापी और अपवित्र है, और यशायाह पुकार उठा "...हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं..." (यशायाह ६:५)। अपनी अपवित्रता और पाप के इस बोध ने उसे परमेश्वर के शुद्ध और पवित्र करने वाले अनुग्रह की आवश्यकता और उपलब्धता का एहसास कराया (पद ७); यशायाह शुद्ध और पवित्र किया गया और फिर परमेश्वर के वचन को लोगों तक पहुँचाने के लिए उसने परमेश्वर की पुकार को स्वीकार किया और नियुक्त किया गया। तब परमेश्वर ने यशायाह को एक अपवित्र संसार में अपवित्र लोगों के बीच में भेजा कि वह एक पवित्र जीवन व्यतीत करे और पवित्र परमेश्वर के बारे में लोगों को बताए।

   आज भी अपने विश्वासियों को परमेश्वर अपनी पवित्रता और उनकी वास्तविकता का बोध कराना चाहता है जिससे कि वे उसके अनुग्रह और पवित्रता की, उनके जीवनों में घोर आवश्यकता को पहचान सकें, उससे वह प्राप्त कर सकें और फिर उसके लिए उपयोगी पात्र बनकर उसके सन्देश को संसार में पहुँचाने वाले बन सकें। यह महान आश्चर्यकर्म वह आपके जीवन में भी करना चाहता है, यदि आप उसको समर्पण के लिए तैयार हैं। - मार्विन विलियम्स


पाप के अन्धकार से भरे जीवनों को परमेश्वर के अनुग्रह की ज्योति पवित्रता से रौशन कर देती है।

और उस ने उस से मेरे मुंह को छूकर कहा, देख, इस ने तेरे होंठों को छू लिया है, इसलिये तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए। - यशायाह ६:७

बाइबल पाठ: यशायाह ६:१-८
Isa 6:1  जिस वर्ष उज्जिय्याह राजा मरा, मैं ने प्रभु को बहुत ही ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा; और उसके वस्त्र के घेर से मन्दिर भर गया। 
Isa 6:2  उस से ऊंचे पर साराप दिखाई दिए; उनके छ: छ: पंख थे; दो पंखों से वे अपने मुंह को ढांपे थे और दो से अपने पांवों को, और दो से उड़ रहे थे। 
Isa 6:3  और वे एक दूसरे से पुकार पुकार कर कह रहे थे: सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है। 
Isa 6:4  और पुकारने वाले के शब्द से डेवढिय़ों की नेवें डोल उठीं, और भवन धूंए से भर गया। 
Isa 6:5  तब मैं ने कहा, हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! 
Isa 6:6  तब एक साराप हाथ में अंगारा लिए हुए, जिसे उस ने चिमटे से वेदी पर से उठा लिया था, मेरे पास उड़ कर आया। 
Isa 6:7  और उस ने उस से मेरे मुंह को छूकर कहा, देख, इस ने तेरे होंठों को छू लिया है, इसलिय तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए। 
Isa 6:8  तब मैं ने प्रभु का यह वचन सुना, मैं किस को भेंजूं, और हमारी ओर से कौन जाएगा? तब मैं ने कहा, मैं यहां हूं! मुझे भेज।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस ४-६ 
  • प्रकाशितवाक्य ७

शनिवार, 15 दिसंबर 2012

आधीन


   एक ख्याति प्राप्त महिला ने टी.वी. पर हो रहे साक्षात्कार में स्वीकार किया कि प्रति वर्ष अपने बालों की देख-रेख और उन्हें सजाने संवारने में वे हज़ारों डॉलर तथा सईकड़ों घंटे लगा देती हैं। उसने यह भी स्वीकार किया कि यह उसके लिए व्यसन के समान हो गया है और वह अपने बालों के आधीन हो गई है। आधीन हो जाने का तात्पर्य है कि किसी अन्य के अधिकार या नियंत्रण में हो जाना। अपने आप को सुंदर दिखाने के प्रयास में इस महिला ने अपने जीवन का नियंत्रण अपने बालों को सौंप दिया था।

   इस महिला की कहानी से हमें भी अपने जीवनों को टटोलने की आवश्यक्ता है - हमारी कौन सी इच्छाएं हमें अपनी आधीनता में लिए हुए हैं और हमें नियंत्रित कर रही हैं? क्या हम किसी चीज़ के प्रति ऐसे आसक्त हो जाते हैं कि उसे प्राप्त करने के लिए कुछ भी कर गुज़रने के लिए तैयार रहते हैं? क्या हम ख्याति, प्रशंसा, धन-संपदा, आनन्द, भोजन, अहम आदि के हाथों अपने जीवन को दे चुके हैं?

   प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों को लिखा "क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है" (रोमियों ६:१६)। जब हमारी शारीरिक लालसाएं और सांसारिक इच्छाएं हम पर हावी होने लगें तो समय है परमेश्वर के आधीन हो जाने का और उस के हाथों में अपना नियंत्रण छोड़ देने का "और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो" (रोमियों ६:१३)।

   यदि शरीर और संसार आप पर हावी हैं, आप को अपनी आधीनता में लिए हुए हैं तो परमेश्वर के सामने दीन होकर अपने आप को उसे सौंप दें और उससे प्रार्थना करें कि वह आपको आपके हृदय की वास्तविक दशा दिखाए, उसके लिए पश्चाताप का मन और निवारण दे।


सच्ची स्वतंत्रता अपना मार्ग चुनने और अपनाने में नहीं वरन परमेश्वर की आधीनता में है।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब ४:१०

बाइबल पाठ: रोमियों ६:११-२३
Rom 6:11  ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। 
Rom 6:12   इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो। 
Rom 6:13  और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।
Rom 6:15  तो क्‍या हुआ क्‍या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं कदापि नहीं। 
Rom 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है? 
Rom 6:17  परन्‍तु परमेशवर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे। 
Rom 6:18  और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। 
Rom 6:19  मैं तुम्हारी शारीरिक र्दुबलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। 
Rom 6:20  जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्‍वतंत्र थे। 
Rom 6:21  सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्‍या फल पाते थे? 
Rom 6:22  क्‍योंकि उन का अन्‍त तो मृत्यु है परन्‍तु अब पाप से स्‍वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्‍त होती है, और उसका अन्‍त अनन्‍त जीवन है। 
Rom 6:23  क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्‍तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य ६

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

रवैया


   एक परिवार झील के किनारे पिकनिक मनाने गया। सब लोग पिकनिक का आनन्द ले रहे थे, खेल रहे थे। किसी को ध्यान नहीं रहा और ५ वर्षीय जौनी पानी के अन्दर चलते चलते गहरे में चला गया और डूबने लगा। इतने में किसी ने जौनी के दिखाई ना देने को पहचाना और सब इधर-उधर भाग कर उसे पुकारने और ढूँढने लगे। वहां उपस्थित एक अन्य अजनबी व्यक्ति ने पानी की ओर ध्यान किया और कूछ दूरी पर गोते खाते और हाथ-पैर मारते जौनी को देखा। उसने तुरंत पानी में छलांग लगाई और जौनी को बचाकर तट पर ले आया; उस व्यक्ति ने जौनी को उसके परिवार को सौंपा ही था कि तभी खिसियाई आवाज़ में जौनी की माँ ने अजनबी से कहा, "अरे आप जौनी की टोपी कहाँ छोड़ आए?"

   यही बात कितनी ही दफा हमारे साथ हमारे जीवनों में होती है। हम जीवन कि छोटी छोटी बातों से निराश होकर परमेश्वर के विरुद्ध कुड़कुड़ाते हैं, खिसियाते हैं, अपनी असफलताओं के लिए उसे दोषी ठहराते हैं, बजाए इसके कि परमेश्वर द्वारा हमें दी गई अद्भुत आशीषों, उसकी लगातार बनी रहने वाली देख-रेख, उसके प्रेम और दया के लिए, उसके द्वारा दिए गए उद्धार के मार्ग के लिए उसके धन्यवादी हों। जब हम जीवन की छोटी छोटी बातों को लेकर परेशान होते हैं और परमेश्वर को दोष देते हैं तो उस माँ के समान ही हम भी परमेश्वर से पूछ रहे होते हैं "अरे आप जौनी की टोपी कहाँ छोड़ आए?"

   प्रेरित पौलुस ने लिखा "हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है" (१ थिस्सलुनीकियों ५:१८)। चाहे हमें अपने जीवन में घटित होने वाली हर बात के लिए धन्यवाद करना कठिन लगे, किंतु हम हर परिस्थिति में एक धन्यवादी मन रख सकते हैं। हमारी इच्छानुसार यदि कोई कार्य नहीं भी हो, या कोई अप्रत्याशित घटना हमें दुखी कर दे तो भी हम इस बात में विश्वास रख कर कि परमेश्वर हर बात में हमारे लिए भलाई ही उत्पन्न करेगा (रोमियों ८:२८) और अब तक के उसके प्रेम, उसकी भलाइयों के लिए हम उसके धन्यवादी रह सकते हैं। एक धन्यवादी मन ही परमेश्वर के योग्य बलिदान है और अशीषित जीवन जीने के लिए सही रवैया भी। - डेविड रोपर


अपनी समस्याओं में उलझे रहने की बजाए परमेश्वर का धन्यवादी होने में समय बिताएं।

मैं तो निरन्तर आशा लगाए रहूंगा, और तेरी स्तुति अधिक अधिक करता जाऊंगा। - भजन ७१:१४

बाइबल पाठ: भजन ४२
Psa 42:1  जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psa 42:2  जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psa 42:3  मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psa 42:4  मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psa 42:5  हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psa 42:6  हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं। 
Psa 42:7  तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं। 
Psa 42:8  तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा; और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवनदाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
Psa 42:9  मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं? 
Psa 42:10  मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psa 42:11  हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • योएल १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य ५

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

प्रभाव का स्त्रोत


   प्रति वर्ष कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में असाधारण कार्य और छोड़े गए प्रभाव के लिए लोगों को नोबल पुरस्कार दिया जाता है। अर्थ शास्त्र, भौतिक विज्ञान, साहित्य, चिकित्सा, शांति के क्षेत्रों में अभूतपूर्व योगदान के लिए इन क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रतिभाशाली व्यक्तियों को इस परस्कार द्वारा मान्यता दी जाती है। यह पुरस्कार इस बात का सूचक है कि उस व्यक्ति ने अपने कार्य क्षेत्र में वर्षों के प्रशिक्षण, प्रयास, शिक्षा और त्याग द्वारा श्रेष्ठता की एक मिसाल कायम करी है - ये बातें उसके जीवन का वह निवेश रही हैं, जिनके कारण वह अपनी एक अनुपम छाप समाज पर छोड़ सका; ये उसके प्रभाव का स्त्रोत हैं।

   आत्मिक रीति से भी लोग समाज पर विलक्षण प्रभाव छोड़ते हैं; उन्हें देखकर हम भी विचार कर सकते हैं कि उनकी आत्मिक सेवा और प्रभाव का स्त्रोत क्या है? कैसे हम भी आत्मिक रूप से उनके समान प्रभावी हो सक्ते हैं? प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए यह व्यक्तिगत रीति से गंभीरता के साथ विचार करने की बात है कि यदि हमें अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु के लिए प्रभावी होना है, तो हमारा निवेश किन बातों में होना चाहिए?

   प्रभु यीशु के आरंभिक अनुयायी प्रभु यीशु के साथ समय बिताने के द्वारा प्रभावी हुए। जब प्रभु ने अपने बारह चेले चुने, तो उन चेलों के लिए प्रभु का उद्देश्य था कि वे उसके साथ रहें और उसके लिए उपलब्ध रहें "फिर वह पहाड़ पर चढ़ गया, और जिन्‍हें वह चाहता था उन्‍हें अपने पास बुलाया; और वे उसके पास चले आए। तब उस ने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्‍हें भेजे, कि प्रचार करें"(मरकुस ३:१३-१४)। आगे चलकर उन चेलों की सेवकाई से इस्त्राएल के धार्मिक अगुवे इस बात को पहचान गए: "जब उन्‍होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं" (प्रेरितों ४:१३)।

   प्रभु यीशु की सेवकाई में प्रशिक्षण और ज्ञान का महत्व अवश्य है, किंतु प्रभु यीशु के साथ बिताए गए समय का कोई विकल्प नहीं है। हमारा कोई ज्ञान, कोई प्रशिक्षण प्रभु यीशु से, उसके साथ बिताए गए समय द्वारा, मिलने वाली सामर्थ और योग्यता का स्थान नहीं ले सकता; और यही सामर्थ तथा योग्यता हमें प्रभु यीशु के लिए प्रभावी कर सकती है। प्रेरितों के कार्य से लिए गए ऊपर उद्वत पद में स्पष्ट है कि उस घटना के समय प्रभु यीशु के चेले पतरस और युहन्ना अनपढ़ और साधारण मनुष्य ही थे, ठीक वैसे ही जैसे वे प्रभु से मिली अपनी बुलाहट के समय थे। किंतु प्रभु यीशु के साथ रहने से अब उनमें एक ऐसी विलक्षण सामर्थ तथा योग्यता आ गई थी जिसके सामने इस्त्राएली समाज के वे प्रशिक्षित और ज्ञानवान धार्मिक अगुवे टिक नहीं सके।

   यदि मसीह यीशु के लिए इस संसार में प्रभावी होना है तो परमेश्वर के जीवते वचन मसीह यीशु (यूहन्ना १:१-२) के साथ समय बिताना आरंभ कीजिए। जितना समय आप उसके साथ बिताएंगे, आप उतने ही प्रभावी होने पाएंगे, क्योंकि परमेश्वर का जीवता वचन मसीह यीशु ही हमारे प्रभावी होने का स्त्रोत है। परमेश्वर के वचन के अध्ययन और मनन में अधिक से अधिक समय बिताएं, प्रभाव संसार को अपने आप ही दिखने लगेंगे। - बिल क्राउडर


जीवन में प्रभावी होने के लिए जीवन के स्त्रोत मसीह यीशु के साथ समय व्यतीत करें।

जब उन्‍होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं। - प्रेरितों ४:१३

बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:१-८
Joh 15:1 सच्‍ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है। 
Joh 15:2  जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले। 
Joh 15:3  तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। 
Joh 15:4  तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। 
Joh 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्‍योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। 
Joh 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाई फेंक दिया जाता, और सूख जाता है, और लोग उन्‍हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। 
Joh 15:7  यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। 
Joh 15:8  मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे १२-१४ 
  • प्रकाशितवाक्य ४

बुधवार, 12 दिसंबर 2012

निर्भर


   हमारे वायुयान के उतरने के बाद मैं और जे उसमें से निकले और कीन्या के मसाई मारा में प्रवेश किया। हमारा स्वागत मसाई कबीले के एक व्यक्ति सैमी ने किया। उसने हमारा सामान लेकर गाड़ी में रखा और हमें हमारे खेमे की ओर ले चला जहां हम अगले दो दिन बिताने वाले थे। मार्ग में हम एक स्थान पर रुक गए कि मसाई मारा से सेरेन्गेटी को प्रवास कर रहे ज़ेबरा और विल्डरबीस्ट के झुंडों को देख सकें। सैमी ने हमें बताया कि इन दोनो प्रकार के जानवरों के ये विशाल झुंड सदा एक साथ ही एक स्थान से दूसरे की ओर प्रवास करते हैं। इसका कारण है दोनो की भिन्न क्षमताएं और कमज़ोरियां।

   ज़ेबरा की दृष्टि तो बहुत अच्छी होती है किंतु सूंघने की शक्ति बहुत कम; इसके विपरीत विल्डरबीस्ट की सूंघने की शक्ति बहुत अच्छी होती है किंतु आंखें कमज़ोर। एक साथ चलने से वे एक दुसरे कि शक्तियों का लाभ उठाते हैं और शिकारी जानवरों से अपना बचाव बेहतर कर लेते हैं, उनकी कमज़ोरियां उनकी परस्पर शक्तियों से ढंप जाती हैं। यह हमारे लिए परमेश्वर द्वारा सृष्टि में दिए गए अनेक पाठों में से एक महत्वपुर्ण पाठ था।

   जैसे परमेश्वर ने भिन्न जानवरों को भिन्न शक्ति और कमज़ोरियों के साथ बनाया है, वैसे ही वह मनुष्यों को भी एक दुसरे से भिन्न बनाता है जिससे वे मिल-जुलकर एक साथ एक दुसरे की भलाई के लिए कार्य कर सकें। परमेश्वर हमें ना केवल अपने ऊपर निर्भर देखना चाहता है, वरन यह भी कि हम एक दुसरे पर भी निर्भर रहें। प्रेरित पुलुस ने कुरिन्थियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में इस विषय पर लिखा है। उसने उन्हें समझाया कि परमेश्वर ने अपनी देह अर्थात अपनी मण्डली में लोगों को भिन्न भिन्न वरदानों और क्षमताओं के साथ रखा है कि सब एक साथ मिल कर देह की उन्नति के लिए कार्य करें; किसी एक के कार्य के द्वारा ही मण्डली उन्नति नहीं पा सकती (१ कुरिन्थियों १२:१२-३१)।

   प्रभु की देह - उसकी मण्डली या चर्च तब ही स्वस्थ रहेगा और उन्नति करेगा जब उसके सदस्य एक साथ मिलकर अपनी अपनी क्षमताओं और सामर्थ को परस्पर एक दूसरे की भलाई और उन्नति के लिए प्रयोग करेंगे। अकेले या केवल अपने लिए कार्य करने से ना तो व्यक्ति उन्नति करेगा और ना ही प्रभु की मण्डली। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मिल-जुलकर किया गया कार्य मात्रा और गुणवन्ता में किसी के अकेले द्वारा किए गए कार्य से सदा अधिक होता है।

ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। - १ कुरिन्थियों १२:२५

बाइबल पाठ: - १ कुरिन्थियों १२:१४-२७
1Co 12:14  इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्‍तु बहुत से हैं। 
1Co 12:15  यदि पांव कहे: कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:16  और यदि कान कहे कि मैं आंख का नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:17   यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1Co 12:18  परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है। 
1Co 12:19   यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1Co 12:20  परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है। 
1Co 12:21   आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1Co 12:22  परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1Co 12:23  और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1Co 12:24  फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1Co 12:25  ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1Co 12:26  इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं। 
1Co 12:27  इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे ९-११ 
  • प्रकाशितवाक्य ३