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सोमवार, 21 जनवरी 2013

रिक्त स्थान


   प्राचीन दार्शनिक अरस्तु(Aristotle) का प्रसिद्ध कथन है: "Nature abhors a vacuum" अर्थात प्रकृति शून्य या रिक्ति को नापसन्द करती है। अरस्तु का यह कथन उनके इस अवलोकन पर आधारित था कि प्रकृति हर रिक्त स्थान को भर देती है, चाहे वह ना दिखाई देने वाली वायु के द्वारा ही क्यों ना हो।

   यही सिद्धांत हमारे आत्मिक जीवनों में भी लागू होता है। जब परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे मनों में हमारे पाप-बोध को जगाना आरंभ करता है तो साथ ही हम अपने मनों में अपने आप को सुधारने की योजनाएं भी बनाने लग जाते हैं; अपनी बुरी आदतों और बातों को निकाल देने के लिए भरसक प्रयत्न करने लगते हैं। किंतु अशुद्ध विचारों, दुष्टता के रवैये और स्वार्थ-सिद्धी की दुष्कामनाएं अपने प्रयासों से हटा पाने के हमारे सभी प्रयास अन्ततः निश्चित रुप से असफल रहते हैं क्योंकि हम अपनी एक बुराई निकाल कर उसके स्थान पर एक रिक्ति या शून्यता उत्पन्न कर देते हैं और कोई दूसरी बुराई या अन्य उपस्थित बुराईयों में से कोई बढ़कर उसका स्थान भर देती है, और हम एक के बाद एक बुराई को निकालने के असफल प्रयासों से जूझते हुए, निराश होकर पुनः अपनी पुरानी हालत में आ जाते हैं।

   यह बात हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री में दी गई शिक्षा की सार्थकता को प्रगट करती है। पौलुस ने लिखा: "और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ" (इफिसीयों ३:१७-१९)। पौलुस ने उन्हें समझाया कि वे प्रभु यीशु मसीह को अपने हृदयों में गहराई से बसा लें, क्योंकि जब मसीह उनके हृदयों में बसा रहेगा तो पाप और बुराई को बसने का स्थान ही नहीं रहेगा।

   जीवन में पाप से निवारण पाने का यही एकमात्र तरीका है - अपने मनों को बुराई तथा संसार के प्रेम की बजाए मसीह के प्रेम से भर लें। मसीह यीशु का प्रेम जितना अधिक हमारे अन्दर भरा होगा, बुराई तथा संसार कि बातों को भरने का उतना ही कम स्थान उपलब्ध होगा और पाप को हमारे जीवनों में स्थान मिलने ही नहीं पाएगा। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


मसीह यीशु को हृदय में स्थान देने से पहले स्वयं ही उसे शुद्ध और पवित्र करने के प्रयास में समय व्यर्थ ना करें; जब आप मसीह को अपने हृदय में बसा लेंगे तो वह ही उसे शुद्ध और पवित्र कर देगा।

और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे... - इफिसीयों ३:१७

बाइबल पाठ: इफिसीयों ३:१४-२१
Eph 3:14  मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं,
Eph 3:15  जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।
Eph 3:16  कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ।
Eph 3:17  और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर।
Eph 3:18  सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है।
Eph 3:19  और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Eph 3:20  अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है,
Eph 3:21  कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १-३ 
  • मत्ती १४:१-२१

रविवार, 20 जनवरी 2013

भय एवं प्रेम


   एक कर्मचारी ने दो अधिकारियों से संबंधित अपना विशलेषण मेरे साथ बांटा। एक अधिकारी से उसके आधीनस्थ कर्मचारी प्रेम तो करते हैं परन्तु उस का भय नहीं रखते और इस कारण उसके अधिकार का आदर नहीं करते और उसके निर्देशों को अन्देखा करते रहते हैं। दूसरे अधिकारी के प्रति उन कर्मचारियों के मन में प्रेम भी है और भय भी और उसके प्रति उनका व्यवहार और आज्ञाकारिता इस बात को दिखाती है।

   परमेश्वर भी चाहता है कि उसके लोग उसका भय भी मानें और उससे प्रेम भी रखें। आज का बाइबल पाठ परमेश्वर की इसी मनसा को दिखाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में व्यवस्थाविवरण १०:१२ में परमेश्वर ने कहा: "और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे" - परमेश्वर के लोग उसका भय भी मानें और उससे प्रेम भी रखें, अपने सारे मन और प्राण से।

   एक मसीही विश्वासी के लिए इसका अर्थ परमेश्वर से या उसके व्यकतित्व से आतंकित रहना नहीं वरन परमेश्वर का भय मानने से तात्पर्य है उसे संपूर्ण तन-मन से, पूरी श्रद्धा, आदर और सत्कार देना; उसके मार्गों पर चलना और उसकी आज्ञाकारिता में बने रहना। और परमेश्वर से प्रेम रखने का तात्पर्य है कि अपने सच्चे और समर्पित सारे मन और सामर्थ से उसकी सेवा करना, ना कि किसी मजबूरी अथवा कर्तव्य पालन के विचार के अन्तर्गत।

   जो निस्वार्थ और खरा प्रेम परमेश्वर ने पहले हो कर हम से किया, वही हमें उसके प्रति सच्चा प्रेम रखने और कृतज्ञ होने को प्रेरित करता है, ना कि उसके प्रति हमारी कोई पसन्द अथवा कुछ प्राप्ति की इच्छा : "हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया" (१ यूहन्ना ४:१९)। परमेश्वर के प्रति हमारा यही भय और प्रेम हमें उसके नियमों पर चलने और उसकी आज्ञाकारिता में रहने की भावना और सामर्थ देता है, और जिससे हम परमेश्वर द्वारा आशीशित रहते हैं। - एलबर्ट ली


यदि हम परमेश्वर का भय मानेंगे, उससे प्रेम करेंगे तो उसके आज्ञाकारी भी रहेंगे।

और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे, - व्यवस्थाविवरण १०:१२

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण १०:१२-१७
Deut 10:12  और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे,
Deut 10:13  और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो?
Deut 10:14  सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है;
Deut 10:15  तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है।
Deut 10:16  इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो।
Deut 10:17  क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४९-५० 
  • मत्ती १३:३१-५८

शनिवार, 19 जनवरी 2013

गिर जाने पर


   लोकप्रीय और प्रसिद्ध व्यक्तियों के द्वारा कोई बुराई करने के समाचार अब इतने आम हो गए हैं कि चाहे हम उन्हें पढ़-सुन कर निराश हों किंतु आश्चर्यचकित नहीं होते। किंतु जब किसी गणमान्य व्यक्ति या किसी मित्र के किसी अनैतिक कार्य अथवा असफलता का हमें पता चलता है तो हमारी प्रतिक्रीया कैसी होनी चाहिए; हमें क्या करना चाहिए?

   सबसे अच्छा तरीका है हम अपने आप को जांचें। लगभग एक शताब्दी पहले, प्रसिद्ध बाइबल शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने लंडन में अपने बाइबल कॉलेज के छात्रों को कहा था: "सदैव इस बात से सचेत रहो कि जहां कोई एक जन गिर गया है, वहीं कोई अन्य भी गिर सकता है, तुम भी! असुरक्षित सामर्थ कमज़ोर पड़ जाने का दोगुना कारण होती है।"

   चैम्बर्स के यह वचन दूसरों के पापों को देखकर स्वयं अपनी कमज़ोरियों के प्रति सचेत होने की परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई प्रेरित पौलुस की शिक्षा पर आधारित हैं। कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी पहली पत्री में इस्त्राएलियों के पूर्वजों की अनाज्ञाकारिता की समीक्षा करने के पश्चात (१ कुरिन्थियों १०:१-५) पौलुस ने अपने पाठकों को सचेत किया कि वे उन बातों से सीखें और उनके से पापों में पड़ने से बचे रहें (पद ६-११)। उसकी शिक्षा का केंद्र बिंदु बीते समय के पाप नहीं वर्तमान समय का अहंकार था जो पाप में पड़ने का कारण बन सकता था, इसलिए पौलुस ने लिखा, "इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े" (१ कुरिन्थियों १०:१२)।

   किसी दूसरे के पाप या कमज़ोरी पर दोषारोपण तथा निराशा में सिर हिलाना तो आम बात है, लेकिन सबसे अधिक लाभदायक वह सिर है जो इस स्वीकृति में हिलता है कि "हाँ! मुझ से भी यही पाप हो सकता है" और फिर परमेश्वर के सामने झुक कर हाथ प्रार्थना में बांध कर कहता है, "प्रभु उस पर दया कर और मुझे भी अपनी दया से इस पाप में पड़ने से बचाए रख।" - डेविड मैक्कैसलैंड


विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है। - नीतिवचन १६:१८

इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। - १ कुरिन्थियों १०:१२

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १०:१-१३
1Cor 10:1  हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बाप दादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए।
1Cor 10:2  और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपितिस्मा लिया।
1Cor 10:3  और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया।
1Cor 10:4  और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उन के साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था।
1Cor 10:5  परन्तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए।
1Cor 10:6 ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरी, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें।
1Cor 10:7  और न तुम मूरत पूजने वाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे।
1Cor 10:8  और न हम व्यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये ।
1Cor 10:9  और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए।
1Cor 10:10  और न हम कुड़कुड़ाएं, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए।
1Cor 10:11 परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।
1Cor 10:12  इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े।
1Cor 10:13  तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४६-४८ 
  • मत्ती १३:१-३०

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

खुली किताब


   मैं पेशे से एक लेखक हूँ और कभी न कभी कोई मित्र या जानकार मुझसे कहता रहता है कि "किसी दिन मैं भी एक पुस्तक लिखुँगा।" मेरा उत्तर होता है, "यह एक अच्छा लक्ष्य है, और मेरी शुभकामनाएं हैं कि आप अवश्य ही कोई पुस्तक लिखें। किंतु पुस्तक लिखने से बेहतर होता है जीवन का स्वयं पुस्तक होना।"

   मेरा यह कथन परमेश्वर के वचन में प्रेरित पौलुस की कही बात पर आधारित है। पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी दूसरी पत्री में उन्हें समझाया, "यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है" (२ कुरिन्थियों ३:३)।

   इंगलैंड के राजा जेम्स प्रथम के पादरी लुइस बेय्ली ने अपनी पुस्तक The Practice of Piety में लिखा: "जो अपनी लेखनी के द्वारा कुछ भला करना चाहता है, वह थोड़े ही समय में समझ जाएगा कि वह बहुत थोड़े से लोगों को ही प्रभावित कर पा रहा है। इसलिए भलाई करने तथा किसी को प्रभावित करने का सबसे सक्षम तरीका है उस भलाई का उदाहरण बनना। अपने आस-पास के लोगों को सिखाने के लिए हज़ार में से कोई एक जन पुस्तक लिखने की क्षमता रख सकता है, परन्तु प्रत्येक जन में यह क्षमता है कि वह अपने आस-पास के लोगों के लिए एक सजीव उदाहरण बन कर जी सकता है।"

   जो काम प्रभु यीशु अपने विश्वासियों के जीवन में करता है वह उनके जीवनों को ही उनके द्वारा लिखी जाने वाली किसी पुस्तक से कहीं अधिक प्रभावी बना देता है। परमेश्वर का जो वचन उनके हृदय की पट्टियों पर लिखा जाता है (यर्मियाह ३१:३३) वह संसार के सामने परमेश्वर के प्रेम और भलाई को प्रदर्शित करने की सामर्थ रखता है। चाहे आप अपने जीवन में एक भी पुस्तक ना लिखने पाएं, लेकिन एक मसीही विश्वासी होने के नाते आप स्वयं एक पुस्तक बन जाते हैं जिसमें होकर लोग परमेश्वर की शिक्षाओं को पढ़ते हैं, मसीह के प्रेम को समझते हैं। 

   सचेत रहिए, एक मसीही विश्वासी का जीवन खुली किताब है; लोग आपके जीवन से क्या पढ़ने पाते हैं? - डेविड रोपर


यदि कोई आपके जीवन को पुस्तक के समान पढ़े तो क्या उन पन्नों में मसीह यीशु को पाएगा?

यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है। - २ कुरिन्थियों ३:३

बाइबल पाठ: यर्मियाह ३१:३१-३४
Jer 31:31  फिर यहोवा की यह भी वाणी है, सुन, ऐसे दिन आने वाले हैं जब मैं इस्राएल और यहूदा के घरानों से नई वाचा बान्धूंगा।
Jer 31:32  वह उस वाचा के समान न होगी जो मैं ने उनके पुरखाओं से उस समय बान्धी थी जब मैं उनका हाथ पकड़ कर उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया, क्योंकि यद्यपि मैं उनका पति था, तौभी उन्होंने मेरी वह वाचा तोड़ डाली।
Jer 31:33  परन्तु जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने से बान्धूंगा, वह यह है: मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में समवाऊंगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूंगा; और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यह वाणी है।
Jer 31:34  और तब उन्हें फिर एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है कि छोटे से ले कर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे; क्योंकि मैं उनका अधर्म क्षमा करूंगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४३-४५ 
  • मत्ती १२:२४-५०

गुरुवार, 17 जनवरी 2013

अन्धकार में मार्गदर्शन


   मैं सोचता था कि परमेश्वर यदि पहले से ही मुझे बात का परिणाम बता दे तो मुझे कार्य करना सरल हो जाएगा। मैं मानता हूँ कि परमेश्वर के वचन के वायदे के अनुसार सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं (रोमियों ८:२८), किंतु अन्धकार के समयों में मेरे लिए कार्य कर पाना अधिक सहज होगा यदि मैं पहले से जान सकूँ कि वह "भलाई" क्या है!

   परन्तु परमेश्वर अधिकांशतः हमें वह स्थान पहले से नहीं दिखाता जहां वह हमें ले कर जा रहा है; वह बस हमें उस पर और उस की योजनाओं पर विश्वास रखने को कहता है। यह अन्धकार में कार चलाने के समान है। कार चलाते हुए, हमारी कार की बत्ती की रौशनी हमारे गन्तव्य स्थान तक नहीं पहुँचती, उन बत्तियों की रौशनी में हम केवल लगभग १००-१५० फुट आगे का ही देखने पाते हैं; किंतु उस रौशनी की यह सीमा हमें आगे बढ़ने से नहीं रोकती। हम बत्ती पर भरोसा करते हुए, जितना दिख रहा है उसका आंकलन करते हुए आगे बढ़ते जाते हैं और बत्ती हमें क्रमशः आगे का मार्ग दिखाती चली जाती है, अन्ततः हम अपने लक्ष्य तक पहुँच जाते हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी उस ज्योति के समान है जो अन्धकार में मार्ग दिखाती है - उतना जितने की हमें उस समय आवश्यकता है। परमेश्वर के वचन में उसके बच्चों के लिए परमेश्वर के आश्वासन और प्रतिज्ञाएं हैं जो उन्हें जीवन की निराशा और कटुता के गढ़हों में गिरने से बचाते हैं। परमेश्वर ने कहा है कि वह ना हमें कभी छोड़ेगा और ना कभी हमें त्यागेगा (इब्रानियों १३:५)। उसका वचन हमें आश्वस्त करता है कि जो योजनाएं वह हमारे लिए बना रहा है वे हमारे लाभ ही की हैं जिससे हमें एक अच्छा भविष्य मिल सके (यर्मियाह २९:११)। उसका वायदा है कि जो परीक्षाएं हम पर आती हैं वे हमारे नुकसान के लिए नहीं वरन हमारी उन्नति के लिए हैं (याकूब १:२-४)।

   इसलिए यदि अगली बार जीवन की किसी कठिनाई और परीक्षा में आपको लगे कि आप अन्धेरे में चल रहे हैं तो अपनी ज्योति - परमेश्वर के वचन पर भरोसा रखिए; उस परिस्थिति के लिए वही आपका मार्गदर्शन करेगा, सही राह दिखाएगा। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के वचन की ज्योति में चलेंगे तो जीवन के मार्ग में ठोकर नहीं खाएंगे।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन ११९:१०५

बाइबल पाठ: भजन ११९:१०५-११२
Ps 119:105  तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।
Ps 119:106  मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा।
Ps 119:107  मैं अत्यन्त दु:ख में पड़ा हूं; हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे जिला।
Ps 119:108  हे यहोवा, मेरे वचनों को स्वेच्छाबलि जान कर ग्रहण कर, और अपने नियमों को मुझे सिखा।
Ps 119:109  मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।
Ps 119:110  दुष्टों ने मेरे लिये फन्दा लगाया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों के मार्ग से नहीं भटका।
Ps 119:111  मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण हैं।
Ps 119:112  मैं ने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूं।

एक साल में बाइबल: उत्पत्ति ४१-४२ मत्ती १२:१-२३

बुधवार, 16 जनवरी 2013

बच्चों की क्षमता


   संगीतज्ञ लुइस आर्मस्ट्रोंग अपने मुस्कुराते हुए चेहरे, खरखराती हुई आवाज़, सफेद रुमाल और ट्रम्पेट बजाने में प्रवीणता के लिए विख्यात था। परन्तु उसका बचपन दुख और कमी-घटी का था। शिशु अवस्था में ही वह अपने पिता द्वारा त्यागा गया था और १२ वर्ष कि आयु में ही उसे बच्चों के सुधार गृह में भेजना पड़ गया था। आश्चर्य की बात यह है कि यही बात उसके जीवन की दिशा को निर्धारित करने वाली बन गयी।

   संगीत शिक्षक पीटर डेविस उस सुधार गृह में नियमित रूप से जाया करते थे और बच्चों को संगीत वाद्य बजाना सिखाते थे। जल्द ही लुइस ने वहां बहुत अच्छे से कोर्नेट बजाने वाला बन गया और उसे उन बच्चों के बैण्ड का अगुवा बना दिया गया। वहां से उस के जीवन की दिशा ही बदल गई और वह विश्व-प्रसिद्ध ट्रम्पेट वादक और गायक बनने के मार्ग पर आ गया।

   लुइस की कहानी मसीही माता-पिता के लिए एक उदाहरण हो सकती है। परमेश्वर के वचन में नीतिवचन २२:६ में लिखा है: "लड़के को शिक्षा उसी मार्ग की दे जिस में उसको चलना चाहिये, और वह बुढ़ापे में भी उस से न हटेगा।" यह शिक्षा केवल नैतिक और आत्मिक बातों पर ही नहीं वरन जीवन के हर पहलु पर लागू होती है। साथ ही हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों की स्वाभाविक प्रतिभाएं उनकी रुचि और रुझान भी निर्धारित करते हैं; जैसे लुइस के जीवन में संगीत का थोड़ा सा प्रशिक्षण उसे प्रसिद्ध ट्रम्पेट वादक बनाने में सहायक हुआ।

   जब हम अपने बच्चों को सप्रेम परमेश्वर के वचन से सिखाते हैं और परमेश्वर द्वारा उन्हें दी गई प्रतिभाओं को उभारने और बढ़ाने में उनके सहायक होते हैं तो जो परमेश्वर ने उनके लिए निर्धारित किया है और उनके जीवनों से चाहता है उन्हें उस दिशा में अग्रसर करने और बच्चों की क्षमता का समूचा लाभ उन के जीवनों में पहुँचाने में अपना योगदान देते हैं। - डेनिस फिशर


बच्चों को बचपन से ही सही मार्गदर्शन दें और उनके जीवनों को समाज के लिए उपयोगी बनाएं।

लड़के को शिक्षा उसी मार्ग की दे जिस में उसको चलना चाहिये, और वह बुढ़ापे में भी उस से न हटेगा। - नीतिवचन २२:६

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस ३:१०-१७
2Tim 3:10  पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया।
2Tim 3:11 और ऐसे दुखों में भी जो अन्‍ताकिया और इकुनियुम और लुस्‍त्रा में मुझ पर पड़े थे और और दुखों में भी, जो मैं ने उठाए हैं; परन्तु प्रभु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया।
2Tim 3:12  पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे।
2Tim 3:13 और दुष्‍ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे।
2Tim 3:14  पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था
2Tim 3:15  और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।
2Tim 3:16  हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है।
2Tim 3:17  ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३९-४० 
  • मत्ती ११

मंगलवार, 15 जनवरी 2013

स्वतंत्र


   सैन फ्रांसिस्को के अल्काट्रैज़ टापू पर स्थित और अब बन्द कर दिए गए कैदखाने के भ्रमण से लौटने के बाद वहां की कुछ अविस्मरणीय यादें मेरे साथ रह गईं। जब हम नौका से वहां पहुंचे तो मैं जान सका कि क्यों उस अधिकतम सुरक्षा प्राप्त स्थान को "चट्टान" कह कर संबोधित किया जाता था।

   अन्दर भ्रमण करते समय, मैंने वहां के चर्चित "बड़े घर" के अन्दर रौशनी की किरणों को मोटी सलाखों लगी खिड़कियों से होकर आते हुए देखा। फिर एक के बाद एक कोठरियों की कतारों को देखा जिनमें कई कुख्यात अपराधी कैद रखे गए थे। लेकिन एक अन्य बात ने एक बहुत गहरी छाप मुझ पर छोड़ी - एक खाली कोठरी में प्रवेश करने पर मैंने वहां की एक दिवार पर लिखा हुआ देखा "यीशु" और एक अन्य कोठरी की ताक में एक बाइबल रखी हुई थी। इन दोनों बातों ने मुझसे शांत भाव से सबसे बड़ी स्वतंत्रता के बारे में बातें कीं।

   प्रेरित पौलुस भी, जब वह कैदखाने की कोठरी में पड़ा अपने मृत्यु दण्ड के पूरा किए जाने की प्रतीक्षा कर रहा था तो इस स्वतंत्रता के बारे में जानता था। अपने आप को "मसीह का कैदी" जानकर उसने अपने कैद के समय का उपयोग अन्य कैदियों तक पाप से अनन्त काल की क्षमा पाने तथा परमेश्वर के परिवार का सदस्य बनने और मसीह में स्वतंत्र होने के सुसमाचार को पहुंचाने के लिए बिताया।

   सलाखें लगे दरवाज़े और खिड़कियां एक प्रकार की कैद के प्रतीक हैं। शरीर में लकवे का रोगी होना, अपरिहार्य दरिद्रता, लंबे अर्से की बेरोज़गारी इत्यादि एक अन्य प्रकार की कैद के प्रतीक हैं। संभव है कि आप किसी अन्य प्रकार की कैद सहन कर रहे हों। इनमें से कोई भी कैद वांछनीय नहीं है - लेकिन जिसने मसीह के प्रेम और उससे मिलने वाली सामर्थ को जान लिया है वह मसीह का कैदी होने के बदले में मसीह के बिना स्वतंत्र रहने की कल्पना भी नहीं कर सकता क्योंकि मसीह की कैद ही जीवन की वास्तविक स्वतंत्रता है। - मार्ट डी हॉन


मसीह के नियंत्रण में रहना ही स्वतंत्रता में रहना है।

मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं। - फिलेमॉन १:१०

बाइबल पाठ: फिलेमॉन १:४-१६
Phlm 1:4  मैं तेरे उस प्रेम और विश्वास की चर्चा सुन कर, जो सब पवित्र लोगों के साथ और प्रभु यीशु पर है।
Phlm 1:5  सदा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं; और अपनी प्रार्थनाओं में भी तुझे स्मरण करता हूं।
Phlm 1:6  कि तेरा विश्वास में सहभागी होना तुम्हारी सारी भलाई की पहिचान में मसीह के लिये प्रभावशाली हो।
Phlm 1:7 क्योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्द और शान्‍ति मिली, इसलिये, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।
Phlm 1:8  इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं।
Phlm 1:9  तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं।
Phlm 1:10  मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं।
Phlm 1:11  वह तो पहिले तेरे कुछ काम का न था, पर अब तेरे और मेरे दोनों के बड़े काम का है।
Phlm 1:12  उसी को अर्थात जो मेरे हृदय का टुकड़ा है, मैं ने उसे तेरे पास लौटा दिया है।
Phlm 1:13  उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण है, मेरी सेवा करे।
Phlm 1:14  पर मैं ने तेरी इच्छा बिना कुछ भी करना न चाहा कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनन्द से हो।
Phlm 1:15  क्योंकि क्या जाने वह तुझ से कुछ दिन तक के लिये इसी कारण अलग हुआ कि सदैव तेरे निकट रहे।
Phlm 1:16  परन्तु अब से दास की नाईं नहीं, वरन दास से भी उत्तम, अर्थात भाई के समान रहे जो शरीर में भी और विशेष कर प्रभु में भी मेरा प्रिय हो।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३६-३८ 
  • मत्ती १०:२१-४२