ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 26 मई 2013

सांत्वना और विश्वास


   बात 1994 की है, हमें पता पड़ा कि अमेरिका की फुटबॉल टीम वर्ल्ड कप के खेल के लिए हमारे शहर मिशिगन में ही खेलने आ रही थी; अब हमें तो उसे देखने जाना ही था। खेल के दिन हमारा परिवार उस विशाल स्टेडियम में अमेरिका को स्विटज़रलैंड के विरुद्ध खेलते देखने गया; यह हमारे जीवनों की एक अविस्मर्णीय घटना थी। बस एक समस्या थी, हमारे चार बच्चों में से एक, 9 वर्षीय मेलिस्सा हमारे साथ नहीं जा सकी थी और उसकी कमी हमें खल रही थी; हमने खेल और उस माहौल का आनन्द तो लिया, किन्तु मेलिस्सा के बिना वह पूरा नहीं था।

   जब भी मैं उस दिन को याद करता हूँ, मुझे यह भी एहसास होता है कि जैसे उस दिन जीवन के आनन्द में एक कमी थी, आज भी वैसी ही कमी हमारे जीवनों में बनी हुई है, क्योंकि अब मेलिस्सा हमारे साथ नहीं है; उस खेल के 8 वर्ष पश्चात एक कार दुर्घटना में मेलिस्सा का देहांत हो गया। जब कभी परिवार के लोग किसी अवसर पर एकत्रित होते हैं मेलिस्सा की खाली कुर्सी हमारे जीवनों में उसके जाने से बने खाली स्थान को दिखाती है। सब प्रकार की शांति और दया के परमेश्वर (2 कुरिन्थियों 1:3) ने हमें भी अनुग्रह दिया कि हम उसकी कमी से उभर सकें, और आज भी हमारी उदासी के समय में हमें सांत्वना देता है, हमारे आँसू पोंछता है - जो उसके अपनी हर सन्तान से किए गए वायदे की पुष्टि है कि वह हर हमेशा हमारे प्रति विश्वासयोग्य है और हर परिस्थिति में हमें सांत्वना देगा। उसके इसी अनुग्रह और प्रेम ने हमें इस दुख का सामना करने और उस से उभरने की सामर्थ दी है। यही नहीं, अन्य अनेक परिस्थितियों में भी हमने अपने प्रेमी परमेश्वर पिता की निकटता और सांत्वना को अनुभव किया है।

   यदि आप का भी कोई प्रीय जाता रहा है या अन्य कोई भी दुख आप के जीवन में है तो बिना किसी हिचकिचाहट परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर आसरा लें, उससे उसकी सांत्वना को प्राप्त करें। अपने दुख से चिंतित ना हों, परमेश्वर के सामने अपने दुख को स्वीकार करने से हिचकिचाएं नहीं और ना ही लज्जाएं क्योंकि दुखी होना स्वाभाविक है और परमेश्वर इस बात को भली-भाँति जानता और समझता है। जैसे हम सांसारिक माता-पिता अपनी सन्तान को उनके दुख में उन्हें झिड़कते नहीं वरन अपनी गोद या आलिंगन में लेकर उन्हें भरसक सांत्वना देते हैं और दुख निवारण के उपाय करते हैं, हमारा परमेश्वर पिता भी हमसे वैसे ही प्रेम और सांत्वना का व्यवहार करता है - मैंने अपने व्यक्तिगत दुख के अनुभव से यह सीखा है।

   परिस्थिति कोई भी हो परमेशवर सदा विश्वासयोग्य है और उसकी सांत्वना सदा उपलब्ध है। - डेव ब्रैनन


पृथ्वी पर ऐसा कोई दुख नहीं है जिसका आभास स्वर्ग नहीं करता।

हंसी के समय भी मन उदास होता है, और आनन्द के अन्त में शोक होता है। - नीतिवचन 14:13 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:3-11
2 Corinthians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है।
2 Corinthians 1:4 वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।
2 Corinthians 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।
2 Corinthians 1:6 यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।
2 Corinthians 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।
2 Corinthians 1:8 हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।
2 Corinthians 1:9 वरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।
2 Corinthians 1:10 उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।
2 Corinthians 1:11 और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्यवाद करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 28-29 
  • यूहन्ना 9:24-41



शनिवार, 25 मई 2013

वास्तविक पुरस्कार


   मेरे बच्चों के जीवन पर मेरी पत्नि के गहरे प्रभाव से मैं बहुत प्रभावित हूँ। मातृत्व के समान शायद ही कोई अन्य जिम्मेदारी होगी जो बिना किसी शर्त या प्रतिफल की आशा रखे, सभी कष्ट सहते हुए भी इतनी लगन, धीरज और सहिष्णुता के साथ निर्वाह की माँग करती हो। मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से जानता हूँ कि मेरा चरित्र और मेरा मसीही विश्वास मेरी माँ के द्वारा ही स्थापित और स्वरूपित किया गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि यदि अच्छी माताएं और पत्नियाँ ना होतीं तो संसार में अच्छे इन्सान भी ना होते।

   इस बात से मुझे खेल इतिहास की एक मार्मिक घटना स्मरण आती है। सन 2010 की मास्टर्स गोल्फ टूर्नमेंट में फिल मिकल्सन गोल्फ के सबसे महत्वपूर्ण पुरस्कार को तीसरी बार जीतने के लिए खेल रहे थे, और उन्होंने वह स्पर्धा जीत भी ली। लेकिन उस जीत की जो याद मेरे मन में बस गई वह जीतने वाला शॉट लगाने के बाद आनन्द के साथ लगाई गई उनकी छलांग नहीं वरन तुरंत ही देखने वालों की भीड़ में उपस्थित उनका अपनी पत्नि के पास जाना और उसे देर तक अपने आलिंगन में लिए रखना था - उनकी पत्नि उस समय जानलेवा कैंसर से जूझ रही थीं। टेलिविज़न कैमरा द्वारा यह पल कैद कर लिया गया और कैमरे के माध्यम से हम फिल के गाल पर बहकर आए आँसू को भी देख सके।

   मसीही विश्वास में मसीह यीशु की कलीसिया अर्थात मण्डली को उसकी दुल्हन कह कर भी संबोधित किया गया है और पति-पत्नि के आपसी प्रेम और समर्पण के द्वारा मसीह यीशु के अपनी मण्डली के प्रति प्रेम को भी दर्शाया गया है। इसी संदर्भ में परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस की लिखी एक पत्री में कहा गया है: "हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम कर के अपने आप को उसके लिये दे दिया" (इफिसीयों 5:25)। हम पति-पत्नियों को आपस में ऐसे ही प्रेम को दिखाना है जैसा हमारे उद्धारकर्ता और प्रेमी प्रभु यीशु ने हमारे प्रति दिखाया है।

   पुरस्कार तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन वास्तविक पुरस्कार है वह प्रेम है जो हम एक दुसरे के प्रति ना केवल रखते हैं वरन प्रदर्शित करते हैं जैसे हमारे प्रभु यीशु ने हमारे प्रति रखा और प्रदर्शित किया। - जो स्टोवैल


जीवन जीते गए पुरस्कारों से नहीं जीते गए दिलों से बनता है।

हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम कर के अपने आप को उसके लिये दे दिया। - इफिसीयों 5:25

बाइबल पाठ: इफिसीयों 5:22-33
Ephesians 5:22 हे पत्‍नियों, अपने अपने पति के ऐसे आधीन रहो, जैसे प्रभु के।
Ephesians 5:23 क्योंकि पति पत्‍नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है; और आप ही देह का उद्धारकर्ता है।
Ephesians 5:24 पर जैसे कलीसिया मसीह के आधीन है, वैसे ही पत्‍नियां भी हर बात में अपने अपने पति के आधीन रहें।
Ephesians 5:25 हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम कर के अपने आप को उसके लिये दे दिया।
Ephesians 5:26 कि उसको वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध कर के पवित्र बनाए।
Ephesians 5:27 और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बना कर अपने पास खड़ी करे, जिस में न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्तु हो, वरन पवित्र और निर्दोष हो।
Ephesians 5:28 इसी प्रकार उचित है, कि पति अपनी अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखें। जो अपनी पत्‍नी से प्रेम रखता है, वह अपने आप से प्रेम रखता है।
Ephesians 5:29 क्योंकि किसी ने कभी अपने शरीर से बैर नहीं रखा वरन उसका पालन-पोषण करता है, जैसा मसीह भी कलीसिया के साथ करता है
Ephesians 5:30 इसलिये कि हम उस की देह के अंग हैं।
Ephesians 5:31 इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।
Ephesians 5:32 यह भेद तो बड़ा है; पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूं।
Ephesians 5:33 पर तुम में से हर एक अपनी पत्‍नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्‍नी भी अपने पति का भय माने।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 25-27 
  • यूहन्ना 9:1-23


शुक्रवार, 24 मई 2013

चिन्ता से मुक्त


   एक रेडियों साक्षात्कार में एक बास्केटबॉल के उत्कृष्ठ खिलाड़ी से निर्णायक और जटिल परिस्थितियों में उसकी खेल जिताने वाले अंक बना लेने के कौशल के बारे में प्रश्न किया गया। प्रश्नकर्ता ने उससे जानना चाहा कि इन तनावपूर्ण स्थितियों में वह अपने आप को शांत कैसे रखता है। उस खिलाड़ी का उत्तर था उस परिस्थिति को अपने लिए सरल बना लेने के द्वारा; वह अपने आप से कहता था कि बस एक यही शॉट ही तो खेलना है, केवल एक शॉट। वह ना तो अपनी टीम और ना ही अपने प्रशिक्षक की उससे लगी आशाओं के बारे में सोचता था, बस उस अवसर पर जो सामने है अपना पूरा ध्यान लगा देता था। जो सामने है, जो विद्यमान है बस उसी की ओर ध्यान लगाना उसके लिए स्थिति को सरल और तनावरहित कर देता था।

   इस प्रकार से केवल वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करके अपने लिए स्थिति को सरल करना कोई नई बात नहीं है। जीवन की जटिल और अभिभूत कर देने वाली समस्याओं पर विजयी होने के लिए प्रभु यीशु ने भी अपने चेलों को यही मार्ग दिया था। उन्हों ने चेलों को सिखाया कि भविष्य की चिन्ता छोड़कर केवल वर्तमान पर ध्यान लगाएं: "इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है" (मत्ती 6:31,34)। 

   चिन्ता की दुर्बल कर देने वाली सामर्थ पर विजयी होने के लिए प्रभु यीशु की यह शिक्षा थी। चिन्ता करने से हम कुछ सकारात्मक अर्जित नहीं कर पाते हैं; बस अपनी समस्याओं में विवश होकर डूबते चले जाने की भावना को बढ़ावा ही देते हैं। चिन्ता के फन्दे से बाहर निकलना है तो परमेश्वर पर भरोसा रखें; परमेश्वर के संसाधनों और आपूर्ति की क्षमता पर विश्वास रखें और समस्या को परमेश्वर के हाथों में समर्पित करें, उससे समस्या का सामना करने की सामर्थ और समझ माँगें और फिर समस्या को पूरा का पूरा अपने सामने रखने की बजाए, उसे उसके भागों में विभाजित करके बारी बारी एक एक भाग का हल परमेश्वर द्वारा दी गई सामर्थ और समझ के द्वारा निकालते जाएं। परमेश्वर पर भरोसा रखकर और उसके दिखाए मार्ग पर कदम कदम चलकर ही आप चिन्ता से मुक्त और जयवन्त जीवन व्यतीत कर सकते हैं। - बिल क्राउडर


भविष्य की चिन्ता वर्तमान के आनन्द को भी नष्ट कर देती है।

सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है। - मत्ती 6:34

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं?
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे?
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिएं।
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 22-24 
  • यूहन्ना 8:28-59



गुरुवार, 23 मई 2013

निर्भर


   हमारे परिवार में एक नए शिशु का आगमन हुआ और मैं उस शिशु और उस परिवार के लोगों के लिए आनन्दित तथा धन्यवादी थी। उस शिशु की देखभाल होते देख मुझे स्मरण हो आया कि नवजात शिशु की देखभाल करना कितनी लगन और मेहनत का कार्य है और एक माँ बिना अपनी कुछ भी परवाह किया कितने आनन्द के साथ उसकी देखभाल करती है, उसके लिए कष्ट उठाती रहती है। यह छोटी सी सृष्टि अपनी देखभाल ज़रा भी नहीं कर पाती और उसका पेट भरा रखने, उसे कपड़े पहनाए और गर्म रखने, उसकी साफ-सफाई करने आदि सभी कार्यों के लिए वह अपने आस-पास के व्यसक और अनुभवी लोगों पर पूर्णतया निर्भर है। यदि यह देखभाल उपलब्ध ना हो तो उसका जीवित रह पाना भी संभव नहीं होगा।

   कुछ यही दशा संसार में रहकर संसार को परमेश्वर के जीवन को दिखाने के लिए हम मसीही विश्वासीयों की भी है - परमेश्वर पिता पर पूरी तरह से निर्भर। हम उसी में जीवित रहते और चलते फिरते हैं (प्रेरितों 17:28); हमारा जीवन और हमारी हर श्वास उसी की दी हुई है (प्रेरितों 17:25); वह ही हमारी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है (फिलिप्पियों 4:19)। 

   हमें अपने स्वर्गीय प्रेमी पिता परमेश्वर कि आवश्यकता रहती है:
  • परेशानियों में शांति के लिए (यूहन्ना 16:33)
  • प्रेम के लिए (1 यूहन्ना 3:1)
  • आवश्यकताओं में सहायता के लिए (भजन 46:1; इब्रानियों 4:16)
  • परीक्षा और प्रलोभनों पर विजय के लिए (1 कुरिन्थियों 10:13)
  • अपराधों की क्षमा के लिए (1 यूहन्ना 1:9)
  • उद्देश्यों की पूर्ति के लिए (यर्मियाह 29:11)
  • अनन्त जीवन के लिए (यूहन्ना 10:28)


   बिना परमेश्वर की सहायता के हम कुछ नहीं कर सकते (यूहन्ना 15:5); उससे ही हमने बार बार अनुग्रह पर अनुग्रह प्राप्त किया है और करते रहते हैं (यूहन्ना 1:16)।

   यदि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार और परमेश्वर को भावता हुआ, उसे प्रसन्न करने वाला जीवन व्यतीत करना है तो कभी अपने या अपनी योग्यताओं और क्षमताओं, अपनी बल-बुद्धि-ज्ञान पर भरोसा ना करें। परमेश्वर पिता पर पूरी तरह से निर्भर और समर्पित रहें, और वह दिन प्रति दिन आपकी हर आवश्यकता को पूरा करता रहेगा, एक नवजात शिशु के समान आपको संभाले रहेगा, आपकी देख-भाल और सुरक्षा करता रहेगा और आपको अपने लिए उपयोगी तथा कार्यकारी बनाए रखेगा और इस पृथ्वी पर भी तथा अनन्त जीवन में भी अपनी आशीषों से परिपूर्ण करता रहेगा।  - ऐनी सेटास


परमेश्वर पर निर्भर रहना दुर्बलता नहीं वरन उसकी सामर्थ को अपने में प्रवाहित और कार्यकारी होने देने का माध्यम है।

न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। - प्रेरितों 17:25

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:24-3:3
1 John 2:24 जो कुछ तुम ने आरंभ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरंभ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे।
1 John 2:25 और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है।
1 John 2:26 मैं ने ये बातें तुम्हें उन के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं।
1 John 2:27 और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।
1 John 2:28 निदान, हे बालकों, उस में बने रहो; कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके साम्हने लज्ज़ित न हों।
1 John 2:29 यदि तुम जानते हो, कि वह धार्मिक है, तो यह भी जानते हो, कि जो कोई धर्म का काम करता है, वह उस से जन्मा है।
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 19-21 
  • यूहन्ना 8:1-27



बुधवार, 22 मई 2013

प्रेम


   मेरा एक मित्र एक छोटे से चर्च का पास्टर है जो पहाड़ों में एक छोटी से आबादी वाले बहुत सुन्दर इलाके में स्थित है। उस चर्च की भूमि में चर्च भवन के पीछे एक छोटी से नदी बहती है, साथ ही पेड़ों का एक झुरमुट है, घास का मैदान है और नदी के किनारे रेतीला सपाट स्थान है। इस कारण वहां की आबादी के लोगों के लिए पिकनिक मनाने का वह बहुत लोकप्रीय स्थान है, और चर्च के लोग भी उन्हें वहाँ आकर आनन्द मनाने से नहीं रोकते। एक दिन चर्च के लोगों में से एक ने चिंता व्यक्त करी कि क्योंकि वह पिकनिक स्थल चर्च के पीछे और चर्च की भूमि पर स्थित है, इसलिए यदि पिकनिक मनाने आए लोगों के साथ नदी में कोई दुर्घटना हो जाती है तो चर्च को उचित व्यवस्था ना करने और आवश्यक सहायता ना पहुँचा पाने का दोषी मानकर दण्डित किया जा सकता है। उसका उद्देश्य था कि लोगों को वहाँ आने से रोका जाए।

   चर्च के अगुवे इस संबंध में कोई कार्यवाही करने से संकोच कर रहे थे, लेकिन वह व्यक्ति विवश करता रहा, इसलिए अन्ततः निर्णय लिया गया कि वहाँ इस आशय की सूचना लगाई जाएगी कि यह सामन्य नहीं वरन एक निजि भूमि है और लोग बिना अनुमति प्रवेश ना करें। मेरा पास्टर मित्र इससे प्रसन्न नहीं था, लेकिन चर्च के संचालक अगुवों के ज़ोर देने पर सूचना लगाने को तैयार हो गया। अगली बार चर्च आने वाले लोगों ने वहाँ लिखा देखा: "सावधान! इस नदी के तट को प्रयोग करने वालों को चेतावनी दी जाती है कि किसी भी पल, बिना पूर्व-सूचना के आप अपने आप को आप से प्रेम करने वाले बहुत से लोगों से घिरा हुआ पा सकते हैं।" मैंने भी सूचना लगाए जाने के अगले ही सप्ताह इस सूचना को पढ़ा और मैं उसके इस विनोद से प्रभावित हुआ। मैंने कहा, "बिलकुल सही! एक बार फिर अनुग्रह कानून के ऊपर विजयी हुआ है।"

   अपने पड़ौसी के प्रति यह प्रेम, हमारे प्रति परमेश्वर द्वारा दिखाए गए प्रेम, अनुग्रह, दया, धैर्य और सहिष्णुता का ही प्रतिफल है। परमेश्वर के नियम नहीं परमेश्वर का प्रेम ही मनुष्यों को उसके प्रति आकर्षित करता है और उन्हें पापों के प्रति पश्चातापी होने तथा प्रभु यीशु मसीह में मिलने वाले उद्धार को ग्रहण करने के लिए उभारता है (रोमियों 2:4)। अपने जीवन से प्रभु यीशु मसीह का प्रेम प्रगट कीजिए, लोग स्वतः ही आकर्षित होंगे। - डेविड रोपर


प्रेम ही वह चुँबक है जो मसीही विश्वासियों को साथ जोड़ कर रखता है और लोगों को मसीही विश्वास की ओर आकर्षित करता है।

क्या तू उस की कृपा, और सहनशीलता, और धीरज रूपी धन को तुच्छ जानता है और क्या यह नहीं समझता, कि परमेश्वर की कृपा तुझे मन फिराव को सिखाती है? - रोमियों 2:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:14-18
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।
John 1:15 यूहन्ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्योंकि वह मुझ से पहिले था।
John 1:16 क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह।
John 1:17 इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची।
John 1:18 परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 16-18 
  • यूहन्ना 7:28-53



मंगलवार, 21 मई 2013

सदा जवान


   हाल ही में मैंने एक सुन्दर, सफेद बालों वाली वृद्ध महिला को देखा, उसकी टी-शर्ट पर लिखा था, "मैं 80 की नहीं, 18 की ही हूँ; साथ में बस 62 का अनुभव है।" समाचार पत्रों के निधन एवं शोक सूचनाओं में छपी तस्वीरें और उनके नीचे लिखे वाक्य भी कभी कभी रोचक होते हैं; वहाँ एक नौजवान फौजी के मुस्कुराते हुए चेहरे की तस्वीर के नीचे लिखा मिलेगा "उम्र 92 वर्ष; देश के लिए दूसरे विश्व युद्ध में भाग लिया"। या किसी चमकती हुई आंखों वाली नवयुवती की तस्वीर के नीचे लिखा होगा, "89 वर्ष की जवान; आर्थिक मन्दी के काल में पली-बड़ी हुई।" इन सभी सन्देशों का अर्थ स्पष्ट है - "हम सदा ही ऐसे नहीं थे; कभी हम भी जवान थे।"

   अकसर जो एक लंबा जीवन जी चुके होते हैं वे अपने आप को घर-परिवार तथा समाज में हाशिए पर रखा हुआ अनुभव करते हैं, मानो कि अब उनका समय बीत गया है, उनकी उपयोगिता समाप्त हो गई है और अब बस समय पूरा होने का ही इंतिज़ार है। लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें इससे अलग ही दृष्टिकोण देती है। भजन 92 हमें बताता है कि हम चाहे उम्र में कितने भी वृद्ध हों लेकिन हम फिर भी नए फलों से लदे जीवन व्यतीत कर सकते हैं। परमेश्वर के विश्वासी, सदा उपजाऊ रहने वाली तथा भली भांति सींची हुई भूमि के बगीचे में रोपे गए वृक्ष अर्थात परमेश्वर की संगति में रोपे गए हैं और "वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे" (भजन 92:14)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वायदा किया कि "मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है..." (यूहन्ना 15:5)।

   हाँ, एक अवस्था में आकर माँसपेशियाँ दुखने लगती हैं, जोड़ों में दर्द रहने लगता है, जीवन की गति कुछ शिथिल पड़ जाती है, लेकिन हर मसीही विश्वासी को परमेश्वर का यह आश्वासन है: "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है" (2 कुरिन्थियों 4:16)। यदि हम परमेश्वर की संगति में बने रहे हैं तो हमारी शारीरिक अवस्था चाहे कितनी भी क्यों ना हो जाए, हम मन से सदा ’जवानी और उसके साथ कुछ वर्षों के अनुभव वाल’ ही रह सकते हैं; ऐसे अनुभव जो बहुमूल्य हैं, परमेश्वर की संगति से मिले हैं और हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी हैं तथा जिनकी उपयोगिता हमें जवानों के समान ही उपयोगी और फलवन्त बनाए रखती है। - सिंडी हैस कैस्पर


विश्वासयोग्यता परमेश्वर की माँग है; फलवन्त जीवन उसका पुरुस्कार।

वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे - भजन 92:14

बाइबल पाठ: भजन 92
Psalms 92:1 यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;
Psalms 92:2 प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,
Psalms 92:3 दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।
Psalms 92:4 क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।
Psalms 92:5 हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं!
Psalms 92:6 पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:
Psalms 92:7 कि दुष्ट जो घास की नाईं फूलते-फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं,
Psalms 92:8 परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा।
Psalms 92:9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तितर बितर होंगे।
Psalms 92:10 परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं।
Psalms 92:11 और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं।
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे।
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 13-15 
  • यूहन्ना 7:1-27


सोमवार, 20 मई 2013

नम्रता से ग्रहण करो


   परमेश्वर के वचन बाइबल के अपने अध्ययन में, याकूब की पत्री के पहले अध्याय को पढ़ते हुए, वहाँ लिखित एक वाक्याँश को पढ़कर मैं चौंक गया; जिस पद पर मैं पहुँचा था वह था: "इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है" (याकूब 1:21) और वाक्याँश था "उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है"। तुरंत मुझे वह निर्णय स्मरण हो आया जिस से मैं जूझ रहा था, और साथ ही यह विचार भी कि, "मुझे इस निर्णय के लिए कोई अन्य पुस्तक पढ़ने, किसी गोष्ठी या परिसंवाद में भाग लेकर सीखने, या किसी मित्र से परामर्श करने की आवश्यकता नहीं है। मुझे केवल वह करना है जो बाइबल मुझे इस विषय के बारे में सिखाती है।" याकूब ने प्रभु यीशु के अनुयायियों को लिखी इस पत्री में आगे यह भी लिखा: "परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं" (याकूब 1:22) और मैंने एहसास किया कि मेरा परमेश्वर के वचन को और अधिक तथा और गहराई से सीखने के प्रयास ही मेरे लिए परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं की उपेक्षा के कारण बन गए थे; मैं उस जीवित वचन को मानने वाला बनने की बजाए केवल सीखने वाला ही बन कर रह गया था।

   बाइबल विद्वान डब्ल्यु. ई. वाईन ने, जो बाइबल में प्रयुक्त मूल यूनानी भाषा के शब्दों के अर्थों को समझाने के लिए विख्यात हैं, इन पदों में प्रयुक्त शब्द जिसका अनुवाद "ग्रहण करो" हुआ है, के बारे में लिखा है कि मूल भाषा में इस शब्द का तात्पर्य है, "भली-भांति जानते, विचारते और पूर्ण सहमति के साथ प्रदान की हुई वस्तु को ग्रहण करो या स्वीकार करो" और इस पद में याकूब इस सब के साथ एक सदगुण और जोड़ रहा है - नम्रता। एक नम्र मन परमेश्वर के साथ विवाद नहीं करता, ना ही उससे कोई झगड़ा करता है, वरन समर्पण के साथ उसकी सहर्ष मान लेता है। याकूब के कहने का तात्पर्य यह बना कि "अपने प्रति परमेश्वर की बातों और कार्यों का किसी रीति से कोई प्रतिरोध नहीं करो वरन उन्हें सहर्ष मान लो, स्वीकार कर लो क्योंकि परमेश्वर हर बात में हमारा भला ही चाहता है और हमारे लिए वही करता है जो हमारे लिए सर्वोत्तम है।"

   परमेश्वर अपना सामर्थी वचन हमारे हृदयों में इसलिए बोता है जिससे कि वह वचन हमारे लिए आत्मिक समझ-बूझ और सामर्थ का विश्वासयोग्य और बहुमूल्य स्त्रोत बन कर हमारा मार्गदर्शन करे। परमेश्वर के वचन की यह आशीष हमें तब प्राप्त होती है जब हम उसे नम्रता से ग्रहण करते और आदर से उसका पालन करते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


अपनी बाइबल प्रार्थनापूर्वक खोलें, ध्यान लगाकर उसे पढ़ें और आनन्द के साथ उसका पालन करें।

इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। - याकूब 1:21

बाइबल पाठ: याकूब 1:13-22
James 1:13 जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है।
James 1:14 परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है।
James 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।
James 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।
James 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।
James 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 10-12 
  • यूहन्ना 6:45-71