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शुक्रवार, 28 जून 2013

दृष्टिकोण

   विश्व के दो महाशक्तियों अमेरिका और उसके साथी देश, तथा रूस और उसके साथी देशों के बीच 1947 से 1991 तक एक लंबा शीत युद्ध चला जिसमें दोनों ही एक दूसरे से बढ़कर सैन्य क्षमता रखने वाले और एक दूसरे से बलवन्त रहने के प्रयास में लगे रहे। एक दूसरे पर शीर्षता पाने के लिए विकसित किए जाने वाले उनके हथियारों में प्रमुख स्थान था परमाणु हथियारों का। इस होड़ के दौरान प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक एल्बर्ट आईन्सटाइन ने एक बहुत अर्थपूर्ण बात कही जो आज तक भी बहुत प्रसिद्ध और उद्धरित होने वाली बात रही है; उन्होंने कहा, "मैं यह तो नहीं जानता कि तीसरा विश्वयुद्ध किस प्रकार के हथियारों से लड़ा जाएगा, लेकिन चौथा विश्वयुद्ध अवश्य ही लाठियों और पत्थरों से लड़ा जाएगा।" आईन्स्टाइन के लिए परमाणु हथियारों से युद्ध लड़े जाने के परिणामों का यह एक स्पष्ट भावी दृष्टिकोण का क्षण था। वह भलि-भाँति यह समझ सके कि चाहे परमाणु युद्ध लड़ने के कारण कोई भी हों, परिणाम संसार भर के लिए अति भीष्ण और अति विध्वंसकारी होंगे।

   दुर्भाग्यवश हम साधारणतया इतने स्पष्ट भावी दृष्टिकोण के साथ आते समय और परिणामों की ओर नहीं देखते। कभी कभी हमारे द्वारा किए गए चुनाव और निर्णयों के संभावित परिणाम आंकना कठिन होता है, और कभी कभी हम केवल अपने वर्तमान के बारे में ही सोच रहे होते हैं ना कि दूरगामी परिणामों के बारे में।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक महानायक मूसा के विषय में इब्रानियों 11:24-26 में लिखी बात दिखाती है कि मूसा ने अपने निर्णय के लिए भावी दृष्टिकोण रखा और होने वाले संभावित परिणामों को ध्यान में रखते हुए अपने जीवन के लिए निर्णय लिया: "विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया। इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा। और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिसर के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं" (इब्रानियों 11:24-26)।

   मूसा के लिए यह चुनाव सरल नहीं था लेकिन वह अपने उस चुनाव की खराई और सार्थकता को पहचान सका और इसीलिए उसने आते अनन्त समय के सुखद प्रतिफलों के लिए वर्तमान में दुख उठाना अधिक भला समझा। उसके भावी दृष्टिकोण ने ही उसे वर्तमान के कष्ट सहने में सहायता करी। क्या आज हम जो मसीही विश्वासी कहलाते हैं, मूसा के समान ऐसा ही भावी दृष्टिकोण रखते हुए, मसीह यीशु के लिए निंदित होने के लिए तैयार हैं? क्या परमेश्वर के साथ बिताए जाने वाले उस आते जीवन के अनन्त सुख के लिए हम वर्तमान जीवन में मसीह यीशु के कष्टों में संभागी होने के लिए सहमत हैं? पौलुस प्रेरित ने रोम के विश्वासीयों को लिखी अपनी पत्री में स्पष्ट लिखा है "... जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं" (रोमियों 8:17)।

   आज आपका दृष्टिकोण और चुनाव क्या है? - बिल क्राऊडर


यदि हम हर बात के लिए मसीह यीशु पर निर्भर रहेंगे तो हर बात को सहने की सामर्थ भी पाते रहेंगे।

यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी। - 2 तिमुथियुस 2:11

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:23-31
Hebrews 11:23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उसको, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।
Hebrews 11:24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया।
Hebrews 11:25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा।
Hebrews 11:26 और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिसर के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं।
Hebrews 11:27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिसर को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा।
Hebrews 11:28 विश्वास ही से उसने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
Hebrews 11:29 विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।
Hebrews 11:30 विश्वास ही से यरीहो की शहरपनाह, जब सात दिन तक उसका चक्कर लगा चुके तो वह गिर पड़ी।
Hebrews 11:31 विश्वास ही से राहाब वेश्या आज्ञा ने मानने वालों के साथ नाश नहीं हुई; इसलिये कि उसने भेदियों को कुशल से रखा था।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 11-13 
  • प्रेरितों 9:1-21


गुरुवार, 27 जून 2013

उपनाम

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी पत्री में एक नाम आता है "इपफ्रदीतुस"। इपफ्रदीतुस एक युनानी व्यक्ति था जिसने मसीही विश्वास को अपनाया था और मसीह यीशु का अनुयायी हो गया था। वह पौलुस का भी एक निकट सहयोगी था और मसीही प्रचार के लिए करी गई पौलुस की यात्राओं में उसने पौलुस की बहुत अच्छी सेवा करी थी। इस पत्री में पौलुस अपने इस मित्र के लिए कुछ उपनाम प्रयुक्त करता है: "पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा" (फिलिप्पियों 2:25)।

   पौलुस के लिए इपफ्रदीतुस आत्मिक रीति से एक भाई, एक विश्वासयोग्य सहकर्मी, मसीही विश्वास के प्रचार में एक कर्मठ संगी योद्धा और पौलुस द्वारा फिलिप्पियों की मण्डली को लिखी इस प्रेर्णादायक पत्री का पत्रवाहक था। इपफ्रदीतुस का जीवन भाईचारे, निष्ठा, आत्मिक सहनशक्ति और सेवाभाव का नमूना था। इपफ्रदीतुस वास्तव में एक सम्मान योग्य व्यक्तित्व था जिसने अपने जीवन से प्रगट रूप में जी कर दिखाया कि अब वह किसी काल्पनिक देवी-देवता पर नहीं वरन जीवते और सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखता था और उसके लिए जीवन जीता था। पौलुस प्रेरित द्वारा रोम के मसीही विश्वासीयों को लिखी पत्री के अन्त में हम एक लंबी सूची पाते हैं उन लोगों की जिन्होंने पौलुस के साथ मसीही सेवकाई में कार्य किया और सहयोग दिया (रोमियों 16)। पौलुस उन सब के नाम के साथ उनके कार्य तथा सहयोग के अनुरूप कुछ उपनाम जोड़ देता है, जो आज भी हमें उन लोगों के मसीही सेवकाई के कार्यों के बारे में बताते हैं।

   हम मसीही विश्वासीयों के लिए हमारे नाम से भी अधिक हमारे वे मसीही विश्वास संबंधित गुण हैं जो हम अपने आस-पास के लोगों और समाज के सामने प्रदर्शित करते हैं, जैसे विश्वासयोग्य, ध्यान रखने और देखभाल करने वाले, प्रोत्साहित करने और उभारने वाले, सदबुद्धि से कार्य करने वाले इत्यादि। आज यदि आपके नाम के साथ, आपके व्यावाहरिक मसीही विश्वास को दिखाने के लिए कोई उपनाम लगाए, तो वह उपनाम क्या होगा? वह उपनाम आपके लिए सम्मान का कारण होगा या शर्मिंदगी का? - डेनिस फिशर


यदि हम अपने चरित्र का ध्यान रखें तो हमारी ख्याति स्वतः ही बन जाएगी।

पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा। - फिलिप्पियों 2:25

बाइबल पाठ: रोमियों 16:1-15
Romans 16:1 मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
Romans 16:2 कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उसको तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।
Romans 16:3 प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार।
Romans 16:4 उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं।
Romans 16:5 और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार।
Romans 16:6 मरियम को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार।
Romans 16:7 ​अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार।
Romans 16:8 अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्कार।
Romans 16:9 उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार।
Romans 16:10 अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्कार। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार।
Romans 16:11 मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्कार। नरकिस्सुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्कार।
Romans 16:12 त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्कार। प्रिया परसिस को जिसने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्कार।
Romans 16:13 रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्कार।
Romans 16:14 असुंक्रितुस और फिलगोन और हिर्मास ओर पत्रुबास और हर्मेस और उन के साथ के भाइयों को नमस्कार।
Romans 16:15 फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उस की बहिन, और उलुम्पास और उन के साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्कार।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 8-10 
  • प्रेरितों 8:26-40


बुधवार, 26 जून 2013

विश्राम स्थान

   मैं कुछ लोगों के साथ एक समूह में व्यायाम करने जाया करती थी। मेरे लिए उस व्यायाम सत्र का सबसे आकर्षक भाग होता था सत्र के अन्तिम पाँच मिनिट; उन पाँच मिनिटों में हम चटाई पर सुस्ताने के लिए अपनी पीठ के बल लेट जाते थे और रौशनी धीमी कर दी जाती थी जिससे हम विश्राम कर सकें। ऐसे ही एक सत्र के अन्त में, उस विश्राम समय के दौरान हमारे प्रशिक्षक ने धीमी आवाज़ में एक बहुत गंभीर बात कही, "कोई ऐसा अन्तःस्थान भी ढूंढें जहाँ आप विश्राम के लिए छुप सकें।"

   मैं अपने प्रशिक्षक की बात पर विचार करने लगी और क्लेलैण्ड बी० मैकैफी द्वारा लिखित भजन "Near to the Heart of God" (परमेश्वर के हृदय के निकट) के बोल मुझे स्मरण हो आए:
एक शांत विश्राम का स्थान है, 
परमेश्वर के हृदय के निकट, 
एक ऐसा स्थान जहाँ पाप परेशान नहीं कर सकता, 
परमेश्वर के हृदय के निकट, 
हे यीशु महान मुक्तिदाता, 
परमेश्वर के हृद्य से भेजे गए, 
हमें जो तेरे सम्मुख ठहरे हुए हैं थाम कर रख, 
परमेश्वर के हृदय के निकट.

   यह भजन क्लेलैण्ड बी० मैकैफी ने 1901 में अपने भाई और उसके परिवार के लिए परमेश्वर में आशा बनाए रखने तथा परमेश्वर की देखभाल के प्रति आश्वस्त रहने के लिए लिखा था। उस समय भजन लेखक की दो भतीजीयों की डिप्थीरीया रोग से मृत्यु हो गई थी, और रोग को संक्रमण द्वारा फैलने से रोकने के लिए उस परिवार और घर को संगरोधित कर दिया गया था जिससे कोई वहाँ से निश्चित समय तक अन्दर या बाहर नहीं हो सकता था। ऐसे में उसके चर्च के लोगों ने इस भजन को उसके भाई के घर के बाहर खड़े होकर उनके लिए गाया था।

   प्रेरित पौलुस बताता है कि परमेश्वर का हृद्य हमारे प्रति प्रेम से परिपूर्ण है (रोमियों 8:31-39); और कुछ भी - क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार, या मृत्यु, या स्वर्गदूत, या प्रधानताएं, या अधिकार, या ऊँचाई, या गहराई - हमें परमेश्वर के प्रेम से अलग कर सकती है; "... यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?" (रोमियों 8:31)

   हमारे कष्ट या चिंताएं कुछ भी हों, परमेश्वर का हृदय ही हमारे लिए वह विश्राम का स्थान है जहाँ हम कभी भी, हर हाल तथा परिस्थिति में प्रवेश करके शांति और विश्राम पा सकते हैं। इसीलिए प्रेरित पतरस ने अपनी पत्री में लिखा है: "और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है (1 पतरस 5:7)। - ऐने सेटास


जब आप जीवन के संघर्षों में थक जाएं तो परमेश्वर के हृद्य में अपना विश्राम पाएं

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28 

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-39
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 5-7 
  • प्रेरितों 8:1-25


मंगलवार, 25 जून 2013

पुनःआँकलन

   मैं अपने मित्र के साथ उसकी कार में एक लंबी सड़क यात्रा पर निकला था। प्रतिदिन की अपनी यात्रा को तय करने के लिए हम उसके जी०पी०एस० अर्थात मार्ग और दिशा निर्देश देने वाले यन्त्र की सहायता लेते रहते थे। जब हम किसी बस्ती या शहर में से होकर निकलते तो उस यन्त्र से एक आवाज़ हमें बताती कि हमें कौन सी सड़क लेनी है और कौन से मोड़ पर मुड़ना है। यदि हम उस यन्त्र द्वारा बताए गए मार्ग से हटकर किसी अन्य मार्ग पर हो लेते, जानबूझकर अथवा गलती से, तो वह आवाज़ कहती, "पुनःआँकलन किया जा रहा है" और फिर हमारी वर्तमान स्थिति से गन्तव्य स्थान के लिए मार्ग का पुनःआँकलन करके वह आवाज़ हमें फिर से सही मार्ग पर आने के निर्देश देना आरंभ कर देती।

   जीवन यात्रा में प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए परमेश्वर का वचन बाइबल भी ऐसा ही मार्ग तथा दिशा निर्देशक यन्त्र है। प्रेरित पौलुस द्वारा तिमुथियुस को लिखी अपनी दूसरी पत्री में पौलुस ने तिमुथियुस को समझाया: "हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है" (2 तिमुथियुस 3:16)। मार्गदर्शन तथा दिशा निर्देशन से संबंधित परमेश्वर के वचन की चार योग्यताएं पौलुस ने यहाँ गिनाई हैं:
  • उपदेश - अर्थात वह निर्धारित मार्ग जिस पर हमें चलना है।
  • समझाना - अर्थात मार्ग से भटक जाने पर मिलने वाली सूचना और संबंधित सलाह।
  • सुधारना - अर्थात सही मार्ग पर लौट आने के निर्देश।
  • धर्म की शिक्षा - अर्थात सही मार्ग पर बने रहने से संबंधित शिक्षाएं।

   हमें परमेश्वर के मार्ग से दूर ले जाने वाली हमारी गलतियों या चुनावों को हमें हलके में नहीं लेना चाहिए, वरन गंभीरता पूर्वक उन पर विचार करके उन्हें फिर से ना दोहराने के सार्थक प्रयास करने चाहिएं। गलती सामान्यतः अन्तिम नहीं होती और निर्णय भी बदले जा सकते हैं, इसलिए परमेश्वर के पवित्र आत्मा की आवाज़ के प्रति, जो परमेश्वर की ओर से प्रत्येक नया जन्म पाए मसीही विश्वासी को दिया गया है, हमें संवेदनशील रहना चाहिए क्योंकि सही मार्ग से भटकते ही वह हमें बताना आरंभ कर देता है कि हम पथ से हट गए हैं और हमारे लिए वहाँ से सही मार्ग पर लौटने के मार्ग का पुनःआँकलन करके उसके बारे में हमें बताने लगता है।

   क्या आप परमेश्वर द्वारा दिए गए सही मार्ग पर चल रहे हैं? कहीं परमेश्वर किसी रीति से आपका ध्यान अपनी ओर खींच कर आपकी गलती के बारे में आपको बताने के प्रयास तो नहीं कर रहा? आज कहीं आप अपने आप को परमेश्वर के मार्ग से भटका हुआ और सही मार्ग तो खोजते हुए तो नहीं पाते? परमेश्वर और उसके वचन बाइबल की ओर लौट आईए, उसने आपके लिए लौटने के मार्ग का पुनःआँकलन कर रखा है; आपको बस उसके निर्देशों का पालन मात्र ही करना है। - डेविड मैक्कैसलैंड


सही दिशा में बढ़ने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्देशों का पालन करते रहिए।

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। - इब्रानियों 4:12 

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 3:10-17
2 Timothy 3:10 पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया।
2 Timothy 3:11 और ऐसे दुखों में भी जो अन्‍ताकिया और इकुनियुम और लुस्‍त्रा में मुझ पर पड़े थे और और दुखों में भी, जो मैं ने उठाए हैं; परन्तु प्रभु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया।
2 Timothy 3:12 पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे।
2 Timothy 3:13 और दुष्‍ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे।
2 Timothy 3:14 पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था
2 Timothy 3:15 और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।
2 Timothy 3:16 हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है।
2 Timothy 3:17 ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 3-4 
  • प्रेरितों 7:44-60


सोमवार, 24 जून 2013

प्रेम का कारण

   एक दिन मेरा तीन वर्षीय बेटा अचानक ही बोल उठा, "माँ मैं आपसे बहुत प्रेम करता हूँ।" मुझे सुनकर अच्छा तो लगा लेकिन साथ ही जानने का कौतहूल भी हुआ कि एक तीन वर्षीय बालक को ऐसा क्या अच्छा लगता है जिसके कारण उसने यह भाव व्यक्त किया। जानने के लिए मैंने अपने बेटे से पूछा कि वह क्यों मुझसे प्रेम करता है, तो तुरंत ही बड़े स्वाभाविक भाव से उसने उत्तर दिया, "क्योंकि आप मेरे साथ खेलते हो!" कारण सुनकर मुझे थोड़ी सी निराशा हुई इसलिए मैंने फिर पूछा, "बस इसी कारण या और कुछ भी है?" उसी साधारण और उनमुक्त भाव से वह बोला, "नहीं, बस इतना ही।" उसका यह उत्तर सुनकर मैं मुस्कुराई तो सही, लेकिन मुझे परमेश्वर के साथ अपने संबंध का भी ध्यान आया। क्या परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम का कारण केवल मुझे भली लगने वाली वे बातें हैं जो परमेश्वर मेरे लिए करता है? यदि मेरी मनपसन्द बातें कल ना हों तब मेरा प्रेम परमेश्वर के प्रति कैसा होगा?

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक अय्युब को ऐसी ही परीक्षा से निकलना पड़ा। अय्युब एक बहुत ही धर्मी और परमेश्वर का भय मानने वाला और बहुत धनी व्यक्ति था। अचानक ही उसका परिवार, मकान, संपत्ति और स्वास्थ्य, सब शैतान द्वारा बरबाद कर दिए गए, और उसकी पत्नि ने उसकी दयनीय दशा देखकर सलाह दी: "तब उसकी स्त्री उस से कहने लगी, क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा" (अय्युब 2:9 )। लेकिन अय्युब का अपनी पत्नि को प्रत्युत्तर था: "उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया" (अय्युब 2:10)। उसके साथ सांत्वना दिखाने आए उसके मित्र भी उसी पर दोषारोपण करने लगे कि अवश्य ही उसके जीवन में कुछ पाप होगा जिसके कारण उसे यह सब भोगना पड़ रहा है; अय्युब स्वयं भी परमेश्वर से प्रश्न करता रहा कि क्यों उसे यह सब सहना पड़ रहा है, लेकिन उसने परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास को नहीं छोड़ा और उसके प्रति आशावान रहा। अन्ततः परमेश्वर से उसने केवल जितना उसने गंवाया था उससे दोगुनी आशीष ही नहीं पाई वरन परमेश्वर के नए और गहरे दर्शन तथा समझ-बूझ भी प्राप्त करी।

   अय्युब का परमेश्वर के प्रति प्रेम और श्रद्धा का कारण उसके जीवन की खुशहाली या समस्याओं का समाधान नहीं था वरन वह परमेश्वर से परमेश्वर के व्यक्तित्व और जो कुछ वह है और करता है के कारण प्रेम करता था। परमेश्वर के प्रति अय्युब का दृष्टिकोण था "वह बुद्धिमान और अति सामथीं है: उसके विरोध में हठ कर के कौन कभी प्रबल हुआ है?" (अय्युब 9:4)

   क्या आज परमेश्वर के प्रति आपका भी अय्युब के समान ही दृष्टिकोण है? विचार कीजिए कि परमेश्वर के प्रति आपके प्रेम का कारण क्या है? यदि आप किसी परेशानी में पड़ जाएं और आपकी सुख समृद्धि जाती रहे तो क्या आप फिर भी परमेश्वर से वैसा ही प्रेम बनाए रखेंगे? - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर के व्यक्तित्व और चरित्र पर ध्यान केंद्रित रखने से हम परिस्थितियों से ध्यान हटाए रहते हैं।

उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया। - अय्युब 2:10

बाइबल पाठ: अय्युब 2
Job 2:1 फिर एक और दिन यहोवा परमेश्वर के पुत्र उसके साम्हने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी उसके साम्हने उपस्थित हुआ।
Job 2:2 यहोवा ने शैतान से पूछा, तू कहां से आता है? शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, कि इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।
Job 2:3 यहोवा ने शैतान से पूछा, क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है कि पृथ्वी पर उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय मानने वाला और बुराई से दूर रहने वाला मनुष्य और कोई नहीं है? और यद्यापि तू ने मुझे उसको बिना कारण सत्यानाश करने को उभारा, तौभी वह अब तक अपनी खराई पर बना है।
Job 2:4 शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, खाल के बदले खाल, परन्तु प्राण के बदले मनुष्य अपना सब कुछ दे देता है।
Job 2:5 सो केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हड्डियां और मांस छू, तब वह तेरे मुंह पर तेरी निन्दा करेगा।
Job 2:6 यहोवा ने शैतान से कहा, सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।
Job 2:7 तब शैतान यहोवा के साम्हने से निकला, और अय्यूब को पांव के तलवे से ले सिर की चोटी तक बड़े बड़े फोड़ों से पीड़ित किया।
Job 2:8 तब अय्यूब खुजलाने के लिये एक ठीकरा ले कर राख पर बैठ गया।
Job 2:9 तब उसकी स्त्री उस से कहने लगी, क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा।
Job 2:10 उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया।
Job 2:11 जब तेमानी एलीपज, और शूही बिलदद, और नामाती सोपर, अय्यूब के इन तीन मित्रों ने इस सब विपत्ति का समाचार पाया जो उस पर पड़ी थीं, तब वे आपस में यह ठान कर कि हम अय्यूब के पास जा कर उसके संग विलाप करेंगे, और उसको शान्ति देंगे, अपने अपने यहां से उसके पास चले।
Job 2:12 जब उन्होंने दूर से आंख उठा कर अय्यूब को देखा और उसे न चीन्ह सके, तब चिल्लाकर रो उठे; और अपना अपना बागा फाड़ा, और आकाश की ओर धूलि उड़ाकर अपने अपने सिर पर डाली।
Job 2:13 तब वे सात दिन और सात रात उसके संग भूमि पर बैठे रहे, परन्तु उसका दु:ख बहुत ही बड़ा जान कर किसी ने उस से एक भी बात न कही।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 1-2 
  • प्रेरितों 7:22-43


रविवार, 23 जून 2013

भिन्न

   स्वर्ग के जिस राज्य की स्थापना के लिए प्रभु यीशु इस धरती पर आए थे उसकी मान्यताएं और मूल्य उनके आगमन के समय भी और आज भी संसार में प्रचलित मूल्यों से बहुत भिन्न और विलक्षण हैं। प्रभु यीशु के पृथ्वी पर रहने के दिनों में धर्म के अगुवे और शिक्षक लोगों की भीड़, उस भीड़ द्वारा आदर और अभिवादन, तथा अपने आप को ऊँचा दिखाना बहुत पसन्द करते थे; और आज भी यही प्रवृति देखने को मिलती है।

   प्रभु यीशु ने एक नीतिकथा द्वारा अपने शिष्यों को इस प्रवृति से बच कर रहने को समझाया; यह नीतिकथा परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 14 में मिलती है। इस नीतिकथा में कुछ लोगों के बारे में उल्लेख है जो एक विवाह के भोज में आमंत्रित थे और वहाँ पर उन्होंने अपने लिए सबसे सम्मानित स्थान चुन लिए। लेकिन जब भोज का मेज़बान उन स्थानों पर बैठाने के लिए उन लोगों को लाया जिनके लिए वे स्थान तैयार किए गए थे और इन लोगों से स्थान खाली करने को कहा, तो इन्हें बड़ी शर्मिंदगी के साथ उठकर पीछे के नीचे स्थानों पर जाना पड़ा। साथ ही प्रभु यीशु ने शिष्यों को यह भी समझाया कि उन्हें अपनी दावत में कैसे लोगों को आमंत्रित करना चाहिए और क्यों: "परन्तु जब तू भोज करे, तो कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को बुला। तब तू धन्य होगा, क्योंकि उन के पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इस का प्रतिफल मिलेगा" (लूका 14:13-14)।

   क्या आप इस बात से निराश हैं कि समाज, पड़ौसियों और चर्च में आपको ऊँचा दर्जा नहीं दिया जाता है? क्या आप इस बात को लेकर कुँठित हैं कि आपकी योग्यता और स्थान की सही पहचान नहीं हुई है और आपको वह स्थान नहीं मिल रहा है जिसके योग्य आप अपने आप को समझते हैं? ज़रा प्रभु यीशु की बात पर ध्यान दीजिए: "जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा" (लूका 14:11)।

   परमेश्वर के राज्य का यह एक वह भिन्न मूल्य है जो संसार में आपको कहीं नहीं मिलेगा - यदि परमेश्वर से आदर और उसके द्वारा उन्नत स्थान चाहते हैं तो संसार में अपने आप को दीन और नम्र कर दें तथा संसार और संसार के लोगों से कुछ भी आशा ना रखें। परमेश्वर की नज़रों में दीन बनें और उचित समय तथा परिस्थिति के द्वारा वह आपको संसार में भी आदरणीय बना देगा। - डेव एगनर


मसीह यीशु के राज्य में दीनता सदा ही घमण्ड पर विजयी रही है और रहती है।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब 4:10 

बाइबल पाठ: लूका 14:7-14
Luke 14:7 जब उसने देखा, कि नेवताहारी लोग क्योंकर मुख्य मुख्य जगहें चुन लेते हैं तो एक दृष्‍टान्‍त देकर उन से कहा।
Luke 14:8 जब कोई तुझे ब्याह में बुलाए, तो मुख्य जगह में न बैठना, कहीं ऐसा न हो, कि उसने तुझ से भी किसी बड़े को नेवता दिया हो।
Luke 14:9 और जिसने तुझे और उसे दोनों को नेवता दिया है: आकर तुझ से कहे, कि इस को जगह दे, और तब तुझे लज्ज़ित हो कर सब से नीची जगह में बैठना पड़े।
Luke 14:10 पर जब तू बुलाया जाए, तो सब से नीची जगह जा बैठ, कि जब वह, जिसने तुझे नेवता दिया है आए, तो तुझ से कहे कि हे मित्र, आगे बढ़कर बैठ; तब तेरे साथ बैठने वालों के साम्हने तेरी बड़ाई होगी।
Luke 14:11 और जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।
Luke 14:12 तब उसने अपने नेवता देने वाले से भी कहा, जब तू दिन का या रात का भोज करे, तो अपने मित्रों या भाइयों या कुटुम्बियों या धनवान पड़ोसियों को न बुला, कहीं ऐसा न हो, कि वे भी तुझे नेवता दें, और तेरा बदला हो जाए।
Luke 14:13 परन्तु जब तू भोज करे, तो कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को बुला।
Luke 14:14 तब तू धन्य होगा, क्योंकि उन के पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इस का प्रतिफल मिलेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 9-10 
  • प्रेरितों 7:1-21


शनिवार, 22 जून 2013

भय और विश्वास

   माँ ने अपने पाँच वर्षीय पुत्र जौनी से कहा कि गोदाम में जाकर टमाटर के सूप का एक डब्बा ले आए। लेकिन जौनी ने यह कहते हुए, "लेकिन वहाँ तो अन्धेरा है" जाने से मना कर दिया। माँ ने जौनी को फिर आश्वस्त किया, "वहाँ पर डरने की कोई बात नहीं है, और फिर यीशु तो वहाँ भी है।" जौनी आशंका से भरा हुआ और बड़े अनमने मन से गोदाम तक गया, धीरे से गोदाम का दरवाज़ा खोला और अन्दर के अन्धकार को देखकर बाहर ही से ऊँची आवाज़ में बोला, "यीशु, मुझे ज़रा यहाँ टमाटर सूप का एक डब्बा तो पकड़ना।"

   यह मज़ाकिया कहानी मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक गिदोन की याद दिलाती है। परमेश्वर ने गिदोन को दर्शन दिए और उसे "हे शूरवीर सूरमा" कहकर संबोधित भी किया (न्यायियों 6:12) और फिर उसे इस्त्राएलियों को मिदियानी आताताईयों के हाथों से छुड़ाने को कहा (पद 14)। लेकिन गिदोन अपने भय से आगे नहीं देख सका और इस ज़िम्मेदारी से बचने का मार्ग ढूँढते हुए, "उसने कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, मैं इस्राएल को क्योंकर छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सब से कंगाल है, फिर मैं अपने पिता के घराने में सब से छोटा हूं" (न्यायियों 6:15 )। परमेश्वर ने गिदोन को फिर आश्वस्त किया कि वह परमेश्वर की सहायता से मिदियानियों को हराने पाएगा (पद 16), लेकिन गिदोन का भय नहीं गया। फिर अपने आप को और आश्वस्त करने तथा अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति को जाँचने के लिए गिदोन ने परमेश्वर से दो बार चिन्ह माँगे (पद 17, 36-40), और परमेश्वर ने उन चिन्हों को भी पूरा किया। जब गिदोन इतना भयभीत और सन्देहकारी था तो फिर परमेश्वर ने उसे "हे शूरवीर सूरमा" कहकर क्यों संबोधित किया? इसलिए, क्योंकि परमेश्वर जानता था कि अपनी ही नज़रों में तुच्छ और कमज़ोर यह व्यक्ति आगे चलकर परमेश्वर की सहायता से कैसे महान कार्य करेगा और इस्त्राएल में क्या बन जाएगा।

   आज अपने हालात और संसार की परिस्थितियों से घबराकर हम भी अपनी योग्यताओं और सामर्थ पर शक कर सकते हैं, अपने को कमज़ोर और लाचार मान सकते हैं। लेकिन हम यह कभी नहीं भूलें कि जब हम परमेश्वर पर विश्वास रखेंगे और उसके आज्ञाकारी रहेंगे तो वह अपनी सामर्थ से हमें परिपूर्ण करके हमारे द्वारा क्या कुछ नहीं कर सकता। जो गिदोन का परमेश्वर था वही आज हम मसीही विश्वासियों का भी परमेश्वर है। उसकी योजनाएं आज भी वैसी ही अद्भुत और उसका साथ वैसा ही सामर्थ प्रदान करने तथा जयवंत बनाने वाला है। जीवन अपनी कमज़ोरियों के भय से नहीं, परमेश्वर में विश्वास की सामर्थ से बिताएं। - एलबर्ट ली


जब हम इस बात से आश्वस्त हैं कि परमेश्वर प्रभु यीशु हमारे साथ है तो हम किसी भी भय का सामना कर सकते हैं।

उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है। - न्यायियों 6:12 

बाइबल पाठ: न्यायियों 6:11-23
Judges 6:11 फिर यहोवा का दूत आकर उस बांजवृक्ष के तले बैठ गया, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था, और उसका पुत्र गिदोन एक दाखरस के कुण्ड में गेहूं इसलिये झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे।
Judges 6:12 उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है।
Judges 6:13 गिदोन ने उस से कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, यदि यहोवा हमारे संग होता, तो हम पर यह सब विपत्ति क्यों पड़ती? और जितने आश्चर्यकर्मों का वर्णन हमारे पुरखा यह कहकर करते थे, कि क्या यहोवा हम को मिस्र से छुड़ा नहीं लाया, वे कहां रहे? अब तो यहोवा ने हम को त्याग दिया, और मिद्यानियों के हाथ कर दिया है।
Judges 6:14 तब यहोवा ने उस पर दृष्टि कर के कहा, अपनी इसी शक्ति पर जा और तू इस्राएलियों को मिद्यानियों के हाथ से छुड़ाएगा; क्या मैं ने तुझे नहीं भेजा?
Judges 6:15 उसने कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, मैं इस्राएल को क्योंकर छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सब से कंगाल है, फिर मैं अपने पिता के घराने में सब से छोटा हूं।
Judges 6:16 यहोवा ने उस से कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; सो तू मिद्यानियों को ऐसा मार लेगा जैसा एक मनुष्य को।
Judges 6:17 गिदोन ने उस से कहा, यदि तेरा अनुग्रह मुझ पर हो, तो मुझे इसका कोई चिन्ह दिखा कि तू ही मुझ से बातें कर रहा है।
Judges 6:18 जब तक मैं तेरे पास फिर आकर अपनी भेंट निकाल कर तेरे साम्हने न रखूं, तब तक तू यहां से न जा। उसने कहा, मैं तेरे लौटने तक ठहरा रहूंगा।
Judges 6:19 तब गिदोन ने जा कर बकरी का एक बच्चा और एक एपा मैदे की अखमीरी रोटियां तैयार कीं; तब मांस को टोकरी में, और जूस को तसले में रखकर बांजवृक्ष के तले उसके पास ले जा कर दिया।
Judges 6:20 परमेश्वर के दूत ने उस से कहा, मांस और अखमीरी रोटियों को ले कर इस चट्टान पर रख दे, और जूस को उण्डेल दे। उसने ऐसा ही किया।
Judges 6:21 तब यहोवा के दूत ने अपने हाथ की लाठी को बढ़ाकर मांस और अखमीरी रोटियों को छूआ; और चट्टान से आग निकली जिस से मांस और अखमीरी रोटियां भस्म हो गई; तब यहोवा का दूत उसकी दृष्टि से अन्तरध्यान हो गया।
Judges 6:22 जब गिदोन ने जान लिया कि वह यहोवा का दूत था, तब गिदोन कहने लगा, हाय, प्रभु यहोवा! मैं ने तो यहोवा के दूत को साक्षात देखा है।
Judges 6:23 यहोवा ने उस से कहा, तुझे शान्ति मिले; मत डर, तू न मरेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 6-8 
  • प्रेरितों 6