ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 2 फ़रवरी 2014

विश्वास में सफलता


   जब इस्त्राएली मिस्त्र के दासत्व से निकलकर कनान देश की ओर जा रहे थे तब परमेश्वर ने इस्त्राएलियों के मध्य में आते समय में अपनी उपस्थिति के एहसास और अपने स्मरण को बनाए रखने के लिए एक वाचा का सन्दूक बनवाया था जो स्वर्ग में परमेश्वर के सिंहासन का प्रतिरूप था। अपनी उस यात्रा में इस्त्राएली उस वाचा के सन्दूक को लिए चलते थे। कनान में बसने के बाद वह वाचा का सन्दूक शीलोह में परमेश्वर की आराधना के तम्बू में रख दिया गया। कई वर्षों के बाद, एक युद्ध में फिलिस्तीनियों से हार जाने के बाद इस्त्राएली सेना के अगुवों ने शीलोह सन्देश भेजा कि परमेश्वर का वह वाचा का सन्दूक युद्ध भूमि पर लाया जाए जिससे परमेश्वर की उपस्थिति के कारण उनको अपने शत्रुओं पर विजय मिल सके।

   जब वह सन्दूक युद्ध स्थल पर इस्त्राएली छावनी में पहुँचा तो हर्ष के कारण इस्त्राएली सेना ने बड़ी ज़ोर से ललकार का शब्द किया जिसे सुन कर उनके शत्रु फिलिस्ती घबराहट में आ गए। उस सन्दूक के कारण अब इस्त्राएली तो साहस और फिलिस्ती डर से भर गए। फिर युद्ध ठना, इस्त्राएली सेना वाचा का सन्दूक लेकर युद्ध भूमि पर पहुँची, लेकिन युद्ध के समय दोनो, इस्त्राएलियों और फिलिस्तियों, की धारणाएं गलत निकलीं - इस बार इस्त्राएली और भी भयानक रीति से पराजित हुए, उनके और भी अधिक सैनिक मारे गए और अब वाचा का सन्दूक फिलिस्तियों के कबज़े में चला गया जिसे लेजाकर उन्होंने अपने देवता के मन्दिर में रख दिया और फलस्वरूप पाया कि उनके देवता की मूर्ति टूट कर नीचे गिर पड़ी और उनके इलाके में महामारी फैल गई।

   हम फिलिस्तियों की गलती तो समझ सकते हैं - वे मूर्ति पूजक थे, सच्चे और जीवते परमेश्वर के विषय में नहीं जानते थे; परन्तु इस्त्राएलियों को तो बेहतर समझ-बूझ रखनी चाहिए थी। उन इस्त्राएलियों ने भी परमेश्वर से मार्गदर्शन लिए बिना, अपनी ही धारणा के अनुसार वाचा के सन्दूक का उपयोग करा। अवश्य ही पहले इस्त्राएल के कनान देश में प्रवेश के समय वाचा के सन्दूक को युद्ध भूमि में लेजाया गया था (यहोशु 6), परन्तु वे यह भूल गए कि ऐसा परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार और उसकी योजना के अन्तर्गत किया गया था। उन्हें पहले मिली विजय उनके मध्य सन्दूक की उपस्थिति के कारण नहीं वरन परमेश्वर की आज्ञाकारिता के कारण थी।

   यह घटना आज हमें भी एक महत्वपूर्ण शिक्षा देती है - हमारे पास चाहे कोई भी संसाधन उपलब्ध क्यों ना हों, यदि उनका उपयोग परमेश्वर की योजना के अन्तर्गत और उसकी आज्ञा के अनुसार नहीं होगा तो परिणाम बुरा ही होगा। इसलिए हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन करने तथा प्रार्थना करने में समय बिताना चाहिए जिससे हम परमेश्वर की इच्छा और आज्ञा जान सकें और फिर परमेश्वर की इच्छा और आज्ञाकारिता में ही अपने कार्यों को करें, क्योंकि परमेश्वर की अगुवाई पर रखे गए विश्वास में ही सफलता है। - डेव ब्रैनन


हम तो अधूरा ही जानते हैं, परमेश्वर सब कुछ और संपूर्ण जानता है।

मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा। - भजन 91:2

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 4:1-11
1 Samuel 4:1 और शमूएल का वचन सारे इस्राएल के पास पहुंचा। और इस्राएली पलिश्तियों से युद्ध करने को निकले; और उन्होंने तो एबेनेजेर के आस-पास छावनी डाली, और पलिश्तियों ने अपेक में छावनी डाली। 
1 Samuel 4:2 तब पलिश्तियों ने इस्राएल के विरुद्ध पांति बान्धी, और जब घमासान युद्ध होने लगा तब इस्राएली पलिश्तियों से हार गए, और उन्होंने कोई चार हजार इस्राएली सेना के पुरूषों को मैदान ही में मार डाला। 
1 Samuel 4:3 और जब वे लोग छावनी में लौट आए, तब इस्राएल के वृद्ध लोग कहने लगे, कि यहोवा ने आज हमें पलिश्तियों से क्यों हरवा दिया है? आओ, हम यहोवा की वाचा का सन्दूक शीलो से मांग ले आएं, कि वह हमारे बीच में आकर हमें शत्रुओं के हाथ से बचाए।
1 Samuel 4:4 तब उन लोगों ने शीलो में भेज कर वहां से करूबों के ऊपर विराजने वाले सेनाओं के यहोवा की वाचा का सन्दूक मंगा लिया; और परमेश्वर की वाचा के सन्दूक के साथ एली के दोनों पुत्र, होप्नी और पिनहास भी वहां थे। 
1 Samuel 4:5 जब यहोवा की वाचा का सन्दूक छावनी में पहुंचा, तब सारे इस्राएली इतने बल से ललकार उठे, कि भूमि गूंज उठी। 
1 Samuel 4:6 इस ललकार का शब्द सुनकर पलिश्तियों ने पूछा, इब्रियों की छावनी में ऐसी बड़ी ललकार का क्या कारण है? तब उन्होंने जान लिया, कि यहोवा का सन्दूक छावनी में आया है। 
1 Samuel 4:7 तब पलिश्ती डरकर कहने लगे, उस छावनी में परमेश्वर आ गया है। फिर उन्होंने कहा, हाय! हम पर ऐसी बात पहिले नहीं हुई थी। 
1 Samuel 4:8 हाय! ऐसे महाप्रतापी देवताओं के हाथ से हम को कौन बचाएगा? ये तो वे ही देवता हैं जिन्होंने मिस्रियों पर जंगल में सब प्रकार की विपत्तियां डाली थीं। 
1 Samuel 4:9 हे पलिश्तियों, तुम हियाव बान्धो, और पुरूषार्थ जगाओ, कहीं ऐसा न हो कि जैसे इब्री तुम्हारे आधीन हो गए वैसे तुम भी उनके आधीन हो जाओ; पुरूषार्थ कर के संग्राम करो। 
1 Samuel 4:10 तब पलिश्ती लड़ाई के मैदान में टूट पड़े, और इस्राएली हार कर अपने अपने डेरे को भागने लगे; और ऐसा अत्यन्त संहार हुआ, कि तीस हजार इस्राएली पैदल खेत आए। 
1 Samuel 4:11 और परमेश्वर का सन्दूक छीन लिया गया; और एली के दोनों पुत्र, होप्नी और पीनहास, भी मारे गए।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 17-19


शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

तृप्ति के सोते


   प्रायः देखा जाता है कि लोगों में परोपकार, भलाई और उदारता की अभिव्यक्ति जो दिसंबर महीने में दिखाई देती है वह कुछ ही समय में धूमिल पड़ने लगती है और लोग कहने लगते हैं कि, "काश हम क्रिसमस का उत्साह साल भरे बनाए रख सकते।" ऐसा क्यों होता है कि भलाई, परोपकार, उदारता, दया आदि भावनाएं केवल त्यौहारों के साथ ही जुड़ी दिखाई देती हैं मानों इन्हें किसी दिन विशेष के साथ जोड़ कर रखा गया हो? क्या इन त्यौहारों और पर्वों के साथ जुड़ी इस छिछली दया भावना के अतिरिक्त कोई ऐसा गहरा बहने वाला दया का सोता है जो अविराल साल-ब-साल बहता रहता हो, लोगों को तृप्त करता रहता हो?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका रचित सुसमाचार के पहले दो अध्यायों में परमेश्वर के पवित्र आत्मा का सात बार वर्णन आया है। पवित्र आत्मा को पाँच लोगों के जीवन में कार्य करते दिखाया गया है - यूहन्ना बप्तिसमा देने वाला (1:15), मरियम (1:35), इलीशिबा (1:41), ज़कर्याह (1:67) और शमौन (2:25-27)। इस खण्ड में, जिसे हम आम तौर से "क्रिसमस की कहानी" के नाम से जानते हैं, हम ऐसा नहीं पाते कि इन लोगों को अचानक ही कुछ ध्यान आया हो या उन्होंने अपने अन्दर कुछ विचित्र होता हुआ अनुभव किया हो। इसके स्थान पर हम पाते हैं कि वे बहुत साधारण और सामान्य लोग थे जो अपनी दिनचर्या का निर्वाह कर रहे थे और उनके ऐसा करते हुए ही पवित्र आत्मा ने शमौन का मार्गदर्शन किया, ज़कर्याह और इलीशिबा पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हुए और पवित्र आत्मा की सामर्थ से मरियम की कोख में प्रभु यीशु का आगमन हुआ। इन सब ने पवित्र आत्मा के कार्य को अपने अन्दर अनुभव किया, उसकी सामर्थ को पहचाना।

   क्या आज हमारे अन्दर यह अनुभूति है कि उपरोक्त लोगों के समान ही हम भी अपने जीवन में पवित्र आत्मा के कार्य को पहचानें और संसार की अन्य सब आवाज़ों से अलग उसकी आवाज़ पर ध्यान लगाएं? क्या हम पवित्र आत्मा द्वारा उकसाए और प्रोत्साहित किए जाने के प्रति सचेत और उसकी आज्ञा मानने को तत्पर तथा तैयार रहते हैं? क्या हमने पवित्र आत्मा को यह आदर दिया है कि वह अपनी गर्माहट से हमारे हृदय भर दे और फिर उसे हमारे हाथों से दूसरों के जीवनों में प्रवाहित हो लेने दे?

   आज हम मसीही विश्वासियों के साथ पवित्र आत्मा की उपस्थिति और उसके द्वारा प्रभु यीशु की सामर्थ हमारे जीवनों में बनी रहती है, जिसे वह हमारे अन्दर से साल-ब-साल बहते रहने वाले तृप्ति के सोते के रूप में संसार में प्रवाहित करना चाहता है, किसी दिन अथवा त्यौहार विशेष पर ही नहीं, कुछ खास लोगों ही के लिए नहीं, वरन सदा-सर्वदा संसार के प्रत्येक जन के लिए, "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


प्रभु यीशु में विश्वास हमारी आत्मा को पाप के दाग़ से शुद्ध और हमारी देह को पवित्र आत्मा का मन्दिर बना देता है।

...यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे...। - यूहन्ना 7:37-39 

बाइबल पाठ: लूका 1:31-41
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा। 
Luke 1:34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं। 
Luke 1:35 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। 
Luke 1:36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होने वाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है। 
Luke 1:37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरिहत नहीं होता। 
Luke 1:38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया। 
Luke 1:39 उन दिनों में मरियम उठ कर शीघ्र ही पहाड़ी देश में यहूदा के एक नगर को गई। 
Luke 1:40 और जकरयाह के घर में जा कर इलीशिबा को नमस्‍कार किया। 
Luke 1:41 ज्योंही इलीशिबा ने मरियम का नमस्‍कार सुना, त्योंही बच्‍चा उसके पेट में उछला, और इलीशिबा पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गई।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14-16


शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

बहुतायत का जीवन


   चीनी नव वर्ष का उत्सव मनाते समय पारस्परिक संपर्क में कुछ विशेष शब्दों का लिखित एवं मौखिक प्रयोग करना पारंपरिक है। ऐसा ही एक शब्द जो बहुत प्रयोग होता है वह है ’बहुतायत’ और इसे दूसरों को आते संपूर्ण वर्ष भर भौतिक समृद्धि मिलते रहने की कामना करने के भाव के साथ प्रयोग किया जाता है।

   जब मूसा इस्त्राएलियों को मिस्त्र की गुलामी से निकालकर वाचा किए हुए कनान देश को लेकर चला तो उस देश में उनके प्रवेश करने से पहले मूसा ने इस्त्राएलियों को स्मरण दिलाया कि परमेश्वर उन्हें एक धनी और समृद्ध देश में लिए जा रहा है (व्यवस्थाविवरण 8:7-9)। मूसा ने उन्हें बताया कि उस देश में उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बहुतायत से उपलब्ध होगा, जो भी उन्हें चाहिए वह वहाँ होगा। लेकिन साथ ही मूसा ने इस्त्राएलियों को चेतावनी भी दी कि इस समृद्धी में आने और सभी आवश्यकताओं के पूरे हो जाने के बाद वे परमेश्वर को भूल ना जाएं, क्योंकि परमेश्वर ही है जो उन्हें मिस्त्र से निकाल कर लाया, मार्ग में उनकी रक्षा करी, इस बहुतायत के देश तक पहुँचाया और यहाँ बस जाने की सामर्थ दी। मूसा ने कहा: "परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है"(व्यवस्थाविवरण 8:18)।

   समृद्धि केवल भौतिक वस्तुओं ही की नहीं होती - जो कुछ भी हमारे पास है वह सब परमेश्वर का ही दिया हुआ तो है। प्रभु यीशु मसीह ने चेलों से कहा, "...मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं" (यूहन्ना 10:10)। जैसे उन इस्त्राएलियों के लिए, आज हमारे लिए भी यही चेतावनी है कि हम यह कभी ना भूलें कि हमारे पास जो कुछ भी है वह परमेश्वर के अनुग्रह और उसकी आशीष से ही है। जब तक हम और हमारे जीवन परमेश्वर प्रभु यीशु के साथ जुड़े रहेंगे, वे संतुष्टि के और परमेश्वर की आशीषों की बहुतायत से भरे हुए जीवन होंगे। - सी० पी० हिया


परमेश्वर के उपहारों की बहुतायत में कभी उस अनुग्रह से देने वाले को भूल ना जाएं।

क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। - यूहन्ना 1:16 

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 8:7-18
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है। 
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है। 
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा। 
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा। 
Deuteronomy 8:11 इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे; 
Deuteronomy 8:12 ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो, और अच्छे अच्छे घर बनाकर उन में रहने लगे, 
Deuteronomy 8:13 और तेरी गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की बढ़ती हो, और तेरा सोना, चांदी, और तेरा सब प्रकार का धन बढ़ जाए, 
Deuteronomy 8:14 तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है, 
Deuteronomy 8:15 और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहां तेज विष वाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्ठान से जल निकाला, 
Deuteronomy 8:16 और तुझे जंगल में मन्ना खिलाया, जिसे तुम्हारे पुरखा जानते भी न थे, इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के अन्त में तेरा भला ही करे। 
Deuteronomy 8:17 और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई। 
Deuteronomy 8:18 परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-13


गुरुवार, 30 जनवरी 2014

सान्तवना और शाँति


   हैरॉलड, कैथी और उनके दोनो बेटे एक जंगल के इलाके में थे, जब एक चक्रवाधी तूफान वहाँ से होकर निकला। कैथी ने इस घटना के कई वर्षों के बाद मुझसे बात करते हुए उस समय का अपना अनुभव बयान किया: "मेरे पति और बड़ा बेटा मुझसे कुछ दूर थे, मैंने और मेरे छोटे बेटे ने एक लकड़ी से बनी कोठरी में शरण ली। हमें बहुत तेज़ शोर सुनाई दिया मानों सैंकड़ों रेलगाड़ियाँ एक साथ वहाँ से निकल रही हों, और मैं तथा मेरा बेटा ज़मीन पर अपने सिर अपने हाथों में दबाए सिमटकर लेट गए। हमारी आँखों के सामने वह कोठरी टूट कर बिखरने लगी और मलबा हमारे चारों ओर उड़ने लगा। मैंने उड़ते हुए मलबे की चोट से बचने के लिए अपनी आँखें बन्द कर लीं। तभी मुझे लगा मानों मैं हवा में तेज़ी से उठ गई हूँ और फिर मैं पास की झील के पानी में जा गिरी, जहाँ अपने आप को डूबने से बचाए रखने के लिए मैं उड़ के आए हुए मलबे को थामे तैरती रही। लेकिन मेरा छोटा बेटा उस तूफान से बच नहीं पाया। अगले छः हफतों तक हम प्रतिदिन रोते रहे। लेकिन हमें परमेश्वर की सार्वभौमिकता पर पूरा विश्वास है और हम मानते हैं कि परमेश्वर ने अपनी किसी योजना के अन्तर्गत ही उस तूफान को हमारे ऊपर आने दिया। हमें यह स्मरण कर के भी शाँति है कि हमारा बेटा प्रभु यीशु को मानता था।"

   जब कोई प्रीय जन हम से बिछड़ जाता है तो हमारे मनों में अनेक प्रशन उठने लगते हैं। ऐसे समयों में हम मसीही विश्वासियों के लिए रोमियों 8:28 प्रोत्साहन और आश्वासन प्रदान करने का एक अच्छा माध्यम होता है। हम मसीही विश्वासी इस बात में आश्वस्त और शाँति से रह सकते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में जो भी आने देगा वह अन्ततः हमारे भले ही के लिए होगा; परमेश्वर कभी हमारा बुरा कर ही नहीं सकता, और ना ही हमारे साथ बुरा होने दे सकता है। वह हमारा प्रेमी पिता है जिसने जब हम पापों में उससे दूर थे तब भी हमारे उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र को भी रख नहीं छोड़ा, तो फिर अब जब हम उसके परिवार का अंग हैं तो वह हमें कैसे हानि में जा लेने देगा?

   इस दम्पति के परमेश्वर की सार्वभौमिकता और प्रभु यीशु में विश्वास ने ही उनके इस बड़े दुख की घड़ी में उन्हें सान्तवना और शाँति दी। यही शाँति और सान्तवना प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए प्रत्येक परिस्थिति में सदा उपलब्ध रहती है। क्या आपने प्रभु यीशु को अपनी सान्तवना और शाँति का स्त्रोत बनाया है? यदि नहीं तो अभी बना लीजिए। - डेनिस फिशर


दुख में शाँति का हमारा सबसे महान कारण है हमारा विश्वास कि हर परिस्थिति परमेश्वर के नियंत्रण में है, हमारे भले ही के लिए है।

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:3-4

बाइबल पाठ:  रोमियों 8:26-30
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर हैं, हमारे लिये बिनती करता है। 
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है। 
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। 
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। 
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10


बुधवार, 29 जनवरी 2014

बलिदान


   अपने नय वर्ष के उत्सव के कई दिन पहले चीनी परिवार अपने घरों को भली भांति साफ करते हैं। इस प्रथा के पालन में उनका मानना है कि इस सफाई से पुराने वर्ष का सारा दुर्भाग्य निकल कर साफ हो जाता है और नए वर्ष के सौभाग्य के आने के लिए घर तैयार हो जाता है।

   प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उनसे कहा कि वे अपने जीवनों को भली भाँति साफ कर लें - कोई सौभाग्य/दुर्भाग्य के लिए नहीं वरन परमेश्वर के लिए। ऐसा करने के लिए उसने रूपक अलंकार का प्रयोग करते हुए कहा, "पुराना खमीर निकाल कर, अपने आप को शुद्ध करो: कि नया गूंधा हुआ आटा बन जाओ; ताकि तुम अखमीरी हो, क्योंकि हमारा भी फसह जो मसीह है, बलिदान हुआ है" (1 कुरिन्थियों 5:7)। पौलुस ने यहूदियों के फसह और अखमीरी रोटी के पर्व (निर्गमन 12:1-28) पर अपनी यह बात आधारित करी।

   यहूदियों में खमीर पाप और भ्रष्ट प्रवृति का प्रतीक माना जाता है; इन पर्वों को मनाने के लिए यहूदी लोग अपने घरों से सारा खमीर निकाल देते थे (व्यवस्थाविवरण 16:3-4) और पापों के प्रायश्चित के लिए एक मेमना बलिदान करते थे। अब प्रभु यीशु समस्त संसार के लिए वह बलिदान का मेमना बन गया जो उस पर विश्वास करने वाले सब लोगों को उनके पापों से शुद्ध करता है। इसलिए पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा कि वे अपने जीवनों तथा मसीही मण्डली से सारा पाप और मलिनता दूर कर लें (1 कुरिन्थियों 5:9-13)।

   प्रभु यीशु के इस बलिदान और हमारे लिए पापों के दण्ड से छुड़ाए जाने के मार्ग को बना कर दे देने के कारण आईए हम जो मसीही विश्वासी हैं अपने जीवनों से पाप और मलिनता को दूर करें और उस पवित्रता का पर्व मनाएं जो केवल मसीह यीशु से ही हमें मिल सकती है; और वे जिन्होंने अभी तक प्रभु यीशु को अपने उधारकर्ता के रूप में ग्रहण नहीं किया है, वे भी प्रभु यीशु के इस बलिदान पर विचार करें और उससे पापों की क्षमा प्राप्त करने उसके पास आ जाएं। - मार्विन विलियम्स


पाप के दाग़ केवल मसीह यीशु के लहु ही से धुल सकते हैं।

परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। - रोमियों 3:24-25

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 5:1-13
1 Corinthians 5:1 यहां तक सुनने में आता है, कि तुम में व्यभिचार होता है, वरन ऐसा व्यभिचार जो अन्यजातियों में भी नहीं होता, कि एक मनुष्य अपने पिता की पत्‍नी को रखता है। 
1 Corinthians 5:2 और तुम शोक तो नहीं करते, जिस से ऐसा काम करने वाला तुम्हारे बीच में से निकाला जाता, परन्तु घमण्‍ड करते हो। 
1 Corinthians 5:3 मैं तो शरीर के भाव से दूर था, परन्तु आत्मा के भाव से तुम्हारे साथ हो कर, मानो उपस्थिति की दशा में ऐसे काम करने वाले के विषय में यह आज्ञा दे चुका हूं। 
1 Corinthians 5:4 कि जब तुम, और मेरी आत्मा, हमारे प्रभु यीशु की सामर्थ के साथ इकट्ठे हो, तो ऐसा मनुष्य, हमारे प्रभु यीशु के नाम से। 
1 Corinthians 5:5 शरीर के विनाश के लिये शैतान को सौंपा जाए, ताकि उस की आत्मा प्रभु यीशु के दिन में उद्धार पाए। 
1 Corinthians 5:6 तुम्हारा घमण्‍ड करना अच्छा नहीं; क्या तुम नहीं जानते, कि थोड़ा सा खमीर पूरे गूंधे हुए आटे को खमीर कर देता है। 
1 Corinthians 5:7 पुराना खमीर निकाल कर, अपने आप को शुद्ध करो: कि नया गूंधा हुआ आटा बन जाओ; ताकि तुम अखमीरी हो, क्योंकि हमारा भी फसह जो मसीह है, बलिदान हुआ है। 
1 Corinthians 5:8 सो आओ हम उत्‍सव में आनन्द मनावें, न तो पुराने खमीर से और न बुराई और दुष्‍टता के खमीर से, परन्तु सीधाई और सच्चाई की अखमीरी रोटी से।
1 Corinthians 5:9 मैं ने अपनी पत्री में तुम्हें लिखा है, कि व्यभिचारियों की संगति न करना। 
1 Corinthians 5:10 यह नहीं, कि तुम बिलकुल इस जगत के व्यभिचारियों, या लोभियों, या अन्‍धेर करने वालों, या मूर्तिपूजकों की संगति न करो; क्योंकि इस दशा में तो तुम्हें जगत में से निकल जाना ही पड़ता। 
1 Corinthians 5:11 मेरा कहना यह है; कि यदि कोई भाई कहला कर, व्यभिचारी, या लोभी, या मूर्तिपूजक, या गाली देने वाला, या पियक्कड़, या अन्‍धेर करने वाला हो, तो उस की संगति मत करना; वरन ऐसे मनुष्य के साथ खाना भी न खाना। 
1 Corinthians 5:12 क्योंकि मुझे बाहर वालों का न्याय करने से क्या काम? क्या तुम भीतर वालों का न्याय नहीं करते? 
1 Corinthians 5:13 परन्तु बाहर वालों का न्याय परमेश्वर करता है: इसलिये उस कुकर्मी को अपने बीच में से निकाल दो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 5-7


मंगलवार, 28 जनवरी 2014

व्यवहार


   शार्क मछलियों का अध्ययन करने वाले बताते हैं कि शार्क मछलियों द्वारा हमला किए जाने की संभावना अधिक तभी होती है जब उन मछलियों को पानी में रक्त का आभास होता है। रक्त से उनके अन्दर भोजन करने की क्रिया उत्तेजित होती है और वे झुँड के रूप में ही उस संभावित भोजन वस्तु पर, जिससे रक्त निकल रहा है, आक्रमण कर देती हैं। पानी में रक्त की उपस्थिति उनके आक्रमण के निशाने को चिन्हित कर देती है और वे वहीं अपना आक्रमण केंद्रित करती हैं।

   दुख की बात है कि चर्च में भी कभी कभी लोग ऐसे ही उन लोगों पर हमला बोल देते हैं जो किसी कारण दुखित हैं। बजाए इसके कि मसीह यीशु की मण्डली एक ऐसा स्थान हो जहाँ लोग प्रेम के साथ एक दूसरे की देखभाल करते हैं, उन्हें कठिन समयों में सहारा देते हैं, उन्हें निराशाओं से उभारने के प्रयास करते हैं, कभी कभी चर्च एक ऐसा स्थान भी बन जाता है जहाँ खूँखार हमलावर किसी अभागे पर टूट पड़ने की प्रतीक्षा में रहते हैं। इन हमलावरों को जैसे ही किसी की गलती, अस्फलता या उस में किसी खामी-खराबी की गंध मिलती है, बस वे उस बेचारे पर उसे बरबाद करने के लिए टूट पड़ते हैं।

   बजाए इसके कि ठोकर खाकर गिरे हुए व्यक्ति पर और प्रहार कर के उसे और दबाया जाए, हम मसीही विश्वासियों को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो उन गिरे हुओं को मसीह यीशु की सान्तवना के साथ प्रोत्साहित करता है, उन्हें उठा कर फिर से खड़ा करने में सहायक होता है। इसका यह तात्पर्य नहीं है कि हमें पापमय व्यवहार की अन्देखी करनी है या किसी रीति से ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देना है, वरन यह कि अपने प्रभु के समान ही हमें दयावन्त और सहिषुण भी होना है। प्रभु यीशु ने हमें सिखाया है कि "धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी" (मत्ती 5:7)। 

   दया का अर्थ है वह प्रेमपूर्ण व्यवहार हम जिसके योग्य नहीं हैं; और हम सभी अपने पापों के कारण परमेश्वर के न्याय और अनन्तकाल के दण्ड के योग्य हैं। लेकिन परमेश्वर ने हमारे पापों का दण्ड प्रभु यीशु पर डालकर हमारे लिए पापों के पश्चाताप और प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा परमेश्वर के निकट आने का मार्ग खोल दिया। जिस परमेश्वर ने हम पर दया करी है, वह चाहता है कि हम भी औरों पर ऐसे ही दया करें।

   इसलिए जब हम किसी को दुखी या गिरा हुआ देखें तो बजाए उस पर हमला करने वाले बनने के हम उस पर दया करने वाले बनें और सदा ध्यान रखें कि ऐसा दिन कभी भी आ सकता है जब हमें या तो अपने लिए दूसरों की दया की आवश्यकता पड़ जाएगी, या फिर प्रभु यीशु के सामने अपने जीवन और व्यवहार का हिसाब देने के लिए खड़ा होना पड़ेगा। - बिल क्राउडर


हम तब ही दूसरों के प्रति दया दिखाना बन्द कर सकते हैं जब प्रभु यीशु हमारे प्रति दया दिखाना बन्द कर दे।

जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो। - लूका 6:36

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:1-11
John 8:1 परन्तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया। 
John 8:2 और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा। 
John 8:3 तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसको बीच में खड़ी कर के यीशु से कहा। 
John 8:4 हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है। 
John 8:5 व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है? 
John 8:6 उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्तु यीशु झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा। 
John 8:7 जब वे उस से पूछते रहे, तो उसने सीधे हो कर उन से कहा, कि तुम में जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे। 
John 8:8 और फिर झुक कर भूमि पर उंगली से लिखने लगा। 
John 8:9 परन्तु वे यह सुन कर बड़ों से ले कर छोटों तक एक एक कर के निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई। 
John 8:10 यीशु ने सीधे हो कर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी। 
John 8:11 उसने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-4


सोमवार, 27 जनवरी 2014

चट्टान


   इंग्लैण्ड का एक युवा प्रचारक, अगस्टुस टॉपलेडी, खुले मैदानी इलाकों से होकर जा रहा था और अचानक ही एक तूफान ने उसे आ घेरा। उसने तूफान से बचने के लिए कोई स्थान देखने के लिए अपनी नज़रें इधर-उधर घुमाईं और उसे एक बड़ी चट्टान दिखाई दी जिसमें एक दरार थी; वह उस दरार में जाकर बैठ गया और तूफान के गुज़र जाने की प्रतीक्षा करने लगा। वहाँ बैठे बैठे उसे अपनी इस वर्तमान शारीरिक परिस्थिति और अपने जीवन में आने वाले आत्मिक तूफानों में परमेश्वर में मिलनी वाली शरण का ध्यान आया और वह इस पर विचार करने लगा। अपने विचारों को लिखने के लिए उसके पास कोई कागज़ नहीं था, इसलिए वहाँ ज़मीन पर पड़े एक ताश के पत्ते पर उसने अपने विचारों को एक स्तुति गीत के रूप में लिखना आरंभ कर दिया।

   सन 1775 के एक तूफानी दिन में एक चट्टान की दरार में ताश के पत्ते पर लिखा गया वह भजन - Rock of Ages तब से लेकर आज तक अनगिनित लोगों के लिए बल और सांत्वना का स्त्रोत रहा है। उस गीत का एक छन्द कुछ इस प्रकार से है: हे अनन्तकालीन चट्टान जो मेरे लिए तोड़ी गई, मुझे अपनी दरार में छुपा रख; तेरी छेदी गई छाती से बहे लहू और जल द्वारा मेरे पापों को धो डाल और मुझे पाप के दण्ड से छुड़ाकर शुद्ध और पवित्र बना दे।

   अपने जीवन के संघर्षों के बारे में विचार कीजिए; क्या आपको जीवन के तूफानों से छिपने का स्थान चाहिए? क्या आपको किसी ऐसे जन का साथ चाहिए जो सदा आपके साथ रहे और जीवन के प्रहारों से आपकी रक्षा करता रहे? क्या आपको पापों से क्षमा का अनुभव और निश्चय चाहिए? जैसे अगुस्टुस टॉपलेडी ने पाया, आप भी प्रभु यीशु में यह सब पा सकते हैं।

   जीवन के तूफानों में अकेले खड़े ना रहें; परमेश्वर को अपन आश्रय-स्थल बना लें। उसकी सुरक्षा में आ जाएं; अपने जीवन में उससे मिलने वाली क्षमा को सुनिश्चित कर लें। उस अनन्तकालीन चट्टान में आ जाएं, क्योंकि उससे अधिक सुरक्षित स्थान और कोई है ही नहीं। - डेव ब्रैनन


संसार और जीवन के प्रहारों से आपको सुरक्षित रखने वाली वह स्थिर और अडिग चट्टान केवल परमेश्वर ही है। 

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 18:30-36
Psalms 18:30 ईश्वर का मार्ग सच्चाई; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।
Psalms 18:31 यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है? 
Psalms 18:32 यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है। 
Psalms 18:33 वही मेरे पैरों को हरिणियों के पैरों के समान बनाता है, और मुझे मेरे ऊंचे स्थानों पर खड़ा करता है। 
Psalms 18:34 वह मेरे हाथों को युद्ध करना सिखाता है, इसलिये मेरी बाहों से पीतल का धनुष झुक जाता है। 
Psalms 18:35 तू ने मुझ को अपने बचाव की ढाल दी है, तू अपने दाहिने हाथ से मुझे सम्भाले हुए है, और मेरी नम्रता ने महत्व दिया है। 
Psalms 18:36 तू ने मेरे पैरों के लिये स्थान चौड़ा कर दिया, और मेरे पैर नहीं फिसले।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 38-40