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सोमवार, 7 अप्रैल 2014

सहायता


   क्या ऐसा हो सकता है कि हमारा मददगार होना मदद पाने वालों के लिए परेशानी का कारण बन जाए? क्या हमारी सहायता दूसरों के जीवन को और भी कठिन बना सकती है? जी हाँ, ऐसा संभव है; तब, जब हम सहायता करने के प्रयास में दूसरों के जीवनों में द्खलंदाज़ी करने लगते हैं, उन्हें नियंत्रित करने के प्रयास करने लगते हैं, उनकी स्वतंत्रता में बाधा बनने लगते हैं, उन्हें सीखने और पनपने के अवसर देने की बजाए उन्हें दबाए रखने लगते हैं। यदि जो सहयाता हम देने का प्रयास कर रहे हैं वह केवल हमारी चिन्ता से प्रेरित होकर है, तो हम अपने स्वार्थ के कारण दूसरों के लिए कठिनाई पैदा करने वाले बन जाते हैं।

   तो फिर हम कैसे पहचान सकते हैं कि जो सहायता हम करना चाह रहे हैं और हमारे मन के भाव वास्तव में परमेश्वर के निस्वार्थ प्रेम से प्रेरित हैं? परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हम शुद्ध और निस्वार्थ मन से प्रेम कैसे कर सकते हैं - अपने मनों और विचारों को परमेश्वर को समर्पित रखने तथा उससे मार्गदर्शन पाने के द्वारा: "हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले! मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले! और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर! " (भजन 139:23-24)।

   हम प्रार्थना में अपने परमेश्वर पिता से माँग सकते हैं कि वह हमें दिखाए और बताए कि कहीं अनजाने में ही हम दूसरों के मार्गों की बाधा और उनके लिए कष्ट का कारण तो नहीं बन रहे हैं। हम प्रार्थना में यह भी कह सकते हैं कि परमेश्वर पिता हमें वह प्रेम करना और दिखाना सिखाए जो उसके वचन और स्वभाव के अनुरूप है: "प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता" (1 कुरिन्थियों 13:4-5)।

   दूसरों, विशेषकर जिनसे हम प्रेम करते हैं, की सहायता करने के हमारे प्रयास कभी भी चिन्ता से पूर्णतः मुक्त तो नहीं हो सकेंगे, लेकिन परमेश्वर पिता की सहायता और उसके वचन की आज्ञाकारिता से हम वैसा ही निस्वार्थ प्रेम दिखाना सीख सकते हैं जैसा परमेश्वर पिता ने स्वयं हम से किया है तथा सही रीति से सहायता करने वाले बन सकते हैं। और इस प्रेम तथा सहायता के निस्वार्थ होने की पहचान है होगी कि हम लोगों से उस प्रेम के प्रतिफल पाने की या प्रशंसा की कोई इच्छा नहीं रखेंगे। पिता परमेश्वर हमें यह सामर्थ दे कि हम शुद्ध मन और उद्देश्यों से दूसरों की भलाई के लिए प्रेम करें, सहायता करें और बदले में उनसे कुछ पाने की कोई उम्मीद नहीं रखें। - डेविड रोपर


शुद्ध मन और उद्देश्यों से दूसरों की सहायता करने के लिए निस्वार्थ प्रेम करना भी आवश्यक है।

हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की ओर फिरें! - विलापगीत 3:40

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13:1-8
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 4-6


रविवार, 6 अप्रैल 2014

खूबसूरत धब्बे


   बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं एक नदी के किनारे किनारे पैदल यात्रा करते हुए वृक्षों के एक ऐसे झुरमुट पर पहुँचा जहाँ उन पेड़ों की छाल को छील कर निकाला हुआ था। उस इलाके में रहने वाले मेरे एक मित्र ने मुझे बता रखा था कि वहाँ के स्थानीय निवासी इस प्रकार पेड़ों से छाल छील कर अन्दर के लेस वाले पदार्थ को अपने कार्य के लिए निकालते हैं। उस छीलने के कारण जो धब्बे पेड़ों पर आए थे उस से उन पेड़ों के स्वरूप बिगड़ गए थे, लेकिन कुछ दाग़ ऐसे भी थे जिनमें पेड़ का लेस निकल कर जम गया था और जो वर्षों से वायु और मौसम को झेलते झेलते चमकदार और सुन्दरता के अनूठे नमूने बन गए थे।

   कुछ ऐसा ही हमारे पापों के साथ भी होता है। हम सभी मनुष्यों के जीवनों में पाप के दाग़ और धब्बे पाए जाते हैं। लेकिन जो दाग़ और धब्बे प्रभु यीशु के पास पश्चाताप में लाकर उसे समर्पित कर दिए गए और प्रभु यीशु के पवित्र लोहु में ढाँप दिए गए, अब उनके निशान एक विलक्षण सुन्दरता को दिखाते हैं, जैसे:
   - जिन्होंने पाप की कड़ुवाहट को चखा है और अब पाप से घृणा तथा धार्मिकता से प्रेम करते हैं; उनके जीवन में वे पाप के धब्बे पवित्रता की सुन्दरता को दिखाते हैं।
   - जो ये जानते-समझते हैं कि वे परमेश्वर की धार्मिकता के स्तर से कितने दूर हैं (रोमियों 3:23), वे दूसरों के प्रति उनकी कमज़ोरियों में सहनशील रहते हैं, और जब दूसरे गिरते हैं तो वे उनके प्रति सहानुभूति, दयालुता, और समझ-बूझ के साथ व्यवहार करते हैं; उनके जीवन में वे पाप के धब्बे नम्रता की सुन्दरता को दिखाते हैं।
   - जब जीवन के पाप सेंत-मेंत और पूर्णतः क्षमा हो जाने का अनुभव होता है, तो यह दया करने वाले प्रभु के प्रति प्रेम का गहरा संबंध बन जाता है, ऐसा प्रेम जो फिर दूसरों के प्रति भी दिखाई देता है; उनके जीवन में वे पाप के धब्बे प्रेम की सुन्दरता को दिखाते हैं।

   अपने पापों से परेशान मत हों, उन्हें प्रभु यीशु सौंप दें जो उन्हें सहर्ष लेकर बदले में अपनी धार्मिकता आप को देने को तैयार खड़ा है। पाप और धार्मिकता की यह अदला-बदली ना केवल आपको पाप के बोझ और दुषपरिणामों से मुक्त कर देगी वरन जीवन में लगे उन पाप के धब्बों को अनूठी सुन्दरता के नमूने भी बना देगी। - डेविड रोपर


क्षमा पाया हुआ हृदय सुन्दर जीवन का सोता बन जाता है।

क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। - भजन 32:1-2

बाइबल पाठ: लूका 7:36-50
Luke 7:36 फिर किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जा कर भोजन करने बैठा। 
Luke 7:37 और देखो, उस नगर की एक पापिनी स्त्री यह जानकर कि वह फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई। 
Luke 7:38 और उसके पांवों के पास, पीछे खड़ी हो कर, रोती हुई, उसके पांवों को आंसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी और उसके पांव बारबार चूमकर उन पर इत्र मला। 
Luke 7:39 यह देखकर, वह फरीसी जिसने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है? क्योंकि वह तो पापिनी है। 
Luke 7:40 यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा; कि हे शमौन मुझे तुझ से कुछ कहना है वह बोला, हे गुरू कह।
Luke 7:41 किसी महाजन के दो देनदार थे, एक पांच सौ, और दूसरा पचास दीनार धारता था। 
Luke 7:42 जब कि उन के पास पटाने को कुछ न रहा, तो उसने दोनों को क्षमा कर दिया: सो उन में से कौन उस से अधिक प्रेम रखेगा। 
Luke 7:43 शमौन ने उत्तर दिया, मेरी समझ में वह, जिस का उसने अधिक छोड़ दिया: उसने उस से कहा, तू ने ठीक विचार किया है। 
Luke 7:44 और उस स्त्री की ओर फिरकर उसने शमौन से कहा; क्या तू इस स्त्री को देखता है मैं तेरे घर में आया परन्तु तू ने मेरे पांव धाने के लिये पानी न दिया, पर इस ने मेरे पांव आंसुओं से भिगाए, और अपने बालों से पोंछा! 
Luke 7:45 तू ने मुझे चूमा न दिया, पर जब से मैं आया हूं तब से इस ने मेरे पांवों का चूमना न छोड़ा। 
Luke 7:46 तू ने मेरे सिर पर तेल नहीं मला; पर इस ने मेरे पांवों पर इत्र मला है। 
Luke 7:47 इसलिये मैं तुझ से कहता हूं; कि इस के पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; पर जिस का थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है। 
Luke 7:48 और उसने स्त्री से कहा, तेरे पाप क्षमा हुए। 
Luke 7:49 तब जो लोग उसके साथ भोजन करने बैठे थे, वे अपने अपने मन में सोचने लगे, यह कौन है जो पापों को भी क्षमा करता है? 
Luke 7:50 पर उसने स्त्री से कहा, तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है, कुशल से चली जा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 1-3


शनिवार, 5 अप्रैल 2014

घमण्‍ड


   छोटे बच्चों को सिखाई जाने वाली अंग्रेज़ी कविता, Little Jack Horner, को लेकर मैं सदा ही उलझन में रहा हूँ। कविता की पंक्तियाँ कहती हैं कि छोटा बालक जैक हॉर्नर एक कोने में बैठ कर पाइ नामक वयंजन खा रहा था; उसने अपना अंगूठा पाइ में डाला, पाइ में से एक आलूबुखारा निकाला और बोला "देखो मैं कितना अच्छा हूँ!" यह मुझे बड़ा अटपटा लगता है, कि जैक एक कोने में बैठा यह सब कर रहा था और अपने आप को अच्छा कह रहा था, जबकि कोने में तो उन बच्चों को बैठने के लिए कहा जाता है जो कुछ बुरा करते हैं। मेरी उलझन है कि उस कविता में बयान किए गए जैक के कार्यों में आपस में कोई तालमेल नहीं था, तो क्या जैक अपने प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह सब कर रहा था?

   अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और अपनी उपलब्धियों तथा योग्यताओं को लोगों के सामने प्रदर्षित करना हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। हम हर बात का श्रेय लेने की लालसा रखते हैं और चाहते हैं कि सभी लोग हमारा ध्यान रख कर ही कार्य करें, हम ही सभी गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बने रहें। लेकिन इस प्रकार अपने आप को हर बात का केन्द्र बनाकर जीवन जीना अपने आप को धोखा देना और एक निकृष्ट जीवन जीना है। सच्चाई यह है कि हमारे पापों ने हमें परमेश्वर के सामने दोषी ठहराकर हमें एक ’कोने में’ खड़ा कर दिया है, अर्थात दण्ड का भागी बना दिया है। अब फैसला हमारा है कि हम अपने पापों में बने रह कर दण्ड भोगते रहने को तैयार रहेंगे, अथवा परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा का लाभ उठाकर उस दण्ड को भोगते रहने से बच निकलेंगे।

   प्रेरित पौलुस ने इस स्थिति के संबंध में हमारे लिए अपनी गवाही के द्वारा एक सही दृष्टिकोण रखा है। सांसारिक दृष्टि से पौलुस एक बहुत गुणी, ज्ञानी और प्रभावशाली व्यक्ति था। लेकिन पौलुस ने पहचाना के उसका यह सांसारिक ज्ञान, स्थान और उपलब्धियां परमेश्वर के सामने उसे पाप के दोष से मुक्त ठहराने के लिए कतई सक्षम नहीं थे; वह अपने पापों में ही जी रहा था और उनके दण्ड का भागी था। सत्य तथा वास्तविक वस्तुस्थिति का बोध होते ही पौलुस ने उस अनन्त काल के दण्ड से बचने के एकमात्र उपाय को सहर्ष अपना लेने में कोई समय नहीं गंवाया; उसने प्रभु यीशु के प्रभुत्व को सहर्ष स्वीकार किया, और जिन बातों को वह पहले अपने लाभ की मानता था, उन्हें प्रभु यीशु के आधीन कर दिया - "परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:7-8)।

   जिस वास्तविकता को पौलुस ने पहचाना, उसे संसार के लोगों को आज भी पौलुस के समान ही पहचानने की आवश्यकता है - हमारे गुण, योग्यताएं, स्थान और उपलब्धियां हमें हमारे पापों के दोष एवं दण्ड से मुक्त नहीं करेंगे। पाप के दोष एवं दण्ड से बचने का एकमात्र उपाय है प्रभु यीशु पर किया गया विश्वास और समर्पण। उसके बाद फिर अपने ऊपर किसी प्रकार का घमण्ड करने या अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने का कोई स्थान नहीं रह जाता है, वरन फिर "जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे" (1 कुरिन्थियों 1:31)। - जो स्टोवैल


हम प्रभु यीशु के बिना कुछ भी नहीं हैं, इसलिए सारा आदर और श्रेय प्रभु यीशु को ही दें।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:1-11
Philippians 3:1 निदान, हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो: वे ही बातें तुम को बार बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्हारी कुशलता है। 
Philippians 3:2 कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करने वालों से चौकस रहो, उन काट कूट करने वालों से चौकस रहो। 
Philippians 3:3 क्योंकि खतना वाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते। 
Philippians 3:4 पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं। 
Philippians 3:5 आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं; व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं। 
Philippians 3:6 उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला; और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था। 
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 20-22


शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

आत्मिक शत्रु


  एक प्रातः की बात है, मैं अपने घर के पिछवाड़े के घास के मैदान में एक खरगोश को घास कुतरते हुए देख रहा था। अचानक ही आकाश से तीर के समान एक बाज़ नीचे आया कि झपट कर उसे उठा ले; बाज़ के पंजे खुले हुए थे और नज़रें अपने शिकार पर गड़ी हुई थीं। लेकिन खरगोश ने उस बाज़ को झपटा मारते हुए देख लिया और तेज़ी से सुरक्षित स्थान की ओर भागा। खरगोश और बाज़ में केवल कुछ इंच का फासला था, लेकिन अपनी सावधानी के कारण खरगोश उसके पंजों से बच निकलने में सफल हो गया।

   जैसे वह खरगोश अपने ऊपर होने वाले हमले को समय रहते पहचान कर बचने को भाग निकला, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों को भी अपने आत्मिक शत्रु शैतान से सावधान तथा सुरक्षित बने रहना है। प्रेरित पतरस लिखता है, "सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए" (1 पतरस 5:8)। शैतान हमें घात करने के लिए कई प्रकार के हथकंडे अपनाता है, हमारे दिलों में परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रति शक डालता है (यूहन्ना 8:44), हमें धोखे से फंसाने के प्रयत्न करता है (उत्पत्ति 3:1)।

   शैतान की सभी योजनाएं उसके कपटी स्वभाव के अनुरूप होती हैं, और वह हम पर अनेपक्षित रीति से हमला करने के प्रयास में रहता है। इसलिए उसके हथकंडों की जानकारी रखने (2 कुरिन्थियों 2:11) तथा उसके हमलों के प्रति सदा सचेत रहने के द्वारा हम झूठी शिक्षाओं को पहचान सकते हैं (1 यूहन्ना 4:1-3; 2 यूहन्ना 1:7-11) एवं परीक्षाओं पर जयवन्त हो सकते हैं (मत्ती 26:41)।

   हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का वचन सचेत करता है कि हम अपने आत्मिक शत्रु के प्रति सचेत रहें, जो झूठ वह हमारे कानों में फुसफुसाता है उन्हें पहचान सकें, जो परीक्षाएं वह हमारे सामने लाता है उनमें गिर ना जाएं। यदि हम परमेश्वर के आधीन होकर उसका सामना करेंगे तो वह हमारे पास से भाग निकलेगा (याकूब 4:7)।


विजय की दिशा में पहला कदम होता है अपने शत्रु की युक्तियों को भली भांति पहचान पाना।

परन्तु मैं डरता हूं कि जैसे सांप ने अपनी चतुराई से हव्‍वा को बहकाया, वैसे ही तुम्हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएं। - 2 कुरिन्थियों 11:3

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:5-11
1 Peter 5:5 हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1 Peter 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1 Peter 5:7 और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। 
1 Peter 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए। 
1 Peter 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका साम्हना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं। 
1 Peter 5:10 अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त करेगा। 
1 Peter 5:11 उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 17-19


गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

नाम


   किसी नाम में ऐसा क्या हो सकता है कि हम उसे विशेष समझें? यह प्रश्न मेरे मन में तब उठा जब मैं जैमैका में एक इतवार की प्रातः एक चर्च के बाहर खड़े होकर उस चर्च की एक किशोरी से बात कर रहा था। उस किशोरी ने मुझ से पूछा, "क्या आप मेरा नाम का Our Daily Bread में उल्लेख करेंगे?" मैंने पूछा, "क्या तुम्हारे पास बताने को कोई बात है?" उसने उत्तर दिया, "नहीं, बस मेरे नाम का उल्लेख कर दीजिए।"

   उसके इस आग्रह और उसके नाम के बारे में विचार करते हुए मैं सोचने लगा, उसके माता-पिता ने उस किशोरी का नाम ’जॉयथ’ क्यों रखा होगा? उसके प्रसन्न स्वभाव को देखकर मैंने निषकर्ष निकाला कि यह नाम रखने के पीछे यदि उनका उद्देश्य उसे जीवन में आनन्दित रहने वाली बनाना रहा होगा तो वे अपने उद्देश्य में सफल रहे। अधिकांशतः अभिभावकों के पास यह विकल्प रहता है कि वे अपनी सन्तान का नाम चुनें। लेकिन एक बालक ऐसा भी था जिसका नामकरण बिलकुल अलग रीति से हुआ - ना तो उसके माता-पिता को नाम चुननें की स्वतंत्रता मिली, और ना ही उसे कोई ऐसा नाम दिया गया जो उसे किसी विशेष व्यक्तित्व की ओर जाने को उकसाता।

   वह बालक था यीशु, जिसका नाम और उस नाम का अर्थ एक स्वर्गदूत नें उसके होने वाले सांसारिक पिता को बताया: "वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा" (मत्ती 1:21)। इसमें कोई अचरज की बात नहीं कि ऐसे अद्भुत उद्देश्य वाला नाम, परमेश्वर द्वारा सब नामों में सर्वश्रेष्ठ ठहराया गया, "इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें" (फिलिप्पियों 2:9-10), क्योंकि सारे जगत के लोगों के पापों से मुक्ति और उद्धार पाने के लिए वह ही ठहराया गया, और उसने ही उद्धार का मार्ग सबके लिए तैयार करके दिया है।

   यदि उल्लेख, वर्णन और विश्वास के लायक कोई नाम है तो निसन्देह वह यीशु नाम ही है। - डेव ब्रैनन


यीशु - उसके नाम का अर्थ और उसका उद्देश्य, दोनों एक ही हैं।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: मत्ती 1:18-25
Matthew 1:18 अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उस की माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उन के इकट्ठे होने के पहिले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई। 
Matthew 1:19 सो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की। 
Matthew 1:20 जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा; हे यूसुफ दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। 
Matthew 1:21 वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। 
Matthew 1:22 यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो। 
Matthew 1:23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “ परमेश्वर हमारे साथ”। 
Matthew 1:24 सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहां ले आया। 
Matthew 1:25 और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 14-16


बुधवार, 2 अप्रैल 2014

असाधारण


   एक शताब्दी से भी अधिक समय से गोल्फ के खिलाड़ियों का चरम लक्ष्य रहा है 59 के अंक तक पहुँचना। यह वह अंक था जिस तक सर्वोच्च श्रेणी के गोल्फ स्पर्धा कराने वाली पी०जी०ए० के इतिहास में सन 2010 से पहले केवल तीन बार पहुँचा जा सका था। फिर, सन 2010 में पौल गौडौस ने यह अंक हासिल किया और उसके एक महीने के बाद ही स्टूआर्ट एप्पल्बी ने भी यह कारनामा कर दिखाया। यह देखकर खेल का विशलेषण करके समाचार पत्रों में लिखने वाले कुछ लेखकों ने यह अनुमान लगाया कि गोल्फ का वह असाधारण लक्ष्य अब साधारण होता जा रहा है। इतनी पास पास 59 के अंक तक पहुँचना अद्भुत तो है, लेकिन इस से यह निष्कर्ष निकाल लेना कि अब यह साधारण हो चला है गलत होगा।

   जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं, उनके लिए भी प्रभु यीशु में किए गए विश्वास के द्वारा परमेश्वर से मिली अद्भुत आशीषों को साधारण मान लेना गलत ही होगा। प्रार्थना की आशीष को ही लीजिए, हम मसीही विश्वासियों को यह आदर है कि हम कभी भी, किसी भी स्थिति में, किसी भी बात के लिए अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर पिता से, जिसके कहने भर से सृष्टि की रचना हो गई, खुले दिल से बात कर सकते हैं। ना केवल हमें यह आदर प्राप्त है, वरन परमेश्वर ने हमें आश्वस्त किया है कि प्रार्थना में हम उसके सम्मुख निडर होकर आ सकते हैं: "इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे" (इब्रानियों 4:16)।

   परमेश्वर के सम्मुख आ पाना कोई साधारण बात नहीं है, लेकिन फिर भी कितनी ही दफा हम इस विशेषाधिकार को हलके में ले लेते हैं, उसके महत्व को समझते नहीं हैं। परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों का पिता अवश्य है, एक ऐसा पिता जो हमारे लिए सदैव उपलब्ध रहता है, हमारी प्रार्थनाओं की ओर अपने कान लगाए रहता है, हमें अपने पास आने से कभी रोकता-टोकता नहीं, लेकिन साथ ही वह परमेश्वर भी है और ऐसी खुली रीति से उसके पास आ सकना, यह वास्तव में असाधारण है। परमेश्वर से सेंत-मेंत में उपहार में मिले इस महान आदर के गौरव को अपने जीवनों में या जीवनों के द्वारा कभी कम ना होने दें। - बिल क्राउडर


परमेश्वर अपने बच्चों की प्रार्थनाओं को सुनने के लिए सदा तत्पर रहता है।

सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। - इब्रानियों 10:19, 22

बाइबल पाठ: रोमियों 8:12-26
Romans 8:12 सो हे भाइयो, हम शरीर के कर्जदार नहीं, ताकि शरीर के अनुसार दिन काटें। 
Romans 8:13 क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रीयाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे। 
Romans 8:14 इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। 
Romans 8:15 क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं। 
Romans 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं। 
Romans 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
Romans 8:18 क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं। 
Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। 
Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई। 
Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी। 
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है। 
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं। 
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? 
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 11-13


मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

सामर्थ और आशा


   बात सन 2009 के अगस्त माह की है, ब्लेयर और रौना मार्टिन का 9 वर्षीय पुत्र मैट्टी जो सदा ही अपनी चहलकदमी से उनको व्यस्त रखता था, अचानक ही एक दुर्घटना में मारा गया। मुझे अवसर मिला कि मैं इस परिवार से मिलूँ और उनके शोक में संभागी बनूँ; और मैं जानता हूँ कि यह दुर्घटना उनके लिए कितनी कठिन रही है।

   मैं यह भी जानता हूँ कि इस दुर्घटना के बाद अपनी पीड़ा के लिए उन्होंने परमेश्वर पर शांति और सांत्वना के लिए भरोसा रखा है। मैट्टी की माँ रौना द्वारा कही गई एक बात उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो जीवन की किसी गहरी वादी से होकर निकल रहे हैं। अपनी निराशा की स्थिति में रौना परमेश्वर के वचन बाइबल से एक खण्ड पढ़ रही थी, और उसका ध्यान 2 कुरिन्थियों 1:9 पर गया जहाँ लिखा है, "...हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है"। उसे लगा मानो प्रभु यीशु उस से कह रहा है, "रौना, मैं जानता हूँ कि यह यात्रा तुम्हारे लिए बहुत कठिन रही है और तुम बहुत थक गई हो। अपनी थकान से लज्जित मत हो, वरन उसे मेरी सामर्थ को अपने में ले लेने और मेरी सामर्थ द्वारा आगे बढ़ने का अवसर बनाओ।"

   जब कभी जीवन यात्रा कठिन लगने लगे, तब हम मसीही विश्वासियों के लिए 2 कुरिन्थियों 1:9 इस बात को स्मरण दिलाता है कि हम अकेले नहीं हैं। हमारे लिए सहायता उपलब्ध है, उसकी सहायता जिसने मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा उस सामर्थ का प्रमाण दिया, जो तब से लेकर आज तक अपने प्रत्येक विश्वासी के जीवन में अपनी सामर्थ उँडेलता रहा है और उसका प्रमाण देता रहा है, तथा जो एक दिन अपने सभी विश्वासियों के पुनरुत्थान के द्वारा इस सामर्थ का प्रमाण फिर देगा।

   रौना ने कहा, "मेरी सामर्थ और मेरी आशा केवल प्रभु यीशु ही है" - यही वह सत्य है जो जीवन की हर कठिनाई से सफलतापूर्वक पार उतारने के लिए पर्याप्त है। आज आपकी सामर्थ और आशा कौन है? - डेव ब्रैनन


जीवन के तूफान हमें स्मरण दिलाते हैं कि प्रभु यीशु में एक सुरक्षित और स्थिर स्थान सबके लिए उपलब्ध है।

यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं। - 1 कुरिन्थियों 15:19 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:1-11
2 Corinthians 1:1 पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्थुस में है; और सारे अखया के सब पवित्र लोगों के नाम।
2 Corinthians 1:2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
2 Corinthians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। 
2 Corinthians 1:4 वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। 
2 Corinthians 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है। 
2 Corinthians 1:6 यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं। 
2 Corinthians 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो। 
2 Corinthians 1:8 हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे। 
2 Corinthians 1:9 वरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। 
2 Corinthians 1:10 उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा। 
2 Corinthians 1:11 और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्यवाद करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 8-10