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शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

निकट


   मेरा चचेरे भाई केन चार वर्ष तक कैंसर के साथ साहसपूर्वक जीता रहा। उसके अन्तिम दिनों में उसकी पत्नि, उसके तीन बच्चे और अनेक नाती-पोते उसके कमरे में उससे मिलने आते-जाते रहते थे, अलविदा के विशेष पल उसके साथ बिताते थे। एक समय, ज़रा सी देर को वह अपने कमरे में अकेला था, और उस समय ही में वह अनन्त में प्रवेश कर गया। जब परिवारजनों को यह एहसास हुआ कि वह जा चुका है तो उसकी एक पोती ने, जो अभी बालिका ही थी, बड़ी मासूमियत से कहा, "दादाजी तो चुपचाप से खिसक लिए!" एक पल केन का प्रभु पृथ्वी पर उसके साथ था, और अगले पल केन की आत्मा अपने प्रभु के साथ अनन्त काल के लिए स्वर्ग में थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का भजन 16 केन का प्रीय भजन था और वह चाहता था कि उसकी यादगार में रखी गई प्रार्थना सभा में वह भजन पढ़ा जाए। केन भजनकार दाऊद के साथ पूर्णतः सहमत था कि परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत संबंध से बढ़कर और कोई बहुमूल्य धन नहीं है। वह दाऊद के साथ इस बात में भी सहमत था कि कब्र किसी मसीही विश्वासी के जीवन को छीन कर रख नहीं सकती क्योंकि परमेश्वर उनका शरणस्थान है; दाऊद ने लिखा, "क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा" (भजन 16:10)।

   प्रभु यीशु के बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के कारण हम मसीही विश्वासियों को यह दृढ़ आश्वसन है कि हम भी मृत्योप्रांत एक दिन पुनः जी उठेंगे (प्रेरितों 2:25-28; 1 कुरिन्थियों 15:20-22) और दाऊद तथा केन के समान हम भी पाएंगे कि परमेश्वर के, "...निकट आनन्द की भरपूरी है..." (भजन 16:11)। - ऐनी सेटास


परमेश्वर हमारी निधि है; उसकी निकटता अभी हमारा शरणस्थान है, तथा स्वर्ग में आनन्द की भरपूरी होगा।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 16:1-11
Psalms 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं। 
Psalms 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं। 
Psalms 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं। 
Psalms 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा।
Psalms 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है। 
Psalms 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।
Psalms 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है। 
Psalms 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।
Psalms 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा। 
Psalms 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।
Psalms 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56



गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

आनन्दायक


   एक त्रासदी ने उस परिवार में एक ऐसा खालीपन ला दिया जिसे फिर कुछ नहीं भर सका। वह बच्चा जिसने अभी हाल ही में चलना आरंभ किया था, बिल्ली के पीछे पीछे सड़क पर आ गया और एक ट्रक द्वारा कुचला गया; उसके माता-पिता ने सड़क से उसके बेजान शरीर को उठा कर चिपटा लिया। उस बच्चे की 4 वर्षीय बहन यह सब स्तब्ध होकर देख रही थी। वर्षों तक उस त्रासदी के पल का वह खालीपन उस परिवार को उदासी से घेरे रहा। उनकी भावनाएं मानों जड़ हो गई थीं; यदि कोई दिलासा थी तो वह उस त्रासदी के सुन्नपन में थी, किसी भी प्रकार की राहत कल्पना से परे थी।

   लेखिका ऐन वोसकैम्प वह 4 वर्षीय बहन थी जिसने यह सब देखा और इस घटना के दुख ने जीवन और परमेश्वर के प्रति उसके दृष्टिकोण को आकार दिया। जिस संसार में वह बड़ी हुई, उसमें अनुग्रह के विचार का नगण्य स्थान था, आनन्द एक ऐसी धारणा थी जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं था।

   एक युवा माँ के रूप में ऐन वोसकैम्प ने उस भ्रामक वस्तु को खोजने का निर्णय लिया जिसे परमेश्वर का वचन बाइबल आनन्द कहती है। उसकी खोज ने उसे बताया कि बाइबल में जिस मूल ग्रीक भाषा के शब्द का अनुवाद आनन्द और अनुग्रह हुआ है वह ग्रीक भाषा के एक अन्य शब्द से निकला है जिसका अर्थ है धन्यवादी। ऐन ने सोचा, "क्या यह इतना सरल हो सकता है?" अपनी इस खोज को परखने करने के लिए वोसकैम्प ने उसे मिले हुए 1,000 उपहारों के लिए धन्यवाद देने का निर्णय लिया। उसने धीरे धीरे धन्यवाद देना आरंभ किया, किंतु शीघ्र ही कृतज्ञता उसके जीवन से उनमुक्त होकर प्रवाहित होने लगी। ऐन वोसकैम्प ने पाया कि धन्यवाद देने से उसके जीवन में आनन्द की वे भावनाएं जागृत हो उठीं जिन्हें वह बहुत वर्ष पहले मृतक समझ चुकी थी। उसने अपने अनुभव से सीखा कि धन्यवाद देना आनन्दायक होता है।

   हम सामान्यतः कार्य होने के बाद धन्यवाद करते हैं परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि परमेश्वर के सम्मुख प्रार्थना भी धन्यवाद के साथ प्रस्तुत की जाए (फिलिप्पियों 4:6-7); और प्रभु यीशु ने अपने उदाहरण के द्वारा इसके सत्य को दिखाया जब लाज़र को मृतकों में से जिला उठाने की प्रार्थना से पहले ही उन्होंने परमेश्वर का धन्यवाद किया (यूहन्ना 11:41)।

   हर बात में परमेश्वर के धन्यवादी होना सीखें, और वह आपके जीवन को आनन्द से परिपूर्ण बना देगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


धन्यवाद से भरा हृदय आनन्द से भरे जीवन का स्त्रोत है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:32-44
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता? 
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था। 
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए। 
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी। 
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है। 
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है। 
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ। 
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था : यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29



बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

तिरस्कृत


   आर्थिक विशेषज्ञ, वॉरन बफेट संसार के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक हैं; 19 वर्ष की आयु में हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल ने उन्हें अस्वीकृत कर दिया था। वे बताते हैं कि हार्वर्ड में दाखिले के लिए हुए साक्षात्कार में असफल होने के बाद भय के भाव ने उन्हें घेर लिया, और साथ ही इस अस्वीकृति के कारण उन्हें अपने पिता की होने वाली प्रतिक्रीया की भी चिंता थी। लेकिन अब पीछे मुड़कर उन सब बातों और घटनाओं के प्रभावों को देखने पर वॉरन कहते हैं: "मेरे जीवन में सब कुछ जो हुआ, वह भी जिसे मैं उस समय मुझे कुचल देने वाली घटना समझता था, मेरी भलाई ही के लिए था।"

   तिरस्कृत होना दर्दनाक होता है, इससे कोई इन्कार नहीं है, लेकिन संसार से तिरस्कृत होने के कारण हमें परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करने से रुक नहीं जाना चाहिए। इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण प्रभु यीशु मसीह हैं। प्रभु यीशु को उसके अपने लोगों ने ही स्वीकार नहीं किया (यूहन्ना 1:11), बाद में उसके अनेक अनुयायी उसे छोड़ कर चले गए (यूहन्ना 6:66)। लेकिन जैसे प्रभु यीशु का यह तिरस्कार परमेश्वर की योजना में था (यशायाह 53:3), वैसे ही परमेश्वर के पुत्र का इस तिरस्कार के बावजूद अपनी सेवकाई को जारी रखना और पूरा करना भी था। प्रभु यीशु ने ना केवल पृथ्वी के लोगों के तिरस्कार को सहा, वरन वे यह भी जानते थे कि उनके बलिदान के समय, जब वे कलवरी के क्रूस पर लटके होंगे, उनका स्वर्गीय पिता भी उनसे मूँह मोड़ लेगा, और यह हुआ भी (मत्ती 27:46)। लेकिन इस सब के बावजूद प्रभु यीशु ने बीमारों को चंगा किया, दुष्टात्माओं को निकाला और पाप क्षमा तथा उद्धार के सुसमाचार का प्रचार किया (प्रेरितों 10:38) और क्रूस पर अपने बलिदान से पहले वे परमेश्वर पिता से कह सके "जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा कर के मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है" (यूहन्ना 17:4)।

   यदि तिरस्कृत होना, परमेश्वर द्वारा आपको सौंपे गए कार्य को पूरा करने में बाधा बन रहा है, तो हिम्मत ना हारें, अपनी सेवकाई में डटे रहें। स्मरण रखे कि प्रभु यीशु ने भी यह दुख सहा है और वह आपकी परिस्थितियों तथा भावनाओं को भली-भांति समझ सकता है, इसलिए वह कहता है: "जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना 6:37)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के समान हमें कोई अन्य नहीं समझ सकता।

क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। - इब्रानियों 4:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-13
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43



मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015

ज्योतिसतंभ


   उत्तरी मिशिगन प्रांत में स्थित मिशिगन झील के एक प्रायद्वीप पर स्थित ज्योतिस्तंभ "मिशन पॉइन्ट लाइटहाउस" कहलाता है। इसे झील के उस तट के समीप पानी में स्थित चट्टानों और रेत के टीलों में जलयानों के फंसने से बचने के लिए सन 1870 में बनाया गया था। लेकिन इसका यह नाम एक अन्य प्रकार के ज्योतिस्तंभ के कारण पड़ा - निकट ही स्थित "ओल्ड मिशन चर्च" के कारण जिसका निर्माण 31 वर्ष पहले हुआ था। सन 1839 में पादरी पीटर डोहर्टी ने उस प्रायद्वीप पर स्थित मूल अमरीकी निवासियों के बीच मसीही सेवकाई की अपनी बुलाहट को स्वीकार किया और वहाँ पर एक चर्च की स्थापना करी। उनके नेतृत्व में किसानों, शिक्षकों और कारीगरों के मेहनती समाज ने एक साथ मिलकर कार्य किया जिससे उस इलाके ने बहुत उन्नति पाई।

   जब मसीही विश्वासियों का समूह एक साथ मिलकर अपनी सेवकाई की ज़िम्मेदारी को पूरा करता है, तो उनका विश्वास और सहभागिता पाप के अन्धकार में पड़े संसार को आत्मिक ज्योति तथा उन्नति प्रदान करता है (फिलिप्पियों 2:15)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा, "तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:14-16)।

   ज्योतिस्तंभ "मिशन पॉइन्ट लाइटहाउस" जलयानों को पानी की सतह के नीचे छिपे खतरों के लिए सचेत करता था और "ओल्ड मिशन चर्च" लोगों को आत्मिक खतरों के लिए सचेत करके, मानने वालों को उन आत्मिक खतरों से सुरक्षित बचकर निकलने के मार्ग - प्रभु यीशु के बारे में बताता था।

   आज भी हम मसीही विश्वासी उस ज्योतिसतंभ के समान कार्य करने के लिए संसार में रखे गए हैं जिससे अपने जीवनों और मसीही विश्वासियों की मण्डलियों द्वारा संसार को पाप के विनाश के बारे में सचेत कर सकें और पाप से बच कर सुरक्षित निकल पाने के मार्ग प्रभु यीशु के बारे में बता सकें। हम परमेश्वर के ज्योतिस्तंभ हैं क्योंकि परमेश्वर की ज्योति प्रभु यीशु मसीह हम में रहता है, कार्य करता है।


जब मसीही विश्वासियों में होकर मसीह की ज्योति चमकती है, तो वे पाप में भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाने वाले बन जाते हैं।

ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्‍कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों की नाईं दिखाई देते हो)। - फिलिप्पियों 2:15

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-16
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20



सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

विधि


   हमारे पोते के जन्मदिन को मनाने के लिए मेरी पत्नि ने एक बड़ा सा चॉकलेट केक बना कर सजाया। यह करने के लिए उसने अपनी व्यंजन बनाने की विधियाँ सिखाने वाली पुस्तक को निकाला, उसमें लिखी विधि के अनुसार सही अनुपात में आवश्यक सामग्री को एकत्रित किया, फिर दी गई केक बनाने की विधि का क्रमवार अनुसरण किया, और केक बनकर तैयार हो गया। कितना अच्छा होता यदि जीवन भी कुछ ऐसा ही होता - जीने के कुछ सरल क्रमों का पालन करें और आनन्दमय जीवन का सुख लें!

   लेकिन जीवन ऐसा सरल नहीं है। हम एक पाप में पतित संसार में रहते हैं और ऐसी कोई सरल विधि नहीं है जिसके पालन से हम हानि, पीड़ा, अन्याय और कष्ट से विहीन जीवन व्यतीत कर सकेंगे। जीवन की तकलीफों में हमें एक ऐसे सहायक और मार्गदर्शक की आवश्यकता है जिसने स्वयं यह सब अनुभव किया हो किंतु उन सब पर जयवन्त रहा हो और अब हमें भी जयवन्त कर सकता हो। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री में ऐसे एकमात्र जन - प्रभु यीशु के विषय में लिखा है: "क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला" (इब्रानियों 4:15)। प्रभु यीशु मसीह जो हमें जीवन देने के लिए बलिदान होकर मृतकों में से जी उठा, पूर्ण रीति से सक्षम है कि हमें जीवन के सभी दुखों और अन्धकारमय अनुभवों के पार सकुशल निकाल लाए, क्योंकि "निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया..." (यशायाह 53:4)।

   प्रभु यीशु जानता है कि ऐसी कोई सरल विधि नहीं है जिससे जीवन के दुख मिटाए जा सकें, इसलिए वह स्वयं संसार में आ गया, हमारे दुखों को अपने ऊपर ले लिया, उन से सुरक्षित निकल जाने का मार्ग बनाकर दे दिया। क्या आज आप उस पर विश्वास करके अपने दुखों और आँसुओं के जीवन को उन दुखों से पार सुरक्षित निकाल ले जाने के लिए उसे समर्पित करेंगे। जीवन की सुरक्षा और अनन्त आनन्द की इससे सरल विधि और कहीं नहीं है, कोई नहीं है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु जो हमें जीवन देने के लिए बलिदान हो गया, वही हमें जीवन के दुखों से पार भी लगा सकता है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तिमुथियुस 1:12

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:11-16
Hebrews 4:11 सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उन की नाईं आज्ञा न मान कर गिर पड़े। 
Hebrews 4:12 क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। 
Hebrews 4:13 और सृष्‍टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं।
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे। 
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। 
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:21-41



रविवार, 22 फ़रवरी 2015

अभिषिक्त


   अन्तरिक्ष यान वॉयएजर 1 को सन 1977 में प्रक्षेपित किया गया; अब वह धरती से 10 अरब मील दूर हमारे सौर मण्डल के बाहरी किनारे के समीप है। फरवरी 1990 में जब यह यान पृथ्वी से 4 अरब मील की दूरी पर था तब वैज्ञानिकों ने उसके कैमरे को पृथ्वी की ओर घुमाया और पृथ्वी की तसवीरें खींचीं। उन तसवीरों में पृथ्वी रिक्त स्थान के अथाह समुद्र में एक छोटे से नीले बिन्दु के समान दिखाई देती है। कलपना से भी परे सृष्टि के फैलाव में हमारा यह गृह एक बहुत सूक्ष्म कण के समान है। इस विशाल और अपरिमित तारा समूहों के फैलाव में विद्यमान इस सूक्ष्म से कण पर 7 अरब से भी अधिक लोग रहते हैं, जिनमें से एक आप हैं!

   यदि यह तथ्य आपको महत्वहीन अनुभव करवाते हैं तो ज़रा ठहरिए, परमेश्वर के पास आपके लिए एक अच्छी खबर है। परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा दाऊद द्वारा लिखे गए भजनों में से एक में वह ऐसी बात कहता है जिसके संदर्भ में आप सितारों की ओर देखकर भी आनन्दित होंगे; दाऊद बताता है कि हम इस महान और विशाल सृष्टि के सृष्टिकर्ता परमेश्वर की नज़रों में अति महत्वपूर्ण और बहुमूल्य हैं: "जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?  क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है" (भजन 8:3-5)। दाऊद द्वारा लिखी गई इस बात पर थोड़ा ठहर कर विचार कीजिए; जिस सृष्टि के छोर को मनुष्य द्वारा बनाया कोई यंत्र या दूरबीन देख नहीं पाई, अपने सारे वैज्ञानिक उपकरणों और ज्ञान के बाद भी जिसमें विद्यमान तारा गणों और नक्षत्रों की संख्या का मनुष्य केवल अनुमान मात्र लगा सकता है, गिन नहीं सकता, उस सृष्टि का रचियता परमेश्वर आपको तथा आपके बारे में व्यक्तिगत रीति से खुलासे से जानता है, आपसे लगाव रखता है, आपकी चिंता करता है, आपसे इतना प्रेम करता है कि उसने प्रभु यीशु को स्वर्ग से पृथ्वी पर आपके बदले अपने प्राण बलिदान करने के लिए भेज दिया जिससे आप परमेश्वर के साथ रह सकें। आप अपनी नज़रों में गौण एवं महत्वहीन हो सकते हैं, परमेश्वर की नज़रों में कदापि नहीं।

   परमेश्वर की सृष्टि को अचरज से निहारें, सृष्टि के सृष्टिकर्ता की महिमा करें, उसे धन्यवाद दें क्योंकि उसने आपको प्रभु यीशु में अभिषिक्त हो कर अपने साथ स्वर्ग में रहने का निमंत्रण और मार्ग दिया है। - डेव ब्रैनन


सृष्टि में हम परमेश्वर की सामर्थ और प्रभु यीशु में हम परमेश्वर का प्रेम देखते हैं।

हे यहोवा, मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है, या आदमी क्या है, कि तू उसकी कुछ चिन्ता करता है? - भजन 144:3

बाइबल पाठ: भजन 8
Psalms 8:1 हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है। 
Psalms 8:2 तू ने अपने बैरियों के कारण बच्चों और दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नेव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेने वालों को रोक रखे। 
Psalms 8:3 जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं; 
Psalms 8:4 तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? 
Psalms 8:5 क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है। 
Psalms 8:6 तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है; तू ने उसके पांव तले सब कुछ कर दिया है। 
Psalms 8:7 सब भेड़-बकरी और गाय-बैल और जितने वनपशु हैं, 
Psalms 8:8 आकाश के पक्षी और समुद्र की मछलियां, और जितने जीव- जन्तु समुद्रों में चलते फिरते हैं। 
Psalms 8:9 हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 4-6
  • मरकुस 4:1-20



शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

मिट्टी के बरतन


   जब आप कोई बहुमूल्य आभूषण खरीदते हैं तो उसे एक डब्बे में रखकर आपको दिया जाता है, जिसमें अन्दर किसी गहरे रंग का मखमल लगा होता है। इससे आपका ध्यान डब्बे या मखमल की ओर नहीं वरन उस पृष्ठभूमि में चमक रहे उस सुन्दर आभूषण की ओर जाता है। यदि डब्बे या अन्दर के मखमल को बहुत सजावट के साथ लगाया जाए तो देखने वालों का ध्यान आभूषण से हटकर डब्बे की ओर जा सकता है।

   इससे मुझे प्रेरित पौलुस द्वारा मसीही सेवकाई के विषय में कही गई बात स्मरण आती है; पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा, "परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे" (2 कुरिन्थियों 4:7)। मसीही सेवकाई में कभी कभी इस बात को नज़रन्दाज़ कर देना सहज हो जाता है कि हम मसीही विश्वासी बाहरी "डब्बे" मात्र ही हैं, असली सुन्दरता और मूल्य तो उस प्रभु का है जो हमारे अन्दर रहता है और हम में होकर कार्य करता है। क्योंकि हम इस तथ्य को भूल बैठते हैं इसलिए जब हम किसी को क्षमा कर देते हैं, या किसी पर दया दिखाते हैं, या कोई बड़ा दान करते हैं या मसीही सेवकाई में होने वाली अन्य उपलब्धियों के लिए स्वयं श्रेय लेने लग जाते हैं, अपने लिए महिमा अर्जित करने लग जाते हैं। ऐसा करने से हम उस परमेश्वर प्रभु को जो हमारे अन्दर रहकर और हम में होकर कार्य करता है उसकी महिमा और गौरव से वंचित करते हैं और उसके प्रताप को संसार के सामने प्रकट होने और लोगों को उसकी ओर आकर्षित होने में बाधा बनते हैं।

   जब हम अपने प्रभु यीशु मसीह के लिए कार्य करते हैं, तो उद्देश्य स्वयं श्रेय लेने का नहीं वरन उसे ही सारा आदर, गौरव और महिमा देने का होना चाहिए; जितना हम अपने आप को पीछे और मसीह यीशु को आगे करेंगे, संसार उतनी भली-भांति उसकी महिमा और सामर्थ को जानने पाएगा। हम अपने आप को जितना उसके सामने झुकाते और उसके पीछे छुपाते रहेंगे, प्रभु उतना अधिक हमें आदर का पात्र बनाता जाएगा और उठाता जाएगा। इसीलिए पौलुस लिखता है कि प्रभु रूपी यह धन मिट्टी के बरतन रूपी साधारण से मनुष्यों में रखा गया है, जिससे देखने वाले मिट्टी के बरतन से नहीं वरन उसके अन्दर रखे बहुमूल्य खज़ाने से आकर्षित हों; उस खज़ाने से जो अपनी उपस्थिति से उस मिट्टी के बरतन का मूल्य बढ़ा देता है, वरना सजाए हुई मिट्टी के बरतन की क्या कीमत - रहेगा तो वह मिट्टी का ही। - जो स्टोवैल


अपने जीवन से मसीह यीशु की चमक को दिखाएं।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:7-15
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। 
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर। 
2 Corinthians 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय मे लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं। 
2 Corinthians 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा। 
2 Corinthians 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3