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शनिवार, 18 जुलाई 2015

सेवकाई और नम्रता


   मुझे स्वावलंबी बनने में सहायता करने वाली एक पुस्तक में दी गई सलाह अच्छी तो लगी, परन्तु उसके व्यावहारिक होने पर मुझे सन्देह है। पुस्तक के लेखक ने कहा कि केवल वह करो जिसे करने में तुम निपुण हो, क्योंकि तब तुम सबसे अधिक सन्तुष्टि प्राप्त करोगे। लेखक चाह रहा था कि उसके पाठक अपने लिए ऐसी जीवन शैली बनाएं जो उनके अनुकूल हो। अब मैं आपके बारे में तो नहीं जानता किंतु अपने लिए कह सकता हूँ कि यदि मैं केवल वही करूँ जिसमें मैं निपुण हूँ, तो कुछ खास नहीं कर पाऊँगा!

   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 10 अध्याय में हम दो भाईयों तथा प्रभु यीशु के चेलों के बारे में पढ़ते हैं जो अपने जीवन के लिए कुछ विशेष चाहते थे; वे चाहते थे कि प्रभु यीशु के राज्य में वे दोनों प्रभु यीशु के दाएं और बाएं ओर बैठें (पद 37)। उनकी यह इच्छा सुनकर शेष 10 चेलों को बहुत बुरा लगा (पद 41); संभवतः वे 10 चेले भी अपने लिए यही चाहते होंगे! लेकिन प्रभु यीशु ने इस विवाद के अवसर का सदुपयोग अपने चेलों को एक अन्य प्रकार का जीवन जीने के बारे में सिखाने के लिए किया - सेवकाई का जीवन। प्रभु यीशु ने उन सब से कहा: "...जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने" (पद 43-44)। प्रभु यीशु के कथन से स्पष्ट है कि परमेश्वर की नज़रों में उसके अनुयायियों को अन्य मनुष्यों पर प्रभुता एवं घमण्ड का नहीं वरन सब के प्रति सेवकाई और नम्रता का जीवन जीना है।

   स्वयं प्रभु यीशु, परमेश्वर के पुत्र ने यही करके अपने जीवन से सब के लिए यह उदाहरण प्रस्तुतु किया। इसी वार्तालाप में प्रभु यीशु ने अपने विषय में अपने चेलों से कहा: "क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (पद 45)। अपने तथा सम्पूर्ण जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के उदाहरण का परमेश्वर की पवित्र आत्मा की सामर्थ से अनुसरण कर के, हम भी परमेश्वर को भाने वाला यह सेवकाई और नम्रता का जीवन जी सकते हैं। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के लिए बड़ी सेवकाई के अवसर तो कम ही आते हैं, परन्तु मनुष्यों की सेवकाई के छोटे छोटे अवसर सदा ही हमारे चारों ओर रहते हैं।

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। - फिलिप्पियों 2:5-7 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17


शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

वार्तालाप


   संभवतः आप इस प्रसिद्ध कथन को जानते हों: "महान लोग विचारों के बारे चर्चा करते हैं; साधारण लोग घटनाओं के बारे चर्चा करते हैं और छोटे लोग व्यक्तियों के बारे में चर्चा करते हैं।" इसमें कोई असंगत बात नहीं कि लोगों के बारे में बात करने का भी तरीका होता है जिससे उन्हें सम्मान मिल सके, लेकिन उपरोक्त कथन सामान्यतः चर्चा करने वाले लोगों की मानसिकता पर एक टिप्पणी है जो उनके व्यक्तित्व का परिचय देती है। आज के संसार में सभी पर सामाजिक या व्यवसायिक मीडिया की लगातार बनी रहने वाली नज़र के कारण हमें लोगों के जीवनों को ऐसी अन्तरंगता से देखने को मिलता रहता है जो अनुपयुक्त हो सकता है।

   यह और भी बुरा तब हो जाता है जब दुसरों के जीवनों के बारे में अनुपयुक्त सूचनाओं की यह बाढ़ हमारी बातचीत का ऐसा विषय बन जाती है जहाँ व्यर्थ की कानफूसी अपवाद नहीं वरन सामान्य लगने लगती है, और यह केवल प्रसिद्ध और गणमान्य लोगों को लेकर ही हो ऐसा भी नहीं। हमारे कार्यस्थल, चर्च, पड़ौस, मित्र-मण्डली और परिवार के लोग भी इस व्यर्थ कानाफूसी के विषय बनते चले जाते हैं और फिर लोगों की तेज़ ज़ुबानों के लक्ष्य बनकर उन्हें ऐसी चर्चाओं की पीड़ा सहनी पड़ती है जिन चर्चाओं को कभी होना ही नहीं चाहिए था।

   हम अपने वार्तालापों में ऐसे शब्दों के प्रयोग को कैसे रोक सकते हैं जिन से दूसरों को कष्ट होता है? यह ध्यान रखने के द्वारा कि परमेश्वर भी हमारे प्रत्येक वार्तालाप को सुनता है और उसका हिसाब रखता है और एक दिन उन सब बातों का हमसे हिसाब अवश्य लेगा (मत्ती 12:36)। हमारा परमेश्वर पिता हम मसीही विश्वासियों से चाहता है कि हम अपने शब्दों का बहुत सावधानी से प्रयोग करें, ऐसा करें जिससे उसे किसी प्रकार की कोई शर्मिंदगी ना हो और हम भी भजनकार के साथ कह सकें: "मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!" (भजन 19:14)

   जब हम दूसरों के बारे में अपने वार्तालाप और शब्दों के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं, तब हम परमेश्वर को आदर देते हैं। उसकी सहायता से हम अपने वार्तालाप को संसार के लोगों में उसे महिमा देने और उसका आदर करने का माध्यम बना सकते हैं। होने दें कि आपके शब्द, आपका वार्तालाप आपके पिता परमेश्वर के लिए महिमा और आदर का कारण बने। - बिल क्राउडर


शब्दों से किसी को आहत करने से बेहतर है कि हम अपनी ज़ुबान को ही दबा लें।

और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। - मत्ती 12:36

बाइबल पाठ: भजन 19
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।। 
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38


गुरुवार, 16 जुलाई 2015

शुद्ध तथा बलवन्त


   हीरे मज़बूत एवं ठोस, सुन्दर और बहुमूल्य रत्न होते हैं, परन्तु उनका आरंभ बहुत साधारण से काले, भद्दे और ज्वलनशील कोएले (कार्बन) के रूप में होता है। वर्षों तक अत्याधिक तापमान और दबाव सहते सहते यह कार्बन शुद्ध, चमकीले, सुन्दर और मज़बूत हीरे में परिवर्तित हो जाता है, जिसे तराशने और संवारने से वह बहुमूल्य बन जाता है। यह उन्हें आत्मिक सामर्थ और निखार प्राप्त करने की प्रक्रिया को समझने के लिए उचित उदाहरण भी बनाता है।

   प्रेरित पौलुस ने कहा कि परमेश्वर की सामर्थ हमारी निर्बलता में सिद्ध होती है (2 कुरिन्थियों 12:9)। काश कि यह सच नहीं होता, क्योंकि मुझे निर्बल होना अच्छा नहीं लगता। शारिरिक निर्बलता क्या होती है यह मैंने अपने कैंसर के लिए दी जाने वाली कीमोथैरपी और विकिरण से इलाज द्वारा अच्छे से सीखा है। फिर एक छोटी सी घटना ने मुझे अनायास ही भावनाओं की दुर्बलता में भी डाल दिया। इलाज में अपने 3 फीट लंबे बाल गंवा कर लगभग एक साल के लिए गंजा हो जाने से गुज़रने के बाद, एक बार का गलत रीति से मेरे बालों का काटा जाना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं होनी चाहिए थी, परन्तु वह हो गई और मैं इस बात को लेकर अपने भावनात्मक रूप से निर्बल हो जाने के कारण बहुत शर्मिंदा अनुभव करती रही। हम में से कुछ लोग अपने चारों ओर सामर्थ और आत्म-निर्भरता का आवरण लपेटे रहते हैं। परन्तु कोई आक्समक दुर्घटना, या अस्वस्थता, या बेरोज़गारी या किसी प्रीय संबंध का विच्छेद हमें परमेश्वर के अनुग्रह पर अपनी पूर्ण निर्भरता का स्मरण करवा देता है।

   जब कभी हमें कष्ट की भट्टी से होकर निकलना पड़े, वह चाहे शारीरिक हो या भावनात्मक, चाहे बाहर से आने वाला सताव हो या हमारे अन्दर से उठने वाली ग्लानि और शर्मिंदगी - सदा स्मरण रखें कि परमेश्वर का उद्देश्य हमें इन सभी दबाव और कष्टों द्वारा शुद्ध तथा बलवन्त बनाना ही है, हमारी भलाई के लिए है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


कष्ट वह भट्टी हैं जिसका उपयोग परमेश्वर हमें शुद्ध तथा बलवन्त करने के लिए करता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:1-10
2 Corinthians 12:1 यद्यपि घमण्‍ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशों की चर्चा करूंगा। 
2 Corinthians 12:2 मैं मसीह में एक मनुष्य को जानता हूं, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देह सहित, न जाने देह रहित, परमेश्वर जानता है, ऐसा मनुष्य तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया। 
2 Corinthians 12:3 मैं ऐसे मनुष्य को जानता हूं न जाने देह सहित, न जाने देह रहित परमेश्वर ही जानता है। 
2 Corinthians 12:4 कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं। 
2 Corinthians 12:5 ऐसे मनुष्य पर तो मैं घमण्‍ड करूंगा, परन्तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्‍ड न करूंगा। 
2 Corinthians 12:6 क्योंकि यदि मैं घमण्‍ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तोभी रुक जाता हूं, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे। 
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17
  • प्रेरितों 20:1-16


बुधवार, 15 जुलाई 2015

अन्त


   मैं यह स्वीकारता हूँ कि कभी कभी मैं किसी पुस्तक के अन्त को पहले पढ़ लेता हूँ और फिर उसे आरंभ से पढ़ना शुरू करता हूँ। ऐसा करने से मैं यह जान लेता हूँ कि कौन से पात्र अन्त तक बने रहेंगे और कौन से कहानी के बढ़ने के दौरान कहीं रह जाएंगे। यह जानकर कि पुस्तक का अन्त कैसा होगा, मैं आराम से मज़ा ले लेकर उस कहानी को पढ़ने पाता हूँ, कहानी के बढ़ने के साथ साथ उसके पात्रों के चरित्रों के उजागर होने का आनन्द लेने पाता हूँ।

   इसी प्रकार परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य को पढ़ने से हम मसीही विश्वासी प्रोत्साहन और शांति पा सकते हैं। बाइबल बारंबार हम मसीहियों को परिस्थितियों पर जयवन्त होने के लिए कहती है (1 यूहन्ना 4:4; 5:4; प्रकाशितवाक्य 2:7,11,17,26; 3:5,12,21), और बाइबल की अन्तिम पुस्तक हमें बताती है कि प्रभु यीशु में होकर हम ना केवल वर्तमान में जयवन्त रह सकते हैं वरन अपने प्रभु में होकर हम अनन्त काल तक जयवन्त तथा आशीषित बने रहेंगे।

   प्रकाशितवाक्य का लेखक यूहन्ना जब नए आकाश और नई पृथ्वी के प्रकट होने की बात लिखता है (प्रकाशितवाक्य 21:1), तब वह इसका भी वर्णन करता है कि प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेने वालों के लिए वह अन्तिम विजय कैसी होगी। उस अन्तिम विजय के समय हम देखेंगे कि प्रभु सदा हमारे साथ रहेगा (पद 3), मृत्यु, आँसु, दुख और पीड़ा का अन्त हो जाएगा (पद 4), वह हमारे लिए सब कुछ नया कर देगा (पद 5); साथ ही प्रभु यह भी घोषणा करता है कि, "जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा" (प्रकाशितवाक्य 21:7)।

   जब आज की परीक्षाएं आपको अपने सहने की सामर्थ से बढ़कर लगें, तो प्रभु द्वारा हमें प्रकाशितवाक्य में दिखाए गए संसार, पाप और शैतान के अन्त पर ध्यान करें, और यह ध्यान रखें कि अन्त बहुत निकट है  और आप किसी भी समय अनन्त काल के लिए प्रभु यीशु के साथ होंगे, फिर वहाँ की शान्ति और आशीषों का कभी कोई अन्त नहीं होगा। - रैन्डी किल्गोर


आज की आशा के लिए अन्त, अर्थात परमेश्वर के साथ अनन्तकाल की आशीषों को स्मरण रखें।

बुद्धिमान महिमा को पाएंगे, और मूर्खों की बढ़ती अपमान ही की होगी। - नीतिवचन 3:35

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 13-15
  • प्रेरितों 19:21-41


मंगलवार, 14 जुलाई 2015

चेतावनी


   उरूगुऐ राष्ट्र के एक रेतीले समुद्र-तट पर आंशिक रूप से रेत में दबी तथा आकाश की ओर उठी हुई कॉन्क्रीट से बनी विशाल ऊँगलियाँ हैं। इसे स्थानीय लोग डूब जाने वालों का स्मारक, "ला मनो" अर्थात "हाथ" कहते हैं। इस स्मारक को चिली देश के कलाकार मारियो इर्राज़बल ने तैरने वालों को डूबने के खतरे के बारे में सचेत करने के लिए बनाया था। यद्यपि यह चेतावनी चिन्ह अब सैलानियों के लिए आकर्षण का स्थान बन गया है, परन्तु आज भी इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र में तैरने जाने वालों को समुद्र के जोखिम के बारे में चेतावनी देना ही है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी परमेश्वर ने हमारे लिए अनेक चेतावनी चिन्ह रखे हैं। बाइबल में इब्रानियों नामक पुस्तक हमारे आत्मा के लिए जोखिमों के बारे में बताती है; जैसे: "हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए" (इब्रानियों 3:12-13)। मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा किए हुए कनान देश जा रहे इस्त्राएलियों का परमेश्वर और उसकी बातों के प्रति अविश्वास और बलवा इस पद का संदर्भ है।

   यद्यपि इस्त्रएलियों के साथ यह घटना इब्रानियों की पुस्तक के लिखे जाने से कई शताबदियों पूर्व घटित हुई थी, उस घटना के आत्मिक सिद्धांत अब भी उतने ही महत्वपूर्ण तथा मान्य हैं जितने उस समय और इब्रानियों की पुस्तक लिखे जाने के समय थे। जो शिक्षा तथा चेतावनी परमेश्वर ने हमारे लिए यहाँ रखी है वह है पाप के कारण उत्पन्न होने वाली मनों की कठोरता, जिसका ना केवल स्वयं हमें प्रतिरोध करना है, वरन दूसरों को भी इसके विषय में सचेत करते रहना है।

   चेतावनी चिन्ह हमें सुरक्षित रखने के लिए दिए जाते हैं। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उसने अपने जीवते वचन बाइबल में हमारे लाभ और सुरक्षा के लिए चेतावनियाँ दी हैं। यह हमारे प्रति उसके प्रेम का सूचक है और हमारे द्वारा उसकी आराधना करने का विषय। उसकी चेतावनियों को नज़रंदाज़ ना करें वरन उन्हें गंभीरता-पूर्वक लें। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमारे प्रति अपने प्रेम के अन्तर्गत अपने वचन के द्वारा हमारी सुरक्षा तथा संभाल की चेतावियाँ हम तक पहुँचाता है।

पर तुम चौकस रहो: देखो, मैं ने तुम्हें सब बातें पहिले ही से कह दी हैं। - मरकुस 13:23

बाइबल पाठ: इब्रानियों 3:1-13
Hebrews 3:1 सो हे पवित्र भाइयों तुम जो स्‍वर्गीय बुलाहट में भागी हो, उस प्रेरित और महायाजक यीशु पर जिसे हम अंगीकार करते हैं ध्यान करो। 
Hebrews 3:2 जो अपने नियुक्त करने वाले के लिये विश्वास योग्य था, जैसा मूसा भी उसके सारे घर में था। 
Hebrews 3:3 क्योंकि वह मूसा से इतना बढ़ कर महिमा के योग्य समझा गया है, जितना कि घर का बनाने वाला घर से बढ़ कर आदर रखता है। 
Hebrews 3:4 क्योंकि हर एक घर का कोई न कोई बनाने वाला होता है, पर जिसने सब कुछ बनाया वह परमेश्वर है। 
Hebrews 3:5 मूसा तो उसके सारे घर में सेवक की नाईं विश्वास योग्य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होने वाला था, उन की गवाही दे। 
Hebrews 3:6 पर मसीह पुत्र की नाईं उसके घर का अधिकारी है, और उसका घर हम हैं, यदि हम साहस पर, और अपनी आशा के घमण्‍ड पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। 
Hebrews 3:7 सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो। 
Hebrews 3:8 तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। 
Hebrews 3:9 जहां तुम्हारे बाप दादों ने मुझे जांच कर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे। 
Hebrews 3:10 इस कारण मैं उस समय के लोगों से रूठा रहा, और कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्‍होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना। 
Hebrews 3:11 तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएंगे। 
Hebrews 3:12 हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। 
Hebrews 3:13 वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12
  • प्रेरितों 19:1-20


सोमवार, 13 जुलाई 2015

जीवन शैली


   अमेरिका के टैक्सस प्रांत के ऑस्टिन शहर में आयोजित होने वाले सालाना पुस्तक मेला हज़ारों लोगों को आकर्षित करता है, जो पुस्तकों का आनन्द लेने के लिए आते हैं, प्रसिद्ध लेखकों के साथ चर्चाओं में भाग लेते हैं, और पेशेवर लेखकों से मिलने वाली सलाह का लाभ अर्जित करते हैं। ऐसे ही एक मेले में किशोर और युवाओं के लिए लिखने वाले एक लेखक ने महत्वकांक्षी लेखकों को सलाह देते हुए कहा, "ऐसी पुस्तक लिखें जैसी आप यहाँ देखना चाहते हैं।" यह जीवन और लेखन के लिए वास्तव में एक प्रबल सलाह है। कैसा रहे यदि हम वैसा ही जीवन जीने की ठान लें जैसा हम चाहते हैं कि लोग हमारे साथ जीएं।

   प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से चाहा कि वे ऐसा जीवन जीएं जो लोगों को परमेश्वर के अनुग्रह को दर्शाए (लूका 6:27-36); उदाहरणस्वरूप: "परन्तु मैं तुम सुनने वालों से कहता हूं, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उन का भला करो। जो तुम्हें श्राप दें, उन को आशीष दो: जो तुम्हारा अपमान करें, उन के लिये प्रार्थना करो" (पद 27-28); प्रभु ने यह भी कहा कि जो लोग हमारे प्रति अनुचित व्यवहार करते हैं, प्रत्युत्तर में उनके प्रति उदारता और बदला ना लेने की भावना का व्यवहार करना चाहिए (पद 29-30), तथा, "और जैसा तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो" (पद 31)।

   असंभव? जी हाँ, तब जब हम अपनी ही सामर्थ तथा संकल्प पर विश्वास करके ऐसी जीवन शैली अपनाना चाहें। ऐसी जीवन शैली जीने की सामर्थ केवल परमेश्वर के पवित्र आत्मा से प्राप्त होती है, तथा ऐसा करने के संकल्प को बनाए रखना परमेश्वर द्वारा हमारे साथ किए गए व्यवहार को स्मरण रखने से होता है: "वरन अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो: और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्तान ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है। जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो" (पद 35-36)।

   मसीही विश्वास के जीवन की यह जीवन शैली कौन नहीं देखना चाहेगा? - डेविड मैक्कैसलैंड


हम में मसीह है कहना मसीही विश्वास का जीवन नहीं है, वरन जी कर दिखाना कि मसीह का जीवन हमारे जीवन में है।

इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है। - मत्ती 7:12

बाइबल पाठ: लूका 6:27-36
Luke 6:27 परन्तु मैं तुम सुनने वालों से कहता हूं, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उन का भला करो। 
Luke 6:28 जो तुम्हें श्राप दें, उन को आशीष दो: जो तुम्हारा अपमान करें, उन के लिये प्रार्थना करो। 
Luke 6:29 जो तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे उस की ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तेरी दोहर छीन ले, उसको कुरता लेने से भी न रोक। 
Luke 6:30 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तेरी वस्तु छीन ले, उस से न मांग। 
Luke 6:31 और जैसा तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो। 
Luke 6:32 यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखते हैं। 
Luke 6:33 और यदि तुम अपने भलाई करने वालों ही के साथ भलाई करते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी ऐसा ही करते हैं। 
Luke 6:34 और यदि तुम उसे उधार दो, जिन से फिर पाने की आशा रखते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी पापियों को उधार देते हैं, कि उतना ही फिर पाएं। 
Luke 6:35 वरन अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो: और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्तान ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है। 
Luke 6:36 जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 7-9
  • प्रेरितों 18


रविवार, 12 जुलाई 2015

यीशु


   माइकल ब्राउन न्यू-यॉर्क में रहने वाला एक यहूदी बालक था जिसे धार्मिक बातों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उसका जीवन एक बैन्ड में ड्रम्स बजाने वाला होने पर केंद्रित था और फिर वह मादक पदार्थों के सेवन में भी पड़ गया। कुछ मित्रों ने उसे चर्च में आमंत्रित किया, जहाँ वह लोगों के प्रेम और प्रार्थनाओं को अनुभव करके बहुत प्रभावित हुआ। कुछ समय के आत्मिक संघर्ष के बाद माइकल ने प्रभु यीशु पर विश्वास किया और अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर दिया।

   यह उस किशोर यहूदी के लिए एक बहुत बड़ा परिवर्तन था। एक दिन उसने अपने पिता को बताया कि उसे मालूम पड़ा है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड की पुस्तकें, जो यहूदियों की धर्म पुस्तकें भी हैं, प्रभु यीशु के बारे में बताती हैं। उसके पिता ने बड़े विसमय से पूछा, "कहाँ?" माइकल ने अपनी बाइबल खोली और वह यशायाह 53 पर खुली, जिसे वह अपने पिता के साथ पढ़ने लगा। वहाँ लिखे विवरण को पढ़कर माइकल उत्तेजित होकर चिल्ला उठा, "यही तो है; यही यीशु है!"

   यकीनन वह यीशु का विवरण ही था; परमेश्वर के पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन तथा कुछ मसीही विश्वासियों की सहायता से माइकल ने यशायाह में वर्णित मसीह यीशु को पहचान लिया; आज माइकल एक लेखक और बाइबल विद्वान है। माइकल ने प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा मिलने वाले उद्धार और उससे परिवर्तित होने वाले जीवन को अनुभव किया; साथ ही उसने पापों की क्षमा और अनन्त जीवन की आशीष का भी अनुभव किया, और यह भी जाना कि वह "दुखी पुरुष" (पद 3) जो "हमारे अपराधों के कारण घायल किया गया" (पद 5) प्रभु यीशु ही है जो सारे संसार के सभी लोगों के लिए क्रुस पर बलिदान हुआ तथा आज भी जो कोई उस पर विश्वास लाता है, वह माइकल के समान ही उन बहुमूल्य तथा अनन्त आशीषों को सेंत-मेंत प्राप्त कर लेता है।

   बाइबल बताती है कि केवल प्रभु यीशु ही है जो ना केवल पाप क्षमा करता है, वरन जीवन भी बदल देता है और उद्धार केवल उसी में ही है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर का आत्मा परमेश्वर के वचन को संसार के लोगों के मन तथा जीवन परिवर्तित करने के लिए उपयोग करता है।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: यशायाह 53:1-12
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ? 
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते। 
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।। 
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। 
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। 
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isaiah 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला। 
Isaiah 53:8 अत्याचार कर के और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया? मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी। 
Isaiah 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isaiah 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी। 
Isaiah 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा; और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा। 
Isaiah 53:12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6
  • प्रेरितों 17:16-34