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गुरुवार, 30 जुलाई 2015

प्रभावी व्यक्ति


   यदि आप गूगल में जाकर इंटरनैट पर "प्रभावशाली व्यक्ति" वाक्यांश द्वारा खोज करें तो आपके सामने संसार के अनेक प्रभावशाली व्यक्तियों की विभिन्न सूचियाँ आएंगी। इन सूचियों में सामान्यतः राजनीतिक नेताओं, व्यवसायिक उद्द्यमियों, प्रसिद्ध खिलाड़ियों, विभिन्न वैज्ञानिकों, कला तथा मनोरंजन में ख्याति प्राप्त लोगों आदि के नाम मिलेंगे। लेकिन इन नामों की सूचियों के साथ उन प्रसिद्ध लोगों के लिए काम करने वाले सेवकों, रसोईयों या सफाई कर्मचारियों के नाम कभी नहीं मिलेंगे; जबकि इन "छोटे पदों" पर कार्य करने वालों का उन प्रसिद्ध लोगों के जीवनों में बड़ा योगदान एवं प्रभाव होता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम नामान नामक एक सेनापति की कहानी पाते हैं जो कोढ़ से ग्रसित था, जिसके कारण उसकी नौकरी जा सकती थी और जीवन नाश हो सकता था। इस प्रसिद्ध सेनापति के साथ ही उस कहानी में दो राजाओं और परमेश्वर के एक नबी का भी उल्लेख है (2 राजा 5:1-15)। लेकिन फिर भी नामान कि चंगाई के पीछे ये प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति नहीं वरन उसके सेवक थे। पहला व्यक्ति जिसने नामान को चंगाई पाने का मार्ग बताया एक छोटी बालिका थी जिसे इस्त्राएल से बंदी बनाकर लाया गया था और जो नामान की पत्नि की सेवा करती थी। उस छोटी लड़की ने ही उसे बन्दी बनाकर लाने वाले की भलाई के लिए अपनी स्वामिनी को बताया कि सामारिया में एक भविष्यद्वक्ता है जो नामान को चंगा कर सकता है। जब उस लड़की की बात पर विश्वास कर के नामान सामारिया में परमेश्वर के नबी एलीशा के पास पहुँचा तो एलीशा ने उससे बिना मिले ही उसे सन्देशा पहुँचवा दिया कि वह जाकर सात बार यरदन नदी में डुबकी लगा ले तो चंगा हो जाएगा। एलीशा द्वारा अपनी इस उपेक्षा से क्रोधित होकर जब नामान वापस घर लौट रहा था तो उसके सेवकों ने उसे समझाया कि एलीशा की बात मान लेने में कोई हर्ज नहीं है, और उन सेवकों के कहने पर नामान ने एलीशा के निर्देशों का पालन किया, और चंगा हो गया; तब नामान ने कहा, "...समस्त पृथ्वी में इस्राएल को छोड़ और कहीं परमेश्वर नहीं है..." (2 राजा 5:15)।

   हम मसीही विश्वासियों की भूमिका का यह कितना उत्तम चित्रण है - हमें मसीह के सेवक होने के लिए बुलाया गया है, ऐसे सेवक जो औरों को मसीह यीशु की ओर आकर्षित कर सकें; उसकी ओर जो उन लोगों के जीवन को सुधार और संवार सकता है, उन्हें पाप के कोढ़ से छुड़ाकर अनन्त विनाश से बचा सकता है। हमें ख्यातिवान या प्रसिद्ध होने के लिए नहीं वरन दूसरों के जीवन में प्रभावी व्यक्ति होने के लिए बुलाया और ठहराया गया है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु हमें संसार में भेजता है जिससे कि हम औरों को उसके पास ला सकें।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। - फिलिप्पियों 2:3-4

बाइबल पाठ: 2 राजा 5:1-15
2 Kings 5:1 अराम के राजा का नामान नाम सेनापति अपने स्वामी की दृष्टि में बड़ा और प्रतिष्ठित पुरुष था, क्योंकि यहोवा ने उसके द्वारा अरामियों को विजयी किया था, और यह शूरवीर था, परन्तु कोढ़ी था। 
2 Kings 5:2 अरामी लोग दल बान्ध कर इस्राएल के देश में जा कर वहां से एक छोटी लड़की बन्धुवाई में ले आए थे और वह नामान की पत्नी की सेवा करती थी। 
2 Kings 5:3 उसने अपनी स्वामिन से कहा, जो मेरा स्वामी शोमरोन के भविष्यद्वक्ता के पास होता, तो क्या ही अच्छा होता! क्योंकि वह उसको कोढ़ से चंगा कर देता। 
2 Kings 5:4 तो किसी ने उसके प्रभु के पास जा कर कह दिया, कि इस्राएली लड़की इस प्रकार कहती है। 
2 Kings 5:5 अराम के राजा ने कहा, तू जा, मैं इस्राएल के राजा के पास एक पत्र भेजूंगा; तब वह दस किक्कार चान्दी और छ: हजार टुकड़े सोना, और दस जोड़े कपड़े साथ ले कर रवाना हो गया। 
2 Kings 5:6 और वह इस्राएल के राजा के पास वह पत्र ले गया जिस में यह लिखा था, कि जब यह पत्र तुझे मिले, तब जानना कि मैं ने नामान नाम अपने एक कर्मचारी को तेरे पास इसलिये भेजा है, कि तू उसका कोढ़ दूर कर दे। 
2 Kings 5:7 इस पत्र के पढ़ने पर इस्राएल का राजा अपने वस्त्र फाड़ कर बोला, क्या मैं मारने वाला और जिलाने वाला परमेश्वर हूँ कि उस पुरुष ने मेरे पास किसी को इसलिये भेजा है कि मैं उसका कोढ़  दूर करूं? सोच विचार तो करो, वह मुझ से झगड़े का कारण ढूंढ़ता होगा। 
2 Kings 5:8 यह सुनकर कि इस्राएल के राजा ने अपने वस्त्र फाड़े हैं, परमेश्वर के भक्त एलीशा ने राजा के पास कहला भेजा, तू ने क्यों अपने वस्त्र फाड़े हैं? वह मेरे पास आए, तब जान लेगा, कि इस्राएल में भविष्यद्वक्ता तो है। 
2 Kings 5:9 तब नामान घोड़ों और रथों समेत एलीशा के द्वार पर आकर खड़ा हुआ। 
2 Kings 5:10 तब एलीशा ने एक दूत से उसके पास यह कहला भेजा, कि तू जा कर यरदन में सात बार डुबकी मार, तब तेरा शरीर ज्यों का त्यों हो जाएगा, और तू शुद्ध होगा। 
2 Kings 5:11 परन्तु नामान क्रोधित हो यह कहता हुआ चला गया, कि मैं ने तो सोचा था, कि अवश्य वह मेरे पास बाहर आएगा, और खड़ा हो कर अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर के कोढ़ के स्थान पर अपना हाथ फेर कर कोढ़ को दूर करेगा! 
2 Kings 5:12 क्या दमिश्क की अबाना और पर्पर नदियां इस्राएल के सब जलाशयों से अत्तम नहीं हैं? क्या मैं उन में स्नान कर के शुद्ध नहीं हो सकता हूँ? इसलिये वह जलजलाहट से भरा हुआ लौट कर चला गया। 
2 Kings 5:13 तब उसके सेवक पास आकर कहने लगे, हे हमारे पिता यदि भविष्यद्वक्ता तुझे कोई भारी काम करने की आज्ञा देता, तो क्या तू उसे न करता? फिर जब वह कहता है, कि स्नान कर के शुद्ध हो जा, तो कितना अधिक इसे मानना चाहिये। 
2 Kings 5:14 तब उसने परमेश्वर के भक्त के वचन के अनुसार यरदन को जा कर उस में सात बार डुबकी मारी, और उसका शरीर छोटे लड़के का सा हो गया; उौर वह शुद्ध हो गया। 
2 Kings 5:15 तब वह अपने सब दल बल समेत परमेश्वर के भक्त के यहां लौट आया, और उसके सम्मुख खड़ा हो कर कहने लगा सुन, अब मैं ने जान लिया है, कि समस्त पृथ्वी में इस्राएल को छोड़ और कहीं परमेश्वर नहीं है। इसलिये अब अपने दास की भेंट ग्रहण कर।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 51-53
  • रोमियों 2


बुधवार, 29 जुलाई 2015

प्रेम क्या है?


   जब पूछा गया कि "प्रेम क्या है?" तो कुछ बच्चियों ने बड़े बढ़िया उत्तर दिए। सात वर्षीय नोएल ने कहा, "प्रेम यह है कि जब आप किसी लड़के से कहें कि आपको उसकी कमीज़ अच्छी लगी और वह उसे रोज़ाना पहनने लगे।" आठ वर्षीय रेबेक्का ने उत्तर दिया, "क्योंकि मेरी दादी को गठिया है और वह झुककर अपने पैर के नाखूनों पर रंग कर पाने में असमर्थ हैं इसलिए मेरे दादा हमेशा उनके लिए यह करते हैं, जबकि दादा के हाथ भी गठिया से पीड़ित हैं। यही प्रेम है।" आठ वर्षीय जेसिका का भी निषकर्ष था, "जब तक आप इस बात को पूरी रीति से मानते ना हों, तब तक किसी ना कहें, ’मैं तुम से प्रेम करता हूँ’; परन्तु यदि आप इसे सचमुच मानते हों तो फिर इस बात को बार-बार कहें क्योंकि लोग भूल जाते हैं।"

    कभी कभी हमें इस बात का स्मर्ण चाहिए कि परमेश्वर हम से प्रेम करता है। जब हमारे ध्यान जीवन की कठिनाईयों पर केंद्रित हो जाते हैं तो हम अकसर यह सोचने लगते हैं कि अब ऐसे में परमेश्वर का प्रेम कहाँ है? किंतु यदि हम थोड़ा थम कर ध्यान करें कि परमेश्वर ने हमारे लिए क्या कुछ किया है तो समझेंगे कि परमेश्वर, जो प्रेम है, हम से कितना प्रेम करता है (1 यूहन्ना 4:8-10)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 103 में उन कुछ उपहारों और उपकारों की सूचि दी गई है जो परमेश्वर अपने प्रेम में होकर हमपर न्योछावर करता है: वह हमारे पापों को क्षमा करता है (पद 3), उत्तम पदार्थों से हमें तृप्त करता है (पद 5); धर्म और न्याय के कार्य करता है (पद 6)। परमेश्वर कोप करने में धीमा और बहुतायत से अनुग्रह करने वाला है (पद 8)। वह हमसे हमारे पापों के अनुसार व्यवहार नहीं करता (पद 10) और उसने हमारे पापों को हम से उतनी दूर कर दिया है जितनी दूर उदयाचल से अस्ताचल है (पद 12)। परमेश्वर हमें कभी नहीं भूलता!

   प्रेम क्या है? परमेश्वर प्रेम है, और वह अपना प्रेम हम पर सदा बरसाता रहता है। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के प्रेम का माप क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान है।

जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। - 1 यूहन्ना 4:8-10

बाइबल पाठ: भजन 103:1-14
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! 
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। 
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, 
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है, 
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है। 
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है। 
Psalms 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए। 
Psalms 103:8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 103:9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा। 
Psalms 103:10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। 
Psalms 103:11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है। 
Psalms 103:12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है। 
Psalms 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है। 
Psalms 103:14 क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 49-50
  • रोमियों 1


मंगलवार, 28 जुलाई 2015

सलाह


   एक पुस्तक The Wisdom of Crowds के बारे में इंटरनैट पर दिए विवरण में लिखा है, "इस रोमांचक पुस्तक में व्यावसायिक स्तंभ लेखक जेम्स सुरोविकी एक अत्यंत ही सरल और सहज प्रतीत होने वाले विचार: "लोगों का बड़ा समूह या भीड़, विशिष्ट लोगों के एक छोटे गुट से अधिक चतुर होता है, चाहे वे विशिष्ट लोग कितने भी गुण-संपन्न क्यों ना हों; बड़ा समूह समस्याओं का हल ढूढ़ने, नई ईजाद के लिए प्रोत्साहक, बुद्धिमता पूर्ण निर्णय लेने की क्षमता रखने वाला यहाँ तक की भविष्य के बारे में बेहतर बताने वाला होता है" का विशलेषण करते हैं।

   लेखक ने, पॉप संस्कृति से लेकर राजनीति तक की विभिन्न बातों के उपयोग द्वारा अपने इस मूल विचार को प्रस्तुत किया है कि अकसर भीड़ की राय ही सही निकलती है। यह एक रुचिकर सिद्धान्त तो है, किंतु ऐसा सिद्धान्त भी है जिस को लेकर वाद-विवाद होना स्वाभविक है, चाहे वह चुनाव के समय में हो या फिर टी.वी पर चल रहे किसी स्पर्धा के कार्यक्रम में से जब कोई पसन्दीदा भाग लेनेवाला हार कर बाहर हो तब।

   परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि आवश्यक नहीं है कि भीड़ की बुद्धिमता भरोसेमन्द हो, भीड़ की राय खतरनाक भी हो सकती है (मत्ती 7:13-14); लेकिन साथ ही एक अन्य तरीका भी है जिसके अन्तरगत सामूहिक बुद्धिमता सहायक हो सकती है - नीतिवचन 11:14 में हम पढ़ते हैं, "जहां बुद्धि की युक्ति नहीं, वहां प्रजा विपत्ति में पड़ती है; परन्तु सम्मति देने वालों की बहुतायत के कारण बचाव होता है।" मसीही विश्वासियों की मण्डली में होने का एक लाभ यह भी है कि हम एक दूसरे की सहायता करें और साथ मिलकर परमेश्वर की बुद्धिमता और सलाह को सीखें तथा जानें। जब हम परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, उससे एक दूसरे के लिए सही सलाह माँगते हैं तो उसके द्वारा दिए गए इस प्रावधान से परस्पर सुरक्षा तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए उसके बुद्धिमानी से भरे निर्देशों को भी प्राप्त करते हैं। सबसे सही सलाह परमेश्वर से मिलने वाली सलाह ही है; उसे ही प्राप्त करने के खोजी रहें। - बिल क्राउडर


मिल-जुल कर परमेश्वर की सलाह खोजना ही उसकी सलाह मिलने का सर्वोत्त्म तरीका है।

ऐसा मार्ग है, जो मनुष्य को ठीक देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है। - नीतिवचन 14:12

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 1:18-25
1 Corinthians 1:18 क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। 
1 Corinthians 1:19 क्योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा। 
1 Corinthians 1:20 कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? 
1 Corinthians 1:21 क्योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा, कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे। 
1 Corinthians 1:22 यहूदी तो चिन्ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। 
1 Corinthians 1:23 परन्तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। 
1 Corinthians 1:24 परन्तु जो बुलाए हुए हैं क्या यहूदी, क्या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। 
1 Corinthians 1:25 क्योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 46-48
  • प्रेरितों 28


सोमवार, 27 जुलाई 2015


स्वतंत्र
   अपनी पुस्तक Throw Out fifty Things में गेल ब्लैंक छुटकारे के चार नियमों को बताती है जिससे लोग अपने जीवन से व्यर्थ बातें निकाल सकें। उसका पहला नियम है, "यदि कोई बात आप पर बोझ बन गई हो, आपको अवरुद्ध करती हो या आपको अपने ही बारे में बुरा अनुभव करवाती हो तो उसे निकाल फेंकें, उसे दे दें, उसे बेच दें, उसे जाने दें; उसे छोड़कर उससे आगे बढ़ जाएं।"

   मेरे विचार से छुटकारे के इस नियम का आत्मिक उपयोग भी है: हमें अपने बीते दिनों के पापों से जुड़े नहीं रहना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र यूसुफ के भाईयों के जीवनों में हम इस बात का एक उदाहरण देखते हैं। वर्षों पहले, बदले की भावना के अन्तर्गत, यूसुफ को बेच देने के पश्चात वे अपनी इस क्रूरता से उभर नहीं पाए थे और यूसुफ के प्रतिशोध से डरते थे (उत्पत्ति 50:15) यद्यपि यूसुफ ने अनेक बार उनके प्रति अपने प्रेम भरे व्यवहार और भलाईयों के द्वारा उन्हें आश्वस्त करना चाहा था कि वह उनका बुरा नहीं चाहता (उत्पत्ति 45:4-15)। इसलिए उनके और युसुफ के पिता की मृत्यु के पश्चात उन्होंने यूसुफ के पास क्षमा पाने के लिए सन्देश भेजा (उत्पत्ति 50:16-17)।

   ऐसे ही हम में से अनेक लोग अपने द्वारा वर्षों पहले करी गई बुराईयों को लेकर परेशान रहते हैं जबकि जिनके विरुद्ध हमने वे कार्य किए थे वे हमें क्षमा कर के आगे बढ़ गए होते हैं। लेकिन सच्ची क्षमा तथा शान्ति की अनुभूति हमें तब ही होती है जब हम अपने पापों को परमेश्वर के सामने मान लेते हैं और उससे उनकी क्षमा माँग लेते हैं; हमारे ऐसा करने पर वह हमें ना केवल क्षमा कर देता है वरन उन पापों को हमसे दूर भी कर देता है (1 यूहन्ना 1:9; भजन 103:12), जैसे कि मीका 7:19 में लिखा है, "वह फिर हम पर दया करेगा, और हमारे अधर्म के कामों को लताड़ डालेगा। तू उनके सब पापों को गहिरे समुद्र में डाल देगा।"

   इस कारण हम मसीही विश्वासी सदा अपने आप को स्मरण दिला सकते हैं कि क्योंकि प्रभु यीशु ने हमें पाप के दास्तव से स्वतंत्र कर दिया है इसलिए हम वास्तव में उनसे और उनके दुषप्रभावों तथा दुषपरिणामों से मुक्त हो गए हैं (यूहन्ना 8:36)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


पाप से हमारे छुटकारे की कीमत प्रभु यीशु ने अपने लहू से दी है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 50:15-21; यूहन्ना 8:31-36
Genesis 50:15 जब यूसुफ के भाइयों ने देखा कि हमारा पिता मर गया है, तब कहने लगे, कदाचित यूसुफ अब हमारे पीछे पड़े, और जितनी बुराई हम ने उस से की थी सब का पूरा पलटा हम से ले। 
Genesis 50:16 इसलिये उन्होंने यूसुफ के पास यह कहला भेजा, कि तेरे पिता ने मरने से पहिले हमें यह आज्ञा दी थी, 
Genesis 50:17 कि तुम लोग यूसुफ से इस प्रकार कहना, कि हम बिनती करते हैं, कि तू अपने भाइयों के अपराध और पाप को क्षमा कर; हम ने तुझ से बुराई तो की थी, पर अब अपने पिता के परमेश्वर के दासों का अपराध क्षमा कर। उनकी ये बातें सुनकर यूसुफ रो पड़ा। 
Genesis 50:18 और उसके भाई आप भी जाकर उसके साम्हने गिर पड़े, और कहा, देख, हम तेरे दास हैं। 
Genesis 50:19 यूसुफ ने उन से कहा, मत डरो, क्या मैं परमेश्वर की जगह पर हूं? 
Genesis 50:20 यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। 
Genesis 50:21 सो अब मत डरो: मैं तुम्हारा और तुम्हारे बाल-बच्चों का पालन पोषण करता रहूंगा; इस प्रकार उसने उन को समझा बुझाकर शान्ति दी। 

John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। 
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा। 
John 8:33 उन्होंने उसको उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे? 
John 8:34 यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है। 
John 8:35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है। 
John 8:36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 43-45
  • प्रेरितों 27:27-44


रविवार, 26 जुलाई 2015

बीज और भूमि


   मेरे आंगन के एक भाग में कुछ भी ठीक से उग नहीं पा रहा था; मैं चाहे जितनी भी अच्छी तरह से उसकी सिंचाई कर दूँ, तौ भी वहाँ घास भी अच्छे से नहीं उगती थी। यह देखने के लिए कि वहाँ समस्या क्या है, मैंने एक दिन फावड़ा लिया और वहाँ खोदना आरम्भ किया और तुरंत ही समस्या मेरे सामने थी - मिट्टी के थोड़ा ही नीचे पत्थरों की एक परत थी जिसको पार कर ठीक से जड़ पकड़ पाना किसी भी पौधे या घास के लिए संभव नहीं था। मैंने वे पत्थर निकाले, उनके स्थान पर अच्छी उपजाऊ मिट्टी वहाँ भर दी; अब वहाँ बीज अच्छी तरह से जड़ पकड़ सकते थे।

   प्रभु यीशु ने भी बीज और भूमि को लेकर एक दृष्टांत कहा था जो परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती 13 में दिया गया है। उस दृष्टांत में प्रभु ने बताया कि विभिन्न प्रकार की भूमि पर बोए गए बीज का क्या होता है। उन्होंने बताया कि वे बीज जो पत्थरीली भूमि पर गिरते हैं जहाँ उन्हें बहुत मिट्टी नहीं मिलती, वे उगते तो हैं परन्तु सूरज की गर्मी से शीघ्र ही मर भी जाते हैं (पद 5, 6)। दृष्टांत में कही गई इस बात के द्वारा प्रभु उन लोगों के बारे में बता रहे थे जिन्होंने प्रभु यीशु में सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुना, उसे ऊपरी तौर से माना भी पर उनके जीवन में उस सुसमाचार ने जड़ नहीं पकड़ी, इसलिए जब परेशानियाँ आईं तो ऐसा व्यक्ति, जो वास्तविक मसीही विश्वासी नहीं था, प्रभु से दूर हो गया।

   हमें प्रभु यीशु का कितना आभारी और धन्यवादी होना चाहिए उनके द्वारा इस दृष्टांत के अन्त में कहे गए उस अन्तिम प्रकार की भूमि को दर्शाने वाले लोगों के लिए: "जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना" (मत्ती 13:23)। प्रभु यीशु पर विश्वास लाने से मिलने वाले उद्धार की आशीषों एवं उत्तरदायित्वों को यह दृष्टांत कैसी अद्भुत रीति से स्मरण करवाता है।

   परमेश्वर का धन्यवाद और महिमा हो सुसमाचार के बीज और आत्मिक उन्नति की लालसा रखने वाले जीवनों रूपी भूमि के लिए। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के लिए खुला और समर्पित हृदय वह भूमि है जिसमें उसका वचन पनप सकता है, फल ला सकता है।

और जो पत्थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्त आनन्द के साथ मान लेता है। पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्‍लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है। - मत्ती 13:20-21

बाइबल पाठ: मत्ती 13:1-9
Matthew 13:1 उसी दिन यीशु घर से निकलकर झील के किनारे जा बैठा। 
Matthew 13:2 और उसके पास ऐसी बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई कि वह नाव पर चढ़ गया, और सारी भीड़ किनारे पर खड़ी रही। 
Matthew 13:3 और उसने उन से दृष्‍टान्‍तों में बहुत सी बातें कही, कि देखो, एक बोने वाला बीज बोने निकला। 
Matthew 13:4 बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे और पक्षियों ने आकर उन्हें चुग लिया। 
Matthew 13:5 कुछ पत्थरीली भूमि पर गिरे, जहां उन्हें बहुत मिट्टी न मिली और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे जल्द उग आए। 
Matthew 13:6 पर सूरज निकलने पर वे जल गए, और जड़ न पकड़ने से सूख गए। 
Matthew 13:7 कुछ झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा डाला। 
Matthew 13:8 पर कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और फल लाए, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना। 
Matthew 13:9 जिस के कान हों वह सुन ले।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 40-42
  • प्रेरितों 27:1-26


शनिवार, 25 जुलाई 2015

बुद्धि


   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है "क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो बुद्धि पाए, और वह मनुष्य जो समझ प्राप्त करे, क्योंकि बुद्धि की प्राप्ति चान्दी की प्राप्ति से बड़ी, और उसका लाभ चोखे सोने के लाभ से भी उत्तम है" (नीतिवचन 3:13-14)। बाइबल यह भी बताती है कि बुद्धि हमें परमेश्वर से मिलती है: "क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं" (नीतिवचन 2:6)। परमेश्वर ने अपने बच्चों को वायदा दिया है: "पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी" (याकूब 1:5)।

   सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन ने लिखा था, "बुद्धि जीवन की वह सुन्दरता है जो परमेश्वर द्वारा हमारे जीवनों में होने वाले कार्य से उत्पन्न होती है।" बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में सांसारिक तथा परमेश्वरीय बुद्धि के फर्क को दिखाया तथा परमेश्वरीय बुद्धि के गुणों को बताया है: "पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है" (याकूब 3:17)।

   हमें समय समय पर अपने आप से प्रश्न करते रहना चाहिए कि "क्या मैं बुद्धि में बढ़ता जा रहा हूँ?" क्योंकि जीवन तो गतिमान है, कहीं ठहरता नहीं। जीवन की परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, इसलिए उनका सामना करते रहने और उन परिस्थितियों के प्रति सही रवैया रखने की आवश्यकता भी सदा बनी रहती है। हम या तो उम्र के साथ मधुर एवं बुद्धिमान होते जा सकते हैं या फिर मूर्ख और चिड़चिड़े; अपने जीवन पर विचार कीजिए कि बढ़ती उम्र तथा बीतता समय आप में किस प्रकार के परिवर्तन ला रहा है?

   बुद्धि में बढ़ना आरंभ कभी भी किया जा सकता है। परमेश्वर हम से बड़ी गहराई से प्रेम करता है; उसका प्रेम हमें हमारी प्रत्येक मूर्खता से निकाल कर आशीषों से परिपूर्ण बना सकता है यदि हम अपना जीवन उसे समर्पित करें, उसके आज्ञाकारी बनें और उसकी इच्छा पूरी करने में प्रयासरत रहें। उसका प्रेम किसी भी व्यक्ति के कैसे भी कठोर स्वभाव को बदल कर अपनी अद्भुत सुन्दरता का नमूना बना सकता है। परमेश्वर द्वारा व्यक्ति के जीवन में लाया जाने वाला यह कायाकल्प कुछ समय ले सकता है, कुछ तकलीफदेह हो सकता है, लेकिन परमेश्वर की हर योजना अपने लोगों के जीवनों को सुधारने और आशीषों से भर देने के लिए ही है (यिर्मयाह 29:11)। जब भी हम उस पर पूर्ण भरोसा रखते हुए, उससे हर परिस्थिति के लिए उपयुक्त बुद्धि पाने की प्रार्थना करते हैं, उसकी बुद्धि और गुण हम में पनपने लगते हैं, हम में हो कर औरों को भी आशीषित करने लगते हैं।

   परमेश्वर को समर्पित हो जाएं; उससे बुद्धि को माँगें और अपने जीवन को उसकी आशीषों से भर लें। - डेविड रोपर


सच्ची बुद्धिमता परमेश्वर से आरंभ होती है और परमेश्वर पर ही अन्त होती है।

क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा। - यिर्मयाह 29:11

बाइबल पाठ: याकूब 3:13-17
James 3:13 तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्‍छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है। 
James 3:14 पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्‍ड न करना, और न तो झूठ बोलना। 
James 3:15 यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है। 
James 3:16 इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है। 
James 3:17 पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 37-39
  • प्रेरितों 26


शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

धन्यवादी


   रोज़ाना अपने कार्य पर आते-जाते समय मेरे पास काफी समय होता है कि मैं गाडियों और कारों के पीछे लिखे वाक्यांशों को पढ़कर उनपर विचार सकूँ। उन वाक्यांशों में से कुछ तो रूखे, कुछ कर्कश, कुछ चतुराईपूर्ण और कुछ बिलकुल बदतमीज़ी से भरे होते हैं; परन्तु कुछ ऐसे भी होते हैं जो सोचने या मुसकुराने को बाध्य कर देते हैं। हाल ही में मैंने एक ऐसा ही वाक्यांश पढ़ा जिसने जीवन के प्रति मेरे रवैये को लेकर मेरे मन को एक चुनौती सी दी। वह वाक्यांश था, "इतना अधिक आशीषित कि किसी शिकायत की कोई गुन्जाईश ही नहीं!"

   मुझे यह स्वीकार करना होगा कि इस वाक्यांश को पढ़कर उसके भाव पर विचार करने से मैंने अपने आप को दोषी अनुभव किया। अकसर होता है कि मैं जीवन में उन अवसरों को लेकर शोकित रहता हूँ या कुड़कुड़ाता हूँ जब निर्णय मेरे पक्ष में या मेरी इच्छानुसार नहीं हुए; बजाए इसके कि मैं अपना ध्यान स्वर्गीय पिता परमेश्वर से लगातार मिलते रहने वाले अद्भुत उपहारों पर लगाए रखूँ, उनके लिए धन्यवादी रहूँ। उस दिन उस छोटे वाक्यांश को पढ़ने से मेरे अन्दर अपने परमेश्वर पिता के प्रति पुनःसमर्पण की भावना जागृत हुई कि मैं कुड़कुड़ाने और दुखी होने की बजाए, सक्रीय रीति से और जानबूझकर परमेश्वर की उन अनगिनित और समझ से परे भलाईयों पर अपना ध्यान लगाऊँगा, जो उसने मेरे लिए करी हैं और जो वह मेरे लिए करता रहता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 एक ऐसा भजन है जो परमेश्वर के प्रति ऐसी अधन्यवादी सोच को सुधारने को प्रेरित करता है। भजनकार ठंडे तथा संवेदनहीन हो चुके हृदयों से चार बार याचना करता है, "लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें" (पद 8, 15, 21, 31)। अपने जीवन का पुनःअवलोकन एवं थोड़ा विचार कर के देखिए, परमेश्वर ने हमें कितना कुछ दिया है; अपने सबसे बुरे समयों में भी उसके प्रति धन्यवादी होने के हमारे पास कितने ही कारण होते हैं।

   परिस्थितियों को लेकर कुड़कुड़ाते रहने की बजाए परमेश्वर के प्रेम, अनुग्रह, करुणा, कोमलता, भलाई और आशीषों के लिए उसका धन्यवादी होना सीखें; जीवन स्वतः ही हर परिस्थिति में एक अद्भुत आनन्द से भर जाएगा। - बिल क्राउडर


हमें परमेश्वर का धन्यवादी होने के लिए और नहीं चाहिए; हमें तो और धन्यवादी होना चाहिए!

हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती। - भजन 40:5 

बाइबल पाठ: भजन 107:1-8
Psalms 107:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 107:2 यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है, 
Psalms 107:3 और उन्हें देश देश से पूरब- पश्चिम, उत्तर और दक्खिन से इकट्ठा किया है।
Psalms 107:4 वे जंगल में मरूभूमि के मार्ग पर भटकते फिरे, और कोई बसा हुआ नगर न पाया; 
Psalms 107:5 भूख और प्यास के मारे, वे विकल हो गए। 
Psalms 107:6 तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उसने उन को सकेती से छुड़ाया; 
Psalms 107:7 और उन को ठीक मार्ग पर चलाया, ताकि वे बसने के लिये किसी नगर को जा पहुंचे। 
Psalms 107:8 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 35-36
  • प्रेरितों 25