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मंगलवार, 24 नवंबर 2015

सिद्ध समय


   वह पुरानी कहावत, "सही समय ही सब कुछ है" बिल्कुल सटीक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस का गल्तिया के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री कहा गया कथन, "परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा...." (गल्तियों 4:4) मेरे अन्दर बहुत कौतहूल जगाता है।

   संसार के इतिहास पर एक झलक डालने से समझ आता है कि प्रभु यीशु का जन्म वास्तव में बिल्कुल सही वक्त पर हुआ था। उनके जन्म से सदियों पहले सिकन्दर ने ग्रीस (यूनान) से निकलकर ज्ञात संसार के अधिकांश भाग को जीत लीया था और इससे उन सब स्थानों पर यूनानी भाषा और सभ्यता का एकीकृत करने वाला प्रभाव आ गया था। सिकन्दर की मृत्योप्रांत रोमी साम्राज्य ने अपना दबदबा कायम करना आरंभ किया और यूनानी सभ्यता तथा भाषा के एक जुट कर देने वाले प्रभाव को और आगे बढ़ाया। रोमी साम्राज्य में कैदियों को क्रूस द्वारा मृत्यु दण्ड देने की प्रथा आरंभ हुई, जो रोमी साम्राज्य के आरंभ होने के सैंकड़ों वर्ष पहले बाइबल में प्रभु यीशु से संबंधित भविष्यवाणियों में प्रभु की मृत्यु के लिए लिखी गई थी, और उसी के अनुसार क्रूस पर मसीह यीशु का बलिदान हुआ और फिर वह मृतकों में से जी उठा, जिसका उल्लेख उस समय के इतिहसकारों ने भी किया है। रोमी साम्राज्य के समय में ही प्रभु यीशु के सन्देश को सारे संसार में पहुँचाने के लिए उपयुक्त संसाधन - अच्छी सड़कें, सभी जगहों पर अधिकांशतः एक ही भाषा का प्रयोग और एक ही साम्राज्य होने के कारण देश तथा इलाके के सीमाओं को बिना प्रतिबंध पार करने की सुविधा, तैयार और लागू हुए। परमेश्वर के इंतिज़ाम ने अपने पुत्र को संसार के उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता के रूप में भेजने के लिए सारी तैयारी करवा कर ही उसे संसार में अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए भेजा।

   हर बात, हर कार्य के लिए परमेश्वर का समय सिद्ध है। हो सकता है कि आज आप किसी बात को लेकर चिंतित हों, विचार कर रहे हों कि क्यों परमेश्वर आपके हित में कार्यवाही नहीं कर रहा है; लेकिन यह कभी ना भूलें कि चाहे दिखाई ना दे, प्रतीत ना हो, किंतु परमेश्वर पृष्ठभूमि में सदा कार्यरत रहता है जिससे सही समय पर अपने कार्य को आपके सामने प्रकट करे। उस पर विश्वास रखें, उसे पता है कि कब क्या और कैसे करना है; उसका समय सिद्ध है। - जो स्टोवैल


हे प्रभु हमें धैर्य रखने का अनुशासन सिखा, क्योंकि धैर्य के साथ प्रतीक्षा करना कार्य करने से अधिक कठिन होता है। - मार्शल

और कहा, समय पूरा हुआ है, और परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है; मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो। - मर्कुस 1:15

बाइबल पाठ: गल्तियों 3:26-4:7
Galatians 3:26 क्योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्तान हो। 
Galatians 3:27 और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। 
Galatians 3:28 अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। 
Galatians 3:29 और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।
Galatians 4:1 मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्‍तुओं का स्‍वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं। 
Galatians 4:2 परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकों और भण्‍डारियों के वश में रहता है। 
Galatians 4:3 वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में हो कर दास बने हुए थे। 
Galatians 4:4 परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के आधीन उत्पन्न हुआ। 
Galatians 4:5 ताकि व्यवस्था के आधीनों को मोल ले कर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले। 
Galatians 4:6 और तुम जो पुत्र हो, इसलिये परमेश्वर ने अपने पुत्र के आत्मा को, जो हे अब्‍बा, हे पिता कह कर पुकारता है, हमारे हृदय में भेजा है। 
Galatians 4:7 इसलिये तू अब दास नहीं, परन्तु पुत्र है; और जब पुत्र हुआ, तो परमेश्वर के द्वारा वारिस भी हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 22-23
  • 1पतरस 1


सोमवार, 23 नवंबर 2015

जीवित पत्रियाँ


   सन 1963 के नवम्बर माह में जिस दिन अमेरिका के राष्ट्रपति जौन एफ़. कैनेडी की हत्या हुई, एक और प्रमुख अगुवे - क्लाईव स्टेप्ल्स ल्युईस की भी मृत्यु हुई। ऑक्सफॉर्ड के इस विद्वान ने, जिसे सामान्यतः सी. एस. ल्युईस के नाम से जाना जाता है, नास्तिकवाद को छोड़कर मसीही विश्वास को अपनाया था, और वह बहुतायत से लिखने वाला एक सफल लेखक था। उनकी कलम से बुद्धिमता से परिपूर्ण पुस्तकें, विज्ञान पर आधारित कहानियाँ, बच्चों के लिए काल्पनिक कहानियाँ बहुतायत से निकलती रहती थीं और प्रत्येक में एक बलवन्त मसीही सन्देश होता था। उनकी लेखनी को परमेश्वर ने बहुत से लोगों को मसीही विश्वास में लाने के लिए प्रयोग किया, जिनमें एक राजनितिक नेता और एक नोबल पुरुस्कार विजेता वैज्ञानिक भी हैं।

   परमेश्वर कुछ को अपनी लेखनी के द्वारा अन्य लोगों को मसीह यीशु के बारे में बताने के लिए प्रयोग करता है, लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने जीवन के द्वारा मसीह यीशु के लिए एक जीवित पत्री है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा: "यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है" (2 कुरिन्थियों 3:3)। ऐसा लिखने में निश्चय ही पौलुस का यह तात्पर्य नहीं था कि मसीही विश्वासी कागज़ के समान उपयोग होने के लिए हैं जिन पर स्याही से मसीह का सन्देश लिखा जाए। वरन उसका तात्पर्य था कि जैसे पत्रियों को पढ़कर सन्देश का अर्थ जाना जाता है वैसे ही हम मसीही विश्वासियों के जीवन भी हमारे प्रभु यीशु के सन्देश को संसार लोगों के सामने रखते हैं, और अपने व्यवहार तथा ईमानदारी के द्वारा हम ’जीवित पत्रियाँ’ होने का कार्य करते हैं।

   समाज पर जो प्रभाव सी. एस. ल्युईस ने डाला, वैसा प्रभाव बहुत कम लोग ही डाल सकते हैं, लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी का जीवन और व्यवहार अपने तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता प्रभु यीशु के नाम गौरव और महिमा देने का कार्य कर सकता है। - डेनिस फिशर


जितने हमारे जीवनों को पढ़ते हैं उनके लिए हम मसीह यीशु के प्रेम की पत्री हैं।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 3:1-11
2 Corinthians 3:1 क्या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगे? या हमें कितनों कि नाईं सिफारिश की पत्रियां तुम्हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं? 
2 Corinthians 3:2 हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है। 
2 Corinthians 3:3 यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है। 
2 Corinthians 3:4 हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं। 
2 Corinthians 3:5 यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है। 
2 Corinthians 3:6 जिसने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है। 
2 Corinthians 3:7 और यदि मृत्यु की यह वाचा जिस के अक्षर पत्थरों पर खोदे गए थे, यहां तक तेजोमय हुई, कि मूसा के मुंह पर के तेज के कराण जो घटता भी जाता था, इस्त्राएल उसके मुंह पर दृष्टि नहीं कर सकते थे। 
2 Corinthians 3:8 तो आत्मा की वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:9 क्योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहराने वाली वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:10 और जो तेजोमय था, वह भी उस तेज के कारण जो उस से बढ़कर तेजामय था, कुछ तेजोमय न ठहरा। 
2 Corinthians 3:11 क्योंकि जब वह जो घटता जाता था तेजोमय था, तो वह जो स्थिर रहेगा, और भी तेजोमय क्यों न होगा?

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5


रविवार, 22 नवंबर 2015

छाया


   पचास से भी अधिक वर्ष पूर्व हुई अमेरिका के राष्ट्रपति जौन एफ. केनेडी की हत्या ने सारे विश्व के लोगों को स्तब्ध कर दिया था। हत्या के अगले दिन लंडन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ’द टाइम्स’ ने इस घटना के कारण सारे विश्व के आर्थिक बाज़ारों पर आए प्रभाव के बारे में लिखा। उस अखबार का मुख्य शीर्षक था, "अमेरीकी त्रासदी के छाया अन्य सभी बातों पर।"

   हमारे जीवनों में ऐसे समय आते हैं जब कोई मृत्यु, कोई त्रासदी या घटनाओं का अचानक मोड़े ले लेना अन्य हर एक बात से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, प्रत्येक बात पर पर छा जाता है। कुछ ऐसा ही लगभग दो हज़ार वर्ष से कुछ पूर्व एक कुँवारी युवती मरियम के साथ इस्त्राएल में हुआ - परमेश्वर के एक स्वर्गदूत जिब्राईल ने आकर उसे बताया कि वह परमेश्वर के पुत्र और संसार के उद्धारकर्ता की माँ बनेगी (लूका 1:26-33)। जब उस युवती ने स्वर्गदूत से पूछा कि ऐसा कैसे होगा, तो उस स्वर्गदूत ने उत्तर दिया, "...पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा" (लूका 1:35), और स्वर्गदूत को उसका प्रत्युत्तर आज भी हमें आश्चर्य में डाल देता है: "...देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो..." (लूका 1:38)। इतिहास गवाह है कि असंभव प्रतीत होने वाली इस घटना से मरियम के जीवन पर अन्धकार की नहीं वरन परमेश्वर की सामर्थ और महिमा की छाया आई।

   आते सप्ताहों में जब हम क्रिसमस की घटना और संसार में प्रभु यीशु के जन्म के बारे में और पढ़ेंगे तथा विचार करेंगे, तो इस शब्द ’छाया’ पर चिंतन करना लाभदायक रहेगा। यदि प्रभु यीशु की उपस्थिति हमारे जीवनों पर छाया करे तो वह हमारे जीवन के सबसे अन्धकारपूर्ण पलों को भी अपनी ज्योति से रौशन कर देगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


हर परिस्थिति में परमेश्वर का सर्वसामर्थी प्रेम हम पर छाया किए रहता है।

परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ। - यूहन्ना 20:31 

बाइबल पाठ: लूका 1:26-38
Luke 1:26 छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया। 
Luke 1:27 जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था। 
Luke 1:28 और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है। 
Luke 1:29 वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? 
Luke 1:30 स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। 
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा। 
Luke 1:34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं। 
Luke 1:35 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। 
 Luke 1:36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होने वाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है। 
Luke 1:37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता। 
Luke 1:38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4


शनिवार, 21 नवंबर 2015

नाम


   हमारे साथ मिशिगन में कुछ समय बिताने के बाद हमारी एक वर्षीय पोती मैगी और उसका परिवार वापस अपने घर मिसूरी चले गए। मैगी की माँ ने हमें बताया कि घर वापस लौटने के कुछ दिन बाद तक मैगी घर के अन्दर घूमते-फिरते बड़े आनन्द के साथ ’मिशिगन’, ’मिशिगन’ कहती रहती थी। उस नाम में कुछ था जिसने मैगी को आकर्षित किया; शायद उसका उच्चारण, शायद वह आनन्दायक समय जो उसने मिशिगन में हमारे साथ बिताया। वह क्या आकर्षण था यह एक वर्ष के बच्चे के विषय में कहना तो संभव नहीं है, लेकिन उस नाम ’मिशिगन’ ने मैगी पर ऐसा प्रभाव डाला था कि वह उसे बार बार लेने से रुक नहीं पा रही थी।

   यह मुझे एक और नाम का स्मरण दिलाता है - हमारे तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु का नाम - यीशु, जिस नाम के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा गया है, "...परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है" (फिलिप्पियों 2:9)। क्यों यह नाम हम मसीही विश्वासियों को इतना प्रीय है? क्योंकि यह हमारे उद्धारकर्ता, हमें पापों से मुक्ति देने वाले, हमारी चिंता और रक्षा करने वाले, हमें अनन्त जीवन और परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार देने वाले का नाम है। जो संज्ञाएं प्रभु यीशु का वर्णन करती हैं उनमें कितनी गहराई है! जब हम यीशु के महान नाम का उल्लेख उन से करते हैं जिन्हें उसे मुक्तिदाता के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है, तो हम उन्हें बता सकते हैं कि उसने हमारे तथा संसार के सभी लोगों के लिए क्या कुछ किया है, क्या कुछ सेंत-मेंत उपलब्ध करवाया है।

   यीशु हमारा उद्धारकर्ता है, उसने अपने लहु के द्वारा हमें छुड़ाया है, हम ने स्वेच्छा से अपने जीवन उसे समर्पित किए हैं और उसे अपना प्रभु स्वीकार किया है; और अब अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर हम सब लोगों से बाइबल की बात निःसंकोच कह सकते हैं कि यीशु के नाम के अतिरिक्त और किसी नाम में उद्धार नहीं है (प्रेरितों 4:12), इसलिए संपूर्ण स्वर्ग और सारी पृथ्वी और उसके सब निवासी यीशु नाम को महिमा दें उसका आदर करें। - डेव ब्रैनन


समस्त सृष्टि में सबसे बहुमूल्यतम नाम है यीशु।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:5-11
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3


शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

वास्तविक चिंता


   परिवारों के लिए आयोजित एक शिविर की पहली रात को शिविर के निर्देशक ने उपस्थित सभी परिवारों को उस पूरे सप्ताह का कार्यक्रम बताया और अपनी बात समाप्त करते हुए पूछा कि किसी को कुछ और कहना या जानना है? एक युवा लड़की ने खड़े होकर सबसे सहायता के लिए भावुक निवेदन किया। उसने अपने छोटे भाई के बारे में बताया, जिसे कुछ शारीरिक कमज़ोरियाँ थीं जिनके कारण उसकी देखभाल करना एक चुनौती भरा कार्य था, और यह कार्य उसके परिवार के लिए कठिन तथा थका देने वाला हो जाता था; इसलिए उसका सबसे निवेदन था कि वे उसके भाई पर नज़र बनाए रखें जिससे उसकी देखभाल ठीक से करी जा सके। उसका यह निवेदन अपने माता-पिता तथा अपने भाई के लिए उसकी वास्तविक चिंता के कारण था। जैसे जैसे शिविर में वह सप्ताह बीतता गया, लोगों द्वारा उस परिवार को लगातार दी जा रही सहायता देखना बहुत उत्साहवर्धक था।

   उस युवती का निवेदन हमें यह स्मरण दिलाता है कि कैसे अपने ही संसार, जीवन और समस्याओं में उलझ कर हम दूसरों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं और उनकी समस्याओं के प्रति ध्यान देने से चूक जाते हैं। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में हम मसीही विश्वासियों को यह ज़िम्मेदारी दी गई है कि जैसे हमारा प्रभु हमारी चिंता करता है वैसे ही हम भी दूसरों की सहायता के लिए जागरूक रहें: "हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो" (फिलिप्पियों 2:4-5)।

   हमारे प्रभु यीशु मसीह की हमारे प्रति चिंता और देखभाल हमें दुखी लोगों की चिंता और देखभाल करने को प्रेरित करती है। परमेश्वर पिता के अनुग्रह में हमें मिलने वाला विश्राम और उस पर हमारा विश्वास दूसरों के दुख के समयों में उनके प्रति वास्तविक चिंता तथा उनकी देखभाल करने में प्रकट होता है। - बिल क्राउडर


दूसरों की वास्तविक देखभाल तथा चिंता करने जितना महंगा और कुछ नहीं है; सिवाए देखभाल और चिंता ना करने के।

प्रभु यीशु ने कहा: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।" - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-5
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2


गुरुवार, 19 नवंबर 2015

यात्रा


   हाल ही में मैंने अपने साथ कॉलेज से स्नात्क होने वाले छात्रों के बारे में पता लगाया, और पाया कि मेरे साथ के कई विद्यार्थी अब संसार से कूच कर चुके हैं; जीवन के अल्पकालीन होने का यह गंभीर स्मरण था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मनुष्य की आयु के लिए लिखा है, "हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं" (भजन 90:10) - बस अस्सी वर्ष के लगभग और हमारे संसार से कूच करके अनन्तकाल में प्रवेश करने का समय हो जाता है। भजनकार सही है, हम इस पृथ्वी पर परदेशी और यात्री ही तो हैं (भजन 39:12)।

   जीवन के अल्पकालीन होने के कारण हमें अपने ’अन्त’ तथा अनन्त, दोनों के बारे में गंभीरता से विचार कर लेना चाहिए, यह जानते हुए कि हम कैसे अनित्य हैं (भजन 39:4); और जैसे जैसे हमारा अन्त समय निकट आता जाता है, यह भावना और प्रबल होती जाती है कि संसार हमारा घर नहीं है, हम तो यहाँ परदेशी और यात्री मात्र हैं। लेकिन हम मसीही विश्वासियों को एक बहुत सामर्थी आश्वासन भी है - इस यात्रा में हम अकेले नहीं हैं; हमारा परमेश्वर पिता भी हमारे हर पल, हर पग में हमारे साथ बना रहता है। इस कारण यात्री और परदेशी होने तथा अनन्तकाल व्यतीत करने संसार से बाहर जाने का विचार हमारे लिए कम परेशानी, कम भय और कम चिंता उत्पन्न करने वाला है। इस संसार में भी और आने वाले संसार में भी हमारा प्रेमी स्वर्गीय पिता हमारा सहायक तथा मार्गदर्शक बनकर सदा हमारे साथ रहता है (मत्ती 28:20); अपनी यात्रा में हम कभी अकेले नहीं होते (भजन 73:24-25)।

   हमारे माता-पिता, जीवन साथी, मित्रगण हमारी नज़रों से ओझल हो सकते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि परमेश्वर सदा हमारे साथ बना रहता है, और जैसा एक पुरानी कहावत है, ’अच्छे साथी के साथ मार्ग सरल प्रतीत होता है’ - इस लोक तथा आते लोक, दोनों में परमेश्वर का साथ हमारी यात्रा को सरल और सार्थक बना देता है। - डेविड रोपर


जीवन के थका देने वाले मार्ग पर प्रभु यीशु आपका भारी बोझ उठाना चाहता है।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। - भजन 73:24-25

बाइबल पाठ: - भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तेरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1


बुधवार, 18 नवंबर 2015

पुनःस्वागत


   जिम ने दस वर्ष की आयु में प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय किया था। इसके पन्द्रह वर्ष बाद उसका यह समर्पण फीका पड़ चुका था। उसने परिस्थिति और आवश्यकतानुसार जीवन जीने का दृष्टिकोण अपना लिया था और उसके जीवन में अनेक बुरी आदतें और बातें आ गई थीं। फिर उसका जीवन बिखर सा गया; उसके कार्य में समस्याएं आईं, उसके परिवार के तीन सदस्य एक के बाद एक करके जाते रहे, जिम को डर और संदेह सताने लगे, और कोई भी, कुछ भी उसकी सहायता नहीं कर पा रहा था। एक दिन जिम ने परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन 121:2 पढ़ा: "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है"; बाइबल के इन शब्दों ने उसके मन से सारी निराशा, संदेह और डर को निकाल डाला। वह सहायता के लिए परमेश्वर की ओर मुड़ा, और परमेश्वर ने सहर्ष उसे अपने पास स्वीकार कर लिया (लूका 15:22, 24)।

   जिम के आत्मिक जीवन की यह यात्रा मुझे प्राचीन इस्त्राएल के इतिहास की याद दिलाती है। परमेश्वर के साथ इस्त्रएलियों का एक अनूठा रिश्ता था - वे उसके चुने हुए लोग थे (नहेम्याह 9:1-15)। लेकिन फिर भी उन इस्त्राएलियों ने अनेक वर्ष परमेश्वर की भलाईयों को नज़रंदाज़ करने, अपनी इच्छानुसार चलने और परमेश्वर के निर्देशों तथा शिक्षाओं के विरुद्ध बलवा करने में बिताए थे (नहेम्याह 9:16-21)। लेकिन जब वे इस्त्राएली अपने पापों से पश्चाताप करके परमेश्वर की ओर मुड़े तो परमेश्वर ने उन्हें स्वीकार कर लिया क्योंकि वह "...क्षमा करने वाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करने वाला, और अतिकरुणामय ईश्वर है" (नहेम्याह 9:17)।

   परमेश्वर के ये गुण हमें उत्साहित करते हैं कि हम परमेश्वर की निकटता में आएं - चाहे हम उससे कितने भी समय पहले, कितनी ही दूर ही क्यों ना चले गए हों। हम जब भी नम्र मन के साथ उसे समर्पित रहने, अपने विरोधी स्वभाव को त्यागकर पुनः परमेश्वर की इच्छानुसार चलने का निर्णय लेते हैं, वह अपने अनुग्रह और दया में होकर हमारा पुनःस्वागत करता है, हमें फिर से अपने साथ ले लेता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की बाहें हमारा स्वागत करने के लिए सदा खुली रहती हैं।

परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा; फट अच्‍छे से अच्छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ। क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है: खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्द करने लगे। - लूका 15:22, 24

बाइबल पाठ: नहेम्याह 9:7-21
Nehemiah 9:7 हे यहोवा! तू वही परमेश्वर है, जो अब्राहाम को चुनकर कसदियों के ऊर नगर में से निकाल लाया, और उसका नाम इब्राहीम रखा; 
Nehemiah 9:8 और उसके मन को अपने साथ सच्चा पाकर, उस से वाचा बान्धी, कि मैं तेरे वंश को कनानियों, हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, यबूसियों, और गिर्गाशियों का देश दूंगा; और तू ने अपना वह वचन पूरा भी किया, क्योंकि तू धमीं है। 
Nehemiah 9:9 फिर तू ने मिस्र में हमारे पुरखाओं के दु:ख पर दृष्टि की; और लाल समुद्र के तट पर उनकी दोहाई सुनी। 
Nehemiah 9:10 और फ़िरौन और उसके सब कर्मचारी वरन उसके देश के सब लोगों को दण्ड देने के लिये चिन्ह और चमत्कार दिखाए; क्योंकि तू जानता था कि वे उन से अभिमान करते हैं; और तू ने अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जैसा आज तक वर्तमान है। 
Nehemiah 9:11 और तू ने उनके आगे समुद्र को ऐसा दो भाग किया, कि वे समुद्र के बीच स्थल ही स्थल चलकर पार हो गए; और जो उनके पीछे पड़े थे, उन को तू ने गहिरे स्थानों में ऐसा डाल दिया, जैसा पत्थर महाजलराशि में डाला जाए। 
Nehemiah 9:12 फिर तू ने दिन को बादल के खम्भे में हो कर और रात को आग के खम्भे में हो कर उनकी अगुआई की, कि जिस मार्ग पर उन्हें चलना था, उस में उन को उजियाला मिले। 
Nehemiah 9:13 फिर तू ने सीनै पर्वत पर उतर कर आकाश में से उनके साथ बातें की, और उन को सीधे नियम, सच्ची व्यवस्था, और अच्छी विधियां, और आज्ञाएं दीं। 
Nehemiah 9:14 और उन्हें अपने पवित्र विश्राम दिन का ज्ञान दिया, और अपने दास मूसा के द्वारा आज्ञाएं और विधियां और व्यवस्था दीं। 
Nehemiah 9:15 और उनकी भूख मिटाने को आकाश से उन्हें भोजन दिया और उनकी प्यास बुझाने को चट्टान में से उनके लिये पानी निकाला, और उन्हें आज्ञा दी कि जिस देश को तुम्हें देने की मैं ने शपथ खाई है उसके अधिकारी होने को तुम उस में जाओ। 
Nehemiah 9:16 परन्तु उन्होंने और हमारे पुरखाओं ने अभिमान किया, और हठीले बने और तेरी आज्ञाएं न मानी; 
Nehemiah 9:17 और आज्ञा मानने से इनकार किया, और जो आश्चर्यकर्म तू ने उनके बीच किए थे, उनका स्मरण न किया, वरन हठ करके यहां तक बलवा करने वाले बने, कि एक प्रधान ठहराया, कि अपने दासत्व की दशा में लौटे। परन्तु तू क्षमा करने वाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करने वाला, और अतिकरुणामय ईश्वर है, तू ने उन को न त्यागा। 
Nehemiah 9:18 वरन जब उन्होंने बछड़ा ढालकर कहा, कि तुम्हारा परमेश्वर जो तुम्हें मिस्र देश से छुड़ा लाया है, वह यही है, और तेरा बहुत तिरस्कार किया, 
Nehemiah 9:19 तब भी तू जो अति दयालु है, उन को जंगल में न त्यागा; न तो दिन को अगुआई करने वाला बादल का खम्भा उन पर से हटा, और न रात को उजियाला देने वाला और उनका मार्ग दिखाने वाला आग का खम्भा। 
Nehemiah 9:20 वरन तू ने उन्हें समझाने के लिये अपने आत्मा को जो भला है दिया, और अपना मन्ना उन्हें खिलाना न छोड़ा, और उनकी प्यास बुझाने को पानी देता रहा। 
Nehemiah 9:21 चालीस वर्ष तक तू जंगल में उनका ऐसा पालन पोषण करता रहा, कि उन को कुछ घटी न हुई; न तो उनके वस्त्र पुराने हुए और न उनके पांव में सूजन हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13