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मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

स्थाई


   हम आज एक ऐसी संस्कृति में रह रहे हैं जिसमें ’प्रयोग करो और फेंक दो’ का चलन अधिकाधिक होता जा रहा है। थोड़ा थम कर दैनिक उपयोग की उन वस्तुओं के बारे में सोचें जो उपयोग हो चुकने के बाद फेंके जाने के लिए ही बनाई जाती हैं - उस्तरे, पानी की बोतलें, लाईटर, कागज़ की प्लेटें, भोजन करने के लिए प्लास्टिक के बर्तन इत्यादि, सभी ऐसी वस्तुएं हैं जिनका प्रयोग करके उन्हें फेंक दिया जाता है और उनके स्थान पर ऐसा ही करने के लिए नई वस्तुएं ले ली जाती हैं।

   यह ’प्रयोग करो और फेंक दो’ का चलन हमारे परस्पर व्यवहार एवं संबंधों में भी दिखने और बढ़ने लगा है। कई बार रिश्तों में परस्पर सच्चा समर्पण एच्छिक प्रतीत होता है; विवाह संबंध स्थाई बने रहने के लिए संघर्षों से निकलते रहते हैं। लंबे समय से कार्य करने वाले कर्मचारी मालिकों या अधिकारियों द्वारा सेवानिवृति से पहले बर्खास्त कर दिए जाते हैं ताकि उनका स्थान सस्ते विकल्प ले सकें। उच्च कोटि के खिलाड़ी अधिक कमाई के लिए अपनी टीम छोड़ कर दूसरी टीम में चले जाते हैं। ऐसा लगता है कि कुछ भी स्थाई नहीं है।

   लेकिन हमारे कभी ना बदलने वाले प्रभु परमेश्वर का यह वायदा है कि उसका प्रेम भरा अनुग्रह उसके बच्चों के साथ सदा स्थाई बना रहेगा। परमेश्वर के वचन बाइबल के भजन 136 में भजनकार परमेश्वर के इसी स्थाई होने के वायदे का जश्न उसके कार्य, चरित्र और हैसियत के अचरज से संबंधित कथनों के द्वारा मनाता है। परमेश्वर से संबंधित अपने हर कथन के बाद भजनकार दोहराता है, "उसकी करुणा सदा की है"; चाहे वह कथन परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि पर हो (पद 4-9), या अपने लोगों को बचाने के लिए किए गए उसके कार्य पर हो (पद 10-22) या फिर अपने लोगों के प्रति उसकी करुणापूर्ण देखभाल से संबंधित हो (पद 23-26)। हम परमेश्वर में सदा अपना भरोसा बनाए रख सकते हैं क्योंकि उसकी करुणा कभी कम नहीं होती; परमेश्वर की करुणा का स्थाई होना हमें हर परिस्थिति में आशा प्रदान करता रहता है।

   इसीलिए हम भी भजनकार के साथ यह कह सकते हैं: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है" (पद 1)।


परमेश्वर का अनुग्रह अथाह; उसकी करुणा अनन्त और उसकी शांति अवर्णनीय है।

क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं; इसी कारण, हे याकूब की सन्तान तुम नाश नहीं हुए। - मलाकी 3:6

बाइबल पाठ: भजन 136:1-11; 23-26
Psalms 136:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:2 जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:3 जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:4 उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:5 उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:6 उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:7 उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:8 दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:9 और रात पर प्रभुता करने के लिये चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:10 उसने मिस्त्रियों के पहिलौठों को मारा, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:11 और उनके बीच से इस्राएलियों को निकाला, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:23 उसने हमारी दुर्दशा में हमारी सुधि ली, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:24 और हम को द्रोहियों से छुड़ाया है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:25 वह सब प्राणियों को आहार देता है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:26 स्वर्ग के परमेश्वर का धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 20-22
  • इफिसियों 6


सोमवार, 3 अक्टूबर 2016

प्रकाश


   कोलेराडो स्प्रिंग्स के चित्रकार बॉब सिमपिच के एक चित्र, A Trail of Light में एस्पन पेड़ों के एक झुरमुट को दिखाया गया है जिस पर सूर्य चमक रहा है। पतझड़ ऋतु में पेड़ों के सबसे ऊपर के पत्ते सुनहले होकर सूर्य के प्रकाश में चमक रहे हैं, परन्तु पेड़ों के नीचे की ज़मीन पर कहीं परछाईं तो कहीं प्रकाश का मिश्रण है। इस तुलना के बारे में चित्रकार ने कहा, "मैं वन के पेड़ों में से छनकर आने वाले प्रकाश द्वारा धरती पर किए गए इस जादूई प्रभाव से बहुत प्रभावित हुआ।"

   प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों को लिखा, "इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो" (2 कुरिन्थियों 4:6)। फिर आगे पौलुस अपने जीवन के अनुभव के यथार्त को लिखता है, "हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते" (पद 8-9)।

   जीवन में ऐसे समय भी आते हैं जब कठिनाईयों, दुःख और हानि आदि के कारण प्रतीत होता है कि परमेश्वर की हमारे साथ सहभागिता तथा उपस्थिति का प्रकाश धूमिल पड़ गया है। परन्तु यदि ध्यान से देखें तो इन गहरी परछाईंयों के समयों में भी उसके प्रकाश की किरणें यहाँ-वहाँ हमारे जीवनों को प्रकाशित करती हुई दिखाई देती हैं। यदि आप आज इस परछाईं और प्रकाश के मिश्रण के समय से होकर निकल रहे हैं, तो विश्वास रखें कि परमेश्वर का प्रकाश - प्रभु यीशु मसीह, सदा हमारे साथ बना रहेगा, हमारे जीवनों को प्रकाशमान करता रहेगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परिस्थितियों के अन्धकार में, परमेश्वर का प्रकाश 
सदैव हमारा मार्गदर्शन करता रहता है।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:1-12
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते। 
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं। 
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। 
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। 
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं। 
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।। 
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। 
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 17-19
  • इफिसियों 5:17-33


रविवार, 2 अक्टूबर 2016

तूफान


   एक भयानक तूफान के आने के लक्षण साफ दिख रहे थे - केवल क्षितिज़ पर ही नहीं, वरन मेरे एक मित्र के घर में भी। उस मित्र ने बताया कि जब वह हाँग-काँग में थी तो स्थानीय मौसम विभाग ने चेतावनी ज़ारी करी कि एक तीव्र तूफान आने को है। लेकिन घर की खिड़की के बाहर दस्तक दे रहे उस तूफान से भी बड़ा तूफान घर के अन्दर आने की तैयारियाँ कर रहा था। उस मित्र के पिता बीमार थे, अस्पताल में भरती थे, और उनकी देखभाल में लगे परिवार के लोग अपनी पारिवारिक तथा कार्य संबंधी ज़िम्मेदारियों को निभाने और उन ज़िम्मेदारियों में परस्पर संतुलन बनाए रखने तथा घर एवं अस्पताल के बीच आने-जाने की कशमकश में लगे हुए थे। सब थक रहे थे, सबका धैर्य कमज़ोर पड़ रहा था और घर के अन्दर की परिस्थिति तनावपूर्ण होती जा रही थी।

   जब बदकिस्मती, दुःख और तनाव के थपेड़े हमें इधर से उधर पटकते हैं, तब जीवन एक तूफान के समान प्रतीत हो सकता है। ऐसे में हम किस ओर मुड़ें? परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जब प्रभु यीशु के चेले नाव द्वारा झील पार करते समय एक तूफान में फंस गए, और नाव भयानक रीति से हिचकोले लेने लगी, और उन्हें लगा कि वे अब डूबने पर हैं, तब उनके मन में उनके साथ यात्रा कर रहे प्रभु यीशु को लेकर विचार आया कि क्या प्रभु को उनकी कोई चिन्ता नहीं है? अर्थात, उस विकट परिस्थिति में भी चेले जानते थे कि उन्हें किसकी ओर मुड़ना है; उनकी सहायता कौन कर सकता है। और प्रभु यीशु ने उस तूफान को शांत करके अपनी सामर्थ उन पर प्रकट करी (मरकुस 4:38-39)।

   लेकिन कई बार प्रभु तुरंत ही तूफान को शांत नहीं करता है, जिससे उस समय उन चेलों के समान, आज हम भी यही सोचने लगते हैं कि क्या प्रभु को हमारी चिंता है भी? अपने भय को शांत करने के लिए हमें अपने उस विश्वास को थामे रहना है कि परमेश्वर कौन है और क्या कुछ कर सकता है। हम उसमें शरण ले सकते हैं: "जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा" (भजन 91:1)। हम उसकी सहायता से, उसके अनुग्रह के द्वारा दूसरों को सांत्वना और शांति दे सकते हैं। हम सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी, प्रेम करने वाले सबसे बुद्धिमान पिता परमेश्वर की शरण में आकर शांत होकर बैठ सकते हैं; क्योंकि वह जीवन के हर तूफान में हमारे साथ बना रहता है, और उस तूफान में से हमें सुरक्षित निकाल भी लाता है। - पोह फैंग चिया


किसी को ज़ोर से चिल्लाकर उसे पुकारने की आवश्यकता नहीं है; 
प्रभु हमारे सोचने से भी अधिक निकट है। - भाई लॉरेंस

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 14-16
  • इफिसियों 5:1-16


शनिवार, 1 अक्टूबर 2016

रिवाज़


   मेरी बढ़ती उम्र में हमारे घर के जिन नियमों का हमें पालन करना होता था उन में से एक नियम था कि हम क्रोध को साथ लिए हुए सोने के लिए बिस्तर में नहीं जा सकते थे, जो कि परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसियों 4:26 पर आधारित था। सोने जाने से पहले हमें अपने सारे झगड़ों और परस्पर असहमतियों का निवारण करना होता था। इसके साथ का एक दूसरा नियम था कि सोने जाते समय हमारे माता-पिता हम भाई बहनों से कहते थे, "शुभ-रात्रि। हम तुम से प्रेम करते हैं" और प्रत्युत्तर में हम भी कहते थे, "शुभ-रात्रि। हम भी आपसे प्रेम करते हैं।"

   इस पारिवारिक रिवाज़ के महत्व को मैं हाल ही में और गहराई से समझने पाई। मेरी माँ फेफड़े के कैंसर के साथ मरणासन रोगियों की देखभाल करने वाले एक अस्पताल में भरती थीं, और उनकी उत्तर देने की क्षमता दिन-प्रतिदिन घटती जा रही थी। लेकिन प्रति-रात्रि उनके पास से जाने के समय मैं उन से कहती थी, "माँ, मैं आप से प्रेम करती हूँ।" और यद्यपि वे और कुछ कह पाने में असमर्थ थीं, लेकिन फिर भी वे उत्तर देतीं, "मैं भी तुम से प्रेम करती हूँ।" अपनी उस बढ़ती उम्र के समय में मैंने कभी नहीं सोचा था कि घर का यह रिवाज़, इतने वर्षों के बाद, मेरे लिए इतना बहुमूल्य उपहार बन जाएगा।

   समय और पुनरावृति अकसर हमारे रिवाज़ों से उनके अर्थ और महत्व को चुरा लेते हैं; लेकिन कुछ रिवाज़ बहुमूल्य आत्मिक सत्यों को स्मरण दिलाते रहने के माध्यम होते हैं। आज के समान ही, प्रथम शताब्दी के मसीही विश्वासियों ने भी प्रभु-भोज का दुरुपयोग किया था, जिससे उनके लिए उसका अर्थ और महत्व हल्का पड़ने लग गया था। लेकिन प्रेरित पौलुस ने उन लोगों से इसे बन्द कर देने के लिए नहीं कहा; वरन उन्हें स्मरण करवाया कि, "क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो" (1 कुरिन्थियों 11:26)।

   ऐसे अर्थपूर्ण और महत्वपूर्ण रिवाज़ों को छोड़ नहीं देना चाहिए; वरन उनके सच्चे अर्थ और महत्व को लोगों के सामने लाना चाहिए, उन्हें पुनःस्थापित करना चाहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


किसी भी रिवाज़ का अर्थ और महत्व खो सकता है; 
लेकिन इसका यह तात्पर्य नहीं है कि वह अर्थहीन या महत्वहीन हो गया है।

क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। - इफिसियों 4:26

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-34
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। 
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। 
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें। 
1 Corinthians 11:33 इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो। 
1 Corinthians 11:34 यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हारा इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 11-13
  • इफिसियों 4


शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

नई शुरूआत


   अनेकों देशों में, स्वास्थ्य से संबंधित नियमों के अन्तर्गत, पुराने गद्दों को बेचने या उनके पुनःउपयोग करना प्रतिबन्धित है; वे केवल कचरे के ढेर में ही डाले जा सकते हैं। टिम कीनन ने इस समस्या का एक समाधान निकाला है, और आज उसका यह व्यवसाय एक दर्जन लोगों को नौकरी देता है कि वे उन गद्दों में से उनके बनाने में प्रयोग हुए कपड़े, फोम और धातु को निकाल कर पुनःउपयोगी बनाने के लिए कार्य करें। लेकिन यह पूरी कहानी का केवल एक भाग ही है। पत्रकार बिल वोग्रिन ने कोलेरॉडो स्प्रिंग्स के अख़बार The Gazette में लिखा, "कीनन जो जो वस्तुएं पुनःउपयोगी बनाते हैं...उनमें संभवतः उनके पास काम करने वाले लोग ही उनकी सबसे बड़ी सफलता हैं।" अपने इस व्यवसाय में कार्य करने के लिए कीनन केवल बेघर और बेरोज़गार लोगों को ही लेता है, उन्हें जिन्हें सब ने त्याग दिया है, कोई रखना नहीं चाहता है; ऐसे लोगों को वह काम तथा जीवन में आगे बढ़ने का एक और अवसर देता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 5:17-32 में लकवे के मारे एक ऐसे व्यक्ति का उल्लेख है जिसे प्रभु यीशु शरीर और आत्मा की चँगाई दी। इस अद्भुत आश्चर्यकर्म के पश्चात लेवी ने प्रभु यीशु की बुलाहट पर उसके पीछे हो लेने का निर्णय लिया, और फिर प्रभु यीशु के आदर में आयोजित भोज मे भाग लेने के लिए अपने साथ के अन्य चुँगी लेने वालों और मित्रों को बुलाया (पद 27-29)। क्योंकि उस समय के यहूदी, विशेषकर यहूदियों के धार्मिक अगुवे, चुँगी लेने वालों को बहुत तुच्छ समझते थे, उनके साथ संगति रखने में अपना अनादर समझते थे; इसलिए प्रभु यीशु को लेवी के साथियों और मित्रों के साथ भोजन करते देख, उन्होंने प्रभु यीशु पर समाज में तुच्छ समझे जाने वाले लोगों के साथ संगति रखने का दोष लगाया (पद 30)। प्रभु यीशु ने उन्हें उत्तर दिया कि वैद्य की आवश्यकता भले-चंगे लोगों को नहीं वरन बीमारों को ही होती है, और कहा, "मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं" (लूका 5:32)।

   यदि कोई अपने आप को समाज या परिवार से त्यागा हुआ समझता है, यह समझता है कि वह संसार के कूड़े के ढेर में फेंके जाने लायक है, तो उसके लिए प्रभु यीशु की ओर से एक अच्छी खबर है - प्रभु यीशु को उसका प्रयोजन है; प्रभु यीशु उसके लिए अपने प्रेम भरी बाहें फैलाए खड़ा है। ऐसा हर व्यक्ति प्रभु यीशु के पास आए, अपना जीवन उसे समर्पित करे, प्रभु के साथ संगति में हो ले और प्रभु यीशु में एक नया जीवन, एक नई उपयोगिता, आगे बढ़ने के एक नए अवसर का लाभ उठाने वाला बन जाए। प्रभु यीशु संसार में इसीलिए आया है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु में उद्धार का अर्थ एक नया जीवन प्राप्त करना है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: लूका 5:17-32
Luke 5:17 और एक दिन ऐसा हुआ कि वह उपदेश दे रहा था, और फरीसी और व्यवस्थापक वहां बैठे हुए थे, जो गलील और यहूदिया के हर एक गांव से, और यरूशलेम से आए थे; और चंगा करने के लिये प्रभु की सामर्थ उसके साथ थी। 
Luke 5:18 और देखो कई लोग एक मनुष्य को जो झोले का मारा हुआ था, खाट पर लाए, और वे उसे भीतर ले जाने और यीशु के साम्हने रखने का उपाय ढूंढ़ रहे थे। 
Luke 5:19 और जब भीड़ के कारण उसे भीतर न ले जा सके तो उन्होंने कोठे पर चढ़ कर और खप्रैल हटाकर, उसे खाट समेत बीच में यीशु के साम्हने उतरा दिया। 
Luke 5:20 उसने उन का विश्वास देखकर उस से कहा; हे मनुष्य, तेरे पाप क्षमा हुए। 
Luke 5:21 तब शास्त्री और फरीसी विवाद करने लगे, कि यह कौन है, जो परमेश्वर की निन्‍दा करता है? परमेश्वर का छोड़ कौन पापों की क्षमा कर सकता है? 
Luke 5:22 यीशु ने उन के मन की बातें जानकर, उन से कहा कि तुम अपने मनों में क्या विवाद कर रहे हो? 
Luke 5:23 सहज क्या है? क्या यह कहना, कि तेरे पाप क्षमा हुए, या यह कहना कि उठ, और चल फिर? 
Luke 5:24 परन्तु इसलिये कि तुम जानो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है (उसने उस झोले के मारे हुए से कहा), मैं तुझ से कहता हूं, उठ और अपनी खाट उठा कर अपने घर चला जा। 
Luke 5:25 वह तुरन्त उन के साम्हने उठा, और जिस पर वह पड़ा था उसे उठा कर, परमेश्वर की बड़ाई करता हुआ अपने घर चला गया। 
Luke 5:26 तब सब चकित हुए और परमेश्वर की बड़ाई करने लगे, और बहुत डरकर कहने लगे, कि आज हम ने अनोखी बातें देखी हैं।
Luke 5:27 और इसके बाद वह बाहर गया, और लेवी नाम एक चुंगी लेने वाले को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
Luke 5:28 तब वह सब कुछ छोड़कर उठा, और उसके पीछे हो लिया। 
Luke 5:29 और लेवी ने अपने घर में उसके लिये बड़ी जेवनार की; और चुंगी लेने वालों की और औरों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे एक बड़ी भीड़ थी। 
Luke 5:30 और फरीसी और उन के शास्त्री उस के चेलों से यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे, कि तुम चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाते-पीते हो? 
Luke 5:31 यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्तु बीमारों के लिये अवश्य है। 
Luke 5:32 मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 9-10
  • इफिसियों 3


गुरुवार, 29 सितंबर 2016

विलक्षण अनुग्रह


   जॉन न्यूटन (1725-1807) को ब्रिटेन की राजकीय नौसेना की नौकरी से अनाज्ञाकारिता के कारण निकाल दिया गया और वह गुलामों के व्यापार से जुड़ गया। इस कुप्रथा के व्यापार के लिए एटलांटिक महासागर के इस पार से उस पार गुलामों को लाने-ले जाने वाले जलपोतों में काम करते समय जॉन न्यूटन गाली-गलौज से भरी भाषा तथा परमेश्वर के विरुद्ध निन्दाजनक बातें बोलते रहने के लिए कुख्यात हो गया था, और बढ़ते बढ़ते एक समुद्री जहाज़ का कप्तान भी बन गया। सन 1748 की एक ऐसी ही यात्रा में उसका जहाज़ डूबने की कगार पर आ गया, और उसने अपने जीवन की रक्षा के लिए प्रभु यीशु को पुकारा, तथा प्रभु के अनुग्रह से उसकी जान बच गई, जिसके बाद जॉन न्यूटन ने प्रभु यीशु को अपना जीवन समर्पित कर दिया।

   इस नए जीवन तथा प्रभु के अनुग्रह पा लेने की अपनी अयोग्यता का एहसास उसे सारी उम्र बना रहा। वह एक प्रभावी मसीही प्रचारक बन गया और आगे चलकर दास-प्रथा के विरुद्ध खड़े होने वाले लोगों के आन्दोलन का एक अगुवा भी हुआ। न्यूटन ने ब्रिटेन की संसद के सामने दासों से संबंधित अपने अनुभवों और आँखों देखे दुर्व्यहार पर अकाट्य प्रमाण और इस कुप्रथा की अनैतिकता बयान भी दिए। अपने जीवन-परिवर्तन और मसीह यीशु का विश्वासी बनने के अनुभव पर आधारित लिखे भक्ति गीत Amazing Grace (अद्भुत अनुग्रह) के लिए न्यूटन आज भी जाना जाता है; उसका लिखा यह गीत आज भी सबसे लोकप्रीय मसीहि गीतों में से एक है।

   इस परिवर्तन के पश्चात जीवन में आई सारी अच्छाई को न्यूटन ने परमेश्वर के अनुग्रह का परिणाम ही बताया। परमेश्वर के अनुग्रह पर उसका यह विश्वास परमेश्वर के वचन बाइबल के उन नायकों के विश्वास के समान ही है जो अपनी कमज़ोरियों और चरित्र के विकारों के बावजूद परमेश्वर के लिए उपयोगी पात्र बने और आज भी जिनके नाम आदर के साथ लिए जाते हैं, जैसे कि राजा दाऊद जो व्यभिचार और हत्या का दोषी था; प्रेरित पतरस जिसने प्रभु यीशु का चेला होने के बावजूद कायरता दिखाते हुए प्रभु का इन्कार किया; प्रेरित पौलुस, जो मसीही विश्वासियों को सताने वाला हुआ करता था, आदि।

   परमेश्वर का जो विलक्षण अनुग्रह इन सभी और इनके जैसे अन्गिनित अन्य लोगों के जीवनों में कार्यकारी हुआ, जिस अनुग्रह ने उनके जीवनों को बदल कर बिलकुल नया, आदरणीय और अद्भुत बना दिया, वही अनुग्रह आज भी समस्त मानव जाति के हर व्यक्ति के लिए सदा सेंत-मेंत उपलब्ध है; न्यूटन के समान सच्चे हृदय से प्रभु यीशु को पुकारने, उससे अपने पापों के लिए क्षमा माँगने और उसे अपना जीवन समर्पित करने भर की ही देर है: "हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है" (इफिसियों 1:7) और परमेश्वर हमारा मन, हमारा जीवन परिवर्तित कर देगा, अपनी आशीषों से भर देगा। - फिलिप यैन्सी


जो जीवन परमेश्वर के विलक्षण अनुग्रह में जड़वत हैं 
वे परमेश्वर की निकटता से कभी उखाड़े नहीं जा सकते।

यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं। - 1 तिमुथियुस 1:15

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)। 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 7-8
  • इफिसियों 2


बुधवार, 28 सितंबर 2016

अवसर


   अनेकों अन्य शहरों के समान, अमेरिका के अलाबामा प्रांत में स्थित शहर एंटरप्राइज़ में भी वहाँ की विशिष्ट बात के लिए एक प्रतिष्ठित स्मारक बनाया गया है। लेकिन यह स्मारक अन्य किसी भी स्मारक से बहुत भिन्न है क्योंकि यह ना तो वहाँ के किसी प्रतिष्ठित नागरिक के सम्मान में है, और ना ही वहाँ की किसी विशेष वस्तु अथवा उपलब्धि के लिए है। वह स्मारक रूई की खेती को बरबाद करने वाले एक छोटे से कीड़े बॉल वीविल के सम्मान में है।

   सन 1900 के आरंभिक वर्षों में बॉल वीविल मेक्सिको से दक्षिणी अमेरिका में आया और कुछ ही समय में उस कीड़े ने उस इलाके की आय के प्रमुख स्त्रोत, कपास के खेतों को बरबाद कर दिया। उस कीड़े के कारण आई निराशा और मजबूरी में पड़े किसान कपास छोड़कर एक अन्य फसल - मूँगफली उगाने लगे, जिसपर बॉल वीविल का ज़ोर नहीं चलता था। साथ ही उन्होंने इस बात को भी पहचाना कि वे एक ही प्रकार की फसल पर आवश्यकता से अधिक निर्भर हो गए थे, और बॉल वीविल ने उन्हें फसलों में विविधता लाने पर मजबूर किया, जो उनके लिए और भी अधिक समृद्ध होने का कारण हो गया। इसी बात का श्रेय उस कीड़े को देते हुए उसका वह स्मारक एंटरप्राइज़ शहर में बनाया गया।

   यह घटना और बॉल वीविल से मिली यह शिक्षा हमारे जीवनों में कभी-कभी आने वाली उन परिस्थितियों के समान है जो वह सब कुछ बरबाद कर देती हैं जिसे हमने वर्षों की मेहनत और लगन से बनाकर खड़ा किया है। यह बरबादी आर्थिक, या शारीरिक एवं सेहत संबंधी, या हमारी भावनाओं से संबंधित या अन्य किसी प्रकार की हो सकती है, और उस समय बहुत भयावह होती है; हमें लगता है कि अब कुछ नहीं हो सकता, बस यही अन्त है। लेकिन जैसे एंटरप्राइज़ शहर के लोगों ने सीखा, किसी पुराने की हानि उठाना एक नई आशीष को सीखने का अवसर बन सकता है। परमेश्वर भी हमारे जीवनों में कठिन परिस्थितियों को हमारी किसी पुरानी बुरी आदत को छुड़ाने या फिर हमें कोई नया सदगुण सिखाने के लिए कर सकता है। परमेश्वर ने ऐसा ही पौलुस के साथ किया, जब उसे अनुग्रह के और गहरे अर्थ को समझाने-सिखाने के लिए उसके शरीर में एक कष्ट को आने दिया (2 कुरिन्थियों 12:7-9)।

   बजाए इसके कि हम उन पुरानी बातों या आदतों में बने रहें जो अब प्रभावी और उपयोगी नहीं रही हैं, और उनके जाने से शोकित हों, निराशा में पड़ें; उन परिस्थितियों को जो उन पुरानी बातों को हमारे जीवनों से निकालने में सहायक होती हैं, परमेश्वर की ओर से दिए गए नई आशीषों को पाने के अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए और उन से शिक्षा लेकर आगे बढ़ना चाहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर अकसर कठिन अनुभवों के द्वारा हमारे जीवनों को बेहतर बनाता है।

मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं। - भजन 119:71

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:7-10
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 5-6
  • इफिसियों 1