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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

बचाना


   फिल्म Man of Steel सन 2013 में प्रदर्श्न के लिए आई; यह फिल्म अलौकिक सामर्थ रखने वाले काल्पनिक पात्र सूपरमैन पर आधारित है, जिसकी कहानी पर बनी कई फिल्में पहले भी आ चुकी हैं। इस नई फिल्म में असाधारण स्पेशल-इफ़ेक्ट हैं और इसकी कहानी का एक्शन अविरल चलता रहता है। इसलिए यह फिल्म संसार भर में बहुत लोकप्रीय हुई और संसार भर में लोग इसे देखने के लिए सिनेमा घरों की ओर आकर्षित हुए। कुछ का कहना था कि इस फिल्म का आकर्षण उसमें प्रयुक्त अनूठी टेक्नौलोजी था; जबकि कुछ अन्य यह मानते थे कि सूपरमैन की कहानी के आकर्षण ने इसे इतना लोकप्रीय बनाया।

   इस फिल्म की नायिका, लोइस लेन की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री एमी एडम्स का सूपरमैन के प्रति आकर्षण के बारे में मानना है कि यह आकर्षण एक मूलभूत मानवीय आकांक्षा के कारण है - बचाए जाने की आकांक्षा। एमी ने कहा: "कौन यह नहीं मानना चाहेगा कि ऐसा एक व्यक्ति है जो हमें हर परिस्थिति में बचा सकता है, हमें हम से भी बचा सकता है?"

   यह बड़ा अद्भुत प्रश्न है; और इसका उत्तर है कि इस संसार में हमें हर परिस्थिति तथा हमें हमसे भी बचाने वाला व्यक्ति पहले ही आ चुका है, और उसका नाम है प्रभु यीशु मसीह। प्रभु यीशु के जन्म, जीवन, सेवकाई, मृत्यु और पुनरुत्थान तथा उसके जगत का उद्धारकर्ता होने के बारे में परमेश्वर के वचन बाइबल में प्राचीन काल से अनेकों भविष्यवाणियाँ दर्ज की गईं। उनके जन्म से संबंधित एक भविष्यवाणी में जिब्राइल नामक स्वर्गदूत द्वारा प्रभु यीशु के सांसारिक पिता यूसुफ से कही गई बात थी: "वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा" (मत्ती 1:21)।

   बाइबल की भविष्यवाणियों के अनुसार प्रभु यीशु संसार में आए और अपने बलिदान तथा पुनरुत्थान द्वारा समस्त संसार के सभी मनुष्यों के लिए पापों की क्षमा तथा उद्धार का मार्ग बना कर उपलब्ध कर दिया। बचाए जाने की आकांक्षा जो सभी मनुष्यों के हृदयों में बनी रहती है, उसकी पूर्ति अन्ततः केवल प्रभु यीशु मसीह में ही होती है; क्योंकि यीशु नाम का अर्थ है "प्रभु बचाने वाला", और हमें बचाना उसके संसार में आने का उद्देश्य था। - बिल क्राउडर


यीशु का नाम और काम एक ही हैं - हमें बचाना।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: मत्ती 1:18-25
Matthew 1:18 अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उस की माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उन के इकट्ठे होने के पहिले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई। 
Matthew 1:19 सो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की। 
Matthew 1:20 जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा; हे यूसुफ दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। 
Matthew 1:21 वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। 
Matthew 1:22 यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो। 
Matthew 1:23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “परमेश्वर हमारे साथ”। 
Matthew 1:24 सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहां ले आया। 
Matthew 1:25 और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20


गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

अदृश्य संसार


   क्या आप जानते हैं कि आपके एक ही हाथ पर विद्यमान सूक्षम जीवाणुओं की संख्या संसार की कुल जनसंख्या से अधिक है? क्या आप यह भी जानते हैं कि ये जीवाणु इतने सूक्ष्म होते हैं कि सुई के छेद में ही लाखों समा सकते हैं? क्योंकि ये इतने सूक्षम होते हैं इसलिए हमें आँखों से दिखाई नहीं देते हैं; एक ही कोशिका वाले इन जीवों को देखने के लिए सूक्षमदर्शी यंत्र का उपयोग करना पड़ता है। परन्तु ये हवा, मिट्टी, पानी, हमारे तथा अन्य सभी जीव जन्तुओं के शरीर पर और शरीर के अन्दर विद्यमान होते हैं, वहाँ बढ़ते हैं, वहाँ से फैलते हैं और इनके साथ हमारा संपर्क लगातार बना रहता है। यद्यपि उनका संसार हमारी इन्द्रियों की क्षमताओं से बिलकुल परे है, वे सरलता से हमें दिखाई नहीं देते हैं, हम उनके बारे में सब कुछ पूर्ण रूप से नहीं जान पाए हैं, लेकिन उनका होना एक ऐसा यथार्थ है जिसका इन्कार नहीं किया जा सकता है।

   इसी प्रकार आत्मिक संसार की बातें भी हम मनुष्यों को दिखाई नहीं देती हैं, परन्तु उनके होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, बिलाम नबी को भी यह बात समझनी पड़ी। सांसारिक धन-संपत्ति के लालच में आकर वह अपने दो सेवकों के साथ मार्ग पर जा रहा था; जिस गदही पर सवार होकर वह जा रहा था, "उस गदही को यहोवा का दूत हाथ में नंगी तलवार लिये हुए मार्ग में खड़ा दिखाई पड़ा; तब गदही मार्ग छोड़कर खेत में चली गई; तब बिलाम ने गदही को मारा, कि वह मार्ग पर फिर आ जाए" (गिनती 22:23)। उस स्वर्गदूत से बचने के लिए वह गदही मार्ग के साथ के खेत में चली गई, और आगे संकरा मार्ग देखकर मार्ग के किनारे की दीवार के साथ बिलाम का पाँव दबा कर बैठ गई। उसकी इस बात से बिलाम क्रोधित हुआ और उसने अपनी गदही को और मारा; क्योंकि वह यह नहीं समझ पा रहा था कि कुछ अलौकिक घट रहा है - जब तक कि परमेश्वर ने उस अलौकिक को देख पाने के लिए उसकी आँखें नहीं खोल दीं (पद 31)।

   बाइबल हमें बताती है कि आत्मिक संसार विद्यमान है, और उसकी सच्चाईयों का, चाहे वे अच्छी हों या बुरी, सामना हमें यदा-कदा करना ही पड़ता है (इब्रानियों 13:2; इफिसियों 6:12)। इस कारण परमेश्वर का वचन हमें सचेत करता है कि हम इस बात का ध्यान रखें, इसके विषय प्रार्थना में रहें और उसका सामना करने के लिए तैयार रहें। जैसे परमेश्वर इस संसार पर, जिसे हम अपनी इन्द्रियों से देख और अनुभव कर सकते हैं, राज करता है; वैसे ही परमेश्वर उस अदृश्य संसार पर भी राज करता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


दृश्य या अदृश्य, सारी सृष्टि परमेश्वर के प्रभुत्व के आधीन है।

निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। - इफिसियों 6:10-12

बाइबल पाठ: गिनती 22:21-31
Numbers 22:21 तब बिलाम भोर को उठा, और अपनी गदही पर काठी बान्धकर मोआबी हाकिमों के संग चल पड़ा। 
Numbers 22:22 और उसके जाने के कारण परमेश्वर का कोप भड़क उठा, और यहोवा का दूत उसका विरोध करने के लिये मार्ग रोककर खड़ा हो गया। वह तो अपनी गदही पर सवार हो कर जा रहा था, और उसके संग उसके दो सेवक भी थे। 
Numbers 22:23 और उस गदही को यहोवा का दूत हाथ में नंगी तलवार लिये हुए मार्ग में खड़ा दिखाई पड़ा; तब गदही मार्ग छोड़कर खेत में चली गई; तब बिलाम ने गदही को मारा, कि वह मार्ग पर फिर आ जाए। 
Numbers 22:24 तब यहोवा का दूत दाख की बारियों के बीच की गली में, जिसके दोनों ओर बारी की दीवार थी, खड़ा हुआ। 
Numbers 22:25 यहोवा के दूत को देखकर गदही दीवार से ऐसी सट गई, कि बिलाम का पांव दीवार से दब गया; तब उसने उसको फिर मारा। 
Numbers 22:26 तब यहोवा का दूत आगे बढ़कर एक सकेत स्थान पर खड़ा हुआ, जहां न तो दाहिनी ओर हटने की जगह थी और न बाईं ओर। 
Numbers 22:27 वहां यहोवा के दूत को देखकर गदही बिलाम को लिये दिये बैठ गई; फिर तो बिलाम का कोप भड़क उठा, और उसने गदही को लाठी से मारा। 
Numbers 22:28 तब यहोवा ने गदही का मुंह खोल दिया, और वह बिलाम से कहने लगी, मैं ने तेरा क्या किया है, कि तू ने मुझे तीन बार मारा? 
Numbers 22:29 बिलाम ने गदही से कहा, यह कि तू ने मुझ से नटखटी की। यदि मेरे हाथ में तलवार होती तो मैं तुझे अभी मार डालता। 
Numbers 22:30 गदही ने बिलाम से कहा क्या मैं तेरी वही गदही नहीं जिस पर तू जन्म से आज तक चढ़ता आया है? क्या मैं तुझ से कभी ऐसा करती थी? वह बोला, नहीं। 
Numbers 22:31 तब यहोवा ने बिलाम की आंखे खोलीं, और उसको यहोवा का दूत हाथ में नंगी तलवार लिये हुए मार्ग में खड़ा दिखाई पड़ा; तब वह झुक गया, और मुंह के बल गिरके दण्डवत की।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:21-41


बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

लेखक


   पिछले वर्षों में मैं पुस्तकों को पढ़ने और उन पर चर्चा करने वाले कई समूहों में सम्मिलित रही हूँ। इन समूहों में कुछ मित्र मिलकर एक पुस्तक का चुनाव करते हैं और उसे पढ़ते हैं, और फिर हम सब एक साथ जमा होकर उसके बारे में चर्चा करते हैं, उन विचारों को समझने का प्रयास करते हैं जो लेखक ने उस पुस्तक में रखे हैं। इन चर्चाओं में एक बात भी अवश्य होती है - कोई ना कोई व्यक्ति एक ऐसा प्रशन भी उठा देता है जिसका उत्तर हम में से किसी के पास नहीं होता है; और फिर कोई अन्य कह उठता है, "काश कि हम लेखक से पूछ पाते!" न्यू यॉर्क शहर में प्रचलित हो रही एक प्रवृत्ति इसे संभव कर रही है। कुछ लेखक, एक मोटी रकम लेकर, ऐसे पुस्तक समूहों के लिए अपने आप को उपलब्ध कराते हैं, और उनके साथ चर्चा करते हैं, लोगों के प्रश्नों का निवारण करते हैं।

   लेकिन हम जब परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन करने के लिए एकत्रित होते हैं तो कितना भिन्न होता है। जब भी हम जमा होते हैं, अपने वायदे के अनुसार, प्रभु यीशु हमारे मध्य में विद्यमान होता है; इसके लिए वह हमसे कोई फीस नहीं लेता है; उसके हमारे साथ मिलने का समय निर्धारण करने में भी कोई समस्या नहीं होती - हमें अपना समय तय करना होता है, वह तो सदैव साथ होता है। साथ ही उसका पवित्र-आत्मा हम मसीही विश्वासियों के अन्दर निवास करता है, और परमेश्वर का वचन समझने में हमारी सहायता करता है, जैसा प्रभु यीशु ने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से कुछ समय पहले अपने चेलों से वायदा किया था (यूहन्ना 14:26)।

   बाइबल का लेखक समय और स्थान की सीमाओं से बंधा हुआ नहीं है; वह हम से कभी भी और कहीं भी मिल सकता है। इसलिए जब भी हमारे पास कोई प्रश्न हो तो हम बिना किसी शंका के उस से पूछ सकते हैं, और वह हमें उत्तर देता है - लेकिन आवश्यक नहीं कि उसका यह उत्तर हमारी इच्छा, धारणा, विचारधारा के अनुसार हो, या फिर हमारी किसी समय-सारणी के अनुसार आए।

   बाइबल का लेखक परमेश्वर चाहता है कि हम में उस का मन हो (1 कुरिन्थियों 2:16) जिससे कि पवित्र-आत्मा से शिक्षा प्राप्त कर के हम उसके द्वारा हमें सेंत-मेंत दी गई भेंट की महानता और कीमत को, परमेश्वर की बातों को समझ सकें (पद 12)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब भी आप अपनी बाइबल को खोलें, तो उसके लेखक से प्रार्थना करें
 कि वह आपके मन और मस्तिष्क को उसे समझने के लिए खोले।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। - यूहन्ना 14:26

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 2:1-16
1 Corinthians 2:1 और हे भाइयों, जब मैं परमेश्वर का भेद सुनाता हुआ तुम्हारे पास आया, तो वचन या ज्ञान की उत्तमता के साथ नहीं आया। 
1 Corinthians 2:2 क्योंकि मैं ने यह ठान लिया था, कि तुम्हारे बीच यीशु मसीह, वरन क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह को छोड़ और किसी बात को न जानूं। 
1 Corinthians 2:3 और मैं निर्बलता और भय के साथ, और बहुत थरथराता हुआ तुम्हारे साथ रहा। 
1 Corinthians 2:4 और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभाने वाली बातें नहीं; परन्तु आत्मा और सामर्थ का प्रमाण था। 
1 Corinthians 2:5 इसलिये कि तुम्हारा विश्वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं, परन्तु परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर हो।
1 Corinthians 2:6 फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्तु इस संसार का और इस संसार के नाश होने वाले हाकिमों का ज्ञान नहीं। 
1 Corinthians 2:7 परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्‍त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया। 
1 Corinthians 2:8 जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते। 
1 Corinthians 2:9 परन्तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं। 
1 Corinthians 2:10 परन्तु परमेश्वर ने उन को अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किया; क्योंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्वर की गूढ़ बातें भी जांचता है। 
1 Corinthians 2:11 मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। 
1 Corinthians 2:12 परन्तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। 
1 Corinthians 2:13 जिन को हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्तु आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मिक बातें आत्मिक बातों से मिला मिला कर सुनाते हैं। 
1 Corinthians 2:14 परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है। 
1 Corinthians 2:15 आत्मिक जन सब कुछ जांचता है, परन्तु वह आप किसी से जांचा नहीं जाता। 
1 Corinthians 2:16 क्योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए? परन्तु हम में मसीह का मन है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 4-6
  • मरकुस 4:1-20


मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

निकट


   मुझे यह परेशान करता था कि मैं अपने आचरण तथा जीवन में जितना परमेश्वर के निकट बढ़ता, उतना ही अधिक पापी महसूस करता। फिर एक दिन मेरे कमरे हुई एक घटना ने मुझे इसे समझा दिया। मेरे कमरे की खिड़की पर परदे खिंचें हुए थे, कोई बत्ती नहीं जल रही थी, और दो परदों के बीच की पतली सी झिर्री से सूरज की ज्योति की किरण कमरे में आ रही थी। जब मैंने ज्योति की उस किरण की ओर देखा तो उसकी रौशनी में हवा में इधर-उधर हिलते हुए धूल के कण दिखाई दिए। बिना ज्योति के ये कण दिखाई नहीं देते हैं, और अन्धेरे में कमरा साफ-सुथरा प्रतीत होता है, परन्तु ज्योति के कारण गन्दगी दिखाई देने लगती है।

   इस घटना ने मेरे आत्मिक जीवन पर भी प्रकाश डाला - संसार की बातों और अपने दृष्टिकोण तथा आँकलन के अन्धकार में मुझे अपने अन्दर कुछ बुरा दिखाई नहीं देता है; परन्तु जब मैं ज्योतिर्मय प्रभु परमेश्वर के निकट आता हूँ, तो उसकी ज्योति मुझे मेरे अन्दर की गन्दगी दिखा देती है। जब प्रभु यीशु मसीह की ज्योति हमारे जीवनों के अन्धकार में चमकती है, तो वह हमारे पाप प्रगट कर देती है - हमें निराश करने के लिए नहीं वरन हमें नम्र करने के लिए कि हम उस पर विश्वास रख सकें। क्योंकि हम सब पापी हैं और परमेश्वर की धार्मिकता के मानकों पर पूरे नहीं उतरते (रोमियों 3:23), इसलिए हम अपनी किसी धार्मिकता पर अपने उद्धार के लिए भरोसा नहीं रख सकते हैं। जब हम में कोई पाप होता है, तो हमारे प्रभु के निकट आने पर प्रभु की ज्योति उस पाप को प्रगट कर देती है, और हम यशायाह के समान पुकार उठते हैं, "हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है" (यशायाह 6:5)।

   परमेश्वर हर बात में परम-सिद्ध है। उसके निकट आने के लिए हमारे अन्दर नम्रता और बच्चों के समान विश्वास रखने वाला मन चाहिए ना कि कोई घमण्ड या अपनी ही किसी बात पर भरोसा करना। जब हम पश्चतापी मन के साथ, दीन और नम्र होकर प्रभु परमेश्वर के निकट आते हैं, तो अपने अनुग्रह में होकर वह हमें स्वीकार करता है, अपने परिवार का भाग बना लेता है। यह भला है कि परमेश्वर के निकट आने में हम अपने आप को उसकी निकटता के लिए अयोग्य महसूस करते हैं, क्योंकि इससे हमारे अन्दर कोई घमण्ड उत्पन्न नहीं होने पाता, वरन नम्रता आती है, और उसके सामने धर्मी बनने के लिए केवल उस ही पर निर्भर होने की भावना आती है। - लॉरेंस दरमानी


जब हम प्रभु परमेश्वर के साथ चलते हैं तो घमण्ड के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता है।

इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। - रोमियों 3:23-24

बाइबल पाठ: यशायाह 6:1-8
Isaiah 6:1 जिस वर्ष उज्जिय्याह राजा मरा, मैं ने प्रभु को बहुत ही ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा; और उसके वस्त्र के घेर से मन्दिर भर गया। 
Isaiah 6:2 उस से ऊंचे पर साराप दिखाई दिए; उनके छ: छ: पंख थे; दो पंखों से वे अपने मुंह को ढांपे थे और दो से अपने पांवों को, और दो से उड़ रहे थे। 
Isaiah 6:3 और वे एक दूसरे से पुकार पुकारकर कह रहे थे: सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है। 
Isaiah 6:4 और पुकारने वाले के शब्द से डेवढिय़ों की नेवें डोल उठीं, और भवन धूंए से भर गया। 
Isaiah 6:5 तब मैं ने कहा, हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! 
Isaiah 6:6 तब एक साराप हाथ में अंगारा लिये हुए, जिसे उसने चिमटे से वेदी पर से उठा लिया था, मेरे पास उड़ कर आया। 
Isaiah 6:7 और उसने उस से मेरे मुंह को छूकर कहा, देख, इस ने तेरे होंठों को छू लिया है, इसलिये तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए। 
Isaiah 6:8 तब मैं ने प्रभु का यह वचन सुना, मैं किस को भेंजूं, और हमारी ओर से कौन जाएगा? तब मैं ने कहा, मैं यहां हूं! मुझे भेज

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3


सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

बोझिल


   स्वीडेन की नौसेना के इतिहास में 10 अगस्त 1628 एक काला दिवस है। उस दिन स्वीडेन की शाही नौसेना का युद्धपोत ’वासा’ अपनी प्रथम जलयात्रा पर निकला था। इस युद्धपोत को बनाने में दो वर्ष का समय लगा था, उसे बहुत खर्च करके अनेकों प्रकार से सजाया गया था, आकर्षक बनाया गया था और उसमें 64 तोपें लगाई गईं थीं। स्वीडेन की नौसेना के स्वाभिमान का यह प्रतीक, यात्रा आरंभ करने के कुछ ही देर बाद, समुद्र में केवल एक मील जाकर ही डूब गया! ऐसा क्यों हुआ? वासा अपनी सजावट और उसके अन्दर विद्यमान वस्तुओं के कारण इतना बोझिल हो गया था कि वह समुद्र में तैरते रहने के लायक नहीं रह गया था; उसके अन्दर के बोझ ने ही उसे डुबो दिया।

   मसीही विश्वास का जीवन भी इसी प्रकार अनेकों व्यर्थ बातों से बोझिल होकर अपने उद्देश्य के लिए अयोग्य हो जाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री का लेखक, आत्मिक जीवन यात्रा को भली-भांति पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए लिखता है: "इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों 12:1-2)।

   उस युद्धपोत के समान ही हम बाहर से बहुत आकर्षक हो सकते हैं, अनेकों दिखाई देने वाली बातों के कारण लोगों को बहुत अच्छे प्रतीत हो सकते हैं। परन्तु यदि हमारे अन्दर उन पापों का बोझ बना हुआ है जिन्हें हमने प्रभु परमेश्वर के सामने स्वीकार करके उनके लिए पश्चताप नहीं किया है, उससे क्षमा नहीं माँगी है या जिन्हें अभी तक छोड़ा नहीं है; या फिर किसी ऐसी आदत अथवा लालसा के बोझ से दबे हुए हैं जो हम जानते हैं कि हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा के अनुसार नहीं है, तो इन बातों से हमारा मसीही विश्वास का जीवन अशान्त एवं परमेश्वर के लिए अनुपयोगी हो जाएगा। परन्तु इन बातों का समाधान है - परमेश्वर के मार्गदर्शन तथा उसके पवित्र-आत्मा की सामर्थ से, हमारे ये बोझ हलके किए जा सकते हैं, और हमारे जीवन परमेश्वर की शान्ति, आनन्द और आशीषों के साथ हलके और उपयोगी बनाए जा सकते हैं।

   क्या आप अभी भी बोझिल जीवन जी रहे हैं? अपने बोझों को प्रभु यीशु को सौंप दें; क्योंकि प्रभु यीशु मसीह में सबके लिए क्षमा और अनुग्रह सदा उपलब्ध रहता है: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है" (मत्ती 11:28-30)। - डेनिस फिशर


दृढ़ निर्णय में दृढ़ "नहीं" का भी उतना ही योगदान है जितना दृढ़ "हाँ" का।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:1-5
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। 
Hebrews 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो। 
Hebrews 12:5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाईं दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 26-27
  • मरकुस 2


रविवार, 19 फ़रवरी 2017

ध्यान


   प्रतिदिन अपने दफ्तर जाने के लिए मैं एक ही राजमार्ग से होकर निकलता हूँ, और प्रतिदिन मैं अपने मार्ग में अनेकों वाहन चालकों को देखता हूँ, जिनका ध्यान मार्ग से बँटा हुआ होता है; उनकी संख्या घबारा देने वाली है। मुख्यतः यह बँटा हुआ ध्यान फोन पर बात करने या सन्देश पढ़ने अथवा भेजने के कारण होता है, परन्तु मैंने ऐसे चालकों को 70 मील प्रति घंटा या अधिक की रफतार से गाड़ी चलाने के साथ साथ अखबार पढ़ते हुए, मेकअप करते हुए, और नाशता करते हुए भी देखा है! कुछ परिस्थितियों में ध्यान बँटना क्षणिक और हानि रहित होता है; परन्तु ऐसे चलती हुई गाड़ी में, यह अत्यंत हानिकारक एवं जानलेवा भी हो सकता है - अपने लिए भी और अन्य लोगों के लिए भी।

   परमेश्वर के साथ हमारे संबंधों में भी ध्यान बँटना परस्पर संपर्क तथा संबंध के लिए हानिकारक होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 10 अध्याय के अन्त में जो वृतान्त दिया है, उसमें हम देखते हैं कि मार्था के साथ प्रभु यीशु मसीह की समस्या यही थी; प्रभु यीशु के स्वागत तथा मेहमानवाज़ी में वह इतनी व्यस्त थी कि उसके पास प्रभु ही के लिए समय नहीं था। अपनी इस व्यस्तता से स्वयं मार्था भी इतनी घबरा गई कि अपनी बहन मरियम के बारे में प्रभु से ही शिकायत करने लगी, क्योंकि मरियम काम में उसका हाथ बंटाने की बजाए प्रभु के चरणों पर बैठकर उससे सीख रही थी। प्रभु यीशु ने मार्था को समझाया, "मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:41-42)।

   प्रभु यीशु की संगति में बैठने तथा उसकी शिक्षाओं को सुनने से मार्था का ध्यान भंग करने वाली बातें ना तो गलत थी और ना ही प्रभु के लिए मार्था उद्देश्य गलत था। लेकिन उन बातों के कारण वह शान्त मन से प्रभु के साथ बैठकर उसकी संगति का आनन्द तथा उसकी शिक्षाओं को सुन नहीं पा रही थी। प्रभु की उपस्थिति में होते हुए भी, प्रभु की उत्तम पहुनाई की इच्छा और प्रयास रखते हुए भी, वह प्रभु से दूर थी, उसके संपर्क में नहीं थी; और उसके ये प्रयास ही उसकी अशान्ति के कारण बन गए थे।

   प्रभु हमारी गहरी भक्ति और पूरे ध्यान के योग्य है; और वही हमें हर उस ध्यान बँटाने वाली बात पर जय पाने का मार्गदर्शन एवं सामर्थ दे सकता है जो उसके साथ हमारे गहरे और अर्थपूर्ण तथा आनन्दपूर्ण संपर्क में बाधा बनती है। - बिल क्राउडर


यदि आप कुंठित होना चाहते हैं तो अपने अन्दर देखते रहिए; 
यदि अशान्त और परेशान तो अपने आस-पास देखिए; 
यदि आनन्दित एवं शान्त तो प्रभु यीशु की ओर देखिए।

मैं तुम से सच सच कहता हूं, जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजने वाले की प्रतीति करता है, अनन्त जीवन उसका है, और उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती परन्तु वह मृत्यु से पार हो कर जीवन में प्रवेश कर चुका है। - यूहन्ना 5:24

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 25
  • मरकुस 1:23-45


शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

दर्पण


   हम अपने आप को दर्पण में कितनी बार देखते हैं? कुछ अध्ययनों के अनुसार, एक व्यक्ति दिन भर में औसतन 8 से 10 बर दर्पण में अपने आप को दर्पण में देखता है; जबकि कुछ अन्य सर्वेक्षण कहते हैं कि यदि दुकानों के शीशों में दिखने वाले अपने प्रतिबिंब तथा स्मार्ट-फोन के स्क्रीन पर अपने देखने आदि को भी सम्मिलित कर लें तो यह संख्या बढ़कर 60 से 70 बार प्रतिदिन हो जाती है। हम क्यों अपने आप को इतनी बार देखते हैं? अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि हम ऐसा यह जाँचने के लिए करते हैं कि हम दूसरों को कैसे दिखाई दे रहे हैं जिससे अपने आप को ठीक और व्यवस्थित कर सकें, रख सकें; विशेषकर तब जब हमें किसी सभा या सामजिक समारोह में सम्मिलित होना होता है। यदि हम में कुछ बुरा या भद्दा दिखाई दे और हम उसे ठीक करने की इच्छा ना रखें तो फिर हमारे अपने आप को दर्पण में देखने से क्या लाभ?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित याकूब ने अपनी पत्री में लिखा है कि परमेश्वर के वचन को पढ़ने या सुनने के पश्चात उसके अनुसार कार्य ना करना अपने आप को दर्पण में देखकर जो देखा है फिर उसे भूल जाना है (याकूब 1:22-24)। लेकिन बेहतर विकल्प है कि परमेश्वर के वचन के दर्पण में अपने आप को ध्यान से देखें, और जो दिखाई दे उसके अनुसार योग्य प्रतिक्रिया करें: "पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है" (पद 25)।

   यदि हम परमेश्वर के वचन के सुनने वाले हैं, परन्तु उसके अनुसार अपने जीवन में कार्य नहीं करते हैं, तो हम स्वयं अपने आप को ही धोखा देते हैं (पद 22)। परन्तु जब हम परमेश्वर के वचन की रौशनी में अपना आँकलन करते हैं और उसके निर्देशों का पालन करते हैं, तो परमेश्वर हमारी सहायता करता है और हमें दिन प्रति दिन अपनी समानता में बढ़ाता जाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


बाइबल वह दर्पण है जो हमें वैसा दिखाती है, जैसे हम परमेश्वर को देखाई देते हैं।

इसलिये जो कोई इन छोटी से छोटी आज्ञाओं में से किसी एक को तोड़े, और वैसा ही लोगों को सिखाए, वह स्वर्ग के राज्य में सब से छोटा कहलाएगा; परन्तु जो कोई उन का पालन करेगा और उन्हें सिखाएगा, वही स्वर्ग के राज्य में महान कहलाएगा। - मत्ती 5:19

बाइबल पाठ: याकूब 1:19-27
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 
James 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 23-24
  • मत्ती 1:1-22