ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

देखभाल



      जिस दिन हमारी सबसे छोटी बेटी वायुयान से यात्रा के द्वारा म्यूनिक से बार्सिलोना जा रही थी, मैं उसके वायुयान की उड़ान का विवरण देखने के लिए अपनी सबसे पसंदीदा उड़ान पर नज़र रखने वाली वेबसाईट पर गया। मैंने उस साईट पर उसकी उड़ान की संख्या भरी और मेरे कम्प्यूटर स्क्रीन पर उसके वायुयान की उड़ान का विवरण दिखने लगा। मैंने देखा कि वह ऑस्ट्रिया को पार कर चुकी थी, इटली के उत्तरी भाग के निकट से निकल रही थी। वहाँ से उसका वायुयान भूमध्यसागर पर से होकर निकलेगा, फिर फ्रांस के दक्षिणी भाग से होता हुआ स्पेन की ओर जाएगा, तथा उसके समयानुसार पहुँच जाने की आशा थी।  उस विवरण को दखकर ऐसा लग रहा था कि उसकी उड़ान के बारे में जो पता नहीं था वह केवल यह कि उड़ान के दौरान भोजन के लिए क्या परोसा जा रहा है!

      मुझे अपनी बेटी के ठिकाने और परिस्थितियों की इतनी चिंता क्यों थी? क्योंकि मैं उससे प्रेम करता हूँ। मेरे लिए जो वह है उसके कारण, मुझे चिन्ता रहती है कि वह जीवन में कहाँ जा रही है, क्या कर रही है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम भजन 32 में दाऊद द्वारा परमेश्वर की क्षमा, मार्गदर्शन, और हमारे प्रति चिन्ता का उत्सव मनाते हुए देखते हैं। हमारा परमेश्वर पिता हमारे विषय में किसी भी मानवीय पिता से बहुत बढ़कर, हमारे बारे में सब कुछ जानता है। वह हमारे जीवन के हर एक बात को बारीकी से, और हमारे हृदय की हर एक आवश्यकता को गहराई से जानता है। हम से परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि, “मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा” (पद 8)।

      आज हमारी परिस्थिति चाहे जो भी हो, हम परमेश्वर की उपस्थिति और देखभाल पर भरोसा रख सकते हैं, क्योंकि “...जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा” (पद 10)। - डेविड मैक्कैस्लैंड


हम कभी भी परमेश्वर की दृष्टि और प्रेम भरी चिन्ता से दूर नहीं होते हैं।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: भजन 32: 1-11
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22



गुरुवार, 31 जनवरी 2019

क्रूस



      अंग्रेज़ी साहित्य में सबसे प्राचीन मसीही कविताओं में से एक है “The Dream of the Rood” – शब्द ‘रूड’ अंग्रेज़ी का प्राचीन शब्द है जिसका अभिप्राय होता है रॉड (लाठी) या पोल (खम्बा), और इस कविता में रूड शब्द को उस क्रूस के लिए प्रयोग किया गया है जिस पर प्रभु यीशु मसीह को क्रूसित किया गया था। इस प्राचीन कविता में, क्रूस की गाथा को काठ के क्रूस के दृष्टिकोण से लिखा गया है। जब वृक्ष को पता चलता है कि उसकी लकड़ी को प्रभु को क्रूसित करने के लिए क्रूस बनाने के लिए प्रयोग किया जाएगा तो वह इस प्रकार उपयोग किए जाने के लिए मना कर देता है। परन्तु प्रभु यीशु उस वृक्ष को सहायता देने के लिए तैयार करता है जिससे समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग बन सके।

      अदन की वाटिका में एक वृक्ष उस वर्जित फल का स्त्रोत था जिसे खाकर हमारे आदि माता-पिता ने पाप के प्रवेश और मानव जाति में फैल जाने का मार्ग प्रदान किया। और जब परमेश्वर के पुत्र ने समस्त मानव जाति के लिए अपना लहू बलिदान कर के बहाया तब वह हमारे स्थान पर एक वृक्ष के काठ से बने क्रूस पर ठोका गया था (1 पतरस 2:24)।

      उद्धार पाने के लिए मसीह यीशु पर विश्वास करने वाले सभी लोगों के लिए क्रूस ही परिवर्तन बिंदु है। और जब से वह प्रभु यीशु के बलिदान के लिए प्रयोग हुआ है, वह उस अद्भुत अभूतपूर्व बलिदान के कारण पाप और मृत्यु से छुटकारा पाने का महान प्रतीक और चिन्ह बन गया है। प्रभु का क्रूस, हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम का अकथनीय, वर्णन से बाहर, महान प्रमाण है। - डेनिस फिशर


प्रभु यीशु ने हमारे उद्धार के लिए काठ पर अपना बलिदान दिया।

वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।  - 1 पतरस 2:24

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:12-20
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में संभागी हों।
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे।
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-26
  • मत्ती 20:17-34



बुधवार, 30 जनवरी 2019

पुनर्निर्माण



      एडवर्ड क्ली जब अनेकों वर्षों तक बाहर रहने के पश्चात, बर्लिन लौट कर आए, तो उन्होंने पाया कि जिस शहर की उनकी स्मृतियाँ थीं और जिससे वे प्रेम करते थे, अब वह नहीं था; अब वह बिलकुल बदल गया था, और उन्होंने ध्यान किया कि इतने वर्षों में वे भी बहुत बदल गए थे। क्ली ने हेमिस्फेयर्स पत्रिका में अपने एक लेख में इसके विषय लिखा, “जिस शहर से आप प्रेम करते हैं, वहाँ लौट कर आना अप्रत्याशित हो सकता है...यह निराशात्मक भी हो सकता है।” अपने बीते समय के स्थानों पर जाना दुःख और हानि का आभास करवा सकता है। हम अब वह व्यक्ति नहीं हैं जो हम तब थे, और न ही वह स्थान जो हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण है वैसा है जैसा तब था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम नहेम्याह के विषय में देखते हैं कि वह अनेकों वर्षों से, इस्राएल के देश से दूर, निर्वासन में था। ऐसी परिस्थिति में उसे अपने लोगों की दुर्दशा और यरूशलेम के विनाश के बारे में पता चला। तब उसने फारस के राजा अर्तक्षत्र से अनुमति ली कि वह यरूशलेम जाकर वहाँ की शहरपनाह का पुनर्निर्माण करे। एक रात यरूशलेम की शहरपनाह की टोह लेने के बाद (नहेम्याह 2:13-15), नहेम्याह ने वहाँ के लोगों से कहा, “तुम तो आप देखते हो कि हम कैसी दुर्दशा में हैं, कि यरूशलेम उजाड़ पड़ा है और उसके फाटक जले हुए हैं। तो आओ, हम यरूशलेम की शहरपनाह को बनाएं, कि भविष्य में हमारी नामधराई न रहे” (पद 17)।

      नहेम्याह वापस केवल अपनी यादों को दोहराने के लिए नहीं आया था, वरन उस टूटे हुए को फिर से बनाने के लिए आया था। यह हमारे लिए एक सशक्त पाठ है; हम अपने अतीत के टूटे और बिगड़े हुए भागों को फिर से ठीक करके स्थापित करें। प्रभु यीशु में हमारा विश्वास, और हमारे जीवनों में कार्यकारी उसकी सामर्थ्य हमें आगे की ओर देखने, और टूटे हुए का पुनर्निर्माण करने के लिए सबल करती है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


हम अतीत को बदल तो नहीं सकते हैं, परन्तु परमेश्वर हमें भविष्य के लिए बदल रहा है।

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: नहेम्याह 2:11-18
Nehemiah 2:11 जब मैं यरूशलेम पहुंच गया, तब वहां तीन दिन रहा।
Nehemiah 2:12 तब मैं थोड़े पुरुषों को ले कर रात को उठा; मैं ने किसी को नहीं बताया कि मेरे परमेश्वर ने यरूशलेम के हित के लिये मेरे मन में क्या उपजाया था। और अपनी सवारी के पशु को छोड़ कोई पशु मेरे संग न था।
Nehemiah 2:13 मैं रात को तराई के फाटक में हो कर निकला और अजगर के सोते की ओर, और कूड़ाफाटक के पास गया, और यरूशलेम की टूटी पड़ी हुई शहरपनाह और जले फाटकों को देखा।
Nehemiah 2:14 तब मैं आगे बढ़ कर सोते के फाटक और राजा के कुण्ड के पास गया; परन्तु मेरी सवारी के पशु के लिये आगे जाने को स्थान न था।
Nehemiah 2:15 तब मैं रात ही रात नाले से हो कर शहरपनाह को देखता हुआ चढ़ गया; फिर घूम कर तराई के फाटक से भीतर आया, और इस प्रकार लौट आया।
Nehemiah 2:16 और हाकिम न जानते थे कि मैं कहां गया और क्या करता था; वरन मैं ने तब तक न तो यहूदियों को कुछ बताया था और न याजकों और न रईसों और न हाकिमों और न दूसरे काम करने वालों को।
Nehemiah 2:17 तब मैं ने उन से कहा, तुम तो आप देखते हो कि हम कैसी दुर्दशा में हैं, कि यरूशलेम उजाड़ पड़ा है और उसके फाटक जले हुए हैं। तो आओ, हम यरूशलेम की शहरपनाह को बनाएं, कि भविष्य में हमारी नामधराई न रहे।
Nehemiah 2:18 फिर मैं ने उन को बतलाया, कि मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर कैसी हुई और राजा ने मुझ से क्या क्या बातें कही थीं। तब उन्होंने कहा, आओ हम कमर बान्धकर बनाने लगें। और उन्होंने इस भले काम को करने के लिये हियाव बान्ध लिया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 23-24
  • मत्ती 20:1-16



मंगलवार, 29 जनवरी 2019

अनन्त



      जेरलीन टैली की मृत्यु जून 2015 में हुई, वह उस समय सँसार का सबसे वृद्ध व्यक्ति था – 116 वर्ष की आयु का। यरूशलेम शहर ने 1995 में अपना 3000वां जन्मदिन मनाया। मनुष्य के लिए 116 वर्ष की आयु बहुत वृद्ध होना है, और एक शहर के लिए 3000 वर्ष का होना बहुत प्राचीन होना है; परन्तु ऐसे भी पेड़ हैं जो इससे भी पुरातन हैं। कैलिफोर्निया के एक इलाके में स्थित एक देवदार के वृक्ष की आयु 4800 वर्ष की आंकी गई है, जिससे वह कुलपति अब्राहम से भी 800 वर्ष पुराना ठहरता है!

      जब यहूदी धर्म के अगुवों ने प्रभु यीशु मसीह को उसकी पहचान के विषय उसे चुनौती दी, तो “यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूं” (यूहन्ना  8:58)। ऐसा कहकर उसने यह दावा किया कि वह अब्राहम से भी पहले से है। उसके इस दृढ़ कथन से उसे चुनौती देने वाले हतप्रभ रह गए और उन्होंने उसे पत्थरवाह करके मारने का प्रयास किया, क्योंकि वे समझ गए कि वह अपनी शारीरिक आयु की बात नहीं कर रहा था परन्तु अपने आप को अनन्त और परमेश्वर के प्राचीन नाम “मैं हूँ” बता कर स्वयँ को परमेश्वर जता रहा था (देखें निर्गमन 3:14)। परन्तु त्रिएक परमेश्वर का अंग होने के नाते प्रभु यीशु वैध रूप से यह दावा कर सकता था।

      प्रभु यीशु ने यूहन्ना 17:3 में प्रार्थना की “और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने” उस अनन्त परमेश्वर ने समय में प्रवेश किया जिससे हमें अनन्त जीवन का उपहार दे सके। उसने अपना यह उद्देश्य हमारे स्थान पर मृत्यु दण्ड सहकर, और फिर मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा, पूर्ण और प्रमाणित किया। उसके इस बलिदान के कारण हम उसके साथ उस भविष्य की बाट जोह रहे हैं जहाँ समय की कोई सीमा नहीं होगी, हम अनन्तकाल तक उसके साथ बने रहेंगे।

      हमारा प्रभु परमेश्वर अनन्त है, वह हमें भी अनन्त बना रहा है। - बिल क्राउडर


मसीह में सब वस्तुएँ स्थिर रहती हैं। - कुलुस्सियों 1:17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:48-59
John 8:48 यह सुन यहूदियों ने उस से कहा; क्या हम ठीक नहीं कहते, कि तू सामरी है, और तुझ में दुष्टात्मा है?
John 8:49 यीशु ने उत्तर दिया, कि मुझ में दुष्टात्मा नहीं; परन्तु मैं अपने पिता का आदर करता हूं, और तुम मेरा निरादर करते हो।
John 8:50 परन्तु मैं अपनी प्रतिष्‍ठा नहीं चाहता, हां, एक तो है जो चाहता है, और न्याय करता है।
John 8:51 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्त काल तक मृत्यु को न देखेगा।
John 8:52 यहूदियों ने उस से कहा, कि अब हम ने जान लिया कि तुझ में दुष्टात्मा है: इब्राहीम मर गया, और भविष्यद्वक्ता भी मर गए हैं और तू कहता है, कि यदि कोई मेरे वचन पर चलेगा तो वह अनन्त काल तक मृत्यु का स्‍वाद न चखेगा।
John 8:53 हमारा पिता इब्राहीम तो मर गया, क्या तू उस से बड़ा है? और भविष्यद्वक्ता भी मर गए, तू अपने आप को क्या ठहराता है।
John 8:54 यीशु ने उत्तर दिया; यदि मैं आप अपनी महिमा करूं, तो मेरी महिमा कुछ नहीं, परन्तु मेरी महिमा करनेवाला मेरा पिता है, जिसे तुम कहते हो, कि वह हमारा परमेश्वर है।
John 8:55 और तुम ने तो उसे नहीं जाना: परन्तु मैं उसे जानता हूं; और यदि कहूं कि मैं उसे नहीं जानता, तो मैं तुम्हारे समान झूठा ठहरूंगा: परन्तु मैं उसे जानता हूं, और उसके वचन पर चलता हूं।
John 8:56 तुम्हारा पिता इब्राहीम मेरा दिन देखने की आशा से बहुत मगन था; और उसने देखा, और आनन्द किया।
John 8:57 यहूदियों ने उस से कहा, अब तक तू पचास वर्ष का नहीं; फिर भी तू ने इब्राहीम को देखा है?
John 8:58 यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूं।
John 8:59 तब उन्होंने उसे मारने के लिये पत्थर उठाए, परन्तु यीशु छिपकर मन्दिर से निकल गया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19



सोमवार, 28 जनवरी 2019

प्रेम



      हम मसीही विश्वासी उस परमेश्वर की सेवा करते हैं जो हमारी सेवा के कार्यों से बढ़कर, हम से प्रेम करता है। यह सच है कि परमेश्वर चाहता है कि अपने परिवारों की आवश्यकताओं के लिए हम कार्य करें, और उसके द्वारा रचे गए सँसार की ज़िम्मेदारी के साथ देख-भाल करें। वह हमसे यह भी आशा रखता है कि हम दुर्बल, भूखे, प्यासे, और दुखी लोगों की सेवा करें, तथा उनके प्रति भी सजग और संवेदनशील रहें जिन्होंने अब तक परमेश्वर की पवित्र आत्मा की प्रेम भरी पुकार को प्रत्युत्तर नहीं दिया है। परन्तु फिर भी जिस परमेश्वर के लिए हम यह सब कार्य करते हैं, वह हमारे कार्यों से बढ़कर हम से प्रेम रखता है।

      हमें इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि वह समय आ सकता है कि किसी अप्रत्याशित दुर्घटना, कोई स्वास्थ्य हानि, किसी परिस्थिति के कारण हमारे लिए परमेश्वर के लिए कुछ कर पाना संभव न रहे। परमेश्वर चाहता है कि ऐसे समयों में भी हम स्मरण रखें कि वह हम से प्रेम रखता है, जो हम उसके लिए करते हैं उसके कारण नहीं, वरन जो हम हैं – उसकी सन्तान, उसके कारण!

      जब एक बार हमने पापों से पश्चाताप करके प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया, उसे अपना जीवन समर्पित कर दिया, उसके बाद फिर कोई भी “परेशानी, या कठिनाई, या सताव, या अकाल, या नग्नता, या खतरा, या तलवार” हमें “परमेश्वर के प्रेम से जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग [नहीं] कर सकेगी” (रोमियों 8:35, 39)।

      जब वह सब जो हम हैं या जो हम कर सकते हैं, हम से ले लिया जाए, तब भी परमेश्वर इतना ही चाहता है कि हम हमारे प्रति उसके प्रेम में आश्वस्त रहें, उसपर भरोसा बनाए रखें। - रैंडी किल्गोर


हमारे अस्तित्व का कारण परमेश्वर के साथ हमारी संगति है।

यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है। - यिर्मयाह 31:3

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-29
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों के समान गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35



रविवार, 27 जनवरी 2019

अप्रत्यक्ष



      परमेश्वर के वचन बाइबल की कहानियाँ हमें रुक कर विचार करवा सकती हैं। उदाहरण के लिए, जब मूसा परमेश्वर के लोगों को प्रतिज्ञा किए हुए देश में लेकर जा रहा था, और अमालेकियों ने उन पर हमला किया, तो मूसा को कैसे पता चला कि उसे पहाड़ पर चढ़कर परमेश्वर की लाठी को ऊँचा उठाना है (निर्गमन 17:8-15)? हमें इसका उत्तर बताया तो नहीं गया है, परन्तु हम देखते हैं कि युद्ध के समय में जब मूसा अपने हाथों को उठाए रहता था, तो इस्राएली युद्ध जीतते रहते थे, और जब वह हाथ नीचे कर लेता था तो अमालेकी विजयी होने लगते थे। जब मूसा थक गया तो उसका भाई हारून, और एक अन्य पुरुष, हूर, ने मूसा के हाथों को उठाए रखा, जिससे इस्राएली युद्ध में विजयी हो सके।

      बाइबल में हम हूर के विषय में कुछ विशेष लिखा हुआ नहीं पाते हैं, परन्तु इस्राएल के इतिहास में इस समय पर उसने एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह हमें स्मरण करवाता है कि परमेश्वर के कार्य और राज्य में अप्रत्यक्ष लोगों की भी बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक भूमिका है – ऐसे लोग जो नेतृत्व करने वाले अगुवों की सहायता करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करते हैं, किन्तु स्वयँ कभी सामने नहीं आते हैं। इतिहास की पुस्तकों में अगुवों का उल्लेख आता है, समाज उनके नेतृत्व और कार्यों की बड़ाई करता है। परन्तु शांति से अप्रत्यक्ष रहकर कार्य करते रहने वालों को परमेश्वर कभी नज़रंदाज़ नहीं करता है, उन्हें उनका प्रतिफल देता है। परमेश्वर अपने उस जन का ध्यान करता है जो प्रतिदिन उसके सम्मुख अपने परिवार और मित्रों के लिए प्रार्थना में मध्यस्थता करता है। उसे उस कार्यकर्ता की सुधि रहती है जो प्रति इतवार, चर्च से पहले और बाद में चर्च को साफ़ और व्यवस्थित करते हैं। परमेश्वर को उस पड़ौसी का ध्यान रहता है जो प्रोत्साहन तथा सहायता के साथ अपने पड़ौसी की ओर हाथ बढ़ाता है।

      परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों को अपनी सेवकाई और महिमा के लिए उपयोग करता है, चाहे हमें हमारा योगदान महत्वपूर्ण न भी लगे। इसलिए आप जिस भी अप्रत्यक्ष नायक को जानते हैं, उसके प्रति धन्यवादी और प्रोत्साहक रहिए। - एमी बाउचर पाई


परमेश्वर के सामने अप्रत्यक्ष नायक भी प्रत्यक्ष बने रहते हैं।

हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5: 5-7

बाइबल पाठ: निर्गमन 17:8-15
Exodus 17:8 तब अमालेकी आकर रपीदीम में इस्राएलियों से लड़ने लगे।
Exodus 17:9 तब मूसा ने यहोशू से कहा, हमारे लिये कई एक पुरूषों को चुनकर छांट ले, और बाहर जा कर अमालेकियों से लड़; और मैं कल परमेश्वर की लाठी हाथ में लिये हुए पहाड़ी की चोटी पर खड़ा रहूंगा।
Exodus 17:10 मूसा की इस आज्ञा के अनुसार यहोशू अमालेकियों से लड़ने लगा; और मूसा, हारून, और हूर पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गए।
Exodus 17:11 और जब तक मूसा अपना हाथ उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब तब अमालेक प्रबल होता था।
Exodus 17:12 और जब मूसा के हाथ भर गए, तब उन्होंने एक पत्थर ले कर मूसा के नीचे रख दिया, और वह उस पर बैठ गया, और हारून और हूर एक एक अलंग में उसके हाथों को सम्भाले रहें; और उसके हाथ सूर्यास्त तक स्थिर रहे।
Exodus 17:13 और यहोशू ने अनुचरों समेत अमालेकियों को तलवार के बल से हरा दिया।
Exodus 17:14 तब यहोवा ने मूसा से कहा, स्मरणार्थ इस बात को पुस्तक में लिख ले और यहोशू को सुना दे, कि मैं आकाश के नीचे से अमालेक का स्मरण भी पूरी रीति से मिटा डालूंगा।
Exodus 17:15 तब मूसा ने एक वेदी बनाकर उसका नाम यहोवानिस्सी रखा;
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20



शनिवार, 26 जनवरी 2019

समान



      ब्रिटेन के लेखक एवलिन वॉ शब्दों को ऐसे प्रयोग करते थे कि उनके चरित्र की त्रुटियाँ और अधिक विदित हो जाती थीं। अन्ततः वह उपन्यासकार मसीही विश्वासी बन गया, परन्तु वह फिर भी अपने चरित्र को लेकर संघर्ष करता रहा। एक दिन एक महिला ने उससे पूछा, “श्रीमान वॉ, ऐसा कैसे हो सकता है कि आप अपने आप को मसीही भी कहें और वैसे व्यवहार भी करें जैसा आप दिखाते हैं?” उन्होंने उस महिला को उत्तर दिया, “महोदया, आप मुझे जितना बुरा समझती हैं, संभव है कि मैं वैसा हूँ। परन्तु मेरा विश्वास कीजिए कि यदि मेरा यह धर्म न होता तो मैं मनुष्य कहलाने के योग्य भी न होता।”

      वॉ एक आंतरिक आत्मिक युद्ध लड़ रहे थे, जिसका अनुभव स्वयं पौलुस ने भी किया था और जिसके विषय परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा है। अपने इस संघर्ष के बारे में पौलुस लिखता है, कि वह भला तो करना चाहता है, परन्तु कर नहीं पाता है (रोमियों 7:18)। वह बताता है कि ऐसा व्यवस्था में कोई दोष होने के कारण नहीं है, वरन उसके मानव स्वभाव के कारण है (रोमियों 7:14)। इसे और अधिक स्पष्ट करते हुए वह कहता है कि अपने भीतरी मनुष्यत्व में तो वह परमेश्वर की व्यवस्था से प्रसन्न रहता है, परन्तु उसके शरीर में एक अन्य ही व्यवस्था कार्य करती है, और वह प्रश्न करता है कि वह कैसे इस मरणहार शरीर की इस प्रवृत्ति से बच सकता है (रोमियों 7: 22-24)? और फिर वह उल्लास के साथ इस प्रश्न का उत्तर बताता है कि यह प्रभु यीशु मसीह द्वारा संभव है (रोमियों 7:25–8:2)।

      हम, अपने पापों और गलतियों का अंगीकार कर के, और अपने लिए एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता को स्वीकार करके, जब प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाते हैं तो तुरंत ही हम एक नई सृष्टि हो जाते हैं (2 कुरिन्थियों 5: 17)। परन्तु शारीरिक से आत्मिक हो जाने का यह परिवर्तन एक आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके विषय प्रेरित यूहन्ना लिखता है, “हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है” (1 यूहन्ना 3:2)। परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों को अपने पुत्र, हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में ढालता जा रहा है; एक दिन हम प्रभु के समान होंगे। - टिम गुस्ताफासन


मसीही होने का अर्थ है अक्षम्य को क्षमा करने वाला होना, 
क्योंकि परमेश्वर ने हम में विद्यमान अक्षम्य को क्षमा कर दिया। - सी. एस. ल्यूइस

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5: 17

बाइबल पाठ: रोमियों 7:12–8:2
Romans 7:12 इसलिये व्यवस्था पवित्र है, और आज्ञा भी ठीक और अच्छी है।
Romans 7:13 तो क्या वह जो अच्छी थी, मेरे लिये मृत्यु ठहरी? कदापि नहीं! परन्तु पाप उस अच्छी वस्तु के द्वारा मेरे लिये मृत्यु का उत्पन्न करने वाला हुआ कि उसका पाप होना प्रगट हो, और आज्ञा के द्वारा पाप बहुत ही पापमय ठहरे।
Romans 7:14 क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शरीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।
Romans 7:15 और जो मैं करता हूं, उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।
Romans 7:16 और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।
Romans 7:17 तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।
Romans 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।
Romans 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है।
Romans 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।
Romans 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।
Romans 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?
Romans 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं।
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17