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मंगलवार, 12 मार्च 2019

उपयोग



      हाल ही में मैं छुट्टीयां मना रहा था, तो मैं दाढ़ी बढ़ाने की सोची। मुझे बड़ी हुई दाढ़ी के साथ देखकर मेरे मित्रों और सहकर्मियों की ओर से विभिन्न प्रतिक्रियाएं आने लगीं – और अधिकांश प्रशंसनीय थीं। किन्तु एक दिन मैंने दाढ़ी के साथ अपने चेहरे को गौर से देखा, और मुझे लगा, “यह मैं नहीं हूँ” और मैंने दाढ़ी हटा दी।

      मैं इस विचार पर मनन कर रहा हूँ कि हम कौन हैं और क्यों एक या दूसरी चीज़ हमारे व्यक्तित्व के साथ सही नहीं लगती है। प्रमुखतः यह इस लिए है क्योंकि परमेश्वर ने हमें व्यक्तिगत भिन्नताएं और रूचियाँ दीं हैं। यह ठीक है कि हम सभी के शौक एक समान नहीं हैं, हम एक ही प्रकार का भोजन पसन्द नहीं करते हैं, या सभी एक ही चर्च भवन में आराधना के लिए नहीं जाते हैं। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हम में से प्रत्येक परमेश्वर द्वारा खास और अद्भुत रीति से रचा गया है (भजन 139:14)। प्रेरित पतरस ने लिखा कि हमें परस्पर एक दूसरे की सेवा में सहयोगी होने के लिए विभिन्न वरदान दिए गए हैं (1पतरस 4:10-11)।

      प्रभु यीशु के शिष्यों ने उसके साथ चलने से पहले अपने चारित्रिक गुणों की समीक्षा नहीं की थी; उन सभी के अपने अपने चरित्र और गुण थे। पतरस  बहुत बड़बोला और आवेग में कार्य करने वाला था, तो थोमा को प्रमाण चाहिए था कि प्रभु यीशु वास्तव में जी उठा है, उसे शेष सब की बात का विश्वास नहीं था। किन्तु प्रभु यीशु सभी को अपने साथ लिए चलता था, सभी को सिखाता और संवारता रहा, सभी को अपनी सेवकाई के लिए उपयोग किया।

      जब हम प्रभु की सेवक करने के विषय में ध्यान करते हैं तो अपने गुणों और योग्यताओं का ध्यान करना अच्छा हो सकता है, परन्तु कभी-कभी हमें यह भी कहना पड़ सकता है, “यह मैं नहीं हूँ” – परमेश्वर हमें हमारी आरामदेह स्थिति से निकालकर किसी भिन्न रीति से हमारा उपयोग कर सकता है। जब वह ऐसा करता है तो हमें उस सेवकाई के अनुसार ढालता और बदलता भी है, सिखाता भी है और उचित मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। जब हम उसे उसके रचनात्मक स्वभाव के अनुसार हमें उसकी सेवकाई के लिए उपयोग करने देते हैं तो उसकी अद्भुत कार्य-विधि तथा सामर्थ्य को देखने समझने पाते हैं। - डेव ब्रैनन


सामान्य जन कोई नहीं है – हम सब को विशेष रचा गया है।

मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। - भजन 139:14

बाइबल पाठ: 1पतरस 4: 7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो।
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो।
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए।
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी का है। आमीन।  

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 17-19
  • मरकुस 13:1-20



सोमवार, 11 मार्च 2019

सहायता



      विपत्ति में सहायता माँगने के लिए निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय संकेत “May Day” (मे-डे) सदा ही तीन बार – “मे-डे, मे-डे, मे-डे” दोहराया जाता है जिससे खतरनाक आपातकाल में परिस्थति को भली-भांति जीवन के लिए खतरे की स्थिति समझा जा सके। यह संकेत सन 1923 में फ्रेड्रिक स्टैनली मौक्फोर्ड द्वारा बनाया गया था, जो उस समय लंडन के क्रौएडन एयरपोर्ट पर वरिष्ठ रेडियो अफसर थे। अब बन्द किए जा चुके उस हवाई-अड्डे पर फ्रांस के पेरिस शहर से अनेकों उड़ानें आया करती थीं। नैशनल मैरिटाइम म्यूज़ियम के अनुसार मौक्फोर्ड ने यह शब्द फ्रांसीसी शब्द “m’aidez” जिसका अर्थ होता है “मेरी सहायता कीजिए” से बनाया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि राजा दाऊद, अपने जीवन भर खतरनाक जोखिम भरी परिस्थितियों का, जिनसे निकल पाने का मार्ग सूझ नहीं पड़ता था, सामना करता रहा। फिर भी हम भजन 86 में पढ़ते हैं कि अपने सबसे कठिन समय में दाऊद का भरोसा प्रभु पर था: “हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा” (पद 6, 7)।

      दाऊद ने तात्कालिक खतरे से आगे के लिए भी परमेश्वर से मार्गदर्शन माँगा, “हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं” (पद 11)। जब विपत्ति टल गई, तब भी वह परमेश्वर के साथ ही चलते रहना चाहता था।

      हमारी सबसे अधिक कठिन परिस्थितियाँ हमारे लिए परमेश्वर के साथ और प्रगाढ़ संबंध विकसित करने के मार्ग बन सकती हैं। इसका आरंभ हमारी कठिनाईयों में उसे सहायता के लिए पुकारने के द्वारा होता है। फिर सहायता के बाद उससे मार्गदर्शन पाने के अनुरोध के द्वारा यह और आगे बढ़ता है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर सहायता के लिए हमारी पुकार को सुनता है और हमें अपने मार्ग में लिए चलता है।

जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

बाइबल पाठ: भजन 86:1-13
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं।
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर।
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं।
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं।
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है।
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन।
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और न किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं।
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी।
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है।
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं।
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा।
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।  

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 14-16
  • मरकुस 12:28-44



रविवार, 10 मार्च 2019

घर



      एक युवा अफ्रीकी शरणार्थी जो स्टीवेन के नाम से जाना जाता है, बिना किसी देश का व्यक्ति है। उसे लगता है कि उसका जन्म मोज़ाम्बीक या जिम्बाब्वे में हुआ होगा। परन्तु उसने कभी अपने पिता को नहीं जाना, और उसकी माता का, जो गृह युद्ध के कारण बचकर भागी थी, और गलियों में कुछ-कुछ बेचती हुई, एक से दूसरे देश में चलती चली गई, देहांत हो गया था। बिना किसी पहचान पत्र के और अपने जन्म के स्थान का कोई प्रमाण न दे सकने के कारण स्टीवेन एक ब्रिटिश पुलिस थाने में आया, और अनुरोध करने लगा कि उसे पकड़कर जेल में डाल दिया जाए। स्टीवेन को नागरिकता के अधिकार और लाभ के बिना गलियों में भटकने से भला जेल में रहना लगा।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख नायक, प्रेरित पौलुस ने जब इफिसुस की मसीही मण्डली को पत्री लिखी, तो उन्हें प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा उन्हें मिली स्वर्गीय नागरिकता के बारे में समझाया। उसके वे गैर यहूदी पाठक जानते थे कि परदेशी और यात्री होकर जीना कैसा होता है (2:12)। किन्तु प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाने और उसमें जीवन तथा आशा प्राप्त कर लेने (1:13) के बाद उन्होंने जान लिया था कि परमेश्वर के राज्य का नागरिक होने का अर्थ क्या था (मत्ती 5:3)। प्रभु यीशु मसीह में होकर उन्होंने समझा था कि उस पिता के साथ पहचान हो जाने और उसके द्वारा देखभाल किए जाने का अभिप्राय क्या है (मत्ती 6:31-33) जिसके बारे में प्रभु यीशु ने बताया है।

      किन्तु पौलुस ने इस बात का भी एहसास किया कि जैसे-जैसे बीता समय अदृश्य होता चला जाता है, बीती बातों की स्मृतियाँ भी धूमिल होती चली जाती हैं, जिससे फिर हम यह भूलने लगते हैं कि यद्यपि अब हम मसीही विश्वासियों के लिए आशा भविष्य का नया मानदंड है, परन्तु पहले निराशा हमारे जीवन की सच्चाई हुआ करती थी।

      हमारा प्रभु परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम उसकी सुरक्षा और देखभाल में सदा बने रहें। हम यह कभी न भूलें कि प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास के द्वारा ही हमें परमेश्वर के परिवार का सदस्य होने और उन स्वर्गीय अधिकारों और भलाईयों का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। - मार्ट डीहान


आशा उनके लिए ही सबसे सार्थक होती है जिन्होंने निराशा में जीवन व्यतीत किया हो।

इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है। - मत्ती 6:33-34

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:11-22
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)।
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे।
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो।
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया।
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे।
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दोनों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए।
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दोनों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया।
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए।
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो।
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।  

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 11-13
  • मरकुस 12:1-27



शनिवार, 9 मार्च 2019

गलती



      कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने स्वीकार किया, “गलतियां तो हुई हैं”; वह कंपनी द्वारा गैर कानूनी कार्यों में लिप्त होने के बारे में चर्चा कर रहा था। वह खिन्न तो दिख रहा था, परन्तु उसने फिर भी दोष को दूर ही रखा और यह स्वीकार नहीं किया कि उसने व्यक्तिगत रीति से कुछ गलत किया था।

      कुछ “गलतियाँ” बस गलतियां ही होती हैं, जैसे कि सड़क की गलत दिशा में गाड़ी चलाना, समय सूचक में निर्धारित समय न डालना जिससे पक रहा भोजन जल जाए, अपनी बैंक की चेकबुक में उपलब्ध राशि का गलत हिसाब रखना, आदि। परन्तु कुछ जान-बूझकर किए गए कार्य होते हैं जो ‘गलती’ से कहीं बढ़कर होते हैं, और परमेश्वर उन्हें पाप कहता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भी इस बात के कई उदाहरण हैं जहाँ परमेश्वर के लोगों ने गलतियाँ करीं और फिर उनके लिए बहाने बना दिए। जब परमेश्वर ने आदम और हव्वा से पूछा कि उन्होंने उसकी अनाज्ञाकारिता क्यों की, तो तुरंत ही उन्होंने दूसरे को दोषी ठहराने का प्रयास किया (उत्पत्ति 3:8-13)। जब इस्राएलियों ने सुनहरा बछड़ा बनाकर उसकी उपासना करना आरंभ किया तो हारून ने अपना कोई दायित्व स्वीकार नहीं किया, परन्तु मूसा से कहा, “तब मैं ने उन से कहा, जिस जिसके पास सोने के गहनें हों, वे उन को तोड़कर उतार लाएं; और जब उन्होंने मुझ को दिया, मैं ने उन्हें आग में डाल दिया, तब यह बछड़ा निकल पड़ा” (निर्गमन 32:24)। शायद वह बुदबुदाया भी होगा, “गलतियाँ तो हुई हैं”।

      बहुधा अपनी गलती मान लेने की बजाए दूसरे पर दोष मढ़ देना अधिक सरल होता है। उतना ही बुरा अपने पाप को कम करके, उसकी वास्तविकता को स्वीकार करने की बजाए, उसे “गलती मात्र” कहना होता है। परन्तु जब हम परमेश्वर के समक्ष अपने पाप को मानकर उसके लिए दायित्व स्वीकार करते हैं, उससे क्षमा प्रार्थी होते हैं, तो वह हमें क्षमा करता है और बहाल भी करता है (1 यूहन्ना 1:9)। - सिंडी हैस कैस्पर


परमेश्वर से क्षमा प्राप्त करने के लिए प्रथम कदम होता है
 उस क्षमा की आवश्यकता को स्वीकार करना।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: निर्गमन 32:1-5, 19-26
Exodus 32:1 जब लोगों ने देखा कि मूसा को पर्वत से उतरने में विलम्ब हो रहा है, तब वे हारून के पास इकट्ठे हो कर कहने लगे, अब हमारे लिये देवता बना, जो हमारे आगे आगे चले; क्योंकि उस पुरूष मूसा को जो हमें मिस्र देश से निकाल ले आया है, हम नहीं जानते कि उसे क्या हुआ?
Exodus 32:2 हारून ने उन से कहा, तुम्हारी स्त्रियों और बेटे बेटियों के कानों में सोने की जो बालियां है उन्हें तोड़कर उतारो, और मेरे पास ले आओ।
Exodus 32:3 तब सब लोगों ने उनके कानों से सोने की बालियों को तोड़कर उतारा, और हारून के पास ले आए।
Exodus 32:4 और हारून ने उन्हें उनके हाथ से लिया, और एक बछड़ा ढालकर बनाया, और टांकी से गढ़ा; तब वे कहने लगे, कि हे इस्त्राएल तेरा परमेश्वर जो तुझे मिस्र देश से छुड़ा लाया है वह यही है।
Exodus 32:5 यह देखके हारून ने उसके आगे एक वेदी बनवाई; और यह प्रचार किया, कि कल यहोवा के लिये पर्ब्ब होगा।
Exodus 32:19 छावनी के पास आते ही मूसा को वह बछड़ा और नाचना देख पड़ा, तब मूसा का कोप भड़क उठा, और उसने तख्तियों को अपने हाथों से पर्वत के नीचे पटककर तोड़ डाला।
Exodus 32:20 तब उसने उनके बनाए हुए बछड़े को ले कर आग में डाल के फूंक दिया। और पीसकर चूर चूर कर डाला, और जल के ऊपर फेंक दिया, और इस्त्राएलियों को उसे पिलवा दिया।
Exodus 32:21 तब मूसा हारून से कहने लगा, उन लोगों ने तुझ से क्या किया कि तू ने उन को इतने बड़े पाप में फंसाया?
Exodus 32:22 हारून ने उत्तर दिया, मेरे प्रभु का कोप न भड़के; तू तो उन लोगों को जानता ही है कि वे बुराई में मन लगाए रहते हैं।
Exodus 32:23 और उन्होंने मुझ से कहा, कि हमारे लिये देवता बनवा जो हमारे आगे आगे चले; क्योंकि उस पुरूष मूसा को, जो हमें मिस्र देश से छुड़ा लाया है, हम नहीं जानते कि उसे क्या हुआ?
Exodus 32:24 तब मैं ने उन से कहा, जिस जिसके पास सोने के गहनें हों, वे उन को तोड़कर उतार लाएं; और जब उन्होंने मुझ को दिया, मैं ने उन्हें आग में डाल दिया, तब यह बछड़ा निकल पड़ा
Exodus 32:25 हारून ने उन लोगों को ऐसा निरंकुश कर दिया था कि वे अपने विरोधियों के बीच उपहास के योग्य हुए,
Exodus 32:26 उन को निरंकुश देखकर मूसा ने छावनी के निकास पर खड़े हो कर कहा, जो कोई यहोवा की ओर का हो वह मेरे पास आए; तब सारे लेवीय उस के पास इकट्ठे हुए।  

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33



शुक्रवार, 8 मार्च 2019

चित्रण



      लंडन शहर की नैशनल पोर्टरेट गैलरी में बीती सदियों के लोगों के चित्रों का खज़ाना है। उन चित्रों में विंस्टन चर्चिल के 166, विलियम शेक्सपीयर के 94, और जॉर्ज वॉशिंगटन के 20 चित्र भी हैं। प्राचीन चित्रों को देखकर हम विचार कर सकते हैं कि क्या वे लोग वास्तव में वैसे ही दिखते होंगे?

       उदाहरण के लिए, स्कॉटिश देश-भक्त विलियम वॉलेस (c. 1270-1305) के 8 चित्र हैं, परन्तु हमारे पास उनकी कोई फोटो नहीं है जिससे तुलना कर के यह जाना जा सके कि वे वैसे ही दीखते थे जैसे कि चित्रकार ने उन्हें दिखाया है। हम कैसे जाने कि चित्रकार ने व्यक्ति को सही रीति से चित्रित किया है?

      कुछ ऐसा ही प्रभु यीशु के चित्रण के साथ भी संभव है। बिना इस बात का एहसास किए हुए, उस पर विश्वास करने वाले, प्रभु के विषय औरों पर एक छाप छोड़ते जा रहे हैं – रंग और कूची से नहीं वरन अपने व्यवहार, कार्यों, और संबंधों आदि के द्वारा। क्या हम मसीही विश्वासी सँसार के समक्ष अपने जीवनों के द्वारा अपने प्रभु का वास्तविक चित्र प्रस्तुत कर रहे हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस की यही चिंता थी; उसने फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में लिखा, “जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो” (फिलिप्पियों 2:5)। सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु का सही चित्रण प्रस्तुत करने की लालसा के अन्तर्गत, उसने प्रभु के अनुयायियों से आग्रह किया कि वे प्रभु की दीनता, आत्म-बलिदान, और करुणा को लोगों के सामने अपने जीवनों के द्वारा दिखाएँ।

      किसी ने कहा है, “संभव है कि हम ही वह ‘यीशु मसीह’ हों जिसे कुछ लोग कभी देखने पाएँगे”; ऐसे में वे हम में होकर हमारे प्रभु के बारे में क्या देखेंगे और जानेंगे? सँसार के सामने प्रभु यीशु की वास्तविकता को प्रगट करने के लिए “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो” (2:3) का पालन करें। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु का आत्म-बलिदान हमें औरों के लिए अपने आप को दे देने के लिए प्रेरित करता है।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।  


एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18



गुरुवार, 7 मार्च 2019

शासक


      राजा कैन्युट ग्यारहवीं शताब्दी में पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक था। उसके विषय एक कहानी प्रसिद्ध है, कहा जाता है कि समुद्र में उठते हुए ज्वार के समय में उसने आज्ञा दी कि उसकी कुर्सी को समुद्र के किनारे पर रखा जाए, और उसने कुर्सी पर बैठकर समुद्र की लहरों से कहा, “तुम मेरे आधीन हो, मैं तुम्हें आज्ञा देता हूँ कि  तुम मेरी भूमी पर आगे नहीं आओगे, अपने स्वामी, मेरे, कपड़ों और अंगों को गीला नहीं करोगे।” किन्तु ज्वार के साथ लहरें आगे बढ़ती रहीं और राजा के पैरों को भिगो दिया।

      इस कहानी को अकसर कैन्युट के घमण्ड को दिखाने के लिए कहा जाता है, परन्तु वास्तव में यह कहानी दीनता के बारे में है। इसके आगे कैन्युट ने कहा, “सारा सँसार जान ले कि राजाओं की शक्ति खोखली है, केवल उसी की सामर्थ्य है जिसकी इच्छा को आकाश, पृथ्वी और जल मानते हैं।” कैन्युट की कहानी एक बात की ओर ध्यान ले जाती है: “केवल परमेश्वर ही सर्वसामर्थी है।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्यूब को भी इसी बात का बोध हुआ। उसके सामने जिसने पृथ्वी की नींव रखी (38:4-7), जो प्रातः के आगमन और रात्रि के अन्त होने को निर्धारित करता है (पद 12-13), जो हिम के भण्डार को बनाए रखता है और सितारों को दिशा देता है (पद 22, 31-33), हम मनुष्य बहुत छोटे हैं। लहरों का शासक एक ही है, और वह हम नहीं हैं (पद 11, मत्ती 8:23-27)।

      कैन्युट की कहानी को दोहराते रहना अच्छा है, विशेषकर तब जब हम अपने आप को बहुत चतुर समझ रहे हों या अपने उपर किसी बात के लिए घमण्ड कर रहे हों। किसी समुद्र या नदी के तट पर जाकर लहरों को, या कभी सूर्य को थमने का आदेश दे कर देखें; तुरंत ही पता चल जाएगा कि सर्वसामर्थी शासक कौन है, और किस की आज्ञा से सब कुछ होता है। फिर उस शासक के सामने नतमस्तक होकर उसके धन्यवादी हों कि वह हमारे जीवनों को भी संभालता है। - शेरिडन वॉयसे


परमेश्वर महान है, हम गौण हैं, और यही अच्छा है।

उसने [प्रभु यीशु] उन से कहा; हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो? तब उसने उठ कर आन्‍धी और पानी को डांटा, और सब शान्‍त हो गया। - मत्ती 8:26

बाइबल पाठ: अय्यूब 38:1-18
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया,
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है?
Job 38:3 पुरुष के समान अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे।
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नींव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा?
Job 38:6 उसकी नींव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया,
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे?
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया;
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया,
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़ लगा दिए, कि
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?
Job 38:12 क्या तू ने जीवन भर में कभी भोर को आज्ञा दी, और पौ को उसका स्थान जताया है,
Job 38:13 ताकि वह पृथ्वी की छोरों को वश में करे, और दुष्ट लोग उस में से झाड़ दिए जाएं?
Job 38:14 वह ऐसा बदलता है जैसा मोहर के नीचे चिकनी मिट्टी बदलती है, और सब वस्तुएं मानो वस्त्र पहिने हुए दिखाई देती हैं।
Job 38:15 दुष्टों से उनका उजियाला रोक लिया जाता है, और उनकी बढ़ाई हुई बांह तोड़ी जाती है।
Job 38:16 क्या तू कभी समुद्र के सोतों तक पहुंचा है, वा गहिरे सागर की थाह में कभी चला फिरा है?
Job 38:17 क्या मृत्यु के फाटक तुझ पर प्रगट हुए, क्या तू घोर अन्धकार के फाटकों को कभी देखने पाया है?
Job 38:18 क्या तू ने पृथ्वी की चौड़ाई को पूरी रीति से समझ लिया है? यदि तू यह सब जानता है, तो बतला दे।  


एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52


बुधवार, 6 मार्च 2019

सिद्ध प्रेम



      उस महिला ने रुंधे गले से अपने बेटी से संबंधित उसकी समस्या के बारे में मुझे बताया। अपनी तरुण आयु बेटी के मित्रों के संदिग्ध आचरण के कारण उस चिन्तित महिला ने अपनी बेटी का मोबाइल फोन ज़ब्त कर लिया था और उसके साथ प्रत्येक स्थान पर जाने लगी थी। उनके संबंध बिगड़ते ही जा रहे थे।

      जब मैंने इस विषय पर उसकी बेटी से बात की तो उसने बताया कि वह अपने माँ से बहुत प्रेम करती है, परन्तु उसकी माँ का प्रेम व्यवहार इतना अभिभूत करने वाला होने लगा था कि उसे घुटन अनुभव होने लगी थी। वह माँ के इस प्रेम-प्रकटीकरण की घुटन से स्वतंत्र होना चाहती थी।

      हम सभी अपूर्ण हैं, और अपने संबंधों में परस्पर संघर्षों का सामना करते हैं। हम चाहे अभिभावक हों या बच्चे, अविवाहित हो या विवाहित, हम सभी प्रेम को सही रीति से व्यक्त करने में समस्याओं का सामना करते हैं, सही बात को सही समय पर सही रीति से करने या कहने में गड़बड़ा जाते हैं। हम अपने जीवन भर प्रेम में बढ़ते तथा परिपक्व होते रहते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कोरिन्थ की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में सिद्ध प्रेम के विषय लिखा, उन्हें उसके गुण बताए। पौलुस द्वारा दिए गए मानक बहुत अद्भुत तो हैं, परन्तु उन्हें व्यवहार में लाना बहुत चुनौतीपूर्ण तथा कठिन भी हो सकता है। परन्तु हमें परमेश्वर के धन्यवादी होना चाहिए कि उसने प्रभु यीशु मसीह में हमारे सामने सिद्ध प्रेम का सजीव उदाहरण रखा है। विभिन्न प्रकार के लोगों और उनकी विभिन्न समस्याओं के साथ व्यवहार के दौरान प्रभु यीशु ने दिखाया कि व्यवाहारिक जीवन में सिद्ध प्रेम कैसा होना चाहिए। हम मसीही विश्वासी जब प्रभु का अनुसरण करते हुए जीवन व्यतीत करते हैं, उसके प्रेम में बने रहते हैं, उसके वचनों से अपने मन को भर लेते हैं, तो हम उसके प्रेम और जीवन को अधिकाधिक प्रतिबिंबित करते जाऐंगे। हम फिर भी गलतियाँ तो करेंगे, परन्तु परमेश्वर उन्हें सुधार कर प्रत्येक परिस्थिति में से भलाई को उत्पन्न करेगा, क्योंकि उसका प्रेम सब कुछ सह लेता है, और कभी टलता नहीं है (पद 7-8)। - पोह फैंग चिया


हमारे प्रति अपने प्रेम को दिखाने के लिए प्रभु यीशु ने अपना जीवन बलिदान किया; 
उसके प्रति हमारे प्रेम को दिखाने के लिए हमें उसके लिए जीवन जीना है।

प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:10-11

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13: 1-13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी।
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।  


एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31