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मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

प्रेम



      हम अपने दैनिक जीवन में देखते हैं कि शायद ही कभी कोई ऐसा दिन होता होगा जिसमें हमें अपमान, उपेक्षा, या अनादर का सामना न करना पड़ता हो। कभी-कभी हम स्वयँ ही यह अपने प्रति कर लेते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि दाऊद के शत्रु उसके साथ ऐसा ही व्यवहार कर रहे थे – वे उसे धमका रहे थे, डरा रहे थे, उसकी निन्दा कर रहे थे। इस कारण उसका आत्म-सम्मान और अपने प्रति भाव बहुत गिर गिया (भजन 4:1-2) और वह इस परेशानी की स्थिति में से निकलने का मार्ग ढूँढ़ रहा था।

      फिर दाऊद को स्मरण आया कि, “यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है; जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा” (पद 3)। दाऊद के इस  दृढ़ कथन के भाव को समझाने के लिए भिन्न अंग्रेज़ी अनुवाद भिन्न शब्द प्रयोग करते हैं। यहाँ पर जिस शब्द का अनुवाद “भक्त” हुआ है, मूल इब्रानी भाषा मैं वह है ‘हेसेद’ जिसका अर्थ होता है परमेश्वर द्वारा वाचा में बाँधा गया प्रेम, अर्थात दाऊद के कहने का अभिप्राय था “वह जिससे परमेश्वर सदा काल तक प्रेम करता ही रहेगा।”

      आज हम मसीही विश्वासियों को भी यही बात सदैव स्मरण रखनी चाहिए: परमेश्वर हम से सदा काल का प्रेम करता है, उसने हमें प्रभु यीशु मसीह में होकर एक विशेष स्थान प्रदान किया है, जहाँ हम उसके लिए उतने ही प्रिय हैं जितना प्रभु यीशु। उसने हमें अनन्तकाल के लिए अपनी सन्तान होने के लिए बुलाया है।

      इसलिए परिस्थितियों के कारण निराश होने के स्थान पर, हम अपने आप को परमेश्वर के उस प्रेम के विषय जो वह हमसे करता है, सदा स्मरण दिला सकते हैं। हम परमेश्वर की अति प्रिय सन्तान हैं, और हमारे लिए निराशा नहीं वरन आनन्द और शान्ति निर्धारित है (पद 6, 7)। हमारे प्रति परमेश्वर की आशा सदा बनी रहती है, उसका प्रेम कभी कम नहीं होता है। - डेविड रोपर


परमेश्वर के प्रेम की वास्तविकता है कि उसका प्रेम असीम होता है। - बर्नार्ड क्लैरवौक्स

यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है। - यिर्मयाह 31:3

बाइबल पाठ: भजन 4:1-8
Psalms 4:1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे; जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले।
Psalms 4:2 हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे?
Psalms 4:3 यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है; जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा।
Psalms 4:4 कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो।
Psalms 4:5 धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो।
Psalms 4:6 बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका!
Psalms 4:7 तू ने मेरे मन में उस से कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था।
Psalms 4:8 मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 8-9
  • लूका 21:1-19



सोमवार, 29 अप्रैल 2019

उपस्थित



      हम अपनी यात्रा में देर रात एक ग्रामीण विश्रामगृह में रुके, और हमें यह देखकर प्रसन्नता हुई कि हमारे कमरे के साथ एक बालकनी भी थी, जिससे बाहर का दृश्य देखा जा सकता था। किन्तु उस समय घना कोहरा छाया हुआ था, इसलिए उस अन्धकार में बालकनी से बाहर का दृश्य दिखाई नहीं दे रहा था। परन्तु प्रातः उठकर हमने देखा, कि सूरज के निकलने के बाद कोहरा छंट गया है और हम बाहर का मनोरम दृश्य देख पा रहे थे – दूर तक फ़ैली एक रमणीय, शान्त हरियाली चारागाह, जिसमें गले में घंटियाँ बंधी भेड़ें चर रही थीं, और नीले आकाश में सफ़ेद बादल जो बड़ी बड़ी भेड़ों के समान प्रतीत हो रहे थे। रात के अन्धकार और कोहरे ने वहाँ विद्यमान जिस सुन्दरता को अदृश्य कर रखा था, वह अब स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

      कभी-कभी जीवन पर भी निराशा का घना कोहरा छा सकता है, और परिस्थिति इतनी अंधकारमय प्रतीत हो सकती है कि हमें कुछ सूझ नहीं पड़ता कि क्या करें! परन्तु जैसे सूर्य की ज्योति और गर्मी कोहरे और अन्धकार को हटा देती है, परमेश्वर पर हमारा विश्वास और उससे सदैव उपलब्ध सहायता का आश्वासन हमारी निराशाओं और शंकाओं को दूर कर देता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई विश्वास की परिभाषा है: “अब विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है” (इब्रानियों  11:1)। यह खण्ड हमें आगे नूह के विश्वास के संबंध में स्मरण करवाता है कि “विश्वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चितौनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया” (पद 7); तथा अब्राहम के विश्वास के विषय भी, जो अपने गंतव्य को न जानते हुई भी परमेश्वर के कहे पर, उसके मार्गदर्शन में एक नए और अनजाने स्थान के लिए निकल पड़ा (पद 8)।

      चाहे हम परमेश्वर को अपनी भौतिक आँखों से देख नहीं पाते हैं, किन्तु वह सदैव हमारे साथ उपस्थित रहता है, और हमारी प्रत्येक परिस्थिति में हमारी सहायता करने, समस्या का निवारण करने के लिए तैयार रहता है। - सिंडी हैस कैस्पर


विश्वास वह रडार है जो कोहरे में भी देख सकता है। - कोरी टेन बूम

उसने [अब्राहम] यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना। - उत्पत्ति 15:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:1-8
Hebrews 11:1 अब विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है।
Hebrews 11:2 क्योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्छी गवाही दी गई।
Hebrews 11:3 विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्‍टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्‍तुओं से बना हो।
Hebrews 11:4 विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्योंकि परमेश्वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।
Hebrews 11:5 विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उसने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।
Hebrews 11:6 और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।
Hebrews 11:7 विश्वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चितौनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया, और उसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया; और उस धर्म का वारिस हुआ, जो विश्वास से होता है।
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 6-7
  • लूका 20:27-47



रविवार, 28 अप्रैल 2019

क्रोध



      बात ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर की है, एक प्रातः फिओन मुल्हौलेंड ने पाया कि उसकी कार गायब है। तब उसे एहसास हुआ कि उसने कार को निषिद्ध क्षेत्र में खड़ा किया था, इसलिए उसे उठा कर ले जाया गया है। उसने परिस्थिति पर विचार किया, उसे जो जुर्माने के लिए 600 डॉलर देने पड़ेंगे, उसके बारे में भी सोचा, और निर्णय लिया कि वह कार को वापस लाने के लिए जिस व्यक्ति के साथ संपर्क में आएगा, उसके प्रति क्रोधित नहीं होगा। अपनी भावनाओं को क्रोध में व्यक्त करने के स्थान पर मुल्होलेंड ने उस स्थिति को लेकर एक हास्य कविता भी लिखा डाली, और जब वह कार को छुड़ाने के लिए गया तो वहाँ उपस्थित व्यक्ति को वह कविता पढ़कर सुनाई, और उस व्यक्ति को वह कविता पसन्द भी आई। इस प्रकार एक संभावित झगड़ा होने से बच गया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक सिखाती है कि “मुकद्दमे से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं” (नीतिवचन 20:3)। झगड़ा वह तनाव है जो दो लोगों के बीच होता है जब वे किसी बात पर असहमत होते हैं, और या तो अन्दर ही अन्दर उबलता रहता है, या विस्फोटक होकर दोनों के मध्य बाहर निकल पड़ता है।

      परमेश्वर ने हमें सब के साथ शांतिपूर्वक रहने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान किए हैं। परमेश्वर का वचन हमें आश्वस्त करता है कि क्रोधित होना किन्तु पाप न करना संभव है (इफिसियों 4:26)। परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमें सामर्थ्य देता है कि हम लोगों के प्रति कटु प्रतिक्रया करने, या उन्हें आहात करने करने के लिए हमें उकसाने वाली चिंगारियों से बच कर चल सकें। और प्रभु यीशु मसीह में जब भी हम आवेश में हों या उकसाए जाएँ तो, अनुसरण करने के लिए उपयुक्त उदाहरण पाते हैं (1 पतरस 2:23)। हमारा प्रभु परमेश्वर दयालु, अनुग्रहकारी, क्रोध करने में धीमा, और बहुतायत से प्रेम तथा विश्वासयोग्यता बनाए रखता है (भजन 86:15)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


क्रोध करने में धीमे रहो।

क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। - इफिसियों 4:26

बाइबल पाठ: याकूब 1:19-27
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
James 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 3-5
  • लूका 20:1-26



शनिवार, 27 अप्रैल 2019

सहज



      मैं जैमैका में एक छोटे चर्च में खड़ा था, और मैंने अपने सबसे उत्तम तरीके से वहाँ उपस्थित लोगों से, उनकी भाषा में कहा, “वा गवान जैमैका?” प्रतिक्रिया मेरी आशा से बेहतर थी, और उपस्थित लोगों की मुस्कुराहटों और तालियों ने मेरा स्वागत किया। वास्तव में मैंने उन की भाषा में एक बहुत सामान्य अभिन्दन, “कैसे हो जैमैका?” ही बोला था, परन्तु उनके लिए इसका तात्पर्य था कि “मैं आपसे आपकी भाषा में बोलने का प्रयास करना चाहता हूँ।” निःसंदेह मैं इससे अधिक उनकी भाषा बोलना नहीं जानता था, परन्तु मेरे इस प्रयास से उन तक पहुँचने के लिए एक द्वार खुल गया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रेरित पौलुस अथेने के लोगों के सामने प्रभु यीशु मसीह के बारे में बताने के लिए खड़ा हुआ, तो उसने उन्हें अवगत करवा दिया कि वह उनकी संस्कृति को जानता था। पौलुस ने उनसे कहा कि उसने उनकी “अनजाने ईश्वर के लिए” बनाई गई वेदी को देखा था, और उसने उनके एक कवि का संदर्भ भी दिया। पौलुस द्वारा उन्हें सन्देश देने के बाद सब ने तो उसकी बात पर विश्वास नहीं किया, किन्तु कुछ ने कहा कि “यह बात हम तुझ से फिर कभी सुनेंगे” (प्रेरितों 17:32)।

      जब हम प्रभु यीशु तथा उनसे मिलने वाले उद्धार के संबंध में लोगों के साथ वार्तालाप करते हैं, तो पवित्रशास्त्र के पाठ हमें सिखाते हैं कि लोगों से संपर्क बनाने के लिए उनके समान भाषा सीखें (1 कुरिन्थियों 9:20-23 भी देखें)। जब हम औरों के जीवनों के हाल को जानेंगे, तो उनके साथ वह बाँटना अधिक सहज होगा जो परमेश्वर ने हमारे जीवनों में किया है। - डेव ब्रैनन


औरों को मसीह यीशु के विषय बताने से पहले 
उन्हें दिखाएँ कि आप उनकी कितनी परवाह करते हैं।

कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। क्योंकि धामिर्कता के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। - रोमियों 10:9-10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:22-32
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो।
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं।
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता।
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है।
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है।
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं!
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं।
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों।
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है।
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।।
Acts 17:32 मरे हुओं के पुनरुत्थान की बात सुनकर कितने तो ठट्ठा करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बात हम तुझ से फिर कभी सुनेंगे।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 1-2
  • लूका 19:28-48



शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

स्पर्श



      कैनाडा की एक ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों ने एक तनावपूर्ण स्थिति का मार्मिक अन्त होते हुए देखा। एक जवान व्यक्ति ट्रेन में ऊँची आवाज़ में बोल रहा था, औरों को भयभीत तथा अशांत कर रहा था। एक 70 वर्षीय वृद्ध महिला ने अपने हाथ बढ़ाकर कोमलता से उसे स्पर्श किया, अपना हाथ उसे थामने के लिए दिया। उस महिला की दयालुता से वह जवान शान्त हो गया, आँखों में आँसुओं के साथ नीचे बैठ गया। उसने कहा, “दादी, धन्यवाद” फिर खड़ा हुआ और चुपचाप चला गया। बाद में उस महिला ने स्वीकार किया कि वह भी भयभीत हुई थी; उसने यह भी कहा, “मैं एक माँ भी हूँ, और मुझे लगा कि उसे किसी के स्पर्श की आवश्यकता है।” यद्यपि अकलमंदी उस जवान से दूरी बनाए रखने का कारण देती, उस महिला ने प्रेम का जोखिम उठाया।

      प्रभु यीशु भी ऐसी करुणा को समझते हैं। जब कोढ़ से भरा हुआ एक मजबूर और परेशान व्यक्ति उनके पास चँगा होने की माँग करता हुआ आया, तो प्रभु ने विचलित हो रही भीड़ के लोगों के समान प्रतिक्रया नहीं दी। न ही प्रभु यीशु ने धार्मिक अगुवों के समान असहाय होकर उस कोढ़ी को नगर में रोग को लेकर आने के लिए दुत्कारा (लैव्यवस्था 13:45-46)। वरन प्रभु यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे स्पर्श किया; ऐसे व्यक्ति को स्पर्श किया जिसे संभवतः वर्षों से किसी ने स्पर्श नहीं किया होगा, और उसे चँगा कर दिया।

      वह व्यक्ति भी धन्यवादी हुआ और आज हम भी धन्यादी हों कि प्रभु यीशु हमें वह प्रदान करने के लिए आए जो कोई भी व्यवस्था कभी नहीं दे सकती है – हमारे दुखी जीवनों में प्रभु परमेश्वर के हाथ और हृदय का स्पर्श। - मार्ट डीहॉन


कोई भी इतना अस्वच्छ या परेशान नहीं है कि, प्रभु यीशु द्वारा स्पर्श न किया जा सके।

परन्तु इसलिये कि तुम जानो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है (उसने उस झोले के मारे हुए से कहा), मैं तुझ से कहता हूं, उठ और अपनी खाट उठा कर अपने घर चला जा। - लूका 5:24

बाइबल पाठ: लूका 5:12-16
Luke 5:12 जब वह किसी नगर में था, तो देखो, वहां कोढ़ से भरा हुआ एक मनुष्य था, और वह यीशु को देखकर मुंह के बल गिरा, और बिनती की; कि हे प्रभु यदि तू चाहे हो मुझे शुद्ध कर सकता है।
Luke 5:13 उसने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ और कहा मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा: और उसका कोढ़ तुरन्त जाता रहा।
Luke 5:14 तब उसने उसे चिताया, कि किसी से न कह, परन्तु जा के अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने चढ़ावा ठहराया है उसे चढ़ा; कि उन पर गवाही हो।
Luke 5:15 परन्तु उस की चर्चा और भी फैलती गई, और भीड़ की भीड़ उस की सुनने के लिये और अपनी बिमारियों से चंगे होने के लिये इकट्ठी हुई।
Luke 5:16 परन्तु वह जंगलों में अलग जा कर प्रार्थना किया करता था।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 23-24
  • लूका 19:1-27



गुरुवार, 25 अप्रैल 2019

हार न मानें



      बॉब फॉस्टर 50 वर्ष से भी अधिक से मेरे मित्र, सहायक और सलाहकार रहे हैं; उन्होंने मुझे लेकर कभी हार नहीं मानी है। उनकी, मेरे सबसे कठिन समयों में भी, कभी न बदलने वाली मित्रता और प्रोत्साहन ने मुझे अनेकों परिस्थितियों से सफलतापूर्वक पार होने में सहायता की है।

      बहुधा हम पाते हैं कि किसी जानकार व्यक्ति की आवश्यकता की परिस्थिति में हम उसकी सहायता करने के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार हैं। परन्तु जब हम उसमें कोई सुधार होते नहीं देखते हैं, तो हमारा संकल्प ढीला पड़ सकता है और हम उससे निराश होकर हार मान सकते हैं। हमें लगता है कि हमने जिसे तुरंत परिवर्तन लाने वाली परिस्थिति समझा था, वह चलती रहने वाली प्रक्रिया बन गई है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस हमसे कहता है कि जीवन की ठोकरों और संघर्षों में एक दूसरे की सहायता करने के लिए धीरजवंत रहें। जब पौलुस ने लिखा, “तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो” (गलातियों 6:2), तो वह हमारे इस परिश्रम को किसान के कार्य के समान जता रहा था जिसे फसल काटने के लिए परिश्रम, समय और धैर्य दिखाना होता है।

      हम कितने समय तक प्रार्थना करते रहें और उनकी सहायता में हाथ बढ़ाते रहें जिनसे हम प्रेम करते हैं? “हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे” (पद 9)। हमें सहायता में हाथ कितनी बार बढ़ाना चाहिए? “इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ” (पद 10)।

      प्रभु आज हमें प्रोत्साहित करता है कि हम उसपर भरोसा बनाए रखें, औरों के प्रति विश्वासयोग्य बने रहें, प्रार्थना में लगे रहें, और कभी हार न मानें! – डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रार्थना में हम उस परमेश्वर को पुकारते हैं “जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है” (इफिसियों 3:20)।

बाइबल पाठ: गलातियों 6:1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे।
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 21-22
  • लूका 18:24-43



बुधवार, 24 अप्रैल 2019

कृतज्ञ और धन्यवादी



      मेरी सहेली ग्लोरिया ने मुझे फोन किया, उसकी आवाज़ में उत्साह था। अपनी शारीरिक अक्षमताओं के कारण वह घर से बाहर केवल डॉक्टर को दिखाने के लिए ही निकलने पाती थी; इसलिए जो उसने मुझे बताया उसे लेकर उसके उत्साह और उत्तेजना को मैं समझ सकती थी। ग्लोरिया ने कहा, “मेरे बेटे ने मेरे कंप्यूटर के साथ नए स्पीकर्स जोड़ दिए हैं, इसलिए अब मैं चर्च की आराधना में सम्मिलित हो सकती हूँ!” अब वह उसके चर्च में हो रही आराधना सभा के सीधे प्रसारण को देख और सुन सकती थी। वह परमेश्वर की भलाई और उस “सर्वोत्तम उपहार जो मेरा बेटा मुझे दे सकता था” को लेकर बहुत उत्साहित थी, लोगों से उसके बारे में बातें करते नहीं थकती थी।

      ग्लोरिया मुझे एक धन्यवादी हृदय रखने के बारे में सिखाती है। अपनी अनेकों सीमाओं के होते हुए भी, वह छोटी-छोटी बातों के लिए – सूर्यास्त का दृश्य, परिवार के लोगों तथा पड़ौसियों और मित्रों आदि से मिलने वाली सहायता, शान्त होकर परमेश्वर के साथ बिताए जा सकने वाला समय, अपने स्वयँ के घर में रहने की सुविधा, आदि, वह सब के लिए सदा परमेश्वर की धन्यवादी बनी रहती है। उसने अपने जीवन भर अनुभव किया है कि परमेश्वर कैसे उसकी देखभाल करता है, उसकी आवश्यकताओं को पूरा करता है, और जो भी उससे मिलने आता है वह उससे परमेश्वर के विषय में बात करती है।

      हम परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 116 के लेखक की परिस्थतियों और कठिनाइयों को तो नहीं जानते हैं; बाइबल के कुछ  व्याख्याकर्ताओं का मानना है संभवतः वह बीमारी से होकर निकल रहा था, क्योंकि उसने लिखा, “मृत्यु की रस्सियाँ मेरे चारों ओर थीं” (पद 3)। परन्तु उन परिस्थतियों में भी वह परमेश्वर का कृतज्ञ और धन्यवादी था कि परमेश्वर ने उस पर करुणा और अनुग्रह दिखाया थाजब उसे “बलहीन किया गया” (पद 5-6)।

      जब हम बलहीन होते हैं, तो ऊपर देखना कठिन होता है। परन्तु यदि हम देखते हैं, तो हम पाते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में सब भली वस्तुओं का देवनहारा है – वे चाहे छोटी हों या बड़ी – और इसलिए हमें चाहिए कि हम हर बात के लिए हर परिस्थति में उसके प्रति कृतज्ञ और धन्यवादी बने रहें। - ऐनी सेटास


जब आप अपनी आशीषों को गिनने लगते हैं तो 
परमेश्वर का कृतज्ञ और धन्यवादी होना स्वाभाविक हो जाता है।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: भजन 116:1-9
Psalms 116:1 मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है।
Psalms 116:2 उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा।
Psalms 116:3 मृत्यु की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा।
Psalms 116:4 तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले!
Psalms 116:5 यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है; और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है।
Psalms 116:6 यहोवा भोलों की रक्षा करता है; जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया।
Psalms 116:7 हे मेरे प्राण तू अपने विश्राम स्थान में लौट आ; क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है।
Psalms 116:8 तू ने तो मेरे प्राण को मृत्यु से, मेरी आंख को आंसू बहाने से, और मेरे पांव को ठोकर खाने से बचाया है।
Psalms 116:9 मैं जीवित रहते हुए, अपने को यहोवा के साम्हने जान कर नित चलता रहूंगा।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 19-20
  • लूका 18:1-23