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गुरुवार, 4 जुलाई 2019

स्वतंत्र



      न्यू ज़ीलैंड के एक समाचार कैमरामैन, ओलाफ विग ने अगुवा होकर तेरह दिन तक बन्धक रखे जाने और फिर स्वतंत्र होने पर चहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान के साथ कहा, “मैं आज उतना अधिक जीवित अनुभव कर रहा हूँ जितना अपने सारे जीवन भर कभी नहीं किया।”

      यह समझाने में कठिन होता है, किन्तु स्वतंत्र होते समय जो अत्याधिक हर्ष होता है वह स्वतंत्र होकर जीवित रहने में नहीं होता है।

      हम जो प्रतिदिन स्वतंत्रता का अनुभव करते हैं, हमारे लिए ओलाफ  का आनन्द करना एक अच्छा स्मरण करवाना था कि हम कितने आशीषित हैं। यही बात आत्मिक जीवन के लिए भी ऐसे ही लागू होती है। हम में से जो लंबे समय से मसीही विश्वासी रहे हैं, बहुधा भूल जाते हैं कि पाप का दासत्व कैसा अनुभव होता है। हम इसके प्रति लापरवाह और कृतघ्न भी हो सकते हैं। परन्तु फिर परमेश्वर हमें स्मरण करवाने को एक नए विश्वासी के रूप में किसी को भेजता है, और उसके जीवन की उल्लासपूर्ण गवाही कि परमेश्वर ने कैसे उसके जीवन में कार्य किया है, हमें याद दिलाती है कि जब हम “पाप और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र” (रोमियों 8:2) होते हैं तो कैसे आनन्द के हकदार होते हैं।

      यदि स्वतंत्रता आपके लिए उबाऊ हो गई है, या आप उन बातों पर ध्यान केंद्रित करते रहते हैं जिन्हें आप कर नहीं पा रहे हैं, तो इस बात पर ध्यान कीजिए: न केवल आप अब पाप के दास नहीं हैं, परन्तु आप पवित्र होने तथा प्रभु यीशु के साथ अनन्त जीवन का आनन्द लेने के लिए स्वतंत्र किए गए हैं! (6:22)।

      मसीह में विश्वास के द्वारा पापों से मिली स्वतंत्रता का आनन्द लें, उन बातों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें जिन्हें आप उसकी सन्तान होकर करने के लिए अब स्वतंत्र हैं। - जूली एकेरमैन लिंक


मसीह के लिए जीवन जीने से वास्तविक स्वतंत्रता मिलती है।

हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो। - गलातियों 5:13

बाइबल पाठ: रोमियों 6:15-23
Romans 6:15 तो क्या हुआ क्या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं।
Romans 6:16 क्या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों के समान सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्त धामिर्कता है
Romans 6:17 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे।
Romans 6:18 और पाप से छुड़ाए जा कर धर्म के दास हो गए।
Romans 6:19 मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास कर के सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास कर के सौंप दो।
Romans 6:20 जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे।
Romans 6:21 सो जिन बातों से अब तुम लज्ज़ित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे?
Romans 6:22 क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्र हो कर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है।
Romans 6:23 क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 28-29
  • प्रेरितों 13:1-25



बुधवार, 3 जुलाई 2019

समर्पण



      लेख लिख कर भेजने का अंतिम समय मेरे सामने था, परन्तु मेरे मन में उस प्रातः मेरे पति के साथ हुआ वाद-विवाद गूंज रहा था। मेरी उँगलियाँ कम्प्यूटर के की-बोर्ड पर थीं, और मेरी आँखें सामने के कर्सर पर, परन्तु मैं कुछ भी लिख पाने की मानसिक स्थिति में नहीं थी। मैंने मन ही मन प्रभु से कहा, “परन्तु गलती तो उनकी भी थी न।”

      थोड़ी देर में बिना किसी गतिविधि के कारण कम्प्यूटर का स्क्रीन बन्द हो गया और उस काले स्क्रीन में से मेरा प्रतिबिंब त्यौरियां चढ़ाए हुए दिख रहा था। मेरे द्वारा की गई गलतियाँ, जिनका मैंने अंगीकार नहीं किया था, वे मेरे काम ही में बाधा नहीं बन रही थीं। उनके कारण मेरे पति और मेरे परमेश्वर दोनों के साथ मेरे संबंधों में तनाव आ रहा था।

      मैंने अपना सेल-फोन उठाया, अपने अहम को दबाया, और क्षमायाचना की। मेरे पति ने भी मुझ से क्षमा माँगी और पुनःस्थापित हुए संबंधों की शान्ति का आनन्द लेते हुए, मैंने परमेश्वर का भी धन्यवाद किया, और अपने लेख को लिख कर समय से समर्पित कर सकी।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि इस्राएलियों ने भी अपने पापों के कष्ट तथा पुनर्स्थापन के सुख का अनुभव लिया। यहोशू ने परमेश्वर के लोगों को सचेत किया था कि यरीहो के युद्ध में अपने लिए कुछ लूट न लें (यहोशू 6:18), परन्तु आकान ने अनाज्ञाकारिता की, लूट में से कुछ भाग लेकर अपने तम्बू में ले जाकर छिपा दिया (7:1)। परिणामस्वरूप, इस्राएल तब तक परमेश्वर के साथ शान्ति का आनन्द नहीं ले सका जब तक कि आकान का पाप प्रगट करके उसका समाधान नहीं कर दिया गया (आयतें 4-12)।

      आकान के समान ही, हम भी अनेकों बार इस बात की अनदेखी कर देते हैं कि पाप करके अपने जीवन में छुपा लेने से हमारे मन परमेश्वर से दूर हो जाते हैं और हमारे पाप का दुष्प्रभाव हमारे आस-पास के लोगों पर भी जाता है। यीशु मसीह को अपना प्रभु मान लेने, उसके सामने अपन पापों का अंगीकार करने, और उससे क्षमायाचना करने से परमेश्वर तथा औरों के साथ एक स्वस्थ संबंध बनाने की नींव पड़ती है। प्रतिदिन हमारे प्रेमी सृजनहार और पालनहार प्रभु परमेश्वर के प्रति समर्पण करने के द्वारा, हम उसकी सेवा भी कर सकते हैं और उसकी संगति का आनन्द ले सकते हैं। - जोशील डिक्सन


परमेश्वर हमारे हृदय से उस पाप को हटा सकता है 
जिसके कारण उसके तथा औरों के साथ हमारे संबंधों पर आंच आती है।

सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहिरा हो गया है कि सुन न सके; परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उस का मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता। - यशायाह 59:1-2

बाइबल पाठ: यहोशू 7:1-12
Joshua 7:1 परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
Joshua 7:2 और यहोशू ने यरीहो से ऐ नाम नगर के पास, जो बेतावेन से लगा हुआ बेतेल की पूर्व की ओर है, कितने पुरूषों को यह कहकर भेजा, कि जा कर देश का भेद ले आओ। और उन पुरूषों ने जा कर ऐ का भेद लिया।
Joshua 7:3 और उन्होंने यहोशू के पास लौटकर कहा, सब लोग वहां न जाएं, कोई दो या तीन हजार पुरूष जा कर ऐ को जीत सकते हैं; सब लोगों को वहां जाने का कष्ट न दे, क्योंकि वे लोग थोड़े ही हैं।
Joshua 7:4 इसलिये कोई तीन हजार पुरूष वहां गए; परन्तु ऐ के रहने वालों के साम्हने से भाग आए,
Joshua 7:5 तब ऐ के रहने वालों ने उन में से कोई छत्तीस पुरूष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा कर के उतराई में उन को मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया।
Joshua 7:6 तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के साम्हने मुंह के बल गिरकर पृथ्वी पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल डाली।
Joshua 7:7 और यहोशू ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में कर के नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष कर के यरदन के उस पार रह जाते।
Joshua 7:8 हाय, प्रभु मैं क्या कहूं, जब इस्राएलियों ने अपने शत्रुओं को पीठ दिखाई है!
Joshua 7:9 क्योंकि कनानी वरन इस देश के सब निवासी यह सुनकर हम को घेर लेंगे, और हमारा नाम पृथ्वी पर से मिटा डालेंगे; फिर तू अपने बड़े नाम के लिये क्या करेगा?
Joshua 7:10 यहोवा ने यहोशू से कहा, उठ, खड़ा हो जा, तू क्यों इस भांति मुंह के बल पृथ्वी पर पड़ा है?
Joshua 7:11 इस्राएलियों ने पाप किया है; और जो वाचा मैं ने उन से अपने साथ बन्धाई थी उसको उन्होंने तोड़ दिया है, उन्होंने अर्पण की वस्तुओं में से ले लिया, वरन चोरी भी की, और छल कर के उसको अपने सामान में रख लिया है।
Joshua 7:12 इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिये कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु को सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 25-27
  • प्रेरितों 12



मंगलवार, 2 जुलाई 2019

कठिन


      अपनी चाय की चुस्कियां लेते हुए नैन्सी ने पडौस में अपनी सहेली की खिड़की में सजे गमलों की ओर देखकर ठंडी साँस ली और कहा, “मुझे भी वैसी ही सुंदरता चाहिए, परन्तु उतनी मेहनत किए बिना।” बसंत की वर्षा और धूप ने उसकी सहेली की खिड़की में सजे गमलों में कई प्रकार के सुन्दर फूलों के खिलने की छटा को बिखेर दिया था, और वह सुंदरता उसका ध्यान आकर्षित कर रही थी।

      कुछ बातों में बिना विशेष परिश्रम किए, किसी छोटे मार्ग द्वारा, कार्य करना व्यवहारिक या ठीक हो सकता है, परन्तु हर बात के लिए यह नहीं किया जा सकता है, बहुधा ऐसा करना हानिकारक हो सकता है और हमारी आत्मा तथा जीवन में दुष्परिणाम ला सकता है। किसी व्यक्ति के साथ सच्चे प्रेम संबंध में बंधने के लिए अपने से बिलकुल भिन्न उस व्यक्ति के साथ सामंजस्य बैठाने में निहित कठिनाईयों और अनेपक्षित व्यवहार को स्वीकार करना तथा उसका सामना पड़ेगा, उसके साथ जीवन की बातों में तालमेल बैठाने के लिए समय और धैर्य देना पड़ेगा, अन्यथा परस्पर प्रेम के आनन्द का अनुभव नहीं किया जा सकेगा। जीवन में यदि “महानता” के रोमाँच को अनुभव करना है तो असफलताओं और कठिन परिश्रम से होकर निकालना ही पड़ेगा। यदि परमेश्वर के मार्गों में चलना है, उसे प्रसन्न रखना है तो व्यक्तिगत इच्छाओं की उपेक्षा करने की असुविधाओं से निकलने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

      प्रभु यीशु ने यह बात अपने शिष्यों पर स्पष्ट कर दी थी कि उनके पीछे चलने के लिए ऐसा कोई छोटा मार्ग नहीं है जो प्रभु को समर्पित जीवन को कठिनाईयों से बचाए रखता हो। प्रभु ने उसके पीछे चलने की चाह रखने वाले एक व्यक्ति से कहा “जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं” (लूका 9:62)। प्रभु यीशु का अनुसरण करने के लिए हमें अपनी प्राथमिकताओं और वफादारी में आधारभूत परिवर्तन करने होंगे (2 कुरिन्थियों 5:15)।

      जब हम मसीह यीशु की ओर विश्वास में मुड़ते हैं तो हमारे एक नए जीवन और कार्य का आरंभ होता है। यह नया जीवन और कार्य सहज नहीं है, परन्तु इससे संबंधित परिश्रम, अन्ततः प्राप्त होने वाले परिणामों के सर्वथा उपयुक्त है। प्रभु यीशु ने यह वायदा भी किया है “मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो। और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन” (मरकुस 10:29-30)।

      प्रभु यीशु के पीछे हो लेने का मार्ग कठिन तो है, परन्तु इसके लिए हमें सामर्थ्य और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रभु ने हमें अपना पवित्र आत्मा तथा अपना जीविता वचन, बाइबल, भी प्रदान किया है; और उसका अपने अनुयायियों यह भी वायदा है कि इस कठिन परिश्रम का परिणाम, वर्तमान में तथा अनन्त काल के लिए भरपूर आनंदपूर्ण जीवन है। - टिम गुस्ताफ्सन


करने योग्य अधिकांश बातें कठिन होती हैं।

और वह[यीशु] इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:15

बाइबल पाठ: लूका 9:57-62
Luke 9:57 जब वे मार्ग में चले जाते थे, तो किसी न उस से कहा, जहां जहां तू जाएगा, मैं तेरे पीछे हो लूंगा।
Luke 9:58 यीशु ने उस से कहा, लोमडिय़ों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं, पर मनुष्य के पुत्र को सिर धरने की भी जगह नहीं।
Luke 9:59 उसने दूसरे से कहा, मेरे पीछे हो ले; उसने कहा; हे प्रभु, मुझे पहिले जाने दे कि अपने पिता को गाड़ दूं।
Luke 9:60 उसने उस से कहा, मरे हुओं को अपने मुरदे गाड़ने दे, पर तू जा कर परमेश्वर के राज्य की कथा सुना।
Luke 9:61 एक और ने भी कहा; हे प्रभु, मैं तेरे पीछे हो लूंगा; पर पहिले मुझे जाने दे कि अपने घर के लोगों से विदा हो आऊं।
Luke 9:62 यीशु ने उस से कहा; जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 22-24
  • प्रेरितों 11


सोमवार, 1 जुलाई 2019

सफाई



      हाल ही में मैंने अपने रहने का कमरा एक से दूसरे स्थान को बदला। यह करने में मुझे अपेक्षा से अधिक समय लगा, क्योंकि मैं अपने एक कमरे का सारा कबाड़ दूसरे कमरे में स्थानांतरित कर देना नहीं चाहती थी। मैं उस नए स्थान में एक बिलकुल नया और सुव्यवस्थित आरंभ चाहती थी। घंटों की सफाई और छंटाई के बाद मेरे दरवाज़े पर कई थैले भरे हुए पड़े थे, उस सामान से जिसे फेंका, या बाँटा, या पुनःउपयोग के लिए पुनःचक्रित किया जाना था। परन्तु इस थका देने वाली मेहनत के बाद मेरे पास एक स्वच्छ सुन्दर कमरा था जिसे देखकर मैं उसमें रहने के लिए उत्साहित थी।

      मेरे घर के इस सफाई अभियान ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 पतरस 2:1 पर एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया, जिसे इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: “इसलिए घर की सफाई करो! प्रत्येक बैरभाव, छल, डाह, निन्दा, और दुःख देने वाली बातों को पूरी रीति से हटा दो।” यह रोचक है कि पतरस यह बात उन मसीही विश्वासियों से कह रहा है जिन्होंने मसीह यीशु विश्वास लाने के द्वारा नए आनंदपूर्ण नए जीवन की प्राप्ति का अंगीकार किया है (1:1-12), और पतरस उनसे कह रहा है कि वे हानिकारक व्यवहार को अपने जीवन से हटा दें (1:13-2:3)। जब प्रभु के साथ हमारा चलना हमें बाधित लगने लगे तथा औरों के प्रति हमारा प्रेम स्वभाविक या तनावपूर्ण प्रतीत हो, तो इससे हमें अपने उद्धार पर प्रश्न नहीं उठाना चाहिए। हम उद्धार पाने के लिए जीवन में परिवर्तन नहीं लाते है, परन्तु उद्धार पाया हुआ होने से हमारे जीवनों में परिवर्तन दिखाई देता है (1:23)।

      मसीह यीशु में हमारे विश्वास का जीवन अवश्य ही नया जीवन तो होता है, परन्तु हमारी पुरानी आदतों और बुराइयों को हमारे जीवन से जाते-जाते समय लगता है। इसलिए हमें प्रतिदिन अपने जीवन की सफाई करते रहने का रवैया बनाए रखना चाहिए; हमें उस प्रत्येक बात को अपने जीवन से निकाल देना चाहिए जो हमें औरों से प्रेम करने (1:22) और मसीही जीवन में उन्नत होने (2:2) से रोकती है।

      फिर उस स्वच्छ और साफ़ स्थिति में हम मसीह यीशु के जीवन और सामर्थ्य के द्वारा नए किए जाने (पद 5) के अचरज और आनन्द का अनुभव ले सकेंगे। - मोनिका ब्रैंड्स


प्रतिदिन हम हानिकारक आदतों का इन्कार करके 
मसीह यीशु में नए जीवन का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:22-2:5
1 Peter 1:22 सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।
1 Peter 1:23 क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है।
1 Peter 1:24 क्योंकि हर एक प्राणी घास के समान है, और उस की सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
1 Peter 1:25 परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहेगा: और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था।
1 Peter 2:1 इसलिये सब प्रकार का बैर भाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके।
1 Peter 2:2 नये जन्मे हुए बच्‍चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।
1 Peter 2:3 यदि तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है।
1 Peter 2:4 उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है।
1 Peter 2:5 तुम भी आप जीवते पत्थरों के समान आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48



रविवार, 30 जून 2019

धीरजवंत



      पिछले बसंत, मैंने अपने घर के पिछले दरवाज़े के निकट उग रही गुलाब की झाड़ी को काट डालने का निर्णय लिया। हमें उस घर में रहते तीन वर्ष हो गए थे, और उस झाड़ी में कुछ विशेष फूल नहीं आए थे और उसकी बदसूरत टहनियाँ चारों ओर फैल रही थीं। परन्तु मैं जीवन की व्यस्तता में फंस गई और उस झाड़ी को काट डालने की मेरी योजना कार्यान्वित हुए बिना रह गई। यह भी भला ही हुआ क्योंकि मेरे यह निर्णय लेने के कुछ ही सप्ताह में उस गुलाब की झाड़ी में इतने फूल लगे जितने पहले मैंने कभी नहीं देखे थे। सैंकड़ों सफ़ेद बड़े फूलों, उनकी सुगंध, और उनकी सुन्दर पंखुड़ियों से हमारे घर के पिछला दरवाज़ा और आँगन भर गए।

      मेरी उस गुलाब की झाड़ी के पुनर्जीवित होने से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 13:6-9 में प्रभु यीशु द्वारा दिया गया अंजीर के वृक्ष का दृष्टांत स्मरण हो आया। उस समय इस्राएल में यह परंपरागत था कि अंजीर के वृक्ष को फल लाने के लिए तीन वर्ष का समय दिया जाए। यदि तीन वर्ष में उसमें फल नहीं आता था तो उसे काट दिया जाता था जिससे भूमि का उपयोग किया जा सके। प्रभ यीशु द्वारा दिए गए दृष्टांत में माली ने भूमि के स्वामी से उस वृक्ष के लिए एक अतिरिक्त समय माँगा, कि वह वृक्ष फल ला सके। अपने संदर्भ में (पद 1-5) इस दृष्टांत का तात्पर्य था कि इस्राएलियों ने वह नहीं किया था जो उन्हें करना चाहिए था, और परमेश्वर उनका उचित न्याय कर सकता था। परन्तु परमेश्वर धीरजवंत है, और उसने इस्राएलियों को अतिरिक्त समय दिया कि वे उसकी ओर मुड़ें, उससे क्षमा प्राप्त करें और फलवन्त हो जाएँ।

      परमेश्वर सभी लोगों के लिए चाहता है कि वे फलते-फूलते हों, और उन्हें अतिरिक्त समय भी देता है कि वे ऐसा कर सकें। चाहे हम अभी भी प्रभु यीशु में विश्वास लाने की ओर बढ़ रहे हों, या प्रभु यीशु में विश्वास नहीं करने वाले परिवार जनों और मित्रों के लिए प्रार्थना कर रहे हों, परमेश्वर का धीरजवंत होना हम सभी के लिए शुभसमाचार है। - शेरिडन वॉयसे


परमेश्वर ने सँसार को अतिरिक्त समय दिया है कि 
पापों की क्षमा के उसके प्रस्ताव के प्रति सही प्रतिक्रया दें।

और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस न भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है। - 2 पतरस 3:15

बाइबल पाठ: लूका 13:1-9
Luke 13:1 उस समय कुछ लोग आ पहुंचे, और उस से उन गलीलियों की चर्चा करने लगे, जिन का लोहू पीलातुस ने उन ही के बलिदानों के साथ मिलाया था।
Luke 13:2 यह सुन उसने उन से उत्तर में यह कहा, क्या तुम समझते हो, कि ये गलीली, और सब गलीलियों से पापी थे कि उन पर ऐसी विपत्ति पड़ी?
Luke 13:3 मैं तुम से कहता हूं, कि नहीं; परन्तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम सब भी इसी रीति से नाश होगे।
Luke 13:4 या क्या तुम समझते हो, कि वे अठारह जन जिन पर शीलोह का गुम्मट गिरा, और वे दब कर मर गए: यरूशलेम के और सब रहने वालों से अधिक अपराधी थे?
Luke 13:5 मैं तुम से कहता हूं, कि नहीं; परन्तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम भी सब इसी रीति से नाश होगे।
Luke 13:6 फिर उसने यह दृष्‍टान्‍त भी कहा, कि किसी की अंगूर की बारी में एक अंजीर का पेड़ लगा हुआ था: वह उस में फल ढूंढ़ने आया, परन्तु न पाया।
Luke 13:7 तब उसने बारी के रख वाले से कहा, देख तीन वर्ष से मैं इस अंजीर के पेड़ में फल ढूंढ़ने आता हूं, परन्तु नहीं पाता, इसे काट डाल कि यह भूमि को भी क्यों रोके रहे।
Luke 13:8 उसने उसको उत्तर दिया, कि हे स्‍वामी, इसे इस वर्ष तो और रहने दे; कि मैं इस के चारों ओर खोदकर खाद डालूं।
Luke 13:9 सो आगे को फले तो भला, नहीं तो उसे काट डालना।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 17-19
  • प्रेरितों 10:1-23



शनिवार, 29 जून 2019

सहायता



      मेरी एक सहेली अपनी कार से किराने की दूकान तक जा रही थी, और उसका ध्यान मार्ग के किनारे चलती हुई एक महिला की ओर गया; मेरी सहेली के मन में विचार आया कि उसे उस महिला की सहायता करनी चाहिए और उसने उस महिला को अपनी कार में बैठाकर उसे उसके गंतव्य तक पहुँचाने की पेशकश की। मेरी सहेली को यह सुनकर दुःख हुआ कि उस महिला के पास बस में जाने के लायक पैसे नहीं थे इसलिए वह उस गर्म और उमस भरे वातावरण में कई मील पैदल चलने के लिए मजबूर थी। अब न केवल वह वापस अपने घर की लंबी यात्रा कर रही थी वरन वह सुबह चार बजे अपने काम पर पहुँचने के लिए भी ऐसे ही पैदल चलकर पहुँची थी।

      उस महिला को अपनी कार में बैठाकर मेरी सहेली ने परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब द्वारा उसकी पत्री में लिखी बात को व्यवहारिक करके दिखाया कि मसीही विश्वासियों को अपने विश्वास को अपने कर्मों के द्वारा जी कर दिखाना चाहिए: “वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्‍वभाव में मरा हुआ है” (याकूब 2:17)। याकूब यह भी चाहता था कि चर्च के लोग विधवाओं और अनाथों का भी ध्यान रखें (याकूब 1:27), और वे मात्र शब्दों द्वारा नहीं वरन प्रेम के व्यवहार और कार्यों द्वारा अपने विश्वास को प्रगट करें।

      हमें प्रभु यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा उद्धार मिला है, किन्ही कर्मों के द्वारा नहीं; और हम औरों से प्रेम का व्यवहार करके, उनकी आवश्यकताओं में उनकी सहायता करके अपने विश्वास को जी कर दिखाते हैं। मेरी सहेली के समान हम भी अपनी जीवन यात्रा में उनके प्रति अपनी आँखों को खुला रखें जिन्हें हमारी सहायता की आवश्यकता है, और उनकी सहायता करके अपने मसीही विश्वास को व्यवहारिक करें। - एमी बाउचर पाई


हम भले कर्मों के द्वारा अपने विश्वास को जी कर दिखाते हैं।

और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारिहत कुछ काम का है, परन्तु केवल विश्वास, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है। - गलातियों 5:6

बाइबल पाठ: याकूब 2:14-26
James 2:14 हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उस से क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है?
James 2:15 यदि कोई भाई या बहिन नगें उघाड़े हों, और उन्हें प्रति दिन भोजन की घटी हो।
James 2:16 और तुम में से कोई उन से कहे, कुशल से जाओ, तुम गरम रहो और तृप्‍त रहो; पर जो वस्तुएं देह के लिये आवश्यक हैं वह उन्हें न दे, तो क्या लाभ?
James 2:17 वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्‍वभाव में मरा हुआ है।
James 2:18 वरन कोई कह सकता है कि तुझे विश्वास है, और मैं कर्म करता हूं: तू अपना विश्वास मुझे कर्म बिना तो दिखा; और मैं अपना विश्वास अपने कर्मों के द्वारा तुझे दिखाऊंगा।
James 2:19 तुझे विश्वास है कि एक ही परमेश्वर है: तू अच्छा करता है: दुष्टात्मा भी विश्वास रखते, और थरथराते हैं।
James 2:20 पर हे निकम्मे मनुष्य क्या तू यह भी नहीं जानता, कि कर्म बिना विश्वास व्यर्थ है?
James 2:21 जब हमारे पिता इब्राहीम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्या वह कर्मों से धामिर्क न ठहरा था?
James 2:22 सो तू ने देख लिया कि विश्वास ने उस के कामों के साथ मिल कर प्रभाव डाला है और कर्मों से विश्वास सिद्ध हुआ।
James 2:23 और पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हुआ, कि इब्राहीम ने परमेश्वर की प्रतीति की, और यह उसके लिये धर्म गिना गया, और वह परमेश्वर का मित्र कहलाया।
James 2:24 सो तुम ने देख लिया कि मनुष्य केवल विश्वास से ही नहीं, वरन कर्मों से भी धर्मी ठहरता है।
James 2:25 वैसे ही राहाब वेश्या भी जब उसने दूतों को अपने घर में उतारा, और दूसरे मार्ग से विदा किया, तो क्या कर्मों से धामिर्क न ठहरी?
James 2:26 निदान, जैसे देह आत्मा बिना मरी हुई है वैसा ही विश्वास भी कर्म बिना मरा हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43



शुक्रवार, 28 जून 2019

पूर्ण



      विश्व-विख्यात महान शिल्पकार माइकलएंजेलो की मृत्यु के समय उनके द्वारा आरम्भ की गई अनेकों शिल्प-कृतियाँ अधूरी पड़ी थीं। परन्तु उनमें से चार – The Bearded Slave, The Atlas Slave, The Awakening Slave, और The Young Slave ऐसे थे जिन्हें पूरा करने की कभी कोई योजना नहीं थी। उन्हें देखकर प्रतीत होता है कि वे अधूरी हैं, परन्तु वे वैसी ही हैं जैसा माइकलएंजेलो उन्हें दिखाना चाहता था। शिल्पकार यह दिखाना चाहता था कि हमेशा दासत्व में बने रहना कैसा अनुभव होता है।

      उन आकृतियों को जंजीरों में बंधे हुए दिखाने के स्थान पर, माइकलएंजेलो ने उन्हें संगमरमर की उन्हीं चट्टानों में फंसा हुआ दिखाया है जिनमें से उन्हें तराशा जा रहा था। उन पत्थरों में से शरीर निकलते हुए दिखते हैं, परन्तु वे पूर्णतया निकले हुए नहीं हैं। उनकी मांस-पेशियाँ कार्यशील दिखाई देती हैं परन्तु वे अपने आप को स्वतंत्र नहीं कर पा रहे हैं।

      उन दासों की प्रतिमाओं के साथ मेरी सहानुभूति तुरंत जागृत हुई। उनकी वह दशा, पाप के साथ मेरे संघर्ष में मेरी दशा से भिन्न नहीं है। उन दासों के समान, मैं भी अपने आप को पाप की प्रवृत्ति से स्वतंत्र करने नहीं पाती हूँ, उन प्रतिमाओं के समान मैं भी फंसी हुई हूँ “पाप की व्यवस्था के बन्धन में” (रोमियों 7:23)। मैं चाहे कितना भी प्रयास करूँ, मैं अपने आप को बदलने नहीं पाती हूँ। परन्तु प्रभु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि मैं और आप, हम सभी मसीही विश्वासी, पाप के साथ संघर्ष में ऐसे ही फंसे नहीं रहेंगे; ऐसी अधूरी कृतियाँ नहीं रहेंगे। हम स्वर्ग पहुँचने से पहले तो संपूर्ण नहीं होंगे, परन्तु स्वर्ग पहुँचने तक परमेश्वर हम में कार्य कर रहा है और अपने आत्मा के द्वारा हमने अंश अंश करके हमारे प्रभु यीशु मसीह के स्वरूप में ढालता जा रहा है। प्रभु परमेश्वर का हमसे वायदा है कि उसने हम में जो अच्छा काम आरम्भ किया है, वह उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा (फिलिप्पियों 1:6), हमें पूर्ण करेगा। - एमी पीटरसन


हम मिट्टी हैं, और वह कुम्हार है।

...तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: रोमियों 7:14-25
Romans 7:14 क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शरीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।
Romans 7:15 और जो मैं करता हूं, उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।
Romans 7:16 और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।
Romans 7:17 तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।
Romans 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।
Romans 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है।
Romans 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।
Romans 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।
Romans 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?
Romans 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 11-13
  • प्रेरितों 9:1-21