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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

स्वीकार्य

 

         कई वर्षों तक अपनी पढ़ाई में संघर्ष करते रहने के पश्चात एंजी को अन्ततः उसके उच्च-स्तरीय प्राथमिक विद्यालय से निकाल कर एक अन्य “सामान्य” विद्यालय में डाला गया। सिंगापुर के अत्यन्त स्पर्धात्मक शिक्षा के माहौल में, जहाँ किसी अच्छे स्कूल में होने से भविष्य की संभावनाएं बेहतर हो जाती हैं, बहुतों को ऐसा होना असफलता का चिह्न प्रतीत होगा। एंजी के माता-पिता निराश हुए, और स्वयं एंजी को भी लगा कि उसका स्तर नीचा कर दिया गया है। परन्तु अपने नए स्कूल में जाने के कुछ ही समय के बाद, नौ वर्षीय एंजी को समझ में आया कि “सामान्य” विद्यार्थियों की कक्षा में होने का क्या अभिप्राय है। उसने अपनी मम्मी से कहा “मम्मी, यही मेरे लिए उपयुक्त है, मैं सही स्थान पर हूँ, क्योंकि यहाँ मुझे स्वीकार किया जाता है।”

         इस घटना से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में ज़क्कई की घटना का स्मरण हो आया। ज़क्कई कितना उत्साहित हुआ था जब प्रभु यीशु ने अपने आप को उस चुंगी लेने वाले के घर में आमंत्रित किया (लूका 19:5)। प्रभु उनके साथ भोजन करने का इच्छुक था जो जानते थे कि उनमें कमियाँ हैं और वो परमेश्वर के अनुग्रह के योग्य नहीं हैं (पद 10)। प्रभु हमें खोजता हुआ आया, और हमें खोजने, और हम जैसे भी थे उसी हाल में हम से प्रेम करने के साथ ही, प्रभु यीशु ने हमें प्रतिज्ञा दी है कि उनकी मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण हम भी सिद्ध बन जाएँगे। हम उनके अनुग्रह ही से सिद्ध बन सकते हैं।

         मैंने बहुधा अपने आत्मिक जीवन-यात्रा को एक निरंतर संघर्ष की यात्रा पाया है, यह जानते हुए कि मेरा जीवन परमेश्वर के आदर्श से बहुत कम है। परन्तु यह कितना शान्तिदायक है कि हमारे अन्दर निवास करने वाला परमेश्वर पवित्र आत्मा हमें हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के स्वरूप में ढालता चला जा रहा है और हम सदा ही प्रभु यीशु मसीह में होकर परमेश्वर को स्वीकार्य रहते हैं। - लेसली कोह

 

हम चाहे सिद्ध न हों, किन्तु हम सदा स्वीकार्य हैं।


परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10

लूका 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था।

लूका 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था।

लूका 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था।

लूका 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था।

लूका 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है।

लूका 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया।

लूका 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है।

लूका 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं।

लूका 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है।

लूका 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 59-61
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

सहायता

 

         सन 2017 में हार्वे नामक चक्रवाधी समुद्री तूफ़ान से पूर्वी टेक्सास प्रांत में विनाशकारी बाढ़ आ गई। वर्षा के प्रचंड प्रहार से हज़ारों लोग अपने अपने घरों में ही फंसे रह गए, बाढ़ के पानी से बाहर न निकल पाने के कारण। ऐसे में अनेकों नागरिक प्रांत तथा देश के अन्य भागों से अपनी नावों को लेकर आए और लोगों की सहायता की, उन्हें बाहर निकालने में सहायक हुए। इन लोगों को “टेक्सास नेवी” का नाम दिया गया।

         इन साहसी एवं उदार लोगों का यह कार्य परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 3:27 का स्मरण करवाता है, जो हमें निर्देश देता है कि हम औरों की यथासंभव सहायता करें, जब भी हमें अवसर मिले। उन लोगों के पास आवश्यकता में पड़े लोगों की सहायता करने के लिए अपनी नावों को लगा देने की सामर्थ्य थी, और उन्होंने यही किया भी।  उनका यह कार्य उनके पास उपलब्ध संसाधनों का दूसरों की सहायता और भलाई में उपयोग करने की चाह को दिखाता है।

         हम सदा ही अपने आप को हमारे सामने आई आवश्यकता के सक्षम अनुभव नहीं करते हैं; अकसर हम यह सोचकर निष्क्रिय हो जाते हैं कि हमारे पास उस कार्य के योग्य कौशल, अनुभव, संसाधन, या समय नहीं है जिससे हम सहायता कर सकें। इसलिए परिस्थिति आने पर हम अपने आप को एक किनारे कर लेते हैं, बिना उसे किसी महत्व का समझे, जो हमारे पास है और जिससे हम किसी और की सहायता कर सकते हैं।

         “टेक्सास नेवी” के वह लोग न तो पानी को चढ़ने से रोक सकते थे, और न ही सरकारी सहायता लाए जाने के लिए कोई कानून बना सकते थे। परन्तु उनके पास जो कुछ भी था, उन्होंने उसे ही अपने लोगों की सहायता के लिए प्रयोग किया। हमारे पास उपलब्ध संसाधन चाहे जो भी हों, हम समय और आवश्यकता के अनुसार उनका प्रयोग लोगों की सहायता के लिए करें। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर अपने लोगों की सहायता अन्य लोगों के द्वारा ही करता है।


इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ। - गलातियों 6:10

बाइबल पाठ: नीतिवचन 3:21-31

नीतिवचन 3:21 हे मेरे पुत्र, ये बातें तेरी दृष्टि की ओट न होने पाएं; खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर,

नीतिवचन 3:22 तब इन से तुझे जीवन मिलेगा, और ये तेरे गले का हार बनेंगे।

नीतिवचन 3:23 और तू अपने मार्ग पर निडर चलेगा, और तेरे पांव में ठेस न लगेगी।

नीतिवचन 3:24 जब तू लेटेगा, तब भय न खाएगा, जब तू लेटेगा, तब सुख की नींद आएगी।

नीतिवचन 3:25 अचानक आने वाले भय से न डरना, और जब दुष्टों पर विपत्ति आ पड़े, तब न घबराना;

नीतिवचन 3:26 क्योंकि यहोवा तुझे सहारा दिया करेगा, और तेरे पांव को फन्दे में फंसने न देगा।

नीतिवचन 3:27 जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना।

नीतिवचन 3:28 यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूंगा।

नीतिवचन 3:29 जब तेरा पड़ोसी तेरे पास बेखटके रहता है, तब उसके विरुद्ध बुरी युक्ति न बान्धना।

नीतिवचन 3:30 जिस मनुष्य ने तुझ से बुरा व्यवहार न किया हो, उस से अकारण मुकद्दमा खड़ा न करना।

नीतिवचन 3:31 उपद्रवी पुरुष के विषय में डाह न करना, न उसकी सी चाल चलना;

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 56-58
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

शान्ति

 

         मेरी तरजनी उँगली में काँटा चुभा, और मैं जोर से चिल्लाया, फिर कराहते हुए अपने हाथ को पीछे खींचा। परन्तु मुझे इस अनुभव के लिए तैयार रहना चाहिए था, इससे चकित नहीं होना चाहिए था। जब मैं एक कंटीली झाड़ी की छंटाई बिना बागबानी वाले दस्ताने पहने हुए कर रहा था, तो यह होने की तो पूरी संभावना थी।

         मेरी उंगली का दर्द और बहता हुआ खून, तुरंत ध्यान दिए जाने की माँग कर रहे थे; और मैं मरहम-पट्टी का सामान खोजने लगा। ऐसा करते समय मुझे अनायास ही अपने उद्धारकर्ता का स्मरण हो आया। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि सिपाहियों ने प्रभु यीशु के सिर पर काँटों का पूरा ताज लगा दिया (यूहन्ना 19:1-3)। यदि एक काँटा इतनी पीड़ा दे सकता है, तो उस ताज से प्रभु को कितनी पीड़ा हुई होगी। और यह तो उस शारीरिक पीड़ा का, जो उसने सही थी, एक अंश मात्र ही था। उसकी पीठ को कोड़ों से बुरी तरह से घायल कर दिया गया; उसके हाथों और पैरों में कीलें ठोकी गईं।

         परन्तु यीशु ने आत्मिक पीड़ा को भी सहा। यशायाह 53:5 में लिखा है, परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं” यशायाह यहाँ पर जिस शान्ति की बात कर रहा है वह क्षमा देने का ही एक स्वरूप है। प्रभु यीशु ने अपने आप को कीलों और काँटों के ताज से छेदे जाने दिया जिससे परमेश्वर के साथ हम आत्मिक शान्ति की स्थिति में आ सकें। हमारे स्थान पर मृत्यु सह लेने की उसकी स्वीकृति ने हमारे लिए परमेश्वर पिता के साथ संबंध को पुनःस्थापित करना संभव कर दिया। और पवित्र शास्त्र बताता है कि उसने यह सब मेरी और आपकी शान्ति के लिए किया। - एडम होल्ज़

 

प्रभु यीशु ने हमारी शान्ति के लिए स्वयं पीड़ा सह ली।


वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धार्मिकता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। - 1 पतरस 2:24

बाइबल पाठ: यशायाह 53:1-6

यशायाह 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?

यशायाह 53:2 क्योंकि वह उसके सामने अंकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।

यशायाह 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दुःखी पुरुष था, रोग से उसकी जान पहचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।

यशायाह 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।

यशायाह 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।

यशायाह 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।

 

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 53-55
  • 2 थिस्सलुनीकियों 1

शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

प्रार्थना

 

         मैं अपनी आंटी ग्लेडिस की बेबाक आत्मा का आदर करता हूँ, चाहे उसी आत्मा के कारण मुझे कभी-कभी चिंता में क्यों न पड़ना पड़े। एक बार इस चिंता का कारण मुझे ईमेल में मिला, जिसमें उन्होंने लिखा, “कल मैंने अखरोट के पेड़ को काट दिया।”

         मैं आपको समझा दूँ, वह बिजली से चलने वाली बड़ी आरी को लेकर पेड़ को काट डालने वाली मेरी आंटी की आयु छिहत्तर वर्ष है। वह पेड़ उनके घर के गैराज के पीछे उग आया था। अब जब वह बड़ा हो गया और उसकी जड़ें गैराज की कंकरीट के लिए ख़तरा बनने लगीं, उन्होंने निर्णय कर लिया कि अब तो उस पेड़ को जाना ही होगा। परन्तु साथ ही उन्होंने यह भी लिखा, “ऐसा कोई भी कार्य करने से पहले, मैं प्रार्थना अवश्य कर लेती हूँ।”

         परमेश्वर के वचन बाइबल में नहेम्याह फारस के राजा का पियाऊ होकर सेवा कर रहा था, जब उसने यरूशलेम को वापस लौट कर चले जाने वालों से आए समाचार को सुना। वहाँ पर भी काम होना था, उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं” (नहेम्याह 1:3)। उन टूटी हुई दीवारों के कारण वहाँ के निवासी शत्रुओं के हमलों की संभावनाओं से असुरक्षित थे। नहेम्याह को अपने लोगों पर तरस आया और उसने उनके लिए कुछ करने की ठान ली। परन्तु पहला कार्य प्रार्थना था। यह और भी महत्वपूर्ण इसलिए था क्योंकि एक नए राजा ने यरूशलेम में सारे निर्माण कार्य पर रोक लगवा दी थी (एज्रा 4)। नहेम्याह ने अपने लोगों के लिए प्रार्थना की (नहेम्याह 1:5-10), और फिर परमेश्वर से सहायता माँगी, और उसके बाद ही राजा से वहाँ जाकर कुछ करने के लिए अनुमति और सहायता को माँगा (पद 11)।

         किसी भी परिस्थिति के लिए, विशेषकर परेशानी में, क्या प्रार्थना आपका पहला प्रत्युत्तर होता है? किसी भी परीक्षा अथवा कार्य का सामना करने के लिए प्रार्थना ही सबसे उत्तम मार्ग है। - लिंडा वॉशिंगटन

 

प्रार्थना को अपनी प्राथमिकता बनाएँ, न कि अपना अंतिम विकल्प।


परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा। सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दोहाई दूंगा और कराहता रहूंगा। और वह मेरा शब्द सुन लेगा। - भजन 55:16-17

बाइबल पाठ: नहेम्याह 1

नहेम्याह 1:1 हकल्याह के पुत्र नहेम्याह के वचन। बीसवें वर्ष के किसलवे नाम महीने में, जब मैं शूशन नाम राजगढ़ में रहता था,

नहेम्याह 1:2 तब हनानी नाम मेरा एक भाई और यहूदा से आए हुए कई एक पुरुष आए; तब मैं ने उन से उन बचे हुए यहूदियों के विषय जो बन्धुआई से छूट गए थे, और यरूशलेम के विषय में पूछा।

नहेम्याह 1:3 उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं।

नहेम्याह 1:4 ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कह कर प्रार्थना करता रहा।

नहेम्याह 1:5 हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान और भय योग्य ईश्वर! तू जो अपने प्रेम रखने वाले और आज्ञा मानने वाले के विषय अपनी वाचा पालता और उन पर करुणा करता है;

नहेम्याह 1:6 तू कान लगाए और आंखें खोले रह, कि जो प्रार्थना मैं तेरा दास इस समय तेरे दास इस्राएलियों के लिये दिन रात करता रहता हूँ, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के पापों को जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, मान लेता हूँ। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है।

नहेम्याह 1:7 हम ने तेरे सामने बहुत बुराई की है, और जो आज्ञाएं, विधियां और नियम तू ने अपने दास मूसा को दिए थे, उन को हम ने नहीं माना।

नहेम्याह 1:8 उस वचन की सुधि ले, जो तू ने अपने दास मूसा से कहा था, कि यदि तुम लोग विश्वासघात करो, तो मैं तुम को देश देश के लोगों में तितर बितर करूंगा।

नहेम्याह 1:9 परन्तु यदि तुम मेरी ओर फिरो, और मेरी आज्ञाएं मानो, और उन पर चलो, तो चाहे तुम में से निकाले हुए लोग आकाश की छोर में भी हों, तौभी मैं उन को वहां से इकट्ठा कर के उस स्थान में पहुंचाऊंगा, जिसे मैं ने अपने नाम के निवास के लिये चुन लिया है।

नहेम्याह 1:10 अब वे तेरे दास और तेरी प्रजा के लोग हैं जिन को तू ने अपनी बड़ी सामर्थ्य और बलवन्त हाथ के द्वारा छुड़ा लिया है।

नहेम्याह 1:11 हे प्रभु बिनती यह है, कि तू अपने दास की प्रार्थना पर, और अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानना चाहते हैं, कान लगा, और आज अपने दास का काम सफल कर, और उस पुरुष को उस पर दयालु कर। (मैं तो राजा का पियाऊ था।)

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 50-52
  • 1 थिस्सलुनीकियों 5

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

सामना

 

         भय हमें एक स्थान पर स्तब्ध कर सकता है। हमें भयभीत होने के सभी कारण ध्यान हैं – पिछले समय की हमारी सारी बातें जिनसे हम आहत हुए, हर वह बात जो फिर से ऐसा ही कर सकती है। इसलिए हम कभी-कभी अटक जाते हैं – पीछे जा नहीं सकते; आगे बढ़ने में अत्यधिक भयभीत रहते हैं। हम सोचते हैं, ‘मैं यह नहीं कर सकता हूँ। मैं इस प्रकार से फिर से दुखी होने का जोखिम नहीं उठा सकता हूँ, मैं न तो इतना सक्षम हूँ, न इतना बलवंत हूँ, और न ही इतना साहसी हूँ।’

         लेखक फ्रेडरिक ब्यूक्नर ने जिस प्रकार से परमेश्वर के अनुग्रह का वर्णन किया है, मैं उससे मुग्ध हूँ, वो कहते हैं, ‘एक कोमल आवाज़ के समान जो कहती है, यह संसार है। इसमें भयानक बातें भी होंगी और मनोहर बातें भी होंगी। परन्तु मत डर, मैं तेरे साथ हूँ।

         भयानक बातें होंगी। हमारे संसार में, दुखी लोग औरों को भी दुखी कर देते हैं, कई बार बहुत अधिकाई से। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद के समान हम सब भी अपनी ही उन कहानियों को लिए चलते हैं, जब बुराई ने हमें घेर लिया, जब पशुओं के समान, लोगों ने हमें आहत किया (भजन 57:4); और इसलिए हम दुखी होते हैं, हम पुकारते हैं (पद 1, 2)।

         परन्तु क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है इसलिए हमारे साथ मनोहर बातें भी होंगी। जब हम उसके पास अपने दुःख और भय को लेकर जाते हैं, हम पाते हैं कि वह हमें अपने उस प्रेम के साथ लिए चलता है जो किसी की भी हमें आहत करने की शक्ति से कहीं बढ़कर है (पद 1-3); इतना महान प्रेम जो स्वर्ग तक भरा हुआ है (पद 10)। चाहे विनाश  ने हमें हमारे चारों ओर से क्यों न घेर रखा हो, परमेश्वर का प्रेम हमारा वह दृढ़ शरणस्थान है जहाँ हमारे हृदयों को शान्ति मिलती है (पद 1, 7)।

         और फिर एक दिन हम अपने आप को एक नए साहस के साथ उठते हुए पाते हैं, उस दिन का सामना उसकी विश्वासयोग्यता के स्तुति गीत के साथ करने को तैयार। - मोनिका ब्रैंड्स

 

परमेश्वर का प्रेम और मनोहरता हमें साहसी बना देती है।


हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है। - यशायाह 43:1

बाइबल पाठ: भजन 57

भजन संहिता 57:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिये रहूंगा।

भजन संहिता 57:2 मैं परम प्रधान परमेश्वर को पुकारूंगा, ईश्वर को जो मेरे लिये सब कुछ सिद्ध करता है।

भजन संहिता 57:3 ईश्वर स्वर्ग से भेज कर मुझे बचा लेगा, जब मेरा निगलने वाला निन्दा कर रहा हो। परमेश्वर अपनी करुणा और सच्चाई प्रगट करेगा।

भजन संहिता 57:4 मेरा प्राण सिंहों के बीच में है, मुझे जलते हुओं के बीच में लेटना पड़ता है, अर्थात ऐसे मनुष्यों के बीच में जिन के दांत बरछी और तीर हैं, और जिनकी जीभ तेज तलवार है।

भजन संहिता 57:5 हे परमेश्वर तू स्वर्ग के ऊपर अति महान और तेजोमय है, तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!

भजन संहिता 57:6 उन्होंने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया है; मेरा प्राण ढला जाता है। उन्होंने मेरे आगे गड़हा खोदा, परन्तु आप ही उस में गिर पड़े।

भजन संहिता 57:7 हे परमेश्वर, मेरा मन स्थिर है, मेरा मन स्थिर है; मैं गाऊंगा वरन भजन कीर्तन करूंगा।

भजन संहिता 57:8 हे मेरी आत्मा जाग जा! हे सारंगी और वीणा जाग जाओ। मैं भी पौ फटते ही जाग उठूंगा।

भजन संहिता 57:9 हे प्रभु, मैं देश के लोगों के बीच तेरा धन्यवाद करूंगा; मैं राज्य राज्य के लोगों के बीच में तेरा भजन गाऊंगा।

भजन संहिता 57:10 क्योंकि तेरी करुणा स्वर्ग तक बड़ी है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक पहुंचती है।

भजन संहिता 57:11 हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर अति महान है! तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 47-49
  • 1 थिस्सलुनीकियों 4

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

भरोसा

 

         मैं छोटा लड़का था, और पानी से बहुत डरता था, परन्तु मेरे पिता चाहते थे कि मैं तैरना सीखूँ। वो जानबूझकर मुझे ताल के किनारे से हटाकर गहरे छोर की ओर ले जाते थे, जहाँ पानी मेरे सिर के भी ऊपर से होकर निकलता था, और उस स्थान पर केवल वे ही मेरा एकमात्र सहारा होते थे; और मैं उनसे कहता, “पापा, मुझे मत छोड़ना” और वो मुझे आश्वस्त करते, “नहीं, मैं नहीं छोडूंगा; मेरा वायदा है।” फिर वो मुझे तनाव मुक्त होकर तैरना सिखाते थे।

         वह केवल तैराकी की पाठ ही नहीं था; वह भरोसा रखने का भी पाठ था। मैं जानता था कि मेरे पिता मुझ से प्रेम करते हैं और वे कभी जानबूझकर मुझे किसी हानि में नहीं पड़ने देंगे, परन्तु साथ ही मुझे डर भी लगता था। आरंभ में तो मैं कसकर उनके गले से लिपट कर रहता था, परन्तु वो बड़े धीरज और कोमलता के साथ मुझे सिखाते और समझाते रहे, और अन्ततः मैंने तैरना आरंभ कर दिया, परन्तु पहले मुझे उन पर भरोसा करना सीखना था।

         आज भी जब भी मैं किसी ऐसी स्थिति में होता हूँ, जो मुझे मेरे सिर के भी ऊपर से निकलती हुई प्रतीत होती है, मैं उन समयों को स्मरण करता हूँ। उन्हें स्मरण करने से परमेश्वर के वचन बाइबल में मुझे परमेश्वर पिता के द्वारा अपने लोगों को दिया गया आश्वासन ध्यान आता है : “तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा” (यशायाह 46:4)।

         हमें चाहे परमेश्वर की बाहें अपने नीचे सहारा देती हुई महसूस न हों, परन्तु प्रभु परमेश्वर का हमसे वायदा है कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा (इब्रानियों 13:5)। हम जब उसकी देखभाल और प्रतिज्ञाओं में आश्वस्त होकर विश्राम करते हैं वह हमारी सहायता करता है कि हम उसकी विश्वासयोग्यता में भरोसा रखें। जब हम उसमें भरोसा बनाए रखते हैं, वह हमें हमारी चिंताओं से ऊपर उठा कर उसमें एक नई शान्ति पा लेना सिखाता है। - जेम्स बैंक्स

 

जब हम परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, वह हमें अनुग्रह के नए स्थानों में लिए चलता है।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: यशायाह 46:3-13

यशायाह 46:3 हे याकूब के घराने, हे इस्राएल के घराने के सब बचे हुए लोगों, मेरी ओर कान लगाकर सुनो; तुम को मैं तुम्हारी उत्पत्ति ही से उठाए रहा और जन्म ही से लिये फिरता आया हूं।

यशायाह 46:4 तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा;

यशायाह 46:5 मैं तुम्हें उठाए रहूंगा और छुड़ाता भी रहूंगा। तुम किस से मेरी उपमा दोगे और मुझे किस के समान बताओगे, किस से मेरा मिलान करोगे कि हम एक समान ठहरें?

यशायाह 46:6 जो थैली से सोना उण्डेलते और कांटे में चान्दी तौलते हैं, जो सुनार को मजदूरी देकर उस से देवता बनवाते हैं, तब वे उसे प्रणाम करते वरन दण्डवत भी करते हैं!

यशायाह 46:7 वे उसको कन्धे पर उठा कर लिये फिरते हैं, वे उसे उसके स्थान में रख देते और वह वहीं खड़ा रहता है; वह अपने स्थान से हट नहीं सकता; यदि कोई उसकी दोहाई भी दे, तौभी न वह सुन सकता है और न विपत्ति से उसका उद्धार कर सकता है।

यशायाह 46:8 हे अपराधियों, इस बात को स्मरण करो और ध्यान दो, इस पर फिर मन लगाओ।

यशायाह 46:9 प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से है; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं; मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है।

यशायाह 46:10 मैं तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूं जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूं, मेरी युक्ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूंगा।

यशायाह 46:11 मैं पूर्व से एक उकाब पक्षी को अर्थात दूर देश से अपनी युक्ति के पूरा करने वाले पुरुष को बुलाता हूं। मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्धा है और उसे सफल भी करूंगा।

यशायाह 46:12 हे कठोर मन वालो तुम जो धर्म से दूर हो, कान लगाकर मेरी सुनो।

यशायाह 46:13 मैं अपनी धार्मिकता को समीप ले आने पर हूं वह दूर नहीं है, और मेरे उद्धार करने में विलम्ब न होगा; मैं सिय्योन का उद्धार करूंगा और इस्राएल को महिमा दूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 45-46
  • 1 थिस्सलुनीकियों 3

बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

देखें और सीखें


         हमारे नाती-पोते उस उकाब पक्षी को निकट से देख पाने से बहुत भाव-विभोर हो गए; उन्हें उसे छूने का भी अवसर मिला। हम चिड़ियाघर में थे, और वहाँ वह बचा कर लाया गया एक नर उकाब पक्षी, एक स्वयं सेविका की बांह पर बैठा हुआ था। उस स्वयं सेविका ने हमें उस शक्तिशाली पक्षी के बारे में बताया, और हमें सुन कर बहुत अचरज हुआ कि उस पक्षी के पंखों का फैलाव साढ़े छः फीट का था, और फिर भी उसका वज़न केवल आठ पौंड ही था; ऐसा उसकी खोखली हड्डियों के कारण था।

         इससे मुझे वह दृश्य स्मरण हो आया जब मैंने एक विशाल उकाब को झील के ऊपर पंख फैलाए उड़ते हुए देखा था, और वह तेज़ी से झपटा मार कर अपने शिकार को अपने पंजों से पकड़ लेने के लिए बिलकुल तैयार था। मुझे एक अन्य बड़ा पक्षी भी स्मरण हो आया – लम्बी टांगो वाला बगुला जो झील के किनारे पानी में बिलकुल निश्चल खड़ा था, वह भी बिलकुल तैयार था अपनी लम्बी चोंच से अपने शिकार को पकड़ लेने के लिए। ये तो लगभग 10,000 प्रकार के विभिन्न पक्षियों में से केवल दो ही हैं; और ऐसे अनेकों जीव-जन्तु संसार में भरे पड़े हैं, जो हमारा ध्यान हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर की ओर आकर्षित कर सकते हैं।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में, अय्यूब की पुस्तक में, अय्यूब के मित्र उसके साथ उसके दुखों के कारणों के विषय वाद-विवाद कर रहे हैं, और वे उससे पूछते हैं, “क्या तू परमेश्वर के गूढ़ भेद पा सकता है?” (अय्यूब 11:5-9)। अय्यूब उन्हें प्रत्युत्तर में कहता है, पशुओं से पूछ और वे तुझे सिखाएँगे और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बताएँगे” (अय्यूब 12:7)। जीव-जन्तु इस सत्य की गवाही देते हैं कि परमेश्वर ने ही अपनी सृष्टि की अभिकल्पना की, उसे रचा, और वह ही उसकी देखभाल करता है: “उसके हाथ में एक एक जीवधारी का प्राण, और एक एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है” (पद 10)।

         क्योंकि परमेश्वर पक्षियों की चिंता करता है (मत्ती 6:26; 10:29), इसलिए हम आश्वस्त रह सकते हैं कि वह आपकी और मेरी भी चिंता करता है, हम से प्रेम करता है, चाहे हमें हमारी परिस्थितियाँ समझ में न भी आएँ। हम अपने चारों ओर देखें और सीखें। - एलिसन कीडा

 

परमेश्वर का संसार हमें उसके बारे में सिखाता है।


आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। - मत्ती 6:26

बाइबल पाठ: अय्यूब 12:7-10

अय्यूब 12:7 पशुओं से तो पूछ और वे तुझे दिखाएंगे; और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बता देंगे।

अय्यूब 12:8 पृथ्वी पर ध्यान दे, तब उस से तुझे शिक्षा मिलेगी; और समुद्र की मछलियां भी तुझ से वर्णन करेंगी।

अय्यूब 12:9 कौन इन बातों को नहीं जानता, कि यहोवा ही ने अपने हाथ से इस संसार को बनाया है।

अय्यूब 12:10 उसके हाथ में एक एक जीवधारी का प्राण, और एक एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2