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शुक्रवार, 8 जनवरी 2021

विकल्प

 

          एक ईमानदार और नियम-व्यवस्था का पालन करने वाले नागरिक के पास एक मौखिक सन्देश उसके वौइस् मेल के द्वारा पहुँचा, “मैं पुलिस विभाग से अधिकारी ‘----‘ हूँ; मुझ से इस नंबर पर संपर्क करें।” तुरंत ही वह व्यक्ति चिंतित हो गया – उसे भय था कि कहीं उसने कुछ गलत कर दिया होगा; इसलिए उसने वापस कॉल भी नहीं करी। वह विभिन्न संभावनाओं के बारे में सोचते हुए, रातों को ठीक से सो भी नहीं पाता था; उसे लगता था कि वह किसी प्रकार की मुसीबत में है। यद्यपि उसे उस पुलिस अधिकारी से फिर और कोई सन्देश नहीं आया, किन्तु उसकी चिंताओं को शांत होते कई सप्ताह लग गए।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने चिंता के बारे में एक रोचक प्रश्न पूछा: “तुम में कौन है, जो चिन्ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?” (मत्ती 6:27)। चिंता के बारे में हमारी सोच को सुधारने में यह प्रश्न कारगर हो सकता है, क्योंकि इस प्रश्न का स्वाभाविक उत्तर है कि चिंता के द्वारा हमारी परिस्थिति में कोई सुधर नहीं होता है।

          जब हमारे लिए परिस्थितियाँ बिगाड़ रही होती हैं, तब हम इन दो कदमों को उठा सकते हैं: उचित कार्य करें; और परमेश्वर पर भरोसा रखें। यदि हम समस्या से बचने के लिए कुछ कर सकते हैं तो वह करें। हम परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं कि जो हमें करना चाहिए उसके बारे में वह हमारा मार्गदर्शन करे। किन्तु यदि ऐसा कुछ नहीं है जो हम कर सकते हैं, तो हम इस बात से ढाढ़स बांधें कि परमेश्वर कभी हमारे समान मजबूर नहीं होता है; उसके पास हर बात, हर परिस्थिति के लिए सदा ही कोई योजना,कोई विकल्प होता है, जो भला ही होता है। क्योंकि वह सदा ही हमारे पक्ष में होकर कार्य करता है इसलिए हम हर परिस्थिति को उसके हाथों में सौंप कर उस पर भरोसा रख सकते हैं, उसके विकल्पों और कार्यों के प्रति निश्चिंत हो सकते हैं।

          जब ऐसा लगे कि यह चिंतित होने का समय है, तब हम ईश्वरीय प्रेरणा के द्वारा राजा दाऊद के लिखे शब्दों से हिम्मत पा सकते हैं, जो कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करने पर इसी निष्कर्ष पर पहुँचा  “अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्हालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा” (भजन 55:22)। चिंतित होने का यह कितना बेहतर और अद्भुत विकल्प है। - डेव ब्रैनन

 

आज आपको कौन सी चिंताओं को परमेश्वर को सौंप देना है?


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34

मत्ती 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्र से बढ़कर नहीं?

मत्ती 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।

मत्ती 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?

मत्ती 6:28 और वस्त्र के लिये क्यों चिन्ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।

मत्ती 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्त्र पहने हुए न था।

मत्ती 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्र पहनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहनाएगा?

मत्ती 6:31 इसलिये तुम चिन्ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहनेंगे?

मत्ती 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए।

मत्ती 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।

मत्ती 6:34 सो कल के लिये चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 20-22
  • मत्ती 6:19-34

गुरुवार, 7 जनवरी 2021

योजनाएँ

 

          विलियम केरी, इंग्लैंड में नार्थअमप्टन में एक साधारण से परिवार में जन्मा लड़का था जो अधिकतर रोगी रहता था। उसका भविष्य कुछ विशेष उज्ज्वल प्रतीत नहीं होता था; परन्तु परमेश्वर के पास उसके लिए योजनाएँ थीं। समस्त बाधाओं के बावजूद, वह अनपेक्षित रीति से भारत आया, जहाँ उसने अभूतपूर्व कार्य किया, अनेकों सामाजिक परिवर्तन किए, और परमेश्वर के वचन बाइबल को कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया। वह परमेश्वर तथा लोगों से प्रेम करता था, और उसने परमेश्वर के लिए बहुत से कार्य किए।

          बाइबल का एक प्रमुख पात्र, दाऊद, एक साधारण सा युवक था, अपने परिवार में सबसे छोटा था। वह बैतलहम की पहाड़ियों पर परिवार के पशुओं को चराने वाला एक साधारण सा चरवाहा था (1 शमूएल 16:11-12)। परन्तु परमेश्वर ने दाऊद के हृदय को देखा; उसके पास दाऊद के लिए एक योजना थी। परमेश्वर ने राजा शाऊल को उसकी अनाज्ञाकारिता के कारण अस्वीकार कर दिया था। जब शमूएल भविष्यद्वक्ता शाऊल के गलत चुनावों को लेकर दुखी था, परमेश्वर ने शमूएल को कहा कि यिशै के पुत्रों में से एक को जाकर राजा होने के लिए अभिषेक करे।

          जब शमूएल ने अच्छे डील-डौल वाले और सुन्दर दिखने वाले एलीआब को देखा, तो उसने स्वाभाविक रीति से सोचा, “… निश्चय जो यहोवा के सामने है वही उसका अभिषिक्त होगा” (आयत 6)। किन्तु राजा को चुनने के लिए परमेश्वर की योजना शमूएल की योजना से बहुत भिन्न थी। परमेश्वर ने यिशै के सभी पुत्रों को अस्वीकार कर दिया, सिवाय सबसे छोटे – दाऊद के। पहले नज़र में ऐसा लगता है कि दाऊद को राजा होने के लिए चुनना परमेश्वर द्वारा सोच-विचार कर किया गया कार्य नहीं था। एक चरवाहा युवक अपने देश और जाति के लिए क्या कर पाएगा? परन्तु दाऊद इस्राएल का श्रेष्ठतम राजा हुआ, और उसी के वंश से जगत का
उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह आया।

          यह हमारे लिए कितने ढाढ़स की बात है कि परमेश्वर हमारे हृदयों को जानता है, और उसके पास हम सभी के लिए योजनाएँ हैं। - एस्तेरा पिरोसका एस्कोबार

 

परमेश्वर हमारे हृदयों को देखता है।


सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। - नीतिवचन 4:23

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 16:1-7

1 शमूएल 16:1 और यहोवा ने शमूएल से कहा, मैं ने शाऊल को इस्राएल पर राज्य करने के लिये तुच्छ जाना है, तू कब तक उसके विषय विलाप करता रहेगा? अपने सींग में तेल भर के चल; मैं तुझ को बैतलहमवासी यिशै के पास भेजता हूं, क्योंकि मैं ने उसके पुत्रों में से एक को राजा होने के लिये चुना है।

1 शमूएल 16:2 शमूएल बोला, मैं क्योंकर जा सकता हूं? यदि शाऊल सुन लेगा, तो मुझे घात करेगा। यहोवा ने कहा, एक बछिया साथ ले जा कर कहना, कि मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं।

1 शमूएल 16:3 और यज्ञ पर यिशै को न्योता देना, तब मैं तुझे जता दूंगा कि तुझ को क्या करना है; और जिस को मैं तुझे बताऊं उसी को मेरी ओर से अभिषेक करना।

1 शमूएल 16:4 तब शमूएल ने यहोवा के कहने के अनुसार किया, और बैतलहम को गया। उस नगर के पुरनिये थरथराते हुए उस से मिलने को गए, और कहने लगे, क्या तू मित्र भाव से आया है कि नहीं?

1 शमूएल 16:5 उसने कहा, हां, मित्र भाव से आया हूं; मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं; तुम अपने अपने को पवित्र कर के मेरे साथ यज्ञ में आओ। तब उसने यिशै और उसके पुत्रों को पवित्र कर के यज्ञ में आने का न्योता दिया।

1 शमूएल 16:6 जब वे आए, तब उसने एलीआब पर दृष्टि कर के सोचा, कि निश्चय जो यहोवा के सामने है वही उसका अभिषिक्त होगा।

1 शमूएल 16:7 परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 18-19
  • मत्ती 6:1-18

बुधवार, 6 जनवरी 2021

महिमा

 

          कैसर अगस्तुस को रोमी साम्राज्य के प्रथम और सबसे महान सम्राट के रूप में स्मरण किया जाता है। उसने राजनीतिक कौशल तथा सैन्य शक्ति के द्वारा अपने शत्रुओं को नाश किया, साम्राज्य का विस्तार किया, और रोम को गंदी बस्तियों के समूह से उठाकर संगमरमर की मूर्तियों और मंदिरों का शहर बना दिया। उसे प्रेम और सम्मान देने वाले रोमी नागरिकों ने उसे दैवीय पिता और मानवजाति का रक्षक कहा। जब चालीस वर्ष राज्य करने के बाद वह अपने अन्त समय की ओर आया, तो आधिकारिक रूप से उसके द्वारा कहे गए अंतिम शब्द थे, “मैंने रोम को गारे और मिट्टी का शहर प्राप्त किया था और उसे संगमरमर का शहर छोड़ कर जा रहा हूँ।” किन्तु उसकी पत्नी के अनुसार, वास्तव में उसके अंतिम शब्द थे, “क्या मैंने अपनी भूमिका सही निभाई है? यदि हाँ तो मेरी विदाई के समय मेरी सराहना करना।”

          अगस्तुस को जो बात पता नहीं थी, वह थी कि उसे एक बहुत महान कहानी में एक छोटी सी सहायक भूमिका दी गई थी। उसके राज्य के समय में, एक बढ़ई के घर में एक बालक ने जन्म लिया, जो रोमी शासन के महानतम सैनिक विजय, मंदिर, अखाड़े, या अन्य किसी भी स्थान अथवा बात से कहीं बढ़कर कुछ प्रकट करने वाला था (लूका 2:1)।

          लेकिन उस महिमा को कौन समझ सकता था जिसके लिए प्रभु यीशु ने अपने पकड़वाए जाने की रात में प्रार्थना की थी, जब उसके देशवासी रोमी शासन से उसे क्रूस पर चढ़ाए जाने की माँग कर रहे थे (यूहन्ना 17:4-5)। कौन प्रभु के उस बलिदान में छुपे हुए अचरज को देखने या समझने पाता, जिसकी पृथ्वी और स्वर्ग पर सदा ही सराहना होती रहेगी?

          परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई प्रभु यीशु की यह जीवनी एक बहुत ही अद्भुत घटना है। हमारे परमेश्वर ने हमें मूर्खतापूर्ण बातों के विषय कल्पनाएँ करते और आपस में लड़ते-झगड़ते पाया; और अपने प्रेम तथा बलिदान के द्वारा हमें एक कर दिया, क्रूस के बलिदान की महिमा की स्तुति और आराधना गाने वाले बना दिया। - मार्ट डीहान

 

जिस महिमा की हमें आवश्यकता है वह क्रूस की महिमा है।


और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। - इब्रानियों 12:2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 17:1-5, 20-24

यूहन्ना 17:1 यीशु ने ये बातें कहीं और अपनी आँखें आकाश की ओर उठा कर कहा, हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे।

यूहन्ना 17:2 क्योंकि तू ने उसको सब प्राणियों पर अधिकार दिया, कि जिन्हें तू ने उसको दिया है, उन सब को वह अनन्त जीवन दे।

यूहन्ना 17:3 और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने।

यूहन्ना 17:4 जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा कर के मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है।

यूहन्ना 17:5 और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत के होने से पहिले, मेरी तेरे साथ थी।

यूहन्ना 17:20 मैं केवल इन्हीं के लिये बिनती नहीं करता, परन्तु उन के लिये भी जो इन के वचन के द्वारा मुझ पर विश्वास करेंगे, कि वे सब एक हों।

यूहन्ना 17:21 जैसा तू हे पिता मुझ में हैं, और मैं तुझ में हूं, वैसे ही वे भी हम में हों, इसलिये कि जगत प्रतीति करे, कि तू ही ने मुझे भेजा।

यूहन्ना 17:22 और वह महिमा जो तू ने मुझे दी, मैं ने उन्हें दी है कि वे वैसे ही एक हों जैसे की हम एक हैं।

यूहन्ना 17:23 मैं उन में और तू मुझ में कि वे सिद्ध हो कर एक हो जाएं, और जगत जाने कि तू ही ने मुझे भेजा, और जैसा तू ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही उन से प्रेम रखा।

यूहन्ना 17:24 हे पिता, मैं चाहता हूं कि जिन्हें तू ने मुझे दिया है, जहां मैं हूं, वहां वे भी मेरे साथ हों कि वे मेरी उस महिमा को देखें जो तू ने मुझे दी है, क्योंकि तू ने जगत की उत्पत्ति से पहिले मुझ से प्रेम रखा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 16-17
  • मत्ती 5:27-48

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

परिवर्तन


          तानी और मोदूपे की परवरिश नाइजीरिया में हुई और वे 1970 के दशक में अध्ययन के लिए इंग्लैंड गए। यद्यपि उन्होंने व्यक्तिगत रीति से अपने जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह से आए परिवर्तन को अनुभव किया था, फिर भी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन उन्हें इंग्लैंड की सबसे वंचित और पृथक किए गए समुदायों – लिवरपूल के एनफील्ड में ऐसा परिवर्तन लाने के लिए उपयोग किया जाएगा। डॉक्टर तानी और मुदूपे विश्वासयोग्यता के साथ परमेश्वर के खोजी रहे, और अपने समुदाय में सेवा करते रहे, और उनमें होकर परमेश्वर ने अनेकों की आशा को पुनःस्थापित किया। अब वे एक जीवंत चर्च का संचालन करते हैं, और अनेकों सामाजिक परियोजनाएं संचालित करते हैं, जिससे अनगिनत जीवनों में परिवर्तन आए हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में मनश्शे ने अपने समाज को पहले बुराई की ओर और फिर भलाई की ओर परिवर्तित किया। वह बारह वर्ष की आयु में यहूदा का राजा बना था। उसने कई वर्ष तक बहुत सी बुराइयां कीं, और अपनी प्रजा को परमेश्वर से पथभ्रष्ट कर दिया (2 इतिहास 33:1-9)। उन लोगों ने परमेश्वर की चेतावनियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया, इसलिए परमेश्वर ने मनश्शे को बँधुआ बनाकर बेबीलोन ले जाए जाने दिया (पद 10-11)।

          वहाँ पर अपने कष्ट में मनश्शे परमेश्वर की ओर मुड़ा, और दीन होकर उसे पुकारा; परमेश्वर ने उसकी पुकार को सुना और उसे वापस लौटा कर उसे उसके राज्य पर पुनःस्थापित कर दिया (पद 12-13)। अब परिवर्तित हो चुके राजा ने नगर की दीवारों को बनवाया और पराए देवी-देवताओं को बाहर निकाल फेंका ( 14-15)। लिखा है, “तब उसने यहोवा की वेदी की मरम्मत की, और उस पर मेलबलि और धन्यवाद बलि चढ़ाने लगा, और यहूदियों को इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की उपासना करने की आज्ञा दी” (पद 16)। जब लोगों ने मनश्शे के जीवन में यह अद्भुत परिवर्तन देखा, तो वे भी प्रभावित होकर परिवर्तित हो गए (पद 17)।

          जब हम सच्चे मन से परमेश्वर के खोजी होते हैं, और उसकी आज्ञाकारिता में चलते हैं, तो वह हमें परिवर्तित करता है, और हमारे द्वारा हमारे समाज में परिवर्तन लाता है। - रूथ ओरिली-स्मिथ

 

परमेश्वर द्वारा आप में लाया गया परिवर्तन, औरों को भी परिवर्तित करता है।


यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; - भजन 19:7-8

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 33:9-17

2 इतिहास 33:9 और मनश्शे ने यहूदा और यरूशलेम के निवासियों को यहां तक भटका दिया कि उन्होंने उन जातियों से भी बढ़ कर बुराई की, जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से विनाश किया था।

2 इतिहास 33:10 और यहोवा ने मनश्शे और उसकी प्रजा से बातें कीं, परन्तु उन्होंने कुछ ध्यान नहीं दिया।

2 इतिहास 33:11 तब यहोवा ने उन पर अश्शूर के सेनापतियों से चढ़ाई कराई, और ये मनश्शे को नकेल डाल कर, और पीतल की बेड़ियों में जकड़ कर, उसे बेबीलोन को ले गए।

2 इतिहास 33:12 तब संकट में पड़ कर वह अपने परमेश्वर यहोवा को मानने लगा, और अपने पूर्वजों के परमेश्वर के सामने बहुत दीन हुआ, और उस से प्रार्थना की।

2 इतिहास 33:13 तब उसने प्रसन्न हो कर उसकी विनती सुनी, और उसको यरूशलेम में पहुंचा कर उसका राज्य लौटा दिया। तब मनश्शे को निश्चय हो गया कि यहोवा ही परमेश्वर है।

2 इतिहास 33:14 इसके बाद उसने दाऊदपुर से बाहर गीहोन के पश्चिम की ओर नाले में मच्छली फाटक तक एक शहरपनाह बनवाई, फिर ओपेल को घेर कर बहुत ऊंचा कर दिया; और यहूदा के सब गढ़ वाले नगरों में सेनापति ठहरा दिए।

2 इतिहास 33:15 फिर उसने पराये देवताओं को और यहोवा के भवन में की मूर्ति को, और जितनी वेदियां उसने यहोवा के भवन के पर्वत पर, और यरूशलेम में बनवाई थीं, उन सब को दूर कर के नगर से बाहर फिंकवा दिया।

2 इतिहास 33:16 तब उसने यहोवा की वेदी की मरम्मत की, और उस पर मेलबलि और धन्यवाद बलि चढ़ाने लगा, और यहूदियों को इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की उपासना करने की आज्ञा दी।

2 इतिहास 33:17 तौभी प्रजा के लोग ऊंचे स्थानों पर बलिदान करते रहे, परन्तु केवल अपने परमेश्वर यहोवा के लिये।

 

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 13-15
  • मत्ती 5:1-26

सोमवार, 4 जनवरी 2021

ज्योति

 

          चाँद के बादलों में छिप जाने से जंगल में स्थित हमारे गाँव पर अंधियारा छा गया। आकाश में बिजली कड़कने लगी, और गरजन की आवाज़ गूँजने लगी। मैं तब बच्चा ही था और जगा हुआ इन सब के कारण भयभीत हो रहा था, मुझे लग रहा था कि बाहर तरह-तरह के भयानक जानवर मुझ पर हमला करने को तैयार खड़े हैं। परन्तु प्रातः होने तक वे सभी आवाज़ें जाती रहीं, सूरज निकल आया, अंधियारा मिट गया, और गर्जन की बजाए चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़ सुनाए देने लगीं। रात की भयावह बातों की तुलना में प्रातः का आनन्द बहुत मनभावन था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों का लेखक इस्राएलियों के एक अनुभव के बारे में लिखता है; उनके मिस्र से निकलकर आने के बाद जब मूसा परमेश्वर से दस आज्ञाएँ लेने सीनै पर्वत पर गया हुआ था, तब वह पर्वत बहुत अंधियारा और आँधी-तूफ़ान से भरा हुआ था, और वे लोग भयभीत होकर छुप गए (निर्गमन 20:18-19)। उनके लिए परमेश्वर की उपस्थिति, उसके द्वारा सप्रेम अपनी व्यवस्था देने के समय में भी अंधियारी और भयावह थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि पापी मनुष्य होने के कारण, वे परमेश्वर के मानकों पर खरे नहीं उतर सकते थे। उनके पाप के कारण वे अन्धकार और भय में थे (इब्रानियों 12:18-21)।

          परन्तु परमेश्वर ज्योति है और उसमें कुछ भी अन्धकार नहीं है (1यूहन्ना 1:5)। इब्रानियों 12 में सीनै पर्वत परमेश्वर की पवित्रता और अनाज्ञाकारिता के हमारे पुराने जीवन का प्रतीक है। जबकि सिय्योन पर्वत की सुन्दरता परमेश्वर के अनुग्रह और “नई वाचा के मध्यस्थ” (पद 22-24) प्रभु यीशु मसीह में मसीही विश्वासी के नए जीवन का प्रतीक है।

          जो कोई भी प्रभु यीशु मसीह के पीछे चलेगा वह “कभी अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा” (यूहन्ना 8:12)। प्रभु यीशु मसीह में होकर हम अपने पुराने जीवन के अन्धकार को तज सकते हैं और प्रभु की ज्योति तथा उसके राज्य की सुन्दरता में चलने के आनन्द का उत्सव मना सकते हैं। - लॉरेंस दरमानी

 

क्या आपने प्रभु की ज्योति में चलने का निर्णय ले लिया है?


उस में जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी। - यूहन्ना 1:4

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:18-24

इब्रानियों 12:18 तुम तो उस पहाड़ के पास जो छूआ जा सकता था और आग से प्रज्वलित था, और काली घटा, और अन्‍धेरा, और आन्धी के पास।

इब्रानियों 12:19 और तुरही की ध्वनि, और बोलने वाले के ऐसे शब्द के पास नहीं आए, जिस के सुनने वालों ने बिनती की, कि अब हम से और बातें न की जाएं।

इब्रानियों 12:20 क्योंकि वे उस आज्ञा को न सह सके, कि यदि कोई पशु भी पहाड़ को छूए, तो पत्थरवाह किया जाए।

इब्रानियों 12:21 और वह दर्शन ऐसा डरावना था, कि मूसा ने कहा; मैं बहुत डरता और कांपता हूं।

इब्रानियों 12:22 पर तुम सिय्योन के पहाड़ के पास, और जीवते परमेश्वर के नगर स्वर्गीय यरूशलेम के पास।

इब्रानियों 12:23 और लाखों स्‍वर्गदूतों और उन पहिलौठों की साधारण सभा और कलीसिया जिन के नाम स्वर्ग में लिखे हुए हैं: और सब के न्यायी परमेश्वर के पास, और सिद्ध किए हुए धर्मियों की आत्माओं।

इब्रानियों 12:24 और नई वाचा के मध्यस्थ यीशु, और छिड़काव के उस लहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 10-12
  • मत्ती 4

रविवार, 3 जनवरी 2021

जानता

 

          वह जानता था कि उसे वो काम नहीं करना चाहिए था। मैं स्पष्ट देख पा रही थी कि वह जानता था कि उसने गलत किया है: यह उसके चेहरे पर साफ़ लिखा हुआ था। मैं जब उसे लेकर उसकी गलती के बारे में उससे बात करने बैठी, तो मेरे तीन वर्षीय भतीजे ने अपनी आँखें जोर से बन्द कर लीं। वह मेरे सामने बैठा था, परन्तु उसके मन में अबोध विचार यही था कि यदि वो मुझे नहीं देख पा रहा है तो मैं भी उसे नहीं देख पा रही होऊंगी। और जब हम एक दूसरे को देख ही नहीं पा रहे हैं तो फिर बात कैसे कर सकेंगे, और इससे उसके किए के परिणामों से बचा जा सकता है।

          मुझे बहुत खुशी है कि मैं उसे उस पल में देख पा रही थी। यद्यपि मैं उसके किए कार्य को अनदेखा तो नहीं कर सकती थी, और मुझे उससे इसके बारे में बात करना आवश्यक था, लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि हम दोनों के बीच कुछ भी आए। मैं चाहती थी कि वह मेरे चेहरे की ओर देखे, और जाने कि मैं उससे कितना प्यार करती थी और उसे क्षमा करना चाहती थी। उस पल में मुझे एक झलक मिली उस समय की जब परमेश्वर अदन की वाटिका में आदम और हव्वा के पास उन्हें ढूँढ़ता हुआ आया था, क्योंकि उन्होंने उसके भरोसे को तोड़ा था। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि अपनी गलती का एहसास होने के बाद उन्होंने परमेश्वर से छिपने के प्रयास किए (उत्पत्ति 3:10), जबकि परमेश्वर उन्हें उससे भी अधिक स्पष्ट देख सकता था जितना मैं अपने भतीजे को देखने पा रही थी।

          हमें जब भी एहसास होता है कि हमने कुछ गलत किया है, तो हम उसका सामना करने और उसके परिणामों से बचाना चाहते हैं। हम या तो सत्य से भागते हैं, या उसे छिपाते हैं, या सत्य के प्रति अपनी आँखें मूँद लेते हैं। परमेश्वर हमें अपनी धार्मिकता के मापदंड के अनुसार अवश्य ही नापेगा, और हम उसकी दृष्टि से छुप नहीं सकते हैं; परन्तु फिर भी वह हमें अपने पास बुलाता है क्योंकि वह हमसे प्रेम करता है और हमें प्रभु यीशु में होकर क्षमा प्रदान करना चाहता है। परमेश्वर हमारे बारे में सब कुछ जानता है; हमें उसके सामने सब कुछ मान लेना चाहिए। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर प्रेम के साथ देखता है।


यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-10

उत्पत्ति 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस वाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?

उत्पत्ति 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस वाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं।

उत्पत्ति 3:3 पर जो वृक्ष वाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।

उत्पत्ति 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,

उत्पत्ति 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएँगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।

उत्पत्ति 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया।

उत्पत्ति 3:7 तब उन दोनों की आँखें खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।

उत्पत्ति 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय वाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी वाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।

उत्पत्ति 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है?

उत्पत्ति 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 7-9
  • मत्ती 3

शनिवार, 2 जनवरी 2021

निर्देश

 

          मेरे पिता में दिशा की इतनी अद्भुत समझ थी कि इसके लिए मुझे उन से ईर्ष्या होती थी। उन्हें बस पता होता था कि उत्तर, दक्षिण, पूर्व, और पश्चिम किस ओर हैं। यह ऐसा था मानो उन्होंने इस दिशा ज्ञान के साथ ही जन्म लिया हो। और वो सदा ही सही भी होते थे; सिवाय उस रात के, जब वो सही नहीं थे। उस रात मेरे पिता मार्ग भूल गए, खो गए।

          वो और मेरी माँ एक अपरिचित नगर में किसी कार्यक्रम में सम्मिलित होने गए थे, और उनके वापस लौटने के समय तक अँधेरा हो चुका था। वे निश्चित थे कि उन्हें मुख्य सड़क तक पहुँचने का मार्ग पता है, परन्तु उन्हें पता नहीं था, और वे कुछ देर इधर-उधर मुड़ते रहे, और गलत मार्ग के कारण असमंजस में पड़ते चले गए, और फिर निराश होकर खिसियाने लगे। तब मेरी माँ ने उनसे कहा, “मैं समझ रही हूँ कि यह कठिन है, परन्तु कोई बात नहीं; आप अपने फोन पर सही मार्ग के निर्देश देख सकते हैं।” जहाँ तक मुझे पता है, जीवन में पहली बार, मेरे छिहत्तर वर्षीय पिता ने किसी से दिशा निर्देश लिए, वो भी अपने फोन से!

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार के पास जीवन का बहुत अनुभव था। परन्तु भजन ऐसे पलों को भी प्रकट करता है जब दाऊद आत्मिक तथा भावनात्मक रीति से खोया हुआ सा प्रतीत होता है। भजन 143 ऐसे ही एक समय को बताता है। उस महान राजा का मन व्याकुल था (पद 4); वह समस्या में पड़ा हुआ था (पद 11)। इसलिए उसने रुक कर प्रार्थना की, “जिस मार्ग से मुझे चलना है, वह मुझको बता दे” (पद 8)। उसने किसी मनुष्य का सहारा नहीं लिया, वरन परमेश्वर को पुकार कर कहा, “क्योंकि मैं तुझी पर भरोसा रखता हूँ” (पद 8)।

          यदि वह “[परमेश्वर के] मन के अनुसार व्यक्ति” (1शमूएल 13:14) खोया हुआ अनुभव कर सकता है, और परमेश्वर से दिशा-निर्देश तथा मार्गदर्शन माँग सकता है, तो स्वाभाविक है कि हमें भी परमेश्वर से निर्देश लेने की आवश्यकता होगी। यदि आज आपको मार्ग नहीं मिल रहा है, तो निःसंकोच होकर परमेश्वर से निर्देश मांगें। - जॉन ब्लेज़

 

परमेश्वर से निर्देश मांगना ठीक ही नहीं है – सर्वोत्तम है।


और जब कभी तुम दाहिनी या बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो। - यशायाह 30:21

बाइबल पाठ: भजन 143:4-11

भजन 143:4 मेरी आत्मा भीतर से व्याकुल हो रही है मेरा मन विकल है।

भजन 143:5 मुझे प्राचीन काल के दिन स्मरण आते हैं, मैं तेरे सब अद्भुत कामों पर ध्यान करता हूं, और तेरे काम को सोचता हूं।

भजन 143:6 मैं तेरी ओर अपने हाथ फैलाए हुए हूं; सूखी भूमि के समान मैं तेरा प्यासा हूं।

भजन 143:7 हे यहोवा, फुर्ती कर के मेरी सुन ले; क्योंकि मेरे प्राण निकलने ही पर हैं मुझ से अपना मुंह न छिपा, ऐसा न हो कि मैं कब्र में पड़े हुओं के समान हो जाऊं।

भजन 143:8 अपनी करुणा की बात मुझे शीघ्र सुना, क्योंकि मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है। जिस मार्ग से मुझे चलना है, वह मुझ को बता दे, क्योंकि मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं।

भजन 143:9 हे यहोवा, मुझे शत्रुओं से बचा ले; मैं तेरी ही आड़ में आ छिपा हूं।

भजन 143:10 मुझ को यह सिखा, कि मैं तेरी इच्छा क्योंकर पूरी करूं, क्योंकि मेरा परमेश्वर तू ही है! तेरा भला आत्मा मुझ को धर्म के मार्ग में ले चले!

भजन 143:11 हे यहोवा, मुझे अपने नाम के निमित्त जिला! तू जो धर्मी है, मुझ को संकट से छुड़ा ले!

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 4-6
  • मत्ती 2