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शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

संघर्ष विहीन


   घटना सन २००६ की है, फे वैलडन को दी गई एक दवा से उसके शरीर में गलत प्रतिक्रीया हुई और उसके हृदय की गति थम गई। चिकित्सकों के प्रयास से वह उस मृत्यु समान स्थिति से जीवित निकल आई। लंडन के अखबार Daily Telegraph के एक संवादाता एलिज़बथ ग्राइस को दीए गए साक्षात्कार में फे ने अपने उस समय के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि "उस समय एक भयानक दिखने वाला प्राणी मुझे एक चमकीले द्वार की ओर खेंच रहा था और डॉक्टर मुझे वापस खींचने का प्रयास कर रहे थे।" बाद में फे ने कहा, "अगर यही मृत्यु है तो मैं उस अनुभव से पुनः निकलना नहीं चाहती, क्योंकि यह तो यहां के अनुभव के समान ही एक और संघर्ष में जाना होगा।"

   संसार के लगभग सभी लोगों के लिए मृत्यु एक संघर्ष हो सकती है, किंतु मसीही विश्वासी के लिए मृत्यु अपने आप में डरने की बात नहीं है क्योंकि वह हमें हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के पास स्वर्ग में पहुंचाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रकाशितवाक्य नामक पुस्तक में प्रेरित युहन्ना ने स्वर्ग में परमेश्वर के साथ होने का एक विलक्षण वर्णन लिखा है। वहां उसने नए यरुशलेम को स्वर्ग से उतरते हुए देखा। यरुशलेम शहर को भजन ७६:२ में परमेश्वर का निवास स्थान कहा गया है और वह परमेश्वर के लोगों के लिए परमेश्वर की उनके मध्य उपस्थिति का एक भौतिक चिन्ह था। किंतु नया यरुशलेम मनुष्यों द्वारा बनाया हुआ कोई नश्वर स्थान नहीं है, वहां परमेश्वर की उपस्थिति चिन्ह नहीं वरन प्रकट रूप में है, वहां परमेश्वर अपने लोगों के साथ अनन्तकाल तक रहेगा और वहां किसी प्रकार का कोई दुख, बिमारी, वेदना नहीं होगी।

   हम अनन्तकाल के बारे में बहुत कुछ तो नहीं जानते, लेकिन इतना अवश्य जानते हैं कि जितनों ने मसीह यीशु को पश्चाताप और पापों की क्षमा मांगने के द्वारा अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार किया है, उनके लिए उनके वर्तमान सभी संघर्ष, शारीरिक या आत्मिक, वहां समाप्त हो जाएंगे और वे परमेश्वर की शांति और आनन्द में प्रवेश करके अनन्तकाल के लिए एक परमानन्द से परिपूर्ण संघर्षविहीन स्थान पर निवास करेंगे। परमेश्वर के साथ के उस अति उत्त्म जीवन और समय की कलपना भी हमारे मन-मसतिष्क की क्षमता से बाहर है।

   क्या आपने उस आने वाले परमानन्द से परिपूर्ण संघर्षविहीन जीवन के एकमायत्र मार्ग को स्वीकार कर लिया है? - मारविन विलियम्स


पृथ्वी की कठिनाईयां स्वर्ग के आनन्द के सामने कुछ भी नहीं।


और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य २१:४

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य २१:१-४
Revelation21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
Revelation21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
Revelation21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।
Revelation21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १२-१३ 
  • मत्ती १६

गुरुवार, 24 जनवरी 2013

समकालीन


   आयर्लैंड देश के डबलिन शहर में स्थित चेस्टर बीटी पुस्तकालय में परमेश्वर के वचन बाइबल के प्राचीन अंशों का व्यापक संग्रह है, जिनमें से कुछ ईसवीं दो तक के हैं। इनमें से एक अंश जो प्रदर्शन पर रखा हुआ है वह प्रेरितों १७:१६ को दिखाता है। उसमें लिखा है, "जब पौलुस अथेने में उन की बाट जोह रहा था, तो नगर को मूरतों से भरा हुआ देखकर उसका जी जल गया।"

   उस प्राचीन अंश पर तब लिखी गई बात आज के अख़बार जितनी ही समकालीन है। प्राचीन एथेंस शहर को मूर्तों से भरा देख कर पौलुस अति विचलित हो उठा, और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारी आज की हालत देख कर भी पौलुस ठीक वैसा ही अनुभव करता। लेकिन एथेंस के लोगों के साथ पौलुस का व्यवहार और वार्तालाप ना रोषपूर्ण था और ना ही दोषारोपण के लिए। उसने बड़े प्रेम और आदर के साथ उनके सामने अपने मसीही विश्वास को रखा। चाहे उसका मन खिन्न था किंतु उसके व्यवहार में मसीह का प्रेम और सहिषुणता थी।

   आज के संसार में जो मूर्तें हम देखते हैं उनमें से कई पौलुस के समय से भिन्न हैं, जैसे: धन, प्रसिद्धि, बल या शक्ति, प्रसिद्धि प्राप्त खिलाड़ी, मनोरंजनकर्ता, सामाजिक अगुवे या राजनितिज्ञ इत्यादि। संसार के लोग सच्चे परमेश्वर के पीछे नहीं, वरन इन्हीं के पीछे चलने और इन्हीं को अपने जीवन का उद्देश्य या लक्ष्य बनाने में लगे हुए हैं। सदा की तरह हमारा आत्मिक शत्रु शैतान भी संसार का ध्यान संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु से हटा कर अन्य सभी व्यर्थ बातों पर केंद्रित करने में लगा हुआ है। मसीही विश्वासी भी शैतान के इस प्रयास से बचे हुए नहीं हैं, वे भी इन्हीं प्रलोभनों और आकर्षणों में पड़कर सच्चे मसीही विश्वास से भटकने लगे हैं और सांसारिक उपलब्धियों की चकाचौंध को प्राप्त करने की चाह में बहकने लगे हैं। इसलिए हम मसीही विश्वासियों को और भी अधिक सचेत होने और अपने जीवनों में सही व्यवहार दिखाने की आवश्यकता है - ना केवल अपने मसीही जीवन की गवाही बचाए और बनाए रखने के लिए वरन साथ ही स्व-धार्मिकता के दंभ में आकर उनके प्रति रोषपूर्ण रवैया रखने और दोष लगाने से बचने के लिए जो मसीह यीशु पर विश्वास नहीं रखते।

   पौलुस के समान ही हमें भी मसीह के प्रेम को प्रदर्षित करते हुए उन लोगों तक अपने मसीही विश्वास की बात पहुंचानी है जो मसीह यीशु को नहीं जानते या मानते। हमारा व्यवहार और जीवन ही उन्हें थिस्सुलुनिके के मसीही विश्वासियों के समान कर सकता है जो "...कैसे मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्चे परमेश्वर की सेवा करो" (१ थिस्सुलुनिकियों १:९)। - बिल क्राउडर


हमारे जीवनों में परमेश्वर का प्राथमिक स्थान ले लेने वाली हर बात एक मूरत है।


जब पौलुस अथेने में उन की बाट जोह रहा था, तो नगर को मूरतों से भरा हुआ देखकर उसका जी जल गया। - प्रेरितों १७:१६

बाइबल पाठ: प्रेरितों १७:१६-३१
Acts17:16 जब पौलुस अथेने में उन की बाट जोह रहा था, तो नगर को मूरतों से भरा हुआ देखकर उसका जी जल गया।
Acts17:17 सो वह आराधनालय में यहूदियों और भक्तों से और चौक में जो लोग मिलते थे, उन से हर दिन वाद-विवाद किया करता था।
Acts17:18 तब इपिकूरी और स्‍तोईकी पण्‍डितों में से कितने उस से तर्क करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बकवादी क्या कहना चाहता है परन्तु औरों ने कहा; वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्योंकि वह यीशु का, और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुनाता था।
Acts17:19 तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, क्या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्या है?
Acts17:20 क्योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्या है?
Acts17:21 (इसलिये कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)।
Acts17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो।
Acts17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं।
Acts17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता।
Acts17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है।
Acts17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है।
Acts17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं!
Acts17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं।
Acts17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों।
Acts17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है।
Acts17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ९-११ 
  • मत्ती १५:२१-३९

बुधवार, 23 जनवरी 2013

सदा कार्यरत


   जैक और ट्रीशा देर रात अस्पताल की ओर जा रहे थे, क्योंकि ट्रीशा का बच्चा जनने का समय निकट था; और मार्ग में अचानक ही असंभावित हो गया। ट्रीशा को प्रसव पीड़ाएं आरंभ हो गईं और वह बच्चा जनने की कगार पर आ गई, अस्पताल तक पहुँचने या किसी सहायता के उन तक पहुँचने का समय ही नहीं रहा। जैक ने सहायता के लिए ९११ पर फोन किया और वहां उपस्थित आपात्कालीन उपचार सहायिका चैरी व्हाइट ने परिस्थिति को समझते हुए फोन पर ही जैक को प्रसव में सहायता करने और बच्चे को जनने में सहायता करी। पैदा होने के बाद बच्चा सांस नहीं ले रहा था, तो चैरी ने जैक को यह भी समझाया कि कैसे कृत्रिम रीति से श्वास दी जाती है, जो ६ मिनिट तक जैक करता रहा और तब जाकर बच्चे ने सांस ली और रोया। बाद में जब उन लोगों से पूछा गया कि उस घोर संकट में वे शांत रहते हुए कैसे सब कुछ कर सके तो चैरी ने उत्तर दिया, "मैं प्रसन्न हूँ कि परमेश्वर मध्य-रात्रि में भी कार्यरत रहता है"।

   जब समाचार-माध्यमों में ऐसे समाचार छपते हैं जिनसे परमेश्वर को आदर और महिमा मिलती है, जिसका वह पात्र है, तो मैं प्रसन्न होती हूँ। आज के बाइबल पाठ में हम ऐसा ही कुछ पाते हैं। इस खण्ड को पढ़ने से यह प्रगट है कि चाहे हाथ उठाने वाला मूसा था, किंतु लाल-समुद्र को दो भागों में बांटकर इस्त्राएलियों को बचाकर निकाल ले जाने वाला परमेश्वर ही था (निर्गमन १४:२६-२७)। पार होने के बाद, उन सभी इस्त्राएलियों और मूसा ने मिलकर धन्यवादस्वरूप परमेश्वर कि स्तुति और आराधना करी और कहा: "हे यहोवा, देवताओं में तेरे तुल्य कौन है? तू तो पवित्रता के कारण महाप्रतापी, और अपनी स्तुति करने वालों के भय के योग्य, और आश्चर्य कर्म का कर्त्ता है" (निर्गमन १५:११)।

   परमेश्वर ही सभी भलाईयों का स्त्रोत है, और हमारे जीवनों में सदैव ही धन्यवाद का पात्र। हर बात में उसके प्रति धन्यवादी रहिए। यह कितनी भली बात है कि परमेश्वर हम सभी के जीवनों में सदा कार्यरत है - अनिश्चितता, रात्रि और अन्धकार में भी। - एनी सेटास


परमेश्वर को कार्यरत देखकर हृदय से स्तुति गीत उमड़ते हैं।

यहोवा मेरा बल और भजन का विषय है, और वही मेरा उद्धार भी ठहरा है; मेरा ईश्वर वही है, मैं उसी की स्तुति करूंगा, (मैं उसके लिये निवासस्थान बनाऊंगा ), मेरे पूर्वजों का परमेश्वर वही है, मैं उसको सराहूंगा। - निर्गमन १५:२

बाइबल पाठ: निर्गमन १४:२६-१५:२
Exod 14:26  फिर यहोवा ने मूसा से कहा, अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ा, कि जल मिस्रियों, और उनके रथों, और सवारों पर फिर बहने लगे।
Exod 14:27  तब मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया, और भोर होते होते क्या हुआ, कि समुद्र फिर ज्यों का त्यों अपने बल पर आ गया; और मिस्री उलटे भागने लगे, परन्तु यहोवा ने उन को समुद्र के बीच ही में झटक दिया।
Exod 14:28  और जल के पलटने से, जितने रथ और सवार इस्राएलियों के पीछे समुद्र में आए थे, सो सब वरन फिरौन की सारी सेना उस में डूब गई, और उस में से एक भी न बचा।
Exod 14:29  परन्तु इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर हो कर चले गए, और जल उनकी दाहिनी और बाईं दोनों ओर दीवार का काम देता था।
Exod 14:30  और यहोवा ने उस दिन इस्राएलियों को मिस्रियों के वश से इस प्रकार छुड़ाया; और इस्राएलियों ने मिस्रियों को समुद्र के तट पर मरे पड़े हुए देखा।
Exod 14:31  और यहोवा ने मिस्रियों पर जो अपना पराक्रम दिखलाता था, उसको देखकर इस्राएलियों ने यहोवा का भय माना और यहोवा की और उसके दास मूसा की भी प्रतीति की।
Exod 15:1  तब मूसा और इस्राएलियों ने यहोवा के लिये यह गीत गाया। उन्होंने कहा, मैं यहोवा का गीत गाऊंगा, क्योंकि वह महाप्रतापी ठहरा है; घोड़ों समेत सवारों को उसने समुद्र में डाल दिया है।
Exod 15:2  यहोवा मेरा बल और भजन का विषय है, और वही मेरा उद्धार भी ठहरा है; मेरा ईश्वर वही है, मैं उसी की स्तुति करूंगा, (मैं उसके लिये निवासस्थान बनाऊंगा ), मेरे पूर्वजों का परमेश्वर वही है, मैं उसको सराहूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ७-८ 
  • मत्ती १५:१-२०

मंगलवार, 22 जनवरी 2013

बहिष्कृत


   उसका चेहरा मैला था, बाल लम्बे और गन्दे थे; उसके कपड़ों पर बीयर के दाग़ थे और उसके चारों ओर बीयर की गन्ध व्याप्त थी। जब उसने चर्च भवन में प्रवेश किया तो चर्च में उपस्थित आराधना करने आए लोगों ने उसकी उपेक्षा करी। थोड़ी देर में वे लोग भौंचक्के रह गए जब वह व्यक्ति आगे की ओर बढ़ा, और चर्च के सन्देश देने के मंच पर आ कर खड़ा हो गया, वहां आकर उसने अपनी वह नकली वेश-भूषा उतार डाली और लोगों ने तब पहचाना कि वह और कोई नहीं वरन उनके चर्च का पादरी ही था!

   मैं आपके बारे में तो नहीं जानता, परन्तु मेरी प्रवृति उन्हीं से मिलने और हाथ मिलाने की रहती है जिन्हें या तो मैं पहले से जानता हूँ, या जो वेश-भूषा और दिखने में संभ्रांत प्रतीत होते हैं।

   लेकिन मेरी जैसी प्रवृति वाले लोगों के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में एक गंभीर चेतावनी दी। उसने लिखा: "पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो; और व्यवस्था तुम्हें अपराधी ठहराती है" (याकूब २:९)। परमेश्वर के परिवार में बाहरी स्वरूप पर आधारित पक्षपातपूर्ण रवैये का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि ऐसा करने से हम "...कुविचार से न्याय करने वाले..." (पद ४) ठहरते हैं।

   इस प्रवृति से बचने का मार्ग है प्रभु यीशु द्वारा दिया गया निर्देष कि अपने पड़ौसी से अपने समान प्रेम रखें - चाहे हमारा पड़ौसी कोई भी क्यों ना हो। किसी दरिद्र, या बेघर, या भूखे-उघाड़े, या दुखी, या निराश व्यक्ति की ओर अपने प्रेम और सहायता का हाथ बढ़ाने से हम परमेश्वर की "राज-व्यवस्था" को पूरा करते हैं (पद ८)।

   यह संसार जो बहिष्कृत लोगों को दूर ही रखता है, इसमें ही प्रभु यीशु के प्रेम को दिखाएं और जिन्हें सहायता की आवश्यकता है, उनकी सहायता करने से पीछे ना हटें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


सच्चा मसीही प्रेम उनकी सहायता करता है जो इस उपकार को लौटा पाने में अक्षम हैं।

पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो; और व्यवस्था तुम्हें अपराधी ठहराती है। - याकूब २:९

बाइबल पाठ: याकूब २:१-९
Jas 2:1  हे मेरे भाइयों, हमारे महिमायुक्त प्रभु यीशु मसीह का विश्वास तुम में पक्षपात के साथ न हो।
Jas 2:2  क्योंकि यदि एक पुरूष सोने के छल्ले और सुन्‍दर वस्‍त्र पहिने हुए तुम्हारी सभा में आए और एक कंगाल भी मैले कुचैले कपड़े पहिने हुए आए।
Jas 2:3  और तुम उस सुन्‍दर वस्‍त्र वाले का मुंह देख कर कहो कि तू वहां अच्छी जगह बैठ; और उस कंगाल से कहो, कि तू यहां खड़ा रह, या मेरे पांव की पीढ़ी के पास बैठ।
Jas 2:4  तो क्या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्याय करने वाले न ठहरे?
Jas 2:5  हे मेरे प्रिय भाइयों सुनो; क्या परमेश्वर ने इस जगत के कंगालों को नहीं चुना कि विश्वास में धनी, और उस राज्य के अधिकारी हों, जिस की प्रतिज्ञा उसने उन से की है जो उस से प्रेम रखते हैं?
Jas 2:6  पर तुम ने उस कंगाल का अपमान किया: क्या धनी लोग तुम पर अत्याचार नहीं करते? और क्या वे ही तुम्हें कचहिरयों में घसीट घसीट कर नहीं ले जाते?
Jas 2:7 क्या वे उस उत्तम नाम की निन्‍दा नहीं करते जिस के तुम कहलाए जाते हो?
Jas 2:8  तौभी यदि तुम पवित्र शास्त्र के इस वचन के अनुसार, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख, सचमुच उस राज व्यवस्था को पूरी करते हो, तो अच्छा ही करते हो।
Jas 2:9  पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो; और व्यवस्था तुम्हें अपराधी ठहराती है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ४-६ 
  • मत्ती १४:२२-३६

सोमवार, 21 जनवरी 2013

रिक्त स्थान


   प्राचीन दार्शनिक अरस्तु(Aristotle) का प्रसिद्ध कथन है: "Nature abhors a vacuum" अर्थात प्रकृति शून्य या रिक्ति को नापसन्द करती है। अरस्तु का यह कथन उनके इस अवलोकन पर आधारित था कि प्रकृति हर रिक्त स्थान को भर देती है, चाहे वह ना दिखाई देने वाली वायु के द्वारा ही क्यों ना हो।

   यही सिद्धांत हमारे आत्मिक जीवनों में भी लागू होता है। जब परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे मनों में हमारे पाप-बोध को जगाना आरंभ करता है तो साथ ही हम अपने मनों में अपने आप को सुधारने की योजनाएं भी बनाने लग जाते हैं; अपनी बुरी आदतों और बातों को निकाल देने के लिए भरसक प्रयत्न करने लगते हैं। किंतु अशुद्ध विचारों, दुष्टता के रवैये और स्वार्थ-सिद्धी की दुष्कामनाएं अपने प्रयासों से हटा पाने के हमारे सभी प्रयास अन्ततः निश्चित रुप से असफल रहते हैं क्योंकि हम अपनी एक बुराई निकाल कर उसके स्थान पर एक रिक्ति या शून्यता उत्पन्न कर देते हैं और कोई दूसरी बुराई या अन्य उपस्थित बुराईयों में से कोई बढ़कर उसका स्थान भर देती है, और हम एक के बाद एक बुराई को निकालने के असफल प्रयासों से जूझते हुए, निराश होकर पुनः अपनी पुरानी हालत में आ जाते हैं।

   यह बात हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री में दी गई शिक्षा की सार्थकता को प्रगट करती है। पौलुस ने लिखा: "और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ" (इफिसीयों ३:१७-१९)। पौलुस ने उन्हें समझाया कि वे प्रभु यीशु मसीह को अपने हृदयों में गहराई से बसा लें, क्योंकि जब मसीह उनके हृदयों में बसा रहेगा तो पाप और बुराई को बसने का स्थान ही नहीं रहेगा।

   जीवन में पाप से निवारण पाने का यही एकमात्र तरीका है - अपने मनों को बुराई तथा संसार के प्रेम की बजाए मसीह के प्रेम से भर लें। मसीह यीशु का प्रेम जितना अधिक हमारे अन्दर भरा होगा, बुराई तथा संसार कि बातों को भरने का उतना ही कम स्थान उपलब्ध होगा और पाप को हमारे जीवनों में स्थान मिलने ही नहीं पाएगा। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


मसीह यीशु को हृदय में स्थान देने से पहले स्वयं ही उसे शुद्ध और पवित्र करने के प्रयास में समय व्यर्थ ना करें; जब आप मसीह को अपने हृदय में बसा लेंगे तो वह ही उसे शुद्ध और पवित्र कर देगा।

और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे... - इफिसीयों ३:१७

बाइबल पाठ: इफिसीयों ३:१४-२१
Eph 3:14  मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं,
Eph 3:15  जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।
Eph 3:16  कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ।
Eph 3:17  और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर।
Eph 3:18  सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है।
Eph 3:19  और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Eph 3:20  अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है,
Eph 3:21  कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १-३ 
  • मत्ती १४:१-२१

रविवार, 20 जनवरी 2013

भय एवं प्रेम


   एक कर्मचारी ने दो अधिकारियों से संबंधित अपना विशलेषण मेरे साथ बांटा। एक अधिकारी से उसके आधीनस्थ कर्मचारी प्रेम तो करते हैं परन्तु उस का भय नहीं रखते और इस कारण उसके अधिकार का आदर नहीं करते और उसके निर्देशों को अन्देखा करते रहते हैं। दूसरे अधिकारी के प्रति उन कर्मचारियों के मन में प्रेम भी है और भय भी और उसके प्रति उनका व्यवहार और आज्ञाकारिता इस बात को दिखाती है।

   परमेश्वर भी चाहता है कि उसके लोग उसका भय भी मानें और उससे प्रेम भी रखें। आज का बाइबल पाठ परमेश्वर की इसी मनसा को दिखाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में व्यवस्थाविवरण १०:१२ में परमेश्वर ने कहा: "और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे" - परमेश्वर के लोग उसका भय भी मानें और उससे प्रेम भी रखें, अपने सारे मन और प्राण से।

   एक मसीही विश्वासी के लिए इसका अर्थ परमेश्वर से या उसके व्यकतित्व से आतंकित रहना नहीं वरन परमेश्वर का भय मानने से तात्पर्य है उसे संपूर्ण तन-मन से, पूरी श्रद्धा, आदर और सत्कार देना; उसके मार्गों पर चलना और उसकी आज्ञाकारिता में बने रहना। और परमेश्वर से प्रेम रखने का तात्पर्य है कि अपने सच्चे और समर्पित सारे मन और सामर्थ से उसकी सेवा करना, ना कि किसी मजबूरी अथवा कर्तव्य पालन के विचार के अन्तर्गत।

   जो निस्वार्थ और खरा प्रेम परमेश्वर ने पहले हो कर हम से किया, वही हमें उसके प्रति सच्चा प्रेम रखने और कृतज्ञ होने को प्रेरित करता है, ना कि उसके प्रति हमारी कोई पसन्द अथवा कुछ प्राप्ति की इच्छा : "हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया" (१ यूहन्ना ४:१९)। परमेश्वर के प्रति हमारा यही भय और प्रेम हमें उसके नियमों पर चलने और उसकी आज्ञाकारिता में रहने की भावना और सामर्थ देता है, और जिससे हम परमेश्वर द्वारा आशीशित रहते हैं। - एलबर्ट ली


यदि हम परमेश्वर का भय मानेंगे, उससे प्रेम करेंगे तो उसके आज्ञाकारी भी रहेंगे।

और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे, - व्यवस्थाविवरण १०:१२

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण १०:१२-१७
Deut 10:12  और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे,
Deut 10:13  और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो?
Deut 10:14  सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है;
Deut 10:15  तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है।
Deut 10:16  इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो।
Deut 10:17  क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४९-५० 
  • मत्ती १३:३१-५८

शनिवार, 19 जनवरी 2013

गिर जाने पर


   लोकप्रीय और प्रसिद्ध व्यक्तियों के द्वारा कोई बुराई करने के समाचार अब इतने आम हो गए हैं कि चाहे हम उन्हें पढ़-सुन कर निराश हों किंतु आश्चर्यचकित नहीं होते। किंतु जब किसी गणमान्य व्यक्ति या किसी मित्र के किसी अनैतिक कार्य अथवा असफलता का हमें पता चलता है तो हमारी प्रतिक्रीया कैसी होनी चाहिए; हमें क्या करना चाहिए?

   सबसे अच्छा तरीका है हम अपने आप को जांचें। लगभग एक शताब्दी पहले, प्रसिद्ध बाइबल शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने लंडन में अपने बाइबल कॉलेज के छात्रों को कहा था: "सदैव इस बात से सचेत रहो कि जहां कोई एक जन गिर गया है, वहीं कोई अन्य भी गिर सकता है, तुम भी! असुरक्षित सामर्थ कमज़ोर पड़ जाने का दोगुना कारण होती है।"

   चैम्बर्स के यह वचन दूसरों के पापों को देखकर स्वयं अपनी कमज़ोरियों के प्रति सचेत होने की परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई प्रेरित पौलुस की शिक्षा पर आधारित हैं। कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी पहली पत्री में इस्त्राएलियों के पूर्वजों की अनाज्ञाकारिता की समीक्षा करने के पश्चात (१ कुरिन्थियों १०:१-५) पौलुस ने अपने पाठकों को सचेत किया कि वे उन बातों से सीखें और उनके से पापों में पड़ने से बचे रहें (पद ६-११)। उसकी शिक्षा का केंद्र बिंदु बीते समय के पाप नहीं वर्तमान समय का अहंकार था जो पाप में पड़ने का कारण बन सकता था, इसलिए पौलुस ने लिखा, "इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े" (१ कुरिन्थियों १०:१२)।

   किसी दूसरे के पाप या कमज़ोरी पर दोषारोपण तथा निराशा में सिर हिलाना तो आम बात है, लेकिन सबसे अधिक लाभदायक वह सिर है जो इस स्वीकृति में हिलता है कि "हाँ! मुझ से भी यही पाप हो सकता है" और फिर परमेश्वर के सामने झुक कर हाथ प्रार्थना में बांध कर कहता है, "प्रभु उस पर दया कर और मुझे भी अपनी दया से इस पाप में पड़ने से बचाए रख।" - डेविड मैक्कैसलैंड


विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है। - नीतिवचन १६:१८

इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। - १ कुरिन्थियों १०:१२

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १०:१-१३
1Cor 10:1  हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बाप दादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए।
1Cor 10:2  और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपितिस्मा लिया।
1Cor 10:3  और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया।
1Cor 10:4  और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उन के साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था।
1Cor 10:5  परन्तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए।
1Cor 10:6 ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरी, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें।
1Cor 10:7  और न तुम मूरत पूजने वाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे।
1Cor 10:8  और न हम व्यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये ।
1Cor 10:9  और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए।
1Cor 10:10  और न हम कुड़कुड़ाएं, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए।
1Cor 10:11 परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।
1Cor 10:12  इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े।
1Cor 10:13  तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४६-४८ 
  • मत्ती १३:१-३०