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शनिवार, 19 दिसंबर 2015

मसीहा


   हैण्डल की प्रसिद्ध संगीत रचना "मसीहा" में से मुझे उसके पहले भाग का खण्ड "क्योंकि हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ है" बहुत अच्छा लगता है; विशेषकर उसका वह भाग जब उसे गाते हुए संगीत मण्डली एक स्वर में "क्योंकि हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ" वाक्याँश पर उच्च स्वर में पहुँचती है। हैण्डल की यह भव्य रचना परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु की आराधना में संगीत की ऊँचाईयों को छूती है, उस मसीहा के लिए जो हमारे लिए मानव रूप में अवतरित हुआ; और उसके यह दोनों वाक्यांश परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में यशायाह 9:6 से लिए गए हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का नया नियम खण्ड हमारे लिए और भी स्पष्ट करता है कि यह बालक कौन है। लूका के प्रथम अध्याय में हम पाते हैं कि स्वर्गदूत ने उस आने वाले मसीहा की पहिचान में चार बातें कहीं: वह मरियम से जन्मेगा, अर्थात पूर्णत्या मनुष्य (लूका 1:31); वह परमप्रधान का पुत्र होगा, अर्थात पूर्णत्या ईश्वरीय (लूका 1:32); वह दाऊद के वंश से होगा, अर्थात राजवंशी (लूका 1:32), और वह परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा, अर्थात सब बातों में पिता परमेश्वर के तुल्य (लूका 1:35)। मसीहा होने की सारी आवश्यकताएं उस भविष्यवाणी कर गए बालक के परमेश्वर का देहधारी पुत्र होने के स्वरूप में पूरी होती हैं।

   जब हम इस क्रिसमस के त्योहार के समय में उस बालक के जन्म की खुशियाँ मनाते हैं, तो हमारे सारे समारोह और आनन्द उसकी वास्तविकता को समझने और उसकी भरपूरी को जानने से भर जाएं। हमारे स्वर्गीय पिता ने हमें एक सिद्ध भेंट दी है, एक ऐसा पुत्र जिसकी परिपूर्णता हमारी सभी आवश्यकताओं के लिए काफी है। आईए हम मसीहा प्रभु यीशु की उपासना और आराधना में अपनी आवाज़ को बुलन्द करें। - बिल क्राउडर


बेतलेहम में परमेश्वर का प्रेम देहधारी हुआ।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: लूका 1:26-33
Luke 1:26 छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया। 
Luke 1:27 जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था। 
Luke 1:28 और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है। 
Luke 1:29 वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? 
Luke 1:30 स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। 
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • योना 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 10


शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

खाली


   हमारी पोती जूलिया ने अपना ग्रीष्म अवकाश यूगान्डा के बुसिया में स्थित एक अनाथालय में काम करके प्रशिक्षण लेने में व्यतीत किया। अपने कार्य के अन्तिम दिन वह हर एक बच्चे के पास उससे विदा लेने के लिए गई। एक छोटी लड़की सौम्या उसके जाने से बहुत उदास थी। सौम्या ने जूलिया कहा, "कल आप चली जाएंगी और फिर अगले सप्ताह बाकी आंटियाँ भी चली जाएंगी।" जूलिया ने सौम्या के साथ सहमति जताई कि उसे और बाकी सभी प्रशिक्षुकों को अब जाना होगा। सौम्या ने थोड़ी देर सोच कर कहा, "तब तो हम खाली हो जाएंगे; आप में से कोई भी हमारे साथ नहीं रह जाएगा।" जूलिया ने फिर उसके साथ सहमति जताई। छोटी सौम्या फिर थोड़ी देर सोचती रही, और बोली, "लेकिन परमेश्वर तो हमारे साथ ही रहेगा; हम खाली नहीं होंगे!"

   यदि हम अपने आप से ईमानदार हों तो हम स्वीकार करेंगे कि हम सबने इस "खाली होने" को अनुभव किया है, और भिन्न बातों से उसे भरने का प्रयत्न भी किया है। हमारे अन्दर का खालीपन मित्रता, प्रेम, वासना, धन, लोकप्रीयता, सफलता आदि बातों से कभी स्थाई रीति से या पूरी तरह से नहीं भरता। हमारे अन्दर एक भावना बनी रहती है, किसी ऐसी चीज़ के लिए जिसे परिभाषित करना चाहे संभव ना हो, परन्तु वह संसार की हर बात से अधिक मूल्यवान है और संसार की किसी बात से उसकी पूर्ति नहीं हो पाती। संसार से मिल सकने वाला सब कुछ पा लेने पर भी हमारे अन्दर उसका खालीपन बना ही रहता है। संसार से मिलने वाली हर उत्तम वस्तु के बाद भी हमारे अन्दर लालसा रहती है कि कुछ इससे भी बढ़कर, इससे भी अधिक, इससे भी अच्छा मिल सके। हमारी इस लालसा की एक परछाईं, एक धुंधला सा प्रतिरूप हमें संसार की बातों में दिखाई देता है और फिर वह ओझल हो जाता है। इस संदर्भ में प्रसिद्ध लेखक सी. एस. ल्यूईस ने कहा, "हमारी सर्वोत्तम उपलब्धि हमारी और पाने की चाहत ही रहती है।"

   हम मनुष्यों को परमेश्वर ने अपने स्वरूप में बनाया है (उत्पत्ति 1:27), और इसीलिए परमेश्वर से कम कुछ भी हमें स्थाई संतोष नहीं दे सकता। उस अविनाशी स्वर्गीय जीवते परमेश्वर के बिना, चाहे बाहर से हम नश्वर संसार की किसी भी बात से कितना भी भर जाएं, किंतु अन्दर से हम खाली ही रहेंगे। प्रभु यीशु ही उस सच्चे जीवते परमेश्वर का प्रतिरूप है (यूहन्ना 1:18), और जैसा कि उसने कहा है, वह हमें बहुतायत से जीवन देने आया है: "... मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं" (यूहन्ना 10:10)। परमेश्वर ही हमारी हर एक भूख-प्यास को मिटा सकता है, हमें संतुष्ट कर सकता है, और करता भी है (भजन 107:9)। - डेविड रोपर


परमेश्वर अपने से पृथक आनन्द तथा शान्ति हमें दे नहीं सकता, क्योंकि उसके बिना आनन्द तथा शान्ति है ही नहीं। - सी. एस. ल्यूईस

तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:27

बाइबल पाठ: भजन 107:1-9
Psalms 107:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 107:2 यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है, 
Psalms 107:3 और उन्हें देश देश से पूरब- पश्चिम, उत्तर और दक्खिन से इकट्ठा किया है।
Psalms 107:4 वे जंगल में मरूभूमि के मार्ग पर भटकते फिरे, और कोई बसा हुआ नगर न पाया; 
Psalms 107:5 भूख और प्यास के मारे, वे विकल हो गए। 
Psalms 107:6 तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उसने उन को सकेती से छुड़ाया; 
Psalms 107:7 और उन को ठीक मार्ग पर चलाया, ताकि वे बसने के लिये किसी नगर को जा पहुंचे। 
Psalms 107:8 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें! 
Psalms 107:9 क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • औब्द्याह 1
  • प्रकाशितवाक्य 9


गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

प्रोत्साहन तथा प्रेम


   मुझे अपनी एक मित्र से, जो एक विकासशील देश में एक अनाथालय में सेवा कर रही है, पत्र मिला; उसने लिखा: "कल जब मैं अपने दपतर में बैठी काम कर रही थी, मैंने फर्श पर ढेरों चींटियों को पंक्ति में चलते देखा, उस पंक्ति के साथ साथ जब मैंने अपनी नज़र आगे बढ़ाई तो मैं यह देखकर चकित रह गई कि हमारे दपतर की दीवार पर अन्दर और बाहर हज़ारों चींटियाँ भरी हुई थीं; वे दीवर से लगी हर चीज़ पर चल रही थीं। हमारे एक कर्मचारी ने उन्हें साफ करने का काम आरंभ किया और घण्टे भर के अन्दर ही सारी चींटियाँ चली गईं।"

   चींटियों की यह घटना बयान करने के बाद मेरी मित्र ने मुझसे पूछा, "और बताओ, तुम्हारा दिन और कार्य कैसा रहा?" कभी कभी ऐसा कुछ चाहिए होता है जो हमें उन लोगों की और उनकी आवश्यकताओं की याद दिलाए जो घर के आराम और सुविधाओं को छोड़कर कहीं अन्य स्थानों पर परमेश्वर के कार्य में लगे हैं, उसकी सेवा कर रहे हैं। परमेश्वर ने हम सभी मसीही विश्वासियों को अलग अलग सेवकाई के लिए बुलाया है, और कुछ की सेवकाई कठिनाईयों से भरी होती है। अब मेरी उस मित्र को ही लीजिए, किसे पसन्द आएगा कि वह ऐसे दफ्तर में काम करे जहाँ कभी भी चींटियाँ आकर सब जगह छा जाती हैं; लेकिन वह वहाँ सुविधाओं के लिए नहीं वरन परमेश्वर की बुलाहट को पूरा करने के लिए है।

   वह और उसके समान अनेक मसीही विश्वासियों के मन प्रभु यीशु के प्रेम से भरे और प्रोत्साहित होकर उसके कार्य में लगे हैं, और उनके लिए जीवन के लिए "आवश्यक" आराम और सुविधाओं को छोड़कर प्रभु द्वारा निर्धारित कार्य को पूरा करना, प्रभु यीशु के प्रति उनके प्रेम को प्रदर्शित करना है; उस प्रभु के प्रति जिसने अपने प्रेम में होकर समस्त मानव जाति को उसके पापों से छुड़ाने के लिए अपने प्राण क्रूस पर बलिदान कर दिए।

   प्रभु यीशु के लिए सेवकाई में लगे लोगों को हमारे सहयोग और सहायता की आवश्यकता है, जैसे प्रेरित पौलुस को फिलिप्पी में अपने मित्रों से सहायता की आवश्यकता थी - सहभागिता के लिए (फिलिप्पियों 1:5), आर्थिक आवश्यकताओं के लिए (फिलिप्पियों 4:16) और देखभाल के लिए (फिलिप्पियों 4:18)। जब हम अपने मित्रों को उनकी मसीही सेवकाई में सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं तो हम अपने प्रभु के प्रति अपने प्रेम को प्रकट करते हैं। इस प्रोत्साहन और प्रेम प्रदर्शन को बनाए रखिए। - डेव ब्रैनन


जीवन की महिमा प्रेम पाने की बजाए प्रेम बाँटने, लोगों से लेने की बजाए उन्हें देने, और सेवा करवाने की बजाए सेवा करने में है।

मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं। इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो। - फिलिप्पियों 1:3, 5

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-18
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहायता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 7-9
  • प्रकाशितवाक्य 8


बुधवार, 16 दिसंबर 2015

उल्टा जीवन


   शिकागो नदी असामान्य है क्योंकि वह उल्टी बहती है। एक शताब्दी से भी पूर्व इंजीनियर्स को उसके बहाव को पलटना पड़ा था। ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि उसके किनारे के शहरों में रहने वाले लोग नदी को कूड़े-दान के समान प्रयोग कर रहे थे; प्रतिदिन घरों की गंदगी तथा कारखानों का कचरा उस नदी में बहाए जा रहे थे, जो फिर मिशिगन झील में पहुँचते थे जिसमें शिकागो नदी समाप्त होती थी। उसी झील से शिकागो शहर के लिए पीने का पानी लिया जाता था, इसलिए उस प्रदूषित पानी को पीने से हज़ारों लोग बीमार पड़ रहे थे, मर रहे थे। इसलिए अधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि नदी को झील में समाप्त होने से रोका जाए और इसीलिए उसका प्रवाह पलट दिया गया।

   जब हम प्रभु यीशु के सांसारिक जीवन को देखते हैं तो जैसा होना चाहिए था, वह उससे उलट प्रतीत होता है। प्रभु महिमा का राजा और परमेश्वर था, लेकिन उसने एक गरीब असहाय शिशु बनकर संसार में प्रवेश किया, संसार के लोगों की निन्दा और तिरस्कार सहा। वह निष्पाप और निष्कलंक था, लेकिन फिर भी एक घृणित अपराधी के समान उसने क्रूस की मृत्यु स्वीकार करी। लेकिन इस सब में प्रभु यीशु ने परमेश्वर पिता की इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत किया, परमेश्वर की आज्ञाकारिता में रहा (यूहन्ना 6:38)।

   मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण हम मसीही विश्वासियों को अपने प्रभु के समान व्यवहार और कार्य रखने हैं, चाहे यह संसार की प्रथा के विपरीत ही क्यों ना लगे। हमें अपने शत्रुओं को आशीष देनी चाहिए (रोमियों 12:14), सांसारिक धन-संपदा से अधिक भक्ति को महत्व देना चाहिए (1तिमुथियुस 6:6-9), और कठिन परिस्थितियों में भी आनन्दित रहना चाहिए (याकूब 1:2) चाहे ऐसा करना सांसारिक बुद्धि के विरुद्ध क्यों ना दिखाई दे। प्रभु यीशु ने कहा, "क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा" (मत्ती 16:25)।

   चिंता की कोई बात नहीं यदि मसीही विश्वास का जीवन जीना कई बार उल्टा जीवन जीने जैसा लगे। आप परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी और विश्वासयोग्य बने रहिए और परमेश्वर आपको जीवन जीने तथा जीवन में आगे बढ़ते रहने का बल और बुद्धि देता रहेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के व्यवहार और कार्यों को अपने जीवनों में दिखाने से हम अपने साथ उसकी उपस्थिति होने की गवाही देते हैं।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। - मत्ती 5:44-45

बाइबल पाठ: मत्ती16:21-28
Matthew 16:21 उस समय से यीशु अपने चेलों को बताने लगा, कि मुझे अवश्य है, कि यरूशलेम को जाऊं, और पुरनियों और महायाजकों और शास्‍त्रियों के हाथ से बहुत दुख उठाऊं; और मार डाला जाऊं; और तीसरे दिन जी उठूं। 
Matthew 16:22 इस पर पतरस उसे अलग ले जा कर झिड़कने लगा कि हे प्रभु, परमेश्वर न करे; तुझ पर ऐसा कभी न होगा। 
Matthew 16:23 उसने फिरकर पतरस से कहा, हे शैतान, मेरे साम्हने से दूर हो: तू मेरे लिये ठोकर का कारण है; क्योंकि तू परमेश्वर की बातें नहीं, पर मनुष्यों की बातों पर मन लगाता है। 
Matthew 16:24 तब यीशु ने अपने चेलों से कहा; यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले। 
Matthew 16:25 क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा। 
Matthew 16:26 यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा? 
Matthew 16:27 मनुष्य का पुत्र अपने स्‍वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा। 
Matthew 16:28 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कितने ऐसे हैं; कि जब तक मनुष्य के पुत्र को उसके राज्य में आते हुए न देख लेंगे, तब तक मृत्यु का स्‍वाद कभी न चखेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 4-6
  • प्रकाशितवाक्य 7



मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

उत्सव


   हमें ऐसा लगा जैसे कि हमारा क्रिसमस रद्द कर दिया गया है। कई वर्षों से हमारी पारिवारिक परंपरा रही है कि हम क्रिसमस पर अपने परिवार जनों से मिलने जाते हैं और उन्हीं के साथ वहाँ मिसूरी में क्रिसमस मनाते हैं; लेकिन अब की बार बर्फ के कारण हमें बीच रास्ते में मिनिसोटा से ही वापस अपने घर मिशिगन लौटना पड़ा, जिससे हम बहुत निराश थे।

   किंतु यदि हम मिसूरी चले जाते तो इतवार को हमारे पादरी द्वारा क्रिसमस की आशाओं पर दिया गया प्रवचन नहीं सुन पाते। उनके प्रवचन की एक बात ने विशेष रीति से मेरा ध्यान आकर्षित किया जब उन्होंने कहा, "यदि क्रिसमस से हमारी अपेक्षाएँ केवल उपहारों और परिवार जनों के साथ समय बिताने की ही हैं, तो हमारी अपेक्षाएँ बहुत छोटी हैं। ये बातें आनन्द देती हैं और इनके लिए हमें धन्यवादी होना चाहिए, लेकिन क्रिसमस प्रभु यीशु के जन्म का ही नहीं वरन उनमें होकर मिलने वाले छुटकारे का भी उत्सव है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के जन्म का उत्सव मनाने वाले लोगों में हम दो लोगों, शमौन और हन्नाह को पाते हैं जिन्होंने प्रभु यीशु के जन्म के साथ उसके द्वारा मिलने वाले उद्धार का भी आनन्द मनाया, जब यूसुफ और मरियम प्रभु यीशु को मन्दिर में लेकर आए (लूका 2:25-38)। शमौन से परमेश्वर के आत्मा ने वायदा किया था कि वह मसीहा को देखे बिना नहीं मरेगा, इसलिए उसने प्रभु यीशु को देखकर कहा, "हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है" (लूका 2:29-30)। जब हन्नाह ने, जो एक विधवा थी और मन्दिर में रहकर परमेश्वर की सेवा किया करती थी, प्रभु यीशु को देखा तो वह "...प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी" (लूका 2:38)।

   संभव है कि किसी बात या परिस्थिति के कारण हमें इस त्यौहार के समय में निराशाओं और दुखों का सामना करना पड़े, लेकिन प्रभु यीशु और उसमें सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार हमें सदा ही उत्सव मनाने का कारण देते हैं। - ऐनी सेटास


यीशु सदा ही उत्सव मनाते रहने का कारण है।

और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। - लूका 2:33

बाइबल पाठ: लूका 2:36-38
Luke 2:36 और अशेर के गोत्र में से हन्नाह नाम फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। 
Luke 2:37 वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर कर के रात-दिन उपासना किया करती थी। 
Luke 2:38 और वह उस घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 6



सोमवार, 14 दिसंबर 2015

नया युग


   जब 16वीं शताब्दी में मैटियो रिक्की चीन गए तो उन लोगों को जिन्होंने इसके बारे में कभी नहीं सुना था, मसीह की बात बताने के लिए अपने साथ मसीही कहानियों के चित्र भी ले गए। मैटियो द्वारा दिखाए जाने वाले उन चित्रों में चीन के लोगों ने मरियम की गोद में शिशु यीशु के चित्र को तो सहर्ष स्वीकार कर लिया, लेकिन जब उन्होंने प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के चित्र दिखाकर उन लोगों को समझाना चाहा कि परमेश्वर का पुत्र बलिदान होने के लिए आया था तो लोगों की प्रतिक्रीया भय और घृणा की थी क्योंकि उनके लिए परमेश्वर का क्रूसित होना स्वीकार करना बहुत कठिन था।

   जब मैं अपने क्रिसमस कार्ड्स को देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि आज हम भी चीन के उन निवासियों के समान ही कर रहे हैं। हम अपने उत्सव और रिवाज़ों में यह ध्यान नहीं रखते कि जो कहानी बेतलेहम से आरंभ हुई थी वह कलवरी के क्रूस से होकर ही संसार में आगे बढ़ी और कार्यकारी हुई थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका रचित सुसमाचार में दी गई क्रिसमस की कहानी के वृतान्त में केवल एक व्यक्ति - बुज़ुर्ग शमौन ही ऐसा था जिसने उस नए कार्य को समझा जिसे परमेश्वर ने प्रभु यीशु के जन्म द्वारा कार्यान्वित करा था। शमौन ने मरियम से कहा, "...देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं --  वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा..." (लूका 2:34-35)।

   शमौन ने पहिचाना कि चाहे प्रत्यक्ष रीति से ऐसा कोई आभास ना होता हो कि कुछ भी बदल गया है - हेरोदेस अभी भी राजा था और इस्त्राएल अभी भी रोमी सैनिकों के अधिकार में था, लेकिन अप्रत्यक्ष रीति से सब कुछ बदल गया था, परमेश्वर द्वारा जिसका वायदा दिया गया था वह मसीहा संसार को पापों से छुटकारा देने के लिए आ गया था; एक नया युग आरंभ हो गया था। - फिलिप यैन्सी


क्रूस की गाथा के बिना मसीह के जन्म की कहानी अधूरी है।

और हर प्राणी परमेश्वर के उद्धार को देखेगा। - लूका 3:6

बाइबल पाठ: लूका 2:25-35
Luke 2:25 और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्‍ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था। 
Luke 2:26 और पवित्र आत्मा से उसको चितावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख ना लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा। 
Luke 2:27 और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें। 
Luke 2:28 तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद कर के कहा, 
Luke 2:29 हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। 
Luke 2:30 क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है। 
Luke 2:31 जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। 
Luke 2:32 कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो। 
Luke 2:33 और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। 
Luke 2:34 तब शमौन ने उन को आशीष देकर, उस की माता मरियम से कहा; देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं-- 
Luke 2:35 वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा-- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • योएल 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 5



रविवार, 13 दिसंबर 2015

चिरस्थायी ईनाम


   ओलंपिक खेलों में सबसे अधिक, 18 स्वर्ण पदक पाने का कीर्तिमान युक्रेन की जिमनैस्ट, लरीसा लतिनीना के पास था; उसने उन पदकों को 1956, 1960 और 1964 के ओलंपिक खेलों में जीता था। 48 वर्ष तक बने रहने वाला उनका यह कीर्तिमान तब टूटा जब 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों में माईकल फेल्प्स ने अपना 19वें पदक 4 x 200 मीटर की तैराकी प्रतियोगिता में प्राप्त किया। इसके बारे में International Gymnast नामक पत्रिका के प्रकाशक ने कहा, लतिनीना इतिहास में कहीं खो गई थी; जब सोवियत यूनियन का विभाजन हुआ, हम उनके बारे में भूल गए।

   प्रेरित पौलुस हमें याद दिलाता है कि कभी कभी मेहनत से किया गया कार्य भी भुला दिया जाता है। खिलाड़ी अपने शरीरों की कड़ी मेहनत और अनुशासन के द्वारा नाशमान ईनामों को पाने के प्रयास करते हैं (1कुरिन्थियों 9:25)। लेकिन केवल ईनाम या पदक ही नाशमान नहीं होते, समय के साथ उन उपलब्धियों की यादें भी धूमिल पड़ती जाती हैं और समाप्त हो जाती हैं। यदि खिलाड़ी इस पृथ्वी पर नाशमान और भुला दिए जाने वाले ईनाम पाने के लिए इतनी कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ प्रयासरत रह सकते हैं तो हम मसीही विश्वासियों को अपने अविनाशी मुकटों को पाने के लिए कितनी अधिक मेहनत करने और अनुशासन रखने वाला होना चाहिए (1तिमुथियुस 4:8)?

   खिलाड़ियों के दृढ़ निश्चय और बलिदान का प्रतिफल उन्हें पदकों, ट्रोफियों और पैसे के रूप में मिलता है। लेकिन हमारा परमेश्वर पिता अपने बच्चों के अनुशासन का प्रतिफल इससे भी कहीं अधिक बढ़कर देगा (लूका 19:17)।

   जिस प्रभु यीशु ने हमसे हमारी पापों की दशा में ही प्रेम किया और हमारे लिए अपने आप को बलिदान कर दिया, उसके लिए हमारे प्रेम और सेवकाई की सेवा को परमेश्वर पिता कभी नहीं भुलाएगा, वह हमें चिरस्थायी ईनाम देगा। - सी. पी. हिया


परमेश्वर के राज्य के लिए किया गया बलिदान सदा पुरस्कृत होता है।

क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है। - 1तिमुथियुस 4:8

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 9:24-27
1 Corinthians 9:24 क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। 
1 Corinthians 9:25 और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं। 
1 Corinthians 9:26 इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है। 
1 Corinthians 9:27 परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार कर के, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 12-14
  • प्रकाशितवाक्य 4