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गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

प्रतीक्षा और संगति


   दिन प्रति दिन, कई वर्षों तक हैरी अपने दामाद जौन के लिए, जो परमेश्वर से दूर चला गया था, प्रार्थनाएं करता रहा; फिर हैरी का देहांत हो गया। इसके कुछ महीने पश्चात जौन परमेश्वर के पास वापस लौट आया। जब जौन की सास मार्शा ने उसे बताया कि हैरी अपने जीवन के अन्तिम दिन तक उसके लिए प्रार्थना करता रहा था, तो जौन ने उत्तर दिया, "मैंने बहुत देर कर दी।" लेकिन मार्शा ने सहर्ष उससे कहा, "लेकिन प्रभु हैरी की उन प्रार्थानाओं का उत्तर आज भी दे रहा है!"

   हैरी की यह कहानी हमारे लिए, जो प्रार्थना करते और उनके उत्तरों की प्रतीक्षा करते हैं, एक प्रोत्साहन की बात है। परमेश्वर के वचन बाइबल की भी हमारे लिए यही शिक्षा है: "प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो" (रोमियों 12:11-12)।

   भजन 130 के लेखक को भी प्रार्थना में प्रतीक्षा करने का अनुभव था। उसने कहा: "मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है" (पद 5); लेखक ने परमेश्वर में आशा पाई क्योंकि वह जानता था कि, "...क्योंकि यहोवा करूणा करने वाला और पूरा छुटकारा देने वाला है" (पद 7)।

   लेखक सैमुएल एनिया ने परमेश्वर के समय-काल के विषय में लिखते हुए कहा: "परमेश्वर हमारे समय पर निर्भर नहीं है। हमारा समय तो क्रमिक और एक आयामी है किंतु परमेश्वर....समय की सीमाओं से परे है। वह अपने समयानुसार कार्य करता है। हमारी प्रार्थनाएं....परमेश्वर को कार्य करने पर विवश नहीं करतीं....वरन वे हमें उसके साथ संगति में ले आती हैं।"

   एक मसीही विश्वासी होने के नाते हमारे लिए यह कैसा महान सौभाग्य है कि हम परमेश्वर से उसके समयानुसार उत्तर पाएं और उत्तर की प्रतीक्षा करते हुए उसके साथ संगति भी करें। - एनी सेटास


परमेश्वर हमारी प्रार्थना का उत्तर देने में विलंब कर सकता है, 
परन्तु वह हमारे विश्वास को कभी निराश नहीं करेगा।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: भजन 130
Psalms 130:1 हे यहोवा, मैं ने गहिरे स्थानों में से तुझ को पुकारा है! 
Psalms 130:2 हे प्रभु, मेरी सुन! तेरे कान मेरे गिड़गिड़ाने की ओर ध्यान से लगे रहें! 
Psalms 130:3 हे याह, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु कौन खड़ा रह सकेगा? 
Psalms 130:4 परन्तु तू क्षमा करने वाला है? जिस से तेरा भय माना जाए। 
Psalms 130:5 मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है; 
Psalms 130:6 पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, हां, पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, उस से भी अधिक मैं यहोवा को अपने प्राणों से चाहता हूं।
Psalms 130:7 इस्राएल यहोवा पर आशा लगाए रहे! क्योंकि यहोवा करूणा करने वाला और पूरा छुटकारा देने वाला है। 
Psalms 130:8 इस्राएल को उसके सारे अधर्म के कामों से वही छुटकारा देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 12-13
  • लूका 16



बुधवार, 20 अप्रैल 2016

सहायक


   16 वर्ष की आयु तक आते-आते मॉरिस फ्रैंक (1908-1980) की दोनों आंखों की दृष्टि जाती रही थी। इसके कई वर्ष पश्चात वह स्विटज़रलैंड गया, जहाँ उसकी मुलाकात एक विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कुत्ते बड्डी से हुई, जिससे फ्रैंक की रुचि Seeing Eye Guide - Dog School में हुई। बड्डी की सहायता से फ्रैंक के लिए व्यस्त मार्गों और चौराहों पर चलना और उन्हें पार करना सहज हो गया। बड्डी की सहायता से फ्रैंक को अपने आस-पास के संसार में एक नया प्रवेश और सुगमता मिल गई। इस सहायक से मिली अपनी इस स्वतंत्रता का वर्णन करते हुए फ्रैंक ने कहा, "यह अद्भुत था: केवल बड्डी और मेरे तथा उसके मध्य एक चमड़े का पट्टे ने मुझे जीवन से जोड़ दिया।"

   परमेश्वर का पवित्र आत्मा भी मसीह यीशु में मिलने वाले आत्मिक जीवन में हमें एक सुगमता और सहजता देता है। जब हम प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करते हैं, उससे अपने पापों की क्षमा मांग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर देते हैं, तो परमेश्वर हमारे जीवन से पाप के दाग़ धो कर साफ कर देता है और अपने पवित्र आत्मा के द्वारा हमें एक नूतन सृष्टि बना देता है (तीतुस 3:5-6)। एक बार हम मसीह यीशु के हो जाते हैं तो परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारा सहायक हो जाता है जिससे हम परमेश्वर के प्रेम को अनुभव कर सकें (रोमियों 5:5), परमेश्वर के वचन बाइबल को समझ सकें (यूहन्ना 14:26), प्रार्थना कर सकें (रोमियों 8:26) और आशा से परिपूर्ण रहें (रोमियों 15:13)।

   आज जब आप परमेश्वर के साथ अपने जीवन के बारे में विचार करें तो स्मरण रखें कि मसीही विश्वास के जीवन में परमेश्वर पवित्र आत्मा आपका सदैव उपलब्ध सहायक और मार्गदर्शक है; केवल उसी की सहायता से आप मसीही विश्वास का जीवन जी सकते हैं (रोमियों 8:14)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर पवित्र आत्मा आत्मिक ज्ञान और उन्नति में हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता है।

इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। - रोमियों 8:14

बाइबल पाठ: तीतुस 3:1-11
Titus 3:1 लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उन की आज्ञा मानें, और हर एक अच्‍छे काम के लिये तैयार रहें। 
Titus 3:2 किसी को बदनाम न करें; झगडालू न हों: पर कोमल स्‍वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें। 
Titus 3:3 क्योंकि हम भी पहिले, निर्बुद्धि, और आज्ञा न मानने वाले, और भ्रम में पड़े हुए, और रंग रंग के अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्‍व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन निर्वाह करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे। 
Titus 3:4 पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की कृपा, और मनुष्यों पर उसकी प्रीति प्रगट हुई। 
Titus 3:5 तो उसने हमारा उद्धार किया: और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नए जन्म के स्‍नान, और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। 
Titus 3:6 जिसे उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उंडेला। 
Titus 3:7 जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें। 
Titus 3:8 यह बात सच है, और मैं चाहता हूं, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्यों के लाभ की हैं। 
Titus 3:9 पर मूर्खता के विवादों, और वंशावलियों, और बैर विरोध, और उन झगड़ों से, जो व्यवस्था के विषय में हों बचा रह; क्योंकि वे निष्‍फल और व्यर्थ हैं। 
Titus 3:10 किसी पाखंडी को एक दो बार समझा बुझाकर उस से अलग रह। 
Titus 3:11 यह जानकर कि ऐसा मनुष्य भटक गया है, और अपने आप को दोषी ठहराकर पाप करता रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 9-11
  • लूका 15:11-32


मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

व्यवस्थित


   जिस भी बात पर मैं ध्यान करती हूँ, वही मेरी इस धारणा की पुष्टि करती है कि व्यवस्थित होना स्वाभाविक नहीं है। उदाहरण के लिए चाहे मेरे कार्यस्थल को ही ले लीजिए, मैं चकित हूँ कि कितनी शीघ्रता से, बिना किसी प्रयास के भी, मेरा दफतर अव्यवस्थित हो जाता है; लेकिन उसे पुनः व्यवस्थित करने के लिए प्रयास और समय लगता है। व्यवस्था लाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ता है; व्यवस्था स्वतः नहीं आ जाती।

   लेकिन इस बात को लेकर मुझे चकित नहीं होना चाहिए; आखिरकर परमेश्वर का वचन बाइबल भी तो बारंबार यही बात दिखाती है; और यह भी कि अव्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए परमेश्वर को प्रयास और हस्तक्षेप करना ही पड़ता है। इसका एक प्रमुख उदाहरण हमें परमेश्वर द्वारा इस्त्राएल को मिस्त्र की ग़ुलाम प्रजा से एक स्वाधीन राष्ट्र के रूप में स्थापित किए जाने के समय की घटनाओं में देखते हैं (निर्गमन 7-14 अध्याय)। जब परमेश्वर ने मिस्त्र के राजा फिरौन के पास इस्त्राएल को मुक्त कर देने का सन्देश मूसा और हारून के द्वारा भेजा तो फिरौन ने इसका विरोध किया। मिस्त्र की अर्थव्यवस्था और समृद्धि इस्त्राएली गुलामों द्वारा किए जा रहे कठिन श्रम पर निर्भर थी, इसलिए फिरौन उन्हें जाने नहीं देना चाहता था। फिरौन की मनशा बदलने के लिए परमेश्वर ने दस विपत्तियाँ मिस्त्र पर भेजीं। फिरौन के जादूगर पहली दो विपत्तियों की नकल तो करने पाए किंतु शेष आठ की नकल कर पाने में वे असमर्थ रहे; लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उन दस विपत्तियों में से किसी एक को भी वे जादूगर पलट नहीं सके। वे दो बार अव्यवस्था तो लाने पाए किंतु पुनः व्यवस्था बहाल करना उनके बस की बात नहीं थी; हर बार केवल परमेश्वर ने ही उन विपत्तियों को पलटा और व्यवस्था को बहाल किया। केवल परमेश्वर ही अव्यवस्था को व्यवस्थित कर सकता है।

   एक बात और है, प्रयास करके हम अपने निवास या कार्य स्थान को व्यवस्थित तो कर सकते हैं, उसे कुछ समय तक व्यवस्थित बनाए भी रख सकते हैं; लेकिन अपने आत्मिक और भावनात्मक जीवन की अव्यवस्था को हम कभी स्वयं व्यवस्थित नहीं कर सकते या रख सकते। यह कार्य भी केवल परमेश्वर ही कर सकता है। जब हम परमेश्वर की इच्छानुसार भले कार्यों में लगे रहते हैं, आज्ञाकारिता का जीवन व्यतीत करते हैं, किसी से बुरा नहीं बोलते, नम्र और शांतिप्रीय होकर रहते हैं, सबके साथ कोमलता दिखाते हैं (तीतुस 3:1-2) इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि परमेश्वर ने हमारे जीवनों की अव्यवस्था को व्यवस्थित कर दिया है। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


जब हम अपनी समस्याएं परमेश्वर के हाथों में डाल देते हैं तो वह भी अपनी शांति हमारे हृदयों में डाल देता है।

लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उन की आज्ञा मानें, और हर एक अच्‍छे काम के लिये तैयार रहें। किसी को बदनाम न करें; झगडालू न हों: पर कोमल स्‍वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें। - तीतुस 3:1-2

बाइबल पाठ: निर्गमन 8:1-15
Exodus 8:1 और तब यहोवा ने फिर मूसा से कहा, फिरौन के पास जा कर कह, यहोवा तुझ से इस प्रकार कहता है, कि मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे जिस से वे मेरी उपासना करें। 
Exodus 8:2 और यदि उन्हें जाने न देगा तो सुन, मैं मेंढ़क भेज कर तेरे सारे देश को हानि पहुंचाने वाला हूं। 
Exodus 8:3 और नील नदी मेंढ़कों से भर जाएगी, और वे तेरे भवन में, और तेरे बिछौने पर, और तेरे कर्मचारियों के घरों में, और तेरी प्रजा पर, वरन तेरे तन्दूरों और कठौतियों में भी चढ़ जाएंगे। 
Exodus 8:4 और तुझ पर, और तेरी प्रजा, और तेरे कर्मचारियों, सभों पर मेंढ़क चढ़ जाएंगे। 
Exodus 8:5 फिर यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी, कि हारून से कह दे, कि नदियों, नहरों, और झीलों के ऊपर लाठी के साथ अपना हाथ बढ़ाकर मेंढकों को मिस्र देश पर चढ़ा ले आए। 
Exodus 8:6 तब हारून ने मिस्र के जलाशयों के ऊपर अपना हाथ बढ़ाया; और मेंढ़कों ने मिस्र देश पर चढ़कर उसे छा लिया। 
Exodus 8:7 और जादूगर भी अपने तंत्र-मंत्रों से उसी प्रकार मिस्र देश पर मेंढक चढ़ा ले आए। 
Exodus 8:8 तब फिरौन ने मूसा और हारून को बुलवाकर कहा, यहोवा से बिनती करो कि वह मेंढ़कों को मुझ से और मेरी प्रजा से दूर करे; और मैं इस्राएली लोगों को जाने दूंगा जिस से वे यहोवा के लिये बलिदान करें। 
Exodus 8:9 तब मूसा ने फिरौन से कहा, इतनी बात पर तो मुझ पर तेरा घमंड रहे, अब मैं तेरे, और तेरे कर्मचारियों, और प्रजा के निमित्त कब बिनती करूं, कि यहोवा तेरे पास से और तेरे घरों में से मेंढकों को दूर करे, और वे केवल नील नदी में पाए जाएं? 
Exodus 8:10 उसने कहा, कल। उसने कहा, तेरे वचन के अनुसार होगा, जिस से तुझे यह ज्ञात हो जाए कि हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कोई दूसरा नहीं है। 
Exodus 8:11 और मेंढक तेरे पास से, और तेरे घरों में से, और तेरे कर्मचारियों और प्रजा के पास से दूर हो कर केवल नील नदी में रहेंगे। 
Exodus 8:12 तब मूसा और हारून फिरौन के पास से निकल गए; और मूसा ने उन मेंढकों के विषय यहोवा की दोहाई दी जो उसने फिरौन पर भेजे थे। 
Exodus 8:13 और यहोवा ने मूसा के कहने के अनुसार किया; और मेंढक घरों, आंगनों, और खेतों में मर गए। 
Exodus 8:14 और लोगों ने इकट्ठे कर के उनके ढेर लगा दिए, और सारा देश दुर्गन्ध से भर गया। 
Exodus 8:15 परन्तु जब फिरोन ने देखा कि अब आराम मिला है तक यहोवा के कहने के अनुसार उसने फिर अपने मन को कठोर किया, और उनकी न सुनी।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 6-8
  • लूका 15:1-10


सोमवार, 18 अप्रैल 2016

केंद्र


   हाल ही मुझे "कोपरनिकन पल" का अनुभव हुआ; अर्थात मुझे यह एहसास हुआ कि मैं सृष्टि का केंद्र नहीं हूँ; संसार मेरे चारों ओर नहीं चलता; और ना ही संसार मेरी गति, मेरी दिशा, मेरी इच्छाओं और मेरी योजनाओं के अनुरूप अथवा अनुसार चलता और कार्य करता है। चाहे हम इसे स्वीकार करना ना भी चाहें तो भी सत्य यही है कि जीवन केवल हमारी ही लालसाओं और पसन्द के अनुसार संचालित तथा कार्यकारी नहीं होता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 33 में हम पाते हैं कि सारी सृष्टि का केंद्र और संचालन केवल परमेश्वर के पास है; उसी ने समुद्र की सीमाएं बांधी हैं और वही सागर के भण्डारों को तय करता है। सृष्टि की हर बात, हर भाग उसके नियमों के अनुसार चलते और कार्य करते हैं। जाति-जाति के लोग भी परमेश्वर द्वारा ही संचालित और नियंत्रित होते हैं। किसी की कोई भी युक्ति या योजना परमेश्वर की युक्ति या योजना के सामने टिक नहीं सकती। अन्ततः परमेश्वर ही की हर योजना सर्वोपरी तथा कार्यन्वित होगी और उसके सभी उद्देश्य सदा ही अटल बने रहेंगे।

   परमेश्वर संसार के सभी मनुष्यों पर सर्वदा नज़र बनाए रखता है। हमारे जीवन स्वयं हम पर नहीं वरन परमेश्वर पर केंद्रित रहने के लिए रचे गए हैं। उसने ही हमें और हमारे हृदयों को बनाया है, और हमारे मन की हर बात को वह भली-भांति जानता-समझता है। हमारे जीवनों में हस्तक्षेप करने की सामर्थ और अधिकार उसके पास है और जब भी परिस्थितियाँ हमारे बूते से बाहर होने लगती हैं वह हमें उन से बाहर निकालना जानता है।

   हमें उस महान और सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कितना धन्यवादी और आभारी होना चाहिए जो सारी सृष्टि का केंद्र है, परन्तु फिर भी हमें व्यक्तिगत रीति से जानता है, हमारे साथ संबंध बनाए रखता है और हमारे जीवन की हर बात को नियंत्रित तथा संचालित करता है, हमें हर बात और हर परिस्थिति में सामर्थ तथा सहायता प्रदान करता है। - पो फैंग चिया


जब हम हमारे चारों ओर की संसार की बातों के लिए अपने आप को मरा हुआ मान लेते हैं, 
तब हम ऊपर रहने वाले परमेश्वार के लिए जीना आरंभ कर देते हैं।

तो प्रभु के भक्तों को परीक्षा में से निकाल लेना और अधर्मियों को न्याय के दिन तक दण्‍ड की दशा में रखना भी जानता है। - 2 पतरस 2:9

बाइबल पाठ: भजन 33:6-19
Psalms 33:6 आकाशमण्डल यहोवा के वचन से, और उसके सारे गण उसके मुंह ही श्वास से बने। 
Psalms 33:7 वह समुद्र का जल ढेर की नाईं इकट्ठा करता; वह गहिरे सागर को अपने भण्डार में रखता है।
Psalms 33:8 सारी पृथ्वी के लोग यहोवा से डरें, जगत के सब निवासी उसका भय मानें! 
Psalms 33:9 क्योंकि जब उसने कहा, तब हो गया; जब उसने आज्ञा दी, तब वास्तव में वैसा ही हो गया।
Psalms 33:10 यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है। 
Psalms 33:11 यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी। 
Psalms 33:12 क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो! 
Psalms 33:13 यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है; 
Psalms 33:14 अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है, 
Psalms 33:15 वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है। 
Psalms 33:16 कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता। 
Psalms 33:17 बच निकलने के लिये घोड़ा व्यर्थ है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है।
Psalms 33:18 देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है, 
Psalms 33:19 कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 3-5
  • लूका 14:25-35


रविवार, 17 अप्रैल 2016

योग्य सहायक


   अमेरिका के न्यूटाऊन, कनेक्टिकट के एक प्राथमिक स्कूल में हुए गोली-काँड के बाद बहुत से लोगों के अन्दर किसी ना किसी रीति से उस दुर्घटना से प्रभावित लोगों की सहायाता करने की भावना जागृत हुई। इसी भावना के अन्तर्गत, कुछ ने घायलों के इलाज के लिए रक्त-दान किया, कुछ ने अपने रेस्टोरॉन्ट से राहत, बचाव और बहाली का कार्य करने वाले लोगों के लिए मुफ्त भोजन तथा कॉफी परोसी। कुछ ने सांत्वना और प्रोत्साहन के पत्र लिखे तो कुछ ने केवल प्रभावित लोगों को गले लगाकर उन्हें अकेले या निःसहाय नहीं होने का एहसास करवाया। कुछ ने बच्चों के लिए खिलोने और पैसे दान किए, तो कुछ ने निराश लोगों को संभालने और आशा बंधाने के लिए सलाहकारों का कार्य किया। अपने संसाधनों, व्यक्तित्व, योग्यता आदि के अनुसार जिससे जो बन पड़ा उसने किया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की एक घटना दिखाती है कि कैसे बाइबल के एक पात्र यूसुफ ने उसे अनुचित रीति से बन्दी बनाकर रखने वाले लोगों को सात वर्ष के भीषण अकाल से सकुशल निकालने में अपनी योग्यताओं द्वारा एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई (उत्पत्ति 41:53-54)। परमेश्वर ने मिस्त्र के राजा फिरौन को स्वपन द्वारा चिताया कि सात वर्ष की भरपूरी और फिर सात वर्ष का भयानक अकाल आने वाला है, किंतु फिरौन अपने स्वपनों को समझ ना सका और परमेश्वर ने यूसुफ को उसे यह समझाने के लिए उपयोग किया। यूसुफ की यह योग्यता और परमेश्वर का साथ देखकर फिरौन ने उसे ही इस आने वाली विपदा से सकुशल निकल पाने की योजना बनाने और उसे कार्यान्वित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी। यूसुफ ने परमेश्वर से मिली प्रतिभा और बुद्धिमता के द्वारा यह सभी तैयारी करी (उत्पत्ति 41:39)। फिर जब अकाल का समय आया और लोग त्रस्त होने लगे तब यूसुफ ने अन्न के भण्डार उनके लिए खोल दिए (उत्पत्ति 41:56) और वह अपने परिवार को भी अकाल से बचाने पाया (उत्पत्ति 45:16-18)।

   ये सभी बातें इस संसार के लिए परमेश्वर के मन की भावना को दिखाती हैं। परमेश्वर ने हमें बनाया और सक्षम किया है कि जैसा हम से बन पड़े, हम अन्य लोगों के सहायक हों; और जब हम सहायता के लिए तैयार होकर आगे बढ़ते हैं तब वह योग्य सहायक होने के लिए हमारा मार्गदर्शन भी करता है। - एनी सेटास


करुणा आवश्यकतानुसार जो भी चाहिए होता है वह उपलब्ध करने के लिए प्रेरित करती है।

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना। यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूंगा। - नीतिवचन 3:27-28

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 41:46-56
Genesis 41:46 जब यूसुफ मिस्र के राजा फिरौन के सम्मुख खड़ा हुआ, तब वह तीस वर्ष का था। सो वह फिरौन के सम्मुख से निकलकर मिस्र के सारे देश में दौरा करने लगा। 
Genesis 41:47 सुकाल के सातों वर्षों में भूमि बहुतायत से अन्न उपजाती रही। 
Genesis 41:48 और यूसुफ उन सातों वर्षों में सब प्रकार की भोजनवस्तुएं, जो मिस्र देश में होती थीं, जमा कर के नगरों में रखता गया, और हर एक नगर के चारों ओर के खेतों की भोजनवस्तुओं को वह उसी नगर में इकट्ठा करता गया। 
Genesis 41:49 सो यूसुफ ने अन्न को समुद्र की बालू के समान अत्यन्त बहुतायत से राशि राशि कर के रखा, यहां तक कि उसने उनका गिनना छोड़ दिया; क्योंकि वे असंख्य हो गईं। 
Genesis 41:50 अकाल के प्रथम वर्ष के आने से पहिले यूसुफ के दो पुत्र, ओन के याजक पोतीपेरा की बेटी आसनत से जन्मे। 
Genesis 41:51 और यूसुफ ने अपने जेठे का नाम यह कहके मनश्शे रखा, कि परमेश्वर ने मुझ से सारा क्लेश, और मेरे पिता का सारा घराना भुला दिया है। 
Genesis 41:52 और दूसरे का नाम उसने यह कहकर एप्रैम रखा, कि मुझे दु:ख भोगने के देश में परमेश्वर ने फुलाया फलाया है। 
Genesis 41:53 और मिस्र देश के सुकाल के वे सात वर्ष समाप्त हो गए। 
Genesis 41:54 और यूसुफ के कहने के अनुसार सात वर्षों के लिये अकाल आरम्भ हो गया। और सब देशों में अकाल पड़ने लगा; परन्तु सारे मिस्र देश में अन्न था। 
Genesis 41:55 जब मिस्र का सारा देश भूखों मरने लगा; तब प्रजा फिरोन से चिल्ला चिल्लाकर रोटी मांगने लगी: और वह सब मिस्रियों से कहा करता था, यूसुफ के पास जाओ: और जो कुछ वह तुम से कहे, वही करो। 
Genesis 41:56 सो जब अकाल सारी पृथ्वी पर फैल गया, और मिस्र देश में काल का भयंकर रूप हो गया, तब यूसुफ सब भण्डारों को खोल खोल के मिस्रियों के हाथ अन्न बेचने लगा। 
Genesis 41:57 सो सारी पृथ्वी के लोग मिस्र में अन्न मोल लेने के लिये यूसुफ के पास आने लगे, क्योंकि सारी पृथ्वी पर भयंकर अकाल था।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-2
  • लूका 14:1-24


शनिवार, 16 अप्रैल 2016

सदस्य


   मॉरिस ग्रिफिन 32 वर्ष की आयु में लेपालक पुत्र बना। ऐसा होने से 20 वर्ष पहले वह लीसा और चार्ल्स गॉडबोल्ड के साथ कुछ समय मूँह-बोले पुत्र के समान रहा था, लेकिन फिर वह उन से अलग हो गया था। अब आधिकारिक रूप से लेपालक पुत्र बन सकने से पहले मॉरिस अकेला ही रह रहा था, किंतु उसकी तथा लीसा और चार्ल्स की भी यही लालसा रहती थी कि वह परिवार का सदस्य बन सके। अब जब मॉरिस पुनः लीसा और चार्ल्स के संपर्क में आया और जब उसका दत्तकपुत्र होना आधिकारिक हो गया, तो मॉरिस ने कहा, "संभवतः यह मेरे जीवन का सबसे अधिक खुशी का पल है....मैं अपनी घर-वापसी से बहुत प्रसन्न हूँ।"

   हम में से जो लोग परमेश्वर के परिवार के सदस्य बन चुके हैं, मॉरिस के समान ही कह सकते हैं कि "संभवतः यह मेरे जीवन का सबसे अधिक खुशी का पल है।" जब हम प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाकर, उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर, अपने जीवन को उसे समर्पित कर देते हैं, तब हम उद्धार पा लेते हैं और परमेश्वर की सन्तान तथा परमेश्वर के परिवार के सदस्य हो जाते हैं और वह हमारा स्वर्गीय पिता हो जाता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हम सभी मसीही विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि "क्योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्तान हो" (गलतियों 3:26)।

   परमेश्वर के लेपालक सन्तान हो जाने के बाद हमारे साथ हमारे आत्मिक भाई-बहिन जुड़ जाते हैं, और हम सब एक ही आत्मिक मीरास के वारिस हो जाते हैं: "और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में संभागी हों" (कुलुस्सियों 1:12)। साथ ही परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे अन्दर आकर निवास करने लगता है और हमें परमेश्वर को "अब्बा, पिता" कहकर संबोधित करने तथा उससे उसकी सन्तान होने के अधिकार के साथ प्रार्थना करने के लिए सक्षम करता है (गलतियों 4:6)।

   परमेश्वर की सन्तान होने का तात्पर्य है अपने स्वर्गीय पिता की उस निकटता, प्रेम और सुरक्षा को अनुभव करना जो हमसे प्रेम करता है, हमें हमारी कमियों-घटियों के बावजूद ग्रहण करता है, हमें अपने निकट रखना और हमें निकटता से जानना चाहता है। परमेश्वर के परिवार का सदस्य हो जाना एक अद्भुत घर-वापसी का अनुभव करना है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


किसी को भी पुनः घर में ले लेने के लिए परमेश्वर की बाहें सदा खुली रहती हैं।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: गलतियों 3:26-4:7
Galatians 3:26 क्योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्तान हो। 
Galatians 3:27 और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। 
Galatians 3:28 अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। 
Galatians 3:29 और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।
Galatians 4:1 मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्‍तुओं का स्‍वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं। 
Galatians 4:2 परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकों और भण्‍डारियों के वश में रहता है। 
Galatians 4:3 वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में हो कर दास बने हुए थे। 
Galatians 4:4 परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के आधीन उत्पन्न हुआ। 
Galatians 4:5 ताकि व्यवस्था के आधीनों को मोल ले कर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले। 
Galatians 4:6 और तुम जो पुत्र हो, इसलिये परमेश्वर ने अपने पुत्र के आत्मा को, जो हे अब्‍बा, हे पिता कह कर पुकारता है, हमारे हृदय में भेजा है। 
Galatians 4:7 इसलिये तू अब दास नहीं, परन्तु पुत्र है; और जब पुत्र हुआ, तो परमेश्वर के द्वारा वारिस भी हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31
  • लूका 13:23-35


शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016

मधुर सत्य


   जब वास्तव में उनकी आवश्यकता होती है तो मेरी पॉपिन्स कहाँ होती हैं? मैं मानता हूँ मेरा यह प्रश्न उन पुराने भले दिनों की याद दिलाता है जब बच्चों की कहानियों पर बनी फिल्में हमें कालपनिक और जादूई पात्रों और उनके अवास्तविक कार्यों द्वारा समस्याओं को पलक झपकते ही सरलता से सुलझा लेने को दिखाकर खुश करती थीं। लेकिन मेरे मन की अभिलाषा है ऐसे लोगों के लिए जो वास्तविक, आशापूर्ण भविष्य के दर्शन को लेकर कार्य करें। मेरी लालसा है उन लोगों के लिए जो रचनात्मक हैं, आनन्द से भरे हैं और जिन बातों को हम नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, उन्ही बातों के सकारात्मक पहलुओं को भी हमें दिखा सकें; जो हमें एहसास करवा सकें कि कड़ुवी दवाई भी एक चम्मच चीनी के साथ आसानी से निगली जा सकती है!

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने अपने एक भजन में ऐसे ही विचारों को लेकर एक प्रभावी सत्य लिखा: "यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं" (भजन 19:9-10)। आज हम बहुत ही कम यह सुनने पाते हैं कि सत्य मधुर भी हो सकता है; आम धारणा और सामान्यतः कही जाने वाली बात तो यह है कि सत्य कड़ुवा होता है, निगलने या स्वीकार करने में कठोर होता है। लेकिन सत्य का एक महत्वपूर्ण परन्तु कम स्वीकार किया जाने वाला पहलु यह भी है कि सत्य ऐसा आहार है जिससे अनेक रोगों से बचाव होता है। सत्य कोई बीमारी रोधक टीका या दवा नहीं है; सत्य तो भरपूरी से सामर्थ देने वाला पौष्टिक भोजन है जिसे ऐसे परोसा जाना चाहिए जिससे वह भूखों को आकर्षित करके उन्हें उसे चखने के लिए लालायित करे (भजन 34:8)।

   हम आराधना का एक गीत "यीशु सबसे मधुर नाम" तो गाते हैं किंतु यीशु के नाम और जीवन को संसार के समक्ष ऐसे प्रस्तुत करते हैं मानो वह नाम खट्टा पड़ गया हो। जो लोग आत्मिक भोजन के लिए तरसते हैं, उनके लिए प्रभु यीशु का निर्मल सत्य, जो यदि हमारे अहंकार या कटु व्यवहार अथवा स्वभाव से कलंकित नहीं हुआ है, सबसे मधुर स्वाद और तरोताज़गी देनेवाला होता है। हम मसीही विश्वासियों को यह आदर है कि हम इस मधुर सत्य को, पाप की कड़ुवाहट झेल रहे संसार के सामने प्रस्तुत करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो! - भजन 117:2

परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। - भजन 34:8

बाइबल पाठ: भजन 19:7-14
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22