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रविवार, 22 जुलाई 2018

विश्राम



      प्रातः अलार्म बजता है; हमें लगता है कि अभी बहुत जल्दी है, कुछ देर और सो लें, परन्तु दिन भर के लिए कार्य आगे रखा है, लोगों से निर्धारित समय पर मिलना है, लोगों की देखभाल करनी है, और भी बहुत कुछ दिन भर के समय में करने के लिए है। ऐसे में आप अकेले नहीं हैं; प्रतिदिन, हम में से बहुतेरों को एक बात से दूसरी की ओर भागते रहना होता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रेरित अपनी सेवकाई के पहले दौरे से लौटे तो प्रभु को बताने के लिए उनके पास बहुत कुछ था। परन्तु जैसे मरकुस रचित सुसमाचार में लिखा है, प्रभु तुरंत ही उनके कार्य का आंकलन करने नहीं बैठ गया; वरन प्रभु की पहली प्राथमिकता थी कि वे पहले थोड़ा विश्राम कर लें। प्रभु यीशु ने उनसे कहा, “उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो” (मरकुस 6:31)।

      अन्ततः हमें वास्तविक विश्राम अपने साथ परमेश्वर की लगातार बनी रहने वाली उपस्थित का एहसास करने और उस पर भरोसा बनाए रखने से ही मिलता है। चाहे हम अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें, परन्तु हमें यह पहचान भी रखनी है कि हम अपने कार्यों, कार्य में उन्नति, परिवार, सेवकाई, आदि की चिंताएं परमेश्वर के हाथों में सौंप कर उनके विषय उस पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। हमें प्रतिदिन कुछ समय हमारा ध्यान बंटाने वाली बातों से हटाकर, तनाव और बेचैनी को अपने से दूर कर के, अपने प्रति परमेश्वर के लगातार बने रहने वाले अद्भुत प्रेम और विश्वासयोग्यता पर मनन करना चाहिए, उसमें और उसके साथ थोड़ा विश्राम करना चाहिए।

      इसलिए निश्चिन्त होकर आराम की साँस लीजिए; परमेश्वर के हाथों में अपनी सारी चिंताओं को छोड़ दीजिए, और वास्तविक विश्राम का आनन्द लीजिए। - पो फैंग चिया


हम इसलिए विश्राम नहीं करते हैं क्योंकि हमारा कार्य पूरा हो गया है; 
हम इसलिए विश्राम करते हैं क्योंकि यह परमेश्वर की आज्ञा है, 
और उसने हमें ऐसा बनाया है कि हमें विश्राम की आवश्यकता होती है। - गौर्डन मैकडोनाल्ड

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मरकुस 6:7-13, 30-32
Mark 6:7 और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्हें दो दो कर के भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया।
Mark 6:8 और उसने उन्हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे।
Mark 6:9 परन्तु जूतियां पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो।
Mark 6:10 और उसने उन से कहा; जहां कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहां से विदा न हो, तब तक उसी में ठहरे रहो।
Mark 6:11 जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, और तुम्हारी न सुनें, वहां से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो।
Mark 6:12 और उन्होंने जा कर प्रचार किया, कि मन फिराओ।
Mark 6:13 और बहुतेरे दुष्टात्माओं को निकाला, और बहुत बीमारों पर तेल मलकर उन्हें चंगा किया।
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया।
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था।
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35



शनिवार, 21 जुलाई 2018

आज्ञाकारिता



      पहले बार जब मैंने अपनी पत्नि के साथ मिलकर एक लेख लिखने की परियोजना पर कार्य करना आरंभ किया, तो शीघ्र ही यह प्रगट हो गया कि इस परियोजना में मुख्य बाधा मेरे द्वारा काम को टालना होगी। इस परियोजना में उसका काम था मेरे लिखे हुए को संपादित करना और नियुक्त समय के अनुसार मुझसे काम को पूरा करवाना; और मेरा काम था यह करने में उसे खिसियाना! अधिकांशतः उसका धैर्य और योजनाबद्ध तरीके से काम करवाना, नियत समय एवं निर्देशानुसार के अनुसार मेरे काम न करने की प्रवृत्ति पर भारी पड़ते थे।

      मैं प्रतिज्ञा करता था कि दिन भर में लिखने का इतना कार्य कर लूँगा। पहले घंटे तो मैं बड़ी मेहनत के साथ काम करता रहता। फिर अपने काम करने की क्षमता से निश्चिन्त होकर, मैं काम से थोड़ा विश्राम लेने की सोचता। थोड़ी ही देर में, मेरा विश्राम का समय समाप्त हो जाता। यह जानते हुए कि अब मुझे अपनी पत्नि से इसके लिए कुछ सुनना पड़ेगा, मैं बच निकलने के लिए कुछ और करने की सोचता। मैं कुछ ऐसे घरेलू कार्य करने लगता जो मेरी पत्नि को बिलकुल पसन्द नहीं हैं, और सामान्यतः यदि मैं उन्हें कर देता तो मुझे उस से शाबाशी मिलती थी।

      परन्तु इस परियोजना के लिए, उसे प्रसन्न करने की मेरी यह योजना व्यर्थ चली जाती।

      कभी-कभी मैं ऐसे ही खेल परमेश्वर के साथ भी खेलता हूँ। वह मेरे जीवन में कुछ लोगों को किसी विशेष सेवकाई के लिए लेकर आता है, या मुझसे कुछ विशेष कार्य करवाना चाहता है। जैसे योना परमेश्वर द्वारा उसके लिए निर्धारित कार्य से विमुख होकर विपरीत दिशा में चला गया था (योना 4:2), वैसे ही मैं भी अपना ही मार्ग चुन लेता हूँ। फिर मैं परमेश्वर को कुछ अच्छे कार्यों या आत्मिक गतिविधियों द्वारा प्रसन्न करने का प्रयास करता हूँ। जबकि परमेश्वर मुझ से केवल अपनी आज्ञाकारिता, और उसकी प्राथमिकताओं के अनुसार कार्य करवाना चाहता है। निश्चय ही परमेश्वर को प्रभावित करने के मेरे ये सभी प्रयास व्यर्थ ठहरते हैं।

      क्या आप भी उन कार्यों को करने से मन चुरा रहे हैं, जिन्हें आप जानते हैं कि परमेश्वर आपके द्वारा करवाना चाहता है? मेरा विश्वास कीजिए; सच्ची संतुष्टि उसके द्वारा सौंपे गए कार्य को, उसके मार्गदर्शन और उसकी सामर्थ्य के द्वारा करने से ही आती है।

      परमेश्वर केवल अपनी आज्ञाकारिता ही के द्वारा प्रसन्न होता है। - रैंडी किल्गोर


केवल परमेश्वर आज्ञाकारिता ही उसको प्रसन्न करती है।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22

बाइबल पाठ: योना 4
Jonah 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का।
Jonah 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।
Jonah 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है।
Jonah 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?
Jonah 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा?
Jonah 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ।
Jonah 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया।
Jonah 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।
Jonah 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।
Jonah 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाया है।
Jonah 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15



शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

समझता



      कुछ छोटे बच्चों को रात में सोने में दिक्कत होती है। इसके अनेकों कारण हो सकते हैं; मुझे अपनी बेटी से एक कारण पता चला। जब मैं एक संध्या उसे बिस्तर में लेटाने के बाद, उसके कमरे से बाहर जाने लगी तो उसने मुझ से कहा, “मुझे अँधेरे से डर लगता है।” मैंने उसके भय का निवारण करना चाहा, और उसे आश्वस्त रखने के लिए कि उसके कमरे में कोई दैत्य नहीं हैं, मैंने एक छोटी बत्ती जली छोड़ दी।

      अपनी बेटी के उस भय के बारे में मैंने और अधिक कुछ नहीं सोचा, परन्तु कुछ सप्ताह बाद जब मेरे पति व्यवसाय के सिलसिले में बाहर गए, और मुझे रात भर अकेले रहना पड़ा, तब मुझे उसका ध्यान आया। बिस्तर में लेट जाने के पश्चात मुझे लगा जैसे अन्धेरा मुझे दबा रहा है। मुझे एक हलकी सी आवाज़ सुनाई दी और मैं उसकी पड़ताल करने के लिए चौंक कर उठी, लेकिन कोई कारण सामने नहीं आया। परन्तु उस अनुभव ने मुझे अपनी बेटी के भय को समझा दिया।

      प्रभु यीशु हमारे प्रत्येक भय को समझता है, क्योंकि वह मनुष्य बनकर पृथ्वी पर रहा और उसने वैसी ही समस्याओं का सामना किया जैसी हमें अपने जीवनों में करनी पड़ती हैं। उसके विषय परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, “वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना” (यशायाह 53:3)। जब हम उससे अपने संघर्षों का विवरण बाँटते हैं, तो वह उसे एक ओर झटक नहीं देता है, न ही हमारी भावनाओं को तुच्छ समझता है, और न ही हमें झिड़क कर कहता है कि हम ऐसे व्यर्थ विचारों से बाहर आ जाएँ। वह हमारी भावनाओं को समझता है, हमारे साथ बना रहता है।

      इस बात का एहसास कि प्रभु यीशु हमारे साथ है, हमारी हर एक बात और परिस्थिति को समझता है, हमारे दुःख के एकाकीपन को दूर कर देती है। हमारे सबसे अंधकारपूर्ण समय में वह हमारी ज्योति  और हमारा उद्धार है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


सबसे अंधकारमय रात में भी, प्रभु यीशु हमारी ज्योति है।


तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: भजन 27:1-8
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं?
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा।
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे।
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22



गुरुवार, 19 जुलाई 2018

प्रतीक्षा



      सैन्य आज्ञा, “अंकन समय; कदम ताल” का अर्थ होता है अपने स्थान पर खड़े-खड़े कदम चलाना। यह आगे बढ़ने की चाल में एक सक्रीय विराम है, जिसमें सचेत मन के साथ अगली आज्ञा की प्रतीक्षा की जाती है। प्रतिदिन के जीवन में “अंकन करने” का अर्थ होता है “बिना आगे बढ़े गतिवान होना, सचल होते हुए भी कहीं पहुंचना नहीं, और प्रतीक्षा करते हुए कुछ महत्वपूर्ण नहीं करना।” इससे एक निरुपयोगी, अर्थहीन प्रतीक्षा का अभिप्राय सामने आता है।

      इसकी तुलना में, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रतीक्षा करने का अधिकाँशतः अर्थ होता है, “उत्सुकता से देखना, आशा रखना, और अपेक्षा से देखना।” भजनकार ने बहुत कठिनाईयों का सामना करते हुए लिखा: “हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं। वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे” (भजन 25:2-3)।

      अकसर हमारे पास जिन बातों के लिए हम प्रतीक्षा कर रहे हैं, उनके लिए कोई विकल्प अथवा चुनाव करने के कुछ नहीं होता है – रोग के निदान के लिए की गई चिकित्सीय जाँच की रिपोर्ट, नौकरी के लिए दिए गए साक्षात्कार का परिणाम, किसी प्रिय जन के लौट कर आने की प्रतीक्षा, इत्यादि; परन्तु हम यह निर्णय अवश्य कर सकते हैं कि यह प्रतीक्षा हम किस प्रकार से करेंगे। किसी भय या उदासीनता में समय बिताने के स्थान पर, हम परमेश्वर की उपस्थिति में “कदम ताल” करते रह सकते हैं, प्रतिदिन परमेश्वर से मार्गदर्शन और सामर्थ्य की प्रार्थना करते हुए, जैसा कि भजनकार ने किया: “हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे। मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं” (पद 4-5)। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर की बात जोहना उसमें सक्रीय भरोसा बनाए रखना है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 25:1-15
Psalms 25:1 हे यहोवा मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूं।
Psalms 25:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं।
Psalms 25:3 वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे।।
Psalms 25:4 हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे।
Psalms 25:5 मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं।
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं।
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।
Psalms 25:12 वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? यहोवा उसको उसी मार्ग पर जिस से वह प्रसन्न होता है चलाएगा।
Psalms 25:13 वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा।
Psalms 25:14 यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उस से डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा।
Psalms 25:15 मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40



बुधवार, 18 जुलाई 2018

भरोसा



      मुझे पक्षियों और उनकी गतिविधियों को देखना अच्छा लगता है। मेरी यह रुचि घाना देश में जंगल में स्थित गाँव में, जहाँ मैं बड़ा हुआ था, विकसित हुई थी। अब जहाँ शहर में मैं रहता हूँ वहाँ मैंने हाल ही में कुछ कौवों का रोचक व्यवहार देखा। उड़ते हुए वे विश्राम के लिए एक ऐसे पेड़ की ओर जाते थे जिसके सारे पत्ते झड़ चुके थे। परन्तु किसी मजबूत डाली पर बैठने की बजाए वे सूखी और कमज़ोर डालियों पर जाकर बैठ जाते थे, जो शीघ्र ही झुक या टूट जाती थीं, और उन्हें खतरे से बचने के लिए फिर से उड़ना पड़ता था। प्रत्यक्षतः उनमें यह समझ नहीं थी कि मोटी डालियाँ अधिक सुरक्षित विश्राम स्थान हैं।

      हमारा क्या हाल है? हम अपने भरोसे को किस पर आधारित करते हैं? परमेश्वर के वचन, बाइबल में, दाऊद ने भजन 20:7 में लिखा, “किसी को रथों को, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे” रथ और घोड़े भौतिक तथा मानवीय सहयाता के आधार को दिखाते हैं। ये दैनिक जीवन में उपयोगी तथा आवश्यक वस्तुओं के प्रतिरूप तो हैं, परन्तु इनसे संकट के समय में हमें सुरक्षा नहीं मिलती है। यदि हमारा भरोसा सांसारिक वस्तुओं, व्यक्तियों, या धन-संपत्ति पर रहता है तो हम पाएँगे कि जैसे उन कौवों के पैरों तले वे डालियाँ टूट जाती थीं, हमारे ये नश्वर सांसारिक आधार भी संकट के समय में अपर्याप्त रहेंगे, हमें संभाल नहीं पाएँगे।

      जो रथों और घोड़ों पर भरोसा करते हैं, उन्हें झुका कर गिराया जा सकता है, परन्तु जो वास्तव में जीवते सच्चे प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, उसे समर्पित एवं उसकी आज्ञाकारिता का जीवन व्यतीत करते हैं, वे सदा स्थिर और अडिग खड़े रहेंगे। - लॉरेंस दरमानी


इस बदलते रहने वाले सँसार में हम 
कभी न बदलने वाले प्रभु परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 20
Psalms 20:1 संकट के दिन यहोवा तेरी सुन ले! याकूब के परमेश्वर का नाम तुझे ऊंचे स्थान पर नियुक्त करे!
Psalms 20:2 वह पवित्र स्थान से तेरी सहायता करे, और सिय्योन से तुझे सम्भाल ले!
Psalms 20:3 वह तेरे सब अन्नबलियों को स्मरण करे, और तेरे होमबलि को ग्रहण करे।
Psalms 20:4 वह तेरे मन की इच्छा को पूरी करे, और तेरी सारी युक्ति को सफल करे!
Psalms 20:5 तब हम तेरे उद्धार के कारण ऊंचे स्वर से हर्षित हो कर गाएंगे, और अपने परमेश्वर के नाम से झण्डे खड़े करेंगे। यहोवा तुझे मुंह मांगा वरदान दे।
Psalms 20:6 अब मैं जान गया कि यहोवा अपने अभिषिक्त का उद्धार करता है; वह अपने दाहिने हाथ के उद्धार करने वाले पराक्रम से अपने पवित्र स्वर्ग पर से सुनकर उसे उत्तर देगा।
Psalms 20:7 किसी को रथों को, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे।
Psalms 20:8 वे तो झुक गए और गिर पड़े परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं।
Psalms 20:9 हे यहोवा, बचा ले; जिस दिन हम पुकारें तो महाराजा हमें उत्तर दे।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17



मंगलवार, 17 जुलाई 2018

खुला हाथ



      बिड्डी मेसन को 1891 में लॉस एन्जिल्स में एक अचिन्हित कब्र में दफना दिया गया। दासत्व में जन्मी महिला के लिए यह कोई अनहोनी बात नहीं थी, परन्तु बिड्डी जैसी मान्यता प्राप्त महिला के लिए यह असामान्य अवश्य था। न्यायालय में चले मुकद्दमे के द्वारा 1856 में अपनी स्वतंत्रता जीतने के पश्चात बिड्डी ने अपने नर्सिंग कौशल तथा बुद्धिमता पूर्ण व्यवासायिक निर्णयों के द्वारा कुछ संपत्ति एकत्रित कर ली थी। उसने अप्रवासी लोगों तथा कैदियों की दुर्दशा देखकर उनकी सहायता करना आरंभ किया, और उसके इस नियमित व्यवहार के कारण लोग उसके द्वार पर कतार बाँध कर खड़े होने लग गए। दासत्व से छूटने के मात्र 16 वर्ष में ही, 1872 में उसने अपने दामाद के साथ मिलकर आर्थिक योगदान के द्वारा लॉस एन्जिल्स में प्रथम अफ्रीकी मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च का आरंभ करवाया।

      बिड्डी ने परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित द्वारा कहे गए शब्दों: “...और प्रभु यीशु की बातें स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है; कि लेने से देना धन्य है” (प्रेरितों 20:35) को अपने जीवन में जी कर के दिखाया। पौलुस सम्पन्नता से आया था, दासत्व से नहीं, फिर भी उसने मसीह यीशु एवँ दूसरों की सेवकाई के लिए सेवा का ऐसा जीवन चुना जिसमें अन्ततः वह कैद होकर शहीद हो गया।

      1988 में बिड्डी से सहायताप्राप्त लोगों ने बिड्डी मेसन के स्मरण में एक समाधि-शिला का अनावरण किया। उस आयोजन में उपस्थित होने वाले लोगों में लॉस एन्जिल्स के महापौर (मेयर) तथा, एक शताब्दी से भी पूर्व, बिड्डी के घर से आरंभ होने वाले उस छोटे से चर्च के लगभग 3000 सदस्य थे।

      बिड्डी ने कहा था, “एक खुला हाथ, आशीषित हाथ है, क्योंकि वह बहुतायत से देता और पाता है।” बिड्डी के हाथ ने जैसे उदारता से दिया, उसे वैसे ही उदारता से एक महान विरासत भी मिली। - टिम गुस्ताफ्सन


एक खुला हाथ, आशीषित हाथ है, 
क्योंकि वह बहुतायत से देता और पाता है। - बिड्डी मेसन

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना। - नीतिवचन 3:27

बाइबल पाठ: प्रेरितों 20:22-35
Acts 20:22 और अब देखो, मैं आत्मा में बन्‍धा हुआ यरूशलेम को जाता हूं, और नहीं जानता, कि वहां मुझ पर क्या क्या बीतेगा
Acts 20:23 केवल यह कि पवित्र आत्मा हर नगर में गवाही दे देकर मुझ से कहता है, कि बन्‍धन और क्‍लेश तेरे लिये तैयार हैं।
Acts 20:24 परन्तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता: कि उसे प्रिय जानूं, वरन यह कि मैं अपनी दौड़ को, और उस सेवाकाई को पूरी करूं, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है।
Acts 20:25 और अब देखो, मैं जानता हूं, कि तुम सब जिनमें मैं परमेश्वर के राज्य का प्रचार करता फिरा, मेरा मुंह फिर न देखोगे।
Acts 20:26 इसलिये मैं आज के दिन तुम से गवाही देकर कहता हूं, कि मैं सब के लोहू से निर्दोष हूं।
Acts 20:27 क्योंकि मैं परमेश्वर की सारी मनसा को तुम्हें पूरी रीति से बताने से न झिझका।
Acts 20:28 इसलिये अपनी और पूरे झुंड की चौकसी करो; जिस में पवित्र आत्मा ने तुम्हें अध्यक्ष ठहराया है; कि तुम परमेश्वर की कलीसिया की रखवाली करो, जिसे उसने अपने लोहू से मोल लिया है।
Acts 20:29 मैं जानता हूं, कि मेरे जाने के बाद फाड़ने वाले भेड़िए तुम में आएंगे, जो झुंड को न छोड़ेंगे।
Acts 20:30 तुम्हारे ही बीच में से भी ऐसे ऐसे मनुष्य उठेंगे, जो चेलों को अपने पीछे खींच लेने को टेढ़ी मेढ़ी बातें कहेंगे।
Acts 20:31 इसलिये जागते रहो; और स्मरण करो; कि मैं ने तीन वर्ष तक रात दिन आंसू बहा बहा कर, हर एक को चितौनी देना न छोड़ा।
Acts 20:32 और अब मैं तुम्हें परमेश्वर को, और उसके अनुग्रह के वचन को सौंप देता हूं; जो तुम्हारी उन्नति कर सकता है, और सब पवित्रों में साझी कर के मीरास दे सकता है।
Acts 20:33 मैं ने किसी की चान्दी सोने या कपड़े का लालच नहीं किया।
Acts 20:34 तुम आप ही जानते हो कि इन्‍हीं हाथों ने मेरी और मेरे साथियों की आवश्यकताएं पूरी कीं।
Acts 20:35 मैं ने तुम्हें सब कुछ कर के दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु की बातें स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है; कि लेने से देना धन्य है।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38



सोमवार, 16 जुलाई 2018

उपहार


      वह मात्र चाबियाँ रखने का गुच्छा ही है; जूते बाँधने के फीते से पाँच कुंडों को आपस में बांधकर बनाया गया। मेरी बेटी ने वह मुझे तब दिया था जब वह सात वर्ष की थी। आज वह फीता पुराना हो चुका है, कुंडों के टुकड़े टूटने लगे हैं, परन्तु उस उपहार के साथ जुड़ा हुआ सन्देश “मैं पापा से प्रेम करती हूँ” कभी पुराना नहीं पड़ेगा।

       सबसे कीमती उपहार उस से कीमती नहीं बनते हैं जिस सामग्री से वे बने हैं, वरन इस से कि हमें उन्हें किसने दिया है। किसी भी माता-पिता से उस मुट्ठी भर जंगली फूलों के गुच्छे की कीमत पूछिए, जो उन्हें नन्हें हाथों ने एकत्रित करके पकड़ाया है। सबसे अच्छे उपहार कीमत से नहीं, उनके पीछे छिपे प्रेम से आँके जाते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में ज़कर्याह ने इस बात को समझा। हम उसके इस भाव को भविष्यवाणी के उसके उस स्तुति गीत में देखते हैं जो उसने परमेश्वर की स्तुति और प्रशंसा के लिए कहा, जब परमेश्वर ने उसे और उसकी पत्नि इलिशिबा को एक पुत्र दिया, उनके माता-पिता बन सकने की आयु के अनेकों वर्षों के पश्चात। ज़कर्याह आनदित हुआ क्योंकि उसका पुत्र यूहन्ना को भविष्यद्वक्ता होना था और मानव-जाति के लिए परमेश्वर के सर्वोत्तम उपहार – आने वाले मसीहा का अग्रदूत बनना था। ज़कर्याह ने कहा: “यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा। कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए” (लूका 1:78-79)।

      जो सबसे मधुर उपहार हमें मिल सकता है वह है परमेश्वर की करुणा और दया – प्रभु यीशु में होकर हमारे पापों की क्षमा। यह उपहार देने के लिए उसे क्रूस पर अपने प्राणों की कीमत चुकानी पड़ी, परन्तु हमारे प्रति अपने महान प्रेम के अन्तर्गत, वह इस उपहार को हमें सेंत-मेंत देता है। - जेम्स बैंक्स


प्रभु यीशु उपहार भी है और देने वाला भी।

उठ, प्रकाशमान हो; क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है, और यहोवा का तेज तेरे ऊपर उदय हुआ है। - यशायाह 60:1

बाइबल पाठ: लूका 1:67-79
Luke 1:67 और उसका पिता जकरयाह पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गया, और भविष्यद्ववाणी करने लगा।
Luke 1:68 कि प्रभु इस्राएल का परमेश्वर धन्य हो, कि उसने अपने लोगों पर दृष्टि की और उन का छुटकारा किया है।
Luke 1:69 और अपने सेवक दाऊद के घराने में हमारे लिये एक उद्धार का सींग निकाला।
Luke 1:70 जैसे उसने अपने पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा जो जगत के आदि से होते आए हैं, कहा था।
Luke 1:71 अर्थात हमारे शत्रुओं से, और हमारे सब बैरियों के हाथ से हमारा उद्धार किया है।
Luke 1:72 कि हमारे बाप-दादों पर दया कर के अपनी पवित्र वाचा का स्मरण करे।
Luke 1:73 और वह शपथ जो उसने हमारे पिता इब्राहीम से खाई थी।
Luke 1:74 कि वह हमें यह देगा, कि हम अपने शत्रुओं के हाथ से छूटकर।
Luke 1:75 उसके साम्हने पवित्रता और धामिर्कता से जीवन भर निडर रहकर उस की सेवा करते रहें।
Luke 1:76 और तू हे बालक, परमप्रधान का भविष्यद्वक्ता कहलाएगा, क्योंकि तू प्रभु के मार्ग तैयार करने के लिये उसके आगे आगे चलेगा,
Luke 1:77 कि उसके लोगों को उद्धार का ज्ञान दे, जो उन के पापों की क्षमा से प्राप्त होता है।
Luke 1:78 यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा।
Luke 1:79 कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17
  • प्रेरितों 20:1-16