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रविवार, 15 मार्च 2020

प्रकट



      लड़कपन में मैंने अपने पिता को उन खेतों में जुताई करते हुए देखा था, जिन्हें पहले कभी जोता नहीं गया था। पहली बार जब वहाँ हल चलता था तो बड़े-बड़े पत्थर निकल कर आते थे, जिन्हें मेरे पिताजी उठाकर फेंक देते थे। वे दुबारा, फिर तिबारा, बारंबार हल से मिट्टी को पलटते रहते थे, उसे और गहरा तोड़ते रहते थे। हर बार हल चलाए जाने पर और पत्थर प्रकट होते थे, जो उनसे पहले वालों से छोटे होते थे। पिताजी तब तक हल चलाते रहते थे जब तक कि कंकर पत्थर निकल नहीं जाते थे और मिट्टी नरम नहीं हो जाती थी।

      परमेश्वर के अनुग्रह में बढ़ना बहुत कुछ ऐसा ही होता है। जब हम मसीही विश्वासी बनते हैं, तो हमारे कुछ “बड़े” पाप प्रकट होते हैं; हम उन्हें परमेश्वर के सम्मुख स्वीकार करते हैं, उनके लिए परमेश्वर से क्षमा मांगते हैं, और उन्हें अपने जीवनों से बाहर निकालते हैं। समय के साथ, जैसे-जैसे हम परमेश्वर के वचन बाइबल को अपने में होकर निकलने देते हैं, परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे अन्य “छोटे” पापों को भी प्रकट करता जाता है। हमारे सामने, हमारे जीवनों की वे बातें भी प्रकट होने लगती हैं जिन्हें हम महत्वहीन और नज़रंदाज़ करने वाली मानते रहे हैं, किन्तु अब मसीही परिपक्वता में बढ़ने के साथ ही हम उन्हें पाप पहचानने लगते हैं, उनके बदसूरत और विनाशकारी स्वरूप को पहचानने लगते हैं – जैसे कि घमंड, कुड़कुड़ाना, तुच्छ देखना, ईर्ष्या रखना, स्वार्थी होना आदि।

      परमेश्वर हम पर हमारे इन पापों को प्रकट करता जाता है जिससे की हम उसे उन्हें हमारे जीवनों से निकालकर फेंक लेने दें। इसीलिए जब भी हमारे कोई भी हानिकारक रवैये हमारे समक्ष प्रकट हों, हमें भजनकार दाऊद के सामान परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए, “हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर” (भजन 25:11)।

      नम्र कर देने वाले अनुभव चाहे दुखदायी भी हों, फिर भी आत्मिक जीवन की उन्नति के लिए भले होते हैं। ऐसे अनुभव परमेश्वर के तरीके होते हैं जिन के द्वारा वह हमें सिखाता है और सही मार्गो में हमारा मार्गदर्शन करता है, और हमारे छिपे हुए पापों को प्रकट करता है ताकि हम अंश-अंश करके उसके स्वरूप में ढलते चले जाएं। - डेविड एच. रोपर

प्रभु यीशु, जैसे हम हैं, हमें वैसा ही स्वीकार करता है, 
और फिर अपने स्वरूप में बनाता चला जाता है।

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18 

बाइबल पाठ: भजन 25: 1-11
Psalms 25:1 हे यहोवा मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूं।
Psalms 25:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं।
Psalms 25:3 वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे।
Psalms 25:4 हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे।
Psalms 25:5 मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं।
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं।
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 26-27
  • मरकुस 14:27-53



शनिवार, 14 मार्च 2020

प्रार्थना



      लौरा की आँखों में आँसू थे, उसके भाई को कैंसर का सामना करना पड़ रहा था और हमारे चर्च के लोग उसके भाई के लिए प्रार्थनाएं कर रहे थे। उसने हमारे चर्च के लोगों की प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद करते हुए कहा, “प्रार्थना कितना बड़ा उपहार है, मुझे इस बात का एहसास तब तक नहीं हुआ था जब तक कि आप लोगों ने उसके लिए प्रार्थना करना आरंभ नहीं किया। मैं वर्णन नहीं कर सकती हूँ कि आपकी प्रार्थनाएं कितनी शान्ति दायक हैं। आपकी प्रार्थनाओं ने उसे इस कठिन समय में बल दिया है और हमारे समस्त परिवार को प्रोत्साहन प्रदान किया है।”

      किसी के प्रति प्रेम की सर्वोत्तम अभिव्यक्तियों में से एक है उस के लिए प्रार्थना करना। प्रभु यीशु हमारे लिए इसके सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खंड में हम प्रभु यीशु को अनेकों बार औरों के लिए प्रार्थना करते हुए तथा औरों के लिए परमेश्वर पिता के सम्मुख आते हुए पाते हैं। रोमियों 8:34 में लिखा है, “...मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।” ऐसे निस्वार्थ प्रेम को क्रूस पर दर्शाने के बाद भी, पुनरुत्थान तथा स्वर्गारोहित हुए प्रभु यीशु अभी भी हमारे लिए प्रार्थना कर रहे हैं, हमारे प्रति अपने प्रेम को दर्शा रहे हैं।

      हमारे चारों ओर ऐसे लोग हैं जिन्हें हमारी आवश्यकता है कि हम प्रभु यीशु के उदाहरण के अनुसार उन लोगों के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करें, और उनके जीवनों में परमेश्वर की सहायता को आमंत्रित करें। हम परमेश्वर से यह भी प्रार्थना कर सकते हैं कि उनके लिए प्रार्थना करने में हमारी सहायता करे, और वह करेगा भी।

      हमारा प्रेमी पिता परमेश्वर हमें सामर्थ्य दे कि हम अपनी प्रार्थनाओं की उदार भेंट औरों को उपलब्ध करवाने वाले हों। - जेम्स बैंक्स

प्रार्थना बाँटने योग्य उपहार है।

और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्यवाद करें। - 2 कुरिन्थियों 1:11

बाइबल पाठ: रोमियों 8:28-34
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 23-25
  • मरकुस 14:1-26



शुक्रवार, 13 मार्च 2020

सहायक



      हर साल लाखों लोग क्यों अपना पैसा खर्च कर के बाधा दौड़ों में भाग लेते हैं, जहां उन्हें खड़ी दीवारों को चढ़कर पार करना, कीचड़ में होकर दौड़ना, और ऊपर से उन पर गिरते हुए पानी में होकर खड़े पाइपों के अन्दर ऊपर को चढ़ना होता है। कुछ इसे अपनी सहन-शक्ति की सीमाओं का आंकलन करने या अपने भय पर विजयी होने के लिए एक व्यक्तिगत चुनौती मानते हैं। कुछ औरों के लिए इस का आकर्षण मिल-जुल कर काम करना होता है, जिसमें प्रतिस्पर्धी एक-दूसरे की सहायता और सहयोग करते हैं। एक व्यक्ति ने इसे एक ऐसा स्थान कहा जहां अनजाने लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए आगे आते हैं, कि सभी उस दौड़ को पूरी कर सकें (स्टेफ़नी कैनोविट्ज़, द वाशिंगटन पोस्ट)।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें प्रोत्साहित करती है कि हम मसीह यीशु में अपने विश्वास को प्रकट रूप में एक-दूसरे की सहायता करने के द्वारा प्रदर्षित करें। बाइबल में लिखा है, “और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो” (इब्रानियों 10:24-25)।

      हमारा उद्देश्य दौड़ को सबसे पहले पूरा करना नहीं है, वरन दूसरों को प्रोत्साहित करने और उनकी सहायता करने के वास्तविक उदाहरणों के द्वारा औरों के लिए अनुसरणीय बनना है। एक दिन आएगा जब हम अपने पृथ्वी के जीवन को पूरा कर लेंगे। तब तक हम प्रतिदिन एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते रहें, एक दूसरे के सहायक बने रहें। - डेविड सी. मेक्कैस्लैंड

मसीही विश्वास के जीवन की दौड़ हम साथ मिलकर दौड़ते हैं।

तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। - गलातियों 6:2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:24-25
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है।
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है,
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है।
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं।
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है।
Hebrews 10:24 और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें।
Hebrews 10:25 और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 20-22
  • मरकुस 13:21-37



गुरुवार, 12 मार्च 2020

विश्वास



      मेरी स्वाभाविक प्रवृत्ति नकारात्मक रहने की है; मैं बहुत शीघ्र ही जीवन की परिस्थितियों का नकाराताम्क अंत होने के बारे में सोचने लग जाती हूँ। यदि मुझे किसी एक कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़े, तो मैं बड़ी सरलता से यह भी मानने लग जाती हूँ कि मुझे अन्य कार्यों में भी कठिनाइयाँ ही होंगी; यहाँ तक कि यद्यपि इन दो बातों का कोई सम्बन्ध नहीं है, मुझे फिर भी यह भी लगने लगता है कि मैं अब कभी झुक कर अपने पैरों की ऊँगलियाँ भी नहीं छूने पाऊँगी। और यह की मैं कैसी अभागी माँ हूँ, जो कुछ भी ठीक से नहीं कर सकती है। किसी एक भी बात में असफलता, अनावश्यक रूप से अन्य अनेकों बातों के विषय मेरी भावनाओं को प्रभावित करती है।

      इसलिए मेरे लिए यह कल्पना करना सरल है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के एक भविष्यद्वक्ता, हबक्कुक, की प्रतिक्रया क्या रही होगी जब परमेश्वर ने उसे आते समय की बातों को दिखाया। परमेश्वर के लोगों पर आने वाली विपत्तियों को देखकर उसके पास हताश होने के बहुत कारण थे; उसे पता था की आगे लम्बे और कठिन वर्ष आने वाले हैं। आने वाली बातें वास्तव में निराशाजनक थीं; सभी भोजन वस्तुओं और सुख की बातों का भयंकर अकाल आने वाला था। उसके शब्दों से मैं नकारात्मक परिस्थितियों की निराशा की ओर खिंचने लगती हूँ; किन्तु तभी वह मुझे एक छोटे से शब्द “तौभी” के द्वारा झकझोर देता है – “तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा” (हबक्कुक 3:18)। उसे जिन कठिनाइयों की अपेक्षा थी, उनके होते हुए भी, हबक्कुक को आनन्दित होने का कारण मिला – परमेश्वर में।

      हो सकता है कि हम अपनी समस्याओं को बढ़ा-चढ़ा कर कहने की प्रवृत्ति रखते हों, परन्तु हबक्कुक के समक्ष निश्चय ही कुछ बहुत ही विकट परिस्थितियाँ खड़ी थीं। और यदि वह उन परिस्थितियों में भी परमेश्वर की स्तुति कर सका, तो फिर हम भी कर सकते हैं। जब हम निराशाओं से घिरे और दबे हुए हों, तब हम अपने सिर उठा कर परमेश्वर की और देख सकते हैं, और हमारे प्रति उसके प्रेम तथा उसकी भली योजनाओं में विश्वास रख सकते हैं। - कर्स्टन होल्म्बर्ग

परमेश्वर हमारी निराशाओं में भी आनन्द का कारण है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: हबक्कुक 3: 17-19
Habakkuk 3:17 क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों,
Habakkuk 3:18 तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा।।
Habakkuk 3:19 यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 17-19
  • मरकुस 13:1-20



बुधवार, 11 मार्च 2020

सर्वोच्च प्रशंसा



      खेलों से प्रेम करने वाले लोग अपनी पसंदीदा टीम या खिलाड़ियों की प्रशंसा करने के लिए बहुत कुछ करते हैं – वे उस टीम के प्रतीक चिन्ह वाले कपड़े पहनते हैं, अपनी पसंदीदा टीम और उसकी उपलब्धियों तथा उसके खिलाड़ियों के विषय सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करते हैं, उनकी बड़ाई करते हैं, और वे यह स्पष्ट कर देते है कि उनकी निष्ठा किस के प्रति है। मेरे पास भी मेरी पसंदीदा टीम के टोपियाँ, टी-शर्ट्स, और मेरे द्वारा उनकी प्रशंसा में लिखी गई टिप्पणियाँ हैं। खेल और खिलाड़ियों के प्रति हमारी निष्ठा हमें इस बात की भी याद दिलाती है कि हमारी सबसे उच्च तथा सच्ची निष्ठा हमारे प्रभु परमेश्वर के प्रति होनी चाहिए।

      जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ता हूँ, तो दाऊद द्वारा लिखित भजन 34 एक ऐसी ही निःसंकोच निष्ठा का भजन है, जहाँ दाऊद हमारा ध्यान उस की और खींचता है जो संसार की किसी भी अन्य चीज़ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दाऊद कहता है, “मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा” (पद 1), जो हमारा ध्यान हमारे जीवन की उन कमियों की ओर ले जाता है जो हमारे जीवनों में परमेश्वर के सत्य, ज्योति, और उद्धार का स्त्रोत न होने के कारण आ जाती हैं। जब दाऊद कहता है, “उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी” (पद 1), तो हमारा ध्यान इस पर जाता है कि हम कितनी बार संसार और संसार के लोगों, संसार की बातों की प्रशंसा करते हैं, और कितनी बार हमारे मुख से हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम, उसके कार्यों, उसकी देखभाल और उसके प्रावधानों की प्रशंसा होती है। जब दाऊद कहता है, “मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा”(पद 2), तो हमें एहसास होता है कि हम अपनी छोटी-छोटी सफलताओं और उपलब्धियों पर तो बहुत घमण्ड करते हैं, परन्तु प्रभु यीशु से मिले उद्धार और परमेश्वर की संतान होने के दर्जे को लेकर हम कितना घमण्ड करते हैं?

      हमारा अपनी पसंदीदा खेल की टीमों में, अपनी रुचियों में, और अपनी उपलब्धियों में आनन्द लेना गलत नहीं है। परन्तु हमारी सर्वोच्च प्रशंसा और निष्ठा हमारे प्रभु परमेश्वर के लिए होनी चाहिए। - डेव ब्रैनन

सच्चे प्रेम की कसौटी सच्ची निष्ठा है।

हे देश देश के लोगो, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ – भजन 66:8

बाइबल पाठ: भजन 34:1-7
Psalms 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psalms 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।
Psalms 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 14-16
  • मरकुस 12:28-44



मंगलवार, 10 मार्च 2020

शान्ति और आश्वासन



      मैं दुकान में कुछ खरीदने के लिए गई थी, और मैंने देखा की एक मुझ से अधिक आयु की महिला भी दुकान के उसी भाग में सामान को देखते हुए इधर से उधर चहल-कदमी कर रही थी, मानो वह कुछ ढूँढ़ रही थी। जब वह ढूँढती हुई मेरे पास पहुँची तो हमारी बातचीत होने लगी, और हमारी बातचीत का विषय हमारे क्षेत्र में चल रहे सर्दी और नज़ले का संक्रमण बन गया जिसके कारण उस महिला को खांसी और सिरदर्द हो रहा था। शीघ्र ही उस महिला ने इस संक्रमण के विषय अपने विचारों को कटु शब्दों में व्यक्त करना आरम्भ कर दिया, और मैं असमंजस में पड़ी चुपचाप उसकी बात सुनती रही। थोड़ी देर में वह दुकान से अपना सामान लेकर चली गई, क्रुद्ध और खिसियाई हुई। यद्यपि उस महिला ने अपनी खिसियाहट व्यक्त कर दी थी, परन्तु मैं उसके दुःख को कम करने के लिए कुछ नहीं कर सकी।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में, इस्राएल के दूसरे राजा, दाऊद ने, अपने कुछ भजनों में परमेश्वर के सम्मुख अपना क्रोध और कुण्ठा व्यक्त की। दाऊद जानता था कि परमेश्वर न केवल सुनता है, वरन परमेश्वर दाऊद के दुःख के विषय कुछ कर भी सकता है। दाऊद ने भजन 61 में लिखा, “मूर्छा खाते समय मैं पृथ्वी की छोर से भी तुझे पुकारूंगा, जो चट्टान मेरे लिये ऊंची है, उस पर मुझ को ले चला; क्योंकि तू मेरा शरणस्थान है, और शत्रु से बचने के लिये ऊंचा गढ़ है” (पद 2, 3); परमेश्वर उसका शरणस्थान था – वह दृढ़ चट्टान जिसकी शरण में दाऊद भागकर जाता था।

      हम जब दुखी होते हैं, या किसी ऐसे जन के संपर्क में आते हैं जो दुखी है, तो अनुसरण करने के लिए दाऊद का उदाहरण उपयुक्त है। काश कि, उस दिन उस दुकान में, मैंने उस महिला से परमेश्वर के बारे में कुछ बात की होती। चाहे परमेश्वर हमारे सारे दुःख को कम न भी करे, फिर भी हम उससे मिलने वाली शान्ति में विश्राम कर सकते हैं, और हमें यह आश्वासन है कि वह हमारी सुनता अवश्य है। - लिंडा वॉशिंगटन

दृढ़ चट्टान पर विश्राम करें।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 61
Psalms 61:1 हे परमेश्वर, मेरा चिल्लाना सुन, मेरी प्रार्थना की ओर घ्यान दे।
Psalms 61:2 मूर्छा खाते समय मैं पृथ्वी की छोर से भी तुझे पुकारूंगा, जो चट्टान मेरे लिये ऊंची है, उस पर मुझ को ले चल;
Psalms 61:3 क्योंकि तू मेरा शरणस्थान है, और शत्रु से बचने के लिये ऊंचा गढ़ है।
Psalms 61:4 मैं तेरे तम्बू में युगानुयुग बना रहूंगा। मैं तेरे पंखों की ओट में शरण लिये रहुंगा
Psalms 61:5 क्योंकि हे परमेश्वर, तू ने मेरी मन्नतें सुनीं, जो तेरे नाम के डरवैये हैं, उनका सा भाग तू ने मुझे दिया है।
Psalms 61:6 तू राजा की आयु को बहुत बढ़ाएगा; उसके वर्ष पीढ़ी पीढ़ी के बराबर होंगे।
Psalms 61:7 वह परमेश्वर के सम्मुख सदा बना रहेगा; तू अपनी करूणा और सच्चाई को उसकी रक्षा के लिये ठहरा रख।
Psalms 61:8 और मैं सर्वदा तेरे नाम का भजन गा गाकर अपनी मन्नतें हर दिन पूरी किया करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 11-13
  • मरकुस 12:1-27



सोमवार, 9 मार्च 2020

आज्ञाकारी



      मेरी दूसरी बेटी, ब्रिटा, अपनी बड़ी बहन के कमरे में, बड़े बच्चों के बिस्तर में सोने के लिए बहुत उत्सुक्त रहती थी। मैं हर रात्रि उसे वहां बिस्तर में सुलाती थी, और उसे निर्देश देती थी कि वह बिस्तर में ही रहे, वहां से उतर कर कहीं नहीं जाए, अन्यथा मैं उसे उसके छोटे बच्चों के खटोले में ही लेटा दूंगी। किन्तु मैं बहुत बार उसे बिस्तर से निकल कर गलियारे में घूमते हुए पाती थी, और मुझे अपनी निरुत्साहित बेटी को लेजा कर खटोले में सुलाना पड़ता था। कई वर्षों के बाद मुझे पता चला की उसकी बड़ी बहन उसके साथ अपना कमरा बाँटना नहीं चाहती थी, इसलिए सामान्यतः ब्रिटा से प्रेम भाव दिखाते रहने वाली वह बहन, रात में उसे अपने कमरे से बाहर भेजने के लिए, उससे कहती थी की उसे सुनाई दिया है कि माँ ब्रिटा को बुला रही है, और ब्रिटा अपनी बहन की बात मानकर, मेरे निर्देशों की अनसुनी करके, बिस्तर से निकलकर मुझे ढूँढने बाहर आ जाती थी, और फिर मुझे उसे खटोले में लेटाना पड़ता था।

      हम सभी को गलत आवाज़ को सुनने और मानने के गलत परिणाम भुगतने पड़ते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब परमेश्वर ने एक जन को बेतेल भेजा, तो उसे स्पष्ट निर्देश भी दिए कि वहां पर वह न तो कुछ खाए और न कुछ पीए, और न ही जिस मार्ग से गया था उसी मार्ग से लौटे (1 राजाओं 13:9)। इसलिए जब राजा यारोबाम ने उसे अपने साथ भोजन करने के लिए आमंत्रित किया तो उस नबी ने राजा के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया। परन्तु कुछ समय के बाद जब एक वृद्ध नबी ने उसे अपने साथ आने और उसके घर में भोजन के लिए कहा, तो पहले तो उसने मना किया, किन्तु फिर उसने वृद्ध नबी की झूठी बातों में आकर उस का निमंत्रण स्वीकार कर लिया और उस वृद्ध नबी के घर जाकर, परमेश्वर के निर्देशों के विरुद्ध, भोजन कर लिया, और इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़े।

      जैसे मैं चाहती थी कि ब्रिटा बड़े बच्चों के बिस्तर पर सोने का आनन्द ले, किन्तु बहकावे में आकर अनाज्ञाकारिता करना उसे भारी पड़ता था, उसी प्रकार परमेश्वर भी चाहता है कि हम उसके आज्ञाकारी बने रहें, क्योंकि उसने अपनी आज्ञाएं हमारी भलाई के लिए हमें दी हैं, और हमारा आज्ञाकारी न रहना उसे दुखी करता है तथा हमें हानि पहुँचाता है। - कर्स्टन होल्म्बर्ग

परमेश्वर का वचन ही सबसे अधिक महत्त्व रखता है।

भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे! – व्यवस्थाविवरण 5:29

बाइबल पाठ: 1 राजाओं 13:11-22
1 Kings 13:11 बेतेल में एक बूढ़ा नबी रहता था, और उसके एक बेटे ने आकर उस से उन सब कामों का वर्णन किया जो परमेश्वर के जन ने उस दिन बेतेल में किए थे; और जो बातें उसने राजा से कही थीं, उन को भी उसने अपने पिता से कह सुनाया।
1 Kings 13:12 उसके बेटों ने तो यह देखा था, कि परमेश्वर का वह जन जो यहूदा से आया था, किस मार्ग से चला गया, सो उनके पिता ने उन से पूछा, वह किस मार्ग से चला गया?
1 Kings 13:13 और उसने अपने बेटों से कहा, मेरे लिये गदहे पर काठी बान्धो; तब उन्होंने गदहे पर काठी बान्धी, और वह उस पर चढ़ा,
1 Kings 13:14 और परमेश्वर के जन के पीछे जा कर उसे एक बांजवृझ के तले बैठा हुआ पाया; और उस से मूछा, परमेश्वर का जो जन यहूदा से आया था, क्या तू वही है?
1 Kings 13:15 उसने कहा हां, वही हूँ। उसने उस से कहा, मेरे संग घर चलकर भोजन कर।
1 Kings 13:16 उसने उस से कहा, मैं न तो तेरे संग लौट सकता, और न तेरे संग घर में जा सकता हूँ और न मैं इस स्थान में तेरे संग रोटी खाऊंगा, वा पानी पीऊंगा।
1 Kings 13:17 क्योंकि यहोवा के वचन के द्वारा मुझे यह आज्ञा मिली है, कि वहां न तो रोटी खाना और न पानी पीना, और जिस मार्ग से तू जाएगा उस से न लौटना।
1 Kings 13:18 उसने कहा, जैसा तू नबी है वैसा ही मैं भी नबी हूँ; और मुझ से एक दूत ने यहोवा से वचन पाकर कहा, कि उस पुरुष को अपने संग अपने घर लौटा ले आ, कि वह रोटी खाए, और पानी पीए। यह उसने उस से झूठ कहा।
1 Kings 13:19 अतएव वह उसके संग लौट गया और उसके घर में रोटी खाई और पानी पीया।
1 Kings 13:20 और जब वे मेज पर बैठे ही थे, कि यहोवा का वचन उस नबी के पास पहुंचा, जो दूसरे को लौटा ले आया था।
1 Kings 13:21 और उसने परमेश्वर के उस जन को जो यहूदा से आया था, पुकार के कहा, यहोवा यों कहता है इसलिये कि तू ने यहोवा का वचन न माना, और जो आज्ञा तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे दी थी उसे भी नहीं माना;
1 Kings 13:22 परन्तु जिस स्थान के विषय उसने तुझ से कहा था, कि उस में न तो रोटी खाना और न पानी पीना, उसी में तू ने लौट कर रोटी खाई, और पानी भी पिया है इस कारण तुझे अपने पुरखाओं के कब्रिस्तान में मिट्टी नहीं दी जाएगी।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33