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रविवार, 1 नवंबर 2020

दया


         ऐनी फ्रैंक अपनी डायरी के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसमें उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के समय उनके परिवार के वर्षों तक नात्ज़ियों से छिपते रहने का वर्णन लिखा है। बाद में जब उन्हें पकड़ लिया गया और नात्ज़ी मृत्यु शिविर में भेज दिया गया, तो उनके साथ के लोग बताते हैं कि “उन लोगों के लिए उनके आँसू कभी नहीं रुके; और जितने उन्हें जानते थे, उन सब के लिए वे एक धन्य उपस्थिति थीं।” इस बात के कारण विद्वान केनेथ बेली का निष्कर्ष था कि ऐनी दया दिखाने में कभी नहीं थकीं।

         पाप से बुरी तरह से टूटे हुए इस संसार में दया दिखाते-दिखाते थक जाना संसार में व्याप्त बुराई का एक दुष्परिणाम हो सकता है। हम चाहे कितने भी उत्तम इरादे रखते हों, किन्तु मानव दुःख की वास्तविक मात्रा हम में से किसी को भी अभिभूत कर सकती है। परन्तु यह थकान प्रभु यीशु के चरित्र का भाग नहीं थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती 9:35-36 में हम देखते हैं “और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे।”

         हमारा संसार न केवल भौतिक आवश्यकताओं से ग्रसित है, वरन इस में आत्मिक टूटापन भी बहुत है। प्रभु यीशु इस आत्मिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए आए थे और उन्होंने अपने अनुयायियों को इस कार्य में संलग्न रहने के लिए कहा (पद 37-38)। प्रभु ने प्रार्थना की, कि पिता परमेश्वर ऐसे सेवकों को खड़ा करे जो चारों ओर की इस आवश्यकता के साथ जूझ सकें – लोगों की अकेलेपन, पाप, और बीमारी की परिस्थितियों के साथ।

         हमारा प्रभु परमेश्वर हमें ऐसा मन दे कि हम उसके मन के अनुसार कार्य करने वाले बनें। प्रभु परमेश्वर की आत्मा की सहायता से हम दुःख उठाने वालों पर प्रभु के समान दया दिखा सकते हैं। - बिल क्राउडर

 

दुःख से भरे संसार में हम प्रभु यीशु की दया को दिखा सकते हैं।


जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:5

बाइबल पाठ: मत्ती 9:35-38

मत्ती 9:35 और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा।

मत्ती 9:36 जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे।

मत्ती 9:37 तब उसने अपने चेलों से कहा, पक्के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं।

मत्ती 9:38 इसलिये खेत के स्वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2

शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

आशा


         एक दन्त कथा के अनुसार, क्यू यान एक बुद्धिमान और देश भक्त सरकारी अधिकारी था जो चीन में उस समय में रहता था जिसे राज्यों में परस्पर युद्ध का समय (475-246 ईसा पूर्व) कहा जाता है। कहा जाता है कि उसने कई बार अपने राजा को चिताया कि एक संभावित खतरा देश को नाश कर देगा, परन्तु राजा ने उसके परामर्श को स्वीकार नहीं किया। अन्ततः क्यू यान को देश से निकाल दिया गया। बाद में जब उसे मालूम पड़ा कि उसका प्रिय देश उसी शत्रु के हाथों पराजित हो गया है जिसके विषय वह चेतावनी दिया करता था, तो उसने आत्म-हत्या कर ली।

         क्यू यान का जीवन कुछ अंश तक परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह नबी के जीवन के समान है। यिर्मयाह भी ऐसे राजाओं के समय में सेवकाई करता था जो उसकी चेतावनियों को तुच्छ जानते थे, उनकी अवहेलना करते थे, और उसका देश भी नाश कर दिया गया। किन्तु जबकि क्यू यान ने निराश होकर आत्मा-हत्या कर ली, यिर्मयाह को अपनी निराशा में भी वास्तविक आशा मिली। यह भिन्न प्रतिक्रिया क्यों?

         ऐसा इसलिए क्योंकि यिर्मयाह उस एकमात्र सच्चे जीवते परमेश्वर को जानता था और उसी की सेवकाई करता था जो सच्ची आशा दे सकता था। परमेश्वर ने यिर्मयाह को आश्वासन दिया था, “अन्त में तेरी आशा पूरी होगी, यहोवा की यह वाणी है, तेरे वंश के लोग अपने देश में लौट आएंगे” (यिर्मयाह 31:17)। चाहे यरूशलेम का 586 ईसा पूर्व में नाश कर दिया गया, किन्तु बाद में उसका पुनःनिर्माण भी किया गया (देखें नहेम्याह 6:15)।

         किसी न किसी समय हम सभी को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है जिन से निराशा होती है। यह कोई बुरी चिकित्सकीय रिपोर्ट हो सकती है, अचानक ही नौकरी का छूटना हो सकता है, परिवार में कोई त्रासदी या विघटन हो सकता है। परन्तु जब भी जीवन हम मसीही विश्वासियों पर प्रहार कर के हमें गिराए, हम उस परिस्थिति में भी ऊपर अपने प्रभु परमेश्वर की ओर देख सकते हैं – क्योंकि परमेश्वर अपने सिंहासन पर विराजमान है, और सदा रहेगा। वही हमारे सभी दिनों को अपने हाथों में सुरक्षित रखता है, और हमें अपने हृदय के निकट बनाए रखता है। हमारी आशा अटल है। - पोह फैंग चिया

 

संसार सर्वोत्तम की आशा रखता है, 

परन्तु केवल प्रभु ही सर्वोत्तम आशा देता है। - जॉन वेस्ली


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 31:16-26

यिर्मयाह 31:16 यहोवा यों कहता हे: रोने-पीटने और आंसू बहाने से रुक जा; क्योंकि तेरे परिश्रम का फल मिलने वाला है, और वे शत्रुओं के देश से लौट आएंगे।

यिर्मयाह 31:17 अन्त में तेरी आशा पूरी होगी, यहोवा की यह वाणी है, तेरे वंश के लोग अपने देश में लौट आएंगे।

यिर्मयाह 31:18 निश्चय मैं ने एप्रैम को ये बातें कह कर विलाप करते सुना है कि तू ने मेरी ताड़ना की, और मेरी ताड़ना ऐसे बछड़े की सी हुई जो निकाला न गया हो; परन्तु अब तू मुझे फेर, तब मैं फिरूंगा, क्योंकि तू मेरा परमेश्वर है।

यिर्मयाह 31:19 भटक जाने के बाद मैं पछताया: और सिखाए जाने के बाद मैं ने छाती पीटी: पुराने पापों को स्मरण कर मैं लज्जित हुआ और मेरा मुंह काला हो गया।

यिर्मयाह 31:20 क्या एप्रैम मेरा प्रिय पुत्र नहीं है? क्या वह मेरा दुलारा लड़का नहीं है? जब जब मैं उसके विरुद्ध बातें करता हूं, तब तब मुझे उसका स्मरण हो आता है। इसलिये मेरा मन उसके कारण भर आता है; और मैं निश्चय उस पर दया करूंगा, यहोवा की यही वाणी है।

यिर्मयाह 31:21 हे इस्राएली कुमारी, जिस राजमार्ग से तू गई थी, उसी में खम्भे और झण्डे खड़े कर; और अपने इन नगरों में लौट आने पर मन लगा।

यिर्मयाह 31:22 हे भटकने वाली कन्या, तू कब तक इधर उधर फिरती रहेगी? यहोवा की एक नई सृष्टि पृथ्वी पर प्रगट होगी, अर्थात नारी पुरुष की सहायता करेगी।

यिर्मयाह 31:23 इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है: जब मैं यहूदी बंधुओं को उनके देश के नगरों में लौटाऊंगा, तब उन में यह आशीर्वाद फिर दिया जाएगा: हे धर्म भरे वास-स्थान, हे पवित्र पर्वत, यहोवा तुझे आशीष दे!

यिर्मयाह 31:24 और यहूदा और उसके सब नगरों के लोग और किसान और चरवाहे भी उस में इकट्ठे बसेंगे।

यिर्मयाह 31:25 क्योंकि मैं ने थके हुए लोगों का प्राण तृप्त किया, और उदास लोगों के प्राण को भर दिया है।

यिर्मयाह 31:26 इस पर मैं जाग उठा, और देखा, ओर मेरी नींद मुझे मीठी लगी।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

सहमत


         मुझे ध्यान है कि मेरे पिता बताया करते थे कि परमेश्वर के वचन बाइबल की बातों की भिन्न व्याख्याओं के कारण होने वाले और कभी समाप्त न होने वाले विवादों से अपने आप को पृथक कर लेना कितना कठिन होता था। लेकिन साथ ही वे यह भी स्मरण करते थे कि कितना भला होता था जब दोनों पक्ष आदर के साथ असहमत होने के लिए सहमत हो जाते थे।

         परन्तु क्या यह वास्तव में संभव है कि हम अपने कभी ना सुलझाए जा सकने वाले मतभेदों को एक ओर कर दें, विशेषतः तब जब इतना कुछ दाँव पर लगा हो? यह उन प्रश्नों में से एक है जिसे प्रेरित पौलुस ने नए नियम में रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में संबोधित किया। उसने राजनीतिक, सामाजिक, और धार्मिक संघर्षों में फंसे हुए अपने पाठकों को सुझाव दिया कि वे अपने अत्यधिक विपरीत विचारों के होते हुए भी कुछ परस्पर सामान्य आधार और विचार खोजने के प्रयास करें (14:5-6)।

         पौलुस के अनुसार, असहमत होने के लिए सहमत होने का तरीका है कि हम सभी इस तथ्य को याद करते रहें कि हमें प्रभु परमेश्वर के सामने न केवल अपने विचारों के लिए वरन उन्हें व्यक्त करने के तरीकों और एक दूसरे से अपने मतभेदों के कारण किए गए व्यवहारों के लिए भी उत्तर देना होगा (पद 10)।

         मतभेदों की परिस्थितियाँ यह स्मरण रखने के अवसर बन सकती हैं कि कुछ बातें हमारे अपने विचारों से भी अधिक महत्वपूर्ण होती हैं – बाइबल की व्याख्या करने से भी अधिक महत्वपूर्ण। हम सभी को इसका उत्तर देना होगा कि हम ने एक दूसरे से, यहाँ तक कि अपने शत्रुओं से भी, मसीह यीशु के समान प्रेम किया है कि नहीं?

         और अब जब यह बात ध्यान में आई है, तो मुझे यह भी स्मरण आता है कि पिताजी कहते थे कि कितना अच्छा होता है न केवल असहमत होने के लिए सहमत होना, परन्तु इसके लिए परस्पर प्रेम और आदर के साथ सहमत होना। - मार्ट डीहान

 

हम असहमत होने के लिए सहमत हो सकते हैं – प्रेम के साथ।


सो यदि मसीह में कुछ शान्ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करुणा और दया है। तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। - फिलिप्पियों 2:1-3

बाइबल पाठ: रोमियों 14:1-13

रोमियों 14:1 जो विश्वास में निर्बल है, उसे अपनी संगति में ले लो; परन्तु उसी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं।

रोमियों 14:2 क्योंकि एक को विश्वास है, कि सब कुछ खाना उचित है, परन्तु जो विश्वास में निर्बल है, वह साग पात ही खाता है।

रोमियों 14:3 और खानेवाला न-खाने वाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खाने वाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।

रोमियों 14:4 तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्थिर रहना या गिर जाना उसके स्वामी ही से सम्बन्ध रखता है, वरन वह स्थिर ही कर दिया जाएगा; क्योंकि प्रभु उसे स्थिर रख सकता है।

रोमियों 14:5 कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर जानता है, और कोई सब दिन एक सा जानता है: हर एक अपने ही मन में निश्चय कर ले।

रोमियों 14:6 जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है: जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्योंकि वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है, और जा नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्वर का धन्यवाद करता है।

रोमियों 14:7 क्योंकि हम में से न तो कोई अपने लिये जीता है, और न कोई अपने लिये मरता है।

रोमियों 14:8 क्योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जीएं या मरें, हम प्रभु ही के हैं।

रोमियों 14:9 क्योंकि मसीह इसी लिये मरा और जी भी उठा कि वह मरे हुओं और जीवतों, दोनों का प्रभु हो।

रोमियों 14:10 तू अपने भाई पर क्यों दोष लगाता है? या तू फिर क्यों अपने भाई को तुच्छ जानता है? हम सब के सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के सामने खड़े होंगे।

रोमियों 14:11 क्योंकि लिखा है, कि प्रभु कहता है, मेरे जीवन की सौगन्ध कि हर एक घुटना मेरे सामने टिकेगा, और हर एक जीभ परमेश्वर को अंगीकार करेगी।

रोमियों 14:12 सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा।

रोमियों 14:13 सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के सामने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 20-21
  • 2 तिमुथियुस 4

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2020

कृतज्ञ


         निरंतर बने रहने वाली पीड़ा और कुण्ठाओं तथा मेरी बहुत सीमित गतिशीलता के कारण होने वाली निराशाओं ने अन्ततः मुझे दबोच ही लिया था। मैं बहुत अधिक माँग करते रहने वाली और अधन्यवादी हो गई। मैं अपने पति द्वारा की जा रही मेरी देखभाल के बारे में शिकायतें करने लगी। जैसे वो घर की सफाई करते थे, मैं उसे लेकर कुड़कुड़ाती रहती थी। और यद्यपि मेरे पति मेरी जानकारी में सबसे उत्तम खाने बनाने वाले हैं, फिर भी मैं हमारे भोजनों में विविधता को लेकर खिसियाती रहती थी। जब अन्ततः मेरे पति ने मुझे कहा कि मेरे इस व्यवहार से उन्हें ठेस पहुँचती है तो मैं क्रोधित होने लगी। उन्हें पता ही नहीं था कि मैं कैसा अनुभव कर रही हूँ। अन्ततः परमेश्वर ने मुझ पर मेरी गलतियों को प्रकट किया, और मैंने अपने पति से तथा परमेश्वर से क्षमा माँगी।

         परिस्थितियों में बदलाव होने की लालसा से शिकायत करना, कुड़कुड़ाना, और सम्बन्धों को बिगाड़ देने वाले आत्म-केन्द्रित व्यवहार को करना हो सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि इस्राएली इस दुविधा से परिचित थे। ऐसा लगता है कि वे कभी संतुष्ट नहीं होते थे, वरन हर समय परमेश्वर के प्रावधानों को लेकर कुड़कुड़ाते रहते थे (निर्गमन 17:1-3)। यद्यपि प्रभु अपने लोगों की देखभाल करता था, और उस जंगल में भी उन्हें प्रतिदिन “आकाश से भोजन वस्तु” (16:4) दिया करता था, वे अन्य प्रकार के भोजन की लालसा करने लगे (गिनती 11:4)। परमेश्वर द्वारा की जाने वाली उनकी प्रेम भरी चिंता और देखभाल को लेकर आनन्दित होने के स्थान पर वे इस्राएली कुछ और, कुछ बेहतर, कुछ भिन्न की चाह रखने लगे, या फिर उसकी जो उन्हें पहले मिला करता था (पद 4-6)। उन्होंने अपनी इस कुण्ठा को मूसा पर निकाला (पद 10-14)।

         परमेश्वर की भलाई तथा विश्वासयोग्यता पर भरोसा रखना हमें और कृतज्ञ बना देता है। आज हम उन अनगिनत तरीकों के लिए जिनके द्वारा वह हमारी चिंता तथा देखभाल करता है, हम अपने प्रभु परमेश्वर के धन्यवादी एवं कृतज्ञ हो सकते हैं। - सोहचील डिक्सन

 

कृतज्ञता पूर्ण स्तुति हमें संतुष्ट और परमेश्वर को आनन्दित करती है।


यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; - भजन संहिता 23:1-2

बाइबल पाठ: गिनती 11:1-11

गिनती 11:1 फिर वे लोग बुड़बुड़ाने और यहोवा के सुनते बुरा कहने लगे; निदान यहोवा ने सुना, और उसका कोप भड़क उठा, और यहोवा की आग उनके मध्य जल उठी, और छावनी के एक किनारे से भस्म करने लगी।

गिनती 11:2 तब मूसा के पास आकर चिल्लाए; और मूसा ने यहोवा से प्रार्थना की, तब वह आग बुझ गई,

गिनती 11:3 और उस स्थान का नाम तबेरा पड़ा, क्योंकि यहोवा की आग उन में जल उठी थी।

गिनती 11:4 फिर जो मिली-जुली भीड़ उनके साथ थी वह कामुकता करने लगी; और इस्राएली भी फिर रोने और कहने लगे, कि हमें मांस खाने को कौन देगा।

गिनती 11:5 हमें वे मछलियां स्मरण हैं जो हम मिस्र में सेंत-मेंत खाया करते थे, और वे खीरे, और खरबूजे, और गन्दने, और प्याज, और लहसुन भी;

गिनती 11:6 परन्तु अब हमारा जी घबरा गया है, यहां पर इस मन्ना को छोड़ और कुछ भी देख नहीं पड़ता।

गिनती 11:7 मन्ना तो धनिये के समान था, और उसका रंग रूप मोती का सा था।

गिनती 11:8 लोग इधर उधर जा कर उसे बटोरते, और चक्की में पीसते या ओखली में कूटते थे, फिर तसले में पकाते, और उसके फुलके बनाते थे; और उसका स्वाद तेल में बने हुए पुए का सा था।

गिनती 11:9 और रात को छावनी में ओस पड़ती थी तब उसके साथ मन्ना भी गिरता था।

गिनती 11:10 और मूसा ने सब घरानों के आदमियों को अपने अपने डेरे के द्वार पर रोते सुना; और यहोवा का कोप अत्यन्त भड़का, और मूसा को भी बुरा मालूम हुआ।

गिनती 11:11 तब मूसा ने यहोवा से कहा, तू अपने दास से यह बुरा व्यवहार क्यों करता है? और क्या कारण है कि मैं ने तेरी दृष्टि में अनुग्रह नहीं पाया, कि तू ने इन सब लोगों का भार मुझ पर डाला है?

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 18-19
  • 2 तिमुथियुस 3

बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

भरोसा


         जब कामिल और जोएल को पता चला कि उनकी आठ वर्षीय पुत्री, रीमा, को एक असाधारण प्रकार का कैंसर है तो वो टूट गए। उसकी इस बीमारी के कारण रीमा को मस्तिष्क का ज्वर और पक्षाघात हो गया, और रीमा कोमा में चली गई। अस्पताल की चिकित्सकीय टीम ने उन्हें परामर्श दिया कि उसके जीवित बचने की आशा बहुत ही धूमिल है, और वे उसके अंतिम संस्कार के लिए तैयारी करना आरंभ कर लें।

         कामिल और जोएल ने आश्चर्यकर्म होने के लिए प्रार्थना और उपवास किया। कामिल ने कहा कि “जब हम प्रार्थना कर रहे हैं तो साथ ही हमें परमेश्वर पर भरोसा भी रखना है। चाहे जो कुछ भी हो जाए, हमें बस प्रभु यीशु के समान ही प्रार्थना करने है कि पिता मेरी नहीं वरन आपकी इच्छा पूरी हो।” जोएल ने ईमानदारी से कहा, “परन्तु मैं तो बहुत चाहती हूँ कि परमेश्वर उसे चंगा कर दे!” कामिल ने कहा, “ठीक है! और हमें यह प्रार्थना करनी भी चाहिए! परन्तु जब हम अपने आप को परमेश्वर के हाथों में सौंप देते हैं और उसे निर्णय करने देते हैं, चाहे वह कठिन ही क्यों न हो, तो इससे परमेश्वर का आदर होता है; यही प्रभु यीशु ने भी किया था।”

         परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले प्रभु यीशु ने प्रार्थना की, “कि हे पिता यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले, तौभी मेरी नहीं परन्तु तेरी ही इच्छा पूरी हो” (लूका 22:42)। प्रभु ने यह कहने के द्वारा कि “इस कटोरे को हटा दे” क्रूस पर नहीं जाने देने की विनती की; परन्तु इसके बाद उन्होंने पिता की इच्छा को समर्पण किया और हमारे प्रति प्रेम के कारण क्रूस पर बलिदान हो गए।

         अपनी इच्छाओं को परमेश्वर को समर्पित कर देना सहज नहीं है, और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उसकी बुद्धिमानी को समझ पाना और भी कठिन होता है। कामिल और जोएल की प्रार्थनाओं का अद्भुत रीति से उत्तर आया – आज रीमा पन्द्रह वर्ष की है। हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे प्रत्येक संघर्ष को समझता है। जब हमारे लिए, उसकी विनती को स्वीकार नहीं भी किया गया, तब भी उसने दिखाया कि किस प्रकार हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना है। - जेम्स बैंक्स

 

परमेश्वर सदा ही हमारी प्रतिबद्धता एवं स्तुति के योग्य है।


क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। - हबक्कूक 3:17-18

बाइबल पाठ: लूका 22:39-46

लूका 22:39 तब वह बाहर निकलकर अपनी रीति के अनुसार जैतून के पहाड़ पर गया, और चेले उसके पीछे हो लिए।

लूका 22:40 उस जगह पहुंचकर उसने उन से कहा; प्रार्थना करो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो।

लूका 22:41 और वह आप उन से अलग एक ढेला फेंकने के टप्पे भर गया, और घुटने टेक कर प्रार्थना करने लगा।

लूका 22:42 कि हे पिता यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले, तौभी मेरी नहीं परन्तु तेरी ही इच्छा पूरी हो।

लूका 22:43 तब स्वर्ग से एक दूत उसको दिखाई दिया जो उसे सामर्थ्य देता था।

लूका 22:44 और वह अत्यन्त संकट में व्याकुल हो कर और भी हृदय वेदना से प्रार्थना करने लगा; और उसका पसीना मानो लहू  की बड़ी बड़ी बून्‍दों के समान भूमि पर गिर रहा था।

लूका 22:45 तब वह प्रार्थना से उठा और अपने चेलों के पास आकर उन्हें उदासी के मारे सोता पाया; और उन से कहा, क्यों सोते हो?

लूका 22:46 उठो, प्रार्थना करो, कि परीक्षा में न पड़ो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 15-17
  • 2 तिमुथियुस 2

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020

देना


         मेरी एक सहेली किराने की दुकान में पंक्ति में खड़ी होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही थी, जिससे अपने समान का भुगतान करे, और घर जाकर आराम करे। इतने में उसके सामने खड़े आदमी ने पीछे मुड़कर उसे खरीददारी में दस पौण्ड (लगभग 750-800 रुपए) की छूट मिलाने का एक कूपन पकड़ा दिया। मेरी सहेली की नींद पूरी नहीं हो रही थी, और वह थकी हुई थी; ऐसे में एक अजनबी के द्वारा की गई इस अनपेक्षित सहायता के कारण उसकी आँखों में आँसू आ गए और फिर इस प्रकार रो उठने के लिए वह अपने आप पर हंसने लगी। इस अनपेक्षित दया ने उसके हृदय को स्पर्श किया था और उस थकान के समय में उसे एक आशा प्रदान की थी।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देने के बारे में बहुत कुछ लिखा हुआ पाते हैं। इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में यह पौलुस प्रेरित का एक प्रमुख विषय है। पौलुस ने उन लोगों से अपने पुराने जीवन को पीछे छोड़कर नए जीवन को अपनाने के लिए कहा, क्योंकि वो अनुग्रह के द्वारा बचाए गए थे। उसने समझाया कि प्रभु यीशु के इस बचाने वाले अनुग्रह में होकर हम में “भले कार्य” करने की इच्छा आती है क्योंकि हम परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं और उसके द्वारा पहले से निर्धारित भले कार्यों के लिए सृजे गए हैं (2:10)। उस आदमी के समान, जिसने मेरी सहेली की सहायता की थी, हम भी परमेश्वर के प्रेम को अपने प्रतिदिन के कार्यों के द्वारा प्रकट कर सकते हैं।

         यह आवश्यक नहीं कि हम परमेश्वर के अनुग्रह को दर्शाने के लिए भौतिक वस्तुओं को बाँटें; हम अन्य अनेकों तरीकों से परमेश्वर के प्रेम को दिखा सकते हैं। जब कोई हम से बात करना चाह रहा हो तो उसकी बात सुनने के लिए उसे समय दे सकते हैं। यदि कोई हमारी सेवा कर रहा हो, तो उसके हाल-चाल पूछ कर उससे प्रेम दिखा सकते हैं। यदि कोई आवश्यकता में पड़ा हो तो उसकी सहायता करने के लिए हम अपने आप को उपलब्ध करवा सकते हैं। जब हम औरों को देने लगेंगे, तो हमें भी प्रत्युत्तर में आनन्द मिलने लगेगा (प्रेरितों 20:35)। - एमी बाउचर पाई

 

हमें परमेश्वर के प्रेम तथा भेंटों को औरों के साथ बांटने के लिए सृजा गया है।


मैं ने तुम्हें सब कुछ कर के दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्हालना, और प्रभु यीशु की बातें स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है; कि लेने से देना धन्य है। - प्रेरितों 20:35

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10

इफिसियों 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।

इफिसियों 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।

इफिसियों 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।

इफिसियों 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया।

इफिसियों 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)

इफिसियों 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया।

इफिसियों 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।

इफिसियों 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।

इफिसियों 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।

इफिसियों 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 12-14
  • 2 तिमुथियुस 1

सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

चरमोत्कर्ष


         मेरे माता-पिता ने मुझे हर प्रकार के संगीत, लोक-संगीत से लेकर शास्त्रीय संगीत तक, की सराहना करना सिखाया था। इसलिए जब मैं रूस के एक भव्य संगीत हॉल में मॉस्को राष्ट्रीय सिम्फनी द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे संगीत समारोह का आनन्द लेने जा रहा था, तो मेरे हृदय की धड़कनें बढ़ रही थीं। संगीत मण्डली के संचालक ने संगीत वाद्य बजाने वालों द्वारा, रूस के प्रसिद्ध संगीतकार चाईकोव्स्की, की संगीत रचना बजाने का संचालन करना आरंभ किया, और धुन विकसित होते-होते एक प्रबल चरमोत्कर्ष तक पहुँच गई। वह एक जादुई पल था, और समापन होते ही सभी श्रोताओं ने खड़े होकर ऊँची आवाज़ में उस उत्तम प्रस्तुतीकरण का अनुमोदन किया।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में वचन के लेख इतिहास के चरमोत्कर्ष के पल की ओर बढ़ते हैं: प्रभु यीशु मसीह का क्रूस और पुनरुत्थान। अदन की वाटिका में आदम और हव्वा के पाप में गिरने के कुछ ही समय बाद, परमेश्वर ने प्रतिज्ञा दी कि एक मुक्तिदाता आएगा (उत्पत्ति 3:15), और संपूर्ण पुराने नियम में यह विषय विकसित होता रहता है। इस प्रतिज्ञा की पूर्ति की पूर्व-झलक हम फसह के पर्व के मेमने के बलिदान में (निर्गमन 12:21), और भविष्यद्वक्ताओं की आशा में (1 पतरस 1:10), और परमेश्वर के लोगों की लालसा में देखते हैं।

         पहला यूहन्ना 4:14 पुष्टि करता है कि वह कहानी किस ओर बढ़ रही थी: “और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है” कैसे? परमेश्वर ने इस पाप से ग्रसित संसार के उद्धार की अपनी प्रतिज्ञा की पूर्ति प्रभु यीशु के क्रूस पर बलिदान और मृतकों में से उसके पुनरुत्थान के द्वारा की, जिससे संसार के उद्धार का मार्ग बन गया, और प्रभु यीशु ने हम मनुष्यों का परमेश्वर के साथ पुनर्मिलन का मार्ग तैयार कर के दे दिया। अब जो कोई उसके इस बलिदान और पाप क्षमा के मार्ग को स्वीकार करता है, उससे अपने पापों की क्षमा मांगकर अपने जीवन उसे समर्पित करता है, वह प्रभु परमेश्वर से पापों की क्षमा प्राप्त कर के, अनंतकाल तक उसके साथ स्वर्ग में रहने की प्रतिज्ञा को प्राप्त कर लेता है। एक दिन प्रभु यीशु आकर अपने विश्वासियों को अपने साथ स्वर्ग ले जाएगा।

         जब हम स्मरण करते हैं कि परमेश्वर के पुत्र ने हमारे लिए क्या किया है, तो हम हम पापी मनुष्यों के लिए परमेश्वर द्वारा किए गए कार्यों के चरमोत्कर्ष को प्रभु यीशु में होकर प्राप्त होने वाले अनुग्रह और छुटकारे में देखते हैं। - बिल क्राउडर

 

प्रभु के अनुग्रह और प्रेम की भेंट का आनन्द मनाएँ।


इसी उद्धार के विषय में उन भविष्यद्वक्ताओं ने बहुत ढूंढ़-ढांढ़ और जांच-पड़ताल की, जिन्होंने उस अनुग्रह के विषय में जो तुम पर होने को था, भविष्यवाणी की थी। - 1 पतरस 1:10

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:14-21

1 यूहन्ना 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है।

1 यूहन्ना 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।

1 यूहन्ना 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।

1 यूहन्ना 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।

1 यूहन्ना 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।

1 यूहन्ना 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।

1 यूहन्ना 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता।

1 यूहन्ना 4:21 और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 9-11
  • 1 तिमुथियुस 6