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बुधवार, 26 जनवरी 2011

स्वस्थ नज़रिया

जब कभी भी हम दूसरों को नीचा दिखाकर अपने आप को ऊंचा उठाना चाहते हैं, तो अन्ततः नतीजा हानिकारक ही होता है। यह बात एक नीतिकथा द्वारा स्पष्ट करी गई है: अपने तालाब में से एक बैल को पानी पीते देख कर एक छोटा मेंढक घबरा गया और तुरंत फुदक कर अपने दादा जी के पास उन्हें बताने के लिये पहुंचा। दादा जी ने उसकी बात सुनकर ठान लिया कि उनके पोते की दृष्टि में उसके दादा से बड़ा कोई नहीं होना चाहिये। इसलिये उस बुज़ुर्ग मेंढक ने अपने आप को फुलाया और पोते से पूछा, "क्या वह इससे भी बड़ा था?" पोते ने उत्तर दिया, "जी हां दादा जी, और भी बहुत बड़ा।" दादा जी ने अपने को और फुलाया और फिर वही प्रशन किया, और वही उत्तर मिला। बुजुर्ग मेंढक यह बर्दाशात नहीं कर सका, अपने आप को बड़ा बनाने के लिये वह स्वयं को इतना फूलाता गया कि वह फट गया।

अपने बारे में एक स्वस्थ नज़रिया रखना अच्छा है, लेकिन स्वस्थ और सच्चा नज़रिये और घमंड से फूल जाने में बहुत अन्तर है। परमेश्वर द्वारा जैसा और जितना हमें बनाया गया है, अपने आप को उससे अधिक आंकना खतरनाक साबित हो सकता है। अपने अहम को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम जो कुछ करें, हमारी जो भी उपलबधी हो, हम उसे अपने प्रति परमेश्वर के अनुग्रह का प्रतिफल जाने। ऐसा करने से ही हम व्यर्थ फूलने और अपने अहम को बढ़ाने की मूर्खता से बचे रहेंगे।

पौलुस प्रेरित ने इसे बहुत स्पष्ट रीति से कहा: "क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।" (रोमियों १२:३)

यदि हम अपने आप को फुलाते ही रहेंगे तो परिमाण से बाहर होकर फट पड़ेंगे। - पौल वैन गौर्डर


उपयोग होने लायक छोटा रहना ही परमेश्वर की दृष्टि में बड़ा होना है।

क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। - गलतियों ६:३


बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-५

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १४-१५
  • मत्ती १७

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

मधु से मीठा

मोनटाना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस धारणा को चुनौती दी कि व्यायाम से पहले शक्कर की अधिक मात्रा वाला नाशता लेने से शरीर को शीघ्र उर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने लम्बी दूरी की दौड़ में भाग लेने वाले धावकों का व्यायाम के लिये उपयोग होने वाली स्थावर साईकिलों पर परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि जिन धावकों ने परीक्षण से पहले शक्कर रहित पेय पिये थे वे, उनके मुकाबले जिन्होंने शक्कर युक्त पेय लिये थे, २५ प्रतिशत अधिक देर तक साईकिल चला सके। उनके परीक्षणों का निष्कर्ष था कि खिलाड़ियों के लिये बेहतर होगा यदि वे व्यायाम से पहले किसी शक्कर युक्त नाशते का उपयोग न करें।

राजा सुलेमान ने भी शहद के अत्याधिक सेवन के उदाहरण को लिया, एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिये - आत्मप्रशंसा के मधुर स्वाद में रत हो जाना। नीतिवचन के २५वें अध्याय में इस बुद्धिमान राजा ने आत्मप्रशंसा और घमंड के लिये दो चेतावनियां दीं (पद १४, २७)। लोगों में अपनी महिमा के प्रयास में लगे रहना निकट भविष्य के संदर्भ में तो अच्छा लग सकता है, लेकिन दीर्घ कालीन संदर्भ में यह हानिकारक ही होता है।

आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को निरंतर लेते रहने से अधिक किसी अन्य में हमें अन्दर से कमज़ोर करने की क्षमता नहीं। कितना भला हो यदि हम मधु से मीठे इस आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को तज कर परमेश्वर के प्रति विश्वास और अनुशासन में बने रहें। ऐसा करने से ही हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने की सच्ची भीतरी सामर्थ पा सकते हैं। - मार्ट डी हॉन


जब घमंड जीवन से बाहर निकलता है, तब ही परमेश्वर पर विश्वास अन्दर आता है।

जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही स्वयं की महिमा ढूंढना भी अच्छा नहीं। - नीतिवचन २५:२७


बाइबल पाठ: नीतिवचन २५:१४-२८

जैसे बादल और पवन बिना वृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ-मूठ दान देने वाले का बड़ाई मारना होता है।
धीरज धरने से न्यायी मनाया जाता है, और कोमल वचन हड्डी को भी तोड़ डालता है।
क्या तू ने मधु पाया? तो जितना तेरे लिये ठीक हो उतना ही खाना, ऐसा न हो कि अधिक खाकर उसे उगल दे।
अपने पड़ोसी के घर में बारम्बार जाने से अपने पांव को रोक ऐसा न हो कि वह खिन्न होकर घृणा करने लगे।
जो किसी के विरूद्ध झूठी साक्षी देता है, वह मानो हथौड़ा और तलवार और पैना तीर है।
विपत्ति के समय विश्वासघाती का भरोसा टूटे हुए दांत वा उखड़े पांव के समान है।
जैसा जाड़े के दिनों में किसी का वस्त्र उतारना वा सज्जी पर सिरका डालना होता है, वैसा ही उदास मन वाले के साम्हने गीत गाना होता है।
यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना, और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना;
क्योंकि इस रीति तू उसके सिर पर अंगारे डालेगा, और यहोवा तुझे इसका फल देगा।
जैसे उत्तरीय वायु वर्षा को लाती है, वैसे ही चुगली करने से मुख पर क्रोध छा जाता है।
लम्बे चौड़े घर में झगड़ालू पत्नी के संग रहने से छत के कोने पर रहना उत्तम है।
जैसा थके मान्दे के प्राणों के लिये ठण्डा पानी होता है, वैसा ही दूर देश से आया हुआ शुभ समाचार भी होता है।
जो धर्मी दुष्ट के कहने में आता है, वह गंदले सोते और बिगड़े हुए कुण्ड के समान है।
जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही स्वयं की महिमा ढूंढना भी अच्छा नहीं।
जिसकी आत्मा वश में नहीं वह ऐसे नगर के समान है जिसकी शहरपनाह नाका करके तोड़ दी गई हो।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १२-१३
  • मत्ती १६

सोमवार, 24 जनवरी 2011

एंड्रोमिडा का दृष्टिकोण

बीसवीं सदी के आरंभिक समय में अमेरिका के राष्ट्रपति थियोडोर रूज़्वेल्ट अपने मित्र के साथ प्रति रात्रि एक नियत कार्य करते थे। लेखक लेस्ली बी. फ्लिन ने इस के बारे में लिखा कि "रात को अपने विचार-विमर्श और बातचीत पूरी करने के बाद, यदि आसमान साफ होता तो वे दोनों बाहर जाते और आकाश के एक विशेष भाग पर अपनी दृष्टि करके खोजते रहते जब तक उन्हें एक धुंधला सा प्रकाश पुंज नहीं दिख जाता। जब वह दिख जाता तो वे दोनो एक साथ यह दोहराते ’वह छोटा सा दिखने वाला प्रकाश बिंदु एंड्रोमिडा नक्षत्र पुंज में स्थित स्पाइरल नक्षत्र समूह है। वह अकेला बिंदु हमारी आकाश गंगा नक्षत्र समूह जितना बड़ा है। वह करोड़ों नक्षत्र समूहों में से एक है और उसमें करोड़ों ऐसे सूर्य हैं जो हमारे सूर्य से कहीं बड़े हैं।’ फिर वे अन्त में कहते, ’अब जब हमने अपनी औकात समझ ली है, तो चलो अब दिन की समाप्ति करके सोने चलते हैं।’"

अहंकार सदा मसीही विश्वासी का शत्रु बना रहता है। उसके मन से गुपचुप भाव निकलते रहते हैं कि "मैं कितना महत्वपूर्ण हूं", या "मैं दूसरों से कितना अच्छा हूं।" हमें ऐसे सुझावों के फेर में आकर घमंड में गिर पड़ने से बचे रहना है, इससे पहले कि ऐसा कोई भी सुझाव मन में घर बनाए, उसे मन से उखाड़ फेंकना चाहिये। लगातार प्रार्थना, सदैव पवित्र आत्मा पर निरभर्ता और बाइबल के निरंतर अध्ययन से ही हम अपने संबंध में सही दृष्टिकोण रखने पाएंगे।

पौलूस एक ऐसा व्यक्ति था जिसके पास घमंड करने के लिये हम सब से अधिक करण थे, लेकिन उसने चिताया कि हम कभी अपने आप को हकीकत से अधिक बढ़ चढ़ कर न समझें (रोमियों १२:३)। राष्ट्रपति रूज़्वेल्ट के उदाहरण का अनुसरण करना अच्छा होगा। ’एंड्रोमिडा का दृष्टिकोण’ रखने से हम घमंड में गिरने से बचे रह सकते हैं। - डेव एगनर


मसीह की परछाईं में खड़े होने से हम अपने सही कद को देख सकते हैं।

विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है। - नीतिवचन १६:१८


बाइबल पाठ: नीतिवचन १६:१६-२२

बुद्धि की प्राप्ति चोखे सोने से क्या ही उत्तम है! और समझ की प्राप्ति चान्दी से अति योग्य है।
बुराई से हटना सीधे लोगों के लिये राजमार्ग है, जो अपने चालचलन की चौकसी करता, वह अपने प्राण की भी रक्षा करता है।
विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है।
घमण्डियों के संग लूट बांट लेने से, दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है।
जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ९-११
  • मत्ती १५:२१-३९

रविवार, 23 जनवरी 2011

औकात एवं घमंड

ब्रिटिश संसद के लिये एक नवनिर्वाचित व्यक्ति अपने परिवार को लंडन शहर दिखाने लाया, और बड़े घमंड से उन्हें लंडन का दौरा करवाने लगा। जब वे लंडन की भवय और विशाल वेस्टमिनिस्टर ऐब्बी में पहुंचे तो उसकी ८ वर्षीय पुत्री उस भवन की सुन्दरता और विशाल आकार देखकर भौंचक रह गई। उसकी इस प्रतिक्रिया पर उसके पिता ने गर्व से पूछा, "बेटी, तुम किस सोच में पड़ गईं?" उसने कहा, "पिताजी मैं सोच रही थी कि अपने घर में आप तो आप कितने बड़े लगते हैं लेकिन यहां इस भवन में कितने छोटे लग रहे हैं!"

घमंड अनजाने ही हमारे जीवनों मे घर बना लेता है और हमें पता भी नहीं चलता। जैसा हमें अपने आप को सोचना चाहिये, उस से अधिक कभी न सोचें (रोमियों १२:३)।

जब हम अपने ही दायरों में रहते हैं तो घमंडी हो जाना आसान होता है, लेकिन हमें अपनी औकात का पता तब ही चलता है जब हमें बड़े कामों, बड़ी परिस्थितियों, बड़ी चुनौतियों और बड़ी प्रतियोगिताओं का सामना करना पड़ता है। जैसे छोटे तालाबों में बड़ी बड़ी लगने वाली मछलियां सागर में पहुंच कर अपना असली आकार समझने पाती हैं, वैसे ही ऐसी बड़ी बातों के सम्मुख ही हमें अपनी असली औकात का पता चलता है।

परमेश्वर के वचन में जो एक बात स्पष्ट है वह यह कि उसे घंडियों से घृणा है। भजनकार ने परमेश्वर की अगुवाई में उसके संबंध में लिखा "...जिसकी आंखें चढ़ी हों और जिसका मन घमण्डी है, उसकी मैं न सहूंगा।" (भजन १०१:५); तथा याकूब ने कहा "...इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।" (याकूब ४:६)

यदि हम परमेश्वर के आत्मा के आगे दीन होकर उससे अनुरोध करें, तो वह हमारी वास्तविक स्थिति हमें दिखाने में हमारी सहायता करेगा और हमें घमंड से भी बचाए रखेगा। - रिचर्ड डी हॉन


जो परमेश्वर को जानते हैं वे नम्र रहेंगे, जो स्वयं अपनी हकीकत को जानते पहचानते हैं वे कभी घमंडी नहीं होंगे।

क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़ कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। - रोमियों १२:३


बाइबल पाठ: याकूब ४:१-१०

तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्‍या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?
तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं, तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्‍त नहीं कर सकते, तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं।
तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्‍छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो।
हे व्यभिचारिणयों, क्‍या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है।
क्‍या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्‍त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उस ने हमारे भीतर बसाया है, क्‍या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो?
वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।
इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा।
परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो।
दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्‍द उदासी में बदल जाए।
प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ७-८
  • मत्ती १५:१-२०

शनिवार, 22 जनवरी 2011

ऊंचा नाम करने की लालसा

एक साहसी व्यक्ति ने शिकागो शहर में स्थित १,४५४ फुट उंची स्टील और कांच से बनी इमारत ’सीयर्स टावर” पर उसकी बाहरी सतह पर से चढ़कर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसे करने के लिये उसे ५० पौंड वज़न चढ़ाई की सामग्री ढोनी पड़ी और ४० किलोमीटर प्रति घंटा की रफतार से चलती हवा का सामना करके भी स्थिर रहना पड़ा। जब तक वह इमारत के शिखर पर पहुंचा, उसका नाम चारों ओर फैल चुका था। लेकिन शिखर पर पहुंचते ही पुलिस ने उसे पकड़ कर अनुचित व्यवहार तथा दूसरे की सम्पत्ति में बिना आज्ञा घुसने और नुकसान पहुंचने के अपराध में पकड़ कर जेल में डाल दिया। उसकी ख्याति कुछ ही पल की थी।

इस घटना ने मुझे बाइबल में उत्पत्ति ११ अध्याय में वर्णित लोगों की याद दिलाई जिन्होंने बेबल की मीनार बनाना आरंभ किया। उन बलवाई लोगों ने अपना नाम ऊंचा करने की ठान रखी थी। वह मीनार प्रतीक थी उनकी महत्वकांक्षाओं और परमेश्वर के विरुद्ध एक जुट होने की। उन्होंने ठाना था कि "...आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बात करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े।" (उत्पत्ति ११:४) लेकिन परमेश्वर ने उनके स्वार्थी और परमेश्वर विरोधी इरादे सफल नहीं होने दिये। उसने उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल दी जिससे उनका आपसी संबंध टुट गया और मीनार का बनना रुक गया।

कई बार मसीही विश्वासी भी अपना नाम ऊंचा करने की महत्वकांक्षा में पड़कर अपने जीवन में से परमेश्वर को उसके उचित स्थान से उतार देते हैं। ऐसा तब होता है जब वे परमेश्वर से अपना ध्यान खींच कर, अपनी सामर्थ पर भरोसा करके अपने व्यवसाय, अपनी धार्मिकता या समाज में अपना स्थान बनाने में संलगन हो जाएं और परमेश्वर के कार्यों को नज़रंदाज़ कर दें। यदि एक विश्ववासी के जीवन में परमेश्वर आदर नहीं पाएगा, तो उसका स्वयं का भी आदर जाता रहेगा।

सदा ध्यान रखिये, जब जब आप अपने जीवन में परमेश्वर को ऊंचा उठाएंगे, वह भी आपको संसार में ऊंचा करेगा; और यदि आपके जीवन में परमेश्वर का सम्मान नहीं रहेगा, तो परमेश्वर द्वारा संसार में आपका सम्मान भी जाता रहेगा। - मार्ट डी हॉन


यदि ऊंचा उठना चाहते हैं तो झुकना और नम्र होना सीखिये।

फिर उन्होंने कहा, आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बात करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े। - उत्पत्ति ११:४


बाइबल पाठ: उत्पत्ति ११:१-९

सारी पृथ्वी पर एक ही भाषा, और एक ही बोली थी।
उस समय लोग पूर्व की और चलते चलते शिनार देश में एक मैदान पाकर उस में बस गए।
तब वे आपस में कहने लगे, कि आओ हम ईंटें बना बना के भली भांति आग में पकाएं, और उन्होंने पत्थर के स्थान में ईंट से, और चूने के स्थान में मिट्टी के गारे से काम लिया।
फिर उन्होंने कहा, आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बात करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े।
जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे तब इन्हें देखने के लिये यहोवा उतर आया।
और यहोवा ने कहा, मैं क्या देखता हूं, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्होंने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जितना वे करने का यत्न करेंगे, उस में से कुछ उनके लिये अनहोना न होगा।
इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।
इस प्रकार यहोवा ने उनको, वहां से सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया और उन्होंने उस नगर का बनाना छोड़ दिया।
इस कारण उस नगर का नाम बाबुल पड़ा क्योंकि सारी पृथ्वी की भाषा में जो गड़बड़ी है, सो यहोवा ने वहीं डाली, और वहीं से यहोवा ने मनुष्यों को सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ४-६
  • मत्ती १४:२२-३६

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

उद्धारकर्ता मेमना और न्यायी सिंह

प्रभु यीशु हमारे पापों के लिये अपने प्राण देने आया, और जो कोई उस पर विश्वास लाता है, वह उसे पाप के दण्ड से बचा लेता है। लेकिन एक समय आएगा जब पृथ्वी के लोगों के लिये पापों से उद्धार के लिये दिया गया यह अवसर जाता रहेगा। तब वह मेमना जो पापों के लिये बलिदान हुआ, फिर सिंह बन कर न्याय सिंहासन पर बैठेगा, और जितनों ने उसके उद्धार के प्रस्ताव को ठुकराया था वे सब उसके न्याय के आधीन होंगे।

बाइबल शिक्षक और लेखक वॉरन रिस्बी ने अपनी एक पुस्तक "Discover Yourself in the Psalms" में एक प्रचारक द्वारा सुनाई गई छोटी कहानी बताई: "एक घोड़ा बिदक गया और उससे जुति हुई बघ्घी लेकर भाग निकला। उस बघ्घी में एक बच्चा बैठा था। बच्चे की जान खतरे में देखकर एक नौजवान ने अपनी जान जोखिम में डाली और घोड़े को पकड़ कर काबू में कर लिया। यह बच्चा आगे चलकर बड़ा अपराधी हो गया। एक दिन वह पकड़ा गया और न्यायाधीश के सामने दण्ड के लिये लाया गया। उस अपराधी ने अपने न्यायाधीश को पहिचान लिया कि वह वही व्यक्ति था जिसने कई साल पहले उसकी जान बचाई थी। अपने उस अनुभव का उल्लेख करके अपराधी ने न्यायाधीश से पुनः अपने प्राणों के रक्षा की याचना करी। लेकिन न्यायाधीश ने उत्तर दिया: "ऐ जवान, उस समय की स्थिति में मैं तुम्हारा रक्षक था और मैंने तुम्हारी रक्षा करी, परन्तु आज मैं तुम्हारा न्यायी हूँ और मुझे तुम्हारी आज की स्थिति के आधार पर ही तुम्हारा न्याय करना है। तुम्हारे अपराधों के लिये मैं तुम्हें मृत्यु दण्ड की आज्ञा देता हूँ।"

आज प्रभु यीशु हमारे पापों के लिये मारा गया मेमना है, और उसका उद्धार का अवसर हमारे लिये खुला है। लेकिन अगर हम विश्वास में उसकी ओर नहीं मुड़ते और उसके उद्धार के प्रस्ताव को नहीं अपनाते, तो एक दिन वह हमारा न्यायी होगा जो खराई से हमारे उन पापों के अनुसार हमारा न्याय करेगा, जिनकी क्षमा के अवसर का हमने लाभ नहीं उठाया। वह तब कहेगा : "पृथ्वी पर मैं तुम्हारा उद्धारकर्ता था परन्तु तुमने मुझ पर विश्वास नहीं किया। अब यहां मैं तुम्हारा न्यायी हूँ, और तुम्हारे पापों में बने रहने की दशा के अनुसार, न्याय की मांग है कि अपने पापों के दण्ड के लिये तुम अनन्तकाल के नरक में डाले जाओ।"

जो अभी मेमने पर विश्वास लाएंगे, बाद में उन्हें न्यायासन पर विराजमन सिंह के न्याय का सामना नहीं करना पड़ेगा। - डेव एगनर


पृथ्वी पर रहकर जो हम मसीह के साथ करते हैं वही निर्धारित करता है कि स्वर्ग में मसीह हमारे साथ क्या करेगा।

तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो, देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहर तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है। और मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आंखे थीं, ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं। - प्रकाशितवाक्य ५:५, ६


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य ५

और जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्‍तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और वह सात मुहर लगाकर बन्‍द की गई थी।
फिर मैं ने एक बलवन्‍त स्‍वर्गदूत को देखा जो ऊंचे शब्‍द से यह प्रचार करता था कि इस पुस्‍तक के खोलने और उस की मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?
और न स्‍वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्‍तक को खोलने या उस पर दृष्‍टि डालने के योग्य निकला।
और मैं फूट फूट कर रोने लगा, क्‍योंकि उस पुस्‍तक के खोलने, या उस पर दृष्‍टि करने के योग्य कोई न मिला।
तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो, देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहर तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है।
और मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आंखे थीं, ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं।
उस ने आकर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्‍तक ले ली,
और जब उस ने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े, और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं।
और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है क्‍योंकि तू ने वध होकर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।
और उन्‍हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।
और जब मैं ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों की चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्‍द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी।
और वे ऊंचे शब्‍द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।
फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे।
और चारों प्राणियों ने आमीन कहा, और प्राचीनों ने गिरकर दण्‍डवत किया।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १-३
  • मत्ती १४:१-२१

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

यह मज़ाक नहीं है

भजन २ समाज के उन दुष्ट हाकिमों और नेताओं को संबोधित करता है जो सोचते थे कि वे परमेश्वर और उसके अभिशिक्त का विरोध करने में सफल रहेंगे। भजनकार कहता है कि परमेश्वर उनको ठ्ठों में उड़ाएगा।

W. S. Pulmer ने परमेश्वर के भय से रहित उन पुरुषों और स्त्रियों के बारे में लिखा जिन्हों ने मसीही विश्वासियों को सताया और मार डाला। पुलमर ने ऐसे ३० रोमी अफसरों के संबंध में लिखा कि, "उनमें से एक किसी भयानक ताड़ना के बाद पागल हो गया, एक की उसी के पुत्र ने हत्या कर दी, एक अन्धा हो गया, एक डूबकर मरा, एक को गला घोंट कर मार डाला गया, एक अति कठोर कारावास में तड़प कर मरा, दो ने आत्महत्या कर ली, पाँच को उनके अपने लोगों या नौकरों ने मार डाला, पाँच अन्य को बहुत यातना के साथ दर्दनाक मौत मरे और शेष या तो युद्ध में या बन्दी जाए कर मारे गए। इनमें से एक था जूलियन जो विधर्मी जूलियन के नाम से जाना जाता था। कहते हैं कि अपनी समृद्धि के दिनों में उसने अपनी तलवार आसमान की ओर उठा कर परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह को, जिसे वह निन्दा स्वरुप "गलीली" कहता था, को कोसा था। लेकिन जब वह युद्ध में घायल हुआ और उसने जाना कि अब उसका समय पूरा हो गया है, तो वह पुकार उठा "ऐ गलीली, तू ने आखिर मुझे हरा ही दिया।"

परमेश्वर का, जो यथा संभव, पापियों पर अनुग्रह करना चाहता है, किसी पापी के प्रति ठ्ठा करने की स्थिति तक जाना कोई मज़ाक की नहीं, बलकि अति गंभीर बात है। भजनकार ने लिखा "पुत्रा को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ; क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है। धन्य हैं वे जिनका भरोसा उस पर है।" (भजन २:१२)

आज मसीह यीशु में परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह आपके लिये उपलब्ध है। इससे पहले कि समय निकल जाए, उसे ग्रहण कर लीजिए। इसे हलके में न लीजिए, यह मज़ाक की बात नहीं है। - रिचर्ड डी हॉन


पाप से खिलवाड़, न्यय से खेलना है

वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हंसेगा, प्रभु उनको ठट्ठों में उड़ाएगा। - भजन २:४


बाइबल पाठ: भजन २

जाति जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश देश के लोग व्यर्थ बातें क्यों सोच रहे हैं?
यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरूद्ध पृथ्वी के राजा मिलकर, और हाकिम आपस में सम्मति करके कहते हैं, कि
आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, और उनकी रस्सियों अपने ऊपर से उतार फेंके।
वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हंसेगा, प्रभु उनको ठट्ठों में उड़ाएगा।
तब वह उन से क्रोध करके बातें करेगा, और क्रोध में कहकर उन्हें घबरा देगा, कि
मैं तो अपने ठहराए हुए राजा को अपने पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पर बैठा चुका हूं।
मैं उस वचन का प्रचार करूंगा: जो यहोवा ने मुझ से कहा, तू मेरा पुत्र है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ।
मुझ से मांग, और मैं जाति जाति के लोगों को तेरी सम्पत्ति होने के लिये, और दूर दूर के देशों को तेरी निज भूमि बनने के लिये दे दूंगा।
तू उन्हें लोहे के डण्डे से टुकड़े टुकड़े करेगा। तू कुम्हार के बर्तन की नाईं उन्हें चकना चूर कर डालेगा।
इसलिये अब, हे राजाओं, बुद्धिमान बनो, हे पृथ्वी के न्यायियों, यह उपदेश ग्रहण करो।
डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपते हुए मगन हो।
पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ; क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है। धन्य हैं वे जिनका भरोसा उस पर है।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४९-५०
  • मत्ती १३:३१-५८