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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

ईर्ष्या से बचाव

डाह और ईर्ष्या ऐसी भावनाएं हैं जो असंतुष्टि और रोष के कारण होती हैं। यह किसी अन्य के भले गुणों या उसकी संपदा को पाने की लालसा से हो सकता है। राहेल ने अपनी बहन लीआः से डाह रखी क्योंकि वह स्वयं बांझ थी किन्तु लिआः के सन्तान उत्पन्न होती थी (उत्पत्ति ३०:१); यूसुफ के भाईयों ने उससे ईर्ष्या करी क्योंकि उसने स्वप्न में भविष्य के दर्शन देखे थे (उत्पत्ति ३७:११); शाउल को दाउद से ईर्ष्या हुई क्योंकि उसके राज्य की महिलाएं दाउद की प्रशंसा करने लगीं (१ शमुएल १८:७-९); यहूदियों को पौलुस से ईर्ष्या हुई क्योंकि उसके प्रचार की सभी सराहना करते थे और प्रभावित होते थे (प्रेरितों १३:४५)।

दूसरे कि कोई भी योग्यता, जैसे बुद्धिमता, सुन्दरता, लोकप्रीयता, यहाँ तक कि आत्मिक बातों की समझ भी लोगों में द्वेश और ईर्ष्या उतपन्न कर सकती है। मसीही विश्वासी भी, चाहे वह कितना भी बड़ा विश्वासी क्यों न हो, इस दुरभावना का शिकार होने के खतरे में रहता है।

जब मैसचूसटस प्रांत के नौर्थफील्ड शहर में एफ. बी. मेयर्स पहली बार प्रचार के लिए आए तो उनके द्वारा दिल छू लेने वाले सन्देश सुनने के लिए लोगों की बड़ी भीड़ एकत्रित होने लगी। कुछ समय पश्चात महान बाइबल शिक्षक कैम्पबल मौर्गन उसी शहर में आए, और भीड़ उनकी सभाओं में जाने लगी। मेयर्स ने स्वीकार किया कि इस बात से उन्हें ईर्ष्या हुई; उन्होंने कहा, "अपनी इस दुर्भावना पर विजयी होने का मेरे पास एक ही उपाय है कि मैं मौर्गन की सफलता के लिए प्रार्थना करूं, और मैं रोज़ यही किया करता हूँ।"

जो हमारे पास नहीं है लेकिन किसी दूसरे के पास है, उसके प्रति नकरात्मक रवैया रखना, हमारे अन्दर पवित्र आत्मा के कार्य को बाधित करता है। लेकिन जब हम उसके भले की कामना करेंगे जिससे हमें ईर्ष्या होती है तभी हम अपने अन्दर से डाह और ईर्ष्या को उखाड़ कर फेंकने पाएंगे और इन दुरभावनाओं पर विजयी होने पाएंगे। - रिचर्ड डी हॉन


मसीह जैसे प्रेम की प्रतिदिन की खुराक ईर्ष्या रोग को हमारे अन्दर पनपने से बचा कर रखती है।

परन्‍तु यहूदी भीड़ को देखकर डाह से भर गए, और निन्‍दा करते हुए पौलुस की बातों के विरोध में बोलने लगे। - प्रेरितों १३:४५


बाइबल पाठ: प्रेरितों १३:४४-५२

Act 13:44 अगले सब्‍त के दिन नगर के प्राय: सब लोग परमेश्वर का वचन सुनने को इकट्ठे हो गए।
Act 13:45 परन्‍तु यहूदी भीड़ को देखकर डाह से भर गए, और निन्‍दा करते हुए पौलुस की बातों के विरोध में बोलने लगे।
Act 13:46 तब पौलुस और बरनबास ने निडर होकर कहा, अवश्य था, कि परमेश्वर का वचन पहिले तुम्हें सुनाया जाता; परन्‍तु जब कि तुम उसे दूर करते हो, और अपने को अनन्‍त जीवन के योग्य नहीं ठहराते, तो देखो, हम अन्यजातियों की ओर फिरते हैं।
Act 13:47 क्‍योकिं प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है कि मैंने तुझे अन्याजातियों के लिये ज्योति ठहराया है ताकि तू पृथ्वी की छोर तक उद्धार का द्वार हो।
Act 13:48 यह सुनकर अन्यजाति आनन्‍दित हुए, और परमेश्वर के वचन की बड़ाई करने लगे; और जितने अनन्‍त जीवन के लिये ठहराए गए थे, उन्‍होंने विश्वास किया।
Act 13:49 तब प्रभु का वचन उस सारे देश में फैलने लगा।
Act 13:50 परन्‍तु यहूदियों ने भक्त और कुलीन स्‍त्रियों को और नगर के बड़े लोगों को उकसाया, और पौलुस और बरनबास पर उपद्रव करवा कर उन्‍हें अपने सिवानों से निकाल दिया।
Act 13:51 तब वे उन के साम्हने अपने पांवों की धूल झाड़कर इकुनियुम को गए।
Act 13:52 और चेले आनन्‍द से और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते रहे।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल २७-२९
  • लूका १३:१-२२

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

ईर्ष्या की औषधि

इटली के पादुआ इलाके में एक चर्च में मध्यकालीन चित्रकार जियोटो द्वारा बनाया गया एक चित्र टंगा है। चित्रकार ने इस चित्र में "ईर्ष्या" को दिखाया है - उसके लम्बे लम्बे कान हैं जो किसी दूसरे की उपल्बधियों की सभी बातों की ओर लगे हैं, उसकी लम्बी सी ज़ुबान है, जो सांप की ज़ुबान के समान है जिससे वह अपने ईर्ष्या के पात्र की कीर्ति को विषाक्त करती है। लेकिन चित्र में एक अद्भुत बात भी दिखाई गई है - ईर्ष्य़ा की यह लम्बी सी ज़ुबान मुड़कर उसकी अपनी आंखों में घुसी हुई है, यह दिखाने के लिए कि न सिर्फ ईर्ष्या अन्धी होती है वरन वह अपना नुकसान भी खुद ही करती है।

सच है, ईर्ष्या और द्वेश से भरे मन से दुखी और अभागा और कोई नहीं हो सकता। ईर्ष्यालु व्यक्ति न केवल दूसरों की खुशियों को नाश करते हैं, वे दूसरों की उपल्ब्धियों को भी खराब करते हैं और अपनी ईर्ष्या में स्वयं ही जल जाते हैं।

ईर्ष्या उन पापों में से एक थी जो कुरिन्थुस के चर्च का नाश कर रही थी। उस चर्च के सदस्य एक दूसरे के आत्मिक वरदानों से डाह रखते थे, और वह मण्डली गुटों में विभाजित हो गई थी। हर कोई अपनी ही बड़ाई चाहता था। पौलुस ने उन्हें समझाया "...तुम बड़ी से बड़ी बरदानों की धुन में रहो! परन्‍तु मैं तुम्हें और भी सब से उत्तम मार्ग बताता हूं।" (१ कुरिन्थियों १२:३१) - प्रेम का मार्ग, क्योंकि " प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।" (१ कुरिन्थियों १३:४)

यदि हम दूसरों की सफलता पर अप्रसन्न होते हैं, कुड़कुड़ाते हैं और उनपर लांछन लगाते हैं, उनकी बुराई करते हैं, तो हम "ईर्ष्या रोग" से ग्रसित हैं, जिससे चंगा होने की "प्रेम औषधि" परमेश्वर हमें देना चाहता है।

प्रेम ही वह औषधि है जो हमें "ईर्ष्या रोग" से बचा सकती है। - डेव एगनर


दूसरों पर छोड़े गए ईर्ष्या के बाण, स्वयं हमें ही घायल करते हैं।

क्योंकि मूढ़ तो खेद करते करते नाश हो जाता है, और भोला जलते जलते मर मिटता है। - अय्युब ५:२


बाइबल पाठ: गलतियों ५:१९-२६

Gal 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
Gal 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।
Gal 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के ऐसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
Gal 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज,
Gal 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
Gal 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्‍होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषों समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Gal 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
Gal 5:26 हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल २५-२६
  • लूका १२:३२-५९

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

ईर्ष्या से प्रतिरोध

तकनीक विज्ञान में घर्षण से उतपन्न प्रतिरोध कार्य कुशलता का विरोधी है। इसी कारण वाहन निर्माता वाहन में कम से कम वायु-प्रतिरोध, आसानी से घूम सकने वाले टायर और अधिक से अधिक कार्य कुशल इंजनों पर ज़ोर देते हैं। वे वायु, सड़क और इंजन के पुर्ज़ों के घर्षण प्रतिरोध को कम से कम करना चाहते हैं।

बाइबल की गिनती नामक पुस्तक में हम एक ऐसे प्रतिरोध के बारे में पढ़ते हैं जो आपसी तनाव उतपन्न करता है, हमारी गवाही को खराब करता है, हमारी आराधना को रोकता है और हमारे जीवन में परमेश्वर के आत्मा के कार्य में बाधा डालता है। मिरियम द्वारा अपने भाई के विरुद्ध ईर्ष्या से किये गये विरोध के कारण परमेश्वर का क्रोध उन पर भड़का और इस्त्राएलियों के आगे बढ़ने में बाधा बना। जैसे मिरियम द्वारा उतपन्न प्रतिरोध इस्त्राएल के लिए बाधा बना, ऐसे ही आज भी चर्च के लोगों के आपसी संबंधों में आपसी ईर्ष्या और द्वेश उनकी बढ़ोतरी में बाधा हैं।

हम सबने विद्वेशियों के शब्दबाणों की वेदना का अनुभव किया है, लेकिन विद्वेश से सबसे अधिक तकलीफ उसे होती है जो विद्वेश को अपने मन में पालता है। ईर्ष्या ईर्ष्यालु व्यक्ति को अन्दर ही अन्दर खा जाती है और उसके आत्मिक तथा सांसारिक, दोनो जीवनों का नाश कर देती है। इसीलिए प्राचीन काल के दार्शनिक सुकरात (Socrates) ने ईर्ष्या को "आत्मा की आरी" कहा।

जब कभी हम विद्वेश के प्रतिरोध को अपने अन्दर अनुभव करें, हमें तुरंत परमेश्वर के सामने उसका अंगीकार कर लेना चाहिए और परमेश्वर से उसके ऊपर जयवंत होने की सामर्थ मांगनी चाहिए। साथ ही उन्हें भी क्षमा कर देना चाहिए जिन्होंने हमारा बुरा किया या चाहा; और जिनका हमने बुरा किया या चाहा, उनसे क्षमा मांग लेनी चाहिए।

ऐसा करने से हमारे अन्दर का "घर्षण प्रतिरोध" समाप्त हो जाएगा और हमारे जीवन में कार्य कुशलता पुनः लौट आएगी। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


हम एक ही समय में ईर्ष्यालु और कार्य कुशल नहीं हो सकते।

...क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के साथ बातें की हैं? क्या उस ने हम से भी बातें नहीं कीं? - गिनती १२:२


बाइबल पाठ: गिनती १२

Num 12:1 मूसा ने तो एक कूशी स्त्री के साथ ब्याह कर लिया था। सो मरियम और हारून उसकी उस ब्याहता कूशी स्त्री के कारण उसकी निन्दा करने लगे;
Num 12:2 उन्होंने कहा, क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के साथ बातें की हैं? क्या उस ने हम से भी बातें नहीं कीं? उनकी यह बात यहोवा ने सुनी।
Num 12:3 मूसा तो पृथ्वी भर के रहने वाले मनुष्यों से बहुत अधिक नम्र स्वभाव का था।
Num 12:4 सो यहोवा ने एकाएक मूसा और हारून और मरियम से कहा, तुम तीनों मिलापवाले तम्बू के पास निकल आओ। तब वे तीनों निकल आए।
Num 12:5 तब यहोवा ने बादल के खम्भे में उतर कर तम्बू के द्वार पर खड़ा होकर हारून और मरियम को बुलाया; सो वे दोनों उसके पास निकल आए।
Num 12:6 तब यहोवा ने कहा, मेरी बातें सुनो: यदि तुम में कोई नबी हो, तो उस पर मैं यहोवा दर्शन के द्वारा अपने आप को प्रगट करूंगा, वा स्वप्न में उस से बातें करूंगा।
Num 12:7 परन्तु मेरा दास मूसा ऐसा नहीं है; वह तो मेरे सब घरानों मे विश्वास योग्य है।
Num 12:8 उस से मैं गुप्त रीति से नहीं, परन्तु आम्हने साम्हने और प्रत्यक्ष होकर बातें करता हूं और वह यहोवा का स्वरूप निहारने पाता है। सो तुम मेरे दास मूसा की निन्दा करते हुए क्यों नहीं डरे?
Num 12:9 तब यहोवा का कोप उन पर भड़का, और वह चला गया;
Num 12:10 तब वह बादल तम्बू के ऊपर से उठ गया, और मरियम कोढ़ से हिम के समान श्वेत हो गई। और हारून ने मरियम की ओर दृष्टि की, और देखा, कि वह कोढ़िन हो गई है।
Num 12:11 तब हारून मूसा से कहने लगा, हे मेरे प्रभु, हम दोनों ने जो मूर्खता की वरन पाप भी किया, यह पाप हम पर न लगने दे।
Num 12:12 और मरियम को उस मरे हुए के समान न रहने दे, जिसकी देह अपनी मां के पेट से निकलते ही अधगली हो।
Num 12:13 सो मूसा ने यह कहकर यहोवा की दोहाई दी, हे ईश्वर, कृपा कर, और उसको चंगा कर।
Num 12:14 यहोवा ने मूसा से कहा, यदि उसका पिता उसके मुंह पर थूका ही होता, तो क्या सात दिन तक वह लज्जित न रहती? सो वह सात दिन तक छावनी से बाहर बन्द रहे, उसके बाद वह फिर भीतर आने पाए।
Num 12:15 सो मरियम सात दिन तक छावनी से बाहर बन्द रही, और जब तक मरियम फिर आने न पाई तब तक लोगों ने प्रस्थान न किया।
Num 12:16 उसके बाद उन्होंने हसेरोत से प्रस्थान करके पारान नाम जंगल में अपने डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल २२-२४
  • लूका १२:१-३१

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

ईर्ष्या का फन्दा

ईर्ष्या का एक कारण है दूसरे की तुलना में किसी बात अथवा वस्तु की घटी होना। ऐसा प्रतीत होता है कि असमानता ईर्ष्या को जन्म देती है।

जब मैं रेडियो प्रसारण के लिए लोगों से साक्षातकार करता था, तो मैं उनसे पूछता था कि क्या वे मानते हैं कि सब मनुष्य समान बनाए गए हैं? अधिकांशतः लोगों का उत्तर होता था "नहीं"; और अपने उत्तर के पक्ष में वे भिन्न भिन्न योग्यताओं, स्वरूप, परिस्थित्यों आदि का उदाहरण देते। एक व्यक्ति को शिकायत थी कि उसे सस्ते ढाबों या ठेलियों से सस्ता भोजन ही नसीब हो पाता है जबकि कितने ही लोग आलिशान होटलों में भोजन करते हैं। केवल एक ही व्यक्ति ने इस प्रश्न की गहराई को समझ कर उत्तर दिया। उसने कहा, "परमेश्वर की आधीनता में सब मनुष्य समान हैं।"

बाइबल सिखाती है कि सभी मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में सृजे गए हैं, और सभी मनुष्य परमेश्वर द्वारा उन्हें दिए गए गुणों और योग्यताओं के लिए परमेश्वर को जवाबदेह हैं - कि उन्होंने उन गुणों और योग्यताओं का कैसे उपयोग किया; सभी मनुष्यों को एक दिन मरना भी है और परमेश्वर के न्यायासन के सामने खड़ा भी होना है। इस लिए परमेश्वर के आधीन - और केवल परमेश्वर के आधीन सभी के लिए समानता है। लेकिन परमेश्वर और उसके सच्चे तथा खरे न्याय के बाहर, संसार में बहुत कुछ है जो अन्यायपूर्ण है।

मसीही विश्वासी सही परिपेक्ष रखते हुए इस बात को अच्छे से समझ सकते हैं क्योंकि वे सब परमेश्वर के पास पापी आए और सब ने परमेश्वर ही से पापों की क्षमा प्राप्त करी, अपनी किसी योग्यता के कारण नहीं वरन केवल उसके अनुग्रह के कारण। परमेशवर के सन्मुख वे सभी कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु के बलिदान के वसीले से ही आ सके हैं, वहाँ अमीर गरीब सब एक समान हैं। परमेश्वर की आधीनता में अमीर आनन्दित हैं क्योंकि उन्होंने सांसारिक धन के खोखलेपन और व्यर्थता को समझ लिया है, और गरीब भी आनन्दित है क्योंकि उन्हें स्वर्ग का अनन्त धन मिल गया है।

यही ज्ञान वह ज्ञान है जो ईर्ष्या के फन्दे से बचा कर रखता है। - मार्ट डी हॉन


जो परमेश्वर हमें देता है, उसे कोई हमसे छीन नहीं सकता।

...जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है? - नीतिवचन २७:४


बाइबल पाठ: नीतिवचन (संकलित)

Pro 3:31 उपद्रवी पुरूष के विषय में डाह न करना, न उसकी सी चाल चलना।
Pro 6:34 क्योंकि जलन से पुरूष बहुत ही क्रोधित हो जाता है, और पलटा लेने के दिन वह कुछ कोमलता नहीं दिखाता।
Pro 14:30 शान्त मन, तन का जीवन है, परन्तु मन के जलने से हड्डियां भी जल जाती हैं।
Pro 23:17 तू पापियों के विषय मन में डाह न करना, दिन भर यहोवा का भय मानते रहना।
Pro 27:4 क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है, परन्तु जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है?

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल १९-२१
  • लूका ११:२९-५४

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

आरंभ

१९८६ की गर्मियों में Black Sea में दो पानी के जहाज़ों की टक्कर से कई लोगों की मृत्यु हो गई। यह दुर्घटना और भी दुखदाई हो गई जब जाँचकर्ताओं ने दुर्घटना के कारण का पता लगाया। दुर्घटना न तो रडार प्रणाली की असफलता से हुई और न ही वहाँ घना कोहरा था। पता लगा कि दोनो जहाज़ों के कप्तानों को एक दूसरे की स्थिति का पता था और वे दोनो ही बचाव के लिए समय रहते अपना मार्ग बदल सकते थे, लेकिन दोनों ही ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि दोनो में से कोई भी अपने घमंड के कारण अपना मार्ग छोड़ने की बजाए दूसरे से मार्ग छोड़ने की उम्मीद कर रहे थे।

इससे भी अधिक नुकसान मानवीय संबंधों में ऐसे ही स्वार्थ, घमंड और जलन से होती है। हम संसार की समस्याओं के लिए राजनैतिक, धार्मिक या विचारधारा के मतभेदों को दोष देते हैं, लेकिन याकूब बताता है कि इसका मूल कारण है घमंड और स्वार्थ। घमंड ही ने प्रधान स्वर्गदूत लूसिफर को स्वर्ग से गिराकर शैतान बना दिया। पश्चताप न करने और क्षमा न मांगने के कारण ही हमारे आदि माता-पिता - आदम और हव्वा में होकर पाप आज मनुष्य जाति में विनाश कर रहा है।

घमंड, ईर्ष्या और स्वार्थ को बड़ा विनाश उत्पन्न करने से रोकने का एक ही मार्ग है कि हम उस समझबूझ का प्रयोग करें जो ऊपर से आता है, क्योंकि "जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है" (याकूब ३:१७)।

इसी "ज्ञान" से मृदु भाव और एकता और आपसी सहनशीलता संभव होगी। - मार्ट डी हॉन


कुछ मुसीबतें लोगों द्वारा अपनी मन मर्ज़ी करने की ठान लेने से होती हैं, तो कुछ अन्य मुसीबतें लोगों को मन मर्ज़ी करने देने से होती हैं।

इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है। - याकूब ३:१६

बाइबल पाठ: याकूब ३:१४-४:६

Jas 3:14 पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्‍ड न करना, और न तो झूठ बोलना।
Jas 3:15 यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है।
Jas 3:16 इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है।
Jas 3:17 पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।
Jas 3:18 और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है।
Jas 4:1 तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्‍या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?
Jas 4:2 तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्‍त नहीं कर सकते, तुम झगड़ते और लड़ते हो तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं।
Jas 4:3 तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्‍छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो।
Jas 4:4 हे व्यभिचारिणयों, क्‍या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है।
Jas 4:5 क्‍या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्‍त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उस ने हमारे भीतर बसाया है, क्‍या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो?
Jas 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल १७-१८
  • लूका ११:१-२८

रविवार, 10 अप्रैल 2011

ईर्ष्या से हानि

बर्मा की एक लघुकथा है कि एक कुम्हार अपने पड़ौसी धोबी को फलता-फूलता देख उससे ईर्ष्या करने लगा, और उसे बरबाद करने की ठान ली। उसने राजा के कान भरे कि वह आज्ञा दे कि धोबी राजा के एक काले हाथी को धो कर सफेद कर दे। धोबी ने राजा की आज्ञा स्वीकार करी और उससे निवेदन किया कि उसके कार्य की आवश्यकतओं के अनुसार उसे एक इतना बड़ा पात्र दिया जाए जिसमें खड़ा करके वह हाथी को धो सके। राजा ने तुरंत ही उस कुम्हार को आज्ञा दी कि वह मांगा गया पात्र तैयार करके दे। बड़ी कठिनाई से कुम्हार ने एक बड़ा पात्र तो बनाया लेकिन हाथी के उसमें खड़ा होते ही वह हाथी के वज़न से टुकड़े-टुकड़े हो गया। कुम्हार ने बहुत प्रयास किए और कितने ही बर्तन बनाए लेकिन सबका अन्जाम वही रहा और राजा की आज्ञा के अनुसार बर्तन बनाने के प्रयास में उसकी अपनी रोज़ी रोटी भी जाती रही। अन्ततः कुम्हार का ईर्ष्या में रचाया गया ष्ड़यंत्र उसे ही ले डूबा।

ईर्ष्या का स्वभाव है कि वह अपने पालने वाले का ही विनाश कर देती है। बाइबल के पुराने नियम में ईर्ष्या के लिए जो शब्द मूल भाषा में प्रयोग हुआ है, उसका अर्थ होता है "जलाने या भस्म करने वाला" और यह ईर्ष्यालु व्यक्ति के मन की सही दशा का विवरण भी है, क्योंकि ईर्ष्यालु के मन में ईर्ष्या ज्वाला की तरह धधकती रहती है। राजा शाउल भी अपनी दाउद के प्रति ईर्ष्या के कारण नाश हो गया।

नीतिवचन ६:२७ में लिखा है, "क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले और उसके कपड़े न जलें?" ईर्ष्या के अंगारे थोड़े ही समय में भस्म करने वाली धधकती ज्वाला बन जाते हैं और खाक कर देते हैं।

यदि ईर्ष्या के अंगारों को अंगीकार और पश्चाताप द्वारा न बुझाया गया तो वे ईर्ष्यालु को भस्म कर देंगे। - पौल वैन गोर्डर


...ईर्ष्या कब्र के समान निर्दयी है। उसकी ज्वाला अग्नि की दमक है... - श्रेष्ठगीत ८:६

जैसे दीमक काठ को अन्दर ही अन्दर खा लेती है, वैसे ही ईर्ष्या भी मनुष्य को अन्दर ही से नाश कर देती है।


बाइबल पाठ: याकूब ३:६-१८

Jas 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्‍ड की आग से जलती रहती है।
Jas 3:7 क्‍योंकि हर प्रकार के वन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
Jas 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं, वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
Jas 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्‍पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
Jas 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
Jas 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नही होना चाहिए।
Jas 3:12 क्‍या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलता है? हे मेरे भाइयों, क्‍या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।
Jas 3:13 तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्‍छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्‍पन्न होती है।
Jas 3:14 पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्‍ड न करना, और न तो झूठ बोलना।
Jas 3:15 यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है।
Jas 3:16 इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है।
Jas 3:17 पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।
Jas 3:18 और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल १५-१६
  • लूका १०:२५-४२

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

ईर्ष्या पर जय

रोम के वैटिकन चर्च को सुन्दर बनाने के लिए मशहूर कलाकार माईकलएंजलो और रफैल अपनी कलकृतियों से उसे सजा रहे थे। उनमें बड़ा विद्वेष उत्पन्न हो गया यहां तक कि उन्होंने आपस में बात करना भी बन्द कर दिया। तौभी दोनो अपनी ओर से परमेश्वर की महीमा के लिए कार्य कर रहे थे।

ईर्ष्या कई दफा धार्मिक उत्साह का रूप ले कर सामने आती है। मरियम और हारून ने अपने भाई मूसा की आलोचना करी, लेकिन परमेर्श्वर के क्रोध ने प्रगट किया कि उनकी यह आलोचना ईर्ष्या के कारण थी। ईर्ष्यावश ही शाउल ने दाउद को मारने के प्रयत्न किए क्योंकि परमेश्वर ने दाउद को शाउल के बाद इस्त्राएल का राजा होने के लिए चुन लिया था। जब पौलुस रोम में बन्दी था तो कुछ लोग इस आश्य से सुसमाचार प्रचार करते थे कि उनके ऐसा करने से पौलुस को और दुख मिल सके, क्योंकि वे लोग परमेश्वर द्वारा उसे इतना उत्तम रीति से प्रयोग किए जाने से बहुत ईर्षालु थे।

ईर्ष्या एक बहुत हानिकारक व्यवहार है जो सबसे अधिक ईर्ष्या करने वाले को ही नुकसान पहुंचाता है। ईर्ष्या का कारण है हमारा यह मानना कि किसी और को हम से अधिक मिल रहा है जो हमें मिलना चाहिए था - वह चाहे पैसा हो, कीर्ति हो, सम्मान हो या अन्य कोई भी उपलबधि हो।

इस पर जयवंत हो सकने के लिए तीन बातों का पालन करना होगा:
१. इसे अपने जीवन में पहिचानना होगा और स्वीकार करना होगा।
२. इसे पाप के रूप में स्वीकार करके इसके लिए परमेश्वर से क्षमा मांगनी होगी।
३. हमें अपने अन्दर एक धन्यवादी मन बनाना होगा। जब हम किसी को कोई लाभ पाते देखें तो उसके लिए परमेश्वर का धन्यवाद करके प्रसन्नता से इस परिस्थिति को स्वीकार करें।

जब हम दूसरों की तुलना अपने आप से करना छोड़ देते हैं तो ईर्ष्या के पनपने का माध्यम भी समाप्त कर देते हैं।

जब हम अपनी संतुष्टि परमेश्वर में पाने लगते हैं तो उसका अनुग्रह हमें दूसरों के आनन्द में आनन्दित होने की क्षमता देता है, और ऐसा में ईर्ष्या के लिए कोई स्थान नहीं रहता। - डेनिस डी हॉन


जब हम ईर्ष्या से भरे होते हैं तो अपने विनाश के निकट भी होते हैं।

कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। - फिलिप्पियों १:१५


बाइबल पाठ: गिनती १२

Num 12:1 मूसा ने तो एक कूशी स्त्री के साथ ब्याह कर लिया था। सो मरियम और हारून उसकी उस ब्याहता कूशी स्त्री के कारण उसकी निन्दा करने लगे;
Num 12:2 उन्होंने कहा, क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के साथ बातें की हैं? क्या उस ने हम से भी बातें नहीं कीं? उनकी यह बात यहोवा ने सुनी।
Num 12:3 मूसा तो पृथ्वी भर के रहने वाले मनुष्यों से बहुत अधिक नम्र स्वभाव का था।
Num 12:4 सो यहोवा ने एकाएक मूसा और हारून और मरियम से कहा, तुम तीनों मिलापवाले तम्बू के पास निकल आओ। तब वे तीनों निकल आए।
Num 12:5 तब यहोवा ने बादल के खम्भे में उतर कर तम्बू के द्वार पर खड़ा होकर हारून और मरियम को बुलाया; सो वे दोनों उसके पास निकल आए।
Num 12:6 तब यहोवा ने कहा, मेरी बातें सुनो: यदि तुम में कोई नबी हो, तो उस पर मैं यहोवा दर्शन के द्वारा अपने आप को प्रगट करूंगा, वा स्वप्न में उस से बातें करूंगा।
Num 12:7 परन्तु मेरा दास मूसा ऐसा नहीं है; वह तो मेरे सब घरानों मे विश्वास योग्य है।
Num 12:8 उस से मैं गुप्त रीति से नहीं, परन्तु आम्हने साम्हने और प्रत्यक्ष होकर बातें करता हूं और वह यहोवा का स्वरूप निहारने पाता है। सो तुम मेरे दास मूसा की निन्दा करते हुए क्यों नहीं डरे?
Num 12:9 तब यहोवा का कोप उन पर भड़का, और वह चला गया;
Num 12:10 तब वह बादल तम्बू के ऊपर से उठ गया, और मरियम कोढ़ से हिम के समान श्वेत हो गई। और हारून ने मरियम की ओर दृष्टि की, और देखा, कि वह कोढ़िन हो गई है।
Num 12:11 तब हारून मूसा से कहने लगा, हे मेरे प्रभु, हम दोनों ने जो मूर्खता की वरन पाप भी किया, यह पाप हम पर न लगने दे।
Num 12:12 और मरियम को उस मरे हुए के समान न रहने दे, जिसकी देह अपनी मां के पेट से निकलते ही अधगली हो।
Num 12:13 सो मूसा ने यह कहकर यहोवा की दोहाई दी, हे ईश्वर, कृपा कर, और उसको चंगा कर।
Num 12:14 यहोवा ने मूसा से कहा, यदि उसका पिता उसके मुंह पर थूका ही होता, तो क्या सात दिन तक वह लज्जित न रहती? सो वह सात दिन तक छावनी से बाहर बन्द रहे, उसके बाद वह फिर भीतर आने पाए।
Num 12:15 सो मरियम सात दिन तक छावनी से बाहर बन्द रही, और जब तक मरियम फिर आने न पाई तब तक लोगों ने प्रस्थान न किया।
Num 12:16 उसके बाद उन्होंने हसेरोत से प्रस्थान करके पारान नाम जंगल में अपने डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल १३-१४
  • लूका १०:१-२४