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बुधवार, 14 सितंबर 2011

वे भूखे नहीं हैं

   हम दोस्तों ने झील से मछली पकड़ने का मन बनाया और उसकी तैयारी करने लगे। मछली पकड़ने के विभिन्न प्रकार चारे हमने एकत्रित किए, वे अलग अलग रंग और प्रकार के थे, देखने में बहुत लुभावने थे और मछली पकड़ने के लिए शर्तीया कारगर थे। लेकिन फिर भी, यदि मछलियां उन लुभावने चारों से आकर्षित नहीं हों तो आखिरी दांव के रूप में कुछ छोटी मछलियां भी चारे के रूप में लगाने को रख लीं। अगले दिन प्रातः होते ही हम झील की ओर चल पड़े और सबने अपने अपने मन पसन्द स्थानों को चुन लिया और बंसी डाल कर बैठ गए। समय बीतता गया और किसी के हाथ कोई मछली नहीं लगी। हमने अपनी हर विधि आज़मा ली, हर चारे का उपयोग कर लिया, लेकिन कोई मछली किसी से नहीं फंसी। थक हार कर हम अपनी अपनी बंसी उठा कर खाली हाथ वापस लौटने लगे, और एक दूसरे को यह कह कर सांतवना देते रहे कि "आज मछलीयां भूखी नहीं हैं।"

   शैतान के पास भी प्रलोभनों और लालचों का बक्सा भरा है, जिन्हें वह हमें पाप में फंसाने के लिए प्रयोग करता है। कुछ प्रलोभन दिखने में बड़े आकर्षक होते हैं - वे प्रलोभन के रुप में दीख भी जाते हैं, लेकिन इतने रिझाने वाले होते हैं कि उनका इन्कार कर पाना बहुत कठिन होता है। कुछ अन्य हमारी किसी आवश्यक्ता या इच्छा को उकसाते हैं, ऊपर से देखने में अहानिकारक प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तविकता तो चारा खा लेने के बाद ही पता चलती है। शैतान के ये प्रलोभन और लालच कैसे भी क्यों न हों, उन सब में एक बात सामन्य है - वे हमारी शारीरिक एवं सांसारिक इच्छाओं और लालसाओं की पूर्ति के आश्वासनों या दावों के द्वारा ही हमें फंसाने पाते हैं। यदि हमारा ध्यान और मन शारीरिक अथवा सांसारिक बातों पर लगा नहीं होगा तो शैतान के ये हथियार भी हमारे विरुद्ध कारगर नहीं हो पाएंगे।

   इसलिए परमेश्वर का वचन हमें चिताता है कि "निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।" (फिलिप्पियों४:८, ९)

   मानसिक अनुशासन और परमेश्वर के आत्मा की सहायता से हम अपने हृदय को भली बातों से भरा रख सकते हैं, और शारीरिक लालसओं और प्रलोभनों में पड़ने से बच सकते हैं। तब शैतान भी खिसिया कर यही कहेगा, "वे भूखे नहीं हैं।" - डेव एग्नर

बुराई से दूरी के लिए उठाया गया हमारा हर कदम हमें परमेश्वर के एक कदम और निकट ले आता है।

क्‍योंकि जब उस ने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है। - इब्रानियों २:१८
 
बाइबल पाठ: याकूब १:१२-१८
    Jas 1:12  धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
    Jas 1:13  जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वही किसी की परीक्षा आप करता है।
    Jas 1:14  परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है।
    Jas 1:15  फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्‍पन्न करता है।
    Jas 1:16  हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।
    Jas 1:17  क्‍योंकि हर एक अच्‍छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।
    Jas 1:18  उस ने अपनी ही इच्‍छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्‍पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १९-२१ 
  • २ कुरिन्थियों ७

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

सहायता को तैयार


   इंग्लैंड और फ्रांस के बीच हुए एक युद्ध में इंग्लैड के राजा एडवर्ड तृतीय का सामना फ्रांस की सेना से हो रहा था। इंगलैंड के राजा का पुत्र सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहा था और राजा सहायता के लिए तैयार एक और दल को लिए कुछ दूरी पर खड़ा युद्ध पर नज़र रखे हुए था। युद्ध आरंभ होने के थोड़े समय पश्चात राजकुमार ने पिता को सन्देश भेजा कि वे अपने सहायक दल को ले कर उसकी सहायता के लिए तुरंत आ जाएं। राजा सहायता के लिए नहीं गए। राजकुमार ने एक और सन्देश भेजा और तुरंत सहायता की विनती करी। राजा ने सन्देश वाहक से कहा, "मेरे पुत्र से जाकर कहो, मैं एक अनुभवी सेनापति हूँ - जानता हूँ कि कब सहायता भेजनी चाहिए और कोई लापरवाह पिता भी नहीं हूँ कि अपने पुत्र की समय पर सहायता न भेजने की लापरवाही करूँ।"

   यह घटना परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु में विश्वासी उसकी सन्तान के संबंध का भी चित्रण करती है। जब हम शैतान द्वारा लाई गई परीक्षाओं, प्रलोभनों और पाप का सामना कर रहे होते हैं तो कभी कभी हमें लगता है कि हमारी सहायता की पुकार को परमेश्वर ने अनसुना कर दिया और हमें अकेला छोड़ दिया है। लेकिन एक क्षण भी ऐसा नहीं होता जब उसकी दृष्टी हम पर से हटती हो। वह कभी हमें असहाय नहीं छोड़ता।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, १ कुरिन्थियों १०:१३ में पौलुस प्रेरित लिखता है, "तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्‍चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा कि तुम सह सको।"

   संघर्ष कितना भी भीषण क्यों न हो, सही समय पर हमारे पक्ष में सहायता के लिए आने के लिए और हमें परीक्षा से निकासी का मार्ग देने के लिए परमेश्वर सदा तैयार बना रहता है। - पौल वैन गोर्डर

जब परमेश्वर हमें कही भेजता है, तो स्वयं साथ भी चलता है।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्‍चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा कि तुम सह सको। - १ कुरिन्थियों १०:१३
 
बाइबल पाठ: भजन १८:१६-३०
    Psa 18:16  उस ने ऊपर से हाथ बढ़ा कर मुझे थाम लिया, और गहिरे जल में से खींच लिया।
    Psa 18:17  उस ने मेरे बलवन्त शत्रु से, और उन से जो मुझ से घृणा करते थे मुझे छुड़ाया क्योंकि वे अधिक सामर्थी थे।
    Psa 18:18  मेरी विपत्ति के दिन वे मुझ पर आ पड़े। परन्तु यहोवा मेरा आश्रय था।
    Psa 18:19  और उस ने मुझे निकाल कर चौड़े स्थान में पहुंचाया, उस ने मुझ को छुड़ाया, क्योंकि वह मुझ से प्रसन्न था।
    Psa 18:20  यहोवा ने मुझ से मेरे धर्म के अनुसार व्यवहार किया; और मेरे हाथों की शुद्धता के अनुसार उस ने मुझे बदला दिया।
    Psa 18:21  क्योंकि मैं यहोवा के मार्गों पर चलता रहा, और दुष्टता के कारण अपने परमेश्वर से दूर न हुआ।
    Psa 18:22  क्योंकि उसके सारे निर्णय मेरे सम्मुख बने रहे और मैं ने उसकी विधियों को न त्यागा।
    Psa 18:23  और मैं उसके सम्मुख सिद्ध बना रहा, और अधर्म से अपने को बचाए रहा।
    Psa 18:24  यहोवा ने मुझे मेरे धर्म के अनुसार बदला दिया, और मेरे हाथों की उस शुद्धता के अनुसार जिसे वह देखता था।
    Psa 18:25  दयावन्त के साथ तू अपने को दयावन्त दिखाता और खरे पुरूष के साथ तू अपने को खरा दिखाता है।
    Psa 18:26  शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता, और टेढ़े के साथ तू तिर्छा बनता है।
    Psa 18:27  क्योंकि तू दीन लोगों को तो बचाता है परन्तु घमण्ड भरी आंखों को नीची करता है।
    Psa 18:28  हां, तू ही मेरे दीपक को जलाता है; मेरा परमेश्वर यहोवा मेरे अन्धियारे को उजियाला कर देता है।
    Psa 18:29  क्योंकि तेरी सहायता से मैं सेना पर धावा करता हूं और अपने परमेश्वर की सहायता से शहरपनाह को लांघ जाता हूं।
    Psa 18:30  ईश्वर का मार्ग सच्चाई, यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १६-१८ 
  • २ कुरिन्थियों ६

सोमवार, 12 सितंबर 2011

परीक्षाओं का सामना

   किसी ने कहा, "काश मैं अपने ऊपर आने वाली परीक्षाओं, प्रलोभनों और पाप को भी वैसे ही स्पष्ट देख पाता जैसे औरों के देख लेता हूँ, तो फिर उनका सामना करना कठिन नहीं रहता। परीक्षाओं और प्रलोभनों को उनके सच्चे रंग में देख पाने के दो तरीके हैं - पहला है कि उनके विष्य में प्रार्थना करके उन्हें परमेश्वर की ज्योति के सम्मुख ले आएं जिससे उनका सच्चा स्वरूप स्पष्ट हो जाए। दूसरा है कि अपने आप से प्रश्न करें कि यदि मेरी जगह कोई अन्य इन में पड़ जाता तो कैसा दिखता?" जो परीक्षाओं और प्रलभनों का सामना कर रहा है उसके लिए उनमें गिर कर पाप कर लेने का लालच बहुत लुभावना हो सकता है, लेकिन उसने यदि एक बार उनमें कदम बढ़ाया तो फिर वह नीचे की ओर फिसलते ही चला जाता है।

   मत्ती ४ अध्याय में शैतान द्वारा प्रभु यीशु की परीक्षाओं का उल्लेख है। जो पहली परीक्षा शैतान ने प्रभु के सामने रखी पहली नज़र में वह बिलकुल साधरण और अहानिकारक प्रतीत होती है - ४० दिन के उपवास के बाद प्रभु को भूख लगी और शैतान ने सुझाव दिया कि वे परमेश्वर द्वारा उन्हें प्रदित शक्ति का उपयोग कर के अपनी भूख मिटाने के लिए वहाँ पड़े पत्थरों को रोटी बना लें, और भूख मिटा लें - अभिप्राय था कि उन्हें परमेश्वर द्वारा जनहित के लिए प्रदित सामर्थ का निज स्वार्थ के लिए उपयोग करने को उकसाना। फिर दूसरी परीक्षा में शैतान ने उन्हें परमेश्वर द्वारा प्रदित सुरक्षा को जाँच-परख कर सुनिश्चित कर लेने का सुझाव दिया, अभिप्राय था परमेश्वर की साथ बने रहने वाली उपस्थिति और सुरक्षा पर विश्वास छोड़कर, उसपर शक करना। और फिर तीसरी परीक्षा में खुले रूप से प्रभु को शैतान ने अपनी उपासना करने को कह भी दिया। लेकिन प्रभु शैतान की किसी परीक्षा में नहीं फंसा, वह शैतान के हर अभिप्राय को समझ रहा था कि शैतान किसी प्रकार उसे कलवरी के क्रूस पर संसार के पापों से मुक्ति के लिए अपना बलिदान देने से भटका सके और रोक सके। शैतान की प्रत्येक परीक्षा का उत्तर प्रभु ने परमेश्वर के वचन से उद्वत कर के दिया। ऐसा कर के जो सन्देश प्रभु ने शैतान को और अपने उदाहरण द्वारा हमें दिया है वह यह है कि, "मैं अपने पिता परमेश्वर और उसके वचन की आधीनता में बना रहता हूँ, इसलिए परीक्षाओं में भी विचलित नहीं होता, स्थिर खड़ा रहता हूँ।"

   यदि हम परमेश्वर के वचन को, जो आत्मा की तलवार भी कहा जाता है, भली भांति जानते हैं और उसका उपयोग करना जानते हैं, तो हम भी शैतान की हर परीक्षा और प्रलोभन पर जयवंत हो सकेंगे। परीक्षाओं और प्रलभनों का सफलता पूर्वक सामना करना है तो प्रभु यीशु में अपने विश्वास में दृढ़, उसकी पवित्र आत्मा से परिपूर्ण और उसके वचन में बने रहें - आप परीक्षाओं और प्रलोभनों में छिपे पाप को उसके सच्चे स्वरूप में सरलता से पहचान लेंगे तथा उसका सफलता से सामना भी कर सकेंगे। - रिचर्ड डी हॉन


यदि परीक्षाओं और प्रलोभनों पर जयवंत रहना है तो प्रभु यीशु के आधीन बने रहिये।
 
जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: - मरकुस १४:३८
 
बाइबल पाठ: मरकुस १४:३२-५०
    Mar 14:32  फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उस ने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं।
    Mar 14:33  और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा।
    Mar 14:34  और उन से कहा; मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो।
    Mar 14:35  और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिर कर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए।
    Mar 14:36  और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो।
    Mar 14:37  फिर वह आया, और उन्‍हें सोते पा कर पतरस से कहा; हे शमौन तू सो रहा है क्‍या तू एक घड़ी भी न जाग सका?
    Mar 14:38  जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर र्दुबल है।
    Mar 14:39  और वह फिर चला गया, और वही बात कह कर प्रार्थना की।
    Mar 14:40  और फिर आ कर उन्‍हें सोते पाया, क्‍योंकि उन की आंखे नींद से भरी थीं और नहीं जानते थे कि उसे क्‍या उत्तर दें।
    Mar 14:41  फिर तीसरी बार आ कर उन से कहा अब सोते रहो और विश्राम करो, बस, घड़ी आ पहुंची; देखो मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।
    Mar 14:42  उठो, चलें: देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।
    Mar 14:43  वह यह कह ही रहा था, कि यहूदा जो बारहों में से था, अपने साथ महायाजकों और शास्‍त्रियों और पुरिनयों की ओर से एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियां लिए हुए तुरन्‍त आ पहुंची।
    Mar 14:44  और उसके पकड़ने वाले ने उन्‍हें यह पता दिया था, कि जिस को मैं चूमूं वही है, उसे पकड़ कर यतन से ले जाना।
    Mar 14:45  और वह आया, और तुरन्‍त उसके पास जाकर कहा; हे रब्‍बी और उस को बहुत चूमा।
    Mar 14:46  तब उन्‍होंने उस पर हाथ डाल कर उसे पकड़ लिया।
    Mar 14:47  उन में से जो पास खड़े थे, एक ने तलवार खींच कर महायाजक के दास पर चलाई, और उसका कान उड़ा दिया।
    Mar 14:48  यीशु ने उन से कहा, क्‍या तुम डाकू जान कर मेरे पकड़ने के लिये तलवारें और लाठियां लेकर निकले हो?
    Mar 14:49  मैं तो हर दिन मन्‍दिर में तुम्हारे साथ रह कर उपदेश दिया करता था, और तब तुम ने मुझे न पकड़ा: परन्‍तु यह इसलिये हुआ है कि पवित्र शास्‍त्र की बातें पूरी हों।
    Mar 14:50  इस पर सब चेले उसे छोड़ कर भाग गए।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १३-१५ 
  • २ कुरिन्थियों ५

रविवार, 11 सितंबर 2011

सदैव प्रबल

   मेरी माँ की मृत्यु के एक दिन पहले मुझे तथा मेरे भाई को उनसे मिलने उनके पास बुलाया गया। बहुत कमज़ोरी के कारण वे ज़्यादा बातचीत कर सकने लायक नहीं थीं; तौ भी उन्होंने परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पद हमसे कहे - यशायाह ४१:१० तथा युहन्ना १०:२९ - केवल हमें सांत्वना देने के लिए नहीं वरन अपने विश्वास को दृढ़ बनाए रखने के लिए भी। उन्होंने अन्त तक परमेश्वर के वचन को थामे रखा और परमेश्वर के वचन ने उन्हें अन्त तक थामे रखा।

   परमेश्वर के वचन, बाइबल में सशक्त करने की अद्भुत सामर्थ है। हम प्रभु यीशु के जीवन के उदाहरण से देखते हैं कि उन्होंने श्त्रु शैतान के प्रलभनों पर परमेश्वर का वचन उद्वत करके ही जय पाई। वचन के आधार से उन्हें सामर्थ मिली और शैतान उन्हें घबरा न सका। बाइबल स्पष्ट करती है कि प्रभु यीशु को भी हमारे समान परीक्षाओं का सामना करना पड़ा था "क्‍योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाई परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला (इब्रानियों४:१५)। प्रभु यीशु ने परमेश्वर के वचन को इसलिए उद्वत नहीं किया क्योंकि उसमें कोई जादूई शक्ति है; वरन उद्वत करने के द्वारा उन्होंने अपने लिए आवश्यक मार्गदर्शक बातों को स्मरण किया और अपने विश्वास को दृढ़ किया, जिससे वे परमेश्वर की इच्छा में बने रह सके। क्योंकि उन्हों अपने जीवन को परमेश्वर के वचन की आधीनता में रखा, शैतान उन्हें परमेश्वर पिता की इच्छा को पूरा करने से विचलित नहीं कर पाया।

   जब कभी हम परीक्षाओं और प्रलोभनों से होकर निकलें - वे चाहे कितने भी कठिन हों, या किसी घबरा देने वाले अथवा मृत्यु के डर का सामना हमें करना पड़े, ऐसे में परमेश्वर का वचन हमें बल देने और दृढ़ करने का साधन बनेगा। सदियों से परमेश्वर के सन्त परमेश्वर के वचन पर अपना भरोसा रख कर परिस्थितियों पर प्रबल होते रहे हैं; आज यह वचन हमारे लिए भी वैसा ही दृढ़ और प्रबल है जैसा उनके लिए रहा है। - डेनिस डी हॉन


आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, उसके सामने शैतान का सबसे सामर्थी हथियार भी कुछ सामर्थ नहीं रखता।

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहाथता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह ४१:१०

बाइबल पाठ: मती ४:१-११
    Mat 4:1  तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्‍लीस से उस की परीक्षा हो।
    Mat 4:2  वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्‍त में उसे भूख लगी।
    Mat 4:3  तब परखने वाले ने पास आ कर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं।
    Mat 4:4  उस ने उत्तर दिया कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्‍तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।
    Mat 4:5  तब इब्‍लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्‍दिर के कंगूरे पर खड़ा किया।
    Mat 4:6  और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे क्‍योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
    Mat 4:7  यीशु ने उस से कहा यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।
    Mat 4:8  फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका वैभव दिखा कर
    Mat 4:9  उस से कहा, कि यदि तू गिर कर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा।
    Mat 4:10  तब यीशु ने उस से कहा, हे शैतान दूर हो जा, क्‍योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।
    Mat 4:11  तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्‍वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १०-१२ 
  • २ कुरिन्थियों ४

शनिवार, 10 सितंबर 2011

संयम

   गाड़ी चलाने का लाईसेंस मिलने की आयु से पहले मुझे गाड़ी चलाने के बारे में सोचने मात्र से ही अजीब सा डर लगता था। मुझे लगता था कि अपने सामने खुली सड़क देखकर मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाऊंगा और जितनी तेज़ संभव हो उतनी तेज़ गाड़ी चलाने लगूंगा। मुझे लगता ही नहीं था कि मुझ में इतना आत्म संयम होगा कि मैं नियमों और परिस्थितियों की आज्ञा से अधिक तेज़ गाड़ी को न चलाऊं। लेकिन जब समय आने पर मुझे गाड़ी चलाने का लाईसेंस मिला, तो साथ ही मैंने यह भी जाना कि गाड़ी को नियंत्रित करना मेरे वश में है न कि मैं गाड़ी के वश में हूँ। यद्यपि मैं गाड़ी का एक्सलरेटर पूरा दबाकर तेज़ चला सकता हूँ, लेकिन इसका यह तात्पर्य नहीं है कि मुझे ऐसा करना ही है; कर पाने की क्षमता या संभावना अनिवार्यतः करना नहीं है।

   यही जीवन में होने वाले पापों के लिए भी लागू होता है। लोग बहाने बनाते हैं कि उनके सामने अचानक संयम की सीमा से बाहर परीक्षा आ गई, और वे पाप कर बैठे। कभी कोई पाप के लिए यह भी बहाना बनाता है कि जिस समय किसी बात की उन्हें बहुत आवश्यक्ता थी उसे पाने का सरल मार्ग उन्हें मिल गया, चाहे वह अनुचित ही था, लेकिन यदि अवसर आवश्यक्ता का पूरक हो गया तो इसमें बुरा क्या है?

   प्रभु यीशु पर आई परीक्षाओं के अध्ययन से हम सीखते हैं कि जब भी पाप और गलती करने की परीक्षा आएगी, परमेश्वर उसका सामना करने की सामर्थ और उससे निकासी का मार्ग भी देगा। परमेश्वर हमसे आशा रखता है कि हम ऐसी परिक्षाओं और परिस्थितियों की पहचान में सक्षम हों तथा इस बात का भी बोध रखें, जैसे अपनी परीक्षा के समय प्रभु यीशु ने रखा, कि हम भी परीक्षा से निकलने और पाप से बचने के लिए उसके वचन और उसकी आत्मा की सामर्थ पर प्रभु यीशु के समान भरोसा रख सकते हैं।

   हमारा मसीह यीशु में विश्वास और उससे उत्पन्न संयम हमें हर परीक्षा तथा पाप करने की लालसा से बचा कर रख सकता है। - मार्ट डी हॉन

प्रत्येक परीक्षा परमेश्वर की निकटता में आने का अवसर है।

तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्‍लीस से उस की परीक्षा हो। - मत्ती ४:१
बाइबल पाठ: लूका ४:१-१३
    Luk 4:1  फिर यीशु पवित्र आत्मा से भरा हुआ, यरदन से लौटा और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा; और शैतान उस की परीक्षा करता रहा।
    Luk 4:2  उन दिनों में उस ने कुछ न खाया और जब वे दिन पूरे हो गए, तो उसे भूख लगी।
    Luk 4:3  और शैतान ने उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो इस पत्थर से कह, कि रोटी बन जाए;
    Luk 4:4  यीशु ने उसे उत्तर दिया कि लिखा है, मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा।
    Luk 4:5  तब शैतान उसे ले गया और उस को पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए।
    Luk 4:6  और उस से कहा मैं यह सब अधिकार, और इन का वैभव तुझे दूंगा, क्‍योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूं, उसी को दे देता हूं।
    Luk 4:7  इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा।
    Luk 4:8  यीशु ने उसे उत्तर दिया, लिखा है कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर और केवल उसी की उपासना कर।
    Luk 4:9  तब उस ने उसे यरूशलेम में ले जाकर मन्‍दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहां से नीचे गिरा दे।
    Luk 4:10  क्‍योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें।
    Luk 4:11  और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पांव में पत्थर से ठेस लगे।
    Luk 4:12  यीशु ने उस को उत्तर दिया, यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना।
    Luk 4:13  जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ८-९ 
  • २ कुरिन्थियों ३

शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

गोदाम की सफाई

   मैं नहीं जानता कि वह सब कहाँ से आ जाता है। इधर-उधर से, कहीं-कहीं से, लकड़ी के तख़ते, टूटी सीढ़ीयां, बोतलें, गेंद खेलने के बल्ले, फावड़े, कुदाल, पानी देने के पाइप आदि सब आकर मेरे गोदाम में जमा हो जाते हैं। इसलिए जब कभी आवश्यक हो जाता है, मैं अपने पुराने कपड़े पहन कर, आस्तीनें चढ़ा कर, कुछ खाली पीपे लेकर, अपने एक बेटे को सहायता के लिए बुलाकर गोदाम की सफाई में जुट जाता हूँ। साफ गोदाम को देखने से जो सन्तोष मिलता है, वही मेरी मेहनत के योग्य प्रतिफल के रूप में काफी है।

   हमारे मन-मस्तिष्क के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है; वे भी अनचाही बातों से भरते रहते हैं, जिनसे छुटकारा पाना हमारे लिए आवश्यक है। मन को लगी चोटों के घाव, दूसरों के प्रति शिकायतें, द्वेष, कुढ़न, कड़ुवाहट आदि एकत्रित होते रहते हैं। कई अनजाने में किये गए पाप भी जमा हो जाते हैं। अधूरे वायदों की कसक को भी ठीक करना होता है। जब कुंठाएं हमारे मन-मस्तिष्क में एकत्रित होती रहती हैं तो वे फिर परमेश्वर और उसे प्रसन्न रखने के विचारों के लिए जगह ही नहीं छोड़तीं। तब हमारा ध्यान प्रार्थना से हट जाता है, हमारा परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन भी बिगड़ जाता है। यह लक्षण बताते हैं कि हमारे मन-मस्तिष्क के गोदाम को सफाई की बहुत आवश्यक्ता हो गई है।

   जब सांसारिक बातों के भर जाने से हमारे जीवन से आत्मिक बातों की उपेक्षा होने लगती है, और हमें अपने अन्दर सफाई की आवश्यक्ता का आभास होने लगता है, तो हमें परमेश्वर की पवित्र आत्मा की सहायता से उस कार्य को कर डालना चाहिए। परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारा सहायक है; जिन बातों के लिए वह हमें कायल करे, पश्चाताप के लिए उभारे, किसी से ठीक-ठाक करने के लिए स्मरण दिलाए हमें उन्हें बिना किसी आनाकानी के तुरंत कर लेना चाहिए। जैसे जैसे हम पवित्र आत्मा की अगुवाई में अपने जीवनों को संचालित करेंगे, हम पाएंगे कि परमेश्वर के साथ हमारे संबंध बेहतर बनते जा रहे हैं, परमेश्वर की शांति हमारे जीवनों में वास कर रही है और हमारे मसीही जीवन में एक नया आनन्द भरता जा रहा है।

   क्या आपके मन-मस्तिष्क के गोदाम को सफाई की आवश्यक्ता है? देर मत कीजिए। उससे जो आनन्द मिलेगा, वह आपकी आशा से कहीं अधिक होगा। - डेव एगनर


जब मसीही जीवन बोझ बनने लगे तो कारण सांसारिक बातों का एकत्रित हो जाना ही होता है।
जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सुफल नहीं होता, परन्तु जो उनको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी। - नीतिवचन२८:१३
बाइबल पाठ: रोमियों ६:११-२३
    Rom 6:11  ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।
    Rom 6:12  इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो।
    Rom 6:13  और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जान कर परमश्‍ेवर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।
    Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।
    Rom 6:15  तो क्‍या हुआ? क्‍या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं।
    Rom 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है?
    Rom 6:17  परन्‍तु परमश्‍ेवर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे।
    Rom 6:18  और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए।
    Rom 6:19  मैं तुम्हारी शारीरिक र्दुबलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो।
    Rom 6:20  जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्‍वतंत्र थे।
    Rom 6:21  सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्‍या फल पाते थे?
    Rom 6:22  क्‍योंकि उन का अन्‍त तो मृत्यु है परन्‍तु अब पाप से स्‍वतंत्र हो कर और परमेश्वर के दास बन कर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्‍त होती है, और उसका अन्‍त अनन्‍त जीवन है।
    Rom 6:23  क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्‍तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है।
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ६-७ 
  • २ कुरिन्थियों २

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

पश्चाताप का समय

   एक दंपति की गाड़ी से एक शराब के नशे में धुत चालक ने अपनी गाड़ी टकरा दी और उस दंपति की मृत्यु हो गई। वे दोनो बहुत अच्छे लोग थे, नियमित रूप से अपने चर्च जाते थे और सब ही उनसे बहुत प्रेम रखते थे। गाड़ी चलाने में उन्होंने कोई गलती भी नहीं की थी; फिर उनके साथ ऐसा क्यों हुआ? क्या दूसरी गाड़ी के चालक के नशे में धुत होकर गाड़ी चलाने के लिए परमेश्वर को दोषी ठहराया जा सकता है?

   कुछ लोग शैतान को ऐसी दुर्घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार ठहरा देते हैं, लेकिन हमें यह तथ्य नज़रअन्दाज़ नहीं करना चाहिए कि नशे की हालत में गाड़ी चलाने वाला जब भी सन्तुलन खो देगा तो किसी को भी नुकसान पहुँचा सकता है, मार सकता है।

   प्रभु यीशु ने अपने समय में घटने वाली दो दुर्घटनाओं को उदाहरण बना कर अपने चेलों को कुछ सिखाया। एक दुर्घटना में उस इलाके के हाकिम पिलातुस ने कुछ गलीलियों को मारकर उनके खुन को उनके चढ़ाए बलिदानों के साथ मिलवा दिया (लूका १३:१)। दूसरी में १८ इस्त्राएली मारे गए क्योंकि एक गुम्मुट उन पर गिर पड़ा (लूका १३:४)। लोगों की धारणा थी कि जो लोग इस प्रकार अप्राकृतिक रूप से मरते हैं, अवश्य उन्होंने कोई घोर पाप किये होंगे।

   प्रभु यीशु ने ऐसी विचारधारा का खंडन किया। उन्हों ने अपने साथ के लोगों को समझाया कि बजाए किसी को दोषी ठहराने के, इन घटनाओं को मनुष्य के क्षणभंगुर होने और पश्चाताप के लिए उपलब्ध समय का सदुपयोग करने की शिक्षा लेनी चाहिए। यदि वे जनबूझकर अपने पाप में बने रहेंगे और प्रभु यीशु को मुक्तिदाता के रूप में ग्रहण करने से इन्कार करते रहेंगे, तो एक समय उन्हें भी अपने न्याय और पाप की भयानक दशा का सामना करना पड़ेगा।

   जब हम समझ से बाहर दुर्घटनाओं के विष्य में सुने, तो उनके होने के कारण और "ज़िम्मेदार कौन" के प्रश्न को लेकर परेशान होने के बजाए परमेश्वर के प्रेम का दृढ़ निश्चय ध्यान में रखकर (रोमियों ८:३९), इन घटनाओं को अपने आप को जाँचने और पश्चाताप कर के अपने जीवन परमेश्वर के साथ ठीक-ठाक करने के अवसर की तरह उनका सदुपयोग करें। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


जीवन में होने वाली दुर्घटनाएं अपनी जाँच करने और पश्चाताप के साथ मन फिराने की पुकार हैं।
 
यदि तू ऐसा मनुष्य देखे जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान बनता हो, तो उस से अधिक आशा मूर्ख ही से है। - नीतिवचन २६:१२

बाइबल पाठ: लूका ५:१७-३२
    Luk 5:17  और एक दिन हुआ कि वह उपदेश दे रहा था, और फरीसी और व्यवस्थापक वहां बैठे हुए थे, जो गलील और यहूदिया के हर एक गांव से, और यरूशलेम से आए थे; और चंगा करने के लिये प्रभु की सामर्य उसके साथ थी।
    Luk 5:18  और देखो कई लोग एक मनुष्य को जो झोले का मारा हुआ था, खाट पर लाए, और वे उसे भीतर ले जाने और यीशु के साम्हने रखने का उपाय ढूंढ़ रहे थे।
    Luk 5:19  और जब भीड़ के कारण उसे भीतर न ले जा सके तो उन्‍होंने कोठे पर चढ़ कर और खप्रैल हटाकर, उसे खाट समेत बीच में यीशु के साम्हने उतरा दिया।
    Luk 5:20  उस ने उन का विश्वास देखकर उस से कहा; हे मनुष्य, तेरे पाप क्षमा हुए।
    Luk 5:21  तब शास्त्री और फरीसी विवाद करने लगे, कि यह कौन है, जो परमेश्वर की निन्‍दा करता है परमेश्वर को छोड़ कौन पापों की क्षमा कर सकता है?
    Luk 5:22  यीशु ने उन के मन की बातें जान कर, उन से कहा कि तुम अपने मनों में क्‍या विवाद कर रहे हो?
    Luk 5:23  सहज क्‍या है क्‍या यह कहना, कि तेरे पाप क्षमा हुए, या यह कहना कि उठ, और चल फिर?
    Luk 5:24  परन्‍तु इसलिये कि तुम जानो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है (उस ने उस झोले के मारे हुए से कहा), मैं तुझ से कहता हूं, उठ और अपनी खाट उठा कर अपने घर चला जा।
    Luk 5:25  वह तुरन्‍त उन के साम्हने उठा, और जिस पर वह पड़ा था उसे उठा कर, परमेश्वर की बड़ाई करता हुआ अपने घर चला गया।
    Luk 5:26  तब सब चकित हुए और परमेश्वर की बड़ाई करने लगे, और बहुत डर कर कहने लगे, कि आज हम ने अनोखी बातें देखी हैं।
    Luk 5:27  और इसके बाद वह बाहर गया, और लेवी नाम एक चुंगी लेने वाले को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।
    Luk 5:28  तब वह सब कुछ छोड़ कर उठा, और उसके पीछे हो लिया।
    Luk 5:29  और लेवी ने अपने घर में उसके लिये बड़ी जेवनार की; और चुंगी लेने वालों की और औरों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे एक बड़ी भीड़ थी।
    Luk 5:30  और फरीसी और उन के शास्त्री उस के चेलों से यह कह कर कुड़कुड़ाने लगे, कि तुम चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ क्‍यों खाते-पीते हो?
    Luk 5:31  यीशु ने उन को उत्तर दिया कि वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्‍तु बीमारों के लिथे अवश्य है।
    Luk 5:32  मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ३-५ 
  • २ कुरिन्थियों १