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शुक्रवार, 4 मई 2012

समर्पण

   अंग्रेज़ी लेखक थौमस कार्लय्ल का विवाह जेन वैल्श से सन १८२६ में हुआ था। विवाह के समय जेन भी एक प्रसिद्धि प्राप्त लेखिका थीं, किंतु विवाह के बाद उन्होंने अपने पति की सफलता के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया और उन की सेवा में लगी रहीं। थौमस को पेट और स्नायुतंत्र के रोग होने के कारण, उनका स्वभाव चिड़चिड़ा रहता था और उनके साथ निभा पाना सरल नहीं था। लेकिन जेन ने उनके लेखन में सहायता के लिए घर को यथासंभव शांत बनाए रखने और उन के लिए विशेष भोजन बना कर देने का बीड़ा उठा लिया, जिससे लिखने में थौमस को कम से कम बाधा हो।

   थौमस, अपने व्यवहार या बोलचाल में बाहरी रूप से, जेन के इस प्रेम पूर्ण समर्पित व्यवहार के लिए ना तो कोई विशेष ध्यान दिखाते थे और ना ही इस के लिए उसे कोई मान देते थे; जेन के साथ उनका समय भी बहुत कम बीतता था, लेकिन जेन अपने कार्य में लगी रहती थी। थौमस ने अपनी माँ को लिखे एक पत्र में जेन के बारे में लिखा, "मैं अपने हृदय से कह सकता हूँ कि वह मुझसे एक ऐसे समर्पण के साथ प्रेम करती है जो मेरी समझ से बाहर है, मैं जिसके कदापि योग्य नहीं हूँ। वह मेरे उदास चेहरे की ओर ऐसे मृदु भाव से देखती है कि उस से नज़र मिलाने भर से ही हर बार मेरे अन्दर एक नई ताज़गी आ जाती है।"

   ऐसा ही, वरन इससे भी बढ़कर प्रेम परमेश्वर ने हम पाप से भरे मनुष्यों और संसार से भी किया; क्यों किया, यह हमारी समझ से परे है। परमेश्वर वह पिता है जिसने पापी संसार के उद्धार के लिए अपने निष्पाप पुत्र को दे दिया, "क्‍योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए" (यूहन्ना ३:१६)। परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसीयों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने प्रार्थना करी कि वे प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर के प्रेम की चौड़ाई, लंबाई, गहराई और ऊँचाई समझ पाएं (इफिसीयों ३:१८)।

   थोड़ा ठहर कर अपने निज जीवन और व्यवहार तथा संसार के व्यवहार पर विचार कीजिए। हम में ऐसा क्या है जिससे परमेश्वर हम से प्रेम करे? क्या हमारे निकट और चारों ओर ही ऐसे कितने ही लोग नहीं हैं जिनसे हम कोई वास्ता नहीं रखना चाहते, जिनसे प्रेम करना तो दूर उनके बारे में बिना मन खट्टा हुए सोचना भी हमारे लिए कठिन है? क्या हमारे अपने बारे में भी कई लोग ऐसे ही विचार और धारणा नहीं रखते? किंतु परमेश्वर फिर भी हम में से प्रत्येक से, और उन से भी जो उसके बैरी हैं, उसके विरोध में बोलते हैं निस्वार्थ प्रेम करता है। ऐसा क्यों? अपने प्रति परमेश्वर के इस प्रेम के लिए हम क्या स्पष्टिकरण दे सकते हैं, क्या कारण बता सकते हैं?

   परमेश्वर के इस प्रेम को समझ सकने की सामर्थ पाने के लिए विश्वास द्वारा मसीह का हमारे हृदय में बसना और हमारा उस में जड़ पकड़कर दृढ़ होना आवश्यक है। परमेश्वर के प्रेम को जानना है तो मसीह को जानिए, उसे अपने हृदय में स्थान दीजिए। - ऐनी सेटास


इससे बढ़कर कोई आनन्द नहीं कि हम यथार्थ में जान सकें कि परमेश्वर हम से प्रेम करता है।
और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर, सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। - इफिसीयों ३:१७, १८
बाइबल पाठ: इफिसीयों ३:१४-२१
Eph 3:14  मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं,
Eph 3:15 जिस से स्‍वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।
Eph 3:16 कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ।
Eph 3:17  और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और नेव डाल कर,
Eph 3:18  सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है।
Eph 3:19  और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Eph 3:20  अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है,
Eph 3:21  कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १६-१८ 
  • लूका २२:४७-७१

गुरुवार, 3 मई 2012

शब्दों का महत्व

  समाज द्वारा भाषा प्रयोग करने का स्तर हाल ही के कुछ वर्षों में बहुत गिर गया है। इसका यह अर्थ नहीं है कि हम अपने स्तर को भी गिरा लें। यदि हम सभी अपने स्तर को ना केवल बनाए रखने, वरन बेहतर करने की ठान लें, तो समाज का स्तर भी स्वतः ही उठ जाएगा; समाज हमारे संयुक्त आचरण ही से तो बनता है।

  एक किशोर ने, जो मसीही परिवार से था, कहा, "मेरी माँ कसम खाने वाले या बात का दबाव बनाने के लिए कहे गए शब्दों को बुरा नहीं मानती" और फिर उसने उन शब्दों की एक सुची दी जिन से उसकी माँ को कोई आपत्ति नहीं था; सूची के सभी शब्द ऐसे शब्द थे जो आम समाज में साधारण वार्तालाप में प्रयुक्त होने के लिए अनुचित माने जाते हैं या जिनके प्रयोग पर आपत्ति होना स्वाभाविक है।

   मसीही विश्वास और परमेश्वर का वचन बाइबल ऐसी कोई छूट किसी को नहीं देता, वरन चिताता है कि, "इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो" (इफिसीयों ५:१५)। हमारी बोलचाल से संबंधित और भी कई निर्देष परमेश्वर के वचन में हमें मिलते हैं, जैसे:- हमारा शब्दों के चुनाव और उपयोग में समझ-बूझ दिखाना, बुद्धिमता की निशानी है, "जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है" (नीतिवचन १०:१९)।- हमें अपने भले के लिए अपने मूँह से निकलने वाले शब्दों को नाप-तौल कर ही बाहर निकलने देना है, "जो अपने मुंह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है" (नीतिवचन २१:२३)।- कठिन परिस्थितियों में भी मृदु भाषा का उपयोग भला होता है, "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन १५:१)।

   प्रेरित पौलुस ने चिताया कि मसीही विश्वासियों को ऐसे शब्द प्रयोग करने से बचना चाहिए जो हमारे परमेश्वर की संतान होने के अनुरूप नहीं हैं, "कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो" (इफिसीयों ४:२९)। पौलुस द्वारा दिया गया शब्दों के उपयोग का यह मापदण्ड हमें सदा स्मरण रहना चहिए, और इसी के अनुसार ही हमें ना केवल अपने वार्तालाप को वरन अपने सोच-विचार को भी निर्देषित करना चाहिए, क्योंकि जो और जैसा हमारे मन में होगा, वह और वैसा ही हमारे मूँह से भी निकलेगा।

   अपने जीवन द्वारा परमेश्वर का आदर करने के लिए, अपने शब्दों के प्रयोग को उस पवित्र परमेश्वर की गरिमा के अनुसार निर्धारित करें। - डेव ब्रैनन


हम जो बोलते हैं उससे हम जो हैं प्रगट होता है।
यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। - याकूब १:२६
बाइबल पाठ: नीतिवचन १५:१-७
Pro 15:1  कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है।
Pro 15:2  बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है।
Pro 15:3  यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं।
Pro 15:4  शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है।
Pro 15:5  मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है।
Pro 15:6  धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है।
Pro 15:7  बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १४-१५ 
  • लूका २२:२१-४६

बुधवार, 2 मई 2012

आर्थिक मन्दी से शिक्षाएं

   अपने सन्देश "आर्थिक मन्दी के उद्देश्य" में पास्टर जौन पाइपर कहते हैं कि जब अर्थ व्यवस्था में गिरावट आती है तो परमेश्वर उस से भी अपने उद्देश्य पूरे करने में सक्षम है, जैसे:
  1.  - हमारे छुपे हुए पाप प्रगट कर के हमें पश्चाताप और शुद्धता में लाना।
  2.  - हमारा ध्यान विकासशील देशों की स्थिति की ओर खेंचना और हमें उन की आवश्यकताओं प्रति संवेदन शील करना, जहां हमेशा ही आर्थिक संकट बना रहता है।
  3.  - हमें एक बार फिर स्मरण दिलाना कि हमारे सुख-शांति का आधार उसका अनुग्रह है ना कि हमारी संपत्ति, उसकी दया है ना कि हमारी दौलत, उसकी सामर्थ्य है ना कि हमारी सामर्थ।
  4.  - संसार में उसके उद्धार और बचाव के सन्देश को और भी फैलाना तथा उसकी मण्डली की बढ़ोतरी को और भी बढ़ा कर दिखाना, यह प्रमाणित करने के लिए कि ये कार्य लिए सांसारिक स्त्रोतों और संपदा पर निर्भर नहीं हैं।
  5.  - अपनी मण्डली के सदस्यों को यह सीखने का अवसर देना कि वे अपने दुखते अंगों के दुख में शामिल हों, उनकी सहायता और देखभाल करें और प्रेम के वरदान में उन्नति पाएं।

   इन कठिन समयों में परमेश्वर हमें और क्या सिखाना चाहता है? 
  • यह कि उस के लिए कुछ भी असंभव नहीं है (लूका १:३७)। 
  • यह कि "वन के सारे जीव-जन्तु और हजारों पहाड़ों के जानवर" (भजन ५०:१०) उसी के हैं, और संसार की अर्थ व्यवस्था का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 
  • यह कि चाहे संसार की संपदा ने हमें छोड़ दिया हो किंतु परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता है; और 
  • संसार की बदलती परिस्थितियाँ उसके अनुयायियों के लिए उसके सुसमाचार प्रचार के उद्देश्य (मत्ती २८:२०) को बदल नहीं सकतीं, वह हर परिस्थिति में मान्य और लागू है।

   अपनी आशा सांसारिक धन संपत्ति पर नहीं वरन उस पर लगाएं जो संसार और सृष्टि का स्वामी है। - सिंडी हैस कैस्पर


जब आपके पास परमेश्वर के सिवाय और कुछ नहीं होता, तब आपके पास जिसे होना चाहिए वह होता है।
हे यहोवा ! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है, क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा ! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है। - १ इतिहास २९:११
बाइबल पाठ: भजन ५०:१-११
Psa 50:1  ईश्वर परमेश्वर यहोवा ने कहा है, और उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक पृथ्वी के लोगों को बुलाया है।
Psa 50:2  सिरयोन से, जो परम सुन्दर है, परमेश्वर ने अपना तेज दिखाया है।
Psa 50:3  हमारा परमेश्वर आएगा और चुपचाप न रहेगा, आग उसके आगे आगे भस्म करती जाएगी, और उसके चारों ओर बड़ी आंधी चलेगी।
Psa 50:4  वह अपनी प्रजा का न्याय करने के लिये ऊपर से आकाश को और पृथ्वी को भी पुकारेगा:
Psa 50:5  मेरे भक्तों को मेरे पास इकट्ठा करो, जिन्होंने बलिदान चढ़ा कर मुझ से वाचा बान्धी है!
Psa 50:6  और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है।
Psa 50:7  हे मेरी प्रजा, सुन, मैं बोलता हूं, और हे इस्राएल, मैं तेरे विषय साक्षी देता हूं। परमेश्वर तेरा परमेश्वर मैं ही हूं।
Psa 50:8  मैं तुझ पर तेरे मेलबलियों के विषय दोष नहीं लगाता, तेरे होमबलि तो नित्य मेरे लिये चढ़ते हैं।
Psa 50:9  मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशालों से बकरे ले लूंगा।
Psa 50:10  क्योंकि वन के सारे जीव-जन्तु और हजारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैं।
Psa 50:11  पहाड़ों के सब पक्षियों को मैं जानता हूं, और मैदान पर चलने फिरने वाले जानवर मेरे ही हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १२-१३ 
  • लूका २२:१-२०

मंगलवार, 1 मई 2012

संतुष्टि

   जिग-सौ पज़ल के चित्र को पूर्ण बना पाने की संतुष्टि के लिए हमें उस चित्र के सभी भागों की आवश्यक्ता होती है। कई प्रकार से जीवन भी कुछ ऐसा ही है। हम अपने दिन अपने जीवन के बिखरे हुए टुकड़ों को जमा करने और फिर उन्हें ठीक से जोड़ कर एक अच्छा और पूर्ण चित्र बनाने में लगे रहते हैं, किंतु फिर भी कभी कभी लगता है कि कोई भाग कहीं ग़ायब है, चित्र अधूरा है और संतुष्टि नहीं है।

   ऐसे में थोड़ा रुक कर जांचना आवश्यक है कि क्या हम चित्र को पूरा करने के लिए गलत भागों को लगाने के प्रयास तो नहीं कर रहे? यद्यपि हम जानते हैं कि जिस जीवन में परमेश्वर केंद्रबिंदु नहीं है वह जीवन अपने सबसे महत्वपूर्ण भाग से रहित है, क्या फिर भी हम ऐसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं मानों परमेश्वर हमारे लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखता? चाहे हम नियमित रूप से चर्च जाते हों, आराधना में सम्मिलित होते हों, तो भी क्या परमेश्वर हमारे जीवन में सबसे अधिक महत्व रखता है? कई बार हम परमेश्वर से अपनी दूरी के आदी हो जाते हैं, उस की कमी हमें कुछ विशेष नहीं खलती, और हमारे लिए पाप में पड़ जाना या समझौता कर लेना सरल हो जाता है, बिना यह एहसास रखे कि इस से हमारे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग नष्ट हो रहा है।

   लेकिन हम चाहे परमेश्वर से कितने ही दूर चले जाएं, वह सदा हमें अपने पास लाने के प्रयासों में लगा रहता है, क्योंकि उसकी लालसा यही रहती है कि उस की संतान उसके पास रहे। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपने नबी यशायाह द्वारा अपनी प्रजा से कहलवाया: "जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे" (यशायाह ५५:२)।

   यदि आपके जीवन से भी कुछ खोया हुआ प्रतीत होता है, तो स्मरण रखिए कि केवल परमेश्वर ही है जो आपको भरपूरी से संतुष्टि और संपूर्ण तृप्ति दे सकता है। उसे ही अपने जीवन के चित्र को पूर्ण करने दीजिए। उसकी संतुष्टि स्थाई संतुष्टि है। - जो स्टोवैल


प्रत्येक मन में ऐसी लालसाएं हैं जिन्हें केवल यीशु ही तृप्त कर सकता है।
जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे। - यशायाह ५५:२
बाइबल पाठ: यशायाह ५५:१-६
Isa 55:1  अहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ, और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isa 55:2  जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isa 55:3  कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे, और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isa 55:4  सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isa 55:5  सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उस ने तुझे शोभायमान किया है।
Isa 55:6  जब जब यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १०-११ 
  • लूका २१:२०-३८

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

सहारा

   एक सुसमाचार सभा में वक्ता अपने सन्देश में समझा रहा था कि प्रभु यीशु मसीह में बने रहने और हर परीक्षा में उस पर पूर्णतः विश्वास करने का तात्पर्य क्या है। अपने सन्देश को समाप्त करते समय उन्होंने कई बार दोहराया कि इसका अर्थ है कि हर बात और हर परिस्थित के लिए आप विश्वास करेंगे कि ’इस बात के लिए मुझे यीशु का सहारा है’।

   सन्देश के बाद सभा में उपस्थित श्रोताओं को समय दिया गया कि वे अपने अनुभव बताएं और इस संबंध में अपने जीवन से गवाही दें। एक महिला ने उठ कर कहा, "कुछ मिनिट पहले मुझे एक सन्देश मिला कि मेरी माँ बहुत बिमार हैं और मुझे पहली गाड़ी से घर पहुँचकर उनसे मिल लेना चाहिए। तुरंत मैं जान गई कि आज का यह सन्देश मेरे लिए था। मैंने ऊपर की ओर देख कर कहा ’इस बात के लिए मुझे यीशु का सहारा है’ और उसी क्षण एक अद्भुत शांति और सामर्थ्य से मेरा मन भर गया, मेरी चिन्ताएं दूर हो गईं।"

   इस बात के कोई तीन या चार सप्ताह पश्चात उस प्रचारक को उसी महिला का एक पत्र मिला, जिसमें उस ने लिखा था, "उस दिन के दिए गए सन्देश के लिए एक बार फिर आपका धन्यवाद। तब से मेरे लिए जीवन एक निरन्तर विजय का स्तुति गीत बन गया है, क्योंकि मैं अब जान गई हूँ कि जीवन में चाहे जो भी परिस्थिति क्यों ना आए, हर बात के लिए मुझे यीशु का सहारा है।"

   उस मसीही विश्वासी महिला ने अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु में उसे पा लिया था जिसका वायदा है कि वह उन्हें हर आग और जल से उबार कर सुख से भर देगा (भजन ६६:१२)। यदि आप भी किसी परीक्षा में हैं या किसी बात से निराश हैं, तो स्मरण रखिए, हर बात के लिए आपको यीशु का सहारा उपलब्ध है। जो हाथ विश्वास से एक बार उसके हाथ में रख दिया जाता है उसे वह न कभी छोड़ता है और ना कभी त्यागता है। - हेनरी जी. बौश


यदि हर परिस्थिति में हम मसीह में बने हुए पाए जाते हैं, तो हर परिस्थिति में हमें मसीह हमारे साथ खड़ा मिलेगा।
तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो, क्‍योंकि उस ने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों १३:५
बाइबल पाठ: भजन ६६:१-२०
Psa 66:1  हे सारी पृथ्वी के लोगों, परमेश्वर के लिये जयजयकार करो;
Psa 66:2  उसके नाम की महिमा का भजन गाओ, उसकी स्तुति करते हुए, उसकी महिमा करो।
Psa 66:3  परमेश्वर से कहो, कि तेरे काम क्या ही भयानक हैं! तेरी महासामर्थ्य के कारण तेरे शत्रु तेरी चापलूसी करेंगे।
Psa 66:4  सारी पृथ्वी के लोग तुझे दण्डवत् करेंगे, और तेरा भजन गाएंगे, वे तेरे नाम का भजन गाएंगे।
Psa 66:5  आओ परमेश्वर के कामों को दखो, वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है।
Psa 66:6  उस ने समुद्र को सूखी भूमि कर डाला, वे महानद में से पांव पावं पार उतरे। वहां हम उसके कारण आनन्दित हुए,
Psa 66:7  जो पराक्रम से सर्वदा प्रभुता करता है, और अपनी आंखों से जाति जाति को ताकता है। हठीले अपने सिर न उठाएं।
Psa 66:8  हे देश देश के लोगो, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ,
Psa 66:9  जो हम को जीवित रखता है, और हमारे पांव को टलने नहीं देता।
Psa 66:10  क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा, तू ने हमें चान्दी की नाईं ताया था।
Psa 66:11  तू ने हम को जाल में फंसाया, और हमारी कटि पर भारी बोझ बान्धा था;
Psa 66:12  तू ने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से होकर गए, परन्तु तू ने हम को उबार के सुख से भर दिया है।
Psa 66:13  मैं होमबलि लेकर तेरे भवन में आऊंगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूंगा,
Psa 66:14  जो मैं ने मुंह खोल कर मानीं, और संकट के समय कही थीं।
Psa 66:15  मैं तुझे मोटे पशुओं के होमबलि, मेढ़ों की चर्बी के धूप समेत चढ़ऊंगा; मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊंगा।
Psa 66:16  हे परमेश्वर के सब डरवैयों आकर सुनो, मैं बताऊंगा कि उस ने मेरे लिये क्या क्या किया है।
Psa 66:17  मैं ने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझ से हुआ।
Psa 66:18  यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता।
Psa 66:19  परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है, उस ने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है।
Psa 66:20  धन्य है परमेश्वर, जिस ने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है! 
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १४-१५ 
  • लूका १७:१-१९

ईमानदारी दिवस

   अमेरिका में आज का दिन "ईमानदारी दिवस" के नाम से जाना जाता है। अप्रैल की ३० तारीख के लिए यह उपनाम कोई बहुत प्रचलित नाम नहीं है, किंतु फिर भी महत्वपूर्ण अवश्य है। लेखक एम. हिर्ष गोल्डबर्ग ने १९९० के दशक में इसे ईमानदार लोगों का आदर करने और ईमानदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित किया था। उनका अप्रैल माह के इस अन्तिम दिन को ईमानदारी दिवस के लिए चुनने का कारण था कि अप्रैल माह का पहला दिन असत्य को समर्पित रहता है, सारे विश्व में इसे ’अप्रैल फूल्स दिवस’ के रूप में माना जाता है और उस दिन असत्य द्वारा लोगों के मूर्ख बनाए जाने के प्रयास किए जाते हैं, इसलिए गोल्डबर्ग ने चाहा कि अप्रैल का अन्त एक उत्तम नैतिक स्तर पर होना चाहिए।

   ईमानदारी दिवस एक अच्छा समय है कि हम इस गुण का मूल्यांकन इस संबंध में परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं के आधार पर करें। जीवन में हर बात में ईमानदारी इतनी सरल नहीं है जितनी प्रतीत होती है, किंतु ईमानदारी का जीवन व्यतीत करने के हमारे सच्चे प्रयास परमेश्वर को प्रसन्न अवश्य करते हैं।

   ईमानदारी की समझ आरंभ होती है, हमारे अनुकर्णीय सर्वोच्च उदाहरण परमेश्वर के चरित्र से। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर: 
  • सत्य है (व्यवस्थाविवरण ३२:४); 
  • वह कभी झूठ या असत्य नहीं बोल सकता (गिनती २३:१९, इब्रानियों ६:१८); 
  • वह दोगलेपन से घृणा करता है (नीतिवचन ६:१६-१९)। 

बाइबल यह भी बताती है कि सभी असत्य और झूठ का उदग्म शैतान ही से है ( यूहन्ना ८:४४)।

   अपने जीवनों के लिए हम बाइबल से लिए गए इन खण्डों पर ध्यान कर सकते हैं: 
  • धर्मी जन झूठ से घृणा करता है (नीतिवचन १३:५); 
  • प्रेम सत्य से आनन्दित होता है (१ कुरिन्थियों १३:६); 
  • झूठ बोलना पुराने मनुष्यत्व का भाग है (कुलुस्सियों ३:९); 
  • उन्नति के लिए छल, पाखण्ड और कपट को छोड़ना अनिवार्य है (१ पतरस २:१) और 
  • धार्मिकता प्रकट करने के लिए केवल सत्य ही बोलना है (नीतिवचन १२:१७)।

   आईए केवल अप्रैल के इस अन्तिम दिन को ही नहीं, वरन अपने जीवन के प्रत्येक दिन को हम "ईमानदारी दिवस" के रूप में मनाएं। - डेव ब्रैनन


जो लोग परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते हैं उनके अपने वचन भी विश्वासयोग्य रहने चाहिएं।
झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है। - नीतिवचन १२:२२
बाइबल पाठ: नीतिवचन १२:१७-२२
Pro 12:17  जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साक्षी देता, वह छल प्रगट करता है।
Pro 12:18  ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोचविचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं।
Pro 12:19  सच्चाई सदा बनी रहेगी, परन्तु झूठ पल ही भर का होता है।
Pro 12:20  बुरी युक्ति करने वालों के मन में छल रहता है, परन्तु मेल की युक्ति करने वालों को आनन्द होता है।
Pro 12:21  धर्मी को हानि नहीं होती है, परन्तु दुष्ट लोग सारी विपत्ति में डूब जाते हैं।
Pro 12:22  झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा ८-९ 
  • लूका २१:१-१९

रविवार, 29 अप्रैल 2012

व्यस्त जीवन

   क्या आपका लगता हि कि आपका जीवन बहुत व्यस्त है? कारोबार के निर्णय और उन्हें पूरा करने की समय सीमाएं, कार्य को पूरा करने के दबाव, बच्चों को शिक्षा और कार्यक्रमों में लाने-लेजाने के दबाव इत्यादि क्या आपके जीवन में व्यक्तिगत बातों के लिए समय के आभाव को उत्पन्न करते हैं? ऐसी परिस्थितियों में यह सोचना बहुत आसान है कि, "काश मेरे पास निभाने के लिए इतनी सारी ज़िम्मेवारियाँ नहीं होतीं, फिर मैं भी परमेश्वर के साथ एक निकट संबंध में चल पाता।"

   यदि ऐसा है तो लेखक सी.एस.ल्यूइस द्वारा कही बात पर ध्यान कीजिए, उन्होंने कहा कि "प्रभु यीशु के समान व्यस्त व्यक्ति और कोई नहीं था। हमारे लिए अनुसरण करने का नमूना हमारा प्रभु यीशु ही है; वह यीशु जो सदा ही हमें अपनी बढ़ई की दुकान में कार्यरत, या सड़क पर, या भीड़ में, या आलोचनाओं, बाधाओं और विरोध का सामना करते, या उसके निज समय में लोगों के हस्ताक्षेप होते हुए मिलता है। वही मानव परिस्थितियों में ईश्वरीय जीवन सफलता से जी के दिखाने का उदाहरण है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस १:२१-३५ में हम प्रभु यीशु के जीवन के एक दिन के बारे में पढ़ते हैं; उस व्यस्त दिन के अन्त को देखिए "सन्‍ध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें जिन में दुष्‍टात्मा थीं उसके पास लाए। और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ। और उस ने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्माओं को निकाला, और दुष्‍टात्माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं" (मरकुस १:२-३४)। और फिर हम पढ़ते हैं कि अगले दिन यीशु तड़के ही उठकर प्रार्थना करने को एकांत में निकल गया (मरकुस १:३५), जहां उसने फिर अपने पिता परमेश्वर से, उस आरंभ हुए दिन की व्यस्तता के लिए निर्देष और सामर्थ प्राप्त करी। यही हमारे प्रभु की सफलता का राज़ था - पिता परमेश्वर से लगातार बनी संगति और पवित्र आत्मा पर निर्भर होकर कार्य करना।

   आज भी प्रभु के विश्वासियों के लिए यही उनकी भी सफलता की कुंजी है, परमेश्वर पिता के साथ लगातार बनी रहने वाली संगति और परमेश्वर के निर्देषानुसार पवित्र आत्मा की आज्ञाकारिता और सामर्थ में कार्य करना।

   क्या आप का जीवन व्यस्त है? प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण कीजिए, परमेश्वर के साथ बातचीत के लिए एक समय निरधारित करके रख लीजिए और फिर परमेश्वर पर निर्भर कीजिए कि वह प्रत्येक दिन की आवश्यक्ताओं के लिए आपको मार्गदर्शन दे और योग्य सामर्थ से परिपूर्ण करे। - डेनिस फिशर


अपने जीवन के सन्तुलन को बनाए रखने के लिए प्रभु यीशु पर आलम्बित हो जाइए।
और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। - मरकुस १:३५
बाइबल पाठ: मरकुस १:२१-३५
Mar 1:21  और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्‍त सब्‍त के दिन सभा के घर में जाकर उपदेश करने लगा।
Mar 1:22  और लोग उसके उपदेश से चकित हुए, क्‍योंकि वह उन्‍हें शास्‍त्रियों की नाईं नहीं, परन्‍तु अधिकारी की नाईं उपदेश देता था।
Mar 1:23   और उसी समय, उन की सभा के घर में एक मनुष्य था, जिस में एक अशुद्ध आत्मा थी।
Mar 1:24  उस ने चिल्लाकर कहा, हे यीशु नासरी, हमें तुझ से क्‍या काम? क्‍या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूं, तू कौन है परमेश्वर का पवित्र जन!
Mar 1:25   यीशु ने उसे डांटकर कहा, चुप रह, और उस में से निकल जा।
Mar 1:26  तब अशुद्ध आत्मा उस को मरोड़ कर, और बड़े शब्‍द से चिल्ला कर उस में से निकल गई।
Mar 1:27  इस पर सब लोग आश्‍चर्य करते हुए आपस में वाद-विवाद करने लगे कि यह क्‍या बात है यह तो कोई नया उपदेश है! वह अधिकार के साथ अशुद्ध आत्माओं को भी आज्ञा देता है, और वे उस की आज्ञा मानती हैं।
Mar 1:28  सो उसका नाम तुरन्‍त गलील के आस पास के सारे देश में हर जगह फैल गया।
Mar 1:29  और वह तुरन्‍त आराधनालय में से निकल कर, याकूब और यूहन्ना के साय शमौन और अन्‍द्रियास के घर आया।
Mar 1:30  और शमौन की सास ज्‍वर से पीड़ित थी, और उन्‍होंने तुरन्‍त उसके विषय में उस से कहा।
Mar 1:31  तब उस ने पास जाकर उसका हाथ पकड़ के उसे उठाया, और उसका ज्‍वर उस पर से उतर गया, और वह उन की सेवा-टहल करने लगी।
Mar 1:32  सन्‍ध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें जिन में दुष्‍टात्मा थीं उसके पास लाए।
Mar 1:33   और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ।
Mar 1:34  और उस ने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्माओं को निकाला, और दुष्‍टात्माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं।
Mar 1:35   और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा ६-७ 
  • लूका २०:२७-४७