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सोमवार, 6 अगस्त 2012

पहुनाई


   जनवरी के महीने में मुझे एक शोध कार्य के लिए जर्मनी जाना था। मुझे यह जान कर बड़ा विसमय हुआ कि हमारे ठहरने और रहने का प्रबंध एक मठ में किया गया है। ठंड और बर्फ के उस मौसम में अपने रहने के स्थान के बारे में मेरी कलपना एक बहुत एकाकी स्थान की थी जहां कमरा गर्म करने का कोई साधन नहीं होगा और पत्थर के ठंडे फर्श तथा कठोर बेआराम बिसतरों पर सोना पड़ेगा। किंतु जब मैं वहां पहुँचा तो अपनी कलपना के विपरीत मेरा स्वागत एक गर्म और अच्छे आरामदेह कमरे से हुआ। मेरे सहकर्मी ने समझाया, "मठ में रहने वाले ये मसीही सन्यासी अपने मेहमानों का वैसे ही स्वागत करने में विश्वास रखते हैं जैसा वे मसीह यीशु का करना चाहते हैं" यद्यपि वे सन्यासी स्वयं उन आराम की बातों का प्रयोग नहीं करते।

   रोबर्ट हेरिक नामक एक १७वीं शताब्दी के कवि ने लिखा: "मसीह, वह जिसके पास भी जाता, खाता और रहता है, उससे सर्वोत्तम की आशा करता है; अपनी प्रत्येक वस्तु और बात का सर्वोत्तम उसे दीजिए, रहने के लिए भी; आपका दिल ही उसके लिए रहने का सर्वोत्तम स्थान है।"

    जब लोग हमारे समय या स्थान का थोड़ी देर के लिए थोड़ा सा प्रयोग करना चाहते हैं तब उनके प्रति हमार व्यवहार कैसा होता है - एक आदरणीय मेहमान के समान या किसी घुसपैठिये के समान? मसीह यीशु के लिए अपने दिल को खोलना अपने जीवन का दूसरों के लिए खोले जाने से आसान प्रतीत हो सकता है; लेकिन जिसने वास्तव में मसीह के लिए अपना दिल खोला है, वह दुसरों के लिए भी खोलेगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने लिखा: "और सब में श्रेष्‍ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो, क्‍योंकि प्रेम अनेक पापों को ढ़ांप देता है। बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो" (१ पतरस ४:८-९); और प्रभु यीशु ने कहा: "...तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया" (मत्ती २५:४०)।

   जब हम मसीह के प्रेम के अन्तर्गत दूसरों को अपने घर का सर्वोत्तम स्थान, प्रेम से और स्वेच्छा से उनकी पहुनाई और अपने मनों में उन्हें स्थान देते हैं तो मसीह यीशु को आदर देते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रेम जानने के लिए अपने मन को प्रभु यीशु के लिए खोलिए; प्रेम दिखाने के लिए अपने मन को दूसरों के लिए खोलिए।

बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। - १ पतरस ४:९

बाइबल पाठ: मत्ती २५:३१-४३
Mat 25:31  जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्‍वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा। 
Mat 25:32  और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्‍हें एक दूसरे से अलग करेगा। 
Mat 25:33   और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाईं और खड़ी करेगा। 
Mat 25:34   तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है। 
Mat 25:35   क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया। 
Mat 25:36  मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए। 
Mat 25:37   तब धर्मी उस को उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया? 
Mat 25:38   हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया? या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए?
Mat 25:39  हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? 
Mat 25:40  तब राजा उन्‍हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया। 
Mat 25:41  तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्‍त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है। 
Mat 25:42  क्‍योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया। 
Mat 25:43  मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया; मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहिनाए; बीमार और बन्‍दीगृह में था, और तुम ने मेरी सुधि न ली। 
Mat 25:44  तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हम ने तुझे कब भूखा, या प्यासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्‍दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल न की? 
Mat 25:45  तब वह उन्‍हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं कि तुम ने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७०-७१ 
  • रोमियों ८:२२-३९


रविवार, 5 अगस्त 2012

ज़िम्मेदारी


   एक ६२ वर्षीय वृद्ध महिला को चर्च से $७३,००० चुराने का दोषी पाया गया। चोरी के बारे में पूछताछ के समय उस महिला का कहना था कि: "इस चोरी में मुख्य भूमिका शैतान की है!" वह कहना चाह रही थी कि यह कार्य शैतान ने उससे करवाया है, इसलिए दोषी वह नहीं शैतान है। अवश्य ही उसके निर्णय लेने में शैतान की भूमिका रही होगी; किंतु प्रलोभन और पाप के विषय में उसकी सोच सही नहीं है। शैतान हमें प्रलोभन दे सकता है किंतु पाप करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

   कुछ लोग इसके विपरीत, अपने पापों के लिए परमेश्वर को दोषी ठहराते हैं। इस संदर्भ में परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने लिखा, "जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है" (याकूब १:१३)। परमेश्वर पवित्र और भला है, बुराई से उसका कोई सरोकार नहीं है।

   तो फिर हमारे पापों की जिम्मेदारी किसकी है? याकूब ही ने आगे लिखा, "परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है" (याकूब १:१४)। जैसे मछली मारने के लिए कांटे पर चारा लगाया जाता है, किंतु उस चारे को स्वीकार करना और खा लेना मछली का निर्णय होता है; वैसे ही शैतान हमारे सामने प्रलोभन रखता है किंतु उन प्रलोभनों में फंसकर दुराचार करना प्रत्येक व्यक्ति का अपना निर्णय होता है। परमेश्वर के वचन और आज्ञाओं की अनदेखी करते हुए हमारा अनियंत्रित अभिलाषाएं रखना, हमारे स्वार्थ, हमारा अपने लाभ के लिए बुराई तथा दुषकर्म के साथ समझौता करना और अपने ही निर्धारित तरीकों से दूसरों से आगे बढ़ निकलने की हमारी इच्छाएं ही हमें प्रलोभनों में पड़कर पाप में फंसा देती हैं।

   जब हम परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन कर के पाप में पड़ जाते हैं तो इसके लिए परमेश्वर को जिम्मेदार नहीं ठहराएं और ना ही "शैतान ने मुझसे करवाया" वाला बहाना बनाएं। जब भी हम पाप में पड़ें तो इसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर अपने अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर पिता के समक्ष अपने पापों को मान लें, पश्चाताप के साथ उस से उनकी क्षमा मांग लें, और फिर से उस के द्वारा दिखाए सही मार्ग पर चलने के प्रयास में लग जाएं। - मार्विन विलियम्स


जब हम पाप करते हैं तो उसकी जिम्मेदारी भी हमारी ही होती है।

परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है। - याकूब १:१४

बाइबल पाठ: याकूब १:१२-१८
Jas 1:12  धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। 
Jas 1:13  जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है। 
Jas 1:14  परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है। 
Jas 1:15  फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्‍पन्न करता है। 
Jas 1:16   हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ। 
Jas 1:17  क्‍योंकि हर एक अच्‍छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। 
Jas 1:18  उस ने अपनी ही इच्‍छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्‍पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ६८-६९ 
  • रोमियों ८:१-२१

शनिवार, 4 अगस्त 2012

भटके हुए


   मुझे अभी भी यह सोचकर अचरज होता है कि मनुष्य सुदूर अंतरिक्ष में सैटलाईट भेज सकता है। भेजने से पहले बड़े गहन अध्ययन द्वारा हर एक सैटलाईट का पथ और कक्षा निर्धारित करी जाती है और उसी के अनुसार उसे पृथ्वी प्रेषित किया जाता है। ज़रा विचार कीजिए कि यह कितनी बड़ी बरबादी होगी यदि मंगल ग्रह की ओर भेजी गई सैटलाईट, मार्ग में किसी अन्य महत्वहीन पिंड के गुरुत्वाकर्षण से आकर्षित होकर अपनी कक्षा से भटक जाए और किसी अन्य मार्ग पर हो ले। ध्यान कीजिए, यह आपके जीवन में भी हो सकता है या हो रहा होगा।

   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को बुलाया, तो उसकी इच्छा थी कि वे पूरी लगन और तत्परता के साथ उसके पीछे चलें। प्रभु यीशु के चेलों के लिए एक ऐसा पथ निर्धारित है जो उन्हें लगातार प्रभु यीशु की निकटता की ओर ही ले जाता है। लेकिन इस पथ पर चलते हुए कई दफा संसार और संसार कि बातों का आकर्षण हमें हमारे पथ से भटका देता है और तब हम प्रभु यीशु की नहीं वरन संसार की व्यर्थ और खोखली बातों तथा इच्छाओं की पूर्ति की निकटता में बढ़ने लगते हैं।

   ऐसे भटके हुए जीवनों के लिए परमेश्वर के वचन में भजन ६३ एक उत्तम मार्गदर्शक है। इस भजन के लेखक दाऊद ने परमेश्वर की निकटता को अपना लक्ष्य बनाया, यह जानते हुए कि केवल वह ही उसके अन्दर की प्यास को बुझा सकता है, क्योंकि परमेश्वर की करुणा जीवन की उत्तमता से बढ़कर है (पद ३)। परमेश्वर की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति पर वह हर पल विचार करता रहता था, "जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा" (पद ६)। दाऊद ने समझा और जाना कि जीवन का वास्तविक आनन्द और उद्देश्य दूर ही से परमेश्वर को निहारने के द्वारा नहीं वरन भरसक प्रयास के साथ उसके साथ साथ चलने में है।

   यदि आप आज अपने लक्ष्य से या अपने पथ से भटक गए हैं, तो व्यर्थ के आकर्षणों को छोड़कर पुनः अपने सही पथ और लक्ष्य की ओर लौट आएं, और परमेश्वर की नज़दीकी में चलने का मार्ग पर बढ़ें। - जो स्टोवैल


आप जितना परमेश्वर की निकटता में चलेंगे, अन्य बातों को बीच में आने का उतना कम स्थान मिलेगा।

हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। - भजन ६३:१

बाइबल पाठ: भजन ६३
Psa 63:1  हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। 
Psa 63:2  इस प्रकार से मैं ने पवित्रस्थान में तुझ पर दृष्टि की, कि तेरी सामर्थ्य और महिमा को देखूं। 
Psa 63:3  क्योंकि तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है मैं तेरी प्रशंसा करूंगा। 
Psa 63:4  इसी प्रकार मैं जीवन भर तुझे धन्य कहता रहूंगा; और तेरा नाम लेकर अपने हाथ उठाऊंगा।
Psa 63:5  मेरा जीव मानो चर्बी और चिकने भोजन से तृप्त होगा, और मैं जयजयकार करके तेरी स्तुति करूंगा। 
Psa 63:6  जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा; 
Psa 63:7  क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिये मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूंगा। 
Psa 63:8  मेरा मन तेरे पीछे पीछे लगा चलता है, और मुझे तो तू अपने दाहिने हाथ से थाम रखता है।
Psa 63:9  परन्तु जो मेरे प्राण के खोजी हैं, वे पृथ्वी के नीचे स्थानों में जा पड़ेंगे; 
Psa 63:10  वे तलवार से मारे जाएंगे, और गीदड़ों का आहार हो जाएंगे। 
Psa 63:11  परन्तु राजा परमेश्वर के कारण आनन्दित होगा; जो कोई ईश्वर की शपथ खाए, वह बड़ाई करने पाएगा; परन्तु झूठ बोलने वालों का मुंह बन्द किया जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ६६-६७
  •  रोमियों ७

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

’वायरस’


   संसार भर में स्वाईन फ्लू के फैलने से लोगों का ध्यान इस रोग के कारण - H1N1 वायरस की ओर गया। वायरस अति सूक्षम जीवाणु होते हैं जो किसी अन्य जीव के अन्दर रहते और पनपते हैं, और उसे ही नष्ट कर देते हैं। कुछ प्रकार के वायरस उस जीव में कई वर्षों तक बने रहते हैं, इससे पहले कि उनके होने का पता चले; और इस अज्ञात रहने के समय में वे उस जीव के अन्दर बहुत हानि कर देते हैं। वायरस को जीव से बाहर निकाल दें तो वह रह नहीं पाता, मर जाता है।

   इसी प्रकार से पाप को भी जीवित और कार्यकारी होने के लिए एक व्यक्ति चाहिए होता है। अपने आप में, पाप, जैसे कि घमण्ड, लालच, क्रोध, स्वार्थ इत्यादि केवल शब्द हैं; किंतु जब पाप किसी मनुष्य पर हावी हो जाता है तो फिर वह उसे नष्ट करके ही जाता है।

   किंतु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए गए बलिदान के द्वारा, उस पर विश्वास लाने वाला प्रत्येक विश्वासी पाप से छुड़ाया गया है (रोमियों ६:१८)। अब परमेश्वर का पवित्र आत्मा प्रत्येक विश्वासी में बसकर उसे शरीर की अभिलाशाओं के कारण पाप के ’वायरस’ को पनपने की शक्ति मिलने का प्रतिरोध करने में सहायता करता है (गलतियों ५:१६)। यद्यपि मसीही विश्वासी से पाप हो सकता है, किंतु परमेश्वर का आत्मा उसे पाप में बने नहीं रहने देता, "हम जानते हैं, कि जो कोई परमेश्वर से उत्‍पन्न हुआ है, वह पाप नहीं करता; जो परमेश्वर से उत्‍पन्न हुआ, उसे वह बचाए रखता है: और वह दुष्‍ट उसे छूने नहीं पाता" (१ युहन्ना ५:१८)। अभी हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के पवित्र आत्मा पर निर्भर होकर चलते हैं, और एक दिन परमेश्वर की महिमा के सामने निर्दोष होकर खड़े होंगे (यहूदा १:२४)।

   क्या यह आपके लिए एक बड़ी निश्चिंतता की बात नहीं है कि यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो ’पाप के वायरस’ से संक्रामित इस संसार में आप बिना संक्रमण के खतरे के विचरण कर सकते हैं? - सी. पी. हिया


पाप रोग का इलाज केवल मसीह यीशु ही है।

और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। - रोमियों ६:१८

बाइबल पाठ: रोमियों ६:१४-२३
Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।
Rom 6:15  तो क्‍या हुआ? क्‍या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं। 
Rom 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है 
Rom 6:17  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे। 
Rom 6:18   और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। 
Rom 6:19   मैं तुम्हारी शारीरिक र्दुबलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। 
Rom 6:20  जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्‍वतंत्र थे। 
Rom 6:21  सो जिन बातों से अब तुम लज्ज़ित होते हो, उन से उस समय तुम क्‍या फल पाते थे?
Rom 6:22  क्‍योंकि उन का अन्‍त तो मृत्यु है परन्‍तु अब पाप से स्‍वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्‍त होती है, और उसका अन्‍त अनन्‍त जीवन है। 
Rom 6:23  क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्‍तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ६३-६५
  •  रोमियों ६

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

वह सब जानता है


   मेरा एक मित्र ने, जो वायुयान चालक है, अपने साथ घटित एक घटना बताई। वह एक उड़ान पर था और वायुयान में गंभीर तकनीकी समस्या खड़ी हो गई, जिसके परिणाम खतरनाक भी हो सकते थे। जैसे ही समस्या उठी, चालक कक्ष में उससे संबंधित चेतावनी की बत्तियां जलने लगीं। मेरे मित्र ने यंत्रों पर पूरे ध्यान से नज़र बनाए रखी, योग्य कार्यवाही करी और निगरानी बनाए हुए वह विमान को गन्तव्य स्थान तक सुरक्षित ले आया और ज़मीन पर उतार लिया।

   ज़मीन पर उतरने के तुरंत बाद मेरा मित्र विमान की देखभाल करने वाले दल के पास गया और उन्हें उत्पन्न हुई समस्या के बारे में बताने लगा। उसे उस दल से सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ कि उन्हें समस्या का पता है। उन लोगों ने उसे बताया कि जैसे ही उसके चालक कक्ष में चेतावनी की बत्तियां जलनी आरंभ हुईं, नीचे उस दल के पास भी इलैक्ट्रौनिक माध्यम से उसका सन्देश पहुंच गया था।

   अपने विमान चालक मित्र की यह बात सुनकर मुझे प्रभु यीशु द्वारा परमेश्वर पिता के संबंध में कही गई बात स्मरण हो आई, "प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्‍योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। सो तुम उन की नाईं न बनो, क्‍योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्‍या क्‍या आवश्यक्ता है" (मत्ती ६:८)। प्रभु यीशु ने इस बात के द्वारा परमेश्वर पिता का अपने बच्चों के प्रति लगातार बने रहने वाले ध्यान और उससे मिलने वाली सहायता तथा देखभाल का आश्वासन दिया।

   यद्यपि परमेश्वर हमारी प्रत्येक आवश्यक्ता को जानता है, तौ भी वह चाहता है कि हम उसके साथ अपने मन की बातें बांटें, अपनी इच्छाएं उसे व्यक्त करें, अपनी समस्याओं के बारे में उसे बताएं और उसकी सलाह लें; वास्तव में यही प्रार्थना करना है। हमारा परमेश्वर पिता हमारी हर प्रार्थना को सुनने को तैयार रहता है और हमारी हर टूटी हालत को सुधारने के लिए उसका अनुग्रह हमें उपलब्ध रहता है। हमारे बारे में और हमारी आवश्यक्ताओं के बारे में वह सब जानता है। - बिल क्राउडर


प्रार्थना इस विश्वास से दिल से निकली पुकार है कि परमेश्वर सब जानता है और प्रयोजन करता है।

सो तुम उन की नाईं न बनो, क्‍योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्‍या क्‍या आवश्यक्ता है। - मत्ती ६:८

बाइबल पाठ: मत्ती ६:५-१३
Mat 6:5  और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्‍योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े होकर प्रार्थना करना उन को अच्‍छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Mat 6:6  परन्‍तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा, और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Mat 6:7  प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्‍योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। 
Mat 6:8  सो तुम उन की नाईं न बनो, क्‍योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्‍या क्‍या आवश्यक्ता है। 
Mat 6:9  सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो : हे हमारे पिता, तू जो स्‍वर्ग में हैं, तेरा नाम पवित्र माना जाए। 
Mat 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्‍छा जैसी स्‍वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। 
Mat 6:11  हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। 
Mat 6:12  और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। 
Mat 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्‍तु बुराई से बचा; क्‍योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ६०-६२ 
  • रोमियों ५

बुधवार, 1 अगस्त 2012

सहायता और दान


   मैं आपके बारे में तो नहीं जानता, परन्तु जब मैं किसी के लिए कोई कार्य करता हूँ तो उसका श्रेय मिलना मुझे अच्छा लगता है। मैं यह भी जानता हूँ कि धन्यवाद के शब्द या कार्ड पाने की इच्छा रखने वाला मैं अकेला ही नहीं हूँ। साथ ही मुझे यह भी पता है कि अज्ञात रूप से किसी की सहायता करने या दान देने में कोई तो विशेष बात है क्योंकि स्वयं हमारे प्रभु यीशु ने ऐसा करने को कहा है।

   इसीलिए जब एक दिन हमारे घर के दरवाज़े के सामने एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजी गई भेंट रखी मिली तो मैं बहुत प्रभावित हुआ। हम लोग शहर से बाहर गए हुए थे, और जब घर लौटे तो घर के सामने कई गमले रखे हुए थे, हर एक गमले में एक खिला हुआ सूरजमुखी का फूल था। हमें इसका आश्य समझने में देर नहीं लगी - ये फूल हमारी दिवंगत बेटी मेलिस्सा के जन्मदिन के स्मरण में भेजे गए थे, क्योंकि उसे सूरजमुखी के फूल बहुत पसन्द थे। कोई हमें जता रहा था कि वह भी मेलिस्सा को याद करता है और अज्ञात रूप में दे कर उसने यह भी जता दिया कि उसे अपनी नहीं हमारे परिवार की परवाह है।

   ज़रा कल्पना कीजिए एक ऐसे संसार की जहां सब ही उदारता से और निस्वार्थ होकर सहायता या दान करते हों। प्रभु यीशु ने परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती ६ अध्याय में गुप्त में देने के बारे में सिखाया। उन्होंने कहा, "परन्‍तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए। ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा" (मत्ती ६:३-४)।

   व्यावाहरिक रूप में, संसार में सदा ही गुप्त रीति से सहायता करना या देना शायद संभव ना हो; कई बार हमारे द्वारा दी गई सहायता या भेंट प्रकट हो जाती है या अन्य लोगों की उपस्थिति में दी जाती है। किंतु हर सहायता और दान एक निस्वार्थ नम्रता तथा परमेश्वर द्वारा निर्देशित रीति से अवश्य ही दिया जा सकता है। जब ऐसा होता है तो परमेश्वर की ओर से उसका प्रतिफल भी बड़ा होता है। - डेव ब्रैनन


हमारे दान का सच्चा मापदण्ड निस्वार्थ और आत्मत्याग से दिया गया दान है।

परन्‍तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए। - मत्ती ६:३

बाइबल पाठ: मत्ती ६:१-४
Mat 6:1  सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। 
Mat 6:2   इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके। 
Mat 6:3  परन्‍तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए। 
Mat 6:4  ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ५७-५९ 
  • रोमियों ४

मंगलवार, 31 जुलाई 2012

धन्य लोग


   अपने पुनरुत्थान के दिन प्रभु यीशु ने अपने चेलों को दर्शन दिए और उन्हें कीलों से छिदे अपने हाथ तथा पांव दिखाए। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे वृतांत से हमें पता लगता है कि यह अद्भुत बात उनको विश्वास से परे प्रतीत हुई (लूका २४:४०-४१), आनन्द के मारे चेलों को विश्वास ही नहीं हुआ। जब प्रभु यीशु ने चेलों को दर्शन दिए उस समय एक चेला, थोमा, वहां उपस्थित नहीं था; जब उसे प्रभु के पुनरुत्थान का पता चला तो उसे भी विश्वास करने में कठिनाई हुई। बाद में जब प्रभु यीशु थोमा की उपस्थिति में चेलों के समक्ष आए तो उन्होंने थोमा से कहा कि वह अपनी इच्छानुसार उनके हाथों और पैरों के घावों में तथा पंजर में हाथ डाल कर उनके जी उठा होने के लिए ठहराया हुआ अपना प्रमाण ले ले; तब थोमा कह उठा, "...हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!" (यूहन्ना २०:२८)

   बाद में जब प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पियों के विश्वासियों को, मसीही विश्वास कि अपनी यात्रा में उठाए गए अपने क्लेशों के बारे में बताया, तब उसने भी प्रभु यीशु को अपना प्रभु बताया। उसने उन्हें लिखा कि प्रभु यीशु के साथ विश्वास के जीवन में यह समझ चुका है कि मसीह यीशु ही प्रभु है और उसको प्राप्त करना ही उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है: "वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्‍हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्‍त करूं" (फिलिप्पियों ३:८)।

   मैंने, आपने और हम अन्य मसीही विश्वासियों ने चाहे प्रभु यीशु को अपने समक्ष किसी तूफान को शांत करते या किसी मुर्दे को ज़िन्दा करते ना देखा हो, और ना ही उसके चरणों पर बैठकर हम ने उससे कोई प्रवचन सुना हो, लेकिन हम सभी अपने जीवनों के अनुभवों से जानते हैं कि कैसे उसने हमें हमारी आत्मिक मृतकावस्था से जिला कर अनन्त जीवन का उत्तराधिकारी बनाया है, और कैसे वह आज भी हमारे जीवनों में कार्य कर रहा है, हर परिस्थिति में हमारे पक्ष में कार्य करता है, हमारे साथ साथ बना रहता है। इसलिए थोमा और पौलुस के समान ही हमारे लिए भी यीशु को प्रभु कहना और उसके आज्ञाकारी होना कोई अवास्तविक बात नहीं है।

   प्रभु यीशु ने थोमा से कहा, "...तू ने तो मुझे देख कर विश्वास किया है, धन्य हैं वे जिन्‍होंने बिना देखे विश्वास किया" (यूहन्ना २०:२९)। जब हम प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं और उसे अपना प्रभु स्वीकार करते हैं, तब हम प्रभु द्वारा धन्य समझे जाने वाले लोगों में सम्मिलित हो जाते हैं। - डेव एग्नर


चाहे हम शरीर की आंखों से उसे नहीं देखने पाते, किंतु आत्मा की आंखों से देख कर और मन से उस पर विश्वास कर के हम भी कह सकते हैं - यीशु ही प्रभु है।

यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! - यूहन्ना २०:२८

बाइबल पाठ: यूहन्ना २०:१९-३१
Joh 20:19  उसी दिन जो सप्‍ताह का पहिला दिन था, सन्‍ध्या के समय जब वहां के द्वार जहां चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्‍द थे, तब यीशु आया और बीच में खड़ा होकर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
Joh 20:20  और यह कह कर उस ने अपना हाथ और अपना पंजर उन को दिखाए: तब चेले प्रभु को देख कर आनन्‍दित हुए। 
Joh 20:21  यीशु ने फिर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूं। 
Joh 20:22   यह कह कर उस ने उन पर फूंका और उन से कहा, पवित्र आत्मा लो। 
Joh 20:23   जिन के पाप तुम क्षमा करो वे उन के लिये क्षमा किए गए हैं जिन के तुम रखो, वे रखे गए हैं।
Joh 20:24  परन्‍तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उन के साथ न था। 
Joh 20:25  जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उस ने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा।
Joh 20:26  आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा होकर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
Joh 20:27  तब उस ने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्‍तु विश्वासी हो। 
Joh 20:28   यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! 
Joh 20:29  यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देख कर विश्वास किया है, धन्य हैं वे जिन्‍होंने बिना देखे विश्वास किया।
Joh 20:30  यीशु ने और भी बहुत चिन्‍ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। 
Joh 20:31  परन्‍तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ५४-५६ 
  • रोमियों ३