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गुरुवार, 23 मई 2013

निर्भर


   हमारे परिवार में एक नए शिशु का आगमन हुआ और मैं उस शिशु और उस परिवार के लोगों के लिए आनन्दित तथा धन्यवादी थी। उस शिशु की देखभाल होते देख मुझे स्मरण हो आया कि नवजात शिशु की देखभाल करना कितनी लगन और मेहनत का कार्य है और एक माँ बिना अपनी कुछ भी परवाह किया कितने आनन्द के साथ उसकी देखभाल करती है, उसके लिए कष्ट उठाती रहती है। यह छोटी सी सृष्टि अपनी देखभाल ज़रा भी नहीं कर पाती और उसका पेट भरा रखने, उसे कपड़े पहनाए और गर्म रखने, उसकी साफ-सफाई करने आदि सभी कार्यों के लिए वह अपने आस-पास के व्यसक और अनुभवी लोगों पर पूर्णतया निर्भर है। यदि यह देखभाल उपलब्ध ना हो तो उसका जीवित रह पाना भी संभव नहीं होगा।

   कुछ यही दशा संसार में रहकर संसार को परमेश्वर के जीवन को दिखाने के लिए हम मसीही विश्वासीयों की भी है - परमेश्वर पिता पर पूरी तरह से निर्भर। हम उसी में जीवित रहते और चलते फिरते हैं (प्रेरितों 17:28); हमारा जीवन और हमारी हर श्वास उसी की दी हुई है (प्रेरितों 17:25); वह ही हमारी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है (फिलिप्पियों 4:19)। 

   हमें अपने स्वर्गीय प्रेमी पिता परमेश्वर कि आवश्यकता रहती है:
  • परेशानियों में शांति के लिए (यूहन्ना 16:33)
  • प्रेम के लिए (1 यूहन्ना 3:1)
  • आवश्यकताओं में सहायता के लिए (भजन 46:1; इब्रानियों 4:16)
  • परीक्षा और प्रलोभनों पर विजय के लिए (1 कुरिन्थियों 10:13)
  • अपराधों की क्षमा के लिए (1 यूहन्ना 1:9)
  • उद्देश्यों की पूर्ति के लिए (यर्मियाह 29:11)
  • अनन्त जीवन के लिए (यूहन्ना 10:28)


   बिना परमेश्वर की सहायता के हम कुछ नहीं कर सकते (यूहन्ना 15:5); उससे ही हमने बार बार अनुग्रह पर अनुग्रह प्राप्त किया है और करते रहते हैं (यूहन्ना 1:16)।

   यदि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार और परमेश्वर को भावता हुआ, उसे प्रसन्न करने वाला जीवन व्यतीत करना है तो कभी अपने या अपनी योग्यताओं और क्षमताओं, अपनी बल-बुद्धि-ज्ञान पर भरोसा ना करें। परमेश्वर पिता पर पूरी तरह से निर्भर और समर्पित रहें, और वह दिन प्रति दिन आपकी हर आवश्यकता को पूरा करता रहेगा, एक नवजात शिशु के समान आपको संभाले रहेगा, आपकी देख-भाल और सुरक्षा करता रहेगा और आपको अपने लिए उपयोगी तथा कार्यकारी बनाए रखेगा और इस पृथ्वी पर भी तथा अनन्त जीवन में भी अपनी आशीषों से परिपूर्ण करता रहेगा।  - ऐनी सेटास


परमेश्वर पर निर्भर रहना दुर्बलता नहीं वरन उसकी सामर्थ को अपने में प्रवाहित और कार्यकारी होने देने का माध्यम है।

न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। - प्रेरितों 17:25

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:24-3:3
1 John 2:24 जो कुछ तुम ने आरंभ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरंभ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे।
1 John 2:25 और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है।
1 John 2:26 मैं ने ये बातें तुम्हें उन के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं।
1 John 2:27 और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।
1 John 2:28 निदान, हे बालकों, उस में बने रहो; कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके साम्हने लज्ज़ित न हों।
1 John 2:29 यदि तुम जानते हो, कि वह धार्मिक है, तो यह भी जानते हो, कि जो कोई धर्म का काम करता है, वह उस से जन्मा है।
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 19-21 
  • यूहन्ना 8:1-27



बुधवार, 22 मई 2013

प्रेम


   मेरा एक मित्र एक छोटे से चर्च का पास्टर है जो पहाड़ों में एक छोटी से आबादी वाले बहुत सुन्दर इलाके में स्थित है। उस चर्च की भूमि में चर्च भवन के पीछे एक छोटी से नदी बहती है, साथ ही पेड़ों का एक झुरमुट है, घास का मैदान है और नदी के किनारे रेतीला सपाट स्थान है। इस कारण वहां की आबादी के लोगों के लिए पिकनिक मनाने का वह बहुत लोकप्रीय स्थान है, और चर्च के लोग भी उन्हें वहाँ आकर आनन्द मनाने से नहीं रोकते। एक दिन चर्च के लोगों में से एक ने चिंता व्यक्त करी कि क्योंकि वह पिकनिक स्थल चर्च के पीछे और चर्च की भूमि पर स्थित है, इसलिए यदि पिकनिक मनाने आए लोगों के साथ नदी में कोई दुर्घटना हो जाती है तो चर्च को उचित व्यवस्था ना करने और आवश्यक सहायता ना पहुँचा पाने का दोषी मानकर दण्डित किया जा सकता है। उसका उद्देश्य था कि लोगों को वहाँ आने से रोका जाए।

   चर्च के अगुवे इस संबंध में कोई कार्यवाही करने से संकोच कर रहे थे, लेकिन वह व्यक्ति विवश करता रहा, इसलिए अन्ततः निर्णय लिया गया कि वहाँ इस आशय की सूचना लगाई जाएगी कि यह सामन्य नहीं वरन एक निजि भूमि है और लोग बिना अनुमति प्रवेश ना करें। मेरा पास्टर मित्र इससे प्रसन्न नहीं था, लेकिन चर्च के संचालक अगुवों के ज़ोर देने पर सूचना लगाने को तैयार हो गया। अगली बार चर्च आने वाले लोगों ने वहाँ लिखा देखा: "सावधान! इस नदी के तट को प्रयोग करने वालों को चेतावनी दी जाती है कि किसी भी पल, बिना पूर्व-सूचना के आप अपने आप को आप से प्रेम करने वाले बहुत से लोगों से घिरा हुआ पा सकते हैं।" मैंने भी सूचना लगाए जाने के अगले ही सप्ताह इस सूचना को पढ़ा और मैं उसके इस विनोद से प्रभावित हुआ। मैंने कहा, "बिलकुल सही! एक बार फिर अनुग्रह कानून के ऊपर विजयी हुआ है।"

   अपने पड़ौसी के प्रति यह प्रेम, हमारे प्रति परमेश्वर द्वारा दिखाए गए प्रेम, अनुग्रह, दया, धैर्य और सहिष्णुता का ही प्रतिफल है। परमेश्वर के नियम नहीं परमेश्वर का प्रेम ही मनुष्यों को उसके प्रति आकर्षित करता है और उन्हें पापों के प्रति पश्चातापी होने तथा प्रभु यीशु मसीह में मिलने वाले उद्धार को ग्रहण करने के लिए उभारता है (रोमियों 2:4)। अपने जीवन से प्रभु यीशु मसीह का प्रेम प्रगट कीजिए, लोग स्वतः ही आकर्षित होंगे। - डेविड रोपर


प्रेम ही वह चुँबक है जो मसीही विश्वासियों को साथ जोड़ कर रखता है और लोगों को मसीही विश्वास की ओर आकर्षित करता है।

क्या तू उस की कृपा, और सहनशीलता, और धीरज रूपी धन को तुच्छ जानता है और क्या यह नहीं समझता, कि परमेश्वर की कृपा तुझे मन फिराव को सिखाती है? - रोमियों 2:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:14-18
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।
John 1:15 यूहन्ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्योंकि वह मुझ से पहिले था।
John 1:16 क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह।
John 1:17 इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची।
John 1:18 परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 16-18 
  • यूहन्ना 7:28-53



मंगलवार, 21 मई 2013

सदा जवान


   हाल ही में मैंने एक सुन्दर, सफेद बालों वाली वृद्ध महिला को देखा, उसकी टी-शर्ट पर लिखा था, "मैं 80 की नहीं, 18 की ही हूँ; साथ में बस 62 का अनुभव है।" समाचार पत्रों के निधन एवं शोक सूचनाओं में छपी तस्वीरें और उनके नीचे लिखे वाक्य भी कभी कभी रोचक होते हैं; वहाँ एक नौजवान फौजी के मुस्कुराते हुए चेहरे की तस्वीर के नीचे लिखा मिलेगा "उम्र 92 वर्ष; देश के लिए दूसरे विश्व युद्ध में भाग लिया"। या किसी चमकती हुई आंखों वाली नवयुवती की तस्वीर के नीचे लिखा होगा, "89 वर्ष की जवान; आर्थिक मन्दी के काल में पली-बड़ी हुई।" इन सभी सन्देशों का अर्थ स्पष्ट है - "हम सदा ही ऐसे नहीं थे; कभी हम भी जवान थे।"

   अकसर जो एक लंबा जीवन जी चुके होते हैं वे अपने आप को घर-परिवार तथा समाज में हाशिए पर रखा हुआ अनुभव करते हैं, मानो कि अब उनका समय बीत गया है, उनकी उपयोगिता समाप्त हो गई है और अब बस समय पूरा होने का ही इंतिज़ार है। लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें इससे अलग ही दृष्टिकोण देती है। भजन 92 हमें बताता है कि हम चाहे उम्र में कितने भी वृद्ध हों लेकिन हम फिर भी नए फलों से लदे जीवन व्यतीत कर सकते हैं। परमेश्वर के विश्वासी, सदा उपजाऊ रहने वाली तथा भली भांति सींची हुई भूमि के बगीचे में रोपे गए वृक्ष अर्थात परमेश्वर की संगति में रोपे गए हैं और "वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे" (भजन 92:14)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वायदा किया कि "मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है..." (यूहन्ना 15:5)।

   हाँ, एक अवस्था में आकर माँसपेशियाँ दुखने लगती हैं, जोड़ों में दर्द रहने लगता है, जीवन की गति कुछ शिथिल पड़ जाती है, लेकिन हर मसीही विश्वासी को परमेश्वर का यह आश्वासन है: "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है" (2 कुरिन्थियों 4:16)। यदि हम परमेश्वर की संगति में बने रहे हैं तो हमारी शारीरिक अवस्था चाहे कितनी भी क्यों ना हो जाए, हम मन से सदा ’जवानी और उसके साथ कुछ वर्षों के अनुभव वाल’ ही रह सकते हैं; ऐसे अनुभव जो बहुमूल्य हैं, परमेश्वर की संगति से मिले हैं और हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी हैं तथा जिनकी उपयोगिता हमें जवानों के समान ही उपयोगी और फलवन्त बनाए रखती है। - सिंडी हैस कैस्पर


विश्वासयोग्यता परमेश्वर की माँग है; फलवन्त जीवन उसका पुरुस्कार।

वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे - भजन 92:14

बाइबल पाठ: भजन 92
Psalms 92:1 यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;
Psalms 92:2 प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,
Psalms 92:3 दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।
Psalms 92:4 क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।
Psalms 92:5 हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं!
Psalms 92:6 पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:
Psalms 92:7 कि दुष्ट जो घास की नाईं फूलते-फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं,
Psalms 92:8 परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा।
Psalms 92:9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तितर बितर होंगे।
Psalms 92:10 परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं।
Psalms 92:11 और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं।
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे।
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 13-15 
  • यूहन्ना 7:1-27


सोमवार, 20 मई 2013

नम्रता से ग्रहण करो


   परमेश्वर के वचन बाइबल के अपने अध्ययन में, याकूब की पत्री के पहले अध्याय को पढ़ते हुए, वहाँ लिखित एक वाक्याँश को पढ़कर मैं चौंक गया; जिस पद पर मैं पहुँचा था वह था: "इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है" (याकूब 1:21) और वाक्याँश था "उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है"। तुरंत मुझे वह निर्णय स्मरण हो आया जिस से मैं जूझ रहा था, और साथ ही यह विचार भी कि, "मुझे इस निर्णय के लिए कोई अन्य पुस्तक पढ़ने, किसी गोष्ठी या परिसंवाद में भाग लेकर सीखने, या किसी मित्र से परामर्श करने की आवश्यकता नहीं है। मुझे केवल वह करना है जो बाइबल मुझे इस विषय के बारे में सिखाती है।" याकूब ने प्रभु यीशु के अनुयायियों को लिखी इस पत्री में आगे यह भी लिखा: "परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं" (याकूब 1:22) और मैंने एहसास किया कि मेरा परमेश्वर के वचन को और अधिक तथा और गहराई से सीखने के प्रयास ही मेरे लिए परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं की उपेक्षा के कारण बन गए थे; मैं उस जीवित वचन को मानने वाला बनने की बजाए केवल सीखने वाला ही बन कर रह गया था।

   बाइबल विद्वान डब्ल्यु. ई. वाईन ने, जो बाइबल में प्रयुक्त मूल यूनानी भाषा के शब्दों के अर्थों को समझाने के लिए विख्यात हैं, इन पदों में प्रयुक्त शब्द जिसका अनुवाद "ग्रहण करो" हुआ है, के बारे में लिखा है कि मूल भाषा में इस शब्द का तात्पर्य है, "भली-भांति जानते, विचारते और पूर्ण सहमति के साथ प्रदान की हुई वस्तु को ग्रहण करो या स्वीकार करो" और इस पद में याकूब इस सब के साथ एक सदगुण और जोड़ रहा है - नम्रता। एक नम्र मन परमेश्वर के साथ विवाद नहीं करता, ना ही उससे कोई झगड़ा करता है, वरन समर्पण के साथ उसकी सहर्ष मान लेता है। याकूब के कहने का तात्पर्य यह बना कि "अपने प्रति परमेश्वर की बातों और कार्यों का किसी रीति से कोई प्रतिरोध नहीं करो वरन उन्हें सहर्ष मान लो, स्वीकार कर लो क्योंकि परमेश्वर हर बात में हमारा भला ही चाहता है और हमारे लिए वही करता है जो हमारे लिए सर्वोत्तम है।"

   परमेश्वर अपना सामर्थी वचन हमारे हृदयों में इसलिए बोता है जिससे कि वह वचन हमारे लिए आत्मिक समझ-बूझ और सामर्थ का विश्वासयोग्य और बहुमूल्य स्त्रोत बन कर हमारा मार्गदर्शन करे। परमेश्वर के वचन की यह आशीष हमें तब प्राप्त होती है जब हम उसे नम्रता से ग्रहण करते और आदर से उसका पालन करते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


अपनी बाइबल प्रार्थनापूर्वक खोलें, ध्यान लगाकर उसे पढ़ें और आनन्द के साथ उसका पालन करें।

इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। - याकूब 1:21

बाइबल पाठ: याकूब 1:13-22
James 1:13 जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है।
James 1:14 परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है।
James 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।
James 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।
James 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।
James 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 10-12 
  • यूहन्ना 6:45-71



रविवार, 19 मई 2013

वापसी


   कगार से लौट के आने वालों की कहानीयाँ प्रेरणादायक होती हैं - लोग या कंपनियाँ जो बर्बादी की कगार तक पहुँच कर फिर सफलता की ओर लौट आए, उनके अनुभवों की कहानी से मिलने वाली शिक्षा हमारे जीवनों में भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है। अमेरिका की फोर्ड मोटर कंपनी इसका एक उदाहरण है। 1940 के दशक में कंपनी के अधिकारियों ने आधुनिकीकरण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और उनके निर्णयों ने फोर्ड कंपनी को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। बात यहाँ तक पहुँच गई थी की उस समय चल रहे विश्व-युद्ध में उपयोग के लिए इस कंपनी में बन रहे सामान की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए, सरकार इस कंपनी को अपने हाथों में ले लेने के लिए गंभीरता से विचार करने लगी। लेकिन ऐसा हो पाने से पहले ही हेनरी फोर्ड (द्वितीय) अपनी सैन्य कार्य-अवधि पूरी करके वापस आ गए और इस कंपनी की कमान संभाल ली। उनके नेतृत्व तथा निर्णयों से कंपनी की स्थिति बदलने लगी और कुछ ही समय में फोर्ड संसार की सबसे बड़ी कंपनीयों में से एक हो गई; बर्बादी के कगार से लौट कर सफलता की ऊँचाईयों को छूने वाली कंपनी।

   अपने व्यक्तिगत जीवनों में भी कभी कभी हमें वापसी के लिए ऐसे ही किसी अगुवे और सहारे की आवश्यकता होती है। कई बार हम गलत दिशा में चल निकलते हैं, अपने मार्ग से भटक जाते हैं, प्रलोभनों और लालच में या गलत संगति और सलाह में पड़कर बर्बादी के कगार पर पहुँच जाते हैं। समाचारों में ऐसे ही बर्बादी के कगार पर पहुँचे व्यक्तियों द्वारा आत्म-हत्या करने या प्रयास करने की घटनाएं आम सुनने-पढ़ने को मिलती हैं। उन गलत दिशाओं और दशाओं से पलटकर जीवन में वापसी की आवश्यकता कभी भी पड़ सकती है - मसीही विश्वासियों, प्रभु यीशु के अनुयायियों को भी! परमेश्वर के वचन बाइबल में इसका एक सजीव उदाहरण है प्रभु यीशु का एक शिष्य - पतरस।

   पतरस का जीवन मसीह यीशु के साथ चलने के बावजूद गलत निर्णयों से भरा पड़ा था जिनके कारण वह बर्बादी की कगार तक पहुँच गया था। एक बार अपने विश्वास की कमी के कारण वह लगभग पानी में डूब ही गया था, प्रभु यीशु को उसे हाथ थामकर निकालना पड़ा (मत्ती 14:30); जब उसने पहाड़ पर प्रभु यीशु को रुपान्तरित होकर मूसा और एल्लियाह के साथ वार्तालाप करते देखा, तो बिना सोचे समझे ही वह प्रभु को वहाँ मण्डप बनाने का सुझाव देने लगा, और परमेश्वर ने आकशवाणी में उसे प्रभु यीशु की मानने को कहा (मत्ती 17:1-5)। एक अन्य अवसर पर जब प्रभु अपने आते भविष्य के बारे में और अपने आने के उद्देश्य के बारे में शिष्यों को समझा रहे थे तो पतरस अपनी गर्मजोशी में, बिना प्रभु यीशु की बात को समझे, प्रभु यीशु को ही उसका कार्य ना करने की सलाह देने और उसे झिड़कने के लिए भी खड़ा हो गया, और प्रभु को बड़े कठोर शब्दों में उसे संबोधित करना पड़ा (मत्ती 16:22-23)। प्रभु यीशु के पकड़वाए जाने से कुछ पहले ही, प्रभु यीशु के उससे तीन बार आग्रह करने पर भी, पतरस ने प्रभु यीशु के साथ प्रार्थना में समय नहीं बिताया वरन सोता रहा। प्रभु के प्रति अपने प्रेम तथा समर्पण के बड़े बड़े दावे करने के बावजूद, जब प्रभु यीशु को पकड़ने के लिए लोग आए तो अन्य चेलों के समान ही पतरस भी प्रभु यीशु को अकेला छोड़कर भाग गया। प्रभु यीशु के प्रति उसके दावों और बातों के खोखलेपन का प्रत्यक्ष उदाहरण था एक छोटी दासी लड़की तथा अन्य विरोधियों के सामने पतरस का तीन बार प्रभु यीशु को जानने से भी इन्कार करना (मत्ती 26)। प्रभु यीशु के पुनरुत्थान के बाद भी पतरस द्वारा गलत निर्णयों की गाथा समाप्त नहीं हुई; प्रभु यीशु का अनुयायी बनने के बाद उसने अपना मछली पकड़ने का धंधा छोड़ दिया था, परन्तु प्रभु यीशु के पुनरुत्थान के बाद जीवते प्रभु यीशु के दर्शन पाने के बाद भी अब वह फिर अपने पुराने जीवन - मछली पकड़ने की ओर लौट गया, और उसकी देखा-देखी छः और शिष्य भी उसके साथ उसी पुराने जीवन की ओर लौट गए (यूहन्ना 21:2-7)।

   लेकिन यह पतरस की कहानी का अन्त नहीं है। पतरस ने चाहे प्रभु का इन्कार कर दिया हो, वापस अपने पुराने जीवन की ओर लौट गया हो, प्रभु यीशु ने पतरस को नहीं छोड़ा और ना ही उसके प्रति प्रभु यीशु का प्रेम कम हुआ। प्रभु ने फिर से उसके साथ धैर्य और सहिष्णुता दिखाई, तथा सबके सामने उससे प्रेम से व्यवहार करके फिर से उसे अपने लिए कार्य करने की ज़िम्मेदारी सौंप दी (यूहन्ना 21:15-17)। प्रभु यीशु के प्रेम और पवित्र आत्मा की सामर्थ से पतरस बर्बादी के कगार से लौट आया। पेन्तकुस्त के दिन जब लोग प्रभु के चेलों का ठठ्ठा कर रहे थे तो इसी पतरस ने उठकर उन्हें प्रबल रीति से संबोधित किया और प्रभु यीशु के बारे में बताया। उसके इस प्रचार में इतनी सामर्थ थी कि उसी समय 3000 लोगों ने अपने पापों से पश्चाताप किया और प्रभु यीशु की मण्डली में जुड़ गए। इसके बाद पतरस प्रभु के लिए बहुत प्रभावी और उपयोगी हुआ। प्रभु यीशु का प्रेम, अनुग्रह और क्षमा बर्बादी की कगार से पतरस की वापसी का आधार बने और उसे एक अति प्रभावी एवं उपयोगी व्यक्तित्व तथा आरंभिक मसीही मण्डली के अगुवों मे से एक प्रमुख अगुवा बना दिया।

   क्या आज आप जीवन और परिस्थितियों से निराश हैं, संघर्ष कर रहे हैं? समस्याओं का समाधान सूझ नहीं पड़ता? गलत निर्णयों ने बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है और संसार तथा संसार के लोग आताताई बनकर आप पर हावी होते जा रहे हैं? प्रभु यीशु की ओर अपना हाथ बढ़ाईए; वह आप का हाथ थाम कर आपको उभारने और आप को अपनी प्रेम भरी बाहों में सहारा तथा सहायता देने के लिए सदा तैयार है। प्रभु यीशु के अनुग्रह, प्रेम, दया, करुणा और क्षमा की सीमा मनुष्य के दुराचार तथा पतन की हर क्षमता से कहीं अधिक बढ़कर है। यदि पतरस वापसी कर सकता है और प्रभु से क्षमा एवं सामर्थ पा सकता है तो फिर ऐसा कोई भी मनुष्य नहीं जो जीवन में पुनः वापसी ना कर सके, प्रभु यीशु से सामर्थ ना पा सके, और फिर से खड़ा होकर एक नया जीवन आरंभ ना कर सके। अपनी ओर मत देखिए, बस प्रभु यीशु पर भरोसा कीजिए, और उसे अपने जीवन में बुला लीजिए। - डेव ब्रैनन


बर्बादी से सफलता की ओर लौटने के लिए प्रभु यीशु का हाथ थाम लीजिए।

पतरस उन ग्यारह के साथ खड़ा हुआ और ऊंचे शब्द से कहने लगा, कि हे यहूदियो, और हे यरूशलेम के सब रहने वालों, यह जान लो और कान लगाकर मेरी बातें सुनो। - प्रेरितों 2:14

बाइबल पाठ: प्रेरितों 2:14-21, 37-42
Acts 2:14 पतरस उन ग्यारह के साथ खड़ा हुआ और ऊंचे शब्द से कहने लगा, कि हे यहूदियो, और हे यरूशलेम के सब रहने वालों, यह जान लो और कान लगाकर मेरी बातें सुनो।
Acts 2:15 जैसा तुम समझ रहे हो, ये नशे में नहीं, क्योंकि अभी तो पहर ही दिन चढ़ा है।
Acts 2:16 परन्तु यह वह बात है, जो योएल भविष्यद्वक्ता के द्वारा कही गई है।
Acts 2:17 कि परमेश्वर कहता है, कि अन्‍त के दिनों में ऐसा होगा, कि मैं अपना आत्मा सब मनुष्यों पर उंडेलूंगा और तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियां भविष्यद्वाणी करेंगी और तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे, और तुम्हारे पुरिनए स्वप्न देखेंगे।
Acts 2:18 वरन मैं अपने दासों और अपनी दासियों पर भी उन दिनों में अपने आत्मा में से उंडेलूंगा, और वे भविष्यद्वाणी करेंगे।
Acts 2:19 और मैं ऊपर आकाश में अद्भुत काम, और नीचे धरती पर चिन्ह, अर्थात लोहू, और आग और धूएं का बादल दिखाऊंगा।
Acts 2:20 प्रभु के महान और प्रसिद्ध दिन के आने से पहिले सूर्य अन्‍धेरा और चान्‍द लोहू हो जाएगा।
Acts 2:21 और जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वही उद्धार पाएगा।
Acts 2:37 तब सुनने वालों के हृदय छिद गए, और वे पतरस और शेष प्रेरितों से पूछने लगे, कि हे भाइयो, हम क्या करें?
Acts 2:38 पतरस ने उन से कहा, मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले; तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।
Acts 2:39 क्योंकि यह प्रतिज्ञा तुम, और तुम्हारी सन्‍तानों, और उन सब दूर दूर के लोगों के लिये भी है जिन को प्रभु हमारा परमेश्वर अपने पास बुलाएगा।
Acts 2:40 उसने बहुत और बातों में भी गवाही दे देकर समझाया कि अपने आप को इस टेढ़ी जाति से बचाओ।
Acts 2:41 सो जिन्हों ने उसका वचन ग्रहण किया उन्होंने बपतिस्मा लिया; और उसी दिन तीन हजार मनुष्यों के लगभग उन में मिल गए।
Acts 2:42 और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 7-9 
  • यूहन्ना 6:22-44

शनिवार, 18 मई 2013

परिवर्तित


   थॉमस डिबैजियो नामक एक व्यक्ति को जब ज्ञात हुआ कि वह एलज़ाईमर्स रोग से संक्रमित हो चुका है, और यह रोग अभी अपने शुरुआती दौर में ही है तो उसने अपने स्मरण शक्ति के धीरे-धीरे खोते जाने को पुस्तकबद्ध करना आरंभ किया; उसका यह विवरण "Loosing My Mind" (अपना दिमाग खोते जाना) नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ। यह पुस्तक थॉमस की उस कष्टपूर्ण यात्रा का अभिलेख है जिसमें वह धीरे धीरे अपने भलि-भांति जाने-पहनचाने कार्यों, स्थानों, लोगों आदि सबको भूलता चला गया। एलज़ाईमर्स रोग एक लाइलाज रोग है जिसका रोगी धीरे धीरे अपनी स्मरण शक्ति खोता चला जाता है। इस रोग से ग्रसित व्यक्ति के मस्तिष्क में स्नायु कोषिकाएं धीरे धीरे क्षतिग्रस्त होती चली जाती हैं जिससे रोगी की स्मरण शक्ति क्षीण होती जाती है, वह उलझा या चक्राया हुआ रहने लगता है और उसके लिए समय-स्थान-व्यक्ति का बोध रखना असंभव हो जाता है। एक समय में पूर्ण रूप से चैतन्य और कार्यकारी व्यक्ति को धीरे धीरे अपने मित्रों और प्रीय जनों को भूलते हुए देखना, जाने-पहचाने स्थानों पर भी अनजान होकर घूमते हुए देखना, उसका कपड़े तक ठीक से ना पहन पाने से भी अनजान होते जाना आदि देखना बहुत कष्टदायक होता है; इस पीड़ा को और भी अधिक बढ़ा देती है यह मजबूरी कि अपने प्रीय जन की इस बद से बदतर होती स्थिति को हम बेबस होकर बस उसे देखते ही रह सकते हैं किंतु उसके लिए कुछ कर नहीं सकते। यह मृत्यु से पूर्व ही प्रीय जन को खो देने के समान है।

   स्मरण शक्ति की हानि अन्य कारणों से भी हो सकती है, जैसे किसी चोट अथवा गहरे सदमे के द्वारा। और हम में से जो वृद्धावस्था में जाते हैं उनके शरीरों और शरीर की क्षमताओं का क्षीण होना अवश्यंभावी है। लेकिन चाहे स्मरण शक्ति की हानि हो या शरीर के अन्य किसी अंग या क्षमता की, प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास यह आशा है कि एक दिन वे बिलकुल सिद्ध, स्वस्थ और निरोग अवस्था में होंगे - जब पुनरुत्थान के समय वे अपनी महिमाय देह को पाएंगे (1 कुरिन्थियों 5:1-5)। इसके साथ ही स्वर्ग में वे अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु को भी देखेंगे जिसने उन्हें उद्धार देने के लिए अपने शरीर को यातना सहने के लिए दे दिया, उनके सन्ति अपमानजनक मृत्यु की पीड़ा सह ली और अनन्त काल के लिए अपने महिमाय शरीर में भी क्रूस की उस यातना के चिन्ह लिए हुए है (यूहन्ना 20:25; 1 कुरिन्थियों 13:12)।

   इस पृथ्वी पर हम शरीर और मन के रोगों से त्रस्त हो सकते हैं, हमारी देह क्षीण और अयोग्य हो सकती है; लेकिन उस स्वर्गीय देह में हम अपने प्रभु के समान ही होंगे, यह प्रभु यीशु का अपने प्रत्येक विश्वासी से वायदा है: "हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है" (1 यूहन्ना 3:2)।


पलक झपकते ही ... हम बदल जाएंगे! - प्रेरित पौलुस

क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले। और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया। - 1 कुरिन्थियों 15:53-54 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:16 - 5:8
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है।
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें।
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं।
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए।
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है।
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं।
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं।
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 4-6 
  • यूहन्ना 6:1-21




शुक्रवार, 17 मई 2013

प्रतिशोध का विकल्प


   एक इतवार को चर्च में सन्देश देते समय, एक पास्टर पर हमला हुआ और उसे मारा-पीटा गया। पास्टर ने प्रत्युत्तर में उस व्यक्ति को कुछ नहीं कहा, बस अपना सन्देश पूरा किया और फिर उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना भी करी। बाद में वह हमलावर पकड़ा गया और उसे हिरासत में रखा गया। जब पास्टर को मालूम पड़ा तो वह पुलिस थाने में उससे मिलने भी गया और उसके लिए प्रार्थना कर के भी आया। संसार में दिखने वाले सामान्य व्यवहार की तुलना में, अपने प्रति अनादार तथा अत्याचार का अनूठा प्रत्युत्तर देने का यह एक अनुपम और आदर्श उदाहरण था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के लोगों को अपना बदला आप ना लेने की शिक्षा दी गई है। आत्म-रक्षा वर्जित नहीं है, किन्तु प्रतिशोध वर्जित है; पुराने नियम में भी और नए नियम में भी। बाइबल में लैव्यवस्था की पुस्तक इस्त्राएल, अर्थात परमेश्वर के लोगों को, परमेश्वर द्वारा दिए गए नियमों की पुस्तक है। इस पुस्तक में एक स्थान पर लिखा है: "अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना; अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना; नहीं तो उसके पाप का भार तुझ को उठाना पड़ेगा। पलटा न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूं" (लैव्यवस्था 19:17-18)। एक अन्य स्थान पर परमेश्वर ने इस्त्राएल को निर्देश दिया कि "पलटा लेना और बदला देना मेरा ही काम है..." (व्यवस्थाविवरण 32:35)। नए नियम में भी प्रभु यीशु मसीह और उनके अनुयायियों की शिक्षाएं पलटा ना लेने और अपना न्याय परमेश्वर के हाथ में छोड़ देने के लिए ही थीं (मत्ती 5:38-45; रोमियों 12:17; 1 पतरस 3:9)।

   यद्यपि पुराने नियम में हम "जैसे को तैसा" के सिद्धांत के नियम भी पाते हैं (निर्गमन 21:23-25; व्यवस्थाविवरण 19:21), लेकिन ये नियम केवल इसलिए थे जिससे प्रत्येक आताताई उचित दण्ड का भागी हो और सब को सही न्याय मिले। ये नियम व्यक्तिगत रीति से बदला लेने के लिए नहीं थे; इन नियमों का उपयोग समाज के निर्धारित न्याय अधिकारीयों को ही करना था। उचित न्याय मिलना सब का अधिकार था, लेकिन न्याय करना या तो परमेश्वर या फिर परमेश्वर के निर्देषों के अनुसार नियुक्त किए गए न्यायियों का ही कार्य था। व्यक्तिगत प्रतिशोध की कोई अनुमति नहीं थी।

   आज हम मसीही विश्वासियों को भी अपने परमेश्वर पिता द्वारा दिए गए प्रेमपूर्ण व्यवहार के निर्देषों को अपने जीवन से जी कर दिखाना है। बजाए अत्याचार या अपमान के बदले में वही कड़ुवाहट वापस लौटाने के, अपने अन्दर बसने वाले परमेश्वर के पवित्र आत्मा की सामर्थ से तथा मसीह यीशु के नाम को आदर देने वाले भले विकलपों को अपने प्रत्युत्तर और व्यवहार में प्रदर्शित करना है। जहाँ तक बन पड़े, सब के साथ शान्ति से रहें (रोमियों 12:18) और आपसी विवादों को सुलझाने के लिए एक आत्मिक मध्यस्थ की सहायता लें तथा उसके आधीन रहें (1 कुरिन्थियों 6:1-6), और अपने न्याय को निर्धारित न्याय अधिकारीयों तथा सबसे बढ़कर उस सच्चे और निष्पक्ष न्यायी, अपने परमेश्वर पिता के हाथों में छोड़ दें। - मारविन विलियम्स


अन्तिम न्याय सच्चे और निष्पक्ष न्यायी परमेश्वर के हाथों में ही है।

हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:19

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 19:16-21; मत्ती 5:38-45
Deuteronomy 19:16 यदि कोई झूठी साक्षी देने वाला किसी के विरुद्ध यहोवा से फिर जाने की साक्षी देने को खड़ा हो,
Deuteronomy 19:17 तो वे दोनों मनुष्य, जिनके बीच ऐसा मुकद्दमा उठा हो, यहोवा के सम्मुख, अर्थात उन दिनों के याजकों और न्यायियों के साम्हने खड़े किए जाएं;
Deuteronomy 19:18 तब न्यायी भली भांति पूछपाछ करें, और यदि यह निर्णय पाए कि वह झूठा साक्षी है, और अपने भाई के विरुद्ध झूठी साक्षी दी है
Deuteronomy 19:19 तो अपने भाई की जैसी भी हानि करवाने की युक्ति उसने की हो वैसी ही तुम भी उसकी करना; इसी रीति से अपने बीच में से ऐसी बुराई को दूर करना।
Deuteronomy 19:20 और दूसरे लोग सुनकर डरेंगे, और आगे को तेरे बीच फिर ऐसा बुरा काम नहीं करेंगे।
Deuteronomy 19:21 और तू बिलकुल तरस न खाना; प्राण की सन्ती प्राण का, आंख की सन्ती आंख का, दांत की सन्ती दांत का, हाथ की सन्ती हाथ का, पांव की सन्ती पांव का दण्ड देना।
Matthew 5:38 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत।
Matthew 5:39 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि बुरे का सामना न करना; परन्तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उस की ओर दूसरा भी फेर दे।
Matthew 5:40 और यदि कोई तुझ पर नालिश कर के तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे।
Matthew 5:41 और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा।
Matthew 5:42 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उस से मुंह न मोड़।
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर।
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो।
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है।

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 1-3 
  • यूहन्ना 5:25-47