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गुरुवार, 13 नवंबर 2014

इन्कार


   उसके घर पर हमारे पहुँचने के पश्चात मार्टी ने हम से कहा, "अच्छा, तो नियम इस प्रकार से हैं; आप सब जो चाहें, जब चाहें, जहाँ चाहें वह सब कर सकते हैं सिवाय उसके जिसके लिए आप को इन्कार किया जाए।" जब हम छुट्टी बिताने हमारे मित्र मार्टी के झील के किनारे बने घर पर गए तब उससे हमें मिलने वाले ये पहले निर्देश थे। मार्टी और उसकी पत्नि लिन्न को आतिथ्य बहुत अच्छा लगता है और वे अपने अतित्थियों को अपने घर में आनन्द मनाने के लिए बहुत स्वतंत्रता देते हैं। हमने जब वहाँ झील में नौका विहार के लिए भिन्न नावों को देखा तो हम समझ गए कि वह दोपहर हमारे लिए बड़े आनन्द का समय होने वाली थी। मार्टी के घर में हमारे प्रवास के सारे समय में मार्टी ने केवल एक बार ’ना’ बोला, जब उसने देखा कि हमारी नाव के निकट तैर रहे कुछ हंसों को हम कुछ खाना खिलाने पर थे। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह उन हंसों के बर्ताव को जानता था, जो हम नहीं जान्ते थे - यदि एक बार उन्हें कुछ खाने को दिया जाता तो वे और माँगने लगते और नहीं मिलने पर आक्रमक हो जाते।

   परमेश्वर ने हमारे आदि माता-पिता आदम और हव्वा के लिए एक बहुत अच्छा स्थान बना कर दिया था और उन्हें वहाँ आनन्दित रहने के लिए बहुत स्वतंत्रता थी। परमेश्वर ने केवल एक बात के लिए उन्हें मना किया था - एक विशेष पेड़ से उन्हें फल नहीं खाना था, बाकि सब कुछ उनके लिए खुला था। लेकिन शैतान के बहकावे में आकर उन्होंने परमेश्वर की इस आज्ञा की अवहेलना करी, शैतान की बातों के कारण उन्हें लगा कि वे परमेश्वर से बेहतर जानते हैं। उनकी इस एक अनाज्ञाकारिता के कारण पाप संसार में आया और पाप के साथ मृत्यु भी आई तथा संसार में फैल गई।

   हम भी कई बार वही गलती करते हैं जो आदम और हव्वा ने करी थी - परमेश्वर के इन्कार के बावजूद अपनी इच्छा को पूरा करना। अनेक बार हम नहीं समझ पाते हैं कि परमेश्वर ने किसी बात के लिए इन्कार क्यों किया है। लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर का उद्देश्य सदा हमारी भलाई ही रहता है, और उसका इन्कार भी इसी भलाई के लिए होता है। आज चाहे किसी बात के लिए हमें उसके इन्कार का सामना करना पड़े, लेकिन स्मरण रखें कि उस इन्कार के साथ परमेश्वर हम से यह भी कह रहा है कि, "मेरा विश्वास करो, मैं जानता हूँ कि तुम्हारे लिए क्या भला है; बस मेरी बात मान कर चलते रहो।" - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर हमारी कोई विनती अस्वीकार कर सकता है परन्तु हमारी भलाई करते रहने के विश्वास को कभी तोड़ नहीं सकता।

पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा। -  उत्पत्ति 2:17

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-7
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना? 
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं। 
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे। 
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे, 
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे। 
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। 
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।

एक साल में बाइबल: 
प्रेरितों 15-16

बुधवार, 12 नवंबर 2014

जोखिम


   बुनियादी सैनिक प्रशिक्षण के समय डेनिस रौस से उसके साथी सैनिक तथा उसका प्रशिक्षक बहुत अप्रसन्न रहते थे क्योंकि वह शान्तिप्रीय था और युद्ध के लिए हथियार उठाने से इन्कार करता था। उसके इस भाव के कारण उसके साथी उसके साहस पर शक करते थे। डेनिस मसीही विश्वासी था और उसका प्रशिक्षण युद्ध समय में घायल सैनिकों तक चिकित्सा सहायता पहुँचाने का था, उसे युद्ध भूमि पर जाने में कोई संकोच नहीं था, लेकिन वहाँ वह जान बचाने के लिए जाना चाहता था, जान लेने के लिए नहीं।

   डेनिस के साहस को लेकर उसके साथियों का सन्देह जाता रहा जब उसकी टुकड़ी को युद्ध क्षेत्र में जाने का आदेश मिला। दूसरे विश्वयुद्ध के समय ओकिनावा के युद्ध में डेनिस ने अद्भुत साहस का प्रदर्शन किया। मशीनगन से हो रही गोलियों की बौछार में भी वह युद्ध में घायल हो रहे सैनिकों को खींच-खींच कर सुरक्षित स्थानों पर लाता रहा। उसकी प्रार्थना रहती थी, "प्रभु, मुझे एक और घायल सैनिक को बचा लाने की सामर्थ दे।" अन्ततः डेनिस ने 70 से भी अधिक घायल सैनिकों को एक पहाड़ी से नीचे सुरक्षित स्थान पर चिकित्सीय सहायता के लिए पहुँचाया। उसके इस साहसिक कार्य के लिए उसे अपने देश का सर्वोच्च सैनिक सम्मान पदक दिया गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक ऐसे ही मसीही विश्वासी "सैनिक" का उल्लेख है जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की सहायता करी। प्रेरित पौलुस ने इपफ्रुदितुस के विषय में लिखा, "इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे" (फिलिप्पियों 2:29-30)।

   आज सारे संसार में अनेकों मसीही विश्वासी प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा सारे संसार के हर व्यक्ति के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनाने के कारण अपने प्राणों को जोखिम में डाले हुए हैं। उन सभी के लिए प्रार्थना करें कि उन संकटपूर्ण परिस्थितियों में उसकी सेवकाई करते समय परमेश्वर उनकी रक्षा करता रहे और उनकी सहायता के लिए उपयुक्त सेवकों को भी खड़ा करे। - डेनिस फिशर


साहस का अर्थ आगे बढ़ने की शक्ति रखना नहीं है, वरन शक्ति ना होते हुए भी आगे बढ़ते रहना है।

और हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उन्हें मानो। - 1 थिस्सुलुनीकियों 5:12 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:25-30
Philippians 2:25 पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा। 
Philippians 2:26 क्योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था। 
Philippians 2:27 और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो। 
Philippians 2:28 इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट कर के आनन्‍दित हो जाओ और मेरा भी शोक घट जाए। 
Philippians 2:29 इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। 
Philippians 2:30 क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 13-14


मंगलवार, 11 नवंबर 2014

मृत्यु तक विश्वासयोग्य


   इंगलैंड के लिवरपूल शहर में स्थित वॉल्कर आर्ट गैलरी में एक चित्र है जिसका शीर्षक है "Faithful unto Death" अर्थात मृत्यु तक विश्वासयोग्य। यह चित्र प्राचीन शहर पौम्पी का है जो सन 79 के माउंट वेसुवियस ज्वालामुखी फटने से कुछ ही पलों में लावा और राख में दफन हो गया और वहाँ के जीवन के वे क्षण राख में दबे हुए आज भी अपनी कहानी बताते हैं। उस चित्र में एक रोमी सिपाही को दिखाया गया है जो अपने सैनिक वस्त्र धारण किए हुए सन्तरी के कार्य पर डटा हुआ है जबकि उसके आस-पास सब कुछ लावा और राख में दबता जा रहा है। यह चित्र पौम्पी में राख में दबे हुए खड़े एक सैनिक के अवशेषों को देखकर बनाया गया है। यह चित्र गवाह है उन विश्वासयोग्य पहरेदारों का जो अपने चारों ओर हो रहे भयनाक विनाश में भी अपने स्थानों पर स्थिर डटे रहे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य में भी प्रभु यीशु पहली शताब्दी की स्मुरना की मसीही विश्वासियों की मण्डली को संबोधित करते हुए उन्हें आश्वस्त करता है कि वह उनके मसीही विश्वास के कारण उन पर आ रहे सताव को जानता है, उसने उनकी विश्वासयोग्यता को देखा है, और मसीह यीशु उन्हें उन विकट परिस्थितियों में भी विश्वासयोग्य बने रहने को प्रेरित करता है: "मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूं; (परन्तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उन की निन्‍दा को भी जानता हूं। जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उन से मत डर: क्योंकि देखो, शैतान तुम में से कितनों को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा" (प्रकाशितवाक्य 2:9-10)।

   हमारा प्रभु परमेश्वर हमारी परिस्थितियों और हमारे अनुभवों को भली-भांति जानता है, वह हमारे विषय में कुछ ऐसा भी जानता है जिसे हम नहीं जानते - हमारा भविष्य। चाहे इस संसार में हमें क्लेषों से होकर निकलना पड़े और सांसारिक वस्तुओं या जीवन का नुकसान भी उठाना पड़े, लेकिन हमारी अनन्तकाल की आशीषें और अनन्तकाल का जीवन सदा हमारे प्रभु परमेश्वर के साथ सुरक्षित है, और अपने प्रभु की सामर्थ से हम जब तक इस संसार में हैं, उसके द्वारा निर्धारित स्थानों पर उसके लिए मृत्यु तक विश्वासयोग्य बने रह सकते है (फिलिप्पियों 4:12-13) तथा मृत्योप्रांत उसके साथ अनन्त महिमा में प्रवेश करने को तैयार हो सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारे विश्वास की परीक्षा, परमेश्वर की विश्वास्योग्यता प्रमाणित करने का अवसर होती है।

मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। फिलिप्पियों 4:12-13

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:8-11
Revelation 2:8 और स्मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो प्रथम और अन्‍तिम है; जो मर गया था और अब जीवित हो गया है, वह यह कहता है कि। 
Revelation 2:9 मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूं; (परन्तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उन की निन्‍दा को भी जानता हूं। 
Revelation 2:10 जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उन से मत डर: क्योंकि देखो, शैतान तुम में से कितनों को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा। 
Revelation 2:11 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए, उसको दूसरी मृत्यु से हानि न पहुंचेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 10-12


सोमवार, 10 नवंबर 2014

भय


   मुझे अपने बचपन का भय कभी नहीं भूलता; मुझे लगता था कि मेरे बिस्तर पर पड़े कपड़े कमरे की बत्ती बुझते ही परछाईं जैसे दैत्य में बदल जाएंगे और मेरी नींद उड़ जाती थी। बचपन में ही भय से उत्पन्न इस अनिंद्रा की स्थिति ने मुझे जता दिया कि जीवन की परेशानियों में भय मेरा मित्र कदापि नहीं है। भय हमें आगे बढ़ने से रोकता है, जो करना चाहिए वह नहीं करने देता, हमें शक्तिहीन बना देता है। मैंने अपने अनुभवों से यह भी सीखा है कि भय का एक ही निवारण है - प्रभु यीशु पर अपनी नज़रें लगाए रखना, उससे सामर्थ और मार्गदर्शन पाकर जीवन में आगे बढ़ते रहना।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में प्रभु यीशु के शिष्यों के सामने विकट परिस्थिति थी, वे नाव में यात्रा कर रहे थे और तूफान में फंस गए थे; तेज़ हवा और ऊँची लहरों के थपड़ों से नाव डूबने की आशंका हो रही थी। ऐसे में प्रभु यीशु पानी पर चलकर उनके पास आए और उन्हें सांत्वना दी, "यीशु ने तुरन्त उन से बातें की, और कहा; ढाढ़स बान्‍धो; मैं हूं; डरो मत" (मत्ती 14:27)। प्रभु यीशु के क्रूस पर मारे जाने और फिर मृतकों में से जी उठने के बाद भी उन्होंने भय से बन्द कमरे में जमा अपने शिष्यों के पास आकर उनसे पूछा, "उसने उन से कहा; क्यों घबराते हो और तुम्हारे मन में क्यों सन्‍देह उठते हैं?" (लूका 24:38)। मसीही जीवन में आने वाले क्लेषों की अवश्यंभाविता के विषय में प्रभु ने चेलों को आश्वस्त किया, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना 16:33)। इन सभी उदाहरणों से यह बात स्पष्ट है कि प्रभु यीशु की अपने चेलों के साथ बनी रहने वाली उपस्थिति और उससे उन्हें मिलने वाली सामर्थ पर किया गया विश्वास ही हम मसीही विश्वासियों के लिए भय पर जय पाने का मार्ग है।

   एक चिर-परिचित अंग्रेज़ी भाषा में लिखे गए भजन के भाव हैं, "अपनी नज़रें प्रभु यीशु पर टिकाए रखो, उसके अद्भुत चेहरे को भरपूरी से निहारते रहो और तुम पाओगे कि उसकी महिमा और अनुग्रह के प्रकाश में संसार की बातें धूमिल हो जाएंगी।" हम मसीही विश्वासी हर परिस्थिति और संसार की हर बात के भय में इस बात से आश्वस्त और शान्त होकर रह सकते हैं कि हमारा परमेश्वर प्रभु सदा हमारे साथ है, हमारा सहायक है। - जो स्टोवैल


जीवन के आंधी-तूफानों में प्रभु यीशु की उपस्थिति और उससे उपलब्ध सामर्थ में विश्वास रखें।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: मत्ती 14:22-33
Matthew 14:22 और उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढ़ाया, कि वे उस से पहिले पार चले जाएं, जब तक कि वह लोगों को विदा करे। 
Matthew 14:23 वह लोगों को विदा कर के, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था। 
Matthew 14:24 उस समय नाव झील के बीच लहरों से डगमगा रही थी, क्योंकि हवा साम्हने की थी। 
Matthew 14:25 और वह रात के चौथे पहर झील पर चलते हुए उन के पास आया। 
Matthew 14:26 चेले उसको झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए! और कहने लगे, वह भूत है; और डर के मारे चिल्ला उठे। 
Matthew 14:27 यीशु ने तुरन्त उन से बातें की, और कहा; ढाढ़स बान्‍धो; मैं हूं; डरो मत। 
Matthew 14:28 पतरस ने उसको उत्तर दिया, हे प्रभु, यदि तू ही है, तो मुझे अपने पास पानी पर चलकर आने की आज्ञा दे। 
Matthew 14:29 उसने कहा, आ: तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा। 
Matthew 14:30 पर हवा को देखकर डर गया, और जब डूबने लगा, तो चिल्लाकर कहा; हे प्रभु, मुझे बचा। 
Matthew 14:31 यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उस से कहा, हे अल्प-विश्वासी, तू ने क्यों सन्‍देह किया? 
Matthew 14:32 जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई। 
Matthew 14:33 इस पर जो नाव पर थे, उन्होंने उसे दण्‍डवत कर के कहा; सचमुच तू परमेश्वर का पुत्र है।

एक साल में बाइबल: 
प्रेरितों 6-9

रविवार, 9 नवंबर 2014

निमंत्रण


   चर्च में युवकों के दल की पार्टी थी और उस दल की एक सदस्या, लिंडा ने अपनी एक सहेली केटी को भी उसमें सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया था। केटी बचपन के बाद से कभी चर्च नहीं गई थी और इस पार्टी में सम्मिलित होते हुए उसके अन्दर एक घबराहट थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि लगभग सभी लोग जहाँ उसके लिए अपरिचित होंगे, वहाँ उसे कैसा लगेगा, उसके साथ कैसा व्यवहार होगा, वह औरों के साथ कैसे संपर्क बना पाएगी। लेकिन वहाँ पहुँचने पर उसका मन शान्त हो गया; उसके नाम की प्लेट पर उपस्थित लोगों की ओर से सप्रेम स्वागत के कार्ड पहले से ही रखे हुए थे, जैसे कि सब ने अन्य सभी के लिए लिख कर रखे थे। लेकिन केटी के लिए यह हृदय छू लेने वाली बात थी कि उस दल के सदस्यों ने सारी पार्टी में उस अपरिचित के लिए भी वही आदर और प्रेम दिखाया जो उन्होंने अपनी जान-पहचान वालों के लिए दिखाया था।

   केटी को वहाँ बहुत अच्छा लगा, और उनका यह प्रेम देखकर उसने लिंडा द्वारा दिया गया चर्च आने का निमंत्रण भी स्वीकार कर लिया। चर्च में उसने उसके पापों में होने के बावजूद, उसके प्रति परमेश्वर के प्रेम के बारे में सुना और उसने प्रभु यीशु में होकर मिलने वाली पापों की क्षमा एवं उद्धार को ग्रहण कर लिया। उस युवा दल के सप्रेम व्यवहार ने उसे परमेश्वर के प्रेम की एक झलक दिखाई थी जिससे परमेश्वर उसके हृदय को परमेश्वर पर विश्वास करने उसे समर्पित जीवन जीने के लिए प्रेरित कर सका।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, "हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए" (1 यूहन्ना 4:11)। यह प्रेम केवल हमारे अपने परिवार या अन्य मसीही विश्वासियों तक ही सीमित नहीं रहना है, वरन उनके लिए भी प्रदर्शित होना है जो अभी तक मसीह के प्रेम को नहीं जानते हैं। रे स्टैडमैन ने लिखा, "जब परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों को रौशन करता है, हमारे मन औरों के लिए और खुले हो जाते हैं, और उस प्रेम की सुगन्ध हमारे मनों से निकलकर औरों तक पहुँचती है जिससे वे भी उस सुगन्ध के स्त्रोत के प्रति आकर्षित होते हैं।" यही लिंडा के निमंत्रण और उस युवा दल के व्यवहार ने केटी के लिए किया।

   आज भी परमेश्वर आप में होकर अपने प्रेम की सुगन्ध दूसरों तक पहुँचा सकता है जो उन लोगों के लिए परमेश्वर के प्रेम तक पहुँचने का निमंत्रण तथा अनन्त जीवन का मार्ग बन सकता है। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के प्रेम और भय में व्यतीत होने वाला जीवन दुसरों को मसीह यीशु की ओर आकर्षित करने वाला जीवन होता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16  

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-11
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 3-5


शनिवार, 8 नवंबर 2014

गवाही


   एक दिन अपने दफतर में कार्य करते समय मुझे मेरी पत्नि का फोन आया और उसने कहा, "हमारे पड़ौस में कुछ हो रहा है; वहाँ बहुत सी कार और गाड़ियाँ आई हुई हैं।" मेरा मन अनहोनी की आशंका से घबरा गया, और शीघ्र ही ज्ञात हुआ कि मेरा शक सही था; अपने पेशे के कारण जिस बात की आशंका हमारे पड़ौसी के साथ लगी रहती थी, वह घट गई थी। हमारा पड़ौसी, ट्रेवर स्लौट, पेशे से एक पुलिस वाला था और खतरे उसके साथ बने रहते थे; दो बैंक डकैतों को भागने से रोकने प्रयास में उसे गोली लगी और उसकी मृत्यु हो गई। हमारा मोहल्ला इस दुर्घटना से स्तब्ध रह गया।

   ट्रेवर को अपनी मृत्यु के लिए तैयार होने का कोई समय नहीं मिला, लेकिन फिर भी वह तैयार था। प्रभु यीशु मसीह में किए गए विश्वास और समर्पण के कारण उसका अनन्त काल का भविष्य सुरक्षित था, और उसके इस विश्वास तथा समर्पण से प्रभु की महिमा और आज्ञाकारिता में जीवन जीने के कारण संसार के लोगों में उसकी गवाही भी उत्तम तथा सुरक्षित थी, उसका नाम बेदाग़ था। उसके अन्तिम संसकार में भाग लेने सैंकड़ों सह-पुलिसकर्मी आए, और उसके एक साथी अधिकारी ने उसके विषय में कहा, "वह एक समर्पित पुलिस अधिकारी तो था ही लेकिन उससे पहले वह अपनी पत्नि किम के लिए एक प्रेमी पति और अपने बच्चों कैटलिन तथा एबी के लिए एक अच्छा और स्नेही पिता था।" ट्रेवर के लिए जितने लोगों ने वहाँ अपनी श्रद्धांजलियाँ दीं, उन सब ने उसके महान व्यक्तित्व तथा अपने परिवार के प्रति उसके प्रेम तथा देखभाल की बात कही।

 ट्रेवर का जीवन प्रेरित पौलुस द्वारा कुलुस्से की मण्डली को लिखी पत्री में दिए गए निर्देशों: "इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो" (कुलुस्सियों 3:12-13) का जीवन था। परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्देशों के पालन के कारण उसकी उत्तम गवाही उसके बाद भी विद्यमान थी।

   हम में से कोई नहीं जानता कि कब और कैसे हमें इस संसार से विदा लेकर परमेश्वर के सम्मुख अपने जीवन का हिसाब देने खड़े होना पड़ जाएगा। यदि उस समय आपके पाप आपके साथ गए तो परिणाम बहुत दुखदायी और अपरिवर्तनीय होंगे। प्रभु यीशु से पापों की क्षमा माँग कर, उसे अपना जीवन समर्पित कर के ट्रेवर की भाँति आप भी अनन्तकाल की उस आशीष के लिए तैयार हो जाएं जो आपको इस जीवन में भी अच्छी गवाही प्रदान करेगी और मृत्योप्रांत के जीवन को भी सदा काल के लिए संवार देगी। तब आपके लिए हर दिन प्रभु के लिए एक जीवित गवाही बनकर आनन्द के साथ जीवन जीने का अवसर रहेगा, और आपकी यह गवाही दूसरों के लिए भी प्रेर्णा का स्त्रोत बन जाएगी। - डेव ब्रैनन


प्रतिदिन हम अपनी गवाही में कुछ भला या बुरा जोड़ते रहते हैं, वही हमारे बाद संसार के समक्ष रह जाएगा।

और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो। - इफिसियों 4:32

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:8-17
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो। 
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। 
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है। 
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। 
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। 
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। 
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो। 
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। 
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 1-2


शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

वचन


   मेरी प्यानों शिक्षिका कंठस्थ कर लेने के लिए पीछे पड़ी रहती थीं। उनके लिए यह काफी नहीं था कि मैं प्यानो संगीत का कोई एक भाग बिना गलती किए बजा लूँ; वे चाहती थीं कि मैं संगीत के अनेक भाग केवल स्मरण से बिना किसी गलती के बजाने वाली हो सकूँ। वे नहीं चाहती थीं कि उनका कोई भी शिष्य कभी यह कहने पाए कि "क्षमा कीजिए, क्योंकि मेरे पास संगीत के लिखित भाग नहीं हैं इसलिए मैं आज नहीं बजा पाऊँगी!" साथ ही वे इस बात पर भी ज़ोर देती थीं कि मैं उन स्मरण किए हुए भागों को अपने अन्दर अनुभव कर सकूँ, और वह संगीत मेरे अन्दर से हावभाव के साथ निकले ना कि मेरे मस्तिष्क से।

   बचपन में मैं ना केवल प्यानो संगीत के भाग कंठस्थ करती थी, मैं परमेश्वर के वचन बाइबल के भाग भी कंठस्थ करती थी। बचपन की मेरी सीमित समझ के कारण, मुझे लगता था कि भजन 119:11 कंठस्थ कर लेने से मैं पाप करने से बची रह सकूँगी। मैं बाइबल के पद स्मरण करने के लिए बहुत मेहनत करती थी और एक बार मैंने इससे संबंधित एक प्रतियोगिता भी जीती थी। बाइबल के पद स्मरण करना एक अच्छी आदत है लेकिन केवल याद भर कर लेने से ही हम पाप करने से बच नहीं जाते - यह मैंने उस प्रतियोगिता को जीत लेने के बाद सीखा, क्योंकि इतने पद मस्तिषक में होने के बावजूद मेरे व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया था। लेकिन उन स्मरण किए गए पदों के कारण मेरे मन में अपने पापों को लेकर दोष भावना अवश्य रहने लगी।

   अन्ततः मैंने यह जाना कि परमेश्वर के वचन का मेरे मस्तिष्क में विद्यमान होना भर ही काफी नहीं है, मुझे उस वचन को अपने व्यावाहरिक जीवन में लागू भी करना है, उसे अपने मस्तिष्क से अपने मन में भी लाना है, उसकी आज्ञाकारिता भी निभानी है; अर्थात उसका पालन भी करना है। जैसे संगीत के वे भाग जब तक मेरे अन्दर का एक हिस्सा नहीं बन जाते थे, मैं उन्हें भली-भांति नहीं बजा पाती थी, उसी प्रकार परमेश्वर के उस वचन को मेरे जीवन मेरे कारगर होने के लिए मेरे जीवन का एक व्याहारिक भाग बनना आवश्यक था। बाइबल के भागों को केवल कंठस्थ कर लेना काफी नहीं था, उनका अनुसरण भी करना था। जब मैंने यह करना आरंभ किया तो पाप की पकड़ मेरे जीवन से जाती रही और मैं उस दोष भावना से भी निकल सकी।

   परमेश्वर के वचन को केवल मस्तिष्क में ही स्थान ना दें, उसे मन में भी उतारें, अपने दैनिक व्यावाहरिक जीवन का अंग बना लें, उसकी आज्ञाकारिता में चलें और वह जीवित वचन आपके जीवन को पाप की पकड़ से स्वतंत्र कर देगा। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर के वचन को अपने मस्तिष्क में भर लें, मन में बसा लें और जीवन का मार्गदर्शन करने दें।

आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - यूहन्ना 1:1, 14

बाइबल पाठ: भजन 119:9-16
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यूहन्ना 18-21