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शनिवार, 21 मार्च 2015

निर्णय


   कैंसर के साथ अपनी लड़ाई के संबंध में, ऐप्पल कंपनी के सह-संस्थापक, स्टीव जोब्स ने कहा, "जीवन से संबंधित बड़े चुनाव करने के लिए मेरे लिया सबसे महत्वपूर्ण औज़ार बना है इस बात को स्मरण रखना कि मैं शीघ्र ही मर जाऊँगा। क्योंकि बाहरी अन्य सब कुछ, सारी आशाएं, सारा गर्व, सारी शर्मिन्दगी, सभी असफलताएं - इन सब का महत्व मृत्यु की वास्तविकता के सामने जाता रहता है, सामने रह जाता है तो बस वह जो वास्तव में महत्वपूर्ण तथा आवश्यक है।"

   इसकी तुलना में प्रेरित पतरस ने अपने पाठकों को उभारना करना चाहा कि वे अपने दुखों का उपयोग अपने अनन्त जीवन को सार्थक बनाने के लिए करें। साथ ही पतरस ने उन्हें इस बात के लिए भी उभारा के वे प्रभु यीशु के दुख उठाने को अपने जीवन में आने वाले आत्मिक संघर्ष तथा सताव को मसीह यीशु में विशवास रखने के परिणाम के रूप में स्वीकार कर लें - क्योंकि वे प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं इसलिए दुख उठाना उनके लिए उस विश्वास की स्वाभाविक नियति होगी। प्रभु यीशु का दुख उठाना उनके लिए पाप की लालसाओं को त्यागने और परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहने के लिए प्रोत्साहन का कारण होना चाहिए (1 पतरस 4:1-2)। यदि उनके जीवन अनन्त काल के लिए सार्थक होने हैं, तो उन्हें अस्थाई शारीरिक आनन्द की लालसाओं से मन हटाकर परमेश्वर को पसन्द आने वाली बातों पर मन लगाना तथा उन पर जीवन को व्यय करना चाहिए।

   इस बात को स्मरण रखना कि प्रभु यीशु ने हम सभी मनुष्यों के पापों के निवारण के लिए दुख उठाया और सभी के पापों की क्षमा के लिए अपना बलिदान दिया हमारे लिए वह सबसे महत्वपूर्ण वास्तविकता होनी चाहिए जो हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार तथा अनन्तकाल के लिए उपयोगी निर्णय करने के लिए उभार सके। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु की मृत्यु हमारे बीते जीवन के पापों को क्षमा तथा आते जीवन को परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता प्रदान करती है।

और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है। - गलतियों 5:24 

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:1-8
1 Peter 4:1 सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। 
1 Peter 4:2 ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो। 
1 Peter 4:3 क्योंकि अन्यजातियों की इच्छा के अनुसार काम करने, और लुचपन की बुरी अभिलाषाओं, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, पियक्कड़पन, और घृणित मूर्तिपूजा में जहां तक हम ने पहिले समय गंवाया, वही बहुत हुआ। 
1 Peter 4:4 इस से वे अचम्भा करते हैं, कि तुम ऐसे भारी लुचपन में उन का साथ नहीं देते, और इसलिये वे बुरा भला कहते हैं। 
1 Peter 4:5 पर वे उसको जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करने को तैयार है, लेखा देंगे। 
1 Peter 4:6 क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसी लिये सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उन का न्याय हो, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें। 
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 7-9
  • लूका 1:21-38


शुक्रवार, 20 मार्च 2015

तूफान और बारिश


   जब मूसलाधार बारिश ने मेरे बाग़ीचे के फूलों पर आघात किया, उन्हें झुका दिया तो मुझे उनके लिए बहुत बुरा लगा। मेरा मन हुआ कि मैं उन सभी फूलों को घर के अन्दर तूफान तथा बारिश से सुरक्षित स्थान पर ले आऊँ। बारिश के समाप्त होने तक वे फूल पानी के वज़न से नीचे की ओर झुक गए थे, मुर्झाए हुए, कमज़ोर और दुखी प्रतीत हो रहे थे। लेकिन कुछ ही घंटों में वे वापस ऊपर आकाश की ओर उठने लगे थे, और अगले दिन वे सभी सीधे खड़े और मज़बूत दिखाई दे रहे थे! यह एक अद्भुत परिवर्तन था। बारिश ने उन फूलों तथा उनके पौधों पर प्रहार किया, बारिश का पानी उन पर से बह कर नीचे धरती पर पड़ा, धरती ने उसे सोख लिया, और वही पानी उन पौधों की जड़ों से होकर वापस उन की टहनियों और उन्हीं फूलों में आ गया, उन्हें सीधा खड़ा रहने के लिए मज़बूती और ताकत देने लगा!

   क्योंकि मुझे धूप अच्छी लगती है इसलिए जब भी बारिश मेरे बाहर रहने की योजनाओं में बाधा डालती है, मुझे बहुत बुरा लगता है। लेकिन मेरा लिए बारिश के प्रति नकारात्मक विचार रखना सही नहीं है; जिस किसी ने भी सूखे या अकाल को अनुभव किया है वह जानता है कि बारिश कितनी बड़ी आशीष होती है, धरती पर रहने वालों के लिए कितनी आवश्यक है, और धर्मी हों या अधर्मी वर्षा दोनों ही को लाभ पहुँचाती है।

   यह बात केवल पानी की बारिश के लिए ही सत्य नहीं है। जीवन के तूफान और परिस्थितियों की बारिश भी हम पर आघात कर सकते हैं, ऐसा आघात जो हमें झुका दें, मुर्झाया सा बना दें; लेकिन हम मसीही विश्वासियों के लिए यह हानिकारक कदापि नहीं हो सकता। हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता इन सभी बातों के द्वारा हमें और मज़बूत, और बेहतर बनाता है; वह हमें इन सब से टूटने नहीं देता। जो तूफान और परिस्थितियाँ की बारिश हमें बाहर आहत करती हैं, परमेश्वर उन्हीं के द्वारा हमें भीतर से बलवन्त कर देता है, सीधा तथा दृढ़ खड़े रहने के क्षमता प्रदान कर देता है। हम मसीही विश्वासियों को यह परमेश्वर का अद्भुत आश्वासन है कि जीवन के तूफान और परिस्थितियों की बारिश भी हमारे लिए भलाई ही का कारण बन जाएगी।

   किसी भी परिस्थिति में निराश-हताश ना हों, सदैव परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखें, सदा उसके धन्यवादी बने रहें, उसे अपना कार्य करने दें और वह आपको बेहतर तथा सामर्थी करता जाएगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जो तूफान और बारिश हमें तोड़ने के प्रयास करते हैं, परमेश्वर उन्हीं के द्वारा हमें और बलवान बना देता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: यशायाह 55:8-13
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। 
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
Isaiah 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है, 
Isaiah 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
Isaiah 55:12 क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुंचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाडिय़ां गला खोल कर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे। 
Isaiah 55:13 तब भटकटैयों की सन्ती सनौवर उगेंगे; और बिच्छु पेड़ों की सन्ती मेंहदी उगेगी; और इस से यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 4-6
  • लूका 1:1-20



गुरुवार, 19 मार्च 2015

प्राथमिकता


   जब हमारी पोती सारा छोटी बच्ची थी तो उसने हमें बताया कि बड़ी होकर वह अपने पापा के समान बास्केटबॉल प्रशिक्षक बनना चाहती है। उसने आगे यह भी बताया कि ऐसा कर पाने के लिए उसे अभी क्यों प्रतीक्षा करनी पड़ेगी! उसके अनुसार, प्रशिक्षक बनने से पहले उसे खिलाड़ी बनना पड़ेगा, और खिलाड़ी को अपनी जूती के फीते अपने आप बान्धना आना चाहिए, और अभी उसे अपनी जूती के फीते स्वयं बान्धना नहीं आता, इसलिए जब वह बारी बारी से सभी बातों को करने लगेगी तब ही वह प्रशिक्षक बनने पाएगी; सारा ने अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित कर रखीं थीं!

   हम सामन्यतः जीवन की बातों के लिए कहते हैं - प्राथमिकताएं निभाओ; पहली बातें पहले और फिर उसके बाद अन्य बातें करो। यह सिद्धांत जीवन की सभी बातों पर भी लागू होता है, और प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन की सर्वप्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए परमेश्वर को पहचानना, उसे निकटता से जानना तथा उसकी संगति का आनन्द लेना। क्योंकि परमेश्वर को पहचानने और जानने के द्वारा ही हम वह बन और कर सकते हैं जो हमें होना और करना चाहिए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख नायक, राजा दाऊद ने अपने पुत्र सुलेमान को राजगद्दी सौंपते समय सचेत किया: "और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह;..." (1 इतिहास 28:9)।

   ध्यान रखिए कि परमेश्वर को जाना जा सकता है। परमेश्वर कोई तर्क या आध्यात्मिक विचार नहीं है; परमेश्वर एक सजीव व्यक्तित्व है। परमेश्वर सोचता है, अभिलाषा रखता है, अनुभव करता है, प्रेम करता है आदि। परमेश्वर के वचन बाइबल के एक विद्वान तथा टीकाकार ऐ. डबल्यु. टोज़र ने परमेश्वर के बारे में लिखा, "वह एक व्यक्ति है और उसे बढ़ती हुई आत्मियता तथा निकटता से जाना जा सकता है, तब जब हम अपने मनों को इस अनुभव के अचरज के लिए तैयार कर लेते हैं।" यही रहस्य है - हमें "अपने मनों को इस अनुभव के अचरज के लिए तैयार" कर लेना है।

   जो परमेश्वर को जानना चाहते हैं वे उसे जान सकते हैं; वह अपने आप को हमसे दूर या छिपाए हुए नहीं रखता है। उसने अपने आप को अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह में होकर संसार पर प्रगट किया है। परमेश्वर अपने आप को, अपने प्रेम को हम पर थोपता भी नहीं है; वह धैर्य के साथ हमारी प्रतीक्षा करता है, क्योंकि वह चाहता है कि हम स्वेच्छा से उसके पास आएं और उससे संगति रखें। जिसने प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर को पहचान और जान लिया, उसने अनन्त जीवन, अनन्त आनन्द और अनन्त आशीष को प्राप्त कर लिया; इसलिए परमेश्वर को जानना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। - डेविड रोपर


परमेश्वर को जानने और उससे संगति रख पाने का विचार दिमाग़ को हिला देता है; किंतु उसे जान लेना मन को अद्भुत शांति से भर देता है।

पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। - इब्रानियों 1:1-2

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 28:5-10
1 Chronicles 28:5 और मेरे सब पुत्रों में से (यहोवा ने तो मुझे बहुत पुत्र दिए हैं) उसने मेरे पुत्र सुलैमान को चुन लिया है, कि वह इस्राएल के ऊपर यहोवा के राज्य की गद्दी पर विराजे। 
1 Chronicles 28:6 और उसने मुझ से कहा, कि तेरा पुत्र सुलैमान ही मेरे भवन और आंगनों को बनाएगा, क्योंकि मैं ने उसको चुन लिया है कि मेरा पुत्र ठहरे, और मैं उसका पिता ठहरूंगा। 
1 Chronicles 28:7 और यदि वह मेरी आज्ञाओं और नियमों के मानने में आज कल की नाईं दृढ़ रहे, तो मैं उसका राज्य सदा स्थिर रखूंगा। 
1 Chronicles 28:8 इसलिये अब इस्राएल के देखते अर्थात यहोवा की मण्डली के देखते, और अपने परमेश्वर के साम्हने, अपने परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाओं को मानो और उन पर ध्यान करते रहो; ताकि तुम इस अच्छे देश के अधिकारी बने रहो, और इसे अपने बाद अपने वंश का सदा का भाग होने के लिये छोड़ जाओ। 
1 Chronicles 28:9 और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। 
1 Chronicles 28:10 अब चौकस रह, यहोवा ने तुझे एक ऐसा भवन बनाने को चुन लिया है, जो पवित्रस्थान ठहरेगा, हियाव बान्धकर इस काम में लग जा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 1-3
  • मरकुस 16



बुधवार, 18 मार्च 2015

अक्षम?


   चार वर्षीय एलियाना, सोने जाने से पहले अपनी माँ के साथ मिलकर अपनी इधर-उधर फैली हुई चीज़ें एकत्रित कर रही थी। यह करते हुए जब उसकी माँ ने कहा कि वह बिस्तर पर पड़े हुए कपड़े भी उठा कर ठीक से रख दे, तो एलियाना का धैर्य टूट गया; वह कमर पर हाथ रख कर खड़ी हो गई और खिसियाकर माँ से बोली, "अब मैं ही सब कुछ तो नहीं कर सकती हूँ ना!"

   क्या परमेश्वर ने आप से जो कुछ करने के लिए कहा है उसे लेकर आपको भी कभी ऐसा ही लगता है? चर्च के कार्यों, व्यक्तिगत सेवकाई, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ आदि को निभाने-करने की व्यस्तता से हो सकता है कि हम अपने आप को अभिभूतित अनुभव करने लगें, और एक लंबी ठंडी सांस लेकर, रुष्ठ भाव से परमेश्वर से कहें, "अब मैं ही सब कुछ तो नहीं कर सकता हूँ ना!"

   लेकिन परमेश्वर के निर्देश यह दिखाते हैं कि अपने विश्वासियों से उसकी आशाएं ऐसी नहीं हैं जो उन्हें अभिभूतित कर दें। उदाहरणस्वरूप उसके कुछ निर्देशों के साथ जुड़ी बातों को देखिए:
  • जब हमें दुसरों के साथ व्यवहार करना होता है तो उस संदर्भ में प्रभु कहता है, "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों 12:18) - वह हमारी सहनशीलता की सीमाओं को समझता है।
  • हमारे कार्य को लेकर वह कहता है, "और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो" (कुलुस्सियों 3:23)। वह हम से लोगों को प्रभावित करने वाली सिद्धता नहीं माँगता; उसे बस इतना चाहिए कि हम अपनी खरी मेहनत और कार्यनिष्ठा के द्वारा उसको महिमा देने वाले बनें।
  • दूसरों के साथ तुलना के विषय में उसने कहा है: "पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा" (गलतियों 6:4)। हमें दूसरों की आलोचना करने वाले या उनके साथ अपनी तुलना करने वाले नहीं बनाना है क्योंकि हमारे जीवन तथा कार्यों का उद्देश्य किसी अन्य के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं है; हमें तो बस सत्यनिष्ठा के साथ अपनी ज़िम्मेदारियों को ही पूरा करना है।


   अपनी बुद्धिमता में, जो कुछ वह हम से चाहता है उसे करने के लिए परमेश्वर ने हमें भरपूर क्षमता एवं सामर्थ प्रदान करी है; अब यह हमारा कर्तव्य है कि अपने आप को उसके दिए कार्यों के लिए अक्षम समझने की बजाए उसके मार्गदर्शन में होकर उन कार्यों को पूरा करते रहें, क्योंकि उसका वायदा है कि वह हमें हमारी सामर्थ से बाहर किसी भी परीक्षा कभी नहीं पड़ने देगा (1 कुरिन्थियों 10:13)।


परमेश्वर द्वारा ज़िम्मेदारियाँ उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक सामर्थ के साथ ही मिलती हैं।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: गलतियों 6:1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। 
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। 
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा। 
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47



मंगलवार, 17 मार्च 2015

होंठों का स्वामी?


   प्रशंसा एवं चापलूसी की बातों में केवल उद्देश्य का ही अन्तर होता है। प्रशंसा किसी दूसरे व्यक्ति में विद्यमान किसी गुण या उसके द्वारा करे गए किसी कार्य के वास्तविक सम्मान के लिए होती है; जबकि चापलूसी किसी दूसरे व्यक्ति की कृपादृष्टि प्राप्त करके अपनी स्वार्थसिद्धी करने के लिए होती है। प्रशंसा दूसरों को उत्साहित करने, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए होती है; चापलूसी दूसरों को अपने लिए प्रयोग करने के लिए होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 12 में दाऊद अपने समय के समाज को लेकर विलाप करता है, जहाँ भक्त तथा विश्वासयोग्य लोग जाते रहे थे और उनके स्थान पर छल-कपट करने वाले खड़े हो गए थे; दाऊद ने उनके बारे में लिखा: "उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है; वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं" (भजन 12:2) क्योंकि "वे कहते हैं कि हम अपनी जीभ ही से जीतेंगे, हमारे ओंठ हमारे ही वश में हैं; हमारा प्रभु कौन है?" (भजन 12:4)

   जब हम मसीही विश्वासी अपनी स्वार्थसिद्धी के लिए किसी की झूठी प्रशंसा करने की इच्छा में पड़ें तो एक प्रश्न है जो हमें अपने-आप से अवश्य ही पूछ लेना चाहिए - "मेरे होंठों का स्वामी कौन है?" यदि मेरे होंठ मेरे अपने हैं, तो फिर मैं उनसे जो चाहूँ वह कह सकता हूँ; लेकिन यदि प्रभु यीशु मेरे होंठों का स्वामी है, तो फिर मेरे होंठों से निकलने वाले शब्द उसके चरित्र के अनुसार हों; ऐसे शब्द जिनके विषय में दाऊद ने लिखा "परमेश्वर का वचन पवित्र है, उस चान्दी के समान जो भट्टी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई हो" (भजन 12:6)।

   इस बात को निर्धारित रखने के लिए कि कौन मेरे होंठों का स्वामी है, एक अच्छा तरीका होगा दाऊद द्वारा लिखे गए एक अन्य भजन के एक पद के साथ अपने दिन को आरंभ करना तथा उस पद पर मनन करते रहना - "मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!" (भजन 19:14)। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो अपने मुंह की चौकसी करता है, वह अपने प्राण की रक्षा करता है, परन्तु जो गाल बजाता है उसका विनाश जो जाता है। - नीतिवचन 13:3

हे यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा। हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं। -  भजन 5:1-2

बाइबल पाठ: भजन 12
Psalms 12:1 हे परमेश्वर बचा ले, क्योंकि एक भी भक्त नहीं रहा; मनुष्यों में से विश्वास योग्य लोग मर मिटे हैं।
Psalms 12:2 उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है; वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं।
Psalms 12:3 प्रभु सब चापलूस ओठों को और उस जीभ को जिस से बड़ा बोल निकलता है काट डालेगा।
Psalms 12:4 वे कहते हैं कि हम अपनी जीभ ही से जीतेंगे, हमारे ओंठ हमारे ही वश में हैं; हमारा प्रभु कौन है?
Psalms 12:5 दीन लोगों के लुट जाने, और दरिद्रों के कराहने के कारण, परमेश्वर कहता है, अब मैं उठूंगा, जिस पर वे फुंकारते हैं उसे मैं चैन विश्राम दूंगा।
Psalms 12:6 परमेश्वर का वचन पवित्र है, उस चान्दी के समान जो भट्टी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई हो।
Psalms 12:7 तू ही हे परमेश्वर उनकी रक्षा करेगा, उन को इस काल के लोगों से सर्वदा के लिये बचाए रखेगा।
Psalms 12:8 जब मनुष्यों में नीचपन का आदर होता है, तब दुष्ट लोग चारों ओर अकड़ते फिरते हैं।

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 30-31
  • मरकुस 15:1-25



सोमवार, 16 मार्च 2015

टूटी हड्डियाँ


   बहुत वर्ष पहले, अपने कॉलेज के दिनों में मैं अपने कॉलेज की फुटबॉल टीम में गोलकीपर हुआ करता था। मेरे लिए वह खेल कितना मनोरंजक हुआ करता था इस बात का संपूर्ण वर्णन यहाँ संभव नहीं है, लेकिन उस मनोरंजन के लिए मुझे एक कीमत चुकानी पड़ती थी - मुझे अपने आप को बार-बार खतरे में डालकर प्रतिद्वंदी टीम को गोल करने से रोकना होता था। उस मनोरंजन की कीमत मैं ने केवल तब ही नहीं चुकाई, मैं आज भी उस कीमत को चुकाता रहता हूँ; क्योंकि खेल के समय में मुझे गंभीर चोटें भी आईं - मेरी एक टाँग टूटी, कई पसलियाँ टूटीं, एक कंधा उतरा, तथा मेरे सिर की चोट के कारण दिमाग़ को अन्दरूनी धक्का भी लगा। आज भी, विशेषकर ठंड के दिनों में, उन टूटी हड्डियाँ की दुखन मुझे उस मनोरंजन के जोखिम तथा चोटों की याद दिलाती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख नायक दाऊद को भी अपने जीवन में कुछ टूटी हड्डियों का स्मरण शेष रह गया था, लेकिन उसकी चोटें शारीरिक नहीं आत्मिक थीं! बथशेबा के साथ व्यभिचार और फिर बथशेबा के पति को मरवा देने के नैतिक पतन के कारण दाऊद को परमेश्वर के अनुशासन की कठोरता को सहना पड़ा था। लेकिन उस अनुशासन में होकर निकलने से दाऊद के अन्दर अपने किए पर ग्लानि तथा पश्चताप आया और उसने पश्चातापी मन से परमेश्वर से प्रार्थना करी; उसकी प्रार्थना का एक वाक्य था, "मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं" (भजन 51:8)।

   परमेश्वर का दण्डात्मक अनुशासन इतना कठोर था कि उसकी पीड़ा दाऊद को टूटी हड्डियों की पीड़ा के समान प्रतीत हुई। लेकिन उस दुख भरी परिस्थिति में भी दाऊद ने परमेश्वर पर भरोसा किया कि अपने अनुग्रह में होकर वह ना केवल दाऊद के टूटेपन को ठीक करेगा वरन उसके आनन्द को भी लौटा कर दे देगा। हमारे पाप और पराजय की परिस्थिति में पड़े होने पर भी, हम मसीही विश्वासियों के लिए यह सांत्वना और आनन्द की बात है कि परमेश्वर का हमारे प्रति प्रेम कभी कम नहीं होता। परमेश्वर हम से पुत्रों के समान व्यवहार करता है, और हमारी भलाई के लिए जहाँ अनुशासित करना होता है वहाँ अनुशासित करता है और जहाँ हमें उभारने-उठाने की आवश्यकता होती हैं वहाँ उभारता-उठाता भी है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के अनुशासन का हाथ, उसके प्रेम का हाथ भी है।

क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। - इब्रानियों 12:6

बाइबल पाठ: भजन 51:1-13
Psalms 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे। 
Psalms 51:2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर! 
Psalms 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है। 
Psalms 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे। 
Psalms 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा। 
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा। 
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा। 
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं। 
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल। 
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर। 
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर। 
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल। 
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 28-29
  • मरकुस 14:54-72



रविवार, 15 मार्च 2015

दृष्टिकोण


   जब मेरी नज़र उस पर पड़ी, तब हम आईसक्रीम स्टोर में पंक्ति में खड़े थे। उसके चेहरे पर मारपीट की चोटों के अनेकों निशान थे, उसकी नाक भी टेढ़ी हो रखी थी; उसके कपड़े साफ तो थे लेकिन अस्त-व्यस्त थे। एक स्वाभाविक प्रतिक्रीया स्वरूप मैं अपने बच्चों और उसके बीच में होकर खड़ा हो गया तथा अपनी पीठ को दोनों के बीच की एक दीवार बना लिया। जब पहली बार उसने कुछ कहा तो मुझे स्पष्ट सुनाई नहीं दिया, इसलिए उत्तर में मैंने बस अपना सिर थोड़ा सा हिला भर दिया, मैं उसके साथ आँख मिलाकर बात नहीं कर पा रहा था। क्योंकि मेरी पत्नि मेरे साथ स्टोर में नहीं थी इसलिए उसने सोचा कि मैं अकेला ही बच्चों का पालन-पोषण कर रहा हूँ।

  फिर उसने बड़ी नम्र आवाज़ में कहा, "अकेले ही इन का पालन-पोषण करना कठिन होता है; है ना?" बात कहने के उसके अन्दाज़ में कुछ था जिसने मुझे मुड़कर उसे देखने पर मजबूर कर दिया। तब ही मेरा ध्यान उसके साथ खड़े उसके बच्चों की ओर गया, और फिर उसने बताया कि कैसे बहुत पहले उस की पत्नि उन्हें छोड़कर जा चुकी थी, और मैं उसकी बात सुनता रहा। उसके नम्र शब्द तथा व्यवहार उसके कठोर बाहरी स्वरूप की तुलना में विरोधात्मक थे। मैं एक बार फिर मैं अपनी पूर्व-धारणा एवं आँकलन के कारण दुखी हुआ; एक बार फिर मैंने बाहरी स्वरूप के अन्दर की वास्तविकता को नहीं देख पाने की गलती करी थी।

   प्रभु यीशु का प्रतिदिन ऐसे लोगों से सामना होता था जिनके बाहरी स्वरूप के कारण उनसे मुँह मोड़ लेना बड़ी स्वाभाविक बात होती, उदाहरणस्वरूप हमारे आज के परमेश्वर के वचन बाइबल के पाठ में उल्लेखित दुष्टात्माओं से ग्रसित व्यक्ति ही को लीजिए (मरकुस 5:1-20)! लेकिन प्रभु यीशु ने सदा ही मनुष्यों की भीतरी दशा पर ध्यान किया, उनकी आवश्यकताओं को पहचाना और फिर उसी के अनुसार उनके साथ व्यवहार किया, उनकी आवश्यकताओं को पूरा किया।

   प्रभु यीशु का दृष्टिकोण सदा ही प्रेम का दृष्टिकोण होता है; वह कभी हमारे पाप के दाग़ों, बिगड़े हुए स्वभाव और लड़खड़ाती हुई विश्वासयोग्यता के आधार पर हमारा आँकलन नहीं करता है। उसने जगत के सभी लोगों से प्रेम किया है, अपने बैरी और विरोधियों से भी; उसने सभी के लिए अपना बलिदान दिया है; उस में विश्वास द्वारा सेंत-मेंत मिलने वाले उद्धार का उसका प्रस्ताव सभी के लिए समान रूप से है। प्रभु करे कि हमारा दृष्टिकोण तथा व्यवहार हट और दंभ का नहीं वरन उसके दृष्टिकोण के समान प्रेम और क्षमा का हो। - रैन्डी किलगोर


यदि आप प्रभु यीशु के दृष्टिकोण से देखेंगे तो आपको संसार ज़रूरतमंद नज़र आएगा।

...क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है। - 1 शमूएल 16:7

बाइबल पाठ: मरकुस 5:1-20
Mark 5:1 और वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुंचे। 
Mark 5:2 और जब वह नाव पर से उतरा तो तुरन्त एक मनुष्य जिस में अशुद्ध आत्मा थी कब्रों से निकल कर उसे मिला। 
Mark 5:3 वह कब्रों में रहा करता था। और कोई उसे सांकलों से भी न बान्‍ध सकता था। 
Mark 5:4 क्योंकि वह बार बार बेडिय़ों और सांकलों से बान्‍धा गया था, पर उसने सांकलों को तोड़ दिया, और बेडिय़ों के टुकड़े टुकड़े कर दिए थे, और कोई उसे वश में नहीं कर सकता था। 
Mark 5:5 वह लगातार रात-दिन कब्रों और पहाड़ों में चिल्लाता, और अपने को पत्थरों से घायल करता था। 
Mark 5:6 वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा, और उसे प्रणाम किया। 
Mark 5:7 और ऊंचे शब्द से चिल्लाकर कहा; हे यीशु, परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र, मुझे तुझ से क्या काम? मैं तुझे परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि मुझे पीड़ा न दे। 
Mark 5:8 क्योंकि उसने उस से कहा था, हे अशुद्ध आत्मा, इस मनुष्य में से निकल आ। 
Mark 5:9 उसने उस से पूछा; तेरा क्या नाम है? उसने उस से कहा; मेरा नाम सेना है; क्योंकि हम बहुत हैं। 
Mark 5:10 और उसने उस से बहुत बिनती की, हमें इस देश से बाहर न भेज। 
Mark 5:11 वहां पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुण्ड चर रहा था। 
Mark 5:12 और उन्होंने उस से बिनती कर के कहा, कि हमें उन सूअरों में भेज दे, कि हम उन के भीतर जाएं। 
Mark 5:13 सो उसने उन्हें आज्ञा दी और अशुद्ध आत्मा निकलकर सूअरों के भीतर पैठ गई और झुण्ड, जो कोई दो हजार का था, कड़ाडे पर से झपटकर झील में जा पड़ा, और डूब मरा।
Mark 5:14 और उन के चरवाहों ने भागकर नगर और गांवों में समाचार सुनाया। 
Mark 5:15 और जो हुआ था, लोग उसे देखने आए। और यीशु के पास आकर, वे उसको जिस में दुष्टात्माएं थीं, अर्थात जिस में सेना समाई थी, कपड़े पहिने और सचेत बैठे देखकर, डर गए। 
Mark 5:16 और देखने वालों ने उसका जिस में दुष्टात्माएं थीं, और सूअरों का पूरा हाल, उन को कह सुनाया। 
Mark 5:17 और वे उस से बिनती कर के कहने लगे, कि हमारे सिवानों से चला जा। 
Mark 5:18 और जब वह नाव पर चढ़ने लगा, तो वह जिस में पहिले दुष्टात्माएं थीं, उस से बिनती करने लगा, कि मुझे अपने साथ रहने दे। 
Mark 5:19 परन्तु उसने उसे आज्ञा न दी, और उस से कहा, अपने घर जा कर अपने लोगों को बता, कि तुझ पर दया कर के प्रभु ने तेरे लिये कैसे बड़े काम किए हैं। 
Mark 5:20 वह जा कर दिकपुलिस में इस बात का प्रचार करने लगा, कि यीशु ने मेरे लिये कैसे बड़े काम किए; और सब अचम्भा करते थे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 26-27
  • मरकुस 14:27-53