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सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

सुना गया


   अपनी बेटी के साथ बच्चों के लिए लिखी गईं कुछ पुस्तकें पढ़ने के बाद मैंने उस से कहा कि अब मैं बड़ों के लिए लिखी गई एक पुस्तक पढ़ना चाहूँगी, और फिर बाद में हम बच्चों की और पुस्तकें पढ़ेंगे। यह कहकर मैंने अपनी पुस्तक उठाई और उसे खोलकर खामोशी से पढ़ना आरंभ कर दिया। कुछ देर तक मुझे पढ़ते देखने के पश्चात मेरी बेटी बोली, "मम्मी आप वास्तव में पढ़ नहीं रही हैं।" उसे लगा क्योंकि मैं सुनाई दे सकने वाले स्वर में नहीं पढ़ रही थी, जैसा कि उसके साथ करती हूँ, इसलिए मैं वास्तव में पढ़ नहीं रही हूँ।

   पढ़ने के समान ही प्रार्थना भी शान्त रहकर करी जा सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल की एक पात्र, हन्ना नामक एक महिला, जो बाँझ थी और सन्तान की बहुत लालसा रखती थी, परमेश्वर के मन्दिर में जा कर इस विषय पर मन ही मन प्रार्थना कर रही थी; उसके होंठ तो हिल रहे थे पर शब्द सुनाई नही दे रहे थे (1 शमूएल 1:13)। मन्दिर के प्रधान पुरोहित एली ने यह देखा और उसने गलत समझा कि हन्ना नशे में बुड़बुड़ा रही है। हन्ना ने एली को समझाया कि वह परमेश्वर के सम्मुख अपने मन की बात कह रही है। परमेश्वर ने हन्ना की प्रार्थना सुनी और उसे पुत्र दिया (1 शमूएल 1:20)।

   क्योंकि परमेश्वर मनों और हृदयों को जाँचता है (यर्मियाह 17:10), वह प्रत्येक प्रार्थना को भी देख और सुन सकता है, कभी मुँह से निकले बिना मन ही में कही जाने वाली भी। परमेश्वर के सर्वज्ञानी होने के गुण के कारण हम पूरे निश्चय के साथ प्रार्थना कर सकते हैं कि वह हमारी प्रार्थना सुन रहा है और उत्तर भी देगा (मत्ती 6:8, 32)। इसीलिए चाहे मन ही में, हम निरन्तर परमेश्वर की आराधना और स्तुति भी कर सकते हैं, उससे सहायता की याचना भी कर सकते हैं, और उससे मिलने वाली सभी आशीषों के लिए उसका धन्यवाद भी कर सकते हैं; क्योंकि चाहे किसी को हमारे मन की बात सुनाई दे अथवा नही, परमेश्वर को सब सुनता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


जब हम अपने मन परमेश्वर के आगे खोलते हैं वह उन्हें अपनी शान्ति से भर देता है।

प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। सो तुम उन की नाईं न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है। - मत्ती 6:7-8

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 1:9-20
1 Samuel 1:9 तब शीलो में खाने और पीने के बाद हन्ना उठी। और यहोवा के मन्दिर के चौखट के एक अलंग के पास एली याजक कुर्सी पर बैठा हुआ था। 
1 Samuel 1:10 और यह मन में व्याकुल हो कर यहोवा से प्रार्थना करने और बिलख बिलखकर रोने लगी। 
1 Samuel 1:11 और उसने यह मन्नत मानी, कि हे सेनाओं के यहोवा, यदि तू अपनी दासी के दु:ख पर सचमुच दृष्टि करे, और मेरी सुधि ले, और अपनी दासी को भूल न जाए, और अपनी दासी को पुत्र दे, तो मैं उसे उसके जीवन भर के लिये यहोवा को अर्पण करूंगी, और उसके सिर पर छुरा फिरने न पाएगा। 
1 Samuel 1:12 जब वह यहोवा के साम्हने ऐसी प्रार्थना कर रही थी, तब एली उसके मुंह की ओर ताक रहा था। 
1 Samuel 1:13 हन्ना मन ही मन कह रही थी; उसके होंठ तो हिलते थे परन्तु उसका शब्द न सुन पड़ता था; इसलिये एली ने समझा कि वह नशे में है। 
1 Samuel 1:14 तब एली ने उस से कहा, तू कब तक नशे में रहेगी? अपना नशा उतार। 
1 Samuel 1:15 हन्ना ने कहा, नहीं, हे मेरे प्रभु, मैं तो दु:खिया हूं; मैं ने न तो दाखमधु पिया है और न मदिरा, मैं ने अपने मन की बात खोल कर यहोवा से कही है। 
1 Samuel 1:16 अपनी दासी को ओछी स्त्री न जान जो कुछ मैं ने अब तक कहा है, वह बहुत ही शोकित होने और चिढ़ाई जाने के कारण कहा है। 
1 Samuel 1:17 एली ने कहा, कुशल से चली जा; इस्राएल का परमेश्वर तुझे मन चाहा वर दे।
1 Samuel 1:18 उसे ने कहा, तेरी दासी तेरी दृष्टि में अनुग्रह पाए। तब वह स्त्री चली गई और खाना खाया, और उसका मुंह फिर उदास न रहा। 
1 Samuel 1:19 बिहान को वे सवेरे उठ यहोवा को दण्डवत कर के रामा में अपने घर लौट गए। और एलकाना अपनी स्त्री हन्ना के पास गया, और यहोवा ने उसकी सुधि ली; 
1 Samuel 1:20 तब हन्ना गर्भवती हुई और समय पर उसके एक पुत्र हुआ, और उसका नाम शमूएल रखा, क्योंकि वह कहने लगी, मैं ने यहोवा से मांगकर इसे पाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22



रविवार, 31 जनवरी 2016

पछतावा


   क्या कभी आप ने खरीददारी के पछतावे का अनुभव किया है? मैंने किया है। कभी कभी कोई नई चीज़ खरीदने से ठीक पहले मेरे अन्दर कुछ नया पा लेने की उत्तेजना होती है, लेकिन उसे खरिद लेने के बाद पछतावे का भाव मुझे अभिभूत कर देता है; मैं सोचने लगता हूँ, क्या वास्तव में मुझे इस चीज़ की आवश्यकता थी? क्या मुझे इतना पैसा इस एक चीज़ पर लगा देना चाहिए था? लेकिन तब तक यह सब सोचने का समय निकल चुका होता है, अब आगे मुझे अपने निर्णय और उसके परिणामों को निभाना ही पड़ता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में उत्पत्ति के 3 अध्याय में हम ऐसे अपरिवर्तनीय पछतावे की पहली घटना का वर्णन पाते हैं। सारी बात का आरंभ हुआ जब सर्प का रूप लेकर आए धूर्त शैतान ने सब्ज़-बाग़ दिखाकर हमारी आदि माता हव्वा के मन में परमेश्वर के वचन के प्रति संदेह उत्पन्न किया (पद 1); फिर उसके मन में उत्पन्न इस असमंजस के समय में उसने परमेश्वर के चरित्र पर संदेह करवाया (पद 4-5) और हव्वा को विश्वास दिलाया उसकी बात मान लेने से हव्वा की आँखें खुल जाएंगी और वह परमेश्वर के तुल्य हो जाएगी (पद 7-8)।

   शैतान की बातों के बहकावे से अपने मन में जागृत लालसा में आकर हव्वा ने परमेश्वर द्वारा वर्जित वह फल स्वयं भी खाया तथा अपने पति आदम को भी खिलाया। शैतान के बहकावे में आकर किए गए कार्य से उस प्रथम आदमी और औरत की आँखें तो अवश्य खुल गईं, लेकिन वे परमेश्वर के तुल्य होने की बजाए परमेश्वर से दूर हो गए, उससे छिपने लगे। उन्हें वह तो नहीं मिला जिसकी उन्हें आशा थी परन्तु वह मिला जिसकी उन्हें ज़रा सी भनक भी नहीं थी: आदम और हव्वा द्वारा परमेश्वर की इस अनाज्ञाकारिता के कारण पाप को मानव जाति और संसार में प्रवेश करने का अवसर मिल गया, जिसके परिणाम तब उन्होंने भोगे और तब से हम सभी आज तक भोगते रहे हैं।

   पाप के दुषपरिणाम बहुत गंभीर हैं; पाप सदा ही अपने शिकार को परमेश्वर से दूर करता और दूर रखता भी है। लेकिन परमेश्वर ने अपने अनुग्रह में आदम और हव्वा को चमड़े के वस्त्र पहनाए (पद 21) और आने वाले समय में मनुष्यों को पाप की पकड़ से निकाल कर पुनः परमेश्वर के पास लौटा लाने का मार्ग प्रदान करने वाले मसीहा - प्रभु यीशु मसीह का वायदा भी दिया।

   जैसे परमेश्वर ने तब आदम और हव्वा को चमड़े के वस्त्र प्रदान किए, आज प्रभु यीशु हमें अपनी धार्मिकता के वस्त्र प्रदान करता है। जो कोई प्रभु यीशु से पापों की क्षमा मांगकर अपना जीवन उसे समर्पित करता है उसे फिर पाप के दुषपरिणामों के पछतावे में रहने की कोई आवश्यकता नहीं रहती। - पोह फ़ैंग चिया


मसीह यीशु का क्रूस परमेश्वर की वह धार्मिकता दिखाता है जिसे परमेश्वर ने समस्त मानव जाति के लिए दिया है। 

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? - रोमियों 5:8-10

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-21
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना? 
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं। 
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे। 
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे, 
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे। 
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। 
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये। 
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए। 
Genesis 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है? 
Genesis 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया। 
Genesis 3:11 उसने कहा, किस ने तुझे चिताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैं ने तुझे बर्जा था, क्या तू ने उसका फल खाया है? 
Genesis 3:12 आदम ने कहा जिस स्त्री को तू ने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैं ने खाया। 
Genesis 3:13 तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, तू ने यह क्या किया है? स्त्री ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया तब मैं ने खाया। 
Genesis 3:14 तब यहोवा परमेश्वर ने सर्प से कहा, तू ने जो यह किया है इसलिये तू सब घरेलू पशुओं, और सब बनैले पशुओं से अधिक शापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा: 
Genesis 3:15 और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा। 
Genesis 3:16 फिर स्त्री से उसने कहा, मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित हो कर बालक उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा। 
Genesis 3:17 और आदम से उसने कहा, तू ने जो अपनी पत्नी की बात सुनी, और जिस वृक्ष के फल के विषय मैं ने तुझे आज्ञा दी थी कि तू उसे न खाना उसको तू ने खाया है, इसलिये भूमि तेरे कारण शापित है: तू उसकी उपज जीवन भर दु:ख के साथ खाया करेगा: 
Genesis 3:18 और वह तेरे लिये कांटे और ऊंटकटारे उगाएगी, और तू खेत की उपज खाएगा ; 
Genesis 3:19 और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा। 
Genesis 3:20 और आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई। 
Genesis 3:21 और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के अंगरखे बना कर उन को पहिना दिए।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-26
  • मत्ती 20:17-34


शनिवार, 30 जनवरी 2016

अनमोल मृत्यु


   मुझे समाचार मिला कि मेरे एक मसीही विश्वासी मित्र का देहांत हो गया है; इस बात पर मेरे एक अन्य मसीही विश्वासी मित्र ने, जो उस स्वर्गवासी मित्र का भी मित्र था, मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के इस पद: "यहोवा के भक्तों की मृत्यु, उसकी दृष्टि में अनमोल है" (भजन 116:15) की याद दिलाई। हमारे उस दिवंगत मित्र का मसीह यीशु में सजीव तथा जोशीला विश्वास उसके पार्थिव जीवन की विशिष्टता थी, और हम आश्वस्त थे कि अब वह स्वर्ग में परमेश्वर पिता के साथ है। ना केवल हम मित्रगण, वरन उसका परिवार भी उसके अनन्तकाल के स्थान को लेकर पूर्ण्त्या आश्वस्त था, लेकिन फिर भी मेरा ध्यान केवल उन के शोक पर ही गया।

   लोगों के दुःख और शोक में उनके साथ सहानुभूति रखना, उन्हें सांत्वना देना सही और अच्छी बात है, लेकिन मेरे मित्र द्वारा स्मरण कराए गए बाइबल के उस पद ने मेरा ध्यान हमारे मित्र की मृत्यु के प्रति परमेश्वर के दृष्टिकोण की ओर खेंचा - वह परमेश्वर की दृष्टि में अनमोल थी। हम समझते हैं कि अनमोल का अर्थ है वह जिसकी कीमत का आंकलन ना हो सके, परन्तु इससे भी बढ़कर एक अर्थ यहाँ निहित है। परमेश्वर के किसी जन की मृत्यु में कुछ ऐसा है जो संसार में उसकी अनुपस्थिति के शोक से भी कहीं बढ़कर है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के भिन्न अनुवाद, जो शब्दों के तात्पर्यों का खुलासा भी देते हैं, इस बात को भिन्न शब्दों में समझाने का प्रयत्न करते हैं: एंप्लीफ़ाईड बाइबल अनमोल का तात्पर्य समझाने के लिए उसे ’महत्वपूर्ण और हल्के में ना ली जा सकने वाली बात’ कहती है; और लिविंग बाइबल कहती है कि "परमेश्वर के प्रीय उसके लिए अति अनमोल हैं और वह उन्हें यूँ ही नहीं मर जाने देता"; मृत्यु परमेश्वर की दृष्टि में कोई हलकी बात नहीं है। लेकिन हम मसीही विश्वासियों के लिए परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ का अचरज यह है कि पृथ्वी के जीवन का अन्त स्वर्ग के अनन्त आनन्द तथा लाभ का आरंभ भी होता है।

   आज हम इन बातों के महत्व की समझ की केवल एक झलक मात्र ही देखने-समझने पाते हैं, लेकिन एक दिन परमेश्वर की ज्योति की परिपूर्णता में इन्हें भली भांति समझने पाएंगे। तब तक के लिए उसके संतों की मृत्यु के अनमोल होने का बाइबल में दिया गया परमेश्वर का दृष्टिकोण हमारी सांत्वना और आशा को बनाए रखने के लिए काफी है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मृत्यु की खाई को पाटने के लिए मसीही विश्वास एक स्थिर सेतु प्रदान करता है।

धर्मी जन नाश होता है, और कोई इस बात की चिन्ता नहीं करता; भक्त मनुष्य उठा लिये जाते हैं, परन्तु कोई नहीं सोचता। धर्मी जन इसलिये उठा लिया गया कि आने वाली विपत्ति से बच जाए। - यशायाह 57:1

बाइबल पाठ: भजन 116
Psalms 116:1 मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है। 
Psalms 116:2 उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा। 
Psalms 116:3 मृत्यु की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा। 
Psalms 116:4 तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले! 
Psalms 116:5 यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है; और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है। 
Psalms 116:6 यहोवा भोलों की रक्षा करता है; जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया। 
Psalms 116:7 हे मेरे प्राण तू अपने विश्राम स्थान में लौट आ; क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है।
Psalms 116:8 तू ने तो मेरे प्राण को मृत्यु से, मेरी आंख को आंसू बहाने से, और मेरे पांव को ठोकर खाने से बचाया है। 
Psalms 116:9 मैं जीवित रहते हुए, अपने को यहोवा के साम्हने जान कर नित चलता रहूंगा। 
Psalms 116:10 मैं ने जो ऐसा कहा है, इसे विश्वास की कसौटी पर कस कर कहा है, कि मैं तो बहुत ही दु:खित हुआ; 
Psalms 116:11 मैं ने उतावली से कहा, कि सब मनुष्य झूठे हैं।
Psalms 116:12 यहोवा ने मेरे जितने उपकार किए हैं, उनका बदला मैं उसको क्या दूं? 
Psalms 116:13 मैं उद्धार का कटोरा उठा कर, यहोवा से प्रार्थना करूंगा, 
Psalms 116:14 मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें सभों की दृष्टि में प्रगट रूप में उसकी सारी प्रजा के साम्हने पूरी करूंगा। 
Psalms 116:15 यहोवा के भक्तों की मृत्यु, उसकी दृष्टि में अनमोल है। 
Psalms 116:16 हे यहोवा, सुन, मैं तो तेरा दास हूं; मैं तेरा दास, और तेरी दासी का पुत्र हूं। तू ने मेरे बन्धन खोल दिए हैं। 
Psalms 116:17 मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा, और यहोवा से प्रार्थना करूंगा। 
Psalms 116:18 मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें, प्रगट में उसकी सारी प्रजा के साम्हने 
Psalms 116:19 यहोवा के भवन के आंगनों में, हे यरूशलेम, तेरे भीतर पूरी करूंगा। याह की स्तुति करो!

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 23-24
  • मत्ती 20:1-16


शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

अपेक्षाएं


   एक बार मैंने लोगों के परस्पर संबंधों को सुधारने की सलाह-मश्वरा देने का कार्य करने वाले एक व्यक्ति से पूछा कि मुख्यतः वे कौन सी समस्याएं हैं जिनके कारण लोग उनके पास आते हैं, या जो संबंध बिगड़ने का अकसर कारण होती हैं। बिना झिझके उसका उत्तर था, "अनेकों समस्याओं की जड़ होती है टूटी अपेक्षाएं; यदि इस बात को समय रहते ना सुधारा गया तो यह क्रोध और कड़वाहट उत्पन्न करके संबंधों का नाश कर देती है।"

   हमारे सबसे अच्छे समयों में, हमारा यह आशा रखना कि हम एक अच्छे स्थान पर, अच्छे लोगों के बीच में रहेंगे जो हमें चाहेंगे और हमारा पक्ष लेंगे कोई असमान्य बात नहीं है। लेकिन ऐसी आशाओं को तोड़ देने का जीवन का एक तरीका है; महत्वपूर्ण बात यह कि जब ऐसा हो तब हमारी प्रतिक्रीया क्या होती है?

   पौलुस प्रेरित के जीवन से देखें; वह जेल में बन्द था और वहाँ के स्थानीय मसीही विश्वासी उसे पसन्द भी नहीं करते थे (फिलिप्पियों 1:15-16), लेकिन फिर भी पौलुस निराश नहीं हुआ। इन विपरीत परिस्थितियों के प्रति उसका दृष्टिकोण सामान्य लोगों से भिन्न था; उसका मानना था कि परमेश्वर ने उसे सेवकाई का एक नया अवसर दिया है। अपने बन्दी होने की अवस्था में भी पौलुस ने अपने पहरेदारों को मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनाया, जिससे उन रोमी सैनिकों में भी सुसमाचार प्रचार हो सका। यह देखकर, जेल के बाहर उससे द्वेश रखने वाले भी प्रतिस्पर्धा में सुसमाचार प्रचार में लग गए, लेकिन इससे भी पौलुस आनन्दित ही हुआ क्योंकि चाहे गलत उद्देश्य से ही सही किंतु मसीह यीशु में उपलब्ध उद्धार और पापों की क्षमा का प्रचार तो हुआ (पद 18)।

   पौलुस ने कभी यह आशा नहीं रखी कि वह किसी अच्छे स्थान में रहे या लोग उसे पसन्द करें; उसकी एकमात्र आशा थी उसके जीवन से मसीह यीशु की बड़ाई होती रहे (पद 20) और इस बात से पौलुस कभी पीछे नहीं हटा।

   हम चाहें जहाँ भी हों, हमारे आस-पास चाहे जैसे भी लोग हों, यदि हर परिस्थिति में हमारी अपेक्षा मसीह यीशु को अपने जीवन से प्रकट करने की है तो हम पाएंगे कि यह अपेक्षा ना केवल पूरी होगी वरन हमारी आशा से भी कहीं बढ़कर पूरी होगी और मसीह यीशु हमारे जीवनों से महिमान्वित होगा। - जो स्टोवैल


अपनी एकमात्र अपेक्षा अपने जीवन से मसीह यीशु को महिमान्वित करने की रखें, आप चाहे जहाँ और चाहे जिस के साथ हों।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। - 1 कुरिन्थियों 6:19-20

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-21
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Philippians 1:19 क्योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा। 
Philippians 1:20 मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं। 
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19


गुरुवार, 28 जनवरी 2016

बाधाएं तथा असुविधाएं


   बाधाएं कोई नई बात नहीं हैं; हमारा शायद ही कोई दिन पूर्णतयः पूर्वनियोजित रीति से निकल पाता होगा। जीवन असुविधाओं से भरा रहता है; हमारी योजनाएं हमारे नियंत्रण से बाहर बातों के द्वारा प्रभावित तथा कुंठित होती रहती हैं। ऐसा करने वाली बाधाओं और असुविधाओं की सूचि लंबी और बदलती रहने वाली है - बीमारी, संघर्ष और विरोध, यातायात में अटकना या फंसना, उपकरणों का ठीक काम ना करना, व्यवहार में अशिष्टता, सुस्ती और टालना, अधीरता, अयोग्यता या अक्षमता आदि जैसे अनेकों कारण हमारी योजनाओं पर पानी फेरते रहते हैं, उन्हें बदलते या बिगाड़ते रहते हैं।

   लेकिन इन असुविधाओं और बाधाओं का एक दूसरा पक्ष भी है जिसे अकसर हम नहीं देख पाते हैं। हमारा विचार होता है कि हमें निराश और हताश करने, हमारे जीवन को कठिन बनाने और हमारी योजनाओं को व्यर्थ करने के इलावा इन बाधाओं और असुविधाओं का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है। किंतु ये बाधाएं और असुविधाएं हमें किसी अनजाने और अनदेखे खतरे से बचा कर रखने का परमेश्वर का तरीका, या फिर हमारे द्वारा दूसरों के प्रति परमेश्वर के समान अनुग्रह और क्षमा को प्रदर्शित करने अवसर भी हो सकती हैं। ये परिस्थितियाँ परमेश्वर द्वारा हमारी अपनी आशा और योजना से कुछ बेहतर के आरंभ करने का, या फिर विपरीत परिस्थितियों के प्रति हमारे प्रत्युत्तर और हमारी भावनाओं को हमारे समक्ष लाने का माध्यम भी हो सकती हैं जिससे हम अपना आंकलन कर सकें और समय रहते अपने आपको सुधार सकें। इन बाधाओं और असुविधाओं का कारण चाहे जो भी हो, चाहे हम परमेश्वर की बातों और उद्देश्यों ना भी समझने पाएं, तो भी हम मसीही विश्वासी इस बात पर भरोसा रख सकते हैं, उसे लेकर निश्चिंत रह सकते हैं कि सभी बातों के द्वारा परमेश्वर हमारा भला कर रहा है (रोमियों 8:28), हमें हमारा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में ढालता जा रहा है और हमारे द्वारा अपने स्वर्गीय राज्य का प्रचार और प्रसार कर रहा है।

   यह कहना कि संपूर्ण इतिहास में परमेश्वर के अनुयायी बाधाओं तथा असुविधाओं में रहे हैं कोई अतिश्योक्ति नहीं है; लेकिन परमेश्वर के उन अनुयायियों के जीवन इस बात के भी गवाह हैं कि इन सब बातों के द्वारा परमेश्वर के बड़े उद्देश्यों की पूर्ति और उसकी महिमा उनके जीवन से हुई है। यह जानते और समझते हुए, हमें बाधाओं तथा असुविधाओं के लिए भी परमेश्वर के धन्यवादी होना चाहिए, इस विश्वास के साथ कि वह हमें समय के सदुपयोग का अवसर दे रहा है (इफिसियों 5:16, 20)। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


हमारे साथ जो होता है वह इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना वह जो परमेश्वर हम में और हमारे द्वारा कर रहा है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:15-21
Ephesians 5:15 इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो। 
Ephesians 5:16 और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं। 
Ephesians 5:17 इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्छा क्या है? 
Ephesians 5:18 और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ। 
Ephesians 5:19 और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो। 
Ephesians 5:20 और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। 
Ephesians 5:21 और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35


बुधवार, 27 जनवरी 2016

क्रूस


   अपने ऑस्ट्रेलिया भ्रमण के समय मुझे अवसर मिला कि मैं पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध से तारामण्डल में दिखने वाले "दक्षिणी क्रूस" नाम से जाने वाले तारा-समूह को देख सकूँ। पृथ्वी के दक्षिणी भाग से दिखने वाला यह सितारों का सबसे विशिष्ट समूह है। 15वीं शताब्दी से ही समुद्री परिवाहन के लिए नाविकों ने इस तारा-समूह पर भरोसा करना आरंभ कर दिया था। यद्यपि यह आकार में छोटा है परन्तु लगभग सारे वर्ष दिखता रहता है। उस अन्धेरी रात को यह तारा-समूह इतना स्पष्ट दिख रहा था कि मैं भी उसे तारागणों में सरलता से पहचान सका। वह वास्तव मे एक अद्भुत दृश्य था।

   परमेश्वर का वचन बाइबल एक अन्य और भी अद्भुत क्रूस के बारे में बताती है - मसीह यीशु का क्रूस। जब हम सितारों की ओर देखते हैं तो हम सृष्टिकर्ता की विलक्षण कारिगरी को देखते हैं; किंतु जब हम मसीह के क्रूस को देखते हैं तो हमें अपनी सृष्टि के लिए अपने प्राण बलिदान कर देने वाला सृष्टिकर्ता नज़र आता है। इसीलिए परमेश्वर का वचन हमें कहता है कि हम "विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों 12:2)।

   कलवरी के क्रूस का अचरज यही है कि जब हम पापी ही थे तो प्रभु यीशु हमारे पापों के लिए मरा (रोमियों 5:8)। अब जो प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं उनका मेलमिलाप परमेश्वर के साथ हो जाता है और जीवन के पथ पर परमेश्वर उनका मार्गदर्शक बनकर आजीवन उनके साथ रहता है (2 कुरिन्थियों 1:8-10)।

   मसीह यीशु का क्रूस पर दिया गया बलिदान सृष्टि सबसे महान अचरज का कार्य है। - बिल क्राउडर


मसीह का क्रूस ही अनन्त में सकुशल प्रवेश का एकमात्र माध्यम है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:1-4
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। 
Hebrews 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20


मंगलवार, 26 जनवरी 2016

ज्योति


   प्रति वर्ष दिसंबर के महीने में हमारे घर के निकट के 13 घरों एक मोहल्ले के सभी परिवार मिलकर 300,000 बत्तियों से बनी क्रिसमस ज्योति सजाते हैं। बत्तियों की यह सज्जा इतनी भव्य होती है कि लोग दूर दूर से उसे देखने आते हैं और घंटों पंक्ति में खड़े रहकर उन रंगीन जलती-बुझती-चमकती बत्तियों को देखने तथा उनके साथ बजने वाले संगीत का आनन्द लेते हैं। बत्तियों और संगीत के इस समागम को सुचारू रूप से चलाते रहने के लिए उन लोगों को 64 कंप्यूटरों की सहायता लेनी पड़ती है।

   जब मैं अवकाश काल में लगाई और जलाई जाने वाली इन ज्योतियों के बारे में सोचती हूँ तो मेरा ध्यान उस सच्ची ज्योति की ओर भी जाता है जिस के कारण क्रिसमस संभव हुआ - वह एकल तेजोमय ज्योति जो अपने प्रेम, खराई और न्याय से सारे जगत को रौशन करती है। यह एकमात्र ज्योति है प्रभु यीशु मसीह, और सारे संसार की हर आवश्यकता के लिए वही काफी है (यशायाह 9:2, 6-7)। हमारे जीवनों की इस ज्योति ने हमें, जो उसके अनुयायी हैं, यह कहा है कि उसकी इस ज्योति को सारे संसार में प्रदर्शित करें जिससे लोग उस ज्योति को देखकर परमेश्वर कि महिमा करने पाएं (मत्ती 5:16)।

   ज़रा विचार कीजिए, क्रिसमस की बत्तियों को लगाने और सुचारू रूप से चलाने के लिए मेहनत करने वाले उन 13 परिवारों के समान यदि हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर कि सच्ची ज्योति को लोगों के जीवनों तथा संसार को ज्योतिर्मय करने के लिए एक जुट और प्रयासरत हो जाएं तो कैसा रहे? फिर पाप के अन्धकार में रहने और जीने वाले लोगों को जीवन की ज्योति को ढूंढ़ने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी, वह ज्योति उनके चारों ओर उन्हें चमकती मिलेगी।

   जब मसीही विश्वासी एक साथ मिलकर परमेश्वर के प्रेम की ज्योति को अपने अपने जीवनों से प्रदर्शित करेंगे, तो उद्धार तथा पाप-क्षमा के सुसमाचार की यह ज्योति और अधिक चमकेगी, और अधिक लोगों को प्रभु यीशु के पास आकर्षित करेगी और संसार को सच्ची ज्योति से ज्योतिर्मय कर देगी। - जूली ऐकैरमैन लिंक


संसार के पाप के अन्धकार में हमारे मसीही जीवन की गवाही आशा की ज्योति है।

जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी; और जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर ज्योति चमकी। - मत्ती 4:16

बाइबल पाठ: मत्ती 5:13-16
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए।
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता।
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है।
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 5-7
  • 2यूहन्ना