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बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

सुनें


   एक पुरानी कहावत है, "परमेश्वर ने आपको केवल एक मूँह किंतु दो कान किसी उद्देश्य से ही दिए हैं"; सुन पाना जीवन के लिए आवश्यक योग्यताओं में से एक है। परस्पर संबंधों के विषय में परामर्श देने वाले कहते हैं कि हमें एक दूसरे की बात सुननी चाहिए। आत्मिक अगुवे कहते हैं कि हमें परमेश्वर की बात सुननी चाहिए। किंतु शायद ही कोई होगा जो यह कहता है कि हमें अपनी कही बात भी सुननी चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हमारे अन्तरात्मा की आवाज़ सदा ही सही होती है; और ना ही मैं यह कह रहा हूँ कि हमें परमेश्वर अथवा दूसरों की सुनने की बजाए अपनी ही सुनते रहना चाहिए। लेकिन जो मैं कहना चाह रही हूँ वह यह है कि हमें अपने आप को इसलिए सुनना चाहिए जिससे हम जान सकें कि दूसरे हमें कैसा सुनते हैं।

   जब मूसा इस्त्राएलियों को मिस्त्र की गुलामी से निकाल कर ले चला, तब उन इस्त्राएलियों को किसी के द्वारा अपनी बात सुनने का परामर्श दिया जाना चाहिए था। यद्यपि परमेश्वर उन्हें अद्भुत आश्चर्यकर्मों के द्वारा मिस्त्र की गुलामी से निकाल कर लाया था, परन्तु निकल आने के कुछ ही दिनों में ही वे कुड़कुड़ाने लगे (निर्गमन 16:2)। चाहे भोजन की उनकी आवश्यकता उचित थी, परन्तु उस आवश्यकता को व्यक्त करने का उनका तरीका गलत था (पद 3)।

   जब भी हम भय, क्रोध, अज्ञानता अथवा घमण्ड में होकर बोलते हैं तो लोगों को हमारे शब्दों से अधिक हमारी भावनाएं सुनाई देती हैं, चाहे हमारी कही बात सही ही क्यों ना हो; लेकिन सुनने वाले यह नहीं जान पाते कि हमारे भाव प्रेम और चिंता के कारण हैं अथवा अनादर और तिरिस्कार के कारण, इसलिए हमें और हमारी बात के गलत समझे जाने का जोखिम बना रहता है। किंतु यदि कुछ भी बोलने से पहले हम अपनी सुन लें, अर्थात अपनी बात और भाव का आँकलन कर लें, तो हम अपने असावधानी से कहे शब्दों से किसी की हानि करने या परमेश्वर का दिल दुखाने से बचे रहेंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


उतावलेपन और बिना सोचे-समझे कहे गए शब्द भलाई कम, हानि अधिक करते हैं।

बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों। - सभोपदेशक 5:2

बाइबल पाठ: निर्गमन 16:1-8
Exodus 16:1 फिर एलीम से कूच कर के इस्राएलियों की सारी मण्डली, मिस्र देश से निकलने के महीने के दूसरे महीने के पंद्रहवे दिन को, सीन नाम जंगल में, जो एलीम और सीनै पर्वत के बीच में है, आ पहुंची। 
Exodus 16:2 जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरुद्ध बकझक करने लगी। 
Exodus 16:3 और इस्राएली उन से कहने लगे, कि जब हम मिस्र देश में मांस की हांडियों के पास बैठकर मनमाना भोजन खाते थे, तब यदि हम यहोवा के हाथ से मार डाले भी जाते तो उत्तम वही था; पर तुम हम को इस जंगल में इसलिये निकाल ले आए हो कि इस सारे समाज को भूखों मार डालो। 
Exodus 16:4 तब यहोवा ने मूसा से कहा, देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊंगा; और ये लोग प्रतिदिन बाहर जा कर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे, इस से मैं उनकी परीक्षा करूंगा, कि ये मेरी व्यवस्था पर चलेंगे कि नहीं। 
Exodus 16:5 और ऐसा होगा कि छठवें दिन वह भोजन और दिनों से दूना होगा, इसलिये जो कुछ वे उस दिन बटोरें उसे तैयार कर रखें। 
Exodus 16:6 तब मूसा और हारून ने सारे इस्राएलियों से कहा, सांझ को तुम जान लोगे कि जो तुम को मिस्र देश से निकाल ले आया है वह यहोवा है। 
Exodus 16:7 और भोर को तुम्हें यहोवा का तेज देख पडेगा, क्योंकि तुम जो यहोवा पर बुड़बुड़ाते हो उसे वह सुनता है। और हम क्या हैं, कि तुम हम पर बुड़बुड़ाते हो? 
Exodus 16:8 फिर मूसा ने कहा, यह तब होगा जब यहोवा सांझ को तुम्हें खाने के लिये मांस और भोर को रोटी मनमाने देगा; क्योंकि तुम जो उस पर बुड़बुड़ाते हो उसे वह सुनता है। और हम क्या हैं? तुम्हारा बुड़बुड़ाना हम पर नहीं यहोवा ही पर होता है।

एक साल में बाइबल: लैव्यवस्था 21-22; मत्ती 28

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

आदर


   चर्च के पास्टरों को आलोचना का निशाना बनाना सहज है। प्रति सप्ताह वे हमारे सामने खड़े होते हैं, हमें परमेश्वर के वचन की बातें सिखाते और समझाते हैं, हमें चुनौती देते हैं कि हम प्रभु यीशु मसीह के समान जीवन व्यतीत करें। लेकिन अनेक बार हम उनके जीवनों में आलोचना करने योग्य बातों को ढ़ूँढ़ते रहते हैं। उन सारी अच्छाईयों को नज़रन्दाज़ करके जो पास्टर में पाई जाती हैं, केवल उसकी कुछ बातों पर ध्यान केंद्रित करना, फिर उन बातों के लिए उसकी आलोचना करना और उनके बारे में अपनी व्यक्तिगत राय को लोगों में फैलाना बहुत सरल होता है।

   हमें सदा यह स्मरण रखना चाहिए कि हमारे पास्टर भी हम मनुष्यों के समान ही मनुष्य ही हैं और हमारे समान ही वे भी सिद्ध नहीं हैं। मैं यह नहीं कहता कि हमें आँखें मूँद कर उनकी कही हर बात को मान लेना चाहिए, ग्रहण कर लेना चाहिए; ना ही मैं यह कह रहा हूँ कि हमें उनकी गलतियों या कमज़ोरियों को नज़रन्दाज़ करना चाहिए; परन्तु जो मैं कह रहा हूं वह यह है कि यदि हमें उनमें कुछ कमी या त्रुटि नज़र आती है तो उसे सही रीति से, विनम्रता सहित उन तक पहुँचाना चाहिए। पास्टरों के प्रति, जो परमेश्वर का वचन सिखाने और मण्डली के अगुवे होने की सेवकाई करते हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी पत्री के कुछ भाग हमें सही दृष्टिकोण रखने में सहायक हो सकते हैं: "अपने अगुवों की मानो; और उनके आधीन रहो, क्योंकि वे उन की नाईं तुम्हारे प्राणों के लिये जागते रहते, जिन्हें लेखा देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनन्द से करें, न कि ठंडी सांस ले ले कर, क्योंकि इस दशा में तुम्हें कुछ लाभ नहीं" (इब्रानियों 13:17)।

   इन वचनों के बारे में विचार कीजिए। परमेश्वर के सामने हमारे पास्टर हमें सही मार्गदर्शन देने के लिए जवाबदेह हैं; हमारा प्रयास होना चाहिए कि उनकी यह ज़िम्मेदारी आनन्दपूर्ण हो ना कि कष्टपूर्ण। इब्रानियों का यह खण्ड हमें यह भी सिखाता है कि पास्टर को तकलीफ देने से कोई लाभ नहीं होने वाला (पद 17)।

   जब हम उनका आदर करते हैं जिन्हें परमेश्वर ने हमारा अगुआ करके ठहराया है तो हम परमेश्वर का आदर करते हैं और अपने तथा मसीही मण्डली के लिए बातों को बेहतर तथा सुखदायी करते हैं। - डेव ब्रैनन


पास्टरों को, जो परमेश्वर का वचन प्रचार करते हैं, लोगों से अच्छे व्यवहार की आवश्यकता रहती है।

हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। इसलिए जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। - रोमियों 13:1-2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 13:17-19
Hebrews 13:17 अपने अगुवों की मानो; और उनके आधीन रहो, क्योंकि वे उन की नाईं तुम्हारे प्राणों के लिये जागते रहते, जिन्हें लेखा देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनन्द से करें, न कि ठंडी सांस ले ले कर, क्योंकि इस दशा में तुम्हें कुछ लाभ नहीं। 
Hebrews 13:18 हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं। 
Hebrews 13:19 और इस के करने के लिये मैं तुम्हें और भी समझाता हूं, कि मैं शीघ्र तुम्हारे पास फिर आ सकूं।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 19-20
  • मत्ती 27:51-66


सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

महान सृष्टिकर्ता


   कुछ वर्ष पहले स्की करते हुए मैं गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो गया, और मेरी एक टांग के अन्दर की माँसपेशियाँ फट गईं; मेरे चिकित्सक ने मुझे बताया कि टांग के अन्दर खून का काफी रिसाव भी हुआ। इन सब चोटों से ठीक होकर निकलने की प्रक्रिया पीड़ादायक, धीमी और लंबी थी; किंतु पूर्णतया ठीक हो जाने की प्रतीक्षा का मेरा यह समय अपने महान सृष्टिकर्ता परमेश्वर के महान कार्य पर अचरज करते हुए व्यतीत हुआ (कुलुस्सियों 1:16)।

   मैंने अपने जीवन में कारों को क्षति पहुँचाई है; मेरे हाथों से गिरकर कुछ बर्तन और तश्तरियाँ टूटे हैं, लेकिन ये सभी मानव-कृतियाँ एक बार बिगड़ीं या टूटीं तो बिगड़ी या टूटी ही रह गईं; इनमें से कोई भी अपने-आप से ठीक कभी नहीं हुई। लेकिन मेरी टांग के साथ ऐसा नहीं था। जैसे ही अन्दर से माँसपेशियाँ फटीं, मेरे शरीर में प्रभु यीशु ने जो आन्तरिक उपचार और सुधार प्रणाली डाली है, उसने अपना कार्य करना आरंभ कर दिया और अन्दर ही अन्दर मेरी टांग का सुधार और उपचार होने लगा। कुछ समय के बाद मैं खड़ा होने और फिर चलने-फिरने, अन्ततः फिर से भागने लगा; मेरे इस प्रकार ठीक होने से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा कही गई बात, "मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं" (भजन 139:14) एक नई रीति से समझ में आई।

   कभी-कभी किसी बीमारी या चोट के द्वारा हमें ज्ञात होता और समझ में आता है कि हम कैसी अद्भुत रचना अपने शरीरों में लिए हुए हैं। इसलिए अगली बार जब भी आपको अपने जीवन में किसी अनेपक्षित और अनचाही अड़चन के कारण - चाहे उसका कारण और स्वरूप कुछ भी हो, रुकना पड़े या आराम करना पड़े, तो अपना ध्यान अपने महान सृष्टिकर्ता प्रभु यीशु पर केंद्रित करें, उसके प्रेम पर मन लगाएं, और उसे अवसर दें कि वह आपके मन को कृतज्ञतापूर्ण आराधना के लिए उभार सके, आपकी उस पीड़ा और परेशानी में भी। - जो स्टोवैल


कृतज्ञ मन से ही महान सृष्टिकर्ता की सच्ची आराधना हो सकती है।

क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। - कुलुस्सियों 1:16 

बाइबल पाठ: भजन 139:1-16
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है। 
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं। 
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 17-18
  • मत्ती 27:27-50


रविवार, 14 फ़रवरी 2016

सच्चा प्रेम


   मेरे भाई के विवाह समारोह के पूर्वाभ्यास के समय मेरे पति ने होने वाले पति-पत्नि का एक चित्र खींचा जिसमें वे एक दुसरे की ओर मुँह किए हुए पास्टर के सामने खड़े थे। बाद में जब हम ने उस चित्र को देखा तो पाया कि कैमरे के फ्लैश से पृष्ठभूमि में टंगा धातु से बना एक क्रूस चमक उठा था और उस दंपत्ति के ऊपर खड़े एक चमकते हुए क्रूस के समान दिख रहा था।

   इस चित्र ने मुझे स्मरण कराया कि विवाह प्रभु यीशु मसीह के अपनी विश्वासियों की मण्डली के प्रति प्रेम का सूचक है, उस प्रेम का जिसे प्रभु यीशु ने क्रूस पर दर्शाया था। जब परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि पति को अपने पत्नियों से प्रेम करना है (इफिसियों 5:25), तो परमेश्वर इस प्रेम को समझाने के लिए प्रभु यीशु के द्वारा अपनी मण्डली से किए गए विश्वासयोग्य, स्वार्थविहीन प्रेम का उदाहरण देता है। क्योंकि इस प्रेम के अन्तर्गत प्रभु यीशु ने अपने प्राण बलिदान कर दिए, हमें भी एक दूसरे से प्रेम करना है (1 यूहन्ना 4:10-11)। प्रभु हमारे लिए मरा ताकि हमारे पाप हमें परमेश्वर से अनन्त दूरी में रख सकें। प्रभु ने वह कर दिखाया जो उसने अपने शिष्यों से कहा था: "इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे" (यूहन्ना 15:13)।

   हम में से अनेक लोग त्यागे जाने, तुच्छ समझ कर तिरिस्कृत होने और धोखा दिए जाने की पीड़ा को जानते हैं, उसे सहा है। लेकिन इस सब के बावजूद, मसीह यीशु में होकर हम एक बलिदानपूर्ण, अनुकम्पा से भरे और चिरस्थाई सच्चे प्रेम का अनुभव कर सकते हैं।

   आज यह मत भूलें कि परमेश्वर आप से प्रेम करता है; और उसने आपके लिए क्रूस पर अपने प्राण बलिदान करके इसे प्रमाणित किया है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के क्रूस से बढ़कर स्पष्टता से परमेश्वर के प्रेम को और कुछ नहीं दिखा सकता।

प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:10-11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 15-16
  • मत्ती 27:1-26


शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

चरित्र या ख्याति?


   प्रसिद्ध बास्केटबॉल प्रशिक्षक जौन वुडन (1910-2010) का मानना था कि चरित्र ख्याति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। वे अकसर अपने खिलाड़ियों से कहा करते थे कि, "आपकी ख्याति वह है जैसा दूसरे लोग आपको देखते हैं; परन्तु आपका चरित्र वह है जो आप वास्तव में हैं। केवल आप ही हैं जो अपने चरित्र को जानते हैं। आप दूसरों को धोखा दे सकते हैं, लेकिन अपने आप को धोखा नहीं दे सकते।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रकाशितवाक्य नामक पुस्तक में हम पुनरुथित प्रभु यीशु द्वारा सात मसीही मण्डलियों को उनके बारे में कही गई बातें पाते हैं। सरदीस की मण्डली के लिए प्रभु यीशु ने कहा, "और सरदीस की कलीसिया के दूत को लिख, कि, जिस के पास परमेश्वर की सात आत्माएं और सात तारे हैं, यह कहता है, कि मैं तेरे कामों को जानता हूं, कि तू जीवता तो कहलाता है, पर, है मरा हुआ" (प्रकाशितवाक्य 3:1)। प्रभु उनकी हकीकत को जानता था, और निःसन्देह उस मण्डली के लोग स्वयं भी अपनी इस हकीकत को जानते थे। प्रभु यीशु ने उन्हें सचेत किया कि वे जागरूक हों और अपने आत्मिक जीवन को सुदृढ़ करें जो समाप्त होने को था (पद 2)। इसके लिए प्रभु ने उन से अनुरोध किया कि वे उस सत्य को स्मरण करें जो उन्हें दिया गया था, उसका पालन करें और पुनः सच्चाई की ओर फिरकर नई दिशा में अग्रसर हों (पद 3)।

   जब प्रभु हमें दिखाता है कि हमारे जीवनों में क्या गलत है, तो साथ ही वह उस गलती को सुधारने का मार्ग भी बताता है। जब भी हम अपने पापों से फिरकर पश्चाताप में उसके पास आते हैं, वह हमें क्षमा करता है और हमें सामर्थ देता है कि हम एक नई शुरुआत कर सकें।

   प्रभु यीशु को जानने और मानने से होने वाला परिवर्तन, एक आडंबरी एवं झूठी आत्मिक ख्याति का एक सच्चे और खरे चरित्र में परिवर्तित होना, कितना उन्मुक्त कर देने वाला होता है, यह अनुभव से ही जाना जा सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


हमारे चरित्र का सही आँकलन वे कार्य हैं जो हम तब करते हैं जब हमें कोई नहीं देख रहा होता है।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 3:1-6
Revelation 3:1 और सरदीस की कलीसिया के दूत को लिख, कि, जिस के पास परमेश्वर की सात आत्माएं और सात तारे हैं, यह कहता है, कि मैं तेरे कामों को जानता हूं, कि तू जीवता तो कहलाता है, पर, है मरा हुआ। 
Revelation 3:2 जागृत रह, और उन वस्‍तुओं को जो बाकी रह गई हैं, और जो मिटने को थी, उन्हें दृढ़ कर; क्योंकि मैं ने तेरे किसी काम को अपने परमेश्वर के निकट पूरा नहीं पाया। 
Revelation 3:3 सो चेत कर, कि तू ने किस रीति से शिक्षा प्राप्त की और सुनी थी, और उस में बना रह, और मन फिरा: और यदि तू जागृत न रहेगा, तो मैं चोर की नाईं आ जाऊंगा और तू कदापि न जान सकेगा, कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पडूंगा। 
Revelation 3:4 पर हां, सरदीस में तेरे यहां कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हों ने अपने अपने वस्‍त्र अशुद्ध नहीं किए, वे श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए मेरे साथ घूमेंगे क्योंकि वे इस योग्य हैं। 
Revelation 3:5 जो जय पाए, उसे इसी प्रकार श्वेत वस्‍त्र पहिनाया जाएगा, और मैं उसका नाम जीवन की पुस्‍तक में से किसी रीति से न काटूंगा, पर उसका नाम अपने पिता और उसके स्‍वर्गदूतों के साम्हने मान लूंगा। 
Revelation 3:6 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14
  • मत्ती 26:51-75


शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

कलाकृति


   मूर्तिकारों के लिए एक शब्द प्रयुक्त होता है "वृहतदृष्टि", जिसका तात्पर्य है कि वह कलाकार एक बेडौल से पत्थर में उस पत्थर का वह अन्तिम और पूर्ण सुन्दर तथा आकर्षक रूप देख सकता है जो उसके अपना कार्य कर लेने से निकलकर आएगा।

   गुटज़ोन बोर्गल्म (1867-1941) एक ऐसे मूर्तिकार हैं जिन्होंने अनेक जानी-पहिचानी कलाकृतियों को बनाया है। उनकी कलाकृतियों में सबसे विख्यात और जानी-पहिचानी है अमेरिका के दक्षिणी डकोटा प्रांत में स्थित रश्मोर पहाड़ पर बना माउन्ट रश्मोर राष्ट्रीय स्मारक, जहाँ उन्होंने पहाड़ को तराशकर चार प्रसिद्ध अमेरीकी राष्ट्रपतियों के विशालाकार चेहरे बनाए। जब गटज़ोन बोर्गल्म के घर की देखभाल और संचाल करने वाली कर्मचारी महिला ने पहली बार उनकी इस विशाल और अद्भुत कलाकृति को देखा तो वह भौंचकी रह गई और तेज़ चलती सांस के साथ उसने बोर्गल्म से पूछा, "मिस्टर बोर्गल्म, आपको कैसे पता चला कि इस चट्टान के अन्दर राष्ट्रपति लिंकन हैं?"

   वृहतदृष्टि रखना हमारे सर्वज्ञानी परमेश्वर के लिए भी उपयुक्त शब्द है क्योंकि हम जो कुछ हैं, और जो कुछ हो सकते हैं, हमारे बारे में परमेश्वर सब कुछ जानता है। वह जानता है कि जब वह हम में अपना कार्य पूरा कर चुकेगा तो हमारा स्वरूप कैसा होगा; जब सब कुछ हो चुकने के बाद अन्ततः हम उसके सामने खड़े होंगे तो कैसे होंगे - हमारे प्रभु यीशु की समानता और स्वरूप में, पवित्र और निषकलंक (2 कुरिन्थियों 3:18)। जिस परमेश्वर ने हम में यह कार्य करना आरंभ किया है, वह उसे प्रभु यीशु के आगमन के दिन तक पूरा भी करेगा: "और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा" (फिलिप्पियों 1:6)।

  परमेश्वर का कार्य कभी रुकता नहीं है; उसमें हमें सिद्ध बनाने की ऐसी लालसा है कि उसके द्वारा हमारे सिद्ध किए जाने में कुछ भी या कोई भी अवरोध नहीं बन सकता। जो उसने हम में आरंभ किया है वह उसे पूरा भी करेगा। इस कार्य में हमारा योगदान बस इतना ही है कि हम अपने आप को उसके हाथों में तराशे जाने और हमारी व्यर्थ बातों के छांटे जाने के लिए समर्पित कर दें और उसे अपना कार्य कर लेने दें। फिर जो कलाकृति निकलकर आएगी, हम स्वयं उसे देखकर भौंचके रह जाएंगे। - डेविड रोपर


परमेश्वर हम में कार्य करता है जिससे हमें वह बना सके जो वह हमारे लिए चाहता है।

...तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18 

बाइबल पाठ: रोमियों 8:28-30
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। 
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। 
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 13
  • मत्ती 26:26-50


गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

भय और शंका


   हमारे विवाह के बारह वर्ष बीत चुके थे और हम सन्तान पाने के सुख में बनने और बिगड़ने वाली आशाओं-निराशाओं में बारंबार पड़ने से हताश हो चुके थे। मेरे एक मित्र ने मुझे इस संबंध में "परमेश्वर के विचार" समझाने का प्रयास किया; क्योंकि वह जानता था कि मेरी माँ का क्रोध अति तीव्र होता था जिसके नियंत्रण के प्रयासों में वह काफी संघर्षों से होकर निकलीं थीं, इसलिए उस मित्र ने मुझ से कहा कि हमें सन्तान का सुख शायद इसलिए नहीं मिल पा रहा है क्योंकि परमेश्वर जानता है कि मैं एक अच्छा पिता नहीं हो सकूँगा।

   फिर 1988 के क्रिसमस के समय में हमें ज्ञात हुआ कि मेरी पत्नि हमारे पहले बच्चे से गर्भवती है। लेकिन अब मेरे मित्र द्वारा कही गई बात का भय मुझे सताता था। अगस्त महीने में मेरी बच्ची कैथ्रीन का जन्म हुआ; उसके जन्म के तुरंत पश्चात डॉक्टर और नर्स मेरी पत्नि की देखभाल कर रहे थे, उसे संभाल रहे थे और कैथ्रीन पास ही उसके शरीर को गर्मी प्रदान करने वाली ट्रे में लेटी रो रही थी; मैंने अपना हाथ अपनी बच्ची की ओर उसे सांत्वना देने के लिए बढ़ाया। कैथ्रीन ने अपनी छोटी छोटी ऊँगलियों से मेरी ऊँगली थाम ली, और उस एक क्षण में पवित्र आत्मा ने मेरी सारी शंका दूर कर दी और मैंने जान लिया कि इस नन्हीं सी जान से मैं बहुत प्रेम करूँगा, और वह प्रेम उस पर भली-भांति प्रगट भी करूँगा। जिन बातों को लेकर मैं अभी तक शंका में था, परमेश्वर के द्वारा एक पल में ही उन सभी शंकाओं का निवारण हो गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में उल्लेखित सारपात की विध्वा भी शंकाओं से भरी थी। उसका पुत्र एक घातक बीमारी से जाता रहा था, और वह शोक तथा वियोग से वशीभूत होकर चिल्ला उठी: "...हे परमेश्वर के जन! मेरा तुझ से क्या काम? क्या तू इसलिये मेरे यहां आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए?" (1 राजा 17:18); किंतु परमेश्वर की योजना कुछ और ही थी। एक आश्चर्यकर्म के द्वारा परमेश्वर ने उसकी सारी शंकाओं का निवारण कर दिया।

   हम मसीही विश्वासी एक ऐसे परमेश्वर के लोग हैं जो हमारे सभी संघर्षों से कहीं सामर्थी और महान है; जो हमें क्षमा करने, हमसे प्रेम करने और हमारे अन्दर के टूटेपन को चंगा करने के लिए सदा तत्पर और लालायित रहता है। परमेश्वर ना केवल हमारे प्रत्येक भय और शंका को जानता है, वरन वह उन सभी भय और शंकाओं का निवारण भी जानता है। उसे सदा समर्पित रहें, सदा उसके आज्ञाकारी रहें और वह हमारे लिए हमारी समझ से परे मार्ग निकालता रहेगा। - रैंडी किल्गोर


परमेश्वर का प्रेम हमें जीवन के मिथ्या भय और शंकाओं की धारा के विरुद्ध सुरक्षित लिए चलता है।

और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। - 2 कुरिन्थियों 12:9 

बाइबल पाठ: 1 राजा 17:17-24
1 Kings 17:17 इन बातों के बाद उस स्त्री का बेटा जो घर की स्वामिनी थी, रोगी हुआ, और उसका रोग यहां तक बढ़ा कि उसका सांस लेना बन्द हो गया। 
1 Kings 17:18 तब वह एलिय्याह से कहने लगी, हे परमेश्वर के जन! मेरा तुझ से क्या काम? क्या तू इसलिये मेरे यहां आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए? 
1 Kings 17:19 उसने उस से कहा अपना बेटा मुझे दे; तब वह उसे उसकी गोद से ले कर उस अटारी पर ले गया जहां वह स्वयं रहता था, और अपनी खाट पर लिटा दिया। 
1 Kings 17:20 तब उसने यहोवा को पुकार कर कहा, हे मेरे परमेश्वर यहोवा! क्या तू इस विधवा का बेटा मार डाल कर जिसके यहां मैं टिका हूं, इस पर भी विपत्ति ले आया है? 
1 Kings 17:21 तब वह बालक पर तीन बार पसर गया और यहोवा को पुकार कर कहा, हे मेरे परमेश्वर यहोवा! इस बालक का प्राण इस में फिर डाल दे। 
1 Kings 17:22 एलिय्याह की यह बात यहोवा ने सुन ली, और बालक का प्राण उस में फिर आ गया और वह जी उठा। 
1 Kings 17:23 तब एलिय्याह बालक को अटारी पर से नीचे घर में ले गया, और एलिय्याह ने यह कहकर उसकी माता के हाथ में सौंप दिया, कि देख तेरा बेटा जीवित है। 
1 Kings 17:24 स्त्री ने एलिय्याह से कहा, अब मुझे निश्चय हो गया है कि तू परमेश्वर का जन है, और यहोवा का जो वचन तेरे मुंह से निकलता है, वह सच होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-12
  • मत्ती 26:1-25