ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

सोमवार, 18 जुलाई 2016

जड़


   भारत के चेरापूँजी इलाके में रहने वाले लोगों ने अपने इलाके में बहने वाले अनेकों नदी-नालों पर से होकर चलने का एक अनोखा तरीका विकसित कर रखा है। वे लोग वहाँ उगने वाले रबर के वृक्षों की जड़ों को एक पार से दूसरे पार पहुँचाते हैं, उनको सेतु के समान प्रयोग करते हैं। इन जड़ों के सेतुओं को बनकर तैयार होने में 10 से 15 वर्ष तो लगते हैं, लेकिन जब वे तैयार हो चुकते हैं तो बहुत मज़बूत और सैकड़ों साल तक स्थिर बने रहने वाले हो जाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी उस मनुष्य के लिए जो परमेश्वर पर विश्वास के साथ रहता है लिखा गया है कि वह, "वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा" (यिर्मयाह 17:8)। क्योंकि उसकी जड़ें गहरी और अच्छे से पोषित रहती हैं, इसलिए वह "वृक्ष" अत्याधिक तापमान भी सह लेता है और अकाल के समय में भी फल देता रहता है।

   दृढ़ता से गहरी जड़ पकड़े हुए वृक्ष के समान ही वे लोग भी हैं जो परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं; उन्हें परेशानी की परिस्थितियों में भी स्थिरता और पोषण मिलता रहेगा। इसकी तुलना में वे लोग हैं जो अपने आप पर या अन्य मनुष्यों पर भरोसा रखते हैं, वे अस्थिरता के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। बाइबल इन लोगों को मरुभूमि में उगने वाली झाड़ीयों के समान बताती है, जो अकसर अपूर्ण पोषित और अकेली सी होती हैं (पद 6)। जो लोग परमेश्वर को त्याग कर जीते हैं उनके आत्मिक जीवन भी ऐसे ही कुपोषित तथा तन्हा होते हैं।

   आज आप की जड़ें कहाँ हैं? क्या आपने मसीह यीशु में अपने जीवन की जड़ें जमाई हैं: "और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्‍त धन्यवाद करते रहो" (कुलुस्सियों 2:7)? यदि हाँ, तो क्या आप भी ऐसे सेतु बन रहे हैं जो दूसरों को प्रभु परमेश्वर तक पहुँचाता है? यदि आप मसीह यीशु को व्यक्तिगत रीति से जानते हैं तो आप ऐसे सेतु होने का कार्य कर सकते हैं और लोगों को बता सकते हैं कि धन्य हैं वे जो प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं (यिर्मयाह 17:7)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


जो व्यक्ति परमेश्वर में जड़ें जमाए हुए है उसे कठिन परीक्षाएं भी डिगा नहीं सकतीं।

क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। - भजन 40:4

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:5-10
Jeremiah 17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है। 
Jeremiah 17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा। 
Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। 
Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। 
Jeremiah 17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? 
Jeremiah 17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17


रविवार, 17 जुलाई 2016

स्वरूप


   कार में बैठकर मेरे नए धूप के चश्मे को कुछ देर पहनकर रखने के पश्चात मेरी बेटी ने उन्हें उतारकर मुझे वापस करते हुए कहा, "ये कोई धूप से बचने के चश्मे थोड़े ही हैं, ये तो केवल फैशन के चश्मे  हैं।" फिर मुझे छेड़ने के लिए बोली, "मुझे लगता है कि आपने ये केवल इसलिए खरीदे हैं क्योंकि इन्हें पहनकार आप अच्छे दिखते हैं।" हाँ, मैं मानती हूँ कि मेरी बेटी मुझे पहचानती है; और यह भी कि उस चश्मे को खरीदते समय मैंने उनके सूर्य की किरणों को रोक पाने की क्षमता के बारे में ज़रा भी नहीं विचारा था। बस क्योंकि वे मेरे चेहरे पर अच्छे लग रहे थे, इसीलिए मैंने उन्हें खरीद लिया था।

   प्रायः हम सभी चाहते हैं कि हम अच्छे दिखें। हमें देखकर लोगों को लगे कि हम पूर्ण हैं - हमें ना तो किसी परेशानी और ना ही किसी भय या दुःख को झेलना पड़ रहा है। किंतु हम बाहर से चाहे जो भी दिखाएं, अन्दर की स्थिति तो कुछ और ही होती है; और वास्तविकता छुपती नहीं है, कभी ना कभी बाहर आ ही जाती है।

   इसी प्रकार आत्मिक जीवन में भी सिद्धता का दिखावा करना ना तो हमारे अपने लिए और ना ही हमारे साथ के लोगों के लिए भला होता है। लेकिन मसीह यीशु के विश्वासियों की मंडली में हमें यह आदर है कि हम अपने जीवन और बातें अपने साथ के अन्य विश्वासियों के साथ बाँट सकते हैं, जो हमारे तथा अन्य विश्वासियों दोनों ही के लिए लाभदायक रहता है। जब हम अपने आप को कुछ खुला और पारदर्शी बनाते हैं, तो हमें कुछ और लोग भी मिलते हैं जो हमारे समान ही परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, और हम एक दूसरे को सहायता तथा सांत्वना देने वाले हो जाते हैं। मंडली में हम ना केवल परमेश्वर के साथ वरन एक-दूसरे के साथ भी संगति और सहभागिता रखना सीखते हैं, एक दूसरे के साथ आनन्दित होना, एक दूसरे के सहायक होना सीखते हैं। हम अपनी सीमाओं और कमज़ोरियों के प्रति संवेदनशील होकर परमेश्वर की अगुवाई तथा सामर्थ से, अपनी उन अयोग्यताओं की दशा में भी एक दूसरे के लिए तथा परमेश्वर के लिए उपयोगी बनने लगते हैं।

   होने दें कि परमेश्वर आप पर चढ़े दिखावे के हर आवरण को हटा दे, और आप अपने सच्चे स्वरूप में, "प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें" (इब्रानियों 10:24)। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीही विश्वासी तब और भी सामर्थी होते हैं जब वे अकेले खड़े नहीं होते।

निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें; न कि अपने आप को प्रसन्न करें। हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये सुधारने के निमित प्रसन्न करे। - रोमियों 15:1-2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:19-25
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। 
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है। 
Hebrews 10:24 और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। 
Hebrews 10:25 और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38


शनिवार, 16 जुलाई 2016

संतुष्टि


   बोथियुस छठवीं शताब्दी में इटली के राज दरबार में सेवा करने वाला एक निपुण राजनितिज्ञ था। दुर्भाग्यवश वह राजा की नज़रों से गिर गया, उस पर राजद्रोह का दोष लगा कर उसे कैदखाने में मृत्युदण्ड भोगने के लिए डाल दिया गया। मृत्युदण्ड दिए जाने के समय की प्रतीक्षा करते हुए उसने लिखने की सामग्री माँगी जिस से वह अपने विचार और संस्मरण लिख सके। बाद में उसके ये संस्मरण दिलासा और संतुष्टि के लिए आत्मिक आदर्श लेख बन गए। बोथियुस ने कैद में बैठे हुए, अपने भविष्य को लेकर लिखा: "यदि उसे वैसा ना समझे जाए तो कुछ भी दयनीय नहीं है; और इसके विपरीत हर दशा आनन्दमय है यदि उसे भोगने वाला उसमें संतुष्ट है"; मसीह यीशु पर उसका दृढ़ विश्वास उसके इस दृष्टिकोण का जनक था। उसने भली भांति समझ लिया था कि बदलते हुए हालात के प्रति क्या दृष्टिकोण रखना है यह हमारा व्यक्तिगत चुनाव है।

   बोथियुस के वे विचार प्रेरित पौलुस के ऐसे ही विचारों के अनुसार थे। पौलुस ने भी यही दिखाया कि परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण है परिस्थितियों के प्रति हमारा दृष्टिकोण। जब पौलुस भी अपनी मसीही सेवकाई के लिए कैद में डाला गया और अपने मृत्युदण्ड की प्रतीक्षा कर रहा था, तो कैद से लिखी फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों के नाम अपनी पत्री में वह कहता है, "यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं" (फिलिप्पियों 4:11)। पौलुस तथा बोथियुस, दोनों ही ने अपनी संतुष्टि का आधार अपनी परिस्थितियों को नहीं वरन अपने प्रभु परमेश्वर को बनाया था; उस प्रभु को जो कभी नहीं बदलता, जिसका प्रेम अपने अनुयायियों के प्रति कभी कम नहीं होता और जो हर बात और हर परिस्थिति में होकर उनका भला ही करता है।

   आज क्या आप किसी कठिन परिस्थिति को लेकर परेशान और कुंठित अनुभव कर रहे हैं? परमेश्वर आपको संतुष्टि दे सकता है, क्योंकि उसी में होकर चिरस्थाई और वास्तविक संतुष्टि तथा आनन्द मिलता है, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा है: "तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है" (भजन 16:11)। - डेनिस फिशर


जब किसी परिस्थिति में आपके पास केवल परमेश्वर ही है, 
तो उस परिस्थिति में जो सर्वोत्तम आपको चाहिए वह आपके पास है।

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। - 2 कुरिन्थियों 9:8 

बाइबल पाठ: भजन 16
Psalms 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं। 
Psalms 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं। 
Psalms 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं। 
Psalms 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा। 
Psalms 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है। 
Psalms 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।
Psalms 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है। 
Psalms 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।
Psalms 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा। 
Psalms 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।
Psalms 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17
  • प्रेरितों 20:1-16


शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

सच्ची निष्ठा


   हवाई यात्रा करवाने वाली कंपनियों ने 1980 दशक के आरंभिक वर्षों में एक योजना प्रारंभ करी; जो यात्री बारंबार उसी कंपनी के साथ यात्रा करते, यात्रा की दूरी के अनुपात में उनके नाम पर कुछ आर्थिक लाभ जमा हो जाते। जितना अधिक यात्री एक ही कंपनी से निष्ठा निभाते, उसी के साथ यात्रा करते, उतना ही अधिक उन्हें उनकी निष्ठा का प्रतिफल भी मिलता, जिसे फिर वे अपनी अगली यात्रा के लिए, कुछ सामान खरीदने के लिए या किसी सेवा को प्राप्त करने के लिए प्रयोग कर सकते थे। ऐसा होने के साथ अनेक लोग अपनी यात्रा की योजना ना केवल यात्रा के भाड़े के अनुसार वरन यात्रा से अर्जित हो सकने वाले उस लाभ के अनुसार भी करने लग गए। एक अनुमान के अनुसार, संसार भर में इस योजना के अन्तर्गत तब से लेकर अब तक 14 खरब से भी अधिक यात्रा-मील और उसके अनुपात में लाभ अर्जित तथा इस्तेमाल किए जा चुके हैं।

   प्रथम ईसवीं में प्रेरित पौलुस ने अपनी मसीही सेवकाई में बरंबार और अनेक स्थानों पर जल और थल से होकर यात्राएं करीं, लेकिन उसकी यात्रा का उद्देश्य अपने लिए लाभ अर्जित करना नहीं था; वरन उसका उद्देश्य था कि अधिक से अधिक लोगों तक प्रभु यीशु मसीह में संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन के सुसमाचार को पहुँचाए। जब कुरिन्थुस के कुछ मसीही विश्वासियों ने मसीही मंडली में उसके अधिकार पर प्रश्न उठाए तो पौलुस ने उत्तर में उन्हें समझाने के लिए पत्र लिखे और अपने दुसरे पत्र में वह इस बात का भी उल्लेख करता है कि मसीह यीशु के सुसमाचार की सेवकाई पूरी करने के लिए उसने कितनी बड़ी कीमत चुकाई है, उसने अपनी यात्राओं में कितने दुःख उठाए हैं: "तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा" (2 कुरिन्थियों 11:25)। परमेश्वर ने पौलुस को यह अनुग्रह और सामर्थ दी कि वह बिना किसी व्यक्तिगत लाभ की इच्छा रखे सतत परिश्रम के साथ लोगों को प्रभु यीशु के बारे में बताता रहे।

   आज मसीह यीशु की सेवकाई के लिए हमें चाहे प्रशंसा मिले या सताव, पौलुस के समान हमारा ध्येय भी प्रभु यीशु के प्रेम और बलिदान के प्रति कृतज्ञ रहकर, सच्ची निष्ठा के साथ अपनी सेवकाई को पूरा करते रहना होना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु के प्रति हमारी निष्ठा का आधार हमारे प्रति उसका प्रेम है।

यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता हे, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ। - यिर्मयाह 9:23-24

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-31
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जाखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा। 
2 Corinthians 11:31 प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 13-15
  • प्रेरितों 19:21-41


गुरुवार, 14 जुलाई 2016

सामर्थी


   अपने समय में मैं अमेरिका के अनेकों पर्वत पर चढ़ चुका हूँ, और मेरा विश्वास कीजिए, पर्वत-शिखरों पर कुछ नहीं उगता। वे शिखर केवल चट्टान ही होते हैं जिनपर या तो बर्फ या काई आदि होते हैं; अन्न तो वहाँ होता ही नहीं है, इसलिए अन्न की बहुतायत का तो प्रश्न ही नहीं उठता।

   लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 72 के लेखक दाऊद ने अपने पुत्र सुलेमान के राज्य में परमेश्वर की सामर्थ के बारे में कहा,  "देश में पहाड़ों की चोटियों पर बहुत सा अन्न होगा..." (भजन 72:16)। जबकि पर्वत-शिखर पर अन्न होना इतना अन्होना है, तो फिर दाऊद परमेश्वर की सामर्थ से संबंधित क्या कह रहा था? सुलेमान का तात्पर्य था कि परमेश्वर की सामर्थ अति निराशाजनक परिस्थिति में भी अनपेक्षित परिणाम उत्पन्न कर सकती है।

   संभव है कि आप आज अपने आप को बहुत गौण समझते हों, परमेश्वर के राज्य के लिए कुछ भी फल ला पाने के लिए अयोग्य समझते हों; हिम्मत रखिए, परमेश्वर आप में होकर भी अपने राज्य के लिए भरपूरी की फसल उत्पन्न कर सकता है - यदि आप उसे ऐसा करने दें तो। मसीही विश्वास का यह एक बड़ा विरोधाभास है - परमेश्वर तुच्छ और अयोग्य समझे जाने वाले लोगों के माध्यम से ही अति महान कार्य करता है; उसके राज्य में उपयोगी तथा कारगर होने के लिए वे ही सबसे उपयुक्त और सबसे योग्य हैं जो सांसारिक परिभाषा से तुच्छ और अयोग्य हैं (1 कुरिन्थियों 1:27-29)।

    हम अपनी नज़रों में बहुत बड़े या अभिमानी होने के कारण परमेश्वर के लिए अनुपयोगी तो हो सकते हैं, किंतु बहुत छोटे होने के कारण परमेश्वर के लिए कभी अनुपयोगी नहीं हो सकते। जैसा प्रेरित पौलुस ने अपने अनुभव में होकर लिखा है, हम निर्बलता में ही बलवंत होते हैं: "इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं" (2 कुरिन्थियों 12:10); और परमेश्वर के द्वारा हमें उपलब्ध करवाई गई सामर्थ से हम वह सब कुछ कर सकते जिसके लिए उसने हमें बुलाया और ठहराया है "जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं" (फिलिप्पियों 4:13)। - डेविड रोपर


परमेश्वर की सामर्थ अनुभव करने के लिए हमें अपनी सभी योग्यता तथा सामर्थ से खाली होना पड़ेगा।

परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए। - 1 कुरिन्थियों 1:27-29

बाइबल पाठ: भजन 72:12-20
Psalms 72:12 क्योंकि वह दोहाई देने वाले दरिद्र को, और दु:खी और असहाय मनुष्य का उद्धार करेगा। 
Psalms 72:13 वह कंगाल और दरिद्र पर तरस खाएगा, और दरिद्रों के प्राणों को बचाएगा। 
Psalms 72:14 वह उनके प्राणों को अन्धेर और उपद्रव से छुड़ा लेगा; और उनका लोहू उसकी दृष्टि में अनमोल ठहरेगा।
Psalms 72:15 वह तो जीवित रहेगा और शेबा के सोने में से उसको दिया जाएगा। लोग उसके लिये नित्य प्रार्थना करेंगे; और दिन भर उसको धन्य कहते रहेंगे। 
Psalms 72:16 देश में पहाड़ों की चोटियों पर बहुत सा अन्न होगा; जिसकी बालें लबानोन के देवदारों की नाईं झूमेंगी; और नगर के लोग घास की नाईं लहलहाएंगे। 
Psalms 72:17 उसका नाम सदा सर्वदा बना रहेगा; जब तक सूर्य बना रहेगा, तब तक उसका नाम नित्य नया होता रहेगा, और लोग अपने को उसके कारण धन्य गिनेंगे, सारी जातियां उसको भाग्यवान कहेंगी।
Psalms 72:18 धन्य है, यहोवा परमेश्वर जो इस्राएल का परमेश्वर है; आश्चर्य कर्म केवल वही करता है। 
Psalms 72:19 उसका महिमायुक्त नाम सर्वदा धन्य रहेगा; और सारी पृथ्वी उसकी महिमा से परिपूर्ण होगी। आमीन फिर आमीन।
Psalms 72:20 यिशै के पुत्र दाऊद की प्रार्थना समाप्त हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12;
  • प्रेरितों 19:1-20



बुधवार, 13 जुलाई 2016

अनुग्रह


   मैंने अपनी कार को उपनाम दिया है - "अनुग्रहरहित"। कार के साथ इतवार की प्रातः मेरे लिए सबसे भारी होती है। मुझे चर्च के लिए जो कुछ चाहिए होता है, वह सब कार में रखकर, चर्च जाने के लिए कार की अपनी सीट पर बैठती हूँ, कार के दरवाज़े बन्द करती हूँ, मेरे पति कार को गैराज से बाहर निकालना आरंभ ही करते हैं कि मेरे सीट-बेल्ट ना बांधने की चेतावनी-सूचक बजना आरंभ हो जाता है! मैं कहती हूँ, "बस एक मिनिट और; मैं अपने स्थान पर व्यवस्थित हो रही हूँ, और फिर मैं बेल्ट बाँध लूँगी" लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता, वह चेतावनी सूचक बजता ही रहता है जब तक मैं बेल्ट बाँध नहीं लेती - मेरी परिस्थितियों पर उसे कोई दया नहीं आती, मुझे उससे कभी कोई माफी नहीं मिलती।

   छोटी सी यह दिक्कत मुझे स्मरण दिलाती है कि जीवन कितना कठिन हो जाए यदि अनुग्रह और दया हमारे जीवनों ना हो। यदि ऐसा हो जाए तो हम में से प्रत्येक को, हर छोटी से छोटी गलती के लिए भी तुरंत ही हिसाब देने के लिए खड़े होना पड़ेगा; हमें पश्चाताप करने या अपनी गलती को सुधारने या अपने व्यवहार को बदलने का कोई अवसर ही नहीं मिलेगा। कोई क्षमा नहीं होगी, कोई दया नहीं की जाएगी, बेहतर हो जाने या सुधरने की कोई आशा नहीं रहेगी।

   आज के इस संसार में जीना कभी-कभी ऐसा ही लगता है मानो हम अनुग्रहरहितता के दलदल में डाल दिए गए हों। जब हमारे छोटे-छोटे अविवेकपूर्ण कार्य या बातें लोगों के समक्ष बढ़ा-चढ़ा कर बड़ी गलतियाँ बना कर प्रस्तुत किए जाते हैं, जब लोग दूसरों की कमियों या गलतियों को नज़रन्दाज़ करना नहीं चाहते, वरन उन्हें स्वार्थसिद्धी की सीढ़ीयाँ बनाकर स्वयं आगे बढ़ जाना चाहते हैं, तो जीवन ऐसे बोझ तले दबा प्रतीत होता है जिस बोझ को हमें उठाने ही नहीं था। लेकिन हम मसीही विश्वासियों के पास एक विलक्षण आशा है - परमेश्वर पिता ने हमारे, तथा संसार के सभी लोगों के पाप के सभी बोझों को उठा लेने के लिए प्रभु यीशु को संसार में भेजा है (मत्ती 11:28)। जो कोई भी साधारण विश्वास के साथ प्रभु यीशु से अपने पापों की माफी माँग लेता है, अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, प्रभु परमेश्वर अपने अनुग्रह में होकर उसके पाप के सभी बोझ उठा लेता है, उसे उन बोझों और उनके दुषपरिणामों से मुक्त कर देता है।

   अब जिनपर प्रभु परमेश्वर की ओर से यह अनुग्रह हुआ है, जिन्होंने प्रभु के इस अनुग्रह की भेंट को स्वीकार किया है, उअनकी यह ज़िम्मेदारी है कि वे इस अनुग्रह के बारे में औरों को बताएँ भी और अपने जीवनों से दूसरों को इसे दिखाएँ भी "जो मनुष्य बुद्धि से चलता है वह विलम्ब से क्रोध करता है, और अपराध को भुलाना उसको सोहता है" (नीतिवचन 19:11)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम अपने प्रति परमेश्वर के अनुग्रह को सधन्यवाद स्वीकारते हैं, 
तब हम इस अनुग्रह को आनन्द के साथ उन्हें भी बाँटते हैं जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:1-11
1 Peter 4:1 सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। 
1 Peter 4:2 ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो। 
1 Peter 4:3 क्योंकि अन्यजातियों की इच्छा के अनुसार काम करने, और लुचपन की बुरी अभिलाषाओं, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, पियक्कड़पन, और घृणित मूर्तिपूजा में जहां तक हम ने पहिले समय गंवाया, वही बहुत हुआ। 
1 Peter 4:4 इस से वे अचम्भा करते हैं, कि तुम ऐसे भारी लुचपन में उन का साथ नहीं देते, और इसलिये वे बुरा भला कहते हैं। 
1 Peter 4:5 पर वे उसको जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करने को तैयार है, लेखा देंगे। 
1 Peter 4:6 क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसी लिये सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उन का न्याय हो, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें। 
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है। 
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। 
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए। 
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 7-9
  • प्रेरितों 18


मंगलवार, 12 जुलाई 2016

नाम


   किसी व्यक्ति के उपनाम अकसर उस व्यक्ति के किसी गुण या शारीरिक विशेषता पर आधारित होते हैं, और उम्र भर उस व्यक्ति के साथ लगे रहते हैं। बचपन में मेरे होंठ चेहरे के अनुपात में काफी मोटे थे और मुझे चिड़ाने के लिए बच्चे मुझे "बड़े होंठोंवाला" कहा करते थे; मैं प्रसन्न हूँ कि बचपन में मेरे प्राथमिक स्कूल में मेरे सहपाठियों द्वारा दिया गया मेरा यह उपनाम मेरे साथ लगा हुआ नहीं है।

   अपने उस उपनाम के विपरीत, मैं परमेश्वर के विभिन्न गुणों और चरित्र को दर्शाने वाले, परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए, उसके अनेक नामों को बहुत पसन्द करता हूँ। परमेश्वर अद्भुत रूप से बहुआयामी तथा अनेकों गुणों को दिखाने वाला परमेश्वर है, और बाइबल में दिए गए ये नाम यही दिखाते हैं। उन नामों में से कुछ हैं:
  • एलोहिम, परमेश्वर जो ईश्वरों का ईशवर है
  • यहोवा यिरे, परमेश्वर जो प्रावधान करता है
  • एल-शद्दाई, सर्वशक्तिमान परमेश्वर
  • यहोवा राफा, चंगा करने वाला परमेश्वर
  • यहोवा शालोम, शान्ति का परमेश्वर
  • यहोवा शामा, साथ-साथ रहने वाला परमेश्वर
  • यहोवा याहवे, वाचाओं को निभाने वाला हमारा प्रेमी परमेश्वर


   इसलिए इसमें कोई विसमय की बात नहीं है कि बाइबल की नीतिवचन पुस्तक का लेखक हमें स्मरण करवाता है कि "यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है" (नीतिवचन 18:10)। जब जीवन की परिस्थितियाँ कठिन हों, आप भयभीत या असुरक्षित महसूस करें, तो परमेश्वर के इन तथा अन्य नामों पर मनन करें और उससे प्रार्थना करें। आश्वस्त रहें, प्रभु परमेश्वर अपने नाम के प्रति वफादार रहेगा। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के नाम, जो उसके चरित्र को दर्शाते हैं, 
हमें जब भी उसकी आवश्यकता होती है, सांत्वना प्रदान करते हैं।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: नीतिवचन 18:1-10
Proverbs 18:1 जो औरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, 
Proverbs 18:2 और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है। मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता, वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है। 
Proverbs 18:3 जहां दुष्ट आता, वहां अपमान भी आता है; और निन्दित काम के साथ नामधराई होती है। 
Proverbs 18:4 मनुष्य के मुंह के वचन गहिरा जल, वा उमण्डने वाली नदी वा बुद्धि के सोते हैं। 
Proverbs 18:5 दुष्ट का पक्ष करना, और धर्मी का हक मारना, अच्छा नहीं है। 
Proverbs 18:6 बात बढ़ाने से मूर्ख मुकद्दमा खड़ा करता है, और अपने को मार खाने के योग्य दिखाता है। 
Proverbs 18:7 मूर्ख का विनाश उस की बातों से होता है, और उसके वचन उस के प्राण के लिये फन्दे होते हैं। 
Proverbs 18:8 कानाफूसी करने वाले के वचन स्वादिष्ट भोजन की नाईं लगते हैं; वे पेट में पच जाते हैं। 
Proverbs 18:9 जो काम में आलस करता है, वह बिगाड़ने वाले का भाई ठहरता है। 
Proverbs 18:10 यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6
  • प्रेरितों 17:16-34