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बुधवार, 1 नवंबर 2017

जल


   जैसे ही डेव म्यूलर ने नीचे की ओर झुक कर नल का हत्था घुमाया, नल के मूँह से स्वच्छ पानी निकलकर नीचे रखी नीली बाल्टी में गिरने लगा; और उसके आस-पास खड़े लोग उत्साहित होकर हर्ष से तालियाँ बजाने लगे। उन लोगों ने जीवन में पहली बार अपने इलाके में स्वच्छ जल बहते हुए देखा था। अफ्रीका के केन्या देश के इन लोगों में उस स्वच्छ जल के कारण बड़ा परिवर्तन आने वाला था। डेव और उनकी पत्नि जॉय ने उन लोगों की आवश्यकता - स्वच्छ जल को उन लोगों तक पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत की थी। परन्तु उनकी यह मेहनत केवल नल से बहने वाले जल तक ही सीमित नहीं थी। डेव और जॉय न केवल पृथ्वी से निकलने वाले जल के बारे में वरन साथ ही अनन्त जीवन के जल के सोते, प्रभु यीशु मसीह के बारे में भी उन लोगों को बताते हैं।

   लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व यीशु नाम का एक मनुष्य सामारिया के एक कुएँ के निकट अपनी शारीरिक आवश्यकताओं के लिए उस कुएँ से जल लेने आई हुई एक स्त्री से बात कर रहा था। प्रभु यीशु ने उस स्त्री को बताया कि उसे कुएँ के उस जल के अतिरिक्त आत्मिक जीवन और स्वास्थ्य के लिए जीवन-जल की भी अत्याधिक आवश्यकता है।

   उस समय से इतिहास आगे बढ़ गया है, और मानवता अधिक आधुनिक हो गई है, परन्तु दो बातें अभी भी वैसी ही बनी हुई हैं जैसी तब थीं - हमें अपने शारीरिक जीवनों के लिए अभी भी स्वच्छ जल की उतनी ही आवश्यकता है, और आत्मिक जीवन के लिए प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन जल की अनिवार्यता है। क्योंकि हम आत्मिक रीति से अपने पापों के कारण मरे हुए हैं, इसलिए यदि इस शरीर में रहते हुए हम आत्मिक जीवन प्राप्त नहीं करेंगे तो शरीर छोड़ने के उपरांत पापों में मृतक दशा में ही अनन्त काल के लिए नर्क में चले जाएंगे।

   जल हमारे अस्तित्व - शारीरिक एवं आत्मिक दोनो ही के लिए, अनिवार्य है। क्या आपने जगत के उद्धारकर्ता तथा जीवन जल के एकमात्र स्त्रोत प्रभु यीशु से वह जीवन जल प्राप्त कर लिया है? - डेव ब्रैनन


हमारी आत्मिक प्यास को बुझाने के लिए 
केवल प्रभु यीशु के पास ही जीवन जल उपलब्ध है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:1-15
John 4:1 फिर जब प्रभु को मालूम हुआ, कि फरीसियों ने सुना है, कि यीशु यूहन्ना से अधिक चेले बनाता, और उन्हें बपतिस्मा देता है। 
John 4:2 (यद्यपि यीशु आप नहीं वरन उसके चेले बपतिस्मा देते थे)। 
John 4:3 तब यहूदिया को छोड़कर फिर गलील को चला गया। 
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था। 
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2


मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

नया


   हमारे घर की खिड़कियों के पल्ले ठीक करने का समय हो गया था। इसलिए मैंने उन पल्लों को खुरचा, रेगमाल से रगड़ा, और पट्टी मिश्रण लगा कर गढ्ढों और टूटे हुए किनारों को समतल तथा सपाट किया, और फिर उन्हें रंगने के लिए तैयार किया, उन पर अच्छा महंगा रंग भी लगाया। मेरी काफी मेहनत के बाद अब वे पल्ले पहले से बहुत अच्छे तो दिखने लगे, परन्त नए फिर भी नहीं लगते हैं। उनके नए लगने के लिए एकमात्र उपाय है उनके स्थान पर नई लकड़ी के पल्ले लगाना।

   घर में मौसम से खराब हुए पल्लों की मरम्मत करके उन्हें "बहुत अच्छा" बनाना तो ठीक है परन्तु यही बात पाप से खराब हुए हमारे हृदय तथा जीवन पर लागू नहीं होती है; उस हृदय की मरम्मत भर देना काफी नहीं है। परमेश्वर के दृष्टिकोण से सब बातों का नया हो जाना अनिवार्य है (2 कुरिन्थियों 5:17)।

   प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा परमेश्वर से सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार की यही अनुपम सुन्दरता है - प्रभु का विश्वासी जन, परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा "नई सृष्टि" हो जाता है। प्रभु यीशु हमारे पापों को अपने ऊपर ले कर क्रूस पर बलिदान हो गया, और पाप तथा मृत्यु पर अपनी सामर्थ्य के प्रमाण स्वरूप तीसरे दिन फिर मृतकों में से जीवित हो उठा। प्रभु द्वारा सभी मनुष्यों के सब पापों के लिए दिए गए इस बलिदान से सारे संसार के सभी मनुष्यों के सभी पापों के दण्ड को भुगत कर एक ही बार में चुका दिया गया, इसलिए अब किसी को अपने पापों का बोझ लेकर चलने और उनके निवारण के लिए अपने किसी प्रयास को करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब जो मसीह यीशु में स्वेच्छा से विश्वास लाता है, अपना जीवन उसे समर्पित करता है, उसका पुराना जीवन नए से बदल जाता है (प्रेरितों 5:20), और परमेश्वर की दृष्टि में वह एक "नई सृष्टि" बन जाता है (2 कुरिन्थियों 5:17)। प्रभु यीशु द्वारा कलवरी के क्रुस पर जो कार्य हमारे लिए पूरा कर दिया गया, उसमें होकर परमेश्वर पिता मसीह यीशु में विश्वास लाने वाले सभी विश्वासियों को पूर्णतः नया और निर्दोष देखता है।

   पाप ने संसार और संसार के लोगों क्वे जीवनों में भारी नुकसान किया है। अपने प्रयासों से हम उस नुकसान को पलट नहीं सकते हैं, हम कितनी भी ’मरम्मत’ करने के प्रयास क्यों न कर लें, वह मरम्मत हमें अन्दर से नया और निर्दोष नहीं बना सकती है। परन्तु जब हम अपने पापों को मान लेते हैं, उनके लिए पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु से क्षमा माँग लेते हैं, तो वह हमारे हृदयों को, हमारे जीवनों को परिवर्तित कर के हमें एक पूर्णतः नया जीवन प्रदान करता है। - डेव ब्रैनन


केवल प्रभु यीशु मसीह ही हमें एक नया जीवन प्रदान कर सकता है।

सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। - रोमियों 6:4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:14-21
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1


सोमवार, 30 अक्टूबर 2017

आँधी-तूफान


   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस रचित सुसमाचार में हम एक प्रचण्ड तूफान के बारे में पढ़ते हैं। शिष्य प्रभु यीशु के साथ थे, और वे नाव द्वारा गलील के सागर के पार जा रहे थे, कि वे एक बड़ी आँधी में फंस गए। उन शिष्यों में से कुछ अनुभवी मछुआरे भी थे, परन्तु वे भी आँधी के वेग को देख कर डर गए (मरकुस 4:37-38)। उन शिष्यों के मनों में विचार उठने लगे, क्या परमेश्वर को हमारी कोई चिंता नहीं है? क्या वे प्रभु यीशु द्वारा चुने और नियुक्त किए हुए तथा प्रभु के करीबी नहीं थे? क्या झील के पार जाने में वे प्रभु की आज्ञा का पालन नहीं कर रहे थे? तो फिर उन्हें ऐसी बड़ी आँधी-तूफान का सामना क्यों करना पड़ रहा था?

   जीवन में आँधी-तूफान के अनुभव से कोई अछूता नहीं है। परन्तु जैसे वे शिष्य पहले आँधी से डरे परन्तु फिर उस आँधी के अनुभव के कारण ही प्रभु यीशु के प्रति उनकी श्रद्धा और भी अधिक बढ़ गई, उसी प्रकार जब हम अपने जीवनों में आँधी-तूफानों का सामना करते हैं, तो परमेश्वर और उसके कार्यों के प्रति हमारी समझ और गहरी हो जाती है। उन शिष्यों के मन में कौतहूल था, "यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?" (मरकुस 4:41)। हमारे जीवनों में आने वाले आँधी-तूफानों से हम सीख सकते हैं कि हमारे जीवन का कोई आँधी-तूफान प्रभु परमेश्वर को अपनी इच्छा पूरी करने से नहीं रोक सकता है (मरकुस 5:1)।

   चाहे हम यह नहीं समझ पाएं कि प्रभु परमेश्वर हमारे जीवनों में आँधी-तूफानों क्यों आने देता है, परन्तु हम उसके धन्यवादी हो सकते हैं कि उन में हो कर हम उसके बारे में और अधिक सीख सकते हैं। हर परिस्थिति हमें सिखाती है कि हमारा प्रभु परमेश्वर सदा हमारा ध्यान रखता है, हमारी देखभाल करता है, और हमारी भलाई ही के लिए कार्य करता है। - एल्बर्ट ली


हमारे जीवन के लंगर की सामर्थ्य आँधी-तूफानों में ही प्रकट होती है।

और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। - 1 पतरस 1:6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-5:1
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आँधी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं? 
Mark 5:1 और वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुंचे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 20-21
  • 2 तिमुथियुस 4


रविवार, 29 अक्टूबर 2017

सचेत


   बचपन में मैं अपने माता-पिता के साथ अपनी पर-नानी से, जो एक फार्म के निकट रहतीं थीं, मिलने गई। उनके घर का आहता चारों ओर कटीले तारों की बाड़ से घिरा हुआ था, जिसमें बिजली का संचार रहता था, जिससे कि फ़ार्म की गाएं घास चरने के लिए उनके घर के आहते में नहीं गुस आएं। मैंने अपने माता-पिता से बाहर जाकर खेलने की अनुमति माँगी तो उन्होंने अनुमति देते हुए कहा कि मैं बाड़े के निकट सचेत रहूँ, क्योंकि उसे छू लेने से मुझे बिजली का झटका लग जाएगा। दुर्भाग्यवश मैंने उनकी यह चेतावनी नज़रन्दाज़ कर दी और उस बाड़ को छू लिया; तुरंत ही मुझे बिजली का ज़ोर का झटका लगा, ऐसा जो एक गाए को सबक सिखाने लायक था। मैंने तब समझा कि मेरे माता-पिता ने जब मुझे सचेत किया था तो वह मेरी भलाई के लिए था, क्योंकि वे मुझसे प्रेम करते हैं और मुझे किसी हानि में पड़ते हुए देखना नहीं चाहते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई इस्त्राएल की ऐतिहासिक घटनओं में हम पाते हैं कि जब परमेश्वर ने इस्त्राएलियों को मूर्तियाँ बनाते और उनकी उपासना करते हुए देखा, तो उन्हें इसके विरुध्द बारंबार सचेत किया, "और उनके पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने बड़ा यत्न कर के अपने दूतों से उन के पास कहला भेजा, क्योंकि वह अपनी प्रजा और अपने धाम पर तरस खाता था" (2 इतिहास 36:15)। परमेश्वर ने उन से अपने नबी यिर्मयाह द्वारा भी बातें कीं, परन्तु उन इस्त्राएलियों ने उत्तर दिया, "...ऐसा नहीं होने का, हम तो अपनी ही कल्पनाओं के अनुसार चलेंगे और अपने बुरे मन के हठ पर बने रहेंगे" (यिर्मयाह 18:12)। इस कारण परमेश्वर ने उन्हें नबूकद्नेस्सर के हाथ में पड़ने दिया, और नबूकद्नेस्सर ने यरुशलेम को नष्ट कर दिया तथा उसके अधिकांश लोगों को बन्दी बनाकर ले गया।

   हो सकता है कि आज परमेश्वर आपको आपके जीवन के किसी पाप के विषय में सचेत कर रहा है। यदि ऐसा है तो उत्साहित हों, क्योंकि यह इस बात का प्रमाण है कि वह आप से प्रेम करता है (इब्रानियों 12:5-6), और आपको हानि से दूर रखना चाहता है। परमेश्वर ही है जो यह जानता है कि आगे क्या रखा है और आने वाली समस्याओं से हमें सुरक्षित रखना चाहता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की चेतावनियाँ हमारी रक्षा करने के लिए होती हैं, हमें दण्ड देने के लिए नहीं।

और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों के समान दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हिम्मत न छोड़। क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। - इब्रानियों 12:5-6

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 18:1-12
Jeremiah 18:1 यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, उठ कर कुम्हार के घर जा, 
Jeremiah 18:2 और वहां मैं तुझे अपने वचन सुनवाऊंगा। 
Jeremiah 18:3 सो मैं कुम्हार के घर गया और क्या देखा कि वह चाक पर कुछ बना रहा है! 
Jeremiah 18:4 और जो मिट्टी का बासन वह बना रहा था वह बिगड़ गया, तब उसने उसी का दूसरा बासन अपनी समझ के अनुसार बना दिया। 
Jeremiah 18:5 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, हे इस्राएल के घराने, 
Jeremiah 18:6 यहोवा की यह वाणी है कि इस कुम्हार के समान तुम्हारे साथ क्या मैं भी काम नहीं कर सकता? देख, जैसा मिट्टी कुम्हार के हाथ में रहती है, वैसा ही हे इस्राएल के घराने, तुम भी मेरे हाथ में हो। 
Jeremiah 18:7 जब मैं किसी जाति वा राज्य के विषय कहूं कि उसे उखाड़ूंगा वा ढा दूंगा अथवा नाश करूंगा, 
Jeremiah 18:8 तब यदि उस जाति के लोग जिसके विषय मैं ने कह बात कही हो अपनी बुराई से फिरें, तो मैं उस विपत्ति के विषय जो मैं ने उन पर डालने को ठाना हो पछताऊंगा। 
Jeremiah 18:9 और जब मैं किसी जाति वा राज्य के विषय कहूं कि मैं उसे बनाऊंगा और रोपूंगा; 
Jeremiah 18:10 तब यदि वे उस काम को करें जो मेरी दृष्टि में बुरा है और मेरी बात न मानें, तो मैं उस भलाई के विष्य जिसे मैं ने उनके लिये करने को कहा हो, पछताऊंगा। 
Jeremiah 18:11 इसलिये अब तू यहूदा और यरूशलेम के निवासियों यह कह, यहोवा यों कहता है, देखो, मैं तुम्हारी हानि की युक्ति और तुम्हारे विरुध्द प्रबन्ध कर रहा हूँ। इसलिये तुम अपने अपने बुरे मार्ग से फिरो और अपना अपना चालचलन और काम सुधारो। 
Jeremiah 18:12 परन्तु वे कहते हैं, ऐसा नहीं होने का, हम तो अपनी ही कल्पनाओं के अनुसार चलेंगे और अपने बुरे मन के हठ पर बने रहेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 18-19
  • 2 तिमुथियुस 3


शनिवार, 28 अक्टूबर 2017

संपत्ति


   सितंबर 2011 के आरंभ में जंगल में लगी प्रचण्ड आग ने एक नगर के किनारे पर स्थित 600 घरों को जला कर राख कर दिया। इस घटना के कुछ सप्ताह पश्चात, एक स्थानीय अखबार में इससे संबंधित लेख छपा, जिसका शीर्षक था, "जिन्होंने सर्वाधिक खोया, वे उसपर ध्यान लगा रहे हैं जो नहीं खोया।" उस लेख में स्थानीय समाज के लोगों द्वारा उदार सहायता का वर्णन किया गया था। पड़ौसियों, मित्रों और स्थानीय समाज के लोगों से मिली इस सहायता-भावना की कीमत उस संपत्ति की कीमत से कहीं अधिक थी जिसे वे आग में गवाँ चुके थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों के लेखक ने प्रथम शताबदी के मसीही अनुयायियों को स्मरण दिलाया कि वे उस सताव को याद करें जिसे वे अपने विश्वास के जीवन के आरंभ में झेल चुके थे। कैसे, उन पर आई निन्दा और क्लेश में, वे अन्य मसीही विश्वासियों के साथ स्थिर खड़े रहे थे (इब्रानियों 10:32-33)। लेखक ने कहा, "क्योंकि तुम कैदियों के दुख में भी दुखी हुए, और अपनी संपत्ति भी आनन्द से लुटने दी; यह जान कर, कि तुम्हारे पास एक और भी उत्तम और सर्वदा ठहरने वाली संपत्ति है" (इब्रानियों 10:34)। उन मसीही विश्वासियों का ध्यान उस पर नहीं था जो उन्होंने खोया था, परन्तु अनन्त काल की वस्तुओं पर था; उस संपत्ति पर जो उनसे कभी छीनी नहीं जा सकती थी।

   प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा, "क्योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा" (मत्ती 6:21)। यदि हमारी संपत्ति सांसारिक है तो हमारा ध्यान भी सांसारिक वस्तुओं पर लगा रहेगा, और यदि हमारी संपत्ति स्वर्गीय है तो हमारा ध्यान भी स्वर्गीय वस्तुओं पर लगा रहेगा। जब हम अपने प्रभु परमेश्वर पर, और उसमें होकर जो कुछ हमें मिलता है, उसपर ध्यान लगाए रखते हैं तो सांसारिक संपत्ति की संभावित हानि से हम विचलित नहीं होंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


आज आपका ध्यान कौन सी संपत्ति पर है?

सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों 3:1-2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:32-39
Hebrews 10:32 परन्तु उन पहिले दिनों को स्मरण करो, जिन में तुम ज्योति पाकर दुखों के बड़े झमेले में स्थिर रहे। 
Hebrews 10:33 कुछ तो यों, कि तुम निन्‍दा, और क्‍लेश सहते हुए तमाशा बने, और कुछ यों, कि तुम उन के साझी हुए जिन की र्दुदशा की जाती थी। 
Hebrews 10:34 क्योंकि तुम कैदियों के दुख में भी दुखी हुए, और अपनी संपत्ति भी आनन्द से लुटने दी; यह जान कर, कि तुम्हारे पास एक और भी उत्तम और सर्वदा ठहरने वाली संपत्ति है। 
Hebrews 10:35 सो अपना हियाव न छोड़ो क्योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है। 
Hebrews 10:36 क्योंकि तुम्हें धीरज धरना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्छा को पूरी कर के तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ। 
Hebrews 10:37 क्योंकि अब बहुत ही थोड़ा समय रह गया है जब कि आने वाला आएगा, और देर न करेगा। 
Hebrews 10:38 और मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा। 
Hebrews 10:39 पर हम हटने वाले नहीं, कि नाश हो जाएं पर विश्वास करने वाले हैं, कि प्राणों को बचाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 15-17
  • 2 तिमुथियुस 2


शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

अवसर


   मैंने आज कुछ बहुत दुःखद शब्द सुने। दो मसीही विश्वासी एक ऐसे विषय पर चर्चा कर रहे थे जिस पर वे भिन्न विचार रखते थे। उनमें जो वरिष्ठ था, वह आत्मसन्तुष्ट लग रहा था और परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं का, दूसरे के जीवन में उसे दिखाई देने वाली कमियों पर प्रहार करने और उनकी छंटाई करने के लिए, एक हथियार के समान प्रयोग कर रहा था। वह दूसरा और दिखने में कनिष्ठ व्यक्ति उसके उपदेश से ऊबा हुआ और हतोत्साहित दिखाई दे रहा था। चर्चा के अन्त की ओर आने पर वरिष्ठ व्यक्ति ने दूसरे की प्रत्यक्ष अरुचि पर टिप्पणी करते हुए कहना आरंभ किया, "तुम पहले कितने इच्छुक हुआ करते थे" और फिर अचानक ही थम गया, और बोला "समझ में नहीं आता कि तुम चाहते क्या हो।"

   इस पर उस दूसरे और कनिष्ठ व्यक्ति ने कहा, "आप ने मेरे प्रति प्रेम दिखाने के अवसर को गवाँ दिया है। जितने समय से आप मुझे जानते हैं, ऐसा लगता है कि जिस एक बात की आप को चिंता रहती है, वह है मुझ में गलतियाँ निकालना। मुझे क्या चाहिए? मैं प्रभु यीशु को देखना चाहता हूँ - आप में और आपके द्वारा।"

   मैंने सोचा, यदि यह बात मुझ से कही गई होती तो मैं टूट कर बिखर गया होता। उस पल में मैंने समझ लिया कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा मुझ से कह रहा है कि मेरे जीवन में भी ऐसे अवसर आए हैं जब मैंने प्रेम प्रदर्शित करने के अवसर गवाँ दिए हैं। और मैं यह भी जानता हूँ कि कई लोग मेरे जीवन में भी प्रभु यीशु को नहीं देख सके हैं।

   प्रेरित पौलुस कहता है कि हम जो कुछ भी करते हैं, उसका आधारभूत कारण प्रेम ही होना चाहिए (1 कुरिन्थियों 13:1-4)। हम अपने जीवनों में ध्यान रखें कि मसीही व्यवहार एवं चरित्र को दिखाने का जब भी अगला अवसर आए तो हम उसे गवाँ न दें। - रैंडी किलगोर


प्रेम प्रदर्शन करना उपदेश देने से सदैव ही अधिक प्रभावी होता है।

हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। - 1 यूहन्ना 3:18

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी। 
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं। 
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। 
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 12-14
  • 2 तिमुथियुस 1


गुरुवार, 26 अक्टूबर 2017

हृदय में


   मैं डिजिटल पत्रिकाओं को पढ़ने की आदि होती जा रही हूँ, और ऐसा करना मुझे अच्छा भी लगता है क्योंकि इसके द्वारा मैं पेड़ों को कटने से बचाने में अपना थोड़ा सा योगदान दे रही हूँ। साथ ही मुझे अब उन पत्रिकाओं के डाक द्वारा आने की प्रतीक्षा भी नहीं करनी पड़ती है; छपते ही उनके डिजिटल संसकरण पढ़ने के लिए तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं। परन्तु मैं छपी हुई पत्रिकाओं की कमी अवश्य अनुभव करती हूँ, क्योंकि मुझे उनके चिकने चमकदार पन्नों पर ऊँगलियाँ फेरना, और उन में से अपनी पसन्द के भोजन बनाने की विधियाँ काट कर संजोना अच्छा लगता है।

   मेरे पास डिजिटल पुस्तकों को पढ़ने के अपने उपकरण में बाइबल का डिजिटल संसकरण भी है। परन्तु अभी भी मेरी सबसे पसन्दीदा बाइबल, छपी हुई बाइबल ही है, जिसे मैंने कई बार पढ़ा है और जिसमें मैंने कई स्थानों पर रेखांकन भी किया हुआ है। हम छपे हुए पन्नों का भविष्य तो नहीं जानते हैं, परन्तु एक बात अवश्य जानते हैं: परमेश्वर के वचन बाइबल का सर्वोत्तम स्थान न तो हमारे सेल फोन, और न ही पढ़ने के डिजिटल उपकरण हैं; और न ही उसे हमारी बिस्तर के निकट की मेज़ पर या फिर पुस्तकों की अलमारी में होना चाहिए।

   बाइबल में ही हम उसके सर्वोत्तम स्थान के विषय लिखा हुआ पाते हैं - हमारे हृदयों में; भजनकार ने लिखा: "मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं" (भजन 119:11)। किसी भी मनुष्य के लिए परमेश्वर के वचन पर मनन करने, परमेश्वर के बारे में और अधिक सीखने, उसके वचन को अपने व्यावाहरिक जीवन में अधिकाई से प्रयोग करते रहने से बढ़कर लाभदायक और कुछ नहीं है। इस जीवते, सच्चे, अटल और अपरिवर्त्नीय वचन का सर्वोत्तम स्थान हमारे हृदय की गहराईयाँ, हमारा प्राण, हमारी आत्मा है।

   हमारे पास बाइबल को न पढ़ने, उस पर मनन न करने, उसे स्मरण न करने, उसके अनुसार अपने जीवन को निर्देषित नहीं करने के अनेकों बहाने हो सकते हैं, परन्तु हम सबको इस जीवन संवारने और बनाने वाले वचन की आवश्यकता है। मेरी प्रार्थना है कि परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम उसके इस अमूल्य वचन को सर्वोत्तम संभव स्थान में रख सकें - अपने हृदय में! - कीला ओकोआ


परमेश्वर के वचन का सर्वोत्तम स्थान हमार हृदय है।

तेरी बातों के खुलने से प्रकाश होता है; उस से भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं। - भजन 119:130

बाइबल पाठ: भजन 119:9-16
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 9-11
  • 1 तिमुथियुस 6