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शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

गवाही

 

          प्रभु यीशु से मेरी मुलाक़ात होने से पहले, निकट संबंधों को लेकर मैं बहुत गहरी चोट खा चुकी थी, इसलिए और चोट पहुँचने के डर से मैं किसी के साथ घनिष्ठ नहीं होती थी। ऐलन से मेरे विवाह से पूर्व, मेरी माँ ही मेरी सबसे घनिष्ठ मित्र रही थीं। सात वर्ष के बाद, और लगभग तलाक की कगार पर खड़े हुए, मैं अपने छोटे से बेटे, ज़ेवियर, को लिए हुए एक चर्च सभा में गई। मैं जाकर चर्च से बाहर निकलने वाले दरवाज़े के पास बैठ गई, किसी पर भरोसा करने से डरती थी, किन्तु मुझे सहायता लेने की भी बहुत इच्छा थी।

          मैं प्रभु की धन्यवादी हूँ कि कुछ मसीही विश्वासियों ने मेरी ओर सहायता का हाथ बढ़ाया, हमारे परिवार के लिए प्रार्थना की, और मुझे सिखाया कि कैसे प्रार्थना और बाइबल अध्ययन के द्वारा मैं परमेश्वर के साथ संबंध में आ सकती हूँ, उसकी निकटता में बढ़ सकती हूँ। समय के साथ प्रभु यीशु और उसके अनुयायियों के प्रेम ने मेरे जीवन को बदल दिया।

          उस चर्च सभा में जाने के दो वर्ष के बाद, मैंने, ऐलन ने, और मेरे बेटे, ज़ेवियर ने बपतिस्मा लेने का आग्रह किया। इसके कुछ समय के बाद, हमारी एक साप्ताहिक बातचीत के दौरान, मेरी माँ ने कहा, “तुम बदल गई हो; मुझे भी यीशु के बारे में बताओ।” कुछ महीनों के बाद उन्होंने भी प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया।

          प्रभु यीशु मसीह जीवन बदल देते हैं, जैसे कि परमेश्वर के वचन बाइबल में हम शाऊल (पौलुस का पहला नाम) के बारे में देखते हैं जो कि आरंभिक मसीही मण्डलियों का सबसे कठोर सताने वाला था, जब तक कि उसकी मुलाक़ात प्रभु यीशु से नहीं हुई (प्रेरितों 9:1-5)। उस मुलाक़ात के बाद, कुछ लोगों ने पौलुस की मसीह यीशु के बारे में सीखने में सहायता की (पद 17, 19), और उसके इस प्रबल परिवर्तन ने उसके द्वारा पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से दी जानी वाले शिक्षाओं को और भी अधिक विश्वसनीय बना दिया (पद 20-22)।

          हो सकता है कि प्रभु यीशु के साथ हमारी पहली व्यक्तिगत मुलाक़ात उतनी नाटकीय न हो जितनी शाऊल (पौलुस) की थी, और हमारे जीवन में बदलाव उसके समान तीव्र गति से तथा प्रबल न हों। लेकिन फिर भी जब लोग देखेंगे कि मसीह यीशु का प्रेम हमें किस प्रकार से बदलता जा रहा है, तो इससे हमें अपने उद्धार और बदले हुए जीवन तथा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के विषय गवाही देने के अवसर भी मिलेंगे, जो औरों के जीवनों में भी बदलाव ला सकेंगे। - सोहचील डिक्सन

 

मसीह यीशु द्वारा बदले गए जीवन को, उस बदलाव की गवाही देते रहना चाहिए।


मैं तो पहिले निन्दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे। - 1 तीमुथियुस 1:13

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:1-22

प्रेरितों 9:1 और शाऊल जो अब तक प्रभु के चेलों को धमकाने और घात करने की धुन में था, महायाजक के पास गया।

प्रेरितों 9:2 और उस से दमिश्क की आराधनालयों के नाम पर इस अभिप्राय की चिट्ठियां मांगी, कि क्या पुरुष, क्या स्त्री, जिन्हें वह इस पंथ पर पाए उन्हें बान्ध कर यरूशलेम में ले आए।

प्रेरितों 9:3 परन्तु चलते चलते जब वह दमिश्क के निकट पहुंचा, तो एकाएक आकाश से उसके चारों ओर ज्योति चमकी।

प्रेरितों 9:4 और वह भूमि पर गिर पड़ा, और यह शब्द सुना, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?

प्रेरितों 9:5 उसने पूछा; हे प्रभु, तू कौन है? उसने कहा; मैं यीशु हूं; जिसे तू सताता है।

प्रेरितों 9:6 परन्तु अब उठ कर नगर में जा, और जो कुछ करना है, वह तुझ से कहा जाएगा।

प्रेरितों 9:7 जो मनुष्य उसके साथ थे, वे चुपचाप रह गए; क्योंकि शब्द तो सुनते थे, परन्तु किसी को दखते न थे।

प्रेरितों 9:8 तब शाऊल भूमि पर से उठा, परन्तु जब आँखें खोलीं तो उसे कुछ दिखाई न दिया और वे उसका हाथ पकड़ के दमिश्क में ले गए।

प्रेरितों 9:9 और वह तीन दिन तक न देख सका, और न खाया और न पीया।

प्रेरितों 9:10 दमिश्क में हनन्याह नाम एक चेला था, उस से प्रभु ने दर्शन में कहा, हे हनन्याह! उसने कहा; हां प्रभु।

प्रेरितों 9:11 तब प्रभु ने उस से कहा, उठ कर उस गली में जा जो सीधी कहलाती है, और यहूदा के घर में शाऊल नाम एक तारसी को पूछ ले; क्योंकि देख, वह प्रार्थना कर रहा है।

प्रेरितों 9:12 और उसने हनन्याह नाम एक पुरुष को भीतर आते, और अपने ऊपर आते देखा है; ताकि फिर से दृष्टि पाए।

प्रेरितों 9:13 हनन्याह ने उत्तर दिया, कि हे प्रभु, मैं ने इस मनुष्य के विषय में बहुतों से सुना है, कि इस ने यरूशलेम में तेरे पवित्र लोगों के साथ बड़ी बड़ी बुराइयां की हैं।

प्रेरितों 9:14 और यहां भी इस को महायाजकों की ओर से अधिकार मिला है, कि जो लोग तेरा नाम लेते हैं, उन सब को बान्ध ले।

प्रेरितों 9:15 परन्तु प्रभु ने उस से कहा, कि तू चला जा; क्योंकि यह, तो अन्यजातियों और राजाओं, और इस्राएलियों के सामने मेरा नाम प्रगट करने के लिये मेरा चुना हुआ पात्र है।

प्रेरितों 9:16 और मैं उसे बताऊंगा, कि मेरे नाम के लिये उसे कैसा कैसा दुख उठाना पड़ेगा।

प्रेरितों 9:17 तब हनन्याह उठ कर उस घर में गया, और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, हे भाई शाऊल, प्रभु, अर्थात यीशु, जो उस रास्ते में, जिस से तू आया तुझे दिखाई दिया था, उसी ने मुझे भेजा है, कि तू फिर दृष्टि पाए और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाए।

प्रेरितों 9:18 और तुरन्त उस की आंखों से छिलके से गिरे, और वह देखने लगा और उठ कर बपतिस्मा लिया; फिर भोजन कर के बल पाया।

प्रेरितों 9:19 और वह कई दिन उन चेलों के साथ रहा जो दमिश्क में थे।

प्रेरितों 9:20 और वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है।

प्रेरितों 9:21 और सब सुनने वाले चकित हो कर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्ध कर महायाजकों के पास ले आए?

प्रेरितों 9:22 परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहने वाले यहूदियों का मुंह बन्द करता रहा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 39-40 
  • मत्ती 23:23-39

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2021

परिवर्तन

 

          अमेरिका के जनगणना विभाग के अनुसार, एक सामान्य अमरीकी व्यक्ति, अपने जीवन काल में औसतन ग्यारह से बारह बार रहने का स्थान परिवर्तित करता है। हाल ही के एक वर्ष में 280 लाख लोगों ने अपने सामान बांधे, स्थान परिवर्तन किया, और फिर से नए स्थान पर सामान खोलकर लगाया।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इस्राएल के चालीस वर्ष की जंगल की यात्रा में परमेश्वर की उपस्थिति का बादल और आग का खम्भा उन्हें उनके नए निवासस्थान की यात्रा में एक से दूसरे स्थान को लिए चला, और उन्हें बार-बार अपना, और साथ ही मिलाप वाले तम्बू का भी जहाँ पर परमेश्वर मूसा के साथ मिला करता था (निर्गमन 25:22) सामान बांधना और खोलना पड़ता था।

          अनेकों वर्ष के बाद प्रभु यीशु ने इस्राएल के स्थान परिवर्तन करते रहने के अनुभव को संपूर्ण अर्थ प्रदान किया। अब, प्रभु परमेश्वर बादल और आग के खम्भे में से निकलकर सदेह उनके मध्य आ गया था। जब प्रभु ने कहा “मेरे पीछे हो लो” (मत्ती 4:19) तो उसने यह भी दिखाना आरंभ कर दिया कि सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन तो हृदय के मार्ग का होता है। मित्रों और शत्रुओं, दोनों को ही अपने क्रूस तक लाने के द्वारा प्रभु ने दिखाया कि हम पापी मनुष्यों को हमारे पापों से छुड़ाने और बचाने के लिए वह किस सीमा तक गया।

          निवास स्थान के परिवर्तन के समान हृदय का परिवर्तन भी अस्त-व्यस्त कर देने वाला हो सकता है। परन्तु किसी दिन हम अपने स्वर्गीय पिता के घर की किसी खिड़की से झाँक कर देखेंगे कि परिवर्तन के उस सारे मार्ग में हमारा मार्गदर्शक, सहायक, और साथी स्वयं प्रभु ही था। - मार्ट डीहान

 

प्रभु, चाहे परिवर्तन हमने अस्त-व्यस्त करे, परन्तु हमें अपनी ओर परिवर्तित अवश्य करें।


सुन, मैं एक दूत तेरे आगे आगे भेजता हूं जो मार्ग में तेरी रक्षा करेगा, और जिस स्थान को मैं ने तैयार किया है उस में तुझे पहुंचाएगा। - निर्गमन 23:20

बाइबल पाठ: गिनती 9:15-23

गिनती 9:15 जिस दिन निवास जो साक्षी का तम्बू भी कहलाता है खड़ा किया गया, उस दिन बादल उस पर छा गया; और संध्या को वह निवास पर आग सा दिखाई दिया और भोर तक दिखाई देता रहा।

गिनती 9:16 और नित्य ऐसा ही हुआ करता था; अर्थात दिन को बादल छाया रहता, और रात को आग दिखाई देती थी।

गिनती 9:17 और जब जब वह बादल तम्बू पर से उठ जाता तब इस्राएली प्रस्थान करते थे; और जिस स्थान पर बादल ठहर जाता वहीं इस्राएली अपने डेरे खड़े करते थे।

गिनती 9:18 यहोवा की आज्ञा से इस्राएली कूच करते थे, और यहोवा ही की आज्ञा से वे डेरे खड़े भी करते थे; और जितने दिन तक वह बादल निवास पर ठहरा रहता उतने दिन तक वे डेरे डाले पड़े रहते थे।

गिनती 9:19 और जब जब बादल बहुत दिन निवास पर छाया रहता तब इस्राएली यहोवा की आज्ञा मानते, और प्रस्थान नहीं करते थे।

गिनती 9:20 और कभी कभी वह बादल थोड़े ही दिन तक निवास पर रहता, और तब भी वे यहोवा की आज्ञा से डेरे डाले पड़े रहते थे और फिर यहोवा की आज्ञा ही से प्रस्थान करते थे।

गिनती 9:21 और कभी कभी बादल केवल संध्या से भोर तक रहता; और जब वह भोर को उठ जाता था तब वे प्रस्थान करते थे, और यदि वह रात दिन बराबर रहता तो जब बादल उठ जाता तब ही वे प्रस्थान करते थे।

गिनती 9:22 वह बादल चाहे दो दिन, चाहे एक महीना, चाहे वर्ष भर, जब तक निवास पर ठहरा रहता तब तक इस्राएली अपने डेरों में रहते और प्रस्थान नहीं करते थे; परन्तु जब वह उठ जाता तब वे प्रस्थान करते थे।

गिनती 9:23 यहोवा की आज्ञा से वे अपने डेरे खड़े करते, और यहोवा ही की आज्ञा से वे प्रस्थान करते थे; जो आज्ञा यहोवा मूसा के द्वारा देता था उसको वे माना करते थे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 36-38 
  • मत्ती 23:1-22

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

केंद्र

 

          कड़ाके की सर्दी के एक दिन क्रिस्टा झील के किनारे खड़ी हुई बर्फ से ढके हुए लाईटहाउस के सुन्दर दृश्य को निहार रही थी, और उसके मन में उस दृश्य को अपने फोन के कैमरे में उतर लेने का विचार आया। तस्वीरें लेने के लिए फोन को बाहर निकालते समय, उसकी ऐनक पर धुंध जम गई, और उसे कुछ भी साफ़ दिखना बन्द हो गया। क्रिस्टा ने उस लाईटहाउस की ओर कैमरा कर के तीन भिन्न कोणों से उसकी तस्वीरें खींच लीं। बाद में उन तस्वीरों को देखते समय उसे पता चला कि उसके फोन का कैमरा तो सेल्फी लेने के लिए सेट किया हुआ था, इसलिए तीनों तस्वीरों में उसे केवल अपना ही चेहरा दिखाए दे रहा था। उसने हँसते हुए कहा, “मेरे ध्यान का केंद्र तो मैं स्वयं ही थी, इसलिए मुझे सिर्फ मैं ही दिखाई दी।” क्रिस्टा की उस गलती से मैं उस जैसी ही गलती, जो हम करते रहते हैं, के बारे में सोचने लगी – हम कभी-कभी अपने ही पर इतना केन्द्रित हो जाते हैं कि परमेश्वर की योजना के बड़े दृश्य को अनदेखा करने लग जाते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला जानता था कि उसकी सेवकाई का केंद्र वह स्वयं नहीं था। वह अपनी सेवकाई के आरंभ से ही जानता था कि उसकी बुलाहट और कार्य औरों को परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु की ओर संकेत करना था। जब उसने प्रभु यीशु को अपने तथा अपने शिष्यों के ओर आते देखा, तो उसने अपने शिष्यों से कहा “देखो परमेश्वर का मेमना” (यूहन्ना 1:29)। उसने उन से यह भी कहा, कि वह इसलिए बपतिस्मा देता हुआ आया था जिससे कि प्रभु प्रकट हो जाए। बाद में जब यूहन्ना के शिष्यों ने उससे कहा कि यीशु के अनुयायी बहुत बढ़ने लगे हैं, तो यूहन्ना ने उन्हें याद दिलाया कि उसने उनसे पहले ही कह दिया था कि वह मसीहा नहीं है, परन्तु उसका मार्ग तैयार करने के लिए भेजा गया था, और यह अवश्य होना था कि प्रभु बढ़े और वह घटे।

          हमारे जीवनों का केंद्र भी प्रभु यीशु और उससे अपने पूरे मन से प्रेम करना, उसके गवाह बनकर उसके लिए जीवन जीना हो। - ऐनी सेटास

 

हे प्रभु मेरा ध्यान मुझ पर से हटा कर अपने पर केन्द्रित कर।


पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। - 1 पतरस 3:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3:22-35

यूहन्ना 3:22 इस के बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा।

यूहन्ना 3:23 और यूहन्ना भी शालेम के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था। क्योंकि वहां बहुत जल था और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे।

यूहन्ना 3:24 क्योंकि यूहन्ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था।

यूहन्ना 3:25 वहां यूहन्ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ।

यूहन्ना 3:26 और उन्होंने यूहन्ना के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं।

यूहन्ना 3:27 यूहन्ना ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।

यूहन्ना 3:28 तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूं।

यूहन्ना 3:29 जिस की दुलहन है, वही दूल्हा है: परन्तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है।

यूहन्ना 3:30 अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं।

यूहन्ना 3:31 जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है; और पृथ्वी की ही बातें कहता है: जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।

यूहन्ना 3:32 जो कुछ उसने देखा, और सुना है, उसी की गवाही देता है; और कोई उस की गवाही ग्रहण नहीं करता।

यूहन्ना 3:33 जिसने उस की गवाही ग्रहण कर ली उसने इस बात पर छाप दे दी कि परमेश्वर सच्चा है।

यूहन्ना 3:34 क्योंकि जिसे परमेश्वर ने भेजा है, वह परमेश्वर की बातें कहता है: क्योंकि वह आत्मा नाप नापकर नहीं देता।

यूहन्ना 3:35 पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब वस्तुएं उसके हाथ में दे दी हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 34-35 
  • मत्ती 22:23-46

बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

परिपक्व

 

          अभिनेत्री डाएन क्रूगर को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया गया, जिससे वे घर-घर में बहुत प्रसिद्धि पा सकती थीं। उन्हें एक ऐसी जवान पत्नी और माँ की भूमिका निभानी थी, जिसके पति और बच्चे की मृत्यु हो गई है। किन्तु उन्होंने अपने जीवन में कभी भी ऐसी दुखद स्थिति अनुभव नहीं की थी, इसलिए उन्हें नहीं लग रहा था कि वे इस भूमिका को ठीक से निभा पाएँगी। फिर भी उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, और तैयारी करने के लिए वे ऐसे लोगों की सभाओं में सम्मिलित होने लगीं, जो अत्यधिक दुःख या वियोग के अनुभवों में से होकर निकले थे या निकल रहे थे।

          उन सभाओं में भाग लेते समय, आरंभ में तो उन लोगों के अनुभवों को सुनने पर वे अपने सुझाव और विचार उनके साथ बाँटती थीं, क्योंकि हम में से अधिकांश के समान, वे उन दुखी लोगों की सहायता करना चाहती थीं। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने बोलना बन्द कर दिया, और बस ध्यान से उनकी व्यथा और पीड़ा की कहानियों को सुनने लगीं। जब उन्होंने ऐसा करना आरम्भ किया, जब उन्होंने अपना मुँह बन्द कर के अपने कान और अपना मन खोल लिया, तब ही वे वास्तव में उनके दुःख को समझ सकीं, उनकी परिस्थितियों और प्रतिक्रियाओं का व्यक्तिगत रीति से एहसास कर सकीं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह नबी का अपने लोगों के विरुद्ध अभियोग था कि वे परमेश्वर की आवाज़ सुनने के लिए अपने कानों का प्रयोग करने से इनकार करते जा रहे थे। नबी ने कटु शब्दों में उन्हें “मूर्ख और निर्बुद्धि लोग” कहा (यिर्मयाह 5:21)। परमेश्वर हमारे जीवनों में निरंतर कार्य करता रहता है, हम से प्रेम, मार्गदर्शन, प्रोत्साहन, और सावधानी बरतने के शब्द बोलता रहता है। हमारे पिता परमेश्वर की इच्छा यही है कि हम उससे सीखें और परिपक्व होते जाएँ। उसने हमें इसके लिए आवश्यक साधन, जैसे कि कान, विवेक, मन, बुद्धि आदि प्रदान किए हैं।

          हमारे लिए प्रश्न यह है कि क्या हम परमेश्वर द्वारा दिए गए साधनों का उपयोग परमेश्वर की बात सुनने के लिए करते हैं कि नहीं? सुन के मानने से ही सीखना और परिपक्वता की ओर बढ़ना हो सकता है। - जॉन ब्लेज़

 

यदि हम परमेश्वर की सुनें और मानें तो जीवन सहज तथा आशीषित हो सकता है।


भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे! - व्यवस्थाविवरण 5:29

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 5:18-23

यिर्मयाह 5:18 तौभी, यहोवा की यह वाणी है, उन दिनों में भी मैं तुम्हारा अन्त न कर डालूंगा।

यिर्मयाह 5:19 और जब तुम पूछोगे कि हमारे परमेश्वर यहोवा ने हम से ये सब काम किस लिये किए हैं, तब तुम उन से कहना, जिस प्रकार से तुम ने मुझ को त्यागकर अपने देश में दूसरे देवताओं की सेवा की है, उसी प्रकार से तुम को पराये देश में परदेशियों की सेवा करनी पड़ेगी।

यिर्मयाह 5:20 याकूब के घराने में यह प्रचार करो, और यहूदा में यह सुनाओ:

यिर्मयाह 5:21 हे मूर्ख और निर्बुद्धि लोगों, तुम जो आंखें रहते हुए नहीं देखते, जो कान रहते हुए नहीं सुनते, यह सुनो।

यिर्मयाह 5:22 यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम लोग मेरा भय नहीं मानते? क्या तुम मेरे सम्मुख नहीं थरथराते? मैं ने बालू को समुद्र का सिवाना ठहराकर युग युग का ऐसा बान्ध ठहराया कि वह उसे लांघ न सके; और चाहे उसकी लहरें भी उठें, तौभी वे प्रबल न हो सकें, था जब वे गरजें तौभी उसको न लांघ सकें।

यिर्मयाह 5:23 पर इस प्रजा का हठीला और बलवा करने वाला मन है; इन्होंने बलवा किया और दूर हो गए हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 31-33 
  • मत्ती 22:1-22